Sunday, July 5, 2026 3:25 am

लाड़ली लक्ष्मी योजना पर कमलनाथ का बड़ा हमला: “1 लाख देने का वादा निकला जुमला”

Kamal Nath’s big attack on Ladli Laxmi Yojana: “The promise of giving Rs 1 lakh turned out to be a mere slogan” भोपाल। मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण के नाम पर भाजपा केवल पाखंड कर रही है और जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कमलनाथ ने कहा कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय भाजपा सरकार ने बड़े प्रचार-प्रसार के साथ लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की थी। उस समय यह दावा किया गया था कि योजना के तहत लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, लेकिन अब सामने आ रहे आंकड़े इस दावे की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि योजना में पंजीकृत बेटियों में से केवल लगभग 20 प्रतिशत बच्चियों को ही एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल पाएगी, जबकि बाकी बड़ी संख्या में बच्चियां विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं के कारण योजना से बाहर हो जाती हैं। कमलनाथ के अनुसार, आंकड़े बताते हैं कि कक्षा 6वीं में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली बालिकाओं की संख्या 13,67,897 है, लेकिन कक्षा 9वीं तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या घटकर 7,06,123 रह जाती है। यानी लगभग 48 प्रतिशत बेटियां हाईस्कूल तक पहुंचने से पहले ही सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। इसी तरह कक्षा 11वीं में केवल 2,72,443 और कक्षा 12वीं में मात्र 1,56,378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बचती हैं। कमलनाथ ने कहा कि यह स्थिति साफ दिखाती है कि सरकार ने बेटियों को एक लाख रुपये देने के नाम पर सिर्फ़ हवाबाज़ी और प्रचार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि सरकार लाड़ली लक्ष्मी योजना के ऐसे नियमों में बदलाव करे जिनकी वजह से छात्राएं लाभ से वंचित हो रही हैं। साथ ही बेटियों का ड्रॉपआउट रेट कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और योजना में पंजीकृत सभी बेटियों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए। recent visitors 52

गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों के खिलाफ भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Congress protests in Bhopal against increased gas cylinder prices, targets central government भोपाल। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के विरोध में शनिवार को भोपाल में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार बढ़ रही गैस सिलेंडर की कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। नेताओं का कहना था कि पहले ही महंगाई से जूझ रही जनता पर गैस की कीमतों में बढ़ोतरी करना “गरीबी में आटा गीला” करने जैसा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गैस की कीमतों में की गई वृद्धि को तुरंत वापस लेने की मांग की। नेताओं ने कहा कि रसोई गैस आम आदमी की जरूरत है और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी सीधे गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ डालती है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने कहा कि केंद्र सरकार को जनता की परेशानियों को समझना चाहिए और महंगाई पर तुरंत नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गैस की बढ़ी हुई कीमतें वापस नहीं ली गईं तो कांग्रेस आगे भी जनआंदोलन तेज करेगी। recent visitors 56

गांधी आश्रम छात्रावास में होली पर्व पर सेवा और संस्कारों का संगम, बांटी खुशियां

A confluence of service and values ​​on the occasion of Holi festival at Gandhi Ashram hostel, happiness was shared. भोपाल। सेवा भारती के तत्वावधान में सेवा भारती वनवासी एवं दिव्यांग बालक छात्रावास, गांधी आश्रम, गांधीनगर में निवासरत 30 वनवासी छात्रों के साथ समाजसेवियों एवं विभिन्न सेवा भावी संगठनों द्वारा होली पर्व उल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गुलाल, पिचकारी, मिष्ठान एवं उपहार भेंट किए गए।सेवा भारती महानगर भोपाल के मीडिया प्रभारी भगवान दास ढालिया ने बताया कि अभावग्रस्त वनवासी क्षेत्र के 30 बच्चे छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिनकी शिक्षा-दीक्षा एवं लालन-पालन सेवा भारती समाज के सहयोग से किया जाता है।गांधी आश्रम समिति के सचिव मनोज सोनी ने बताया कि होली के अवसर पर समाजसेवियों एवं सेवा संगठनों ने छात्रों के साथ होली मनाई। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष मुकेश शर्मा, दुर्वेश मालवीय, हुकुम सिंह ठाकुर, ललित मूलचंदानी, सत्येंद्र अग्रवाल, संतोष साहू, विजय गुप्ता (एसबीआई) सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। इस दौरान जीव सेवा संस्थान, पुष्प हरी मीरचन्दानी ट्रस्ट, नवजीवन सेवा समिति, अक्षर फाउंडेशन तथा स्वर्वेद महा मंदिर धाम वाराणसी सहित अनेक संस्थाओं द्वारा छात्रों को कंबल, ट्रैकसूट, स्कूल बैग, पानी की बोतल, भोजन सामग्री, दैनिक उपयोगी वस्तुएं, कॉपी-किताबें, मिष्ठान, नमकीन, गुलाल एवं पिचकारी आदि भेंट की गईं।सभी समाजसेवियों ने आगामी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया। अक्षर फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य के लिए योग की उपयोगिता बताते हुए योग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा भक्ति गीतों की मनोहारी प्रस्तुति भी दी गई। recent visitors 48

जन औषधि दिवस 2026 : दावा 2000 से अधिक दवाइयों और उपकरण का, हकीकत में 500 ही उपलब्ध

इंदौर। देश में मरीजों को सस्ती दवाइयां मिलें, इस उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए। दावा किया जाता है कि इन केंद्रों में 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट के साथ 2000 से अधिक प्रकार की दवाइयां और उपकरण मिलते हैं। जबकि हकीकत यह है कि इन पर करीब 500 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध हैं। इन केंद्रों पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। इंदौर में 100 और मध्य प्रदेश में 600 से अधिक केंद्र हैं, लेकिन यहां अभी भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, प्रोटीन पाउडर, फेसवाश आदि ही उपलब्ध नहीं होते हैं। इस कारण मरीजों को मजबूरन मेडिकल दुकान पर जाकर महंगे दामों में दवाइयां खरीदनी पड़ती है। यह भी देखा गया है कि इन केंद्रों पर सिर्फ जेनरिक दवाइयों को बेचने की ही अनुमति होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यानी यह सभी प्रकार की दवाइयां बेचते हैं क्योंकि इन पर कभी कार्रवाई नहीं होती है। मरीजों को जरूरी दवाइयां नहीं मिलती बता दें कि उक्त योजना 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसके बाद 2016 में भाजपा सरकार ने इसे री-लांच किया। अब हालत यह है कि जगह-जगह जन औषधि केंद्र तो खुल गए हैं लेकिन मरीजों को जरूरी दवाइयां नहीं मिलती। सबसे अधिक परेशानी उन्हें होती है, जो दूर-दूर से यहां शासकीय अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आते हैं। जो दवाई उन्हें शासकीय अस्पताल में नहीं मिलती है, वे इन केंद्रों पर लेने के लिए जाते हैं। यहां पर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन महंगी दवाएं खरीदना पड़ती हैं। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक केंद्र इंदौर में बता दें जन औषधि के सबसे अधिक केंद्र प्रदेश में इंदौर में ही हैं, बावजूद मरीजों को दवाइयां खरीदने में परेशानी होती है। हालांकि कई दवाइयां इन केंद्रों पर मरीजों को आसानी से मिल जाती हैं, जिससे मरीजों को फायदा भी मिल रहा है। 1000 रुपये की दवाइयां मिलती हैं 300 में अधिकारियों ने बताया कि जन औषधि केंद्र के माध्यम से 50 से 70 प्रतिशत सस्ते में दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं। जैसे बाजार में यदि कोई दवाई 1000 रुपये में मिल रही है तो वह केंद्र में 300 रुपये में मिल सकती है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ हो रहा है। भ्रमित हो रहे लोग, अन्य केंद्रों पर भी लगी पीएम की फोटो शहर में करीब 100 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो लगी हुई है। जबकि इसके अलावा भारत औषधि केंद्र जैसे नाम से केंद्र भी खोले गए हैं। यहां प्रधानमंत्री के फोटो लगाने की अनुमति नहीं है। बावजूद फोटो लगा रखे हैं। इन्हें नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन कोई जवाब अब तक नहीं आया है। समय पर नहीं मिलती दवाइयां दवाई न मिलने पर जब भी केंद्र संचालकों से इसका कारण पूछा जाता है तो वे यही कहते हैं कि हमें दवाइयां समय पर नहीं मिल पाती हैं। कई बार दवाइयों का आर्डर देते हैं, लेकिन हमें समय पर दवाई ही नहीं मिल पाती है। ऐसे में मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। नियम है कि सात दिन में केंद्र पर जो भी दवाई का आर्डर देते हैं, वे आ जानी चाहिए, लेकिन हमारे पास 15 दिन-एक माह तक दवाइयां नहीं आ पाती हैं। वहीं कई बार दवाइयां आती भी हैं तो मरीज अधिक मात्रा में लेकर चले जाते हैं। recent visitors 107