थाना लवकुशनगर पुलिस की बड़ी कार्यवाही:  वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 12 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन फ्रॉड में शामिल 2 आरोपी गिरफ्तार

Lavkushnagar police station takes major action – Two accused arrested for online fraud of over ₹12 lakh in the name of work from home. छतरपुर। थाना लवकुशनगर अंतर्गत माह अगस्त में आवेदक सरफराज अहमद निवासी लवकुशनगर द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि आरोपियों द्वारा टेलीग्राम के माध्यम से वर्क फ्रॉम होम का प्रलोभन देकर विभिन्न टास्क पूरे करवाने के नाम पर ऑनलाइन माध्यम से करीब 12 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांजैक्शन करवाकर धोखाधड़ी की गई है। रिपोर्ट पर थाना लवकुशनगर में भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। पुलिस अधीक्षक छतरपुर रजत सकलेचा द्वारा प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम गठित कर आरोपियों की गिरफ्तारी तथा ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े अन्य लोगों एवं पूरी कड़ी का पता लगाने के निर्देश दिए गए। पुलिस टीम द्वारा तकनीकी साक्ष्यों एवं अन्य माध्यमों से बारीकी से जांच करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड की कड़ी में शामिल दो आरोपियों— 1. अयान खान, पिता राशिद खान, निवासी दुबे कॉलोनी, गुना 2. सोनाली जैन, पिता पवन जैन, निवासी ईसागढ़, जिला अशोकनगर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ एवं एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि आरोपी अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क करते थे तथा वर्क फ्रॉम होम, गूगल रेटिंग एवं अन्य ऑनलाइन टास्क पूरे करने के नाम पर पहले राशि प्राप्त करने और अधिक टास्क पूरा करने पर अधिक राशि देने का प्रलोभन देते थे। इसी प्रक्रिया में फरियादी से भी 12 लाख रुपये से अधिक की राशि ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कराकर धोखाधड़ी की गई। आरोपियों के कब्जे से ₹62,000 नगद, 2 मोबाइल फोन, पासबुक एवं एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। साइबर फ्रॉड से जुड़े अन्य आरोपियों एवं पूरे नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करने के लिए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विवेचना एवं जांच जारी है। उक्त कार्यवाही में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले एवं एसडीओपी लवकुशनगर नवीन दुबे के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी लवकुशनगर निरीक्षक अजय अंबे, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक नेहा सिंह गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक कमला सिंह, सहायक उप निरीक्षक राम प्रकाश, प्रधान आरक्षक ओमपाल सिंह, आरक्षक राहुल गुर्जर, विवेक शर्मा, सूरज शर्मा, नरेंद्र एवं विकास, साइबर सेल से मयंक, दीपक एवं टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। recent visitors 42

सावधान कहीं आपके साथ तो नहीं हो रहा: 2 माह के राशन के लिए लगवाए अंगूठे, मिला सिर्फ 1 माह का राशन

Be careful, this isn’t happening to you: Thumb impressions for 2 months’ ration, only received 1 month’s ration शिवपुरी । बामौरकलां में शासकीय उचित मूल्य दुकान पर राशन वितरण को लेकर हितग्राहियों ने गड़बड़ी का आरोप लगाया है। आरोप है कि 2-2 माह के राशन के लिए अंगूठे लगवाने के बाद केवल 1-1 माह का राशन दिया गया, जिसके विरोध में हितग्राहियों ने दुकान पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। मामला सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया। इसके बाद सहायक विक्रेता धर्मेंद्र लोधी दुकान पर पहुंचे और हितग्राहियों को बचा हुआ राशन वितरित किया। खाद्य विभाग ने दुकान के पोर्टल रिकॉर्ड की जांच की है और सेल्समैन व सहायक विक्रेता को नोटिस देने की बात कही है। तीन दिन दुकान बंद मिलने से बढ़ा विवाद बामौरकलां आदिवासी बस्ती के 40 से अधिक हितग्राही अपने पंच गब्बर सिंह यादव के साथ उचित मूल्य दुकान पहुंचे थे। हितग्राहियों का कहना था कि अंगूठे लगवाने के बाद उन्हें एक माह का राशन ही मिला था। शेष राशन बाद में देने का आश्वासन दिया गया था। इसी उम्मीद में हितग्राही लगातार तीन दिनों तक दुकान पहुंचे, लेकिन दुकान बंद मिली और उन्हें बिना राशन लिए लौटना पड़ा। 11 सितंबर को दुकान पर जताया विरोध 11 सितंबर को हितग्राही दोबारा दुकान पहुंचे। उन्होंने दुकान पर बैठकर विरोध दर्ज कराया। पंच गब्बर सिंह यादव ने इस दौरान वीडियो बनवाया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद सहायक विक्रेता धर्मेंद्र लोधी राशन बांटने पहुंचे। इसके बाद हितग्राहियों को उनका बचा हुआ राशन दे दिया गया। पोर्टल रिकॉर्ड में 7, 8 और 9 सितंबर की एंट्री पिछोर के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी गौरव कदम के अनुसार, हितग्राहियों के अंगूठे एक दिन पहले लगाए गए थे और शुक्रवार को राशन का वितरण कर दिया गया। दुकान के पोर्टल रिकॉर्ड की जांच में 10 सितंबर को कोई ट्रांजेक्शन नहीं मिला। वहीं 7, 8 और 9 सितंबर को एक-एक ट्रांजेक्शन दर्ज मिला। सेल्समैन और सहायक विक्रेता को नोटिस जेएसओ गौरव कदम ने कहा कि मामले को लेकर सेल्समैन और सहायक विक्रेता को नोटिस जारी किया जाएगा। पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है। बामौरकलां में सामने आया यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कोलारस और पोहरी क्षेत्र में PDS राशन वितरण में धांधली के मामलों में FIR दर्ज हो चुकी है। जिला आपूर्ति अधिकारी ने जांच की बात कही जिला आपूर्ति अधिकारी शिवपुरी तुलेश्वर कुरें ने कहा कि राशन के संबंध में जेएसओ कदम दुकान पर गए थे। यदि पहले हितग्राहियों के अंगूठे लगवाए गए थे और राशन बाद में वितरित किया गया है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। तुलेश्वर कुरें, जिला आपूर्ति अधिकारी शिवपुरी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी। recent visitors 19

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक वृद्धि: फॉरेक्स रिजर्व 785.71 अरब डॉलर पहुंचा, क्या होगा फायदा?

Historic increase in India’s foreign exchange reserves: Forex reserves reach $785.71 billion, what will be the benefit? नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 44.90 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 785.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह देश के इतिहास में विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इससे पहले 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भी भंडार में 11.47 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी, जिसके बाद यह 740.80 अरब डॉलर पर पहुंचा था। विदेशी मुद्रा भंडार क्यों बढ़ा? भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस बड़ी वृद्धि का सबसे प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में तेज बढ़ोतरी रही। समीक्षा सप्ताह के दौरान एफसीए 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर पर पहुंच गया। मार्च के अंत की तुलना में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 95.886 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह 63.692 अरब डॉलर अधिक है। सोने का भंडार घटा मार्च के अंत की तुलना में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 95.886 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, इस अवधि के दौरान देश के सोने का भंडार यानी गोल्ड रिजर्व में कुछ कमी दर्ज की गई। सोने का भंडार 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद, एक साल पहले की तुलना में भारत का स्वर्ण भंडार अभी भी 23.517 अरब डॉलर अधिक है। यह मार्च 2026 के अंत के स्तर से 1.580 अरब डॉलर कम रहा। भारत की SDR में गिरावट RBI के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की विशेष आहरण अधिकार (SDR) होल्डिंग्स में मामूली गिरावट आई और यह 4 मिलियन डॉलर घटकर 18.806 अरब डॉलर रह गई। इसके बावजूद एसडीआर होल्डिंग्स मार्च के अंत की तुलना में 184 मिलियन डॉलर और पिछले वर्ष की तुलना में 64 मिलियन डॉलर अधिक हैं। वहीं, IMF में भारत की रिजर्व पोजीशन में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 2 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर पर पहुंच गई। यह स्तर मार्च 2026 के अंत से 108 मिलियन डॉलर और एक वर्ष पहले की तुलना में 168 मिलियन डॉलर अधिक है। मार्च 2026 के अंत से अब तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 94.599 अरब डॉलर बढ़ चुका है। वहीं पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इसमें 87.438 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। यह उछाल भारत की बाह्य वित्तीय स्थिति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। क्या होगा फायदा? विदेशी मुद्रा भंडार का यह रिकॉर्ड स्तर भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाहरी झटकों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिससे रुपए की स्थिरता बनाए रखने, आयात वित्तपोषण की क्षमता बढ़ाने और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के दौरान अर्थव्यवस्था को सहारा देने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि लगातार दो सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में कुल 56 अरब डॉलर से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है। इससे भारत दुनिया के सबसे मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों में अपनी स्थिति और सुदृढ़ करने में सफल रहा है। recent visitors 33

लाइव सर्जरी से डॉक्टरों ने सीखे घुटनाप्रत्यारोपण के तरीके: जबलपुर में यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट डे पर हुई मास्टर क्लास, इंदौर के विशेषज्ञ भी हुए शामिल

Doctors learned knee replacement techniques through live surgery: A master class was held in Jabalpur on Unicompartmental Knee Replacement Day, with experts from Indore also attending. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । मध्य प्रदेश इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (MPIOA), एनएससीबी (NSCB) मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग और जबलपुर ऑर्थोपेडिक्स सोसाइटी ने मिलकर “यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR) डे” मनाया। इस मौके पर एक अकादमिक और क्लिनिकल मास्टरक्लास का आयोजन किया गया। इसका मकसद डॉक्टरों को घुटने के सीमित हिस्से के गठिया, सही मरीज चुनने और आधुनिक सर्जरी की नई जानकारी देना था। इसका विषय “Together for Better Mobility” रखा था। मेडिकल कॉलेज से लाइव प्रसारण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एनएससीबी मेडिकल कॉलेज से लाइव प्रसारित यूकेआर सर्जरी थी। होटल में मौजूद डॉक्टरों ने रिमोट लाइव वीडियो के जरिए ऑपरेशन, बोन प्रिपरेशन, इंस्ट्रूमेंटेशन और इम्प्लांट पोजिशनिंग के अलग-अलग चरणों को ध्यान से देखा। साथ ही, सम्मेलन में घुटने की बायोमैकेनिक्स, यूकेआर के सिद्धांत और सर्जरी की प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया। क्लिनिकल केस प्रेजेंटेशन डॉक्टरों के प्रैक्टिकल स्किल को बेहतर बनाने के लिए क्लिनिकल केस प्रेजेंटेशन के साथ ‘हैंड्स ऑन सॉबोन मॉडल वर्कशॉप’ भी हुई। इसमें शामिल लोगों ने इम्प्लांट लगाने का सीधा अभ्यास किया। इस मास्टरक्लास में इंदौर से आए विशेषज्ञ डॉ. हेमंत मांडोवरा और डॉ. अनुराग पंवेल के साथ इलाके के कई सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल हुए। आधुनिक तकनीक की जानकारी मिली आयोजन अध्यक्ष डॉ. केके पांडे और आयोजन सचिव डॉ. उत्सव कटाकवार ने बताया कि ऐसे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से डॉक्टरों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलती है इसका सीधा फायदा मरीजों को सुरक्षित इलाज और जल्दी ठीक होने के रूप में मिलता है। यह आयोजन जबलपुर में ऑर्थोपेडिक शिक्षा और घुटना प्रत्यारोपण सेवाओं को बढ़ाने में एक अहम कदम रहा। recent visitors 23

मंत्री नहीं बनने से एमपी बीजेपी में बगावत के सुर, कई दिग्गजों के अरमान पर पानी फेरतीं भाजपा,

There are voices of rebellion in the MP BJP due to not becoming a minister, the BJP has dashed the hopes of many bigwigs.  विशेष संवाददाता: राम मेहरा  भोपाल । मध्यप्रदेश भाजपा कई मामलों में पूरी तरह बदल गई है। नेताओं को पहले संघर्ष करना पड़ता है, बाद में पद और प्रतिष्ठा मिलती है। फिलहाल निगम, मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड व आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के साथ यही हो रहा है। पहले इन्हें ढाई से तीन साल नियुक्ति पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, अब अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री और उपाध्यक्ष राज्यमंत्री का दर्जा पाने के लिए तरस रहे हैं। मप्र में ऐसा पहली बार हो रहा है जब अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तो बनाए, लेकिन मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा रहा। अंदर खबर है कि कुछ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तो दर्जा नहीं मिलने के कारण नाराज हो गए है। नतीजा, मन लगाकर काम नहीं कर रहे। बीजेपी के करीब 48 ऐसे नेता हैं जोकि मंत्री नहीं बन पाने से मन मसोसकर बैठे हैं। जयभान सिंह पवैया का कार्यकाल तो कुछ ही महीने बात खत्म हो रहा 34 नेताओं को अध्यक्ष बनाया, 14 नेताओं को उपाध्यक्ष बता दें, सरकार ने पिछले माहों में विभिन्न निगम, मंडलों, विकास प्राधिकरणों, बोर्डों व आयोगों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। 34 नेताओं को अध्यक्ष बनाया है जबकि 14 नेताओं को उपाध्यक्ष का पद नवाजा है। इनको अहम मंडल-बोर्ड का बनाया अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, रामकृष्ण कुसमारिया, रामलाल रौतेल, डॉ. कैलाश जाटव, डॉ. निवेदिता शर्मा, रेखा यादव, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, प्रवीण शर्मा, केशव सिंह बघेल, रामनिवास रावत, सत्येंद्र भूषण सिंह, संजय नगायच, केपी यादव, केशव सिंह भदौरिया, प्रभुदयाल कुशवाह, पंकज जोशी, अशोक जादौन, वीरेंद्र गोयल, संदीप जैन, महेंद्र सिंह यादव, मधुसुदन भदौरिया, रवि सोलंकी, राजेंद्र भारती, विनोद गोटिया, अशोक शर्मा, मनोहर पोरवाल, विजय यादव, रमेशचंद्र शर्मा, कौशल शर्मा, गुड्डी आदिवासी को अध्यक्ष बनाया है। इन्हें उपाध्यक्ष का दिया जिम्मा सरकार के मंडल-बोर्ड में मनोहर लाल नागर, संजीव कांकर, राकेश जादौन, उदयवीर सिंह गुर्जर, प्रशांत केशरवानी, सुधीर गुप्ता, वेद प्रकाश शिवहरे, मुकेश यादव, रवि वर्मा, हरिश मेवाफरोश, डॉ. अजय सिंह, संजय तीर्थानी, गोविंद काकाणी, प्रवीण सोनी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। दावा- दर्जा मिलने से मिलती है काम कराने की शक्ति असल में जब भी सरकारें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष नियुक्त करती है, उसके बाद राज्य मंत्री का दर्जा देती है। ये आदेश अलग से जारी होते हैं। राज्य के एक बड़े बोर्ड व कमाई वाले निगम के अध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर पत्रिका को बताया कि मंत्री का दर्जा मिलने से आम आदमी व कार्यकर्ताओं के काम करने की शक्ति मिलती है। अफसर सुनते हैं, लिखे गए पत्रों पर जल्द कार्रवाई होती है। मिलने के लिए भी ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। recent visitors 20

भोपाल में बढ़ा H1N1 और डेंगू का खतरा, 7 दिन में स्वाइन फ्लू के 36 नए मरीज, जानें लक्षण और बचाव

H1N1 and dengue threat rises in Bhopal; 36 new swine flu patients in 7 days; learn about symptoms and prevention मौसम के बदलते मिजाज के बीच राजधानी भोपाल में मौसमी बीमारियों का असर बढ़ता नजर आ रहा है। स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पिछले सात दिनों में H1N1 के 36 नए मरीज सामने आए हैं. इसके साथ ही स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या 57 पहुंच गई है. वहीं डेंगू के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं  हेल्थ जोन। मौसम के बदलते मिजाज के बीच राजधानी भोपाल में मौसमी बीमारियों का असर बढ़ता नजर आ रहा है। स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पिछले सात दिनों में H1N1 के 36 नए मरीज सामने आए हैं. इसके साथ ही स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या 57 पहुंच गई है. वहीं डेंगू के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं और अब तक 72 मरीज सामने आ चुके हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लोगों से सतर्क रहने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील कर रहा है. स्वाइन फ्लू के ये हैं प्रमुख लक्षण H1N1 समेत फ्लू में तेज बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है.अगर बुखार लगातार बना हुआ है, खांसी बढ़ रही है या सांस लेने में परेशानी हो रही है तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी. बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी फ्लू से गंभीर बीमारी का जोखिम छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कुछ दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में अधिक हो सकता है. ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है. हाथों की सफाई और खांसी के दौरान बरतें सावधानी संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को साबुन से नियमित रूप से साफ करना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना और बीमार व्यक्ति के बेहद नजदीकी संपर्क से बचना उपयोगी सावधानियां हैं. फ्लू के लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना भी संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है.भोपाल में H1N1 और डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल घबराने के बजाय सावधानी बरतना जरूरी है. लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लें recent visitors 25

मीनाक्षी नटराजन केस, रजनीश अग्रवाल का नहीं मिला पता, महेश केवट ने नोटिस लेने से किया मना

Meenakshi Natarajan case: Rajneesh Agarwal’s whereabouts unknown, Mahesh Kevat refuses to take notice विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। राज्यसभा सदस्य का नामांकन निरस्त किये जाने को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर याचिका पर शनिवार को सुनवाई हुई. इस मामले में हाईकोर्ट ने भाजपा के नवनिर्वाचित 3 राज्यसभा सांसद सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ को बताया गया कि राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया. इसके अलावा राज्यसभा सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया. रजनीश अग्रवाल का नहीं मिला पता, महेश केवट ने नोटिस लेने से किया मना हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि सांसद तरुण चुघ को भेजी गयी याचिका की कॉपी पढ़ने लायक नहीं है. सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया है. सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया. याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि सांसद रजनीश अग्रवाल के द्वारा चुनाव आयोग में दिये गये फार्म के पते पर नोटिस सर्व किया गया था. इसके अलावा केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग की तरफ से याचिका से उनका नाम विलोपित किये जाने की मांग करते हुए आवेदन पेश किया. हाईकोर्ट जस्टिस ने दिए आदेश हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा, “सांसद तरुण चुघ को पिटिशन की कॉपी और दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजने के निर्देष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को दिये हैं. सांसद रजनीश अग्रवाल को आरएडी मोड (रजिस्टर्ड पावती सहित) से नोटिस भेजे जाएं. सांसद महेश केवट को भेजा गया नोटिस सर्व हुआ माना जाए और उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक अवसर और प्रदान किया जाता है. नाम हटाने के लिए दायर आवेदन पर याचिकाकर्ता अपना जवाब पेश करें.” मीनाक्षी नटराजन ने हाईकोर्ट में क्यों दायर की है याचिका? कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर की गई चुनाव याचिका में कहा गया था कि तेलंगाना की एक अदालत में महिला द्वारा दायर व्यक्तिगत परिवाद में उन्हें प्रतिवादी बनाया था. प्रतिवादी बनाए जाने के कारण न्यायालय ने उनके पक्ष के लिए उन्हें नोटिस जारी किया था. उनके खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज या विचाराधीन नहीं था. उनके नामांकन पर आपत्ति प्रस्तुत किये जाने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के विपरीत जल्दबाजी में न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी छुपाने के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया. उन्होंने सुनवाई के दौरान रिटर्निंग अधिकारी को बताया था कि परिवाद में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है, सिर्फ औपचारिक तौर पर उन्हे अनावेदक बनाया गया है. रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा उनका नामांकन नियम विरुद्ध तरीके से निरस्त किया गया है. जिसके कारण यह याचिका दायर की गई है. याचिका में मध्य प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल, महेश केवट, केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग को अनावेदक बनाया गया है. recent visitors 31