बरगद का एक पौधा लगाओ, 500 साल पुण्य कमाओ: पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर में जागरूकता अभियान

Plant a banyan sapling, earn 500 years of merit: Nationwide awareness campaign for environmental conservation. पुणे (महाराष्ट्र)। पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सुशिलादेवी सोशल वेल्फेअर फाउंडेशन, पुणे (महाराष्ट्र) ने एक अनूठा जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। संस्था के संस्थापक संतोष जाधव ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि बरगद का एक पौधा लगाओ, 500 साल पुण्य कमाओ। संस्था का मानना है कि यदि प्रत्येक गांव, शहर, मोहल्ले और कॉलोनी में बरगद सहित दीर्घायु वृक्षों का बड़े स्तर पर रोपण किया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली दस पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रखने का संदेश भी देता है। पहले घर में तैयार करें पौधा, फिर सुरक्षित स्थान पर लगाएं संस्था ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों के पास फिलहाल जमीन उपलब्ध नहीं है, वे बरगद का पौधा गमले या पॉलीबैग में तैयार करें। जब पौधा लगभग 4 से 5 फीट का हो जाए, तब उसे किसी सुरक्षित स्थान जैसे मंदिर परिसर, गांव की सार्वजनिक भूमि, वन क्षेत्र, अनुपयोगी जमीन या अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानीय लोगों की सहमति से रोपित करें। विशेष अवसरों पर करें पौधारोपण अभियान के तहत नागरिकों से अपील की गई है कि वे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, किसी प्रियजन की स्मृति, सम्मान समारोह या पुरस्कार प्राप्ति जैसे विशेष अवसरों पर बरगद का पौधा लगाकर प्रकृति को अनमोल उपहार दें। हर गांव में 50 से 500 पौधे लगाने का लक्ष्य फाउंडेशन का लक्ष्य है कि प्रत्येक गांव में कम से कम 50 से 500 बरगद सहित बड़े वृक्षों का रोपण किया जाए। यदि यह संकल्प पूरे देश में सफल होता है तो अगले 10 से 15 वर्षों में हजारों गांव हरियाली, जल संरक्षण और स्वच्छ वातावरण के केंद्र बन सकते हैं। पर्यावरण और जैव विविधता को मिलेगा बड़ा लाभ विशेषज्ञों के अनुसार बड़े वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि मधुमक्खी, तितली, गिलहरी, चिड़िया, कौवा सहित अनेक जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित आवास भी बनते हैं। इससे जैव विविधता का संरक्षण होता है और प्राकृतिक संतुलन मजबूत होता है। बरगद जैसे विशाल वृक्ष वर्षा जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने, मिट्टी के कटाव को रोकने और प्राकृतिक खाद तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर संस्था का कहना है कि एक बरगद का वृक्ष कई सौ वर्षों तक जीवित रह सकता है। इसलिए आज लगाया गया एक पौधा आने वाली कई पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, छाया, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का लाभ देगा। यही कारण है कि अभियान का संदेश है एक बरगद का पौधा लगाना केवल पर्यावरण सेवा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर छोड़ना है संस्था की अपील सुशिलादेवी सोशल वेल्फेअर फाउंडेशन ने सभी राज्यों, जिलों, तहसीलों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और आम नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। संस्था का विश्वास है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बरगद का पौधा अवश्य लगाए, तो भारत को हरित, समृद्ध और पर्यावरण की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। recent visitors 28

दतिया में जीत के लिए विजयपुर का फार्मूला अपनाएगी कांग्रेस, विधानसभा क्षेत्र को पांच क्लस्टर में बांटा

Congress to adopt the Vijaypur formula for victory in Datia; assembly constituency divided into five clusters. भोपाल। दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत के लिए कांग्रेस विजयपुर विधानसभा के उपचुनाव का फार्मूला अपनाएगी। श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने तत्कालीन वन मंत्री रामनिवास रावत को इसी फार्मूले से हराया था। दतिया विधानसभा क्षेत्र को पांच क्लस्टर में बांटा गया है। इनकी कमान पूर्व मंत्री लाखन सिंह, सचिन यादव, विधायक दिनेश गुर्जर, पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार और प्रभु सिंह ठाकुर को दी है। प्रत्येक क्लस्टर को 8 से 10 सेक्टर में बांटकर नेताओं को तीन से छह बूथ की जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें न तो सभा करनी है और न ही रैली निकालनी है। इनका काम निर्धारित बूथों पर मतदाता संपर्क अभियान चलाना है। इसमें बूथ कमेटियां सहयोगी की भूमिका में रहेंगी। ग्रामीण क्षेत्र पर फोकस recent visitors 22

केंद्र सरकार पर भड़के केजरीवाल: धर्मेंद्र प्रधान का मांगा इस्तीफा, बोले- सोनम वांगचुक को बनाएं देश का शिक्षा मंत्री

Kejriwal lashes out at the Central Government: Demands Dharmendra Pradhan’s resignation, says Sonam Wangchuk should be made the country’s Education Minister. नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन को अपना समर्थन देते हुए केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर दी है। केंद्र को केजरीवाल की चेतावनीप्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि युवाओं की आवाज, इस आंदोलन और सोनम वांगचुक की बात को सुनिए, वरना तीन साल बाद (आगामी चुनावों में) केंद्र सरकार का वही हश्र होगा जो 2014 में तत्कालीन सरकार का हुआ था। पीएम मोदी को दिया अनोखा प्रस्तावशिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की मांग उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कैबिनेट में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा। केजरीवाल ने कहा कि मेरा प्रधानमंत्री को एक सुझाव और प्रस्ताव है कि धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाया जाना चाहिए और पीएम को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। सोनम वांगचुक के अनशन का 19वां दिनयह पूरा विवाद 2026 की नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों से जुड़ा है। लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक इसी मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। गुरुवार को उनके इस आमरण अनशन का 19वां दिन था। वांगचुक की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। वांगचुक की सेहत की रोजाना हो क्लीनिकल मॉनिटरिंगसोनम वांगचुक के लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिस पर गुरुवार को अदालत ने बड़ा आदेश जारी किया। अदालत की टिप्पणी: चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकार को इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए। हाईकोर्ट का निर्देश: कोर्ट ने आदेश दिया है कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना क्लीनिकल मॉनिटरिंग (जांच) की जाए। अगर सरकारी डॉक्टरों की राय में किसी भी तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, तो बिना किसी देरी के उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा दी जाए। केंद्र सरकार ने कोर्ट को दिया भरोसासुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम पहले से ही रोजाना वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। उन्होंने बेंच को भरोसा दिलाया कि यदि जरूरत पड़ी तो डॉक्टरों की एक और अतिरिक्त टीम भी तैनात की जा सकती है। कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन के बाद राकेश कुमार साहनी द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। recent visitors 35

MP के मंत्री लखन पटेल का वापस लिया गया प्रभार, क्या हैं इसके मायने; समझें

MP Minister Lakhan Patel stripped of his portfolio; understand the implications. मध्य प्रदेश के मंत्री लखन पटेल का प्रभार वापस ले लिया गया है। पशुपालन और डेयरी विकास विभाग अब मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि केंद्रीय नेतृत्व समीक्षा करेगा, और बदलाव की भोपाल ! मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में अचानक बदलाव किया गया है। देर रात राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन और डेयरी विकास विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात लखन पटेल का प्रभार वापस लिया गया और उसके तुरंत बाद गज नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। अब पशुपालन और डेयरी विकास विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रख लिया है। अब संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही मध्य प्रदेश कैबिनेट में बदलाव हो सकता है। क्या बोले लखन पटेल इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद लखन पटेल का बयान सामने आया है। पटेल ने कहा कि किसी मंत्री को विभाग सौंपना या उससे विभाग वापस लेना मुख्यमंत्री का अधिकार है। इस तरह अब मध्य प्रदेश कैबिनेट में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इस मामले के ठीक पहले मध्य प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इंटरव्यू में कहा था कि सरकार और पार्टी ने हर मंत्री के राजनीतिक प्रभाव, उसके कामकाज के क्षेत्र और विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा करने के बाद उसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। हालांकि, इस मामले को भाजपा प्रशासनिक फैसला बता सकती है, लेकिन विभाग वापस लेने के समय से साफ हो गया है कि यह मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद लिए गए फैसले का नतीजा है। मंत्रिमंडल में कब होगा बदलाव बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से जब पूछा गया कि क्या एमपी कैबिनेट में बदलाव की संभावना है। इसका जवाब देते हुए खंडेलवाल ने किसी तरह के बदलाव से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब बदलाव जरूरी होंगे, सही समय पर किया जाएंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल बदलाव की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व जब फैसला करेगा, तभी मंत्रिमंडल में बदलाव किए जाएंगे। इस मामले पर बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मंत्रियों की समीक्षा पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट दिल्ली भी पहुंच चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि पटेल से विभाग वापस लेने वाले फैसले को कैबिनेट में बड़े फेरबदल के पहले बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मामले पर जब खंडेलवाल से पूछा गया कि क्या कोई मंत्री उम्मदी के मुताबिक काम नहीं कर रहा है. तो उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने साफ किया कि पार्टी संगठन के पास मंत्रियों के कामकाज की पूरी जानकारी है उन्होंने कहा कि पार्टी को मंत्रियों के कामकाज ओर उनके व्यवहार के बारे में केंद्रीय नेतृत्व को जानकारी मिलती रहती है। recent visitors 28

किसान को मारी गोली, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग पर लगाए आरोप

Farmer shot; allegations leveled against Shaligram Garg, brother of Bageshwar Dham’s Dhirendra Shastri. छतरपुर। जिले के राजनगर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम कोड़ा में मंगलवार को गोली चलने की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। घायल किसान मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग ने उन्हें गोली मारी। घटना के बाद घायल किसान को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। जमीन बेचने का दबाव बनाने का लगाया आरोपघायल किसान मोतीलाल कुशवाहा का आरोप है कि क्षेत्र के किसानों पर जमीन बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि जो किसान अपनी जमीन बेचने से इनकार करते हैं, उनके साथ मारपीट और धमकी दी जाती है। किसान के मुताबिक, इसी विवाद के दौरान उन पर गोली चलाई गई, जिससे वे घायल हो गए। जिला अस्पताल में चल रहा उपचारघटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की मदद से घायल किसान को उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस हर पहलू से कर रही जांचछतरपुर के पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने बताया कि यह जांच की जा रही है कि घायल किसान को गोली लगी है या घटना की प्रकृति कुछ और है। उन्होंने कहा कि घायल किसान ने शालिग्राम गर्ग पर गोली मारने के आरोप लगाए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। उल्लेखनीय है कि शालिग्राम गर्ग पहले भी मारपीट से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। हालांकि इस मामले में वास्तविक स्थिति पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। recent visitors 26

भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी, राज्य सरकार को परिसर के पास नई जगह देने का निर्देश

Ban on Namaz within the Bhojshala complex remains in force; State government directed to provide an alternative site near the complex. सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विभिन्न मुस्लिम पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिकाओं पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले से पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते अभी भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस तथा अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किया। अदालत ने क्या दिया निर्देश?पीठ ने हालांकि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास ही अलग जगह दी जाए, जहां मुस्लिम शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। पीठ ने साफ किया कि अंतिम फैसले तक यह निर्देश अस्थायी है। मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी की याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि एएसआई, बिना अदालत की मंजूरी के भोजशाला परिसर में ढांचागत बदलाव नहीं करेगा। मुस्लिम पक्ष ने दी ये दलीलेंअदालत ने यह भी कहा कि मामले को अंतिम सुनवाई के लिए शीघ्र सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ ने कहा कि वे इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का मौका भी नहीं दिया। साल 2003 में एएसआई ने आदेश दिया था कि हफ्ते में एक दिन शुक्रवार को नमाज अदा की जाएगी और एक दिन मंगलवार को पूजा होगी। आज हमें पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है? ये बहुत गलत है। मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट करने वाले लोगों से पूछताछ भी नहीं की गई। हुजैफा ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि कुछ जगहों पर मंदिर हो सकते हैं, लेकिन इतिहास में पीछे जाने की जरूरत नहीं है। सिंघवी ने कहा, यहां 700 वर्षों से यहां नमाज हो रही है। 1927 -28 के सर्वे में कहा गया कि ये एक मस्जिद है। एमपी वक्फ एक्ट का नोटिफिकेशन भी यही कहता है। साल 1977 से यहां नमाज के साथ बसंत पंचमी की पूजा भी हो रही है, लेकिन हिंदू पक्ष की रिट याचिका पर आदेश पारित कर दिया गया। सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भोजशाला परिसर में नमाज का विरोध किया और कहा कि आदेश को दिए हुए दो महीने बीत चुके हैं। काफी कुछ हो चुका है। अगर फिर से नमाज का निर्देश दिया जाता है तो इससे प्रशासनिक परेशानी हो सकती है। सीजेआई ने कहा- ये बेहद संवेदनशील मुद्दा, सोच-समझकर आगे बढ़ने की जरूरतसीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ये बहुत संवेदनशील मुद्दा है। इसमें बहुत सोच समझ कर आगे बढ़ने और टिप्पणी करने की जरूरत है, वर्ना जनता में गलत संदेश जाएगा और गलत प्रभाव पड़ेगा। बेहतर होगा कि हम इसे अगले 10-20 दिनों के भीतर एक सुविधाजनक तारीख पर सुनवाई के लिए तय करते हैं। सीजेआई ने कहा कि हमें बहुत ज्यादा सावधान रहना चाहिए। ऐसा ऑर्डर पास नहीं करना चाहिए जिसका प्रभाव लॉ एंड ऑर्डर पर पड़े। एएसआई के इंतजाम करने के बावजूद, वहां पर दिक्कतें रही हैं। यह एक ऐसा मामला है जहां दोनों पक्षों को धैर्य रखना चाहिए। इसमें दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। सभी को तैयार रहना चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई 2026 को धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित करते हुए हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था। recent visitors 24

नरोत्तम को ले डूबा अतिउत्साह, मैदान में जाने से पहले हारे मिश्रा, अपनों ने… “धीरे से दिया जोर का झटका”

Over-enthusiasm proved to be Narottam’s undoing; Mishra lost the battle before even entering the fray—his own people “dealt a severe blow, ever so gently.” समर्थकों का हाईवे पर उग्र प्रदर्शन दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही शुरू हुआ विरोध भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जताई। विरोध के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा संगठन के कई पदाधिकारियों और दतिया नगर के पार्षदों ने भी इस्तीफे की घोषणा कर दी। समर्थकों ने किया प्रदर्शन, NH-44 पर लगाया जाम पार्टी के फैसले के विरोध में नाराज समर्थक सड़क पर उतर आए। उन्होंने नेशनल हाईवे-44 पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टिकट वितरण में लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी की गई है। उपचुनाव की वजह उपचुनाव की वजह कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता है। बैंक फ्रॉड मामले में कोर्ट ने उन्हें सजा दी, जिसके बाद सीट खाली हुई। 30 जुलाई को वोटिंग होनी है। कांग्रेस अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। नरोत्तम मिश्रा नरोत्तम मिश्रा दतिया में मजबूत नेता माने जाते हैं। 2023 के चुनाव में वे कांग्रेस के भारती से हारे थे, लेकिन अब वापसी की तैयारी में थे। उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था। टिकट कटने से उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। आशुतोष तिवारी आशुतोष तिवारी RSS से जुड़े हैं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। टिकट मिलने के बाद उन्होंने मिश्रा का आशीर्वाद मांगा, लेकिन जमीनी स्तर पर समर्थक मानने को तैयार नहीं। यह फैसला पार्टी की आंतरिक रणनीति का हिस्सा लगता है। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहे। ग्वालियर-झांसी हाईवे पर भी असर पड़ा। महिला कार्यकर्ताओं ने भी विरोध में हिस्सा लिया। पुलिस ने जाम खोलने की कोशिश की। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मिश्रा के समर्थक पार्टी से वफादार रहे हैं, लेकिन टिकट विवाद ने दरार पैदा कर दी। पार्टी हाईकमान अब स्थिति संभालने में जुटा है. अगर बगावत जारी रही तो BJP को नुकसान हो सकता है। आगे क्या होता है, यह देखना होगा। कुल मिलाकर यह स्थानीय नेतृत्व और हाईकमान के बीच टकराव का उदाहरण है।  बीजेपी नेता का पुलिस पर आरोप भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने कहा, ‘ हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ये मांग कर रहे थे कि दतिया का जो टिकट हुआ है उसे वापस लिया जाए और नरोत्तम मिश्रा को टिकट दिया जाए। हम संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रख रहे थे। हम लोगों ने पूरी रात रामधुन गाकर भारतीय जनता पार्टी से मांग करते हुए कहा कि टिकट नरोत्तम को दिया जाए लेकिन पुलिस प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और दतिया कलेक्टर की बर्बरता देखिए कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को दफ्तर में कैद कर दिया। जब तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी को टिकट नहीं मिलेगा तब तक हम लोग चक्का जाम करेंगे।  क्यों नाराज हैं नरोत्तम मिश्रा के समर्थक?दरअसल, बीजेपी ने शुक्रवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा का पत्ता काटते हुए आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था।  जैसे ही आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान हुआ, नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए। कुछ समर्थक शर्ट उतारकर सड़क पर लेट गए और ‘नरोत्तम दादा’ को टिकट न मिलने पर बीजेपी छोड़ने तक की धमकी देने लगे। हालांकि, टिकट मिलने के बाद आशुतोष तिवारी ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा उनके अभिभावक हैं और उन्होंने उनके लिए चुनाव प्रचार करने की बात कही है।  क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव? साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेता राजेन्द्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों से हरा दिया था। इधर, इसी साल (2026) अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में 3 साल की सजा सुना दी। सजा मिलने के कारण राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द हो गई, जिसके चलते दतिया सीट खाली हो गई और यहां उपचुनाव हो रहा है। यहां 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे औऱ 3 अगस्त को नतीजे घोषित होंगे। उपचुनाव से पहले बीजेपी के लिए बढ़ी चुनौती दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय रहते नहीं मनाया गया, तो इसका असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नजर दतिया में बढ़ते विरोध के बाद अब सभी की नजर भाजपा नेतृत्व पर टिकी है। पार्टी किस तरह नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। वहीं, विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। recent visitors 20