आज शाम थम जाएगा दतिया में चुनावी शोर, 2.20 लाख मतदाता करेंगे 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

Election campaigning in Datia will come to a halt this evening; 2.20 lakh voters will decide the fate of 21 candidates. विधानसभा उपचुनाव में मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता ही घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर सकेंगे। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में 2 लाख 20 हजार 344 मतदाता 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। ईवीएम में प्रत्याशियों के साथ नोटा का विकल्प भी रहेगा। तीन अगस्त को नतीजे आएंगे। दतिया में कुल 2,20,344 मतदाता हैं। इनमें 1,16,088 पुरुष और 1,04,246 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 10 अन्य मतदाता भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। विधानसभा क्षेत्र में 1,372 दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक उम्र के 1,237 और 443 सर्विस वोटर भी हैं। यही मतदाता 30 जुलाई को ईवीएम में बटन दबाकर 21 प्रत्याशियों की किस्मत तय करेंगे। भाजपा ने विकास को बनाया मुख्य मुद्दाभाजपा ने चुनाव प्रचार में दतिया के विकास को मुख्य मुद्दा बनाया। पार्टी ने ढाई साल से क्षेत्र में विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस को घेरा। भाजपा नेताओं ने मतदाताओं से कहा कि पार्टी प्रत्याशी के जीतने पर रुके हुए विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा। प्रचार के दौरान सरकार के काम और दतिया के विकास को लेकर भी जनता के बीच नेता पहुंचे। कांग्रेस ने नरोत्तम के साथ भाजपा को घेरावहीं कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में दतिया उपचुनाव में भाजपा के दावेदार माने जा रहे पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को निशाने पर रखा। पार्टी ने उनके कार्यकाल के दौरान दतिया में कानून-व्यवस्था और कथित गुंडागर्दी को लेकर लगातार सवाल उठाए। कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने को भी चुनावी मुद्दा बनाया और इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधा। दोनों दलों ने जातीय समीकरण साधने लगाई पूरी ताकतदतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 40-40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार प्रचार में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी रैली और जनसभा कर मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। करीब 10 से 15 कैबिनेट मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में जातीय और स्थानीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी दी गई। ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं ने भी प्रचार में मोर्चा संभाला। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार प्रचार करते रहे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा हेमंत कटारे, जयवर्धन सिंह और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अन्य नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। दोनों दलों ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए पूरी ताकत लगाई। आज पांच बजे के बाद बाहरी नेताओं की नो एंट्रीमंगलवार शाम पांच बजे प्रचार थमने के बाद बाहर से आए नेताओं को दतिया विधानसभा क्षेत्र की सीमा से बाहर जाना होगा। इसके बाद प्रत्याशी और स्थानीय कार्यकर्ता ही मतदाताओं से डोर-टू-डोर संपर्क कर सकेंगे। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद अब दोनों दलों का फोकस मतदान के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने पर रहेगा। 30 को ईवीएम में बंद हो जाएगा प्रत्याशियों का भाग्य30 जुलाई को मतदान के साथ ही 2.20 लाख मतदाताओं का फैसला ईवीएम में बंद हो जाएगा। 21 प्रत्याशियों के साथ नोटा भी विकल्प होगा और मतगणना में तय होगा कि दतिया की जनता ने किसके पक्ष में अपना जनादेश दिया। recent visitors 3

मध्य प्रदेश: आज किसानों का भोपाल कूच व CM हाउस के घेराव की तैयारी, मूंग की 100% खरीदी पर अड़े; अब आगे क्या?

Madhya Pradesh: Farmers set to march to Bhopal and lay siege to the CM’s residence today, adamant on 100% procurement of moong; what next? मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है। किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, फसल बीमा में सुधार, बिजली कटौती बंद करने और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गयाकिसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतानपहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबावकिसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोपकिसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी। इन मांगों पर अड़े किसानकिसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है। recent visitors 7