Wednesday, July 8, 2026 7:14 pm

नक्सलियों की मांद में घुसे जवानों ने इंटरस्टेट रेड कॉरिडोर में माओवादियों के स्मारक को किया नेस्तनाबूत

बीजापुर छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बल के जवानों ने आज नक्सलियों की मांद में घुसकर उनका मनोबल तोड़ दिया है. प्रदेश के अंतिम छोर और तेलंगाना से सटे पुजारी कांकेर में नक्सलियों का कई फीट ऊंचे स्मारक को जवानों ने ध्वस्त कर दिया है. यह स्तंभ दोनों राज्यों की सीमा पर पुजारी कांकेर के तामील भट्टी में स्थित था और नक्सलियों के आतंक के चलते इसे  इंटरस्टेट रेड कारीडोर के रूप चर्चित था, जिसे आज जवानों ने तोड़ दिया है. बता दें, बीते दिनों इसी इलाके में जवानों ने नक्सलियों से मुठभेड़ में 12 हार्डकोर नक्सली मार गिराए थे. इसके साथ ही सुरक्षा बल के जवानों ने हाल ही में यहां (पुजारी कांकेर) में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस कैंप भी स्थापित किया है. recent visitors 27

एमके स्टालिन पर बरसे अमित शाह, मेडिकल, इंजीनियरिंग की शिक्षा तमिल में देने की कही बात

तमिलनाडु केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन से राज्य में तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल की शिक्षा शुरू करने को कहा। भाषा के मुद्दे विशेष रूप से स्टालिन के हिंदी विरोध को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बदलाव किए और अब यह सुनिश्चित किया है कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के उम्मीदवार अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा दे सकें। चेन्नई से करीब 70 किलोमीटर दूर रानीपेट में आरटीसी थक्कोलम में सीआईएसएफ के 56वें ​​स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि परीक्षा में उत्तर पुस्तिका तमिल में भी लिखी जा सकेगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से छात्रों के लाभ के लिए राज्य में तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा शुरू करने की अपील करता हूं।'' 'तमिलनाडु ने हर क्षेत्र में भारतीय संस्कृति को मजबूत किया' उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की संस्कृति ने भारत की सांस्कृतिक धारा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शाह ने कहा, ‘‘चाहे वह प्रशासनिक सुधार हो, आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करना हो, शिक्षा हो या राष्ट्र की एकता और अखंडता हो, तमिलनाडु ने हर क्षेत्र में भारतीय संस्कृति को मजबूत किया है।'' इस कार्यक्रम में अर्द्धसैनिक बल के टुकड़ियों का ‘मार्च पास्ट', योग प्रदर्शन और कमांडो अभियान का प्रदर्शन किया गया।   recent visitors 39

संघर्ष से सशक्त नेतृत्व की ओर अग्रसर जनजातीय महिलाएं: मंत्री संपतिया उइके

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह अवसर है उन उपलब्धियों को सराहने का, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में हासिल हुई हैं। साथ ही, यह दिन हमें यह सोचने का अवसर भी प्रदान करता है कि आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। भारत जैसे देश में, जहाँ नारी को शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है, वहाँ जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। जनजातीय महिलाएँ अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान की प्रतीक रही हैं। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के कारण जनजातीय वर्ग की महिलायें लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार इस दूरी को समाप्त कर रही है। उद्देश्य यह नहीं कि वे केवल लाभार्थी बनें, बल्कि वे समाज की निर्णायक शक्ति बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करें। सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम सरकार की सोच यह नहीं कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ मिले, बल्कि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें, अपने व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में मजबूती से खड़ी हो सकें। प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत जनजातीय महिलाओं को उनके द्वारा संग्रहीत वन उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सशक्त तंत्र विकसित किया गया है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे अब स्वयं का व्यवसाय भी कर रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने बालिका शिक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा कर रही है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को स्व-रोजगार हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे खुद के व्यवसाय की स्थापना कर सकें। मध्यप्रदेश सरकार भी इस दिशा में भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है। पीछे नहीं है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में राज्य सरकार महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री आदिवासी महिला उद्यमिता योजना ने जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर घर जल योजना ने जल संकट से जूझ रही ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के लिए राहत प्रदान की है, जिससे उनका दैनिक जीवन सरल हुआ है। पेसा अधिनियम ने ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती प्रदान की है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग और जागरूक हो रही हैं। अब वे अपनी ग्राम सभाओं में न केवल सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि अपने समुदाय की नीतियाँ तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। संघर्ष से सशक्त नेतृत्व तक का सफर मैं स्वयं एक जनजातीय महिला हूँ। जीवन में संघर्ष मेरे लिए नया नहीं है। बचपन में परिवार की मदद के लिए ईंट-भट्टों पर मजदूरी से लेकर सरपंच, जिला पंचायत अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य और अब मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन मेरी पार्टी का संगठनात्मक सशक्तिकरण और मजबूत नेतृत्व ही है, जिसने मुझे और हमारे समाज की लाखों महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए। मेरी पार्टी ने सदैव जनजातीय समाज को प्राथमिकता दी है। जब देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मिलीं, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे जनजातीय समाज की उपलब्धि थी। यह इस बात का प्रमाण है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलें, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। महिला सशक्तिकरण कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, यह एक निरंतर चलने वाली यात्रा है। यह केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार है। महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय लेने में भागीदार बनाना ही सही मायनों में सशक्तिकरण है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आज, जब दुनिया नारी शक्ति का सम्मान कर रही है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज के सबसे वंचित वर्ग- जनजातीय और अनुसूचित जाति की महिलाएँ-विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। मेरा सभी माताओं, बहनों और बेटियों से आग्रह है कि वे सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएँ, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएँ और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें। जब महिलाएँ आगे बढ़ेंगी, तो समाज और देश भी नई ऊँचाइयों को छुएगा।   recent visitors 35

सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त भारत: मंत्री कृष्णा गौर

भोपाल भारतीय संस्कृति में नारी को सदा ही शक्ति, विद्या और सृजन का प्रतीक माना गया है। भारतीय परंपरा का मूल "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः" की अवधारणा है। हमारी प्राचीन सभ्यता में गार्गी, मैत्रेयी से रानी चैनम्मा, पुण्यश्लोका रानी अहिल्याबाई होल्कर और वीरांगना लक्ष्मीबाई जैसी नारियों ने न केवल समाज को दिशा दी, बल्कि अपने समय में नेतृत्व का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को हमेशा सम्मान और उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल में वेदाध्ययन, राजनीति और धर्मशास्त्र में महिलाओं की भागीदारी देखी गई। देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी और माँ दुर्गा के रूप में नारी को विद्या, समृद्धि और शक्ति का स्वरूप माना गया है। इतिहास गवाह है कि महिलाओं ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज की महिलाएँ सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल और व्यापार में भारतीय महिलाओं ने अपनी सशक्त पहचान बनाई है। कल्पना चावला, पीटी ऊषा, पी.वी. सिंधु, किरण मजूमदार शॉ, फाल्गुनी नायर, साइना नेहवाल, एमसी मैरीकॉम और नंदिनी हरिनाथ जैसी महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों हासिल की हैं। मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़कर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ चला रही है। इससे वे आत्मनिर्भर बन रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाएँ प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक योजनाएँ शुरू की गईं। इनसे समाज में क्रांतिकारी बदलाव आया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना. मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, महिला हेल्पलाइन एवं स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाएँ महिलाओं के जीवन को बेहतर बना रही हैं। इसके अलावा, केन्द्र सरकार ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया है। हाल ही में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पास किया गया। इससे अब लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। यह एक ऐतिहासिक कदम है जो महिला नेतृत्व को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा। महिलाएँ आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। सरकार की नीतियों, योजनाओं और समाज के बदलते दृष्टिकोण ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। भारतीय संस्कृति में सदैव नारी को सम्मान मिला है। वर्तमान में केन्द्र सरकार की नीतियों से महिलाओं को और अधिक सशक्त बनने का अवसर मिल रहा है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प लें ताकि वे आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकें।   recent visitors 27

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रव्यापी मेगा एमएसएमई आउटरीच अभियान का शुभारंभ

मुंबई,  यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रव्यापी मेगा एमएसएमई आउटरीच अभियान का शुभारंभ किया गया है. यह अभियान सप्ताहभर चलने वाली पहल है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाना, उद्यमशीलता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है. इस अभियान का शुभारंभ बेंगलुरु में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ए. मणिमेखलै द्वारा किया गया, जिन्होंने वित्तीय सहायता, डिजिटल समाधान और जागरूकता पहलों के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बैंक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया. उन्होंने बताया: "यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एमएसएमई के लिए वित्तीय समावेशन और समग्र समर्थन के लिए प्रतिबद्धता दृढ़ है. इस राष्ट्रव्यापी अभियान के माध्यम से, हमारा लक्ष्य एमएसएमई की वृद्धि और संवहनीयता सुनिश्चित करते हुए प्रौद्योगिकी और सरकारी पहलों द्वारा समर्थित वित्तीय उत्पादों तक निर्बाध एक्सेस प्रदान करना है. हमारा व्यापक उत्पाद सूट ऋण प्राप्त करने में ग्राहक अनुभव को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और हम एक सक्षम इकोसिस्टम को बढ़ावा देना जारी रखते हैं जो भारत के एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करता है, जो विकसित भारत के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देता है." इस पहल के भाग के रूप में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अपने उद्यमी-अनुकूल एमएसएमई उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसमें त्वरित और परेशानी मुक्त ऋण के एक्सेस के लिए एमएसएमई सुपरफास्ट, युवा उद्यमियों के लिए युवाशक्ति और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए यूनियन नारी शक्ति शामिल हैं. बैंक वित्तीय समावेशन को बढ़ाने और छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने के लिए प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), पीएम विश्वकर्मा, प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), और प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) जैसी सरकारी वित्तीय योजनाओं को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है. इस अभियान में उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और स्थानीय कारोबार की ओर से उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई है. छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम में, पात्र उधारकर्ताओं को कार्यक्रम के दौरान ही स्वीकृति पत्र वितरित किए गए, जिसके माध्यम से आर्थिक विकास और वित्तीय एक्सेसिबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बैंक की प्रतिबद्धता सुदृढ़ की गई. एमएसएमई आउटरीच अभियान देश भर में 157 स्थानों पर चलाया जा रहा है, जहाँ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा खुदरा कासा जमा खाते खोलने की सुविधा भी प्रदान की जा रही है, जिससे बैंक के ग्राहक बढ़ाने और वित्तीय समावेशन प्रयासों की मजबूती सुनिश्चित की जा रही है. इस पहल के माध्यम से, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया छोटे कारोबारों के उत्थान,क्रेडिट के एक्सेस को सुविधाजनक बनाने और एमएसएमई के लिए बनाए गए वित्तीय समाधानों के बारे में जागरूक बनाने के लिए अपने समर्पण की पुष्टि करता है. उद्यमियों और वित्तीय सेवाओं के बीच एक लिंक स्थापित करके, बैंक भारत के एमएसएमई  को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है. recent visitors 64

नक्सल उन्मूलन नीति के तहत 40 लाख के इनामी 7 महिला समेत 11 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में 40 लाख के इनामी 7 महिला समेत 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. ये सभी नक्सली उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन में एक्टिव थे. आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि 25 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया और उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जाएगी. इस दौरान जिला पुलिस बल, आईटीबीपी औऱ बीएसएफ के अधिकारी मौजूद रहे. माड़ बचाओ अभियान से प्रभावित होकर और नक्सली की क्रुर विचारधारा से तंग आकर 11 नक्सलियों ने एक साथ बिना हथियार पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है. जानकारी के मुताबिक, आत्ससमर्पण करने वालों में 2 नक्सली DVCM मेंबर और कंपनी नंबर 1 के कमांडर रह चुके हैं. इन ंसभी पर कुल 40 लाख रूपये का इनाम घोषित किया गया था. आत्मसमर्पित के नाम/पद 1. सन्नू उर्फ मंगेश उपेण्डी पिता स्व. रामलाल उपेण्डी उम्र 38 वर्ष निवासी मलमेटा पंचायत एड़ानार तहसील अन्तागढ़ थाना ताड़ोकी जिला कांकेर (छ.ग.) पद- सीवॉयपीसी कम्पनी नम्बर 06, डीव्हीसीएम कमाण्डर, ईनामी-8 लाख. 2. सन्तु उर्फ बदरू वड़दा पिता उम्र 35 वर्ष निवासी भटनार पंचायत कुतुल थाना कुकड़ाझोर जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- डीव्हीसीएम कुतुल एरिया कमेटी , ईनामी-8 लाख. 3. जनिला उर्फ जलको कोर्राम पिता लैखन कोर्राम उम्र 36 वर्ष निवासी कौशलनार थाना झाराघाटी जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- पीपीसीएम माड़ डिवीजन कम्पनी 1 सेक्सन ‘‘बी’’ कमाण्डर, ईनामी-5 लाख. 4. सुक्की मण्डावी पति सोमारू कोवाची पिता पाण्डू उम्र 25 वर्ष निवासी आरा थाना कुुआकोण्डा जिला दन्तेवाड़ा (छ0ग0) पद- पीएम कम्पनी नम्बर 6, ईनामी-3 लाख. 5. शांति कोवाची पिता मंगड़ू कोवाची उम्र 20 वर्ष निवासी बेड़मामेटा थाना कुकड़ाझोर जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- माड़ डिव्ीजन स्टॉप टीम सदस्य, ईनामी-3 लाख. 6. मासे उर्फ क्रांति वड़दा पिता सम्पत उम्र 20 वर्ष निवासी आलबेड़ा पंचायत कुतुल थाना कोहकामेटा जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- ब्यूरो सप्लाई टीम सदस्य, ईनामी-3 लाख. 7. सरिता उसेण्डी पिता लखमा उम्र 19 वर्ष निवासी कोडलियार मिंचिगपारा पंचायत कुतुल थाना कुकड़ाझोर जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- पीएम ईनामी -3 लाख. 8. मंगती पिता स्व. कोसा उम्र 25 वर्ष निवासी कोडलियार थाना कोहाकामेटा जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- पीएम कुतुल एरिया कमेटी सीएनएम अध्यक्ष, ईनामी-2 लाख. 9. देवा राम उर्फ कारू वड़दा पिता मंगतु वड़दा उम्र 21 वर्ष निवासी आलबेड़ा सरगीपारा पंचायत कुतुल थाना कोहकामेटा जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- कुतुल एलओएस सदस्य. जनमिलिशिया कमाण्डर गोमांगल, ईनामी-2 लाख. 10. रतन उर्फ मुकेश पुनेम पिता माहरू पुनेम उम्र 21 वर्ष निवासी कावड़ पंचायत पुषनार जिला बीजापुर (छ0ग0) पद- जोन डॉक्टर टीम इंचार्ज , ईनामी-2 लाख. 11. कला उर्फ सुखमती उर्फ कोटली पिता लखमा ध्रुर्वा उर्फ कोडंगें उम्र 20 वर्ष निवासी आसनार पंचायत मंडाली थाना ओरछा जिला नारायणपुर (छ0ग0) पद- नेलनार एनओएस सदस्य, ईनामी-1 लाख. recent visitors 43

चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल से पहले इस संयोग ने उड़ाए होश, न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच को लेकर टेंशन में फैन्स

दुबई चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मैच 9 मार्च को खेला जाना है। दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत के सामने न्यूजीलैंड की टीम होगी। लेकिन फाइनल मैच से पहले एक ऐसा संयोग सामने आया है, जिसने भारतीय फैन्स के होश उड़ा दिए हैं। यह संयोग है भारत के फाइनल मैच खेलने को लेकर। असल में अभी तक दो बार ऐसा हुआ है जब आईसीसी इवेंट्स में भारत ने लीग मैच में जिस टीम को हराया है, उसी के खिलाफ फाइनल खेला है। दोनों ही बार भारतीय टीम को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है। गौर करने वाली बात यह है कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भी भारत ने न्यूजीलैंड को लीग स्टेज में हराया है। अब फाइनल मैच में दोनों फिर से आमने-सामने हैं। पाकिस्तान के खिलाफ 2017 चैंपियंस ट्रॉफी लीग स्टेज पर हराने और फाइनल में हारने का भारत का सिलसिला 2017 में शुरू हुआ था। तब भारत और पाकिस्तान ग्रुप बी में थे। लीग मैच में भारत ने पहले खेलते हुए 3 विकेट पर 319 रन बनाए थे। रोहित, शिखर, विराट और युवराज ने अच्छी पारियां खेली थीं। बाद में पाकिस्तान 164 रन पर ऑलआउट हो गया था। लेकिन जब यही दोनों टीमें फाइनल में भिड़ीं तो कहानी बदल गई। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 338 रनों का भारी-भरकम लक्ष्य रखा। इसके सामने भारतीय टीम 158 रनों पर ऑलआउट हो गई। केवल हार्दिक पांड्या ने 70 रनों की पारी खेलकर थोड़ा सम्मान बचाया था। 2023 वनडे वर्ल्ड कप में भी हुआ ऐसा कुछ ऐसा ही मामला साल 2023 में खेले गए वनडे वर्ल्डकप में देखने को मिला था। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच का यह मैच आईसीसी वर्ल्ड कप का 5वां मुकाबला था। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 199 रन बनाए थे। वहीं, भारत ने 201 रन बनाकर यह मैच जीत लिया था। भारत की तरफ से कोहली ने 85 और केएल राहुल ने 97 रनों की पारियां खेली थीं। जबकि रोहित शर्मा, ईशान किशन और श्रेयस अय्यर जीरो पर आउट हो गए थे। बाद में दोनों टीमें टूर्नामेंट के फाइनल में भिड़ीं। 19 नवंबर को अहमदाबाद में जो हुआ उसे याद करके आज भी फैन्स की आह निकल जाती हैं। रोहित शर्मा की आंखों से निकलते आंसू भूलते नहीं हैं। recent visitors 29