पटना में बारिश , सारण और सीवान में बारिश का रेड अलर्ट जारी

पटना बिहार के कई जिलों में तेज हवा के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने पटना, सीवान, सारण, नालंदा, नवादा, समस्तीपुर, वैशाली, भोजपुर, गया, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय बारिश का अलर्ट जारी किया है। पटना, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बेगूसराय, भोजपुर, औरंगाबाद सीवान और सारण के कुछ भागों में तीव्र दर्जे की मेघ गर्जन, वज्रपात, ओलावृष्टि और तेज हवा के साथ बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इधर, पटना समेत कुछ जिलों में अहले सुबह से ही बारिश हो रही है। पटना और गोपालगंज के कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवा के साथ बारिश ने तापमान में गिरावट ला दी है। दो मई को पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, एक मई को बिहार के सुपौल, अरिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल, पटना, गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर में एक या दो स्थानों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दो मई को बिहार के सभी 38 जिलों के कुछ स्थानों पर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।   मेघगर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बारिश और वज्रापत को लेकर मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें। खराब मौसम होने पर वज्रपात से बचाव के लिये आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किये गये सुझावों का अनुपालन करें। खराब मौसम में घरों में रहें और सुरक्षित रहें। वहीं मौसम विभाग ने लोगों से अपील कि है कि खराब मौसम के दौरान अपने पशुधन और खुद को बाहर निकलने से बचें। मेघगर्जन के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें। बारिश के समय सुरक्षित स्थान पर जाकर बैठ जाएं।   recent visitors 29

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संभाला चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ का कार्यभार

नई दिल्ली वायु सेना के वरिष्ठ फाइटर पायलट एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने आज गुरुवार को चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) का पदभार संभाल लिया है। कार्यभार ग्रहण के अवसर पर उन्हें दिल्ली के साउथ ब्लॉक लॉन्स में त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। CISC बनने से पहले एयर मार्शल दीक्षित मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे, जहां उन्होंने उत्तर भारत और मध्य क्षेत्र में परिचालन तैयारियों को सशक्त बनाने और अन्य सेनाओं के साथ तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग 40 वर्षों के अपने शानदार करियर में दीक्षित ने अनेक कमांड, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़े प्रमुख पदों पर कार्य किया। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (बांग्लादेश), और नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) के पूर्व छात्र हैं। वे एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं, जिनके पास 3,300 से अधिक उड़ान घंटे हैं और उन्होंने 20 से ज्यादा प्रकार के विमानों जैसे मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर पर उड़ान भरी है। उन्होंने एक फ्रंटलाइन मिराज-2000 स्क्वाड्रन की कमान संभाली और नए विमान दो बैचों में फ्रांस से भारत लाने और उन्हें ऑपरेशनल करने का नेतृत्व किया। उन्होंने दक्षिणी क्षेत्र के एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली, जिसे उनके नेतृत्व में कमान का सर्वश्रेष्ठ बेस घोषित किया गया। बैंगलोर स्थित एअरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में वे टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। यहां उन्होंने जगुआर और मिग-27 जैसे विमानों के एवियोनिक्स अपग्रेड जैसे कई स्वदेशी विकास कार्यों में भागीदारी की। वायु मुख्यालय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों जैसे प्रिंसिपल डायरेक्टर एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स, असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और (प्लान्स) पर कार्य किया। एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के निदेशक रहते हुए उन्होंने मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) ट्रायल्स की योजना और निष्पादन में प्रमुख भूमिका निभाई, जिसे उनकी निष्पक्षता और पेशेवर दृष्टिकोण के लिए सराहा गया। वहीं उप वायु सेना प्रमुख के रूप में आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत उन्होंने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रक्रियाओं के जरिये स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स और प्रणालियों की तेजी से खरीद सुनिश्चित की और दीर्घकालिक योजना को मजबूत किया। उन्हें 2006 में मिराज-2000 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उल्लेखनीय योगदान के लिए वायु सेना मेडल, 2011 में MMRCA ट्रायल्स के नेतृत्व के लिए विशिष्ट सेवा मेडल और राष्ट्रपति द्वारा उत्कृष्ट सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।   recent visitors 36

मुख्यमंत्री साय बोले- हर युवा के चेहरे की चिंता हमने पढ़ी, हर परिवार की पीड़ा हमने समझी और उसका समाधान करने का किया प्रयास

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से छत्तीसगढ़ के 26 सौ से अधिक बीएड अर्हताधारी बर्खास्त सहायक शिक्षकों के जीवन में खुशियां लौट आई है। प्रदेश सरकार ने बर्खास्त शिक्षकों को सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पद पर समायोजन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य के 2600 से अधिक युवाओं का भविष्य एक बार फिर संवर गया है।       मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ग़जमाला पहनाकर उनके प्रति कृतज्ञता जताई।        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस मौके पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनसे अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का और देश का भविष्य गढ़ना शिक्षकों का सबसे बड़ा कर्तव्य है। आप सभी अपने दायित्व के प्रति सचेत हों और इस भूमिका में सर्वोच्च योगदान दें।       मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की चिंता पहले दिन से की थी। आप हमारे प्रदेश के बच्चें है और आपके भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प हमने पहले से ले लिया था। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कदम छत्तीसगढ़ के भविष्य निर्माताओं को नया संबल देगा और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा शिक्षक आने वाले वर्षों में प्रदेश की नई पीढ़ी को दिशा देंगे और छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह निर्णय शिक्षकों के   उज्जवल, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की एक नई शुरुआत है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के साथ आपके नौकरी के संबंध में लगातार चर्चा होती थी। हमारे मुखिया इतने संवेदनशील है कि उन्होंने पहले ही दिन कहा था कि जितना भी आर्थिक बोझ पड़े राज्य सरकार अपने युवाओं के भविष्य को खतरे में नहीं डालेगी। उन्होंने कहा कि आपके परिजन भी लगातार हमसे संपर्क कर अपनी चिंता व्यक्त करते थे और आज मुख्यमंत्री ने उन सभी की चिंता को दूर करते हुए अपना वादा निभाया। मुख्यमंत्री जी ने न केवल अपना वादा निभाया है बल्कि अपनी इच्छा शक्ति से सुशासन को स्थापित करने का कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरे देश में मिसाल कायम की है।   इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे अपने भविष्य को लेकर गहरी आशंका में थे और लगातार मानसिक पीड़ा झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ने उन्हें संबल दिया। शिक्षकों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हर बार उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने हमसे वादा किया था कि हमारे बेटे-बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और आज उन्होंने अपना वादा निभाकर एक अभिभावक की जिम्मेदारी पूरी की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा शिक्षकों ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सरकार ने वास्तव में सुशासन और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। हमें गर्व है कि आज हमारे प्रदेश में ऐसी सरकार है जो हमारी पीड़ा को समझती है और संवेदनशीलता के साथ हमारी समस्याओं का समाधान करती है। recent visitors 25

बिलासपुर:योग के बहाने नमाज, रात तीन बजे GGU सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को घर से उठा लाई…

 बिलासपुर  कोटा क्षेत्र के शिवतराई में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एनएसएस कैंप के दौरान छात्रों को योग के बहाने नमाज पढ़ाने के मामले में कोटा पुलिस की टीम रात तीन बजे केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को घर से उठा लाई है। प्राेफेसर से घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। कोटा क्षेत्र के शिवतराई में एनएसएस कैंप के दौरान विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देने का प्रलाेभन देकर नमाज पढ़वाने के मामले में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दिलीप झा, डा मधुलिका सिंह, डा ज्योति वर्मा, डा नीरज कुमारी, डा प्रशांत वैष्णव, डा सूर्यभान सिंह, डा बसंत कुमार और टीम कोर लीडर आयुष्मान चौधरी आरोपित हैं। मामले की जांच के दौरान कोटा पुलिस ने प्रोफेसर दिलीप झा को गुरुवार की तड़के तीन बजे उनके घर से हिरासत में लिया है। पुलिस की टीम मामले में शामिल अन्य आरोपित की तलाश कर रही है। क्या है मामला गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एनएसएस विंग का कोटा के शिवतराई में सात दिवसीय शिवर 26 मार्च से एक अप्रैल तक लगाया गया था। आरोप है कि 31 मार्च की सुबह कैंप में मौजूद प्रोफेसरों और टीम लीडर ने सभी छात्र-छात्राओं को एकत्र कर नमाज पढ़वाई। साथ ही छात्रों को प्रमाण पत्र देने का प्रलोभन दिया गया। कैंप से लौटकर कुछ छात्रों ने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रबंधन से की। इधर कैंप में नमाज पढ़वाने की जानकारी लगते ही हिंदू संगठन के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद कोनी पुलिस ने शुन्य में मामला दर्ज कर केस डायरी कोटा पुलिस को सौंप दी। मामले की जांच अब कोटा पुलिस कर रही है। DSP रश्मीत कौर चावला ने बताया कि कथित घटना को लेकर आठ लोगों के खिलाफ 26 अप्रैल को दर्ज FIR के सिलसिले में प्रोफेसर दिलीप झा को गुरुवार सुबह हिरासत में लिया गया. उन्होंने बताया कि झा और बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के 6 फैकल्टी मेंबर्स और टीम के एक मुख्य नेता पर धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने समेत अन्य अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता व छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच जिले के कोटा थाना इलाके के शिवतराई गांव में आयोजित एनएसएस शिविर के दौरान 31 मार्च को 159 छात्रों को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया, हालांकि उनमें से केवल चार ही मुस्लिम थे. छात्रों के वापस लौटने पर विरोध प्रदर्शन के बाद जांच शुरू की गई, जिसके बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने भी आंदोलन किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. बिलासपुर के एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की जांच के लिए सिटी पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) अक्षय सबदरा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की थी. समिति की रिपोर्ट के आधार पर झा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. चावला ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है. छात्रों ने कार्रवाई की मांग की थी छात्रों के मुताबिक, विरोध करने पर उन्हें धमकी और सर्टिफिकेट नहीं देने की चेतावनी भी दी गई। छात्रों ने कोनी थाना पुलिस से शिकायत करके प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. बसंत कुमार, कोआर्डिनेटर दिलीप झा सहित अन्य स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिविर में शामिल नहीं हुए थे प्रोफेसर इधर, प्रोफेसर दिलीप झा का कहना था कि यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित NSS कैंप में वो शामिल ही नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैंप में नमाज पढ़ाने की उन्हें जानकारी ही नहीं है। न ही कैंप में शामिल को आर्डिनेटर ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी। ऐसे में बेवजह केस में आरोपी बनाया गया है। पुलिस बोली- साक्ष्यों को किया प्रभावित, जांच में सहयोग नहीं वहीं, सीएसपी व मीडिया प्रभारी रश्मित कौर चावला का कहना है कि इस मामले की जांच के बाद प्रो.दिलीप झा, डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. ज्योति वर्मा, डॉ. नीरज कुमारी, डॉ. प्रशांत वैष्णव, डॉ. सुर्यभान सिंह, डॉ. बसंत कुमार और टीम कोर लीडर छात्र आयुष्मान चौधरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच में अपराध सबूत पाए जाने के साथ ही साक्ष्य को प्रभावित करने और विवेचना में सहयोग नहीं करने के कारण आरोपी प्रोफेसर दिलीप झा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। recent visitors 28

नक्सल पीड़ितों ने नक्सल उन्मूलन अभियान को मजबूती से आगे बढ़ाने का किया अनुरोध

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बस्तर अंचल से आए नक्सल हिंसा पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में सुकमा, बीजापुर, कांकेर सहित बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों के वे नक्सल हिंसा पीड़ित शामिल थे, जिन्होंने विगत वर्षों में नक्सली हिंसा के कारण अपनों को खोया है, शारीरिक यातनाएँ झेली हैं अथवा विस्थापन का दंश सहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को ज्ञापन सौंपते हुए कुर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बस्तर के हजारों परिवार चार दशकों से माओवादी आतंक की विभीषिका का सामना कर रहे हैं, जिसने क्षेत्र की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक बुनियाद को गहरा नुकसान पहुँचाया है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समावेशी विकास की नीति से बस्तर में शांति और विकास की आशा फिर से जगी है। ग्रामीणों ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को इस नई जागरूकता और विश्वास का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुर्रेगुट्टा में चलाया जा रहा सुरक्षा अभियान निर्णायक चरण में है। सरकार किसी भी कीमत पर नक्सल उन्मूलन अभियान को पूर्ण करेगी ताकि बस्तर के विकास को गति मिले। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद सिर्फ एक हिंसक आंदोलन नहीं, बल्कि हमारी सह-अस्तित्व पर आधारित संस्कृति पर खतरा भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हर नक्सल पीड़ित परिवार के साथ सरकार खड़ी है और सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ने या अभियान में बाधा डालने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्थायी शांति और समावेशी विकास ही सरकार का लक्ष्य है, और यह तभी संभव है जब क्षेत्र को हिंसा और भय के साये से पूरी तरह मुक्त किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने आशा व्यक्त की कि नक्सल विरोधी संघर्ष में जन-भागीदारी और विश्वास की शक्ति से हम निस्संदेह सफलता प्राप्त करेंगे और बस्तर को स्थायी शांति और विकास की दिशा में अग्रसर करेंगे। recent visitors 28

जातिगत जनगणना के फैसले को CM Mohan Yadav ने बताया ऐतिहासिक

भोपाल  केंद्र सरकार ने लंबे समय से चली आ रही जातिगत जनगणना करवाने की मांग को मंजूरी दे दी है. सरकार के इस फैसले पर पक्ष और विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने इसे समय की आवश्यकता बताते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया है. मोहन यादव ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट का आभार व्यक्त किया. मोहन यादव ने केंद्र के फैसले को बताया ऐतिहासिक डॉ. मोहन यादव ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा, " यह एक महत्वपूर्ण फैसला है. आजादी के बाद देश के किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा यह सबसे बड़ा निर्णय है. देश में पुरानी घटनाओं के सुधार की दृष्टि से ये एक महत्वपूर्ण कदम है. कैबिनेट के इस फैसले से समता, समरसता, सुगमता और सामाजिक न्याय के एक नए युग की शुरुआत होगी." मुख्यमंत्री ने कहा, "दशकों तक कई दलों ने जातिगत जनगणना का विरोध किया. जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़े नहीं होंगे बल्कि देश के गरीब, पिछड़े, कमजोर और वंचित वर्गों के जीवन को बदलने में अहम भूमिका निभाएगा." सीएम ने अभी तक जातीय जनगणना न होने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया. आजादी के बाद से जातीय जनगणना की चल रही मांग बुधवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट मीटिंग की ब्रीफिंग करते हुए बताया था कि, सरकार ने आगामी जनगणना के साथ जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया है. दरअसल, देश में जातीय जनगणना की मांग आजादी के बाद से ही चल रही है. पिछली जातीय जनगणना ब्रितानिया हुकूमत के दौरान साल 1931 में हुई थी. हालांकि, 1941 की जनगणना में भी जातियों की गणना की गई थी, लेकिन सरकार ने इसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे. 2011 की जनगणना के समय भी इसकी जोर-शोर से मांग उठी थी. क्या होती है जातीय जनगणना? जातिगत जनगणना का अर्थ है भारत में मौजूद सभी जातियों के लोगों की अलग-अलग गिनती. यानी देश में अब जब भी जनगणना होगी, उसमें लोगों की जाति के आधार पर भी गिनती होगी. हालांकि, इससे पहले भी देश में जातीय गिनती होती आई है लेकिन सिर्फ अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आंकड़ों को गिना और प्रकाशित किया गया. लेकिन अब अगली जनगणना में ओबीसी की भी गिनती की जाएगी और सरकार उनके आंकड़ों को सार्वजनिक भी करेगी. recent visitors 34

इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में, बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर

इंदौर  एमपी के इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में आ गए हैं। उनके प्रदर्शन के दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगे। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सख्त आपत्ति जताई है। बीजेपी विधायक ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। पार्षद अनवर कादरी ने पहलगाम हमले के विरोध में यह प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में आतंकवाद का पुतला जलाया गया और नारे लगाए गए। इसी दौरान 'पाक जिंदाबाद' किया गया। दरअसल, कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में बड़वाली चौकी पर प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता और उनके समर्थक भारी संख्या में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान आतंकवाद का पुतला जलाया गया। आरोप है कि इसी दौरान 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन में कई महिलाएं भी मौजूद थीं। बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर विवाद तब और बढ़ गया जब इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुए। इस पर एक्शन लेते हुए इंदौर के तीन नंबर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने पाक के पक्ष में नारे लगाने को देशद्रोह बताया। कांग्रेस में वरिष्ठ पार्षद है कादरी वहीं पार्षद अनवर कादरी का कहना है कि उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अनवर कादरी कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद हैं। इस घटना से इंदौर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी इस मामले को लेकर कांग्रेस को घेरती हुई नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस अपने बचाव में सफाई दे रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। recent visitors 47