लाड़ली लक्ष्मी योजना पर कमलनाथ का बड़ा हमला: “1 लाख देने का वादा निकला जुमला”

Kamal Nath’s big attack on Ladli Laxmi Yojana: “The promise of giving Rs 1 lakh turned out to be a mere slogan” भोपाल। मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण के नाम पर भाजपा केवल पाखंड कर रही है और जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कमलनाथ ने कहा कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय भाजपा सरकार ने बड़े प्रचार-प्रसार के साथ लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की थी। उस समय यह दावा किया गया था कि योजना के तहत लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, लेकिन अब सामने आ रहे आंकड़े इस दावे की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि योजना में पंजीकृत बेटियों में से केवल लगभग 20 प्रतिशत बच्चियों को ही एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल पाएगी, जबकि बाकी बड़ी संख्या में बच्चियां विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं के कारण योजना से बाहर हो जाती हैं। कमलनाथ के अनुसार, आंकड़े बताते हैं कि कक्षा 6वीं में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली बालिकाओं की संख्या 13,67,897 है, लेकिन कक्षा 9वीं तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या घटकर 7,06,123 रह जाती है। यानी लगभग 48 प्रतिशत बेटियां हाईस्कूल तक पहुंचने से पहले ही सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। इसी तरह कक्षा 11वीं में केवल 2,72,443 और कक्षा 12वीं में मात्र 1,56,378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बचती हैं। कमलनाथ ने कहा कि यह स्थिति साफ दिखाती है कि सरकार ने बेटियों को एक लाख रुपये देने के नाम पर सिर्फ़ हवाबाज़ी और प्रचार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि सरकार लाड़ली लक्ष्मी योजना के ऐसे नियमों में बदलाव करे जिनकी वजह से छात्राएं लाभ से वंचित हो रही हैं। साथ ही बेटियों का ड्रॉपआउट रेट कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और योजना में पंजीकृत सभी बेटियों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 47

किसानों के लिये जरूरी है, कमलनाथ का कर्ज माफी मॉडल

किसानों के लिये जरूरी है, कमलनाथ का कर्ज माफी मॉडल

Kamal Nath for farmers loan waiver model is essential for farmers. भोपाल। Kamal Nath for farmers loan मध्य प्रदेश आज भी एक कृषि प्रधान राज्य है, वहां करीब 70 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। इसके बावजूद प्रदेश में किसानों को चुनौतियां बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सत्ताधारी पाजपा ने किसानों से जो भी यादे किये वे निभाए नहीं। न तो वादे के मुताबिक 2022 में किसानों की आमदनी पुगनी हुई उऔर न ही 2023 के विधानसभा चुनाव में गेहूं और धान का यह न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया गया, जिसका वादा भाजपा ने किया चा। सवकि इस दौरान कृषि लागत लगातार बढ़ती गई है। ऐसे में जरूरी है कि पलटकर देखा जाए कि प्रदेश के किसानों के हित के लिए अत्तील में कौन से बढ़िया काम हुए थे और क्या उन्हें दुहराया जा सकता है। Kamal Nath for farmers loan पाठकों को याद होगा कि दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने सबसे पहले किसानों की कर्जमाफी के आदेश पर दस्तखत किये थे। कर्ज में फंसे किसानों का पूरा अध्ययन करने के बाद कमलनाथ सरकार ने वर्ष 2019 में किसानों का कर्म माफ कर दिया था। प्रदेश के इतिहास में यह सबसे बाते कर्न माफी योजना थी। कमलनाथ सरकार ने दो चरणों में करीब 27 लाख डिसानों का कर्ज माफ किया था, जो प्रदेश के लिये अपने आप में एक रिकॉर्ड है इस योजना के पहले चरण में 20 लाख 23 हजार 136 किसानों का कर्ज माफ किया था और दूसरे चरण में 6 लाख 72 हमार 245 किसानों का कर्ज माफ किया गया। इस तरह करीब 27 लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया। कमलनाथ अगले चरण में और भी किसानों का कर्ज माफ करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इस बीए उनकी सरकार गिरा की गई। Kamal Nath for farmers loan इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि कमलनाथ ने किसानों का कर्ज तो साफ किया लेकिन राजकोष पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया। कर्जमाफी के पाले चरण में 7108.96 करोड़ रूपये और दूम चरण में 4538,03 करोड़ रूपये यानी कुरा मिलाकर 11,646.96 करोड़ रूपये के किसान कर्ज माफ किये गए। देवास, खरगोन, मंदसौर, सीहोर और विदिशा जिलों में तो एक-एक लाख से अधिक किसानों का कर्ज माफ किया गया। छिंदवाड़ा में करीब 75 हजार किसानों का कर्ज माफ किया गया। मध्य प्रदेश जैसे राज्य के लिये यह काफी बड़ी संख्या है और खासकर कमलनाथ सरकार की जिस तरह का खाली खजाना मिला था, उसमें तो यह और बड़ी चुनौती थी। लेकिन इस चुनौती से निपटने में कमलनाथ का अनुभव काम आया था। छिंदवाड़ा से 40 साल तक सांसद रहने के कारण ये किसानों की जरूरतों को बखूयी जानते थे, तो दूसरी तरफ देश के वाणिज्य मंत्री के रूप में उनका अनुभव बैंकों पर नकेल कसने में काम आया। कमलनाथ ने बैंकों से कहा कि वे उसी तरह किसानों का कर्ज माफ करें जिस तरह के कोपटि का कि संपूर्ण बकाया राशि की जगह बैंक एका कर्ज माफ करते हैं। इसका मतलब यह या ऐसी राशि पर समझौता करें तो बैंक और राज्य सरकार दोनों को मंजूर हो। कमालनाय बारीक ज्ञान के सामने बैंकों की दलीलें नहीं के बैंकिंग, मौद्रिक नीति और अर्थशास्त्र के टिकी और 11,646.96 करोड़ का कर्ज किसानों के सिर से उतर गया। अब जरा आज की तस्वीर पर गौर करें। Kamal Nath for farmers loan आज स्थिति यह कि किसान पिछले एक महीने में यूरिया में मिल पाने के कारण प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन कर रहे है। नकली खाद और बीज किसानों के लिये दूसरा बड़ा संकट हैं। तीसरी समस्या यह आ गई है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार और किसानों ने मिलकर खरीब 2024 में करीब 1792 करोड़ रूपये फसल बीमा का प्रीमियम दिया। उसके बाद राज्य सरकार के अधिकारियों ने माना कि सोयाबीन की फसल को 50 से 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। लेकिन बीमा कंपनी ने सैटेलाइट सर्व का बहाना बनाकर इसे खारिज कर दिया और किसानों को बीमा क्लेम के नाम पर 100-200 रुपये पकड़ा दिये। Kamal Nath for farmers loan 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से किसानों के साथ लगातार यही हो रहा है। ऐसे में जरूरत इस बात की है किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिये मौजूदा सरकार सबसे पहले किसानों की कर्जमाफी करे और इसके लिगे कमलनाथ मॉडल को अपनाए। इसी तरह बीमा कंपनियों पर भी कमलनाथ के अनुभव का लाभ लेते हुए लगाम कसे। सरकार को यह समझना होगा कि जम किसान का कर्ज माफ किया जाएगा तो किसान के पास कुछ पैसा बचेगा। इसी पैसे को किसान बाजार में खर्च करेगा और इससे आर्थिक गतिविधि का पहिया घूमेगा। आर्थिक गतिविधि के लिये पूंजी का गतिमान होना बहुत जरूरी है। अगर एक 10 का नोट एक व्यक्तिकी जेब में है तो वह सिर्फ 10 रूपये है। लेकिन अगर किसान ने 10 रूपये ऑटो वाले को दिये, ऑटो बाले ने परचून वाले को दिये, परचून वाले बच्चे की स्कूल फीस में दिवे, स्कूल वालों ने ऐसे स्टेशनरी चाले को दिये और स्टेशनरी वाले किसान से गेहूं खरीदा तो पांच हाथों से गुजरकर यह 10 रूपये 50 रूपये की आर्थिक गतिविधि कर देते हैं। इसी को वेलोसिटी ऑफ रूपो कहते हैं। Read more: करोड़ो सम्पत्ति के मालिक हैं शिवराज सिंह के चाहते सीहोर विधायक सुदेश राय का साम्राज्य इसलिये बेहतर होगा कि मध्य प्रदेश सरकार हर महीने 5000 करोड़ रूपये का कर्ज लेने के बजाय किसानों का कर्ज माफ करे और किसानों की जेब में पैसा पहुंचाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेज करे। मुझे लगता है कि सरकार अगर इस संबंध में कमलनाथ से कोई सलाह मांगेगी तो वे प्रदेश हित में जरूर सलाह देंगे। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की … Read more

कमलनाथ ने मोदी सरकार को लिया आड़े-हाथ, आयुष्मान योजना को बताया सफेद हाथी

भोपाल। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना गरीबों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। केंद्र के दावों के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित करोड़ों गरीब अपना मुफ्त इलाज करवा रहे हैं। लेकिन इस दावे पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आयुष्मान योजना को ‘सफेद हाथी’ बताया और कहा कि 150 से ज्यादा बीमारियों को निजी अस्पताल में इलाज से बाहर कर दिया गया है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आयुष्मान योजना धीरे-धीरे सफेद हाथी बनती जा रही है। मध्य प्रदेश में 196 बीमारियों को निजी अस्पतालों में इलाज से बाहर कर दिया गया है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में उपचार की समुचित व्यवस्था नहीं है। मलेरिया, मोतियाबिंद का ऑपरेशन, छोटे बच्चों की बीमारी, बुजुर्गों की कई बीमारियां निजी अस्पतालों में इलाज से बाहर कर दी गई हैं।” कमलनाथ ने आरोप लगाया कि “बड़ी संख्या में बीमारियों को निजी अस्पतालों में उपचार से बाहर करने से आयुष्मान कार्ड धारक उपचार कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। मध्य प्रदेश पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में निचले पायदान पर है और उस पर आयुष्मान कार्ड का अप्रभावी हो जाना लोक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत चिंता का विषय है।” उन्होंने आगे कहा, “स्वास्थ्य की रक्षा करना और अच्छा उपचार कराना हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि इस विषय में गंभीरता से विचार करें और एक कमेटी बनाकर बहुत सारी बीमारियों को दोबारा निजी अस्पतालों में उपचार के लिए खोला जाए।” कमलनाथ ने आगे लिखा कि जो अस्पताल आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं, उन पर निश्चित तौर पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं कि मध्य प्रदेश के जरूरतमंद नागरिक उपचार से वंचित कर दिए जाएं। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 119