सावन प्रदोष व्रत 2024: पूजा विधि और पूजा सामग्री सूची

Sawan Pradosh Vrat Puja Vidhi : सावन का पहला प्रदोष व्रत 1 अगस्‍त गुरुवार को है। शिवपुराण में सावन के प्रदोष व्रत का खास महत्‍व माना गया है। सावन के महीने में कृष्‍ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा करने पर आपको शीघ्र ही भोलेबाबा और उनके पूरे परिवार की कृपा प्राप्‍त होती है। आपकी काफी समय से चल रही परेशानियों का अंत होगा। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 1 अगस्त को सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर हो रहा है और 2 अगस्त को 3 बजकर 27 मिनट तक त्रयोदशी तिथि लगी रहेगी। आइए आपको बताते हैं सावन के प्रदोष व्रत की पूजाविधि और पूजा सामग्री की पूरी लिस्‍ट। सावन प्रदोष व्रत का महत्‍व सावन में प्रदोष का व्रत करने से आपको शत्रुओं पर विजय प्राप्‍त होती है। आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शनि की अशुभ दशा में भी आपको राहत प्राप्‍त होती है। सावन में यदि गुरुवार को प्रदोष व्रत होता है तो आपको गुरु की कृपा भी प्राप्‍त होती है। साथ ही महादेव आपके हर कष्‍ट को दूर करते हैं। महिलाओं को यह व्रत करने से संतान की प्राप्ति के साथ ही मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्‍त होता है। सावन के प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री फल फूल बेल पत्र अक्षत नैवेद्य पान सुपारी लौंग इलाइची चंदन शहद दही देसी घी धतूरा रोली दीपक पूजा के बर्तन गंगाजल सावन के प्रदोष व्रत की पूजाविधिसावन के प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्‍य दें। पानी में पीला चंदन और आंकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिव को विशेष प्रिय हैं। ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी आपको प्राप्‍त होती और आपका भाग्योदय होता है। इसके बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। बेल पत्र, अष्‍टगंध, अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलाइची भगवान को चढ़ाएं। पूरे दिन निराहार रहें और अगर संभव न हो तो एक बार फलाहार कर सकते हैं। शाम को दोबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें। उसके बाद भगवान को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। भगवान शिवजी की आरती करें और शिव तांडव स्‍त्रोत का पाठ करें। recent visitors 118

हॉस्पिटलों में न डॉक्टर मिले और न रजिस्ट्रेशन, राजस्थान-झुंझुनू में अवैध लैब, सोनोग्राफी सेंटर पकडे

झुंझुनू. झुंझुनू जिले के उदयपुरवाटी में स्वास्थ्य विभाग की दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रही। अवैध हॉस्पिटल लैब सोनोग्राफी सेंट्रो पर जांच की गई, जिसमें कार्रवाई के दौरान नवजीवन हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में काफी खामियां मिली। बता दें कि संजीवनी हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं मिले, वहीं अवैध अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर भी रफू चक्कर हो गए। हद तो तब हो गई जब अवैध अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। झुंझुनू जिले के उदयपुरवाटी में स्वास्थ्य विभाग की दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रही। अवैध हॉस्पिटल लैब सोनोग्राफी सेंट्रो पर जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग को नवजीवन हॉस्पिटल में रजिस्ट्रेशन, अस्पताल में काफी खामियां मिली। recent visitors 99

उपचार के दौरान हुई मौत, छत्तीसगढ़-रायगढ़ में बीमार पत्नी की मौत के बाद पति ने खाया जहर

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक ऐसा मामला सामने आया जहां महिला की मौत के बाद उसके पति ने भी जहर सेवन करके आत्महत्या कर ली। एक घर से एक साथ दो शव निकलने के बाद से पूरे गांव में मातम पसर गया है। उक्त मामला खरसिया थाना क्षेत्र का है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार खरसिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मदनपुर निवासी गजानंद श्रीवास पिता झाड़ुराम श्रीवास 35 साल को जहर सेवन कर लिया। जहर सेवन करने से खरसिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां स्थिति में सुधार नही होनें के कारण उसे रायगढ़ मेडिकल कालेज रिफर किया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। गजानंद की मौत की खबर के बाद उनके परिजनों को उस वक्त और बडा झटका लगा जब उन्हें पता चला कि गजानंद की पत्नी की भी मौत हो गई। शराब पीने के आदि थे दोनों मृतक गजानंद की भाभी रुद्रकुमारी ने बताया कि उसके देवर की पहली पत्नी 2-3 साल पहले अपने 3 बच्चों को लेकर मायके चली गई थी। जिसके बाद उसने शोभा निषाद को भगाकर घर ले आया था और पत्नी बनाकर रखा था। दोनों शराब पीने के आदि थे। सोमवार की दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो रहा था। बताया जा रहा है कि गजानंद श्रीवास शराब के नशे में अपनी पत्नी शोभा के साथ मारपीट किया था। जिसके बाद ही उसने जहर सेवन कर लिया था। गजानंद के उल्टी करने के बाद परिजनों ने उसे पहले खरसिया अस्पताल और फिर बाद में मेडिकल कालेज रायगढ़ भर्ती कराया जहां उसकी मौत हो गई। बच्चों ने दी शोभा की मौत की जानकारी गजानंद की भाभी रूद्रकुमारी ने बताया कि गजानंद को जहर सेवन के बाद खरसिया अस्पताल ले जाया गया जहां उसे रायगढ़ रेफर कर दिया गया। बाद में घर से बच्चों ने फोन कर जानकारी दी कि शोभा उठाने पर भी नही उठ रही थी संभवतः उसकी मौत हो गई है।   मामले की जांच जारी- चौकी प्रभारी इस संबंध में खरसिया चौकी प्रभारी संजय नाग ने बताया कि महिला की मौत संभवत सामान्य है। हालांकि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही महिला के मौत के कारणों का पता चल सकेगा, फिलहाल मामले की जांच जारी है। recent visitors 98

युवक का गला घोंटकर हत्या का प्रयास, मरा समझकर जिंदा दफना, कुत्तों ने गड्ढे को खोद निकला

आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक युवक की रस्सी से गला घोंटकर हत्या का प्रयास किया गया। उसे मरा समझकर जिंदा ही जमीन में दफना दिया गया। आधी रात को कुत्तों ने जमीन खोंदना शुरू कर दी। युवक को नोंचकर खाने लगे, तभी उसे होश आया और वो वहां से भाग निकला। पीड़ित का अस्पताल में उपचार चल रहा है। सिकंदरा के अरतौनी में दबंगों ने मामूली विवाद में युवक रूपकिशोर को घर से बुलाया। मारपीट के बाद रस्सी से गला घोंट दिया। आरोपियों ने उसे मरा समझ कर गड्ढे में दफना दिया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। आधी रात को कुत्तों ने जमीन खोदकर रूपकिशोर को नोंच कर खाने का प्रयास किया, तभी उसे होश आ गया और वो वहां से किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला। पीड़ित ने घरवालों को सूचना दी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। युवक की मां रामवती ने मामले में मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़िता की मां ने बताया कि 18 जुलाई को क्षेत्र में दो पक्षों में विवाद हुआ था। जिसमें 24 वर्षीय बेटे रूपकिशोर ने एक युवक से गाली देने का विरोध किया था। इसी बात पर आरोपी रंजिश मान बैठे थे।  उसने बताया कि 18 जुलाई की रात को ही अंकित, गौरव, करन और आकाश घर आए और बेटे को साथ ले गए। गांव के बाहर खेतों की ओर ले जाकर बुरी तरह पीटा। रस्सी गले में डालकर बेटे का गला घोंट दिया। उसे मरा हुआ समझकर जमीन में गड्ढा खोद कर गाढ़ दिया। कुत्तों ने खून सूंघ कर गड्ढा खोद दिया। वो बेहोश था, लेकिन कुत्तों ने जैसे ही उसे नोंचना शुरू किया तो उसे होश आ गया। वो वहां से भागा और आसपास के लोगों से मदद लेकर घरवालों से संपर्क किया। इसके बाद बेटे को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।   recent visitors 140

एससी/एसटी श्रेणियों को सब-कैटेगरी में दिया जा सकता है आरक्षण- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के मुताबिक अनुसूचित जाति और जनजातियों में सब-केटेगरी बनाई जा सकती है। फैसला सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने 6/1 के मत से सुनाया है। यह सुनवाई CJI डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे। उनके साथ 6 जजों ने इस पर सहमति जताई जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी इससे सहमत नहीं थीं। कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए 2004 में दिए गए 5 जजों के फैसले को पलट दिया है। यह सुनवाई चीफ जस्टिस के साथ जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ,जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा कर रहे थे। कोर्ट ने 2004 के फैसले को पलटा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने 2004 में ईवी चिन्नैया मामले में पांच जजों के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें संविधान पीठ ने कहा कि केवल राष्ट्रपति ही यह अधिसूचित कर सकते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार कौन से समुदाय आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, और राज्यों को इससे छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा था कि क्या राज्य कोटा के अंदर कोटा देने के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को उप-वर्गीकृत कर सकते हैं?  सुप्रीम कोर्ट ने अब समीक्षा के बाद यह फैसला सुना दिया है। क्या है पूरा मामला…. दरअसल, 1975 में पंजाब सरकार ने आरक्षित सीटों को दो श्रेणियों में विभाजित करके अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नीति पेश की थी. एक बाल्मीकि और मजहबी सिखों के लिए और दूसरी बाकी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए. 30 साल तक ये नियम लागू रहा. उसके बाद 2006 में ये मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा और ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2004 के फैसले का हवाला दिया गया. पंजाब सरकार को झटका लगा और इस नीति को रद्द कर दिया गया. चिन्नैया फैसले में कहा गया था कि एससी श्रेणी के भीतर सब कैटेगिरी की अनुमति नहीं है. क्योंकि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है. बाद में पंजाब सरकार ने 2006 में बाल्मीकि और मजहबी सिखों को फिर से कोटा दिए जाने को लेकर एक नया कानून बनाया, जिसे 2010 में फिर से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई. हाई कोर्ट ने इस नीति को भी रद्द कर दिया. ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले के तहत यह स्वीकार्य था, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के भीतर सब कैटेगिरी की अनुमति दी थी. पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि अनुसूचित जाति के भीतर भी इसकी अनुमति दी जानी चाहिए. 2020 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने पाया कि ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के फैसले पर एक बड़ी बेंच द्वारा फिर से विचार किया जाना चाहिए, जिसमें कहा गया था कि एससी श्रेणी के भीतर सब कैटेगिरी की अनुमति नहीं है. उसके बाद सीजेआई के नेतृत्व में सात जजों की बेंच का गठन किया गया, जिसने जनवरी 2024 में तीन दिनों तक मामले में दलीलें सुनीं और उसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. संविधान में क्या प्रावधान है? संविधान ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को विशेष दर्जा देते समय जाति का वर्णन नहीं किया है कि कौन सी जातियां इसमें आएंगी. ये अधिकार केंद्र के पास है. अनुच्छेद 341 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित जातियों को एससी और एसटी कहा जाता है. एक राज्य में SC के रूप में अधिसूचित जाति दूसरे राज्य में SC नहीं भी हो सकती है. देश में कितनी अनुसूचित जाति? एक रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में देश में 1,263 एससी जातियां थीं. अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान और निकोबार एवं लक्षद्वीप में कोई समुदाय अनुसूचित जाति के रूप में चिह्नित नहीं किया गया. सिर्फ राष्ट्रपति को अधिकार 2005 में ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनुसूचित जाति की सूची में जातियों को हटाने और जोड़ने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति को है. संविधान सभी अनुसूचित जातियों को एकल सजातीय समूह मानता है. अगर सभी अनुसूचित जातियों को एक ग्रुप माना गया है तो उप वर्गीकरण कैसे हो सकता है. सामाजिक असमानता के आधार पर अनुसूचित जातियों को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है, क्योंकि इन जातियों के खिलाफ छुआछूत की भावना थी. आरक्षण का लाभ आरक्षित जातियों के जरूरतमंद यानी सबसे कमजोर तबके तक पहुंचे, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर की अवधारणा को लागू किया. इसे 2018 में जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता केस के फैसले में लागू किया गया था. क्रीमी लेयर का नियम ओबीसी (अदर बैकवर्ड क्लास) में लागू होता है. जबकि यह अनुसूचित जाति पर 2018 में प्रमोशन के केस में लागू किया गया. केंद्र सरकार ने 2018 के इस फैसले पर रिव्यू करने की गुहार लगाई और इस पर फैसला अभी आना बाकी है.   recent visitors 271

निर्माणाधीन इंदौर-बैतूल फोरलेन पर तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर पुलिया के नीचे गिरी, एक की मौत, पांच युवक घायल

हरदा  निर्माणाधीन इंदौर-बैतूल फोरलेन पर जिला जेल के ठीक सामने बड़ा हादसा हो गया। गुरुवार सुबह करीब 7 बजे एक तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर पुलिया के नीचे गिर गई। इस हादसे में कार में सवार एक युवक की जान चली गई तथा पांच अन्य घायल हो गए। घायलों में एक की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को हादसे के बाद एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। मृतक युवक के शव को जिला अस्पताल की मर्चुरी में रखा गया है। पुलिस ने बताया कि बैतूल जिले के चिचोली शहर के नजदीक ढाबा संचालित करने वाले मोंटी जयप्रकाश आर्य उम्र 32 साल के साथ हरीश पिता भगवत राव बाघमारे, दादा पिता नाथू यादव सहित दो अन्य युवक कार में सवार होकर उज्जैन जा रहे थे। इसी दौरान हरदा में शहर के बाहर निकलते से ही जिला जेल के पास कार अनियंत्रित होकर पुलिया के नीचे गड्ढे में गिर गई। हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हादसे में मृत युवक का नाम मोंटू बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि मृतक के स्वजन से संपर्क कर हादसे की जानकारी दी गई है। घायलों में कुछ शराब के नशे में थे, जो स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे थे। वह उज्जैन महाकाल के दर्शन करने के लिए बुधवार रात को घर से निकले थे। एक घायल का कहना था कि वह चिचोली के पास ही स्थित एक बाजार में जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि घायल अलग-अलग बयान दे रहे हैं। recent visitors 221