Saturday, July 4, 2026 7:08 pm

‘पत्नी की व्यक्तिगत इनकम को पति से नहीं जुड़ेगी’, आय से अधिक संपत्ति पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

जबलपुर. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी पत्नी की व्यक्तिगत आय को सरकारी विभाग में पदस्थ पति की आय में जोड़कर असेसमेंट नहीं कर सकती है। कोर्ट से इस आदेश के साथ अभियोजन स्वीकृति के आदेश व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता रीवा निवासी अधिवक्ता मीनाक्षी खरे व उनके पति आलोक खरे की ओर से दायर याचिका में आय से अधिक संपत्ति का गलत असेसमेंट करने व उनके विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता आलोक खरे वर्तमान में आबकारी विभाग में डिप्टी कमिश्नर में पद पर रीवा में पदस्थ है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी पेशे से अधिवक्ता हैं और शादी के पहले से आयकर रिटर्न फाइल कर रही हैं। वर्ष 2018 में लोकायुक्त ने आलोक खरे के घर और कार्यालय में दबिश दी थी। लोकायुक्त ने जांच में चार सितम्बर, 1998 से 15 अक्टूबर, 2019 तक याचिकाकर्ता की संपत्ति और खर्च से जुड़ा डेटा एकत्र किया था। लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास वैध आय स्त्रोत से लगभग 88.20 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त ने उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया था और सरकार की ओर से अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। याचिका में कही गई यह बात याचिका में कहा गया था कि लोकायुक्त के अनुसार याचिकाकर्ताओं के पास से 10 करोड़ 71 लाख रुपये की संपत्ति मिली थी। जबकि उनकी वैध आय 5 करोड़ 69 लाख रुपये थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि अधिवक्ता होने के कारण मीनाक्षी की अच्छी-खासी आय थी और वह अपने परिवार की आर्थिक मदद करती थी। उन्होने अपनी आय से खेती की जमीन खरीदी और उससे इस अवधि के दौरान 4 करोड़ 81 लाख रुपये की आय हुई थी। दोनों याचिकाकर्ताओं की वैध आय को जोड़कर देखा जाए तो 10 करोड़ 50 लाख रुपये हैं। जो लोकायुक्त द्वारा किए गए असेसमेंट से 21 लाख रुपये अधिक है। जो लगभग आय के वैध स्त्रोत से दो प्रतिशत अधिक है। आय के वैध स्त्रोत से 10 प्रतिशत से अधिक संपत्ति पाए जाने पर अभियोजन की अनुमत्ति प्रदान नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट ने दिया यह फैसला हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अधिवक्ता ने इनकम टैक्स रिटर्न के साथ-साथ खेती से हुई इनकम को ध्यान में रखा जाए, तो मंज़ूरी देने वाली ऑथरिटी को मंज़ूरी नहीं देनी चाहिए थी। प्रकरण को प्रारंभ में ही खत्म कर देना चाहिए था। इनकम के जाने-पहचाने सोर्स का आशय ऐसी इनकम से है जो मध्य प्रदेश सिविल सर्विस रूल्स, 1965 के रूल 19 के अनुसार सही तरीके से बनाई गई हो। कानूनी टैक्स फाइलिंग से साबित हुई इनकम कानून की नजर में जानी-पहचानी और वैध इनकम है। युगलपीठ ने अभियोजन स्वीकृति के विवादित मंज़ूरी आर्डर व आगे की कार्रवाई को निरस्त कर दिया। recent visitors 21

जबलपुर में पुलिस के छापा मारते ही भाग गया दलाल, सेक्स रैकेट के अड्डे पर मिली विदेशी महिला

जबलपुर. जबलपुर माढ़ोताल थाना अंतर्गत ग्रीन सिटी में संचालित देह व्यापार के अड्डे पर शनिवार को पुलिस ने दबिश देते हुए एक उज्बेकिस्तान की महिला सहित एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। वहीं छापे की भनक लगते ही अड्डे का संचालक मौके से फरार हो गया। जिसकी तलाश की जा रही है। माढ़ोताल पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बाबा टोला हनुमानताल निवासी शिवा चौधरी ग्रीन सिटी स्थित एक घर में एक विदेशी महिला को बुलाकर देह व्यापार का संचालन कर रहा है। माढ़ोताल थाना पुलिस ने तत्काल एक विशेष टीम गठित कर बताए गए पते पर दबिश दी गई। छापे के दौरान पुलिस ने मौके से हनुमानताल के बाबा टोला निवासी शिव चौधरी की 25 वर्षीय पत्नी तथा एक विदेशी महिला (उज्बेकिस्तान) को गिरफ्तार किया है। वहीं कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपित शिवा चौधरी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने बताया कि फरार आरोपित की तलाश में टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। recent visitors 24

भोपाल में मतदाताओं को देने होंगे दस्तावेज, SIR में 2.96 लाख पत्रकों में मिली तार्किक विसंगतियां

भोपाल. जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में दो लाख 96 हजार पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। ऐसे में अब इन मतदाताओं को नाम, पता व उम्र से संबंधित एक दस्तावेज पेश करना होगा। हालांकि इनमें से 79 हजार पत्रकों की विसंगतियां बीएलओ ने अपने स्तर पर ही दूर कर ली हैं, जबकि दो लाख 17 हजार को अब नोटिस जारी किए जाएंगे। इनकी सुनवाई नो मैपिंग मतदाताओं के साथ-साथ 85 हेल्प डेस्क पर की जाएंगी, जिसके लिए 91 अतिरिक्त एईआरओ पदस्थ कर दिए गए हैं। सात विधानसभा का SIR के दौरान सत्यापन किया गया था बता दें कि डिजिटाइज किए गए पत्रकों की तकनीकी रूप से जांच की जा रही है। इस दौरान तर्किक विसंगतियां मिलने के बाद सुनवाई वाले मतदाताओं की संख्या बढ़ गई हैं। जिले के सात विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं का एसआइआर के दौरान सत्यापन किया गया था। स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था जिनमें से कुल 16 लाख 87 हजार 33 मतदाताओं के पत्रक डिजिटाइज किए गए थे, जबकि चार लाख 38 हजार 317 मतदाताओं को एएसडीआर (अनुपस्थित, शिफ्टिंग, मृत्यु और दोहरी प्रवृष्टि) श्रेणी में रखते हुए विलोपित किया गया है। जिन मतदाताओं और उनके स्वजनों का 2003 की सूची में रिकॉर्ड नहीं मिला था, ऐसे एक लाख 16 हजार 925 मतदाता नो मैपिंग श्रेणी में रखे गए हैं। इनकी सुनवाई 85 हेल्प डेस्क पर 90 एईआरओ द्वारा की जा रही है। इनमें से अब तक 49 हजार 965 की सुनवाई हो चुकी है। दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए इसी बीच तकनीकी परीक्षण के दौरान दो लाख 96 हजार 317 पत्रकों में तार्किक विसंगतियां मिली हैं। यानी किसी के नाम, उपनाम, पिता के नाम, माता के नाम आदि में अंतर होना शामिल हैं। इनमें से 79 हजार मतदाताओं के पत्रकों का बीएलओ ने अपने स्तर पर सुधार कर लिया है, जबकि दो लाख 17 हजार 317 को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी मतदाताओं को सुनवाई के दौरान विसंगतियों को दूर करने संबंधी दस्तावेज पेश करना होगा। 181 एईआरओ 14 फरवरी तक पूरी करेंगे सुनवाई एक लाख 16 हजार 925 नो मैपिंग मतदाताओं की सुनवाई के लिए 85 हेल्पडेस्क बनाई गई हैं, जिन पर 90 एईआरओ सुनवाई के लिए नियुक्त किए गए थे। अब दो लाख 17 हजार तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं की सुनवाई भी की जानी है, जिसके लिए अतिरिक्त 91 एईआरओ नियुक्त कर दिए गए हैं। इस तरह कुल 181 एईआरओ नो मैपिंग और विसंगति वाले मतदाताओं की 14 फरवरी तक सुनवाई पूरी करेंगे, जिससे कि अंतिम मतदाता सूची में किसका नाम रखना है और किसका विलोपित करना है, यह तय किया जा सके। ऐसे समझें तार्किक विसंगति उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि तकनीकी परीक्षण के दौरान तार्किक विसंगति वाले कुल दो लाख 96 हजार 317 मतदाताओं के पत्रक चिह्नित किए गए थे। तार्किक विसंगति का मतलब यह है कि किसी मतदाता का नाम मोहनलाल एक साथ लिखा था मतदाता सूची में, लेकिन पत्रक में उसका नाम मोहन और लाल अलग-अलग लिखा गया है। इसलिए अब इस अशुद्धि को दूर करने के लिए मतदाता को एक दस्तावेज सुनवाई के दौरान पेश करना होगा। recent visitors 19

इंदौर में समय पर सीपीआर मिलने से बची जान, भाषण दे रही डॉक्टर को आया कॉर्डियक अरेस्ट

इंदौर. ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यूरोलॉजी कांफ्रेंस के दौरान एक गंभीर घटना घटित होने से बच गई। मैंगलोर से आई 40 वर्षीय डॉ. श्रीन भूटिया को भाषण देते समय अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। वे मंच पर बोलते-बोलते बेहोश होकर गिर पड़ीं। उस समय हाल में लगभग 200 विशेषज्ञ डॉक्टर उपस्थित थे। स्थिति को समझते हुए वहां मौजूद डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तुरंत सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में डॉक्टर की सांस और नब्ज में सुधार दिखने लगा। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पास के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण उनकी जान बच सकी। डॉक्टर को राजश्री अपोलो अस्पताल रेफर किया गया, जहां वे फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। कार्डियक अरेस्ट से बचाव के उपाय     नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।     ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखें।     धूमपान और शराब से दूरी बनाएं।     रोजाना व्यायाम और योग करें।     तनाव कम करें व पर्याप्त नींद लें।     आमजन तक भी सीपीआर देने की प्रक्रिया के लिए शिविर लगाए जाना चाहिए। recent visitors 22

सुपरजेट की जगह Su-57? भारत में आने वाला दुनिया का सबसे चर्चित फाइटर जेट, तैयारियों की खबर

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत' भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है। recent visitors 24

सफलता का नया मतलब: इंजीनियर ने बीमारी के चलते Google छोड़ दी जॉब, कहानी सोशल मीडिया पर छाई

 नई दिल्ली जिंदगी में हर इंसान की तलाश क्या होती है. जल्द से जल्द पैसा कमाना, खुद को एक इनसेक्योर जोन से सेक्योर जोन में ले जाना, लेकिन असल जिंदगी की प्राथमिकता क्या है. रेस में सबसे आगे जाना या फिर जिंदगी की बुनियादी जरूरत वो सेहत है,जिसे दरकिनार कर दिया जाता है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली की कहानी भी इन्हीं दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है. अमेरिका में रहने वाली टिया ली (Tia Lee) ने 2020 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (Michigan State University) से ग्रेजुएशन किया और तभी तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक चीज चाहिए जितना हो सके उतना पैसा कमाना. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी करियर जर्नी शुरू की, लेकिन तीन साल बाद यही रेस उनकी सेहत पर इतना भारी पड़ी कि आज वह सफलता को पूरी तरह नए नजरिए से देखती हैं. पैसा या सेहत-जिंदगी में क्या है अहमियत 2023 के अंत तक टिया एक साथ तीन भूमिकाएं निभा रही थीं.कैलिफोर्निया में Google की Technical Program Manager, फ्रीलांस वेबसाइट डिजाइनर और अपनी क्लोदिंग लाइन की मालिक. लगातार काम और अलग-अलग शहरों की यात्राओं ने उनकी सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया. उन्होंने CNBC Make It को बताया कि वह लगभग हर दूसरे महीने बीमार पड़ने लगी थीं. कैलिफोर्निया, मिशिगन और टेक्सास के बीच लगातार यात्रा करते-करते उन्हें लगने लगा कि बीमारी सिर्फ ट्रैवल की वजह से होती है. लेकिन कई महीनों तक यूं ही बीमार रहने के बाद डॉक्टर ने इशारा किया कि असली वजह तनाव हो सकता है. इसी बात ने टिया को सोचने पर मजबूर किया कि शायद बहुत सारी जिम्मेदारियां ही उनकी सेहत को खराब कर रही हैं. तभी उन्होंने अपने करियर को रोकने का फैसला किया. भागदौड़ में खो गई थीं… टिया ने जीवन को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए. फ्रीलांस काम कम किया, खर्चों में कटौती की और इतना पैसा बचाया कि वे सालों तक बिना नौकरी के रह सकें. वह मिशिगन में अपने माता-पिता के घर वापस आ गईं. उन्होंने अपनी Tesla कार बेचकर एक सस्ती Chevrolet ले ली ताकि खर्च और कम हो सके. यहां तक कि उन्होंने एक निजी शेफ से यह समझौता किया कि वह उसका वेबसाइट बना दें और इसके बदले शेफ हफ्तेभर का मील प्रेप दे दे.इससे उनका किराना खर्च भी खत्म हो गया. इन बदलावों ने टिया के लिए सफलता की परिभाषा बदल दी. उन्होंने बताया कि पहले उनके लिए कामयाबी का मतलब था पैसा, प्रमोशन और काम में पहचान, लेकिन अब सफलता का मतलब है अपनी सेहत और समय पर पूरा नियंत्रण. Google छोड़ने के बाद उन्होंने जून में नौकरी से इस्तीफा दिया और ब्रूक्लिन, न्यूयॉर्क में शिफ्ट होकर एक धीमी, संतुलित जीवनशैली अपनाई, जिसमें अच्छा खाना और खुद के साथ समय बिताना शामिल है. फिलहाल उनका कॉर्पोरेट दुनिया में वापस लौटने का कोई प्लान नहीं है. recent visitors 30

आनंद नगर में चलेगा बुलडोजर, कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया अन्यायपूर्ण

Bulldozer will be used in Anand Nagar, Congress calls the action unjust भोपाल। आनंद नगर में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के लिए व्यापारियों को नगर निगम ने नोटिस जारी किया है। इससे व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसकी आवाज उठाने व्यापारी मंडल एवं स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से उनके निवास पर मुलाकात की और अपनी पीड़ा साझा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी गोविंदपुरा के नागरिकों और पीड़ित दुकानदारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।  अध्यक्ष पटवारी ने गोविंदपुरा विधानसभा के आनंद नगर क्षेत्र में 40-50 वर्षों से संचालित दुकानों को तोड़ने के दिए गए आदेशों की कड़े शब्दों में निंदा की है।  उन्होंने इस कार्रवाई को अमानवीय, असंवेदनशील और गरीब-विरोधी बताया। पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार द्वारा बिना संवाद, बिना पुनर्वास और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को तोड़ने के आदेश देना सीधे-सीधे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की रोजी-रोटी पर हमला है। पटवारी ने कहा, जिस क्षेत्र ने 40 वर्षों तक लगातार भाजपा को वोट दिया, आज उसी क्षेत्र की जनता को बुलडोजर के नीचे कुचला जा रहा है। क्या यही 40 साल की वफादारी का इनाम है? उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजे के नाम पर गंभीर भेदभाव किया जा रहा है। कुछ चुनिंदा प्रभावशाली लोगों को ही लाभ दिया गया, जबकि अधिकांश छोटे दुकानदारों को या तो मुआवजा नहीं मिला या फिर 20 से 50 हजार रुपये जैसी नाममात्र की राशि देकर उनके साथ मजाक किया जा रहा है। पटवारी ने कहा कि आज के समय में नई दुकान खड़ी करना अत्यंत कठिन है और ऐसे में बिना समुचित पुनर्वास और सम्मानजनक मुआवजे के दुकानों को तोड़ना सरासर अन्याय है।  उन्होंने इस विषय में भोपाल कलेक्टर से कॉल के माध्यम से चर्चा कर आग्रह किया कि किसी भी गरीब दुकानदार की दुकान बिना वैकल्पिक व्यवस्था और उचित मुआवजे के न तोड़ी जाए। पटवारी ने भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष को निर्देश दिए कि वे आनंद नगर के दुकानदारों के समर्थन में तत्काल विरोध प्रदर्शन करें तथा आवश्यक कानूनी कदम उठाएं। पटवारी ने कहा, कांग्रेस पार्टी सदन से लेकर सड़क तक इस लड़ाई को लड़ेगी। गरीबों की रोजी-रोटी पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। recent visitors 49