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भोपाल में स्कूलों के बाहर ई-रिक्शा पर लगेगा प्रतिबंध, बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त

E-rickshaws will be banned outside schools in Bhopal, administration strict on children’s safety भोपाल! राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों के बाहर ई-रिक्शा पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। शुक्रवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि ई-रिक्शा में छोटे बच्चों को स्कूल लाना-ले जाना सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। कलेक्टर ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि ई-रिक्शा का उपयोग बच्चों की जान के लिए खतरा बन सकता है, खासकर अधिक संख्या में बच्चों को बिना सुरक्षा उपायों के बैठाने पर। इसी वजह से स्कूल परिसर और उसके आसपास ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। ट्रैफिक सुधार की दिशा में ठोस पहलबैठक में 42 चौराहों पर ट्रैफिक सुगमता के लिए लेफ्ट टर्न सुधार की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके लिए तीन करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। सांसद शर्मा ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे मैनिट के ट्रैफिक एक्सपर्ट्स की मदद से एक हफ्ते के भीतर सुधार योजना पेश करें। उन्होंने बिना तैयारी आए अधिकारियों को फटकार भी लगाई। अन्य अहम फैसले: अतिक्रमण, कंडम वाहन और ट्रांसफार्मर हटेंगेइसके अलावा शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने, पुराने और अनुपयोगी वाहनों को हटाने, तथा रास्तों में खंभे और ट्रांसफार्मर जैसी बाधाओं को दूर करने पर भी जोर दिया गया। पार्किंग व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में अब ट्रैफिक सुधार महज़ कागजों की बात नहीं रह जाएगी। प्रशासनिक सख्ती और योजनाबद्ध क्रियान्वयन से आने वाले दिनों में बच्चों की सुरक्षा और आमजन की आवाजाही में काफी सुधार देखने को मिलेगा। ई-रिक्शा पर लगाया गया यह प्रतिबंध एक सख्त लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 28

मध्यप्रदेश : जनता परेशान और जनप्रतिनिधि मालामाल – लोकतंत्र का बदलता चेहरा

मध्यप्रदेश : जनता परेशान और जनप्रतिनिधि मालामाल – लोकतंत्र का बदलता चेहरा

Madhya Pradesh: People are troubled and public representatives are rich – the changing face of democracy भोपाल ! मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है—इस बार कारण है 102 विधायकों के लिए बनने जा रहे आलीशान फ्लैट्स, जिनकी लागत 159.13 करोड़ रुपये आंकी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जुलाई को इन फ्लैट्स का भूमिपूजन करेंगे। दस मंजिला इमारतें, तीन बेडरूम, हॉल, किचन, बालकनी, पार्किंग, स्विमिंग पूल, जिम, कैंटीन और फायर अलार्म जैसी सुविधाएं… ये सब सुनकर मन में सवाल उठना स्वाभाविक है: क्या सचमुच हमारे जनप्रतिनिधियों की ज़रूरतें जनता की परेशानियों से ज्यादा जरूरी हो गई हैं? प्रदेश की सड़कों की हालत, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर स्थिति और बेरोजगारी जैसे मुद्दे अभी भी आम नागरिक की सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं। गांवों में पीने के पानी की किल्लत है, किसान कर्ज से त्रस्त हैं, युवाओं को रोजगार नहीं, और शहरों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहीं दूसरी ओर, राज्य के खजाने से करोड़ों खर्च करके विधायकों को “विश्राम” देने की तैयारी चल रही है। यह सच है कि जनप्रतिनिधियों को काम करने के लिए बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन जब जनता महंगाई और बदहाल व्यवस्था से जूझ रही हो, तब इतनी विलासिता क्या उचित है? क्या लोकतंत्र का मतलब सिर्फ शासकों की सुविधा रह गया है, और जनता की तकलीफों को नजरअंदाज कर देना अब परंपरा बन गई है? अतीत में जिन जमीनों पर ये फ्लैट बनने थे, वहां पेड़ों की कटाई का विरोध हुआ। इसका हल निकाला गया, लेकिन जनता की समस्याओं का हल कौन निकालेगा? सवाल यह नहीं है कि विधायकों को आवास मिलना चाहिए या नहीं, सवाल यह है कि क्या यह प्राथमिकता होनी चाहिए जब राज्य की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की स्थिति दोनों ही संकट में हैं? आज जरूरत है कि सरकारें दिखावे और सुविधाओं की राजनीति से ऊपर उठकर जन सरोकारों को प्राथमिकता दें। नहीं तो धीरे-धीरे लोकतंत्र केवल “वोट लेकर सुविधाएं पाने का माध्यम” बनकर रह जाएगा। जनता सब देख रही है, और उसका फैसला समय आने पर बहुत साफ़ होता है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 32

मंत्री पटेल ने देखा गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया गो-शाला परिसर में किया वृक्षारोपण

Minister Patel visited the cow rehabilitation center Hingonia Tree plantation was done in the cow shelter premises भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया, जयपुर का भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने गो-शाला परिसर में बहुउद्धेशीय पशु चिकित्सालय, आईओसीएल के गैस प्लांट, मिल्क पार्लर आदि को देखा. उन्होंने बाड़ों में गायों की देखभाल एवं साफ सफाई व्यवस्था का अवलोकन भी किया. मंत्री पटेल द्वारा गो-शाला परिसर में वृक्षा रोपण भी किया गया. भ्रमण के दौरान मंत्री पटेल के साथ राजस्थान पशुपालन विभाग के निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक और गो शाला के प्रबंधक थे. गो-शाला का संचालन कृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट द्वारा किया जाता है. गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया लगभग 3 हजार 200 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 70 बाड़े हैं, जिनमें एक हजार 300 नंदी सहित कुल 17 हजार 500 गो-वंश है. गो-शाला में गोबर से संवर्धित सीएनजी गैस प्लांट स्थापित है, जिसकी उत्पादन क्षमता 400 किलोग्राम सीएनजी प्रतिदिन है. गो-शाला के 200 बीघा क्षेत्र में नेपियर घास का उत्पादन किया जाता है. गो-शाला का दुग्ध उत्पादन 2 हजार लीटर प्रतिदिन है. यहां गोबर से गो-काष्ठ, दीपक, गमले, जैविक खाद्य तथा दूध से दही, पनीर घी और मिठाई को निर्माण किया जाता है. गो-शाला परिसर में ग्रामीण बहुउद्धेशीय आधुनिक पशु चिकित्सालय स्थापित है, जो 24 घंटे संचालित रहता है. Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 49

तबादला-पोस्टिंग: अधिकारी ही रहे बॉस, गिड़गिड़ाते रह गए मंत्री, चांस खत्म

तबादला-पोस्टिंग: अधिकारी ही रहे बॉस, गिड़गिड़ाते रह गए मंत्री, चांस खत्म

Transfer-Posting: Officers remained the bosses, ministers kept pleading, chances over भोपाल। प्रदेश में एक महीना 17 दिन ट्रांसफर और पोस्टिंग का सीजन चला। सरकार ने मंत्रियों को छूट दी थी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग में विभाग के एसीएस-पीएस ने अपनी मनमार्जी चलाई और उन्होंने ही अपनी रणनीति के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए। चिंताजनक पहलू यह है कि गंभीर बीमारी से जुड़े प्रकरणों में कर्मचारियों को ट्रांसफर का लाभ नहीं मिला। जबकि नीति में गंभीर बीमारी, परिवार में बीमार और पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया था। वन विभाग ने तो ‘ए-प्लसÓ की नोटशीट तक की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया है। आखिरी दिन तक वन मंत्रालय में तबादला सूची में मैनेजमेंट कोटे के आधार देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे। तबादला सीजन में मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के बीच तालमेल की कमी भी खुलकर सामने आई है। तबादले के लिए तमाम मनुहार कर बैन हटवाने वाले मंत्रियों को अपने मिलने-जुलने वालों के तबादले और पोस्टिंग करने का मौका नहीं मिल सका है। वरिष्ठ अफसरों ने इसके लिए सरकार के नियमों को भी दरकिनार किया है। एसीएस और मंत्रियों के बीच खींचतान की वजह से कई विभागों में 8 फीसदी तक तबादले नहीं हो पाए हैं। वहीं कई विभागों द्वारा अब बैकडेट में तबादला आदेश जारी किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग ने 509 पटवारियों का तबादला किए। इसके बाद 89 पटवारियों के आधी रात को आदेश जारी कर दिए गए हैं। अभी कुछ सूची जारी करने की तैयारी विभाग कर रहा है। वह भी बैकडेट में होने की तैयारी चल रही है। वन विभाग में फारेस्ट गार्ड, प्रभारी रेंजर से लेकर एसडीओ तक के ट्रांसफर 17 और 18 जून तक जारी किए गए हैं। सीएम के विभागों को लेकर खासी माथा-पच्चीमुख्यमंत्री के पास गृह, जेल, उद्योग, नर्मदा घाटी, विमानन, वन जैसे करीबन 10 से ज्यादा विभाग हैं। इन विभागों में जितने भी ट्रांसफर किए गए हैं, उसमें सीएम मॉनिट के नाम पर एसीएस-पीएस ने अपनी मनमानी की है। वन विभाग में दीगर मंत्रियों को डस्टबिन में डाल दिया गया। इससे मंत्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। साथ ही स्थानांतरित हुए अधिकारियों-कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कई अधिकारियों का मैनेजमेंट कोटे से मनपसंद पोस्टिंग कराने की सिफारिश मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों से की थी। उनके नाम सूची में आए, लेकिन चाही गई जगह नहीं मिली। यहां भी देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे हैं। यही वजह रही कि एक रेंजर स्वस्ति श्री जैन की पोस्टिंग 2 जगह कर दी गई। कुछ मामलों में जहां जगह ही नहीं, वहां भी तबादले किए गए हैं। वन विभाग में चर्चा है कि मंत्रालय के अधिकारियों ने जमकर मनमानी की, क्योंकि वन विभाग सीएम के पास है और उनके पास गृह जेल उद्योग और आईएएस की पोस्टिंग संबंधित महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसके कारण उनका वन विभाग पर फोकस कम रहा और इसका फायदा नौकरशाह और शीर्ष अफसरों ने जमकर उठाया। यही स्थिति जेल विभाग में भी रही। उद्योग विभाग की सूची का तो कर्मचारियों को पता ही नहीं चला। एमएसएमई विभाग में मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रस्तावों को तवज्जो ही नहीं दी गई। उधर, पीएचई में किए गए तबादलों में विभागीय मंत्री द्वारा की गई अनुशंसाओं को दरकिनार कर ट्रांसफर किए गए। यह सब मुख्यमंत्री के नाम पर विभागों के अफसरों ने खेल खेला है। इस मामले में तो कर्मचारियों ने विभागाध्यक्षों पर लेनदेन के भी आरोप लगाए हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल की तबादलों में नहीं चलीकैबिनेट में प्रहलाद पटेल कद्दावर मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन तबादलों में अफसरों ने उनकी नहीं सुनी। तबादला आदेश जारी करने के दौरान अफसरों ने यह कहकर मंत्री के नाम रिजेक्ट किए कि यह तीन फार्मूले में फिट नहीं बैठते हैं। ये फार्मूला है-पारस्परिक तबादला, गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या ब्रेन ट्यूमर तथा तीसरा महिला का अपने परिवार से दूर पदस्थ होना बताया गया। यही वजह है कि मंत्री के यहां से गए प्रस्तावों पर तबादले नहीं किए गए। उधर, आजीविका मिशन, आरईएस, पंचायत राज सहित अन्य विभागाध्यक्ष कार्यालयों में ट्रांसफर खुलकर किए गए हैं। राजस्व विभाग के पीएस विवेक पोरवाल ने मंत्री करण सिंह वर्मा की भी नहीं सुनी, ऐसी चर्चा है। मंत्री ने जो सूची भेजी, उसमें भारी काट-छांट करते हुए प्रमुख सचिव और सीएलआर ने नामात्र के तबादले किए हैं। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 50

डिजिटल इंडिया या मौत का इंतज़ार? सरकार बताए—30 सेकंड की चेतावनी जरूरी है या ज़िंदगी?

डिजिटल इंडिया या मौत का इंतज़ार? सरकार बताए—30 सेकंड की चेतावनी जरूरी है या ज़िंदगी?

Digital India or waiting for death? Government should tell-30 seconds warning is more important or life? Digital India or waiting for death देश डिजिटल युग में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है, लेकिन अफसोस कि तकनीक की यही तेज़ रफ्तार अब आम आदमी की जिंदगी में देरी का कारण बन रही है और कभी-कभी मौत का भी। बीते दिनों एक दिल दहला देने वाली घटना में महज 38 सेकंड में 242 जिंदगियां जलकर राख हो गईं। अब कल्पना कीजिए कि अगर उन क्षणों में किसी ने मदद के लिए फोन मिलाया होता, तो उसे पहले 30 सेकंड अमिताभ बच्चन की साइबर क्राइम चेतावनी सुननी पड़ती। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल व्यवस्था की एक क्रूर सच्चाई है। सरकार और दूरसंचार कंपनियों ने साइबर सुरक्षा को लेकर कॉल से पहले एक चेतावनी संदेश जारी करना शुरू किया है, जिसमें मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन की आवाज़ में लोगों को आगाह किया जाता है। लेकिन यह चेतावनी अब सामान्य सुविधा नहीं, बल्कि आपात स्थिति में बाधा बन चुकी है। Digital India or waiting for death सोचिए अगर कोई सड़क हादसे का शिकार हो गया हो, कोई महिला संकट में हो, या किसी को दिल का दौरा पड़ा हो — उस समय हर सेकंड कीमती होता है। वहां 30 सेकंड का यह चेतावनी संदेश जान ले सकता है। किसी तकनीकी या साइबर धोखाधड़ी से बचाने के नाम पर अगर हम इंसानों की जान को दांव पर लगाएं, तो यह नीतिगत असंवेदनशीलता ही कहलाएगी। Read more: घरेलू कामों को बोझ न समझें, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी मानें! इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, दूरसंचार मंत्रालय और नेटवर्क कंपनियां तीनों ही मौन हैं। क्या इन संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे जनता की सुरक्षा और सुविधा के संतुलन को समझें? टेक्नोलॉजी का उद्देश्य सुविधा देना होता है, न कि बाधा बनना। यह कहना उचित है कि साइबर क्राइम से बचाव ज़रूरी है, लेकिन यह तभी तक उपयोगी है जब तक वह जीवन रक्षक साधनों में हस्तक्षेप न करे। अगर कोई व्यक्ति दिन में 10 बार कॉल कर रहा है, तो हर बार वही चेतावनी सुनाना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि जनता की सुनने की क्षमता और धैर्य की परीक्षा भी है। जब एक बार चेतावनी पर्याप्त हो सकती है, तो उसे हर कॉल पर सुनाना किस तर्क पर आधारित है? यह व्यवस्था नागरिकों की आपात प्रतिक्रिया क्षमता को कुंद करती है। समस्या की जड़ यह भी है कि हमने तकनीकी सुधार को जनता की जमीनी जरूरतों से अलग कर दिया है। अधिकारी वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर साइबर क्राइम से बचाव के लिए चेतावनियां जारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह अंदाज़ा नहीं कि वास्तविक भारत में इंटरनेट की गति और मोबाइल नेटवर्क आज भी कमजोर है। उस पर यह 30 सेकंड की जबरन चेतावनी — यह सिर्फ फोन कॉल नहीं रोकती, बल्कि संवेदनशीलता का गला घोंट देती है। ज़रूरत है कि दूरसंचार मंत्रालय इस पर तुरंत संज्ञान ले और एक व्यावहारिक समाधान निकाले। चेतावनी दिन में केवल एक बार दी जाए, या आपातकालीन कॉल (जैसे 112, 100, 101) के लिए यह बाध्यता पूरी तरह से हटाई जाए। साथ ही, नेटवर्क कंपनियों को इस दिशा में जवाबदेह बनाया जाए। यह भी आवश्यक है कि इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं हस्तक्षेप करें, क्योंकि यह मुद्दा तकनीकी से कहीं बढ़कर — मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा है। आज ज़रूरत है कि हम एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाएं, जो नागरिक को जागरूक तो करे, पर उसकी जान बचाने में बाधा न बने। वरना अगली बार जब कोई आपातकाल में फोन मिलाएगा, तो हो सकता है वह आपका कॉल साइबर सुरक्षा के लिए रिकॉर्ड किया जा रहा है सुनते-सुनते दुनिया से ही कटा रह जाए। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 72

चालान: ट्रैफिक नियमों की आड़ में कैमरा चालान तंत्र, जनता की जेब काटने की सरकारी स्कीम!

चालान: ट्रैफिक नियमों की आड़ में कैमरा चालान तंत्र, जनता की जेब काटने की सरकारी स्कीम!

Challan: Camera challan system under the guise of traffic rules, a government scheme to fleece public! संपादकीय टीमgovernment scheme to fleece public देशभर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर आज जिस तरह चालान प्रणाली को डिजिटल और कैमरा आधारित किया गया है, वह सुधार से ज्यादा व्यापार नजर आता है। सरकारें दावा करती हैं कि उनका उद्देश्य सड़क सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। लेकिन असल तस्वीर कुछ और ही है। चालान या शोषण? ट्रैफिक नियमों की आड़ में जनता की जेब पर हमला हर चौराहे पर कैमरे, हर राज्य में करोड़ों का चालान government scheme to fleece publicआजकल हर राज्य और हर जिले में CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों के ज़रिए लाखों गाड़ियों के चालान रोज़ काटे जाते हैं – वो भी बिना किसी चेतावनी, सुधार या विकल्प के। ना सड़कों की हालत सुधरी, ना ट्रैफिक लाइट्स की स्थिति। कहीं लाइट काम नहीं करती, तो कहीं संकेत पूरी तरह अदृश्य होते हैं। बावजूद इसके, चालान तय है – जुर्माना तय है! नियम टूटते हैं, लेकिन वजह कौन समझे?कई बार ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं करते। सड़कें गड्ढों में बसी होती हैं। दिशा सूचक बोर्ड गायब होते हैं। ऐसी स्थिति में नियमों का पालन असंभव हो जाता है, लेकिन जुर्माना फिर भी भुगतना पड़ता है – क्योंकि कैमरा देखता है, व्यवस्था नहीं। Read More: शोक की घड़ी में भाजपा का पचमढ़ी आयोजन नैतिकता का उल्लंघन: विभा पटेल क्या चालान अब राजस्व का नया स्रोत बन गया है?सवाल यह है – क्या चालान वाकई सुधार का जरिया है, या सिर्फ़ जनता की जेब से कमाई का साधन बन गया है? सरकारें तो जानती हैं कि लोग सुधरेंगे नहीं, इसीलिए तकनीक का इस्तेमाल जनता की नज़रों से नहीं, उसकी जेब से जोड़ने के लिए किया जा रहा है। जनता अभी भी चुप है – लेकिन कब तक? government scheme to fleece publicहैरानी की बात है कि जनता अभी तक इस खेल को समझ नहीं पा रही है। या शायद समझकर भी चुप है। लेकिन यदि जनता एक दिन जाग गई, तो सवाल करेगी कि ट्रैफिक नियमों की आड़ में वसूली कब तक चलेगी? चालान एक जरिया होना चाहिए था व्यवस्था सुधार का। लेकिन आज यह सरकारी खजाना भरने का आसान और एकतरफा तरीका बन गया है। सुधार सड़क पर नहीं दिखते, लेकिन जुर्माने की पर्ची हर घर पहुंचती है। सवाल यही है – क्या ये चालान व्यवस्था के लिए हैं, या व्यवस्था की विफलता को ढकने का तरीका? Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 63

शोक की घड़ी में भाजपा का पचमढ़ी आयोजन नैतिकता का उल्लंघन: विभा पटेल

BJP’s Panchmarhi event in the hour of mourning Violation of ethics: Vibha Patel भोपाल। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती विभा पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा संवेदनशील नहीं है। उसका करुणा, वेदना, पीड़ा और मानवीयता से कोई सरोकार नहीं है। इसकी मिसाल अहमदाबाद विमान हादसे के चलते पचमढ़ी प्रशिक्षण शिविर स्थगित नहीं करना है।  श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान दुर्घटनाग्रस्त होने से इस अकल्पनीय हादसे में सिर्फ यात्री और क्रू मेंबर्स ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के कई छात्र, आम नागरिक समेत 275 लोग असमय काल के गाल में समा गए। इस शोक की घड़ी में वैश्विक नेताओं समेत देश-दुनिया में शोक की लहर है। लेकिन उत्सवप्रेमी भाजपा संगठनात्मक आयोजन के नाम पर विधायकों-सांसदों का तीन दिनी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर रही है। यह आश्चर्यजनक है क्योंकि इस दुर्घटना में भाजपा के पूर्व सीएम विजय रूपाणी की भी मृत्यु हुई है। इसके बावजूद भाजपा का कार्यक्रम को स्थगित नहीं करना और उद्घाटन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित करना उसके मानवता विरोधी चेहरे को प्रदर्शित करता है। यह सामाजिक मानदंडों, सामान्य शिष्टाचार और नैतिक सीमाओं का सीधा उल्लंघन है।  श्रीमती विभा पटेल ने केंद्रीय गृह मंत्री शाह के उस बयान की भी निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ” ये एक्सीडेंट है.. एक्सीडेंट को कोई रोक नहीं सकता..’। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को कुछ भी बोलने से सोचना चाहिए। अभी देश अहमदाबाद विमान हादसे के सदमे से उबरा नहीं है। कई परिवार शोक और सदमे से घिरे है। यह हादसा न जाने कितने परिवारों के लिए विनाश का कारण बन गया, कितनों की दुनिया उजड़ गई। इसको समझते हुए भाजपा का अपने आयोजन को लेकर हठधर्मी वाला रवैया रखना उसके अमानवीय व्यवहार, आचरण और चरित्र को प्रदर्शित करता है। श्रीमती विभा पटेल ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा कि इस कठिन समय में भाजपा को सद् बुद्धि मिले, वह यही ईश्वर से प्रार्थना करती है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 111