एक आतंकी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है: जयशंकर का पाकिस्तानी रिपोर्टर को जवाब,,

A terrorist nation is asking me this question: Jaishankar’s reply to a Pakistani reporter. नई दिल्ली । फॉरेन मिनिस्टर एस जयशंकर ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के एक रिपोर्टर को आतंकवाद पर करारा जवाब दिया। पाकिस्तानी रिपोर्टर ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को स्पॉन्सर करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया था। इस पर जयशंकर ने कहा– एक आतंकी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है? कम ऑन। जयशंकर का यह जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि एक दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से इंडियन रिपोर्टर ने भी टेररिज्म और आतंकी हाफिज सईद को लेकर सवाल किया था। हालांकि, शाहबाज ने चुप्पी साध ली थी और हाथ हिलाते हुए वहां से निकल गए थे। पाक रिपोर्टर ने बीच में पूछा सवालदरअसल, जयशंकर न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर में लाइबेरिया की फॉरेन मिनिस्टर सारा बेसोलो न्यांती के साथ प्रेस के सवालों का जवाब दे रहे थे। यह ब्रीफिंग समुद्री जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स को लेकर थी। ऑर्गेनाइजर्स ने पहले ही कह दिया था कि ब्रीफिंग में केवल स्टेटमेंट दिए जाएंगे और सवाल-जवाब नहीं होंगे। ब्रीफिंग खत्म होने वाली थी, तभी पाकिस्तानी रिपोर्टर ने खड़े होकर जयशंकर से पूछा- आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को स्पॉन्सर करना कब बंद करेगी? इस पर जयशंकर ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा- एक आतंकी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है? कम ऑन। इसके बाद UN में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव पी हरीश ने रिपोर्टर से कहा- आपको अपना जवाब मिल गया है। भारत पर आरोप लगाकर खुद घिरा पाकिस्तानपाकिस्तानी रिपोर्टर ने अपने सवाल के जरिए भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड उसके आरोपों पर भारी पड़ गया। भारत लगातार कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी के टूल की तरह इस्तेमाल करता है। भारत का आरोप है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने, ट्रेनिंग और फंडिंग मिलती रही है। recent visitors 41

उपचुनाव का प्रचार तेज: जयवर्धन सिंह ने भाजपा को घेरा, 5 गुटों में बंटी पार्टी बताया, बोले- नतीजे 2028-2029 की दिशा करेंगे तय

By-election campaigning intensifies: Jaivardhan Singh targets the BJP, describing the party as divided into five factions, and states that the results will determine the direction for 2028–2029. आगर मालवा। सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रचार तेज हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी विष्णु पाटीदार के समर्थन में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने नुक्कड़ सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर कई आरोप लगाए और कहा कि सुसनेर का चुनाव सिर्फ नगर परिषद अध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, इस चुनाव के नतीजों का असर 2028 और 2029 के चुनावों की दिशा पर भी पड़ सकता है। ‘सिर्फ परिषद अध्यक्ष का चुनाव नहीं’जयवर्धन सिंह ने सभा में कहा, “चुनाव के पहले आपके सामने चार विधायक खड़े हैं, क्योंकि बात सिर्फ परिषद अध्यक्ष की नहीं है। एक-एक चुनाव का परिणाम 2028 और 2029 के चुनाव को तय करेगा।” उन्होंने दतिया चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां बीजेपी ने करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन परिणाम में बीजेपी के धनबल की हार और कांग्रेस के जनबल की जीत हुई। 40 करोड़ रुपये खर्च होने का यह दावा जयवर्धन सिंह के बयान पर आधारित है। बीजेपी में गुटबाजी का लगाया आरोपजयवर्धन सिंह ने बीजेपी पर गुटबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी एक नहीं बल्कि पांच गुटों में बंटी हुई है। उन्होंने कहा, “एक मामा की बीजेपी है, एक मोहन यादव जी की बीजेपी, एक सिंधिया जी की बीजेपी, एक नाराज बीजेपी और एक महाराज बीजेपी है, जबकि कांग्रेस एक है।” वोटर लिस्ट को लेकर भी लगाए आरोपकांग्रेस नेता ने मतदाता सूची को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि लोगों के नाम जोड़ने का फैसला आगर या भोपाल में नहीं, बल्कि दिल्ली में बैठकर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहीं यह तय किया जा रहा है कि किसे वोट करना है और किसे नहीं। मतदाता सूची को लेकर लगाए गए इन आरोपों के संबंध में संबंधित निर्वाचन अधिकारियों का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है। 29 सितंबर को होना है मतदानसुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव के लिए 29 सितंबर को मतदान होना है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतगणना 3 अक्टूबर को होगी। सुसनेर का चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है, जबकि राज्य के कई अन्य नगरीय निकायों के उपचुनाव स्थगित किए जा चुके हैं। कांग्रेस ने विष्णु पाटीदार को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि बीजेपी की ओर से प्रदीप सोनी चुनाव मैदान में हैं। recent visitors 32

बरगी बांध के खोले जाएंगे 9 गेट: नर्मदा नदी में छोड़ा जाएगा 2522 क्यूसेक पानी, तटीय इलाकों में अलर्ट; 6-8 फीट तक जलस्तर बढ़ने की संभावना

9 gates of Bargi Dam to be opened: 2,522 cusecs of water to be released into the Narmada River; alert issued for riparian areas; water level likely to rise by 6–8 feet. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। रानी अवन्ति बाई परियोजना सागर बरगी बांध में जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण बांध में पानी की आवक बढ़ गई है। बांध के जलस्तर को नियंत्रित और स्थिर रखने के लिए शनिवार 26 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे से 9 जलद्वार खोले जाएंगे। इन गेटों को औसतन 1.83 मीटर की ऊंचाई तक खोला जाएगा और करीब 2522 क्यूसेक पानी मां नर्मदा नदी में छोड़ा जाएगा। जलस्तर में 6-8 फीट तक वृद्धि की संभावनाजल निकासी बढ़ने के बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर में मौजूदा स्तर की तुलना में करीब 6 से 8 फीट तक की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले शुक्रवार 25 सितंबर की शाम 6 बजे बरगी बांध के 5 जलद्वारों से 780 क्यूसेक पानी नर्मदा में छोड़ा गया था। इसके बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर में करीब 3 से 4 फीट की वृद्धि हुई है अब बांध में पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए जल निकासी और बढ़ाई जा रही है। बारिश के बाद बढ़ी पानी की आवकबरगी बांध के जलग्रहण क्षेत्र में शुक्रवार दिन और रात के दौरान हुई बारिश के बाद बांध में पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल निकासी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। प्रबंधन के अनुसार बांध के जलस्तर को नियंत्रित रखना जरूरी है जिसके चलते 9 जलद्वारों से पानी छोड़ा जाएगा। 2522 क्यूसेक पानी नर्मदा में छोड़ा जाएगाशनिवार सुबह 11 बजे से बांध के 9 जलद्वार औसतन 1.83 मीटर तक खोले जाएंगे। इनसे करीब 2522 क्यूसेक पानी नर्मदा नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इससे नर्मदा के घाटों और तटीय इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है मौजूदा जलस्तर की तुलना में करीब 6 से 8 फीट की बढ़ोतरी का अनुमान है। पानी की आवक के अनुसार बदल सकती है निकासीबांध प्रबंधन ने बताया कि जलग्रहण क्षेत्र से पानी की आवक लगातार बदल रही है। ऐसे में नर्मदा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा भी परिस्थिति के अनुसार बदली जा सकती है जरूरत पड़ने पर जल निकासी की मात्रा को कम या बढ़ाया जा सकता है। recent visitors 33

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में एक ही गलती दो बार, एमए अंग्रेजी परीक्षा में फिर थमा दिया गलत पेपर

Same mistake repeated at Jabalpur’s Rani Durgavati University: wrong paper handed out again in the MA English exam. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में लापरवाही का मामला लगातार दूसरी परीक्षा में सामने आया है। एमए अंग्रेजी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को 24 सितंबर को ‘क्रिटिकल थ्योरी’ के पेपर में तृतीय सेमेस्टर का प्रश्नपत्र वितरित कर दिया गया। इसके बाद 26 सितंबर को ‘इंग्लिश लैंग्वेज’ की परीक्षा में भी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को तृतीय सेमेस्टर का प्रश्नपत्र थमा दिया गया। पहली परीक्षा में हुई गलती की जानकारी विद्यार्थियों ने लिखित आवेदन के माध्यम से दी थी, इसके बावजूद अगली परीक्षा में भी वही चूक दोहरा दी गई। नाराज विद्यार्थियों ने शनिवार को दोबारा आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। पहली गलती के बाद भी नहीं संभली व्यवस्थाएमए अंग्रेजी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा 24 सितंबर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू हुई थी। पहले पेपर ‘क्रिटिकल थ्योरी’ में परीक्षा केंद्र पर विद्यार्थियों को जो प्रश्नपत्र वितरित किया गया, उसमें तृतीय सेमेस्टर का प्रश्नपत्र होने की बात सामने आई। विद्यार्थियों ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई और विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित आवेदन सौंपकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि अगली परीक्षा में प्रश्नपत्रों की जांच कर ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। लेकिन 26 सितंबर को आयोजित ‘इंग्लिश लैंग्वेज’ की परीक्षा में भी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को तृतीय सेमेस्टर का प्रश्नपत्र वितरित कर दिया गया। दो परीक्षाओं में एक जैसी चूक से उठे सवाललगातार दो परीक्षाओं में प्रश्नपत्र के सेमेस्टर की एक जैसी गलती सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पहली परीक्षा में हुई त्रुटि की जानकारी उसी दिन लिखित रूप से दे दी गई थी। इसके बावजूद अगली परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सेमेस्टरवार जांच नहीं हो सकी। विद्यार्थियों ने 26 सितंबर को दोबारा आवेदन देकर मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी और परीक्षा संबंधी त्रुटि के निराकरण के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग की। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा की तारीख, विषय और सेमेस्टर पहले से निर्धारित हैं। इसके बावजूद लगातार दो पेपर में गलत सेमेस्टर का प्रश्नपत्र पहुंचना सामान्य चूक नहीं मानी जा सकती। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति से विद्यार्थियों के समय, तैयारी और परीक्षा परिणाम को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है। recent visitors 33

विवाद के बीच तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक; SIR को लेकर लिया बड़ा फैसला, अब नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर

Meeting of the three Election Commissioners amidst the controversy; major decision taken regarding SIR—no more making repeated rounds of offices. Election Commission Meeting: विवादों के बीच शनिवार को दिल्ली में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) कि एक बैठक हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेंद्र कुमार ने चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर निर्वाचन सदन में यह बैठक की। बैठक के बाद आयोग ने एक विस्तृत प्रेस नोट जारी किया जिसमें SIR प्रक्रिया, फॉर्म-6, ECINet डेटाबेस और आंतरिक प्रशासनिक फैसलों की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। आयोग ने साफ किया कि आंतरिक चर्चाओं के दौरान अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है और आयोग द्वारा लिए गए सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। अब बार-बार ऑफिस जाने की जरूरत नहींवोटरों को राहत देते हुए चुनाव आयोग ने तय किया है कि जिन लोगों को चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान नोटिस मिले हैं, उन्हें अब ERO या AERO ऑफिस बार-बार जाने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ऐसे वोटरों के पते पर खुद जाकर डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करेंगे और उन्हें ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे। आमने-सामने की सुनवाई सिर्फ खास हालात में और प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन होगी। जरूरत पड़ने पर, वोटर अपनी जगह सुनवाई में शामिल होने के लिए परिवार के किसी बालिग सदस्य को अधिकृत कर सकता है। दिल्ली और महराष्ट्र में बढ़ाई गई समय-सीमाराज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के अनुरोध को मानते हुए चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां जमा करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है और उनके निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तय की गई है। वहीं, महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 12 अक्टूबर 2026 तक और उनके निपटारे की अवधि 10 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, सभी जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs) को निर्देश दिया गया है कि वे नाइट शेल्टर, मजदूरों, बेघर लोगों और समाज के वंचित वर्गों के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाएं। ECINet पोर्टल की जांच के लिए IIT विशेषज्ञों की समितिचुनाव आयोग ने फील्ड लेवल के अधिकारियों के लिए डेटाबेस एक्सेस और तकनीकी सुरक्षा की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल समिति बनाने का फैसला किया है। इस समिति की अध्यक्षता एक सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर करेंगे और इसमें IIT/IIIT के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति जांच करेगी कि क्या ECINet पोर्टल सभी कानूनी नियमों और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन करता है या नहीं। इसके अलावा, अधिकारियों की एक समिति आयोग की मंजूरी लेने से पहले IT मॉड्यूल से जुड़ी सभी नई पहलों पर विचार करेगी।चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी निर्देशचुनाव आयोग के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए यह तय किया गया है कि भविष्य की सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही जारी कर दिया जाएगा और बैठकों से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी। अधिकारियों की सालाना परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (APAR) हर साल 31 दिसंबर तक पूरी हो जानी चाहिए और अधिकारियों की किसी भी विदेश यात्रा के लिए आयोग से पहले से मंजूरी लेना जरूरी होगा। इसके अलावा, चुनाव आयुक्तों के सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। 20 राज्यों में SIR का काम पूराइसके अलावा, आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR से जुड़ा काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। फॉर्म-6 के साथ जमा किए गए सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने आदेश में पहले ही सही ठहराया है। कोई भी योग्य वोटर या युवा नागरिक, जिसका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाया है, वह फॉर्म-6 भरकर अपना नाम शामिल करवाने के लिए आवेदन कर सकता है। recent visitors 20

यूजीसी के नए प्रावधानों पर सवर्ण समाज का प्रदर्शन: माता मंदिर से राजभवन तक मार्च,अब दिल्ली कूच की तैयारी

Upper-caste community protests against new UGC provisions: March from Mata Mandir to Raj Bhavan; preparations now underway to march to Delhi. यूजीसी के वर्ष 2026 के नए प्रावधानों के विरोध में शनिवार को भोपाल में सवर्ण समाज ने आंदोलन की शुरुआत की। माता मंदिर स्थित प्लेटिनम प्लाजा से राजभवन तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला। राजभवन पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए प्रावधानों को वापस लेने समेत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई से पहले जांच की मांग उठाई।प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने कहा कि नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज में असंतोष है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों का असर विद्यार्थियों और उनके अधिकारों पर पड़ रहा है। इसी को लेकर भोपाल से आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने की रणनीति बनाई गई है। आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांगप्रदर्शनकारियों ने आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग रखी। इसके साथ ही एससी-एसटी एक्ट के मामलों में कार्रवाई से पहले जांच किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। समाज का कहना है कि किसी भी कानून का इस्तेमाल कार्रवाई से पहले तथ्यों की जांच के बाद होना चाहिए। भोपाल से दिल्ली तक आंदोलन ले जाने की तैयारीसवर्ण समाज के कृष्णा बुंदेला ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे स्तर पर कार्यक्रम पहले से आयोजित किए जा रहे थे, लेकिन अब राजधानी भोपाल से आंदोलन का औपचारिक आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन दिल्ली तक आंदोलन ले जाने की शुरुआत है। बुंदेला के मुताबिक, 2012 के यूजीसी एक्ट में बदलाव के बाद वर्ष 2026 में लाए गए नए प्रावधानों को लेकर समाज की आपत्ति है। उनका कहना है कि इससे सवर्ण समाज के बच्चों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “सवर्ण समाज का बच्चा जाएगा कहां? अपने बच्चों की रक्षा के लिए हमें ही मैदान में आना पड़ेगा। सरकार से प्रावधान वापस लेने की अपीलबुंदेला ने सरकार से ऐसे प्रावधान नहीं बनाने की अपील की, जिनसे उनके अनुसार सामाजिक सौहार्द और देश की एकता-अखंडता प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि समाज अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर इसे दिल्ली तक ले जाया जाएगा।भोपाल में हुए पैदल मार्च के साथ ही संगठन ने आगे के आंदोलन के लिए लोगों को जुटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। recent visitors 18

MP में बिजली संकट की आहट! कोयला स्टॉक पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

MP बिजली संकट को लेकर उमंग सिंघार ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कोयला स्टॉक और ताप बिजली घरों के घटते उत्पादन का दावा करते हुए रबी सीजन में किसानों की बिजली जरूरत को लेकर चिंता जताई। भोपाल। मध्यप्रदेश में आगामी रबी सीजन और त्योहारी दिनों में बिजली की बढ़ती मांग के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में संभावित MP बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कोयले के स्टॉक और ताप बिजली घरों के उत्पादन पर सवाल उठाए हैं। MP बिजली संकट को लेकर उमंग सिंघार का दावा उमंग सिंघार ने कहा कि MP बिजली संकट की स्थिति को देखते हुए सरकार को रबी सीजन से पहले पर्याप्त बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। उमंग सिंघार ने दावा किया कि मध्यप्रदेश के ताप बिजली घरों में कोयले का स्टॉक घटकर 4.04 लाख मीट्रिक टन रह गया है। उनके मुताबिक यह स्टॉक करीब 6 दिन की जरूरत के बराबर है।सिंघार ने कहा कि आने वाले समय में रबी सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ेगी। वहीं नवरात्रि के दौरान घरेलू बिजली खपत में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में सीमित कोयला स्टॉक को लेकर उन्होंने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। बिजली उत्पादन में गिरावट का भी आरोप उमंग सिंघार के अनुसार, प्रदेश के प्रमुख ताप बिजली घरों का बिजली उत्पादन 1088.4 मेगावाट से घटकर 404.2 मेगावाट तक पहुंच गया है।उन्होंने कहा कि यदि बिजली उत्पादन और कोयले की उपलब्धता को लेकर समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। Read More: जनता जमीन पर परेशान, ₹350 करोड़ के जेट के बाद ₹225 करोड़ का हेलीकॉप्टर खरीदी पर ! उमंग सिंघार ने मोहन सरकार को घेरा 24 घंटे बिजली के दावे पर सरकार को घेरा सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के दावों और प्रचार से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।उन्होंने किसानों को रबी सीजन में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग करते हुए सरकार से बिजली व्यवस्था को लेकर ठोस तैयारी करने को कहा। ‘उजाले के वादे, संकट का अंधेरा’ उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता को उजाले के वादे किए गए थे, लेकिन मौजूदा स्थिति में बिजली संकट की आशंका दिखाई दे रही है।उन्होंने सरकार से कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और ताप बिजली घरों में उत्पादन क्षमता बनाए रखने की मांग की। आंकड़ों को लेकर जरूरी बात कोयला स्टॉक और बिजली उत्पादन से जुड़े 4.04 लाख मीट्रिक टन, करीब 6 दिन और 1088.4 से 404.2 मेगावाट के आंकड़े उमंग सिंघार द्वारा किए गए दावे पर आधारित हैं। संबंधित सरकारी विभाग या बिजली कंपनियों की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि की जा सकेगी। recent visitors 31