Meenakshi Natarajan case: Rajneesh Agarwal’s whereabouts unknown, Mahesh Kevat refuses to take notice

विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव
जबलपुर। राज्यसभा सदस्य का नामांकन निरस्त किये जाने को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर याचिका पर शनिवार को सुनवाई हुई. इस मामले में हाईकोर्ट ने भाजपा के नवनिर्वाचित 3 राज्यसभा सांसद सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ को बताया गया कि राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया. इसके अलावा राज्यसभा सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया.
रजनीश अग्रवाल का नहीं मिला पता, महेश केवट ने नोटिस लेने से किया मना
हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि सांसद तरुण चुघ को भेजी गयी याचिका की कॉपी पढ़ने लायक नहीं है. सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया है. सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया. याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि सांसद रजनीश अग्रवाल के द्वारा चुनाव आयोग में दिये गये फार्म के पते पर नोटिस सर्व किया गया था.
इसके अलावा केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग की तरफ से याचिका से उनका नाम विलोपित किये जाने की मांग करते हुए आवेदन पेश किया.
हाईकोर्ट जस्टिस ने दिए आदेश
हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा, “सांसद तरुण चुघ को पिटिशन की कॉपी और दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजने के निर्देष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को दिये हैं. सांसद रजनीश अग्रवाल को आरएडी मोड (रजिस्टर्ड पावती सहित) से नोटिस भेजे जाएं. सांसद महेश केवट को भेजा गया नोटिस सर्व हुआ माना जाए और उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक अवसर और प्रदान किया जाता है. नाम हटाने के लिए दायर आवेदन पर याचिकाकर्ता अपना जवाब पेश करें.”
मीनाक्षी नटराजन ने हाईकोर्ट में क्यों दायर की है याचिका?
कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर की गई चुनाव याचिका में कहा गया था कि तेलंगाना की एक अदालत में महिला द्वारा दायर व्यक्तिगत परिवाद में उन्हें प्रतिवादी बनाया था. प्रतिवादी बनाए जाने के कारण न्यायालय ने उनके पक्ष के लिए उन्हें नोटिस जारी किया था. उनके खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज या विचाराधीन नहीं था. उनके नामांकन पर आपत्ति प्रस्तुत किये जाने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के विपरीत जल्दबाजी में न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी छुपाने के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया.
उन्होंने सुनवाई के दौरान रिटर्निंग अधिकारी को बताया था कि परिवाद में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है, सिर्फ औपचारिक तौर पर उन्हे अनावेदक बनाया गया है. रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा उनका नामांकन नियम विरुद्ध तरीके से निरस्त किया गया है. जिसके कारण यह याचिका दायर की गई है. याचिका में मध्य प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल, महेश केवट, केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग को अनावेदक बनाया गया है.