मध्य प्रदेश में फिर तेज हुई दलित-आदिवासी राजनीति, कांग्रेस साधने के लिए मुद्दों को दे रही हवा

Dalit-tribal politics has once again intensified in Madhya Pradesh, with the Congress raising issues to gain traction. भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर दलित-आदिवासी राजनीति केंद्र में आ गई है। भले ही विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से इन वर्गों को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खासकर कांग्रेस दलित और आदिवासी समाज को फिर से अपने पाले में लाने के लिए आक्रामक रुख अपनाती दिख रही है। ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए विवाद से लेकर आदिवासी संगठनों के मुद्दों तक, कांग्रेस लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह इन वर्गों के साथ खड़ी है। हाल ही में ग्वालियर हाई कोर्ट खंडपीठ परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर हुए विवाद ने दलित राजनीति को नया मुद्दा दे दिया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई नेता खुलकर दलित संगठनों के समर्थन में सामने आए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए दलित अस्मिता से जोड़कर इसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न बना दिया। ग्वालियर-चंबल अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग की निर्णायक भूमिका को देखते हुए कांग्रेस का यह रुख महज संयोग नहीं माना जा रहा। विधानसभा गणित और दलित-आदिवासी महत्वप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए 35 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 40 सामान्य सीटों पर भी इन वर्गों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल इन मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और असंतोष के चलते दलित-आदिवासी मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर रहा, जिससे 15 वर्षों बाद कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हालांकि 2023 में समीकरण बदले और भाजपा ने एससी-एसटी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस की रणनीतिकांग्रेस का मौजूदा फोकस सिर्फ दलित नहीं, बल्कि आदिवासी समाज पर भी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का अधिकांश राजनीतिक जोर आदिवासी क्षेत्रों पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस की चुप्पी को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्मा आदिवासी समाज से आते हैं और अजाक्स के अध्यक्ष हैं, जिसे कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन रहा है। वर्मा को दिए गए कारण बताओ नोटिस के विरोध में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) समेत कई आदिवासी संगठन एकजुट हैं, जबकि ब्राह्मण समाज सरकार की निष्क्रियता से नाराज है। दिग्विजय सिंह और दलित एजेंडाप्रदेश में दलित राजनीति को धार देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में नया दलित एजेंडा तैयार किया जा रहा है। अगले एक वर्ष तक प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस एजेंडे को लेकर गतिविधियां चलाई जाएंगी और 13 जनवरी 2027 को इसे औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2002 में भी दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते दलित एजेंडा लागू हुआ था, हालांकि उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा का पलटवारभाजपा कांग्रेस की इस सक्रियता को महज “एजेंडा की राजनीति” बता रही है। प्रदेश के मंत्री रजनीश अग्रवाल का कहना है कि कांग्रेस का इतिहास एससी-एसटी वर्ग के विकास का नहीं रहा है। उनके अनुसार कांग्रेस ने जाति को जाति से लड़ाने का काम किया, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति करती है। 2028 से पहले सियासी तापमानकुल मिलाकर, 2028 के चुनाव से काफी पहले ही मध्य प्रदेश में दलित-आदिवासी राजनीति का तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने विकास और समरसता के एजेंडे पर भरोसा जता रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीति और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। recent visitors 60

70वें जन्मदिन पर मायावती का बड़ा राजनीतिक संदेश, अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

70वें जन्मदिन पर मायावती का बड़ा राजनीतिक संदेश, अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

Mayawati sends a major political message on her 70th birthday, announcing she will contest the elections alone. लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर राजनीतिक विरोधियों पर जमकर हमला बोला। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी का चोखा-बाटी नहीं, बल्कि सम्मान चाहिए, और बसपा ने हमेशा सभी जातियों व धर्मों को बराबरी का सम्मान दिया है। सरकारें बसपा की योजनाओं का नाम बदलकर चला रहीं मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्यों की सरकारें बसपा सरकार के दौरान शुरू की गई योजनाओं को सिर्फ नाम बदलकर चला रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दलों ने भ्रम फैलाकर बसपा को कमजोर और तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे अपने मंसूबों में सफल नहीं होंगे। कांग्रेस-बीजेपी पर हमला बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस, बीजेपी और अन्य जातिवादी पार्टियां अलग-अलग हथकंडे अपनाकर बसपा को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि इन पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब देकर उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा सरकार बनाई जाए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य समाज का पूरा ध्यान रखेगी बसपा मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में ब्राह्मणों को पूरी भागीदारी दी गई।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— “ब्राह्मणों को किसी का चोखा-बाटी नहीं चाहिए, उन्हें सम्मान चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के हितों का बसपा सरकार में पूरा ध्यान रखा जाएगा। बसपा ऐसी पार्टी है जिसने हमेशा सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है। कांशीराम को राष्ट्रीय शोक न दिए जाने पर नाराजगी मायावती ने आरोप लगाया कि कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया गया, जो उनके साथ उपेक्षा थी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज सहित कई वर्गों के साथ अन्याय हुआ है, जबकि बसपा सरकार के कार्यकाल में दंगे-फसाद नहीं हुए और सभी समाजों का ध्यान रखा गया, जिसमें यादव समाज भी शामिल है। सभी चुनाव अकेले लड़ेगी बसपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि— उन्होंने कहा कि जब भविष्य में अपर कास्ट का भरोसेमंद समर्थन मिलेगा, तभी गठबंधन पर विचार किया जाएगा, लेकिन इसमें अभी समय लगेगा। EVM और SIR को लेकर जताई चिंता मायावती ने ईवीएम में धांधली और बेईमानी की चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस व्यवस्था को लेकर सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भी कई शिकायतें होने की बात कही। शॉर्ट सर्किट से मची अफरा-तफरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकी गई मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कारणों से प्रेस कॉन्फ्रेंस को तत्काल रोक दिया गया और सुरक्षाकर्मी बसपा सुप्रीमो को बाहर लेकर चले गए। recent visitors 67

पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर! नालों के दूषित पानी से उगाई जा रही सब्जियां खतरनाक, हाईकोर्ट सख्त

After water, now vegetables are poisoned! Vegetables grown using contaminated drain water are dangerous, the High Court has taken a tough stand. जबलपुर। पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर घुलने का खतरा सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जबलपुर के नालों का पानी अत्यधिक सीवेज से दूषित है और इसी पानी से उगाई जा रही सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को दिए सख्त निर्देश मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है। नालों के पानी में तय मानकों से ज्यादा गंदगी प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला, उदरना नाला सहित कई नालों के पानी की जांच की गई। जांच में— की मात्रा निर्धारित मानक से कहीं अधिक पाई गई। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह पानी अनुपचारित सीवेज है, जो पीने, नहाने या खेती के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त है। छात्र के पत्र से जनहित याचिका तक यह मामला तब उजागर हुआ जब एक विधि छात्र ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बताया कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में नालों के दूषित पानी से सब्जियों की खेती की जा रही है। इसे गंभीर जनहित का मुद्दा मानते हुए हाईकोर्ट ने पत्र को जनहित याचिका (PIL) में तब्दील कर दिया। 174 एमएलडी गंदा पानी नालों में बह रहा रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर में रोजाना करीब 174 मेगा लीटर प्रतिदिन (MLD) वेस्ट वॉटर नालों में छोड़ा जा रहा है। नगर निगम के पास मौजूद 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ 58 एमएलडी पानी का ही उपचार कर पा रहे हैं, जबकि कुल क्षमता 154.38 एमएलडी है। करोड़ों की योजनाएं, फिर भी समस्या जस की तस सीवेज ट्रीटमेंट के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हाल ही में अमृत 2.0 सीवर योजना के तहत जबलपुर नगर निगम को 1202.38 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिली है, इसके बावजूद नालों का गंदा पानी खेती में इस्तेमाल हो रहा है। स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने चेतावनी दी है कि ऐसे पानी से उगाई गई सब्जियों के सेवन से संक्रमण, पेट की गंभीर बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला बड़े जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकता है। recent visitors 53