एमपी: गोवंश खुले में घूमे तो सरपंचों की कुर्सी जाएगी! 8 सरपंचों को नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला

MP: If cattle roam freely, sarpanches will lose their positions! Notices issued to 8 sarpanches, learn the full story. भिण्ड। मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में घूम रहे गोवंश को लेकर जिला पंचायत ने पंचायतों की जिम्मेदारी तय करते हुए आठ सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह चौहान ने निरीक्षण के दौरान गोवंश के सड़कों और किसानों की फसलों में घूमते मिलने पर यह कार्रवाई की है। सभी सरपंचों को 15 सितंबर को साक्ष्य सहित अपना पक्ष रखने के लिए समक्ष में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सरपंचों को पद से पृथक करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जनपद पंचायत भिण्ड की मानपुरा पंचायत के सरपंच ओमवीर सिंह चौहान, बाराकलां की सरपंच ममता बघेल, ऊमरी के सरपंच वीरेंद्र सिंह यादव, ढोंचरा के सरपंच सुनील कुमार और खेरा श्यामपुरा की सरपंच प्रीति देवी को नोटिस जारी किए गए हैं। इसी तरह जनपद पंचायत लहार की लपवाहा पंचायत के सरपंच अरविंद शर्मा, ररी पंचायत की सरपंच सावित्री बाई और जनपद पंचायत रौन की मेहदा पंचायत की सरपंच उमा देवी से भी जवाब मांगा गया है। सीईओ के निरीक्षण के दौरान इन पंचायतों में गोवंश सड़क, सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थानों और किसानों की फसलों में घूमता मिला। नोटिस में कहा गया है कि इससे जन-धन की हानि के साथ परिवहन में परेशानी और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पंचायत स्तर पर गोवंश को सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने को पदीन कर्तव्य के विपरीत माना गया है। सीईओ ने पूछा है कि पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंचों को पद से पृथक करने की कारर्वाई क्यों न की जाए। 15 सितंबर को सरपंचों को साक्ष्य सहित अपना पक्ष रखना होगा। समय पर जवाब नहीं देने या जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इन पंचायतों में शासन की ओर से गोशालाओं का निर्माण कराया गया है और इनके निर्माण एवं संचालन पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। गोवंश के लिए भूसा-दाना, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी राशि खर्च होती है। इसके बावजूद कई स्थानों पर गोशालाएं खाली पड़ी हैं और गोवंश सड़कों पर घूम रहा है। ऐसे में गोवंश को सुरक्षित रखने के लिए पंचायत स्तर पर की जा रही व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। recent visitors 51

दिग्विजय सिंह: सागर एसपी 50 लाख मासिक वसूली करते थे, जहरीली शराब कांड पर का हमला,; EOW जांच मांगी

Digvijay Singh: Sagar SP used to collect Rs 50 lakh monthly, attacks hooch scandal, demands EOW probe सागर । पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को सागर के पुलिस अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पत्रकार वार्ता बुलाकर आरोप लगाया कि एसपी अनुराग सुजानिया हर महीने 50 लाख की वसूली कर रहे हैं। यदि यह आरोप प्रमाणित नहीं हैं तो एसपी उनके खिलाफ मानहानि का दावा कर सकते है। अवैध वसूली के आरोपों को वह अदालत में प्रमाणित कर देंगे। ईओडब्ल्यू से जांच कराने की मांग जहरीली शराब कांड के बाद सागर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने शनिवार-रविवार को प्रभावित परिवारों और स्थानीय कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद शराब माफिया को राजनीति, प्रशासनिक और पुलिस संरक्षण मिलने का आरोप लगाया। जहरीली शराब कांड के लिए इसी गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराते हुए दिग्विजय ने कहा कि इससे पहले मुरैना जिले में जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हुई। उस वक्त वहां के एसपी अनुराग सुजानिया ही थे। सागर में उसी तरह की स्थितियों में मौतें हुईं और यहां भी एसपी वहीं हैं। उन्होंने एसपी सुजानिया को हटाकर उनकी जांच ईओडब्ल्यू से कराने की मांग की। इधर, एसपी सुजानिया ने इस पर कोई भी टिप्पणी देने से इन्कार किया है। न्यायिक जांच पर भी सवाल दिग्विजय सिंह ने न्यायिक जांच पर भी सवाल उठाए। कहा कि जिन अधिकारियों या एजेंसियों से जांच कराई जा रही है, उन पर उन्हें भरोसा नहीं है। जब भी लीपापोती करना होती है, जो न्यायिक जांच बैठा दी जाती है। व्यापम मामले में भी इन्हीं को जांच करने के लिए बुलाया गया था और अब शराब कांड के लिए भी इन्हीं को बुलाया लिया है। दिग्विजय ने शराब कारोबारियों और राजनीतिज्ञों के बीच संबंधों की जांच की मांग की। चार प्रभावित परिवारों को गोद लेने की घोषणा दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिया। सरकार ने अभी यह तक नहीं बताया कि कब तक और कितना मुआवजा दिया जाएगा। दिग्विजय ने मृतक भोला अहिरवार, राम स्वरूप अहिरवार, भोपाली आदिवासी और धन सिंह अहिरवार के परिवार को गोद लेने की घोषणा की। कहा कि वह परिवार को 10 हजार रुपये प्रतिमाह देंगे और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाएंगे। recent visitors 38

रीवा सांसद का कांग्रेस विधायक पर पलटवार, बोले- अभय मिश्रा यौन विकृतियों से पीड़ित, पॉकेटमारी से शुरू किया था बिजनेस 

Rewa MP hits back at Congress MLA, says Abhay Mishra suffers from sexual perversions, started his business by pickpocketing सांसद ने विधायक अभय मिश्रा को यौन विकृतियों से पीड़ित तक बता दिया। सांसद ने कहा कि बिना सिर-पैर इस तरह की बात कोई सामान्य मानसिकता वाला व्यक्ति सोच भी…और पढ़ें रीवा। संजय गांधी मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में महिलाओं के शवों के साथ दुष्कर्म के सेमरिया विधानसभा से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के सनसनीखेज आरोप के बाद रीवा की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस विधायक के इस बयान पर अब रीवा के भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने तीखा और बेहद निजी हमला बोला है। सांसद ने विधायक अभय मिश्रा को यौन विकृतियों से पीड़ित तक बता दिया। सांसद ने कहा कि बिना सिर-पैर इस तरह की बात कोई सामान्य मानसिकता वाला व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। उन्होंने कहा कि संजय गांधी अस्पताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान पर बिना साक्ष्य के इस तरह का अनर्गल आरोप लगाना पूरे चिकित्सकीय स्टाफ का अपमान है और इससे रीवा की छवि खराब होती है। डिप्टी सीएम के पिता पर की गई टिप्पणी पर पलटवार इससे पहले कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के पिता स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल के व्यवसाय को लेकर टिप्पणी की थी। इस पर पलटवार करते हुए सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल यदि कोई व्यवसाय करते भी थे तो वह ईमानदारी का व्यवसाय था। इसी दौरान सांसद ने विधायक अभय मिश्रा के अतीत को लेकर भी बड़े आरोप लगाए। कहा कि विधायक अभय मिश्रा ने वाहनों की स्टपनी चोरी करके और स्टेट बैंक में पॉकेटमारी कर अपना कारोबार शुरू किया था। सांसद ने दावा किया कि एक समय कोतवाली में जिस तरह अपराधियों की फोटो स्लेट लेकर लगाई जाती थी, उसी तरह लंबे समय तक अभय मिश्रा की फोटो भी लगी रहती थी। अब यहां तक पहुंचे हैं, तो अशोभनीय बातें कर रहे हैं। recent visitors 33

एमपी में फिर चलीं देर रात तबादला एक्सप्रेस, 10 IPS समेत 137 पुलिस अफसरों को नई जिम्मेदारी

Late night transfer express trains resume in MP, 137 police officers, including 10 IPS officers, get new responsibilities भोपाल । मध्यप्रदेश में रविवार रात पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल किए गए हैं. गृह विभाग ने 10 IPS अधिकारियों और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों समेत कुल 137 पुलिस अफसरों के ट्रांसफर किए हैं. सभी अधिकारियों को आगामी आदेश तक नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं. 2023-24 बैच के 10 आईपीएस यहां से वहां मध्यप्रदेश में 10 IPS समेत 137 पुलिस अफसरों के तबादला सूची जारी हो गई है. तबादला सूची में 2023 बैच के 4 और 2024 बैच के 6 IPS अधिकारी शामिल हैं. कई अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय से मैदानी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि कुछ अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में नई जिम्मेदारी दी गई है. IPS अधिकारियों की नई पदस्थापना आईपीएस मनीष भारद्वाज को पुलिस मुख्यालय की साइबर शाखा से हटाकर ACP कोतवाली, नगरीय इंदौर की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं मनोज कुमार को ACP एमपी नगर, नगरीय भोपाल पदस्थ किया गया है. इसके अलावा आलोक कुमार वर्मा को देवास से CSP रीवा की जिम्मेदारी दी गई है. वैभव प्रिया को रतलाम से SDOP नेपानगर, शुभम सिंह ठाकुर को जबलपुर से SDOP गाडरवारा और अमित कुमार को खंडवा से SDOP सिंगरौली पदस्थ किया गया है. 127 DSP स्तर के अधिकारियों का भी फेरबदल IPS अधिकारियों के साथ ही राज्य पुलिस सेवा के 127 अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया गया है. इनमें उप पुलिस अधीक्षक (DSP), SDOP, नगर पुलिस अधीक्षक (CSP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और सहायक सेनानी स्तर के अधिकारी शामिल हैं. तबादला सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन्हें पुलिस मुख्यालय से मैदानी जिम्मेदारियां दी गई हैं. वहीं अलग-अलग जिलों में तैनात SDOP और नगर पुलिस अधीक्षकों को भी दूसरी जगह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. recent visitors 33

हाईकोर्ट ने सरकार ने मांगा जवाब,डकैत नहीं, फिर भी ग्वालियर-चंबल में डकैती एक्ट में 1000 से ज्यादा FIR

The High Court has asked the government to respond, stating that there are no dacoits, yet over 1,000 FIRs have been filed under the Dacoity Act in Gwalior-Chambal region. प्रतिनिधि: संतोष सिंह तोमर  ग्वालियर। जिस कानून को कभी ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में डकैतों के आतंक से निपटने के लिए बनाया गया था, उसकी आज की जरूरत पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ही सवाल उठा दिया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. गोविंद सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि जब प्रदेश में अब कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो मध्य प्रदेश डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 को खत्म क्यों न कर दिया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच ग्वालियर-चंबल संभाग के ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में इस विशेष कानून के तहत एक हजार से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई मामलों में सामान्य विवाद, जमीन-जायदाद के झगड़े और मारपीट जैसी घटनाओं में भी इस कानून की कठोर धाराएं जोड़ दी जाती हैं। हाई कोर्ट में उठा सवाल- जब डकैत गिरोह नहीं तो कानून क्यों? याचिका में कहा गया है कि 2020 से 2026 के बीच विधानसभा में तत्कालीन गृह मंत्री तीन अलग-अलग मौकों पर यह जानकारी दे चुके हैं कि प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद इसी अवधि में ग्वालियर-चंबल के छह जिलों में इस कानून के तहत बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होने का दावा किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि जिस विशेष परिस्थिति से निपटने के लिए 1981 में यह कानून बनाया गया था, वह स्थिति अब समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद कानून का इस्तेमाल जारी रहना नागरिकों के समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करता है। धारा 11 और 13 पर क्यों है आपत्ति? याचिका में अधिनियम की धारा 11 और 13 के इस्तेमाल पर विशेष आपत्ति जताई गई है। धारा 11 के तहत गिरफ्तारी के बाद हिरासत से जुड़े विशेष प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। धारा 13 दोषसिद्धि की स्थिति में न्यूनतम सजा का प्रावधान करती है, जो तीन वर्ष से कम नहीं हो सकती। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आपसी रंजिश, जमीन विवाद या सामान्य मारपीट जैसे मामलों में भी इन धाराओं को जोड़ने से आरोपितों के लिए कानूनी राहत हासिल करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर ग्रामीणों, किसानों और युवाओं के खिलाफ इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। 1981 में क्यों बनाया गया था कानून? यह विशेष कानून वर्ष 1981 में उस दौर में लागू किया गया था, जब ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों के अलावा सतना और पन्ना के जंगलों में डकैत गिरोह सक्रिय थे। अपहरण, डकैती और सामूहिक हत्याओं जैसी गंभीर वारदातों से निपटने के लिए सामान्य कानूनों से अलग कठोर प्रावधान किए गए थे। अब याचिका में यही सवाल उठाया गया है कि जब वह परिस्थितियां बदल चुकी हैं और प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो इस विशेष कानून को बनाए रखने का औचित्य क्या है। सरकार से चार सप्ताह में जवाब हाई कोर्ट ने मामले में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना व श्योपुर के पुलिस अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कई वर्षों से जंगल या बीहड़ क्षेत्र में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। recent visitors 30

जबलपुर: बिल्डर्स से लेकर किसानों तक की टेंशन बढ़ी, 62 गांवों के भविष्य का फैसला करेगा नया मास्टर प्लान

Jabalpur: Tensions rise for everyone from builders to farmers, as a new master plan will determine the future of 62 villages. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा। इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। 2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी धारा 16 के तहत विकास योजना अहम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार 62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं। देरी ने बढ़ाया असमंजस मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा, जब अंतिम मास्टर प्लान और लैंड यूज मैप सामने आएगा। फिलहाल कृषि या ग्रीन बेल्ट से संबंधित चर्चाओं को संभावित प्रस्ताव से अधिक नहीं माना जा सकता। इस संबंध में असिस्टेंट डायरेक्टर टीएनसीपी विपुल माहुले ने कहा कि फिलहाल मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी उनके पास है यह कार्य शासन स्तर पर होना है। recent visitors 24

भाजपा के सांसद-विधायक पहुंचे SP ऑफिस,जुआ फड़ पर पुलिस की रेड, पूर्व BJP मंडल अध्यक्ष का नाम आते ही मचा बवाल

BJP MPs and MLAs arrive at the SP’s office, police raid a gambling den, and the former BJP Mandal president’s name sparks uproar. विशेष संवाददाता: राम मेहरा  भोपाल। जिले में पुलिस की जुआ विरोधी कार्रवाई के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। सेवढ़ा क्षेत्र में पुलिस द्वारा जुआरियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दो दिन बाद भिंड-दतिया सांसद संध्या राय और सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल दतिया एसपी कार्यालय पहुंचे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई को गलत बताते हुए पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच की मांग की। एसपी ने मामले की जांच एएसपी मंजीत चावला को सौंप दी है। क्या है पूरा मामला? मामला 10 सितंबर की रात का बताया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के निर्देश पर जिले में जुआ-सट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अतरैटा थाना, लांच थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सेवढ़ा के भगुवापुरा थाना क्षेत्र में अमित चौहान ढाबे के पास रात करीब डेढ़ बजे दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि ढाबे के पास जुआ खेला जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की और कथित तौर पर जुआ खेलते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से नकदी और ताश के पत्ते भी जब्त किए। पकड़े गए आरोपियों की पहचान नरेन्द्र नरवरिया, जितेन्द्र चौहान निवासी बस्तूरी, श्रीकांत शाक्य निवासी भिंड, कोमल चौहान निवासी बस्तूरी, आकाश राजपूत निवासी मौ, पुत्तू शाक्य निवासी भिंड, सोनू उर्फ सुरेन्द्र सिंह चौहान निवासी बस्तूरी और पान सिंह कुशवाह निवासी डिरोलीपार के रूप में हुई है। पूर्व मंडल अध्यक्ष का नाम सामने आने से मामला बढ़ गया  पुलिस कार्रवाई के बाद मामला उस समय चर्चा में आ गया, जब गिरफ्तार किए गए लोगों में सोनू उर्फ सुरेन्द्र सिंह चौहान का नाम सामने आया। बताया जा रहा है कि सुरेन्द्र सिंह चौहान भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और पूर्व जिला मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद स्थानीय भाजपा नेताओं और संगठन से जुड़े लोगों में कार्रवाई को लेकर नाराजगी सामने आई। पार्टी से जुड़े नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गलत बताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। सांसद-विधायक पहुंचे एसपी कार्यालय मामले को लेकर शनिवार को भिंड-दतिया सांसद संध्या राय और सेवढ़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल दतिया एसपी कार्यालय पहुंचे। दोनों ने पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल से मुलाकात कर पूर्व मंडल अध्यक्ष के खिलाफ की गई जुआ एक्ट की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और मामले की जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। बताया जा रहा है कि सांसद और विधायक ने एसपी से बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चर्चा की। इस दौरान भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया, पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह बुंदेला, पूर्व जिला उपाध्यक्ष कालीचरण कुशवाह, पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव, जीतू कमरिया सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एएसपी मंजीत चावला को सौंप दी गई। जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। एक ओर पुलिस का कहना है कि अभियान के तहत जुआ खेलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई, वहीं भाजपा नेताओं ने कार्रवाई को गलत बताते हुए जांच की मांग की है। अब एएसपी मंजीत चावला की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पुलिस की कार्रवाई नियमों के तहत सही थी या कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल मामले ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है और अब सभी की नजर जांच के नतीजे पर टिकी हुई है। recent visitors 14