सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है नवरात्र में उगाई जाने वाली ज्वार की घास

नवरात्रि में पर्व के दौरान हर घरों में जवारे यानी ज्वार जरुर बोए जाते हैं। 9 दिनों के व्रत के बाद दशहरे की पूजा में इस घास के रखा जाता है। जब मां दुर्गा का विर्सजन के बाद इसे बांटते भी है। धार्मिक महत्व से हटकर वीटग्रास यानी गेहूं की घास सेहत के लिए काफी बेहतर माना जाता है। वीटग्रास को सुपरफूड भी माना जाता है। जो एनर्जी के साथ इम्यूनिटी भी बूस्ट करता है। वीटग्रास का जूस पीने से सेहत को मिलते हैं कई फायेद एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर वीटग्रास सुपरफड होता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर्स काफी मात्रा में होते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, एंजाइम्स, मैग्नीशियम, फाइटोन्यूट्रिएंट्स, अमीनोएसिड्स, विटामिन ए, सी,ई, के और बी कॉम्प्लैक्स, क्लोरोफिल और प्रोटीन्स होते हैं। कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज में फायदेमंद रिसर्च के मुताबिक, वीटग्रास में जरुरी अमीनो एसिड्स होते हैं। हाई क्वॉलिटी प्रोटीन होता है। ज्वार की घास डाइजेशन में मदद करता है। कोलेस्ट्रॉल भी कम करता है। वीटग्रास एनर्जी देता है और डायबिटीज के इलाज में भी उपयोगी माने जाते है। कैंसर से बचाता अगर लंबे समय से शरीर में इंफ्लेमेशन बना रहे तो यह कैंसर, हार्ट डिसीज और डायबिटीज जैसी बीमारियों को जन्म देता है। वीटग्रास बॉडी के इन्फ्लेमेशन को खत्म करती है। शोध के मुताबिक रिसर्च में सामने आया था कि वीटग्रास में काफी स्ट्रॉन्ग एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो कैंसर से बचाव करता है। ध्यान रखें कि प्रेग्नेंसी, एलर्जी या ग्लूटेन इंटॉलरेंस है तो बिना डॉक्टर की सलाह के वीटग्रास का जूस न पिएं।   recent visitors 103

बस मार्शलों की नियुक्ति को लेकर सीएम ने कैबिनेट पास किया, आतिशी राजभवन से निकलीं और सभी नेता बाहर धरने पर बैठ गए

 नई दिल्ली  दिल्ली सरकार ने बस मार्शल्स की नियुक्ति को लेकर कैबिनेट नोट पास कराया है। इस नोट में मार्शल को तुरंत बहाल करने की मांग की गई है। इस नोट को लेकर सीएम आतिशी अपनी कैबिनेट मंत्रियों के साथ एलजी आवास की तरफ निकलीं। इससे पहले एलजी के पास जाने के मुद्दे पर जमकर राजनीति हुई। वहीं राजभवन जाने के मुद्दे पर बीजेपी विधायकों के भागने का आरोप लगा। दिलीप पांडेय ने कहा कि बस मार्शलों के लिए दिल्ली सरकार द्वारा कैबिनेट नोट पास होने के बाद भाजपा वाले फिर भागने के फिराक में थे, जिन्हें रोकने के लिए हमें जमीन पर लोटना पड़ा। गेट पर घेर कर फिर रोक पाएं उन्हें हम। अब एलजी हाउस की तरफ रवाना हैं हम लोग! आज हम लोग बस मार्शल्स के लिए न्यायोचित रोजगार लेकर ही दम लेंगे। इंकलाब ज़िंदाबाद।' आम आदमी पार्टी का कहना है कि कैबिनेट नोट पास होने के बाद बीजेपी विधायक सचिवालय से भागने लगे. लेकिन मंत्री सौरभ भारद्वाज ने उनके पैर पकड़कर रोका. सार्वजनिक परिवहन बसों में मार्शल के रूप में तैनात 10 हजार से अधिक नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को पिछले साल हटा दिया गया था, क्योंकि नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने आपत्ति जताई थी कि वे आपदा प्रबंधन कर्तव्यों के लिए नियुक्त हैं. दिल्ली की सीएम आतिशी ने कहा कि बीजेपी विधायकों ने कल मुझसे मिलने का समय मांगा था, हमने उनसे मुलाकात की और उन्हें इस मुद्दे (बस मार्शलों) के बारे में समझाया कि यह एलजी के अधीन आने वाले सेवा मामलों के अंतर्गत आता है. लेकिन आज बीजेपी की पोल खुल गई, क्योंकि हमारी पूरी कैबिनेट वहां थी. बीजेपी को एलजी से उन मामलों पर निर्णय लेने के लिए कहना चाहिए जो उनके अधीन आते हैं. लेकिन बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं है, वे इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. हमने एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई और बस मार्शल को नियमित करने के लिए दिल्ली विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए गए. यहां (एलजी हाउस) आने के बाद भी बीजेपी विधायक एलजी से उस कैबिनेट नोट को पारित करने के लिए कहने के लिए तैयार नहीं थे, यह बस मार्शल के साथ विश्वासघात है. कैबिनेट द्वारा जो काम किए जाने थे – बस मार्शल और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को नियमित करना, वे किए जा चुके हैं. अब बीजेपी को उन्हें नियमित करना है, और उन्हें ज्वाइनिंग लेटर आवंटित करना है. recent visitors 102

ईरानी राजदूत ने कहा कि उनके देश और इजराइल के बीच तनाव को सिर्फ भारत ही कम करवा सकता है

 नई दिल्ली ईरान द्वारा इजरायल पर 200 मिसाइलों से हमला करने के बाद पश्चिम एशिया में ना सिर्फ भारी तनाव पसरा हुआ है बल्कि बड़े पैमाने पर भयानक युद्ध की आशंका भी घर कर रही है। इस बीच, भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही ने क्षेत्र में स्थिरता और शांति की बहाली कराने में भारत से हस्तक्षेप करने की मांग की है। ईरानी राजदूत ने कहा, "भारत को इस अवसर का लाभ उठाकर इजरायल को क्षेत्र में अपनी आक्रामकता रोकने और शांति और स्थिरता कायम करने के लिए राजी करना चाहिए।" ईरानी राजदूत ने कहा कि उनके देश और इजराइल के बीच तनाव को सिर्फ भारत ही कम करवा सकता है। बता दें कि भारत के दोनों देशों से मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। यही वजह है कि ईरानी राजनयिक भारत सरकार से पश्चिम एशिया संकट में शामिल सभी पक्षों से तनाव कम करने और कूटनीति और बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आग्रह कर रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की थी, जब इजरायली सेना ने हिज्बुल्लाह आतंकियों के खिलाफ अपने उत्तरी पड़ोसी लेबनान में संघर्ष के लिए एक नया मोर्चा खोला था। प्रधानमंत्री मोदी ने तब दो टूक शब्दों में कहा था कि दुनिया में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। NDTV को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी राजदूत ने यह भी कहा कि अगर इजरायल रुकता है, तभी हम भी रुकेंगे। उन्होंने आगे कहा, “ईरान युद्ध नहीं चाहता है। हम क्षेत्र में शांति चाहते हैं, लेकिन यदि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई आंच आती है, तो हमारे पास जवाबी कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है, और हमने ठीक यही किया भी है।” ईरानी राजदूत ने कहा कि मंगलवार (01 अक्तूबर) को इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल से किए गए हमले बदले की कार्रवाई का रणनीतिक हिस्सा था। उन्होंने कहा, "यह ईरान की धरती पर हमास प्रमुख इस्माइल हनीयेह की हत्या के जवाब में किया गया पलटवार था। वह हमारे राजकीय अतिथि थे और हमारे देश में इजरायल द्वारा उनकी हत्या कर दी गईी। यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है और हमारे संविधान के अनुसार, हमें इस तरह के मुद्दे से जवाबी प्रतिक्रिया के साथ निपटना होगा।" ईरानी राजदूत ने यह स्पष्ट किया कि मिसाइल हमला हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की हत्या के लिए नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, "यहां मुद्दा उलझाया जा रहा है। इजरायल के प्रति हमारी जवाबी कार्रवाई केवल इस्माइल हनीयेह की हत्या के लिए थी, हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह के लिए नहीं। हिजबुल्लाह खुद का ख्याल रख सकता है।" बता दें कि रूस-यूक्रेन जंग में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी पीएम मोदी से रूस को मनाने और युद्धविराम कराने की गुजारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल कीव की यात्रा पर गए थे। recent visitors 82

मॉर्निंग वॉक पर निकले मां-बेटे को हाइवा ने रौंदा, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

बिलासपुर जिलें से फिर एक भयानक सड़क हादसे की खबर सामने आई है. सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक करने के लिए निकले मां-बेटे को एक हाइवा ने कुचल दिया. इस दुर्घटना के बाद से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर चक्काजाम कर दिया और शव को सामने रख कर मुआवजे की मांग कर रहे हैं. सूचना मिलने पर मस्तूरी SDM अमित सिन्हा, ग्रामीण एडिशनल SP अर्चना झा समेत बड़े अधिकारी और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाइश देकर रास्ता बहाल करने की कोशिश में जुटी है. यह पूरा मामला मस्तूरी थाना क्षेत्र का है. जानकारी के अनुसार, ग्राम गतौरा की 35 वर्षीय गायत्री बंजारे अपने 7 वर्षीय बेटे पारस के साथ सुबह की सैर पर निकली थीं. आज सुबह 6 बजे जब वे गांव के मरघट के पास पहुंचीं, तभी एक हाइवा (क्रमांक CG 04 NW 5905), जो एनटीपीसी सीपत के ग्राम रलिया से राखड़ लेकर बिलासपुर की ओर जा रहा था, ने उन्हें कुचल दिया. इस दर्दनाक हादसे में मां और बेटे की मौके पर ही जान चली गई. वहीं हादसे के बाद हाइवा चालक वाहन को वहीं छोड़कर फरार हो गया. इस घटना ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है, और स्थानीय प्रशासन से पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान करने की मांग की जा रही है. recent visitors 56

यासीन मलिक ने UAPA ट्रिब्यूनल में हलफनामा पेश किया, 1994 में हिंसा और हथियार छोड़कर गांधीवादी बनने की बात की

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट-यासीन (जेकेएलएफ-वाई) के अध्यक्ष यासीन मलिक ने UAPA ट्रिब्यूनल को एक हलफनामा सौंपा है। इस हलफनामे में मलिक ने बताया कि उसने 30 साल पहले ही हथियार छोड़ दिया है और अब वह गांधीवादी हो गया है। उसने ऐसा 1994 में "एकजुट स्वतंत्र कश्मीर" स्थापित करने के लिए किया है। बता दें कि यासीन मलिक इस समय टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। उसने अपने हलफनामे में कहा कि मैंने 1994 से ही हिंसा और हथियार छोड़ दिया है। गांधीवादी हो गया यासीन मलिक यासीन मलिक ने यूएपीए ट्रिब्यूनल में एक हलफनामा पेश किया। मलिक ने लिखा कि उसने 30 साल पहले यानी 1994 में ही हिंसा और हथियार छोड़ दिया था। अब वह गांधीवादी हो गया है। मलिक ने आगे लिखा कि उन्होंने 1994 में "एकजुट स्वतंत्र कश्मीर" स्थापित करने के जेकेएलएफ-वाई के उद्देश्य को प्राप्त करने के साधन के रूप में हिंसा के रास्ते को छोड़ गांधीवादी हो गया है। यासीन के हलफनामे को पिछले महीने जारी किया गया था और गुरुवार को राजपत्र में प्रकाशित किए गए यूएपीए ट्रिब्यूनल के आदेश में उद्धृत किया गया था। 1967 के गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम(UAPA) के तहत जेकेएलएफ-वाई को 'अवैध संघ' घोषित करने के निर्णय को आगे के लिए बरकरार रखा गया था। वायुसैनिकों के खून से रंगे हैं यासीन के हाथ यासीन मलिक ने 1988 में जेकेएलएफ-वाई की स्थापना की थी। वह 1990 में श्रीनगर के रवालपुरा में चार भारतीय वायु सेना कर्मियों की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है। मलिक की पहचान इस साल की शुरुआत में मुख्य शूटर के रूप में की गई थी। उसे मई 2022 में एनआईए की ओर से जांच किए गए एक आतंकवाद वित्तपोषण मामले में आजीवन कठोर कारावास भी दिया गया था। यासीन ने ट्रिब्यूनल को अपने हलफनामे में दावा किया कि उसे नब्बे के दशक की शुरुआत में "विभिन्न राज्य अधिकारियों" द्वारा आश्वासन दिया गया था कि वे कश्मीर विवाद को एक सार्थक बातचीत के माध्यम से हल करेंगे और एक बार जब उन्होंने एकतरफा युद्धविराम शुरू किया, तो उनके खिलाफ और जेकेएलएफ-वाई के सभी मामलों को वापस ले लिया जाएगा। ट्रिब्यूनल के आदेश में दर्ज है कि इसके बाद, 1994 में उसके और उनके संगठन द्वारा एकतरफा युद्धविराम घोषित किया गया था और इसके परिणामस्वरूप, उसे TADA के तहत 32 लंबित मिलिटेंसी से संबंधित मामलों में जमानत प्रदान की गई थी और उसके बाद, 1994 से 2018 तक युद्धविराम समझौते के अनुसार उसके खिलाफ कोई भी मामला आगे नहीं बढ़ाया गया था। एनआईए का आरोप है कि वह 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद 89 से अधिक पत्थरबाजी के मामलों में फंसा है, यासीन ने कहा कि वह हिंसा के दौरान पुलिस हिरासत में था। हालांकि यासीन ने दावा किया कि कश्मीर में जेकेएलएफ-वाई अधिकारी बंद थे क्योंकि इसे पहली बार 2019 में प्रतिबंधित किया गया था। उसने स्वीकार किया कि इसके 50 से अधिक देशों में अंतर्राष्ट्रीय शाखाएं कार्यात्मक हैं और संगठन के कारण का समर्थन कर रही हैं। यह उनके प्रस्तुतिकरण को झुठलाता है कि 2019 के प्रतिबंध के बाद से जेकेएलएफ-वाई और उसके कैडरों द्वारा कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं है। recent visitors 107

5 राज्यों के 22 ठिकानों पर NIA का एक्शन, आतंकी संगठन JeM से जुड़े मामले में छापेमारी

श्रीनगर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों ने प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियों से संबंधित एक मामले में राष्ट्रीय राजधानी सहित पांच राज्यों के 22 ठिकानों पर छापेमारी की है। एनआईए के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छापेमारी जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, असम और दिल्ली में की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि तलाशी के लिए एनआईए की टीमों को स्थानीय अधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है। एनआईए के प्रवक्ता ने कहा कि एजेंसी की दिल्ली शाखा में दर्ज एक मामले में पांच राज्यों के 22 स्थानों पर छापेमारी जारी है। एनआईए ने कहा कि “आरसी-13/24/एनआईए/डीएलआई मामले में तलाशी ली जा रही है। यह छापेमारी जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियों से संबंधित है।” गौरतलब है कि जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना मौलाना मसूद अज़हर ने की थी, वह उन तीन आतंकवादियों में से एक था, जिन्हें 1999 में आईसी 814 यात्रियों के बदले में रिहा किया गया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव (यूएनएससी) द्वारा जैश-ए-मोहम्मद को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। मसूद अज़हर को यूएनएससी ने 2019 में ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित किया था। पश्चिम बंगाल में मंगलवार को थी छापेमारी इससे पहले अभी हाल में ही एनआईए ने पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। एनआईए की टीम ने राज्य के दक्षिण 24 परगना, आसनसोल, हावड़ा, नदिया और कोलकाता जिलों में 11 स्थानों पर संदिग्धों के आवासों की गहन तलाशी ली। एनआईए की तरफ से कहा गया कि संदिग्ध भाकपा (माओवादी) के सक्रिय कार्यकर्ता थे और माना जाता है कि उन्होंने नक्सली गतिविधियों को अंजाम देने में संगठन के कमांडरों की सहायता की। एनआईए की तरफ से कहा गया कि तलाशी में कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पर्चे, पत्रिकाएं और हस्तलिखित पत्र जब्त किए गए। एनआईए ने कहा कि यह मामला पोलित ब्यूरो, केंद्रीय समिति के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और प्रतिबंधित संगठन के समर्थकों की साजिश से संबंधित है।  दिल्ली के मुस्तफाबाद पहुंची टीम एनआई की टीम इस मामले में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में शुक्रवार देर रात रेड करने पहुंची. NIA के साथ दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और लोकल पुलिस भी मौजूद थी. सूत्रों के मुताबिक, मुस्तफाबाद में जहां रेड हुई वहां से काफी संदिग्ध सामान मिला है. NIA ने रेड के बाद कुछ लोगों को नोटिस दिया है और 1 से 2 लोगों को पूछताछ के लिए ले गई है.  महाराष्ट्र से दो संदिग्ध हिरासत में जांच एजेंसी एनआईए ने इस ऑपरेशन के दौरान महाराष्ट्र के जालना, औरंगाबाद और मालेगांव में भी रेड डाली. इन जगहों से कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है. बताया गया है कि जालना से 2 लोगों को, छत्रपति शम्भाजी नगर और मालेगांव से 1-1 शख्स को हिरासत में लिया है. जम्मू-कश्मीर: बारामूला में भी पहुंची NIA की टीम जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला जिले के संगरी और कुछ अन्य इलाकों में भी NIA की टीमें स्थानीय पुलिस के सहयोग से छापेमारी की. यह कार्रवाई अब भी चल रही है. संगरी कॉलोनी में मौलवी इकबाल भट के घर में तलाशी ली गई है. फिलहाल किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं है. सूत्रों ने आगे बताया कि कश्मीर के अन्य हिस्सों में अभी छापेमारी जारी है. यूपी और असम में भी रेड सूत्रों की मानें तो एनआई की टीम असम और उत्तर प्रदेश भी पहुंची और अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई. हालांकि यहां से किसी को हिरासत में लेने की खबर नहीं है. क्यों हुई ये कार्रवाई एनआईए से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई देश विरोधी गतिविधि, आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़े मामले में हो रही है. कुछ संदिग्धों के पास से कई सामान मिले हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है. recent visitors 75

धरसींवा के निनवा गांव में 55 साल के बुजुर्ग ने देवता को दी अपनी बलि, धारदार कैंची से काटा खुद का गला

धरसींवा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. धरसींवा के निनवा गांव में एक श्रद्धालु ने देवता के सामने ही अपनी गर्दन काटकर बलि दे दी. घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है. मामले की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच में जुट गई है. बताया जा रहा है कि व्यक्ति ने कैंची से अपने गर्दन को काटा है. मिली जानकारी के अनुसार, धरसींवा के निनवा गांव निवासी 55 वर्षीय भुनेश्वर यादव ने अपने घर के अंदर स्थित देवस्थान के सामने कैंची से अपनी गर्दन काटकर आत्महत्या कर ली. घटना के बाद देवस्थान वाला कमरा खून से लथपथ हो गया. यह घटना आज सुबह लगभग 11:00 की बताई जा रही है. घटना कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है. इस मामले में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश मिश्र ने कहा कि कोई भी देवी देवता प्राण की बलि नहीं मांगता है. अगर ईश्वर को आप अपना मानते हैं, तो कोई भी नहीं कहेगा की उसके लिए आप अपनी जान दे दें. ये एक प्रकार का अंधविश्वास है जिससे लोगों को बचना चहिए. इससे पहले भी कई बार ऐसे बातें सामने आई है कि लोग अपनी जीभ, उंगली काट लेते हैं ये सब अंधविश्वास है और इससे लोगों का ही नुकसान है. recent visitors 137