Sunday, July 5, 2026 4:35 am

इंदौर के चंदन नगर से सिरपुर तक पचास करोड़ की लगात से एक ब्रिज भी बनाया जाएगा

इंदौर इंदौर नगर निगम का आठ हजार 174 करोड़ का बजट पेश हुआ। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर में मास्टर प्लान की 33 नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा हर वार्ड में एक ग्लोबल गार्डन बनेगा और उनमें योग शालाएं संचालित होंगी। इसके अलावा चंदन नगर से सिरपुर तक पचास करोड़ की लगात से एक ब्रिज भी बनाया जाएगा। नदी नालों पर पुराने ब्रिजों को हटाकर पंद्रह नए ब्रिज बनाए जाएंगे। नर्मदा के चौथे चरण के लिए भी बजट में बड़ी राशि रखी जाएगी। इस साल इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। शहर में 38 नए टंकियों का निर्माण होगा। 100 एकड़ का लैंड बैंक दो सालों में नगर निगम ने 100 एकड़ का लैंड बैंक बनाया है। मेयर ने कहा कि लैंड बैंक में कर्बला मैदान की जमीन भी निगम के नाम पर हुई है। ड्रेनेज घोटाले पर मेयर ने कहा कि आरोपी जेल में हैं। इस सिस्टम में जिसने गड़बड़ की है, जिसने पैसे निकालने का काम किया। उनके 100 करोड़ से ज्यादा का बिल रोक कर रखा है। उस राशि से घोटाले के पैसे को वसूला जाएगा।   पचास साल तक काम आएगा पोर्टल मेयर ने कहा कि नगर निगम ने ऑनलाइन टैक्स भरने वन्य सुविधाओं के लिए अपना एक पोर्टल बनाया है। यह पोर्टल दो माह में काम शुरू कर देगा। अगले 50 साल तक यह पोर्टल नगर निगम के काम आएगा। एप के माध्यम से कचरा उठाने बुला सकेंगे मेयर ने कहा कि इंदौर स्वच्छता में नवाचार करने की मामले में हमेशा आगे रहा है। सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक मशीन खरीदने के अलावा शहरवासी एप के माध्यम से भी डोर-टू-रोड कचरा कलेक्शन गाड़ियों को अपने घर बुला सकेंगे। इसकी सुविधा भी जल्दी दी जाएगी। इंदौर के चिड़ियाघर को जीरो वेस्ट बनाया जाएगा। हरियाली में भी नंबर वन बने नगर निगम के बजट बैठक में नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मैं मंत्री की हैसियत से नहीं आया हूं। मुझे विधायक होने के नाते इस बैठक में शामिल होने का अधिकार है। इस बार इंदौर नगर निगम ने एक हजार करोड़ का टैक्स वसूला है। यह आत्मनिर्भर की तरफ कदम बढ़ाने जैसा है। कई नगर निगमों में तनख्वाह भोपाल से आए पैसों से मिलने के बाद बांटी जाती है। कोई नगर निगम इतना टैक्स अभी तक वसूल नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि इंदौर स्वच्छता में नंबर वन है। हरियाली में भी नंबर वन बने। हम पेड़ बचाने का भी रिकॉर्ड बनाएंगे। इस बार फिर इंदौर में 51 लाख पेड़ लगाने का संकल्प ले रहे हैं।   recent visitors 20

सुप्रसिद्ध कवि, लेखक एवं पत्रकार पद्मभूषण पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर सीएम साय ने किया नमन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुप्रसिद्ध कवि, लेखक एवं पत्रकार पद्मभूषण पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री साय ने पंडित माखन लाल चतुर्वेदी को स्मरण करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में प्रकृति प्रेम, त्याग, बलिदान और देशभक्ति का अनुपम संगम दिखाई देता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी प्रभावशाली लेखनी के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत की और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बिलासपुर के सेंट्रल जेल में लिखी गई उनकी प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ आज भी लोगों के हृदय में देशभक्ति की भावना का संचार करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चतुर्वेदी जी की उत्कृष्ट रचनाएं, उनमें निहित राष्ट्रप्रेम और संवेदना भावी पीढ़ियों के मन में सदैव देशभक्ति की भावना का संचार करती रहेंगी। recent visitors 29

केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद मध्य प्रदेश सरकार 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू करेगी, जाने कितना बढ़ेगा वेतन

भोपाल केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग का कार्य जल्द शुरू होने जा रहा है. इससे केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में बंपर बढ़त मिलेगी. इसी के साथ मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की भी उम्मीदें बढ़ने लगी हैं. कर्मचारियों के मन में अब यही सवाल है कि केंद्र समान अगर 8वां वेतन मान लागू हुआ तो महंगाई भत्ता और उनकी पूरी सैलरी पर क्या फर्क पड़ेगा? तो बता दें कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में हर महीने 19,000 रु तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, 8वां वेतनमान लागू होने में अभी काफी समय बाकी है. ऐसे में आप इस आर्टिकल में जान सकते हैं कि केंद्र के समान 8वां वेतनमान मिलने पर मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की संभावित सैलरी क्या हो सकती है. 8वें वेतनमान का लाभ कब मिलेगा? सबसे पहले जान लें कि केंद्र सरकार की 8वें वेतनमान की सिफारिशों कब लागू होंगी. तो बता दें कि अप्रैल में सरकार के 8वें वेतनमान आयोग का गठन हो रहा है. गठन के बाद आयोग अपना काम शुरू करेगा और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, महंगाई और जीवन यापन समेत कई फैक्टर्स के आधार पर सैलरी में बदलाव की सिफारिश करेगा. अगर पुराना रिकॉर्ड देखें तो आयोग को वेतनमान की सिफारिशें सरकार को भेजने में एक से डेढ़ साल तक का वक्त लगता है. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतनमान का लाभ 2026 के बाद ही मिल पाएगा. वहीं केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद मध्य प्रदेश सरकार 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू करेगी. 8वें वेतनमान से कितनी बढ़ेगी सैलरी? 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर गौर करें तो उस दौरान आयोग ने फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना बढ़ाया था. ऐसे में बेसिक सैलरी 7000 रु से बढ़कर 17,990 रु हो गई थी. गौरतलब है कि फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जो महंगाई, कर्मचारियों के प्रदर्शन आदि कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है. इस संख्या को बेसिक सैलरी से गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. उदाहरण के तौर पर अगर मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15 हजार रु है और नया फिटमेंट फैक्टर 2.60 के करीब होता है तो नई बेसिक सैलरी 39,000 रु हो सकती है. हालांकि, राज्य सरकार केंद्र सरकार की तरह वेतन आयोग की सिफारिशों को शत प्रतिशत लागू करने के लिए बाध्य नहीं रहती. क्योंकि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति केंद्र सरकार से काफी अलग होती है. वेतन आयोग क्या होता है? वेतन आयोग सरकार के एक डिपार्टमेंट की तरह काम करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार के कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करना होता है. महंगाई, परफॉर्मेंस समेत कई फैक्टर्स को देखते हुए समय-समय पर आयोग सैलरी स्ट्रक्चर में सुधार करने की सिफारिश करता है. आमतौर पर हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन होता है. वर्तमान में केंद्र सरकार के 8वें वेतनमान आयोग का गठन हो रहा है. केंद्र के वेतनमान आयोग की सिफारिशों के बाद राज्य की सरकारें भी इन सिफारिशों को अपनाती हैं या अलग से राज्य वेतन आयोग का गठन कर सकती हैं. 11 हजार रु तक बढ़ सकती है मध्य प्रदेश में सैलरी 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू होने में एक साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है. ऐसे में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र बराबर लाभ मिलना फिलहाल संभव नहीं है. दरअसल, पहले ही मध्य प्रदेश के कर्मचारी डीए यानी महंगाई भत्ते के मामले में केंद्रीय कर्मचारियों से 5 प्रतिशत तक पीछे हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने कर्मचारियों के कई भत्तों को बढ़ाया लेकिन ये फिर भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर नहीं हैं. माना जा रहा है कि 8वां वेतनमान लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी 19 हजार रु प्रतिमाह तक बढ़ सकती है. वहीं, मध्य प्रदेश में ये लागू होता है तो कर्मचारियों की सैलरी 11 हजार रु तक बढ़ सकती है. एमपी में 13 साल बाद बढ़े भत्ते लेकिन केंद्र से कम मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को 13 साल बाद 13 तरह के भत्तों में लाभ दिया है. इसमें DA यानी महंगई भत्ता , HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस समेत कई भत्ते शामिल हैं लेकिन कर्मचारी संगठन इससे खुश नहीं हैं. तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी कहते हैं, '' 13 साल बाद भत्ते बढ़ाए लेकिन ये पर्याप्त नहीं है. कर्मचारियों को उचित लाभ मिलने की उम्मीद थी.अगर ये भत्ते केंद्र के हिसाब से बढ़ाए गए होते तो मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलती.'' मध्य प्रदेश में DA होगा 60 प्रतिशत? बात करें मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के DA की, तो छठवें वेतनमान की तुलना में सातवें वेतनमान में सैलरी में 14% की बढ़ोतरी हुई थी और इसके साथ मध्यप्रदेश में DA फिलहाल 50% मिल रहा है. अगले साल 8वें वेतनमान की सिफारिशें अगर लागू होती हैं तो मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की कुल सैलरी 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. इसमें कर्मचारियों का डीए 50 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत होने का अनुमान है. इस दौरान कर्मचारियों को 3 प्रतिशत का परफॉर्मेंस इंक्रीमेंट भी दिया जा सकता है. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की सैलरी में बंपर बढ़त हो सकती है. 50% हुआ डीए फिर बेसिक सैलरी में क्यों नहीं जुड़ा? मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही बढ़ाए गए महंगाई भत्ते से अब प्रदेश के कर्मचारियों को 50 प्रतिशत डीए मिल रहा है. लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की मांग थी कि नियम मुताबिक 50 प्रतिशत से ज्यादा डीए होने पर इसे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से जोड़ दिया जाए. हालांकि, सरकार ने इस मांग को पूर्व में ही ठुकरा दिया था. दरअसल, सरकार ने छठवें वेतनमान की सिफारिश मानते हुए डीए को बेसिक सैलरी में नहीं जोड़ने का फैसला लिया था. सरकार का तर्क था कि ऐसा करने से प्रदेश की सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता था. recent visitors 35

राज्य सरकार-प्रदेशवासी और अधिकारी-कर्मचारी एकजुट-एकभाव होकर प्रगति पर हो रहे हैं अग्रसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कुशल वित्तीय प्रबंधन से संभव हो रहा है, विकास के साथ औद्योगिक गतिविधियों और जन हितैषी कार्यों का विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार सुशासन के मूल भाव को कर रही साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार-प्रदेशवासी और अधिकारी-कर्मचारी एकजुट-एकभाव होकर प्रगति पर हो रहे हैं अग्रसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुरानी देनदारी चुका कर विकास के विविध पैमानों पर आगे बढ़ रहा है राज्य ताप विद्युत गृहों के लिए किया गया 11.73 लाख मैट्रिक टन कोयले का भंडारण अधिकारी-कर्मचारियों के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री ने कुशल वित्तीय प्रबंधन के संबंध में विचार व्यक्त किए भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में डबल इंजन की सरकार जनहितैषी संकल्पों के साथ अग्रसर है। उद्योग-व्यापार से लेकर खेलों तक राज्य में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और नीति आयोग के निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक विभाग में सुशासन के मूल भाव के साथ गतिविधियों की मॉनिटरिंग जारी है। राज्य सरकार के हर विभाग ने अपने-अपने क्षेत्र में श्रेष्ठतम कार्य करने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के आधार पर अपनी पुरानी देनदारी चुका कर, नई दृष्टि से विकास के पैमानों पर आगे बढ़ रही है। विकास के साथ औद्योगिक गतिविधियों और जन हितैषी कार्यों का विस्तार इन्हीं दृढ़संकल्पों की परिणीती है। राज्य सरकार, प्रदेशवासी और अधिकारी- कर्मचारी एकजुट होकर एक भावना के साथ प्रगति पर अग्रसर हों, इसी मंशा के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया, बावजूद इसके गत वर्ष की तुलना में बजट में 16 प्रतिशत की वृद्धि की गई। कुशल वित्तीय प्रबंधन और सभी के सहयोग से सरकार हर क्षेत्र में अपने तय लक्ष्यों को प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के हित में लगभग 10-15 वर्ष तक पुराने भत्तों की राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए वर्ष 2025-26 के बजट में राशि आवंटित की गई है, जिससे सरकार पर करीब 1500 करोड़ रुपए का व्यय भार आएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के आधार पर ही अपने अधिकारी-कर्मचारियों की बेहतरी का ध्यान रख पा रही है। उन्होंने कहा कि विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में प्रदेश को प्राप्त हो रही उपलब्धियों का श्रेय अधिकारी-कर्मचारियों को जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पूरे देश में मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसने अपनी 7-8 साल पुरानी सारी देनदारी चुकाने का कार्य किया। हमारी सरकार ने एमएसएमई और हैवी इंडस्ट्रीज सहित सभी प्रकार की इकाइयों को गत एक वर्ष में लगभग 5 हजार 225 करोड़ रुपए की राशि देने का काम किया है। हमारी सरकार नवीन पहलों के माध्यम से उद्योगों के लिए निरंतर सकारात्मक वातावरण बना रही है। राज्य सरकार विकास के लिए प्रदेश से जुड़ने वाले उद्योगों से किये गये अपने सभी संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशल वित्तीय प्रबंधन के आधार पर सभी केंद्रीय कोयला कंपनियों की देनदारियों का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। जेनरेशन कंपनी के चारों ताप विद्युत गृहों के कुशल प्रबंधन के फलस्वरूप अब तक का सर्वाधिक 11.73 लाख मैट्रिक टन कोयले का भंडारण किया गया है। ताप विद्युत गृहों में उपयोग के लिए कोयला भंडारण का अग्रिम भुगतान भी सरकार की ओर से किया जा चुका है।   recent visitors 30

मास्टर प्लान की सड़कें शहर के यातायात को संभालने में असमर्थ, नई सड़कों और ब्रिज की आवश्यकता, तेजी से काम करना होगा

इंदौर  मास्टर प्लान के तहत बनने वाले मेजर रोड में हुई देरी का खामियाजा लंबे समय तक शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। 17 पहले बनी योजना के तहत बन रही ये सड़कें भी अब शहर का यातायात संभालने में सक्षम नहीं होंगी। एजेंसियों को नई सड़कों के साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेजी से काम करना होगा। इधर मास्टर प्लान के तहत सड़कों का निर्माण अधूरा होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खोदी गई सड़कें यातायात को कर रही बाधित सड़कों का काम समय पर पूर्ण नहीं होने से लाखों लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। अधूरी और खोदी हुई सड़कें यातायात को बाधित कर रही हैं। इनकी वजह से रोज हादसे हो रहे हैं। जिन सड़कों का निर्माण शुरू किया गया है, उनका काम भी धीमी गति से जारी है। ऐसे में लोगों को धूल और गड्ढों के कारण परेशान होना पड़ रहा है। जिन सड़कों पर काम हुआ, वह भी टुकड़ों-टुकड़ों में बनी हैं और आधी-अधूरी हालत में छोड़ दी गई हैं। एमआर-5, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कों की लागत अब कई गुना बढ़ गई है। देरी से बढ़ गई निर्माण लागत मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कें दशकों तक नहीं बनने के कारण निर्माण लागत बढ़ गई है। कई लोगों को अन्य स्थानों पर विस्थापित करना पड़ेगा। एमआर-3 की निर्माण लागत शुरुआत में 34 करोड़ थी, जो अब 50 करोड़ के पार पहुंच गई है। एमआर-4 की लागत भी 55 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। एमआर-11 को बनाने में 75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। एमआर-12 को बनाने में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है। अन्य शहरों को जाने वाले वाहन शहर में करते हैं प्रवेश एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण पूरा नहीं होने से भोपाल और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को उज्जैन रोड जाने के लिए शहर में प्रवेश करना पड़ता है। वर्तमान में इन वाहनों का सर्वाधिक दबाव एमआर-10 पर है। यदि एमआर-11 बन गया होता तो बायपास से वाहन एबी रोड पहुंच सकते थे। एमआर-12 के बनने से वाहनों को एबी रोड और उज्जैन रोड तक की सीधी कनेक्टिविटी मिलने लगती। इन दोनों सड़कों के अधूरे होने से अभी विजय नगर क्षेत्र में वाहनों का खासा दबाव देखा जाता है। इनका निर्माण हुआ शुरू, लेकिन कई बाधाएं -एमआर-4 : रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी को जोड़ने वाली इस सड़क पर कई निर्माण सड़क पर आ रहे हैं। – एमआर-5 : इंदौर वायर से बड़ा बांगड़दा तक बनने वाली सड़क पर भी लक्ष्मीबाई मंडी के आगे सुपर कारिडोर की तरफ कई अतिक्रमण हैं। – एमआर-11 : बायपास से एबी रोड तक बनने वाली इस सड़क पर कई अतिक्रमण हैं। इस सड़क का समय पर निर्माण नहीं होने से कई विकास अनुमतियां जारी हो गईं। अब इसका सर्वे कर नया लेआउट तय किया जा सकता है। – एमआर-12 : बायपास से एबी रोड होते हुए उज्जैन रोड को जोड़ने वाली सड़क पर बाधाएं हैं। गत दो साल से टुकड़ों में इसका निर्माण किया जा रहा है। कैलोदहाला कांकड़ पर 100 से ज्यादा घरों की बाधा है। इनको विस्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। टुकड़ों- टुकड़ों में बनाया     मास्टर प्लान की प्रमुख सड़क एमआर-11 को बनाने का काम शुरू हो चुका है। दो साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। एमआर-12 का चार किमी हिस्सा टुकड़ों-टुकड़ों में बनाया जा चुका है। शेष सड़क का काम जारी है। कान्ह नदी पर पुल का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही कैलोदहाला रेलवे क्रासिंग पर आरओबी का काम शुरू किया जाएगा। सिंहस्थ तक इस सड़क को बनाने का लक्ष्य रखा गया है। – आरपी अहिरवार, सीईओ, आईडीए सड़कों के लिए राशि आवंटित हुई     मास्टर प्लान की कुछ सड़कों का काम शुरू हो गया है और कुछ का काम जल्द शुरू होगा। हमारा लक्ष्य सिंहस्थ से पहले मास्टर प्लान की सभी सड़कों को तैयार करने का है। हमें पूरा विश्वास है कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे। सड़कों को चार पैकेज में करने का उद्देश्य भी यही है। सड़कों के लिए राशि आवंटित हो चुकी है। कार्यादेश भी जारी हो गए हैं। ऐसे में दिक्कत नहीं आएगी। – शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त इंदौर     recent visitors 39

राहुल गांधी का PA बनकर ठगी करने वाला अरेस्ट, कांग्रेस का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बना देंगे, 20 लाख दो ,पूर्व मंत्री को भी किया था फोन

The fraudster who was posing as Rahul Gandhi’s PA has been arrested. He will be made the Congress’s acting state president. Give him 20 lakh rupees. He had called a former minister as well. पटना। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का पीए बनकर टिकट और पार्टी में पद दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले शातिर रजत कुमार को पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। रजत टिकट और पार्टी में पद ‎दिलाने का झांसा देकर कांग्रेस नेताओं से ठगी करता था। गांधी मैदान के एक होटल से इसकी गिरफ्तारी हुई है। गिरोह का सरगना गौरव शर्मा‎ मौके से भाग निकला। रजत हरियाणा के सिरसा का रहने वाला है। वह राहुल गांधी का पीए कनिष्क सिंह बनकर बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत उन तमाम राज्यों के कांग्रेसी नेताओं को फोन करता था, जहां चुनाव होने वाले हैं या प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों की तैनाती की जानी है। रजत के बॉस गौरव ने कांग्रेस के नेता प्रवीण कुशवाहा को कॉल कर कहा था कि 15-20 लाख दें, बिहार प्रदेश का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बना देंगे। इसके बाद प्रवीण दिल्ली चले गए। इधर, फ्लाइट से गौरव और रजत पटना पहुंच गए। यहां पहुंचने के बाद प्रवीण को कॉल किया तो उन्होंने कहा कि दिल्ली आ गए हैं। दोनों को एग्जीबिशन रोड स्थित लेमन ट्री में ठहराया गया। प्रवीण ने अपने करीबी आदित्य को होटल भेजा। गौरव ने 2 लाख ले लिए और फिर वहां से धीरे से खिसक गया। आदित्य और अन्य लोग समझ गए कि दोनों ठग हैं। उसके बाद रजत को आदित्य और अन्य लोगों ने होटल में पकड़ लिया और गांधी मैदान थाने की पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस पहुंची और उसे पकड़कर थाने ले आई। गांधी मैदान थानेदार ने बताया कि दोनों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की छानबीन करने में जुटी है। चर्चा है कि पटना पहुंचने के बाद गौरव और रजत ने बिहार के पूर्व मंत्री कांग्रेस के विधायक अफाक आलम को भी कॉल कर प्रदेश कांग्रेस में पद देने के लिए मोटी रकम की मांग की थी। लेकिन अफाक ने आलम ने इनकार कर दिया। गौरव और रजत पर पंजाब, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में करोड़ों रुपए की ठगी करने का केस दर्ज है। रजत 6 महीने तक जेल में भी रह चुका है। पुलिस गौरव का सुराग लगाने में जुटी है। उसने मोबाइल बंद कर लिया है। रजत का कहना है कि मुझे ठगी की रकम में से 10 प्रतिशत कमीशन मिलता है। recent visitors 91

संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी जल्द !क्यों चर्चा में हैं आए पुराने ‘साथी’, जानिए संयोग

मुंबई/नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघ मुख्यालय के दौरे और संसद सत्र के खत्म होने के बाद बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बेंगलुरु में हाेने की संभावना है। यह बैठक अप्रैल के तीसरी हफ्ते में प्रस्तावित है। इस बैठक में बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पहले अप्रैल बीजेपी का इस हफ्ते 6 अप्रैल को स्थापना दिवस है। बीजेपी के स्थापना दिवस के दिन ही रामनवमी का पर्व है। बीजेपी द्वारा इस मौके को बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट किए जाने की उम्मीद है, तो वहीं दूसरी तरफ कभी बीजेपी के कद्दावर संगठन मंत्री रह चुके संजय जोशी का जन्मदिन भी 6 अप्रैल को है। 6 अप्रैल से है अनूठा संयोग पीएम मोदी के नागपुर दौरे के बाद संजय जोशी के नाम की चर्चा एक बार फिर हो रही है। उनके करीबियों को भरोसा है कि ऐसे में जब इसी साल अक्तूबर को संघ की स्थापना को 100 साल पूरे हो रहे हैं। उससे पहले संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी हो सकती है। कुछ स्थानों पर संजय जोशी के जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टर भी सामने आए हैं। संजय जोशी की उम्र अभी 62 साल है। ऐसे में 75 साल उम्र सीमा को देखते हुए उनके पास अभी वापसी का समय बचा हुआ है। यही वजह है कि संजय जोशी को पसंद करने वालों ने पीएम मोदी की नागपुर यात्रा के बाद नई उम्मीदें बांध ली है। जोशी के करीबियों का कहना है कि भले ही संजय जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष न बने लेकिन उनकी सक्रियता बढ़ेगी। सात सालों तक साथ किया काम 6 अप्रैल, 1962 को जन्में संजय जोशी लंबे समय से एक सीमित भूमिका में सक्रिय हैं। वह भी पीएम मोदी की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रह चुके हैं। जोशी 2001 से लेकर 2005 तक बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। नागपुर में जन्मे और वहां कुल साल तक प्रोफेसर रहे जोशी गुजरात में भी काम कर चुके हैं। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बीजेपी में 1987 में आए थे। इसके एक साल बाद जोशी को संघ ने बीजेपी गुजरात में भेजा था। इसके बाद उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ 1988 से 1995 तक लगातार काम किया था। 1995 में पहली बार बीजेपी को गुजरात में सत्ता का स्वाद चखने को मिला था। तब देना पड़ा था इस्तीफा संजय जोशी को आखिरी बार नितिन गडकरी ने अध्यक्ष रहते हुए 2011 में जोशी को विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी सौंपीं थी लेकिन तब उनकी वापसी को बीजेपी में स्वीकार नहीं किया था। चुनावों के बाद उन्हें मई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से और एक महीने बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में जोशी जोशी पिछले 12 सालों से अज्ञातवास में हैं। ऐसे में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 27 सितंबर, 2025 को 100 पूरे होंगे और इसी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल की आयु पूरी करेंगे, क्या उसके पहले संजय जोशी की वापसी हो पाएगी? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। पीएम मोदी की बेहद अच्छे माहौल में संघ मुख्यालय की यात्रा के बाद समर्थकों को उम्मीद है कि नई शुरुआत हो सकती है। recent visitors 45