The Collector has submitted a report to the Chief Minister regarding the demolition of tribal homes in the Budhni forest area.
भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान आदिवासियों के मकान तोड़े जाने के मामले में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को भेजी इस रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे जिलों से आए लोगों ने सागौन के पौधे काटकर वन भूमि पर झोपड़ियां बना लीं थीं।
बता दें कि इसी मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय सिंह प्रभावित परिवारों के धरने में शामिल हुए थे। मंगलवार को तीसरे दिन भी वन विकास निगम के डिपो के बाहर यह धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, भैरूंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट स्थित रिजर्व फारेस्ट के कंपार्टमेंट 426 में वन विकास निगम की 31.48 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई।
वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वनमंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। निगम ने 2021 में इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए थे।
इनमें से 78,700 पौधे काटकर 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया गया। गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों के अनुसार, 2021 तक पूरा कंपार्टमेंट खाली था।
वर्ष 2022 में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों ने पौधारोपण नष्ट कर अस्थायी झोपड़ियां बनाईं और खेती के लिए 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा किया।
कलेक्टर की रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 अक्टूबर को कार्रवाई के दौरान हटाए गए सभी नौ कब्जाधारियों के सिंहपुर और हबीबनगर में पहले से पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आइडी कार्ड दर्ज हैं।
भैरूंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमिहीन होने का दावा करने वाले इन लोगों के मूल गांवों में पक्के मकान हैं। कार्रवाई में नौ झोपड़ियां हटाई गईं और अवैध कुएं को मिट्टी-मुरम से भरकर पूरी प्रक्रिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे और मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को फोन पर जानकारी दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए।
सरकार की रिपोर्ट पूरी तरह गलत है। हम वर्षों से यहां रह रहे हैं और हमारे पास सभी दस्तावेज व प्रमाण हैं। सरकार आदिवासी गरीब भाई-बहनों को परेशान कर जबरन जमीन से बेदखल कर रही है। हम भी सारे प्रमाण उपलब्ध कराएंगे।— रमेश बारेला, बारेला समाज के अध्यक्ष