संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय में भी RTI को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

RTI matters are not being taken seriously at the Divisional Joint Director’s office either.

  • सुनवाई के लिए बुलाकर अधिकारी खुद नदारद, लोक सूचना अधिकारी भी नहीं पहुंचे – पत्रकार हरिप्रसाद गोहे ने लगाए गंभीर आरोप।

हरिप्रसाद गोहे
आमला । सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को पारदर्शिता का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है, लेकिन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नर्मदापुरम् संभाग में ही इस कानून को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी अनुसार पत्रकार हरिप्रसाद गोहे द्वारा नगर पालिका परिषद आमला के लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर की गई थी।
उक्त प्रथम अपील के निराकरण हेतु कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास नर्मदापुरम् संभाग द्वारा पत्र क्रमांक /स.सं./सू.अ./प्र.क्र.166/2026/1505 दिनांक 05/10/2026 के माध्यम से प्रकरण में सुनवाई हेतु दिनांक 12/10/2026 को दोपहर 12:30 बजे आयुक्त कार्यालय नवीन भवन रूम नंबर 54 में उपस्थित होने हेतु सूचना पत्र जारी किया गया था।
नियत तिथि 12 अक्टूबर को अपीलार्थी पत्रकार हरिप्रसाद गोहे निर्धारित समय पर संबंधित कार्यालय में उपस्थित हुए, परंतु खेद का विषय है कि सुनवाई हेतु न तो संभागीय संयुक्त संचालक स्वयं कार्यालय में उपस्थित थे और न ही प्रतिवादी लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद आमला सुनवाई में पहुंचे।


जब अधिकारी ही गंभीर नहीं तो अधीनस्थों से क्या उम्मीद – हरिप्रसाद गोहे।
इस संबंध में पत्रकार हरिप्रसाद गोहे ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब प्रथम अपीलीय अधिकारी संभागीय संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी ही RTI जैसे महत्वपूर्ण अधिनियम की सुनवाई को गंभीरता से नहीं लेते, तो अधीनस्थ कार्यालयों से पारदर्शिता की क्या उम्मीद की जा सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित से संबंधित कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद जब नगर पालिका परिषद आमला में RTI के तहत जानकारी चाही जाती है, तो लोक सूचना अधिकारी अनियमितताओं पर पर्दा डालने के उद्देश्य से आवेदकों को जानकारी उपलब्ध ही नहीं कराते हैं।
‘सैयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का’।
नगर में चर्चा है कि नगर पालिका परिषद आमला के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी को संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते आमला में ‘सैयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का’ कहावत चरितार्थ हो रही है।
पीड़ित पत्रकार ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत अब नगरीय विकास एवं आवास मंत्री से करने की तैयारी की जा रही है।

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