एससी/एसटी श्रेणियों को सब-कैटेगरी में दिया जा सकता है आरक्षण- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के मुताबिक अनुसूचित जाति और जनजातियों में सब-केटेगरी बनाई जा सकती है। फैसला सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने 6/1 के मत से सुनाया है। यह सुनवाई CJI डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे। उनके साथ 6 जजों ने इस पर सहमति जताई जबकि जस्टिस बेला त्रिवेदी इससे सहमत नहीं थीं। कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए 2004 में दिए गए 5 जजों के फैसले को पलट दिया है। यह सुनवाई चीफ जस्टिस के साथ जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ,जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा कर रहे थे। कोर्ट ने 2004 के फैसले को पलटा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने 2004 में ईवी चिन्नैया मामले में पांच जजों के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें संविधान पीठ ने कहा कि केवल राष्ट्रपति ही यह अधिसूचित कर सकते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार कौन से समुदाय आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, और राज्यों को इससे छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा था कि क्या राज्य कोटा के अंदर कोटा देने के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को उप-वर्गीकृत कर सकते हैं?  सुप्रीम कोर्ट ने अब समीक्षा के बाद यह फैसला सुना दिया है। क्या है पूरा मामला…. दरअसल, 1975 में पंजाब सरकार ने आरक्षित सीटों को दो श्रेणियों में विभाजित करके अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नीति पेश की थी. एक बाल्मीकि और मजहबी सिखों के लिए और दूसरी बाकी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए. 30 साल तक ये नियम लागू रहा. उसके बाद 2006 में ये मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा और ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2004 के फैसले का हवाला दिया गया. पंजाब सरकार को झटका लगा और इस नीति को रद्द कर दिया गया. चिन्नैया फैसले में कहा गया था कि एससी श्रेणी के भीतर सब कैटेगिरी की अनुमति नहीं है. क्योंकि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है. बाद में पंजाब सरकार ने 2006 में बाल्मीकि और मजहबी सिखों को फिर से कोटा दिए जाने को लेकर एक नया कानून बनाया, जिसे 2010 में फिर से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई. हाई कोर्ट ने इस नीति को भी रद्द कर दिया. ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले के तहत यह स्वीकार्य था, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के भीतर सब कैटेगिरी की अनुमति दी थी. पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि अनुसूचित जाति के भीतर भी इसकी अनुमति दी जानी चाहिए. 2020 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने पाया कि ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के फैसले पर एक बड़ी बेंच द्वारा फिर से विचार किया जाना चाहिए, जिसमें कहा गया था कि एससी श्रेणी के भीतर सब कैटेगिरी की अनुमति नहीं है. उसके बाद सीजेआई के नेतृत्व में सात जजों की बेंच का गठन किया गया, जिसने जनवरी 2024 में तीन दिनों तक मामले में दलीलें सुनीं और उसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. संविधान में क्या प्रावधान है? संविधान ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को विशेष दर्जा देते समय जाति का वर्णन नहीं किया है कि कौन सी जातियां इसमें आएंगी. ये अधिकार केंद्र के पास है. अनुच्छेद 341 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित जातियों को एससी और एसटी कहा जाता है. एक राज्य में SC के रूप में अधिसूचित जाति दूसरे राज्य में SC नहीं भी हो सकती है. देश में कितनी अनुसूचित जाति? एक रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में देश में 1,263 एससी जातियां थीं. अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान और निकोबार एवं लक्षद्वीप में कोई समुदाय अनुसूचित जाति के रूप में चिह्नित नहीं किया गया. सिर्फ राष्ट्रपति को अधिकार 2005 में ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनुसूचित जाति की सूची में जातियों को हटाने और जोड़ने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति को है. संविधान सभी अनुसूचित जातियों को एकल सजातीय समूह मानता है. अगर सभी अनुसूचित जातियों को एक ग्रुप माना गया है तो उप वर्गीकरण कैसे हो सकता है. सामाजिक असमानता के आधार पर अनुसूचित जातियों को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है, क्योंकि इन जातियों के खिलाफ छुआछूत की भावना थी. आरक्षण का लाभ आरक्षित जातियों के जरूरतमंद यानी सबसे कमजोर तबके तक पहुंचे, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर की अवधारणा को लागू किया. इसे 2018 में जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता केस के फैसले में लागू किया गया था. क्रीमी लेयर का नियम ओबीसी (अदर बैकवर्ड क्लास) में लागू होता है. जबकि यह अनुसूचित जाति पर 2018 में प्रमोशन के केस में लागू किया गया. केंद्र सरकार ने 2018 के इस फैसले पर रिव्यू करने की गुहार लगाई और इस पर फैसला अभी आना बाकी है.   recent visitors 288

निर्माणाधीन इंदौर-बैतूल फोरलेन पर तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर पुलिया के नीचे गिरी, एक की मौत, पांच युवक घायल

हरदा  निर्माणाधीन इंदौर-बैतूल फोरलेन पर जिला जेल के ठीक सामने बड़ा हादसा हो गया। गुरुवार सुबह करीब 7 बजे एक तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर पुलिया के नीचे गिर गई। इस हादसे में कार में सवार एक युवक की जान चली गई तथा पांच अन्य घायल हो गए। घायलों में एक की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को हादसे के बाद एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। मृतक युवक के शव को जिला अस्पताल की मर्चुरी में रखा गया है। पुलिस ने बताया कि बैतूल जिले के चिचोली शहर के नजदीक ढाबा संचालित करने वाले मोंटी जयप्रकाश आर्य उम्र 32 साल के साथ हरीश पिता भगवत राव बाघमारे, दादा पिता नाथू यादव सहित दो अन्य युवक कार में सवार होकर उज्जैन जा रहे थे। इसी दौरान हरदा में शहर के बाहर निकलते से ही जिला जेल के पास कार अनियंत्रित होकर पुलिया के नीचे गड्ढे में गिर गई। हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हादसे में मृत युवक का नाम मोंटू बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि मृतक के स्वजन से संपर्क कर हादसे की जानकारी दी गई है। घायलों में कुछ शराब के नशे में थे, जो स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे थे। वह उज्जैन महाकाल के दर्शन करने के लिए बुधवार रात को घर से निकले थे। एक घायल का कहना था कि वह चिचोली के पास ही स्थित एक बाजार में जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि घायल अलग-अलग बयान दे रहे हैं। recent visitors 239

खतरे में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की सांसदी!, HC ने इस मामले में जारी किया नोटिस

खंडवा मध्य प्रदेश के लोकसभा चुनावों में 29 सीटे जीतने वाली बीजेपी की क्या मुश्किल बढ़ सकती है. क्या बीजेपी के एक सांसद मध्य प्रदेश में कम हो सकते हैं? क्या खंडवा से बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की सांसदी जा सकती है. ये सवाल आजकल मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में काफी गूंज रहे हैं. वजह है एक याचिका जो जबलपुर हाई कोर्ट में लगी है. क्या है पूरा मामला जानें इस रिपोर्ट में… आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में बीजेपी ने इस बार इतिहास रचा है. और 29 की 29 लोकसभा सीटों पर काबिज हो गई. कांग्रेस के हाथों एक भी सीट नहीं आई. लेकिन, अब खंडवा से बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं. नौबत यह है कि उनकी सांसदी पर खतरा मंडराने लगा है. सांसद पाटिल को जारी हुआ नोटिस दरअसल मध्य प्रदेश की खंडवा संसदीय सीट से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की सांसदी को चुनौती देते हुए जबलपुर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका के दायर होने के बाद सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने सांसद पाटिल समेत रिटर्निंग ऑफिसर और दूसरे ऑफिसर्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश्वर पाटिल ने कुछ जानकारियां अपने नामांकन पत्र में छुपाई थी. क्या बोले अधिवक्ता कुमार? अधिवक्ता मनोज कुमान ने बताया "आज माननीय उच्च न्यायालय ने रेस्पोंडेंट श्री ज्ञानेश्वर पाटिल और रिटर्निंग ऑफिसर सहित अन्य रेस्पोंडेंट को को नोटिस के आदेश कर दिए हैं.  मूल रूप से यह याचिका मैंने उनका चुनाव निरस्त करने और द्वितीय नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी श्री नरेंद्र पटेल जी को विजय बनाने के घोषित करने के लिए यह याचिका प्रस्तुत की थी. इसके अलावा रिटर्निंग ऑफिसर और ज्ञानेश्वर पाटिल के खिलाफ कारवाई की भी मांग की है. और स्पेशली मैं इसमें अपनी पैरवी मैं स्वयं कर रहा हूं. 4 सितंबर को होगी अगली सुनवाई आपको बता दें कि यह याचिका बुरहानपुर जिले के अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल की ओर से हाई कोर्ट में दायर की गई है. खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की सांसदी रद्द करने की मांग इस याचिका में की गई है, साथ ही रिटर्निंग ऑफिसर पर कारवाई करने का भी आग्रह किया गया है. वहीं याचिकाकर्ता मनोज कुमार अग्रवाल खुद ही अपने मामले की पैरवी कर रहे हैं. इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी ऐसे में याचिकाकर्ता के पक्ष में अगर फैसला आता है. तो खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की की सांसद सदस्यता समाप्त हो सकती है. उनकी जगह पर कांग्रेस के नरेंद्र पटेल को सांसद बनाया जा सकता है. फिलहाल. आपको बता दें कि बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की सांसदी खतरे में है. यह पूरा मामला हाई कोर्ट में चल रहा है. आने वाले सितंबर को अगली पेशी है. जिसमें यह फैसला होगा कि आखिर उनकी सांसद रहती है या नहीं रहती है. लेकिन, फिलहाल इस याचिका के बाद से बीजेपी में खलबली मची हुई है. recent visitors 150

Luvkesh Kataria ने बिग बॉस OTT 3 से एविक्शन के बाद फूट-फूट कर रोया

'बिग बॉस ओटीटी सीजन 3' के फिनाले से ठीक एक दिन पहले, दो सबसे मजबूत कंटेस्टेंट्स लवकेश कटारिया और अरमान मलिक शो से बाहर हो गए, जिससे फैंस और दर्शकों को बहुत बड़ा शॉक लगा। लवकेश और अरमान के एविक्शन के साथ, शो को रणवीर शौरी, सना मकबुल, कृतिका मलिक, साई केतन राव और नेजी के रूप में टॉप 5 कंटेस्टेंट्स मिल गए। अपने एविक्शन के बाद, लवकेश अपने फैंस के साथ बातचीत करने के लिए इंस्टाग्राम पर लाइव हुए और उन्हें उनके जबरदस्त सपोर्ट के लिए धन्यवाद दिया। लाइव सेशन के दौरान Luvkesh Kataria ने खुलासा किया कि जब उनके नाम की घोषणा की गई तो उनके दिमाग में क्या चल रहा था। उन्होंने शेयर किया कि जब वह ट्रॉफी नहीं छू सके तो उन्हें कितना टूटा हुआ महसूस हुआ। एविक्ट होकर रो पड़े लवकेश लवकेश ने शेयर किया, 'मैंने अपने जीवन में कभी इतना प्यार अनुभव नहीं किया जितना मैं अब कर रहा हूं। जब मैं बाहर हो रहा था, तो मैं टूटा हुआ महसूस कर रहा था। मैं अपने सामने ट्रॉफी देख सकता था, लेकिन मैं उसे छू नहीं सका। जब मेरे नाम की घोषणा की गई, तो मेरी आंखों में आंसू आ गए, लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल करने के लिए ऊपर देखा और अपने आंसुओं को निगलते हुए सोचा कि मैं केवल तभी रोऊंगा जब मैं अपने परिवार के किसी व्यक्ति से बात करूंगा।' बाहर आकर फूटकर रोए लवकेश उन्होंने आगे कहा, 'जैसे ही मैं बाहर आया, मैंने अपनी मां को फोन किया। मैंने ड्राइवर भैया का फोन इस्तेमाल किया, जो हमें हमारे होटल तक छोड़ रहे थे। मैं खुद को रोक नहीं सका और पांच मिनट तक रोता रहा और मेरे अंदर जमा सारी भावनाओं को बाहर निकालता रहा। मेरी मां को बहुत गर्व था और उन्होंने मुझसे कहा कि, उनके लिए, मैं बेस्ट और विनर हूं।' लवकेश से मिलने पहुंचीं मुनीषा लवकेश ने लाइव सेशन के दौरान 'बिग बॉस ओटीटी 3' से अपने बीएफएफ, विशाल पांडे को ऐड किया और उन्होंने फैंस को धन्यवाद दिया। इतना ही नहीं लवकेश की करीबी मुनीषा खटवानी भी उनसे मिलने पहुंचीं। उन्होंने लवकेश की तारीफ की और कहा कि उन्हें हमेशा से पता था कि वह खेल में आगे बढ़ेंगे और वह वाकई एक अच्छे इंसान हैं। लवकेश अपने सभी दोस्तों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने उनकी बिग बॉस ओटीटी 3 यात्रा के दौरान उनका सपोर्ट करने के लिए दिन-रात काम किया। recent visitors 139

एक सितंबर को करेंगे शक्ति प्रदर्शन, राजस्थान-दौसा विधानसभा उपचुनाव से पहले होगा ब्राह्मण महाकुंभ

दौसा. ब्राह्मण समाज ने विधानसभा उपचुनाव से पहले एक सितंबर को दौसा में ब्राह्मण महाकुंभ के आयोजन का एलान किया है। समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए समस्त ब्राह्मण समाज एकजुट होगा। ब्राह्मण नेताओं ने बताया कि नकारात्मक प्रभाव को खत्म करने के लिए समाज में सदैव सजकता की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखकर ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है, ताकि समाज में बढ़ने वाली कुरीतियां विराट रूप धारण करें उससे पहले ही उन्हें रोका जा सके। समाज में कुरीतियों को एक व्यक्ति द्वारा रोका नहीं जा सकता, इसके लिए सामाजिक स्तर पर सतत प्रयास करने की जरूरत होती है। सामयिक निर्णय, सामूहिक सुझाव, सामूहिक प्रयासों के द्वारा ही कुरीतियों पर विजय पाया जा सकता है। भ्रूण हत्या, नशीले मादक, द्रव्य पदार्थों का बढ़ता दुष्प्रभाव, विधवा महिला का सामाजिक सम्मान, बाल विवाह पर रोक, बालिका शिक्षा पर बल, दहेज लेना देना सामाजिक अभिशाप, मृत्यु भोज, पगड़ी अपव्य, आपराधिक प्रवृत्तियोंत्तियों से सावधान करना, साइबर क्राइम के प्रति सजक और सावधान युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सहित अनेक ऐसी कुरीतियां व बुराइयां हैं जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं। जिनका समय-समय पर निस्तारण, समाधान होना अत्यंत आवश्यक होता है। इसी को ध्यान में रखकर ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ब्राह्मण समाज शामिल होगा। इस दारौन तय किया जाएगा कि इन बुराइयों से किस स्तर से कैसे निपटा जाए। साथ ही बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार किस तरह दिया जाए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके। लेकिन, सियासी गलियारों में इस महाकुंभ को दौसा विधानसभा उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उपचुनाव से पहले इसे ब्राह्मण समाज का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। recent visitors 138

उपचार के दौरान मौत, छत्तीसगढ़-बलरामपुर में शराब पी गई तीन साल की मासूम

बलरामपुर. बलरामपुर रामनुजगंज जिले की बैकुंठपुर निवासी तीन वर्षीय मासूम बालिका ने खेल-खेल में घर में रखी शराब पी ली। शराब पीकर वह बेहोश हो गई तो परिजन उसे लेकर वाड्रफनगर अस्पताल पहुंचे। वहां से रेफर किए जाने पर उसे मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया। यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना से परिजन सदमें में हैं। जानकारी के मुताबिक बलरामपुर जिले के त्रिकुंडा थाना अंतर्गत ग्राम बैकुंठपुर निवासी तीन वर्षीय सरिता सोमवार की सुबह घर में खेल रही थी। उसकी मां सावित्री पास ही काम कर रही थी। बालिका खेलते हुए अपनी दादी के कमरे में पहुंच गई। वहां शराब की बोतल एवं गिलास रखा हुआ था। बच्ची ने बोतल में रखी शराब को पानी समझकर पी लिया। मां ने नहलाया, हो गई बेहोश शराब पीने के बाद सरिता को नशा चढ़ने लगा तो वह अपनी मां के पास पहुंची एवं नहलाने के लिए कहा। थोड़ी देर में वह बेहोश हो गई। उसके मुंह से शराब की दुर्गंध आ रही थी। बच्ची के पिता रामसेवक ने अपनी मां के कमरे में जाकर देखा तो वहां शराब की बोतल एवं गिलास पड़ा हुआ था। गिलास में शराब भी पड़ी थी। सरिता को लेकर परिजन वाड्रफनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ता देख उसे अंबिकापुर रेफर कर दिया। उसे सोमवार शाम अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया। उपचार के दौरान मौत मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भी सरिता की हालत में सुधार नहीं हुआ एवं मंगलवार दोपहर उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पीएम कराया एवं शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने परिजनों का बयान भी दर्ज किया है। मासूम की मौत से परिजन सदमें में हैं। recent visitors 118

कृष्ण जन्मभूमि- शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को झटका लगा

 इलाहाबाद /मथुरा मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि- शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट मुकदमों के रखरखाव को लेकर सुनवाई कर रहा है. कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है. मामले में अब ट्रायल चलेगा. कोर्ट ने हिंदू दावे को सुनवाई योग्य माना है. मुसलिम पक्ष की आपत्ति को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. मुकदमों की रखरखाव के संबंध में मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था. मुकदमे शाही ईदगाह मस्जिद का ढांचा हटाकर जमीन का कब्जा देने के अलावा मंदिर का पुनर्निर्माण कराने की मांग को लेकर दायर किए गए हैं. बता दें कि हिंदू पक्ष ने जो याचिकाएं दायर की थीं, उनमें शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को हिंदुओं की बताया था और वहां पूजा का अधिकार दिए जाने की मांग की थी. वहीं, मुस्लिम पक्ष ने प्लेसिस ऑफ वर्शिप एक्ट, वक्फ एक्ट, लिमिटेशन एक्ट और स्पेसिफिक पजेशन रिलीफ एक्ट का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष की याचिकाओं को खारिज किए जाने की दलील पेश की थी. इससे पहले 6 जून को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. दरअसल, हिंदू पक्ष की तरफ से 18 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ऑर्डर 7 रूल, 11 के तहत इन याचिकाओं की पोषणीयता पर सवाल उठाए और इन्हें खारिज किए जाने की अपील की थी. दोनों पक्षों के लिए आज का दिन बेहद अहम था. आज श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह से संबंधित कुल 18 याचिकाओं को लेकर फैसला आया है. भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव और सात अन्य की तरफ से दाखिल सिविल वाद की पोषणीयता को लेकर याचिकाएं दायर की गईं थी. उसके बाद शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में सीपीसी के ऑर्डर 7, रूल 11 के तहत याचिकाएं दाखिल की थीं. हिंदू पक्षकारों की दलील * ईदगाह का पूरा ढाई एकड़ एरिया श्रीकृष्ण विराजमान का गर्भगृह है। * शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के पास भूमि का कोई ऐसा रेकॉर्ड नहीं है। * श्रीकृष्ण मंदिर तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया गया है। * बिना स्वामित्व अधिकार के वक्फ बोर्ड ने बिना किसी वैध प्रक्रिया के इस भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया है। मुस्लिम पक्षकारों की दलील •मुस्लिम पक्षकारों की दलील है कि इस जमीन पर दोनों पक्षों के बीच 1968 में समझौता हुआ है। 60 साल बाद समझौते को गलत बताना ठीक नहीं है। लिहाजा मुकदमा चलने योग्य नहीं है। •उपासना स्थल कानून यानी प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के तहत भी मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। 15 अगस्त, 1947 के दिन जिस धार्मिक स्थल की पहचान और प्रकृति जैसी है वैसी ही बनी रहेगी। यानी उसकी प्रकृति नहीं बदली जा सकती है। क्या है विवाद यह विवाद मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है जिसका निर्माण भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को कथित तौर पर ध्वस्त करने के बाद किया गया. recent visitors 113