मंत्री नहीं बनने से एमपी बीजेपी में बगावत के सुर, कई दिग्गजों के अरमान पर पानी फेरतीं भाजपा,

There are voices of rebellion in the MP BJP due to not becoming a minister, the BJP has dashed the hopes of many bigwigs.  विशेष संवाददाता: राम मेहरा  भोपाल । मध्यप्रदेश भाजपा कई मामलों में पूरी तरह बदल गई है। नेताओं को पहले संघर्ष करना पड़ता है, बाद में पद और प्रतिष्ठा मिलती है। फिलहाल निगम, मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड व आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के साथ यही हो रहा है। पहले इन्हें ढाई से तीन साल नियुक्ति पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, अब अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री और उपाध्यक्ष राज्यमंत्री का दर्जा पाने के लिए तरस रहे हैं। मप्र में ऐसा पहली बार हो रहा है जब अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तो बनाए, लेकिन मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा रहा। अंदर खबर है कि कुछ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तो दर्जा नहीं मिलने के कारण नाराज हो गए है। नतीजा, मन लगाकर काम नहीं कर रहे। बीजेपी के करीब 48 ऐसे नेता हैं जोकि मंत्री नहीं बन पाने से मन मसोसकर बैठे हैं। जयभान सिंह पवैया का कार्यकाल तो कुछ ही महीने बात खत्म हो रहा 34 नेताओं को अध्यक्ष बनाया, 14 नेताओं को उपाध्यक्ष बता दें, सरकार ने पिछले माहों में विभिन्न निगम, मंडलों, विकास प्राधिकरणों, बोर्डों व आयोगों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। 34 नेताओं को अध्यक्ष बनाया है जबकि 14 नेताओं को उपाध्यक्ष का पद नवाजा है। इनको अहम मंडल-बोर्ड का बनाया अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, रामकृष्ण कुसमारिया, रामलाल रौतेल, डॉ. कैलाश जाटव, डॉ. निवेदिता शर्मा, रेखा यादव, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, प्रवीण शर्मा, केशव सिंह बघेल, रामनिवास रावत, सत्येंद्र भूषण सिंह, संजय नगायच, केपी यादव, केशव सिंह भदौरिया, प्रभुदयाल कुशवाह, पंकज जोशी, अशोक जादौन, वीरेंद्र गोयल, संदीप जैन, महेंद्र सिंह यादव, मधुसुदन भदौरिया, रवि सोलंकी, राजेंद्र भारती, विनोद गोटिया, अशोक शर्मा, मनोहर पोरवाल, विजय यादव, रमेशचंद्र शर्मा, कौशल शर्मा, गुड्डी आदिवासी को अध्यक्ष बनाया है। इन्हें उपाध्यक्ष का दिया जिम्मा सरकार के मंडल-बोर्ड में मनोहर लाल नागर, संजीव कांकर, राकेश जादौन, उदयवीर सिंह गुर्जर, प्रशांत केशरवानी, सुधीर गुप्ता, वेद प्रकाश शिवहरे, मुकेश यादव, रवि वर्मा, हरिश मेवाफरोश, डॉ. अजय सिंह, संजय तीर्थानी, गोविंद काकाणी, प्रवीण सोनी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। दावा- दर्जा मिलने से मिलती है काम कराने की शक्ति असल में जब भी सरकारें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष नियुक्त करती है, उसके बाद राज्य मंत्री का दर्जा देती है। ये आदेश अलग से जारी होते हैं। राज्य के एक बड़े बोर्ड व कमाई वाले निगम के अध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर पत्रिका को बताया कि मंत्री का दर्जा मिलने से आम आदमी व कार्यकर्ताओं के काम करने की शक्ति मिलती है। अफसर सुनते हैं, लिखे गए पत्रों पर जल्द कार्रवाई होती है। मिलने के लिए भी ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। recent visitors 1

भोपाल में बढ़ा H1N1 और डेंगू का खतरा, 7 दिन में स्वाइन फ्लू के 36 नए मरीज, जानें लक्षण और बचाव

H1N1 and dengue threat rises in Bhopal; 36 new swine flu patients in 7 days; learn about symptoms and prevention मौसम के बदलते मिजाज के बीच राजधानी भोपाल में मौसमी बीमारियों का असर बढ़ता नजर आ रहा है। स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पिछले सात दिनों में H1N1 के 36 नए मरीज सामने आए हैं. इसके साथ ही स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या 57 पहुंच गई है. वहीं डेंगू के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं  हेल्थ जोन। मौसम के बदलते मिजाज के बीच राजधानी भोपाल में मौसमी बीमारियों का असर बढ़ता नजर आ रहा है। स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. पिछले सात दिनों में H1N1 के 36 नए मरीज सामने आए हैं. इसके साथ ही स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या 57 पहुंच गई है. वहीं डेंगू के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं और अब तक 72 मरीज सामने आ चुके हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लोगों से सतर्क रहने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील कर रहा है. स्वाइन फ्लू के ये हैं प्रमुख लक्षण H1N1 समेत फ्लू में तेज बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है.अगर बुखार लगातार बना हुआ है, खांसी बढ़ रही है या सांस लेने में परेशानी हो रही है तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी. बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी फ्लू से गंभीर बीमारी का जोखिम छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कुछ दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में अधिक हो सकता है. ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है. हाथों की सफाई और खांसी के दौरान बरतें सावधानी संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को साबुन से नियमित रूप से साफ करना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना और बीमार व्यक्ति के बेहद नजदीकी संपर्क से बचना उपयोगी सावधानियां हैं. फ्लू के लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना भी संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है.भोपाल में H1N1 और डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल घबराने के बजाय सावधानी बरतना जरूरी है. लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लें recent visitors 3

मीनाक्षी नटराजन केस, रजनीश अग्रवाल का नहीं मिला पता, महेश केवट ने नोटिस लेने से किया मना

Meenakshi Natarajan case: Rajneesh Agarwal’s whereabouts unknown, Mahesh Kevat refuses to take notice विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। राज्यसभा सदस्य का नामांकन निरस्त किये जाने को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर याचिका पर शनिवार को सुनवाई हुई. इस मामले में हाईकोर्ट ने भाजपा के नवनिर्वाचित 3 राज्यसभा सांसद सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ को बताया गया कि राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया. इसके अलावा राज्यसभा सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया. रजनीश अग्रवाल का नहीं मिला पता, महेश केवट ने नोटिस लेने से किया मना हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि सांसद तरुण चुघ को भेजी गयी याचिका की कॉपी पढ़ने लायक नहीं है. सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया है. सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया. याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि सांसद रजनीश अग्रवाल के द्वारा चुनाव आयोग में दिये गये फार्म के पते पर नोटिस सर्व किया गया था. इसके अलावा केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग की तरफ से याचिका से उनका नाम विलोपित किये जाने की मांग करते हुए आवेदन पेश किया. हाईकोर्ट जस्टिस ने दिए आदेश हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा, “सांसद तरुण चुघ को पिटिशन की कॉपी और दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजने के निर्देष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को दिये हैं. सांसद रजनीश अग्रवाल को आरएडी मोड (रजिस्टर्ड पावती सहित) से नोटिस भेजे जाएं. सांसद महेश केवट को भेजा गया नोटिस सर्व हुआ माना जाए और उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक अवसर और प्रदान किया जाता है. नाम हटाने के लिए दायर आवेदन पर याचिकाकर्ता अपना जवाब पेश करें.” मीनाक्षी नटराजन ने हाईकोर्ट में क्यों दायर की है याचिका? कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर की गई चुनाव याचिका में कहा गया था कि तेलंगाना की एक अदालत में महिला द्वारा दायर व्यक्तिगत परिवाद में उन्हें प्रतिवादी बनाया था. प्रतिवादी बनाए जाने के कारण न्यायालय ने उनके पक्ष के लिए उन्हें नोटिस जारी किया था. उनके खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज या विचाराधीन नहीं था. उनके नामांकन पर आपत्ति प्रस्तुत किये जाने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के विपरीत जल्दबाजी में न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी छुपाने के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया. उन्होंने सुनवाई के दौरान रिटर्निंग अधिकारी को बताया था कि परिवाद में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है, सिर्फ औपचारिक तौर पर उन्हे अनावेदक बनाया गया है. रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा उनका नामांकन नियम विरुद्ध तरीके से निरस्त किया गया है. जिसके कारण यह याचिका दायर की गई है. याचिका में मध्य प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल, महेश केवट, केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग को अनावेदक बनाया गया है. recent visitors 4

15 सितंबर को ओवैसी का MP दौरा, भोपाल में विशाल जनसभा को करेंगे संबोधित, इन मुद्दों पर उठाएंगे सवाल

Owaisi to visit MP on September 15, will address a massive rally in Bhopal, will raise questions on these issues भोपाल । AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी 15 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश दौर पर रहेंगे। वे करीब ढाई बजे राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद भोपाल में शाम साढ़े 7 बजे सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस जनसभा में मध्य प्रदेश में हो रही जुल्म, नाइंसाफी और संवैधानिक अधिकारों के हनन के मुद्दों पर आवाज़ बुलंद की जाएगी। प्रदेश में विकास के नाम पर मस्जिदों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने, मकानों पर कार्रवाई, मुसलमानों के खिलाफ मुकदमों तथा मॉब लिंचिंग जैसे गंभीर मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किए जाने के फैसले का AIMIM पुरज़ोर विरोध करती है। हमारा मानना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किए जाने के फैसले का AIMIM पुरज़ोर विरोध करती है। हमारा मानना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) मध्य प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे 15 दिवसीय UCC विरोध अभियान का समापन भी इसी विशाल जनसभा के माध्यम से किया जाएगा। इस अवसर पर असदुद्दीन ओवैसी UCC के खिलाफ अपनी बात रखते हुए कार्यकर्ताओं एवं आम जनता को संबोधित करेंगे। recent visitors 4

विकास कार्यों के नाम पर कर दिया लाखों का फर्जीवाड़ा! सरपंच के खिलाफ कड़ा एक्शन

Lakhs of rupees were defrauded in the name of development work! Strict action taken against the Sarpanch सागर । मध्यप्रदेश में सागर जिले के शाहगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत नौराज में विकास कार्यों के नाम पर सात लाख 49 हजार 79 रुपए के वित्तीय गबन का मामला सामने आने पर जिला पंचायत सीईओ जगदीश कुमार गोमे ने सरपंच राजकुमारी राजपूत के वित्तीय आहरण एवं संवितरण अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। इसके साथ ही उन्हें अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मामले में कलेक्टर प्रतिभा पाल द्वारा सभी अधिकारियों को सरकारी निधि के पारदर्शी उपयोग और अनियमितता बरतने वालों पर कड़ी दंडात्मक कारर्वाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। जनपद पंचायत शाहगढ़ की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त कारर्वाई की गई है। जांच में सामने आया कि 15वें वित्त आयोग और मनरेगा मद के तहत स्वीकृत तीन बड़े निर्माण कार्यों में बिना कोई काम कराए ही राशि आहरित कर ली गई। ग्राम ततरवारा के सामुदायिक स्वच्छता परिसर में प्राथमिक शाला के समीप तीन लाख 81 हजार रुपए की लागत से स्वीकृत सामुदायिक स्वच्छता परिसर के मद से एक लाख 91 हजार 67 रुपए का आहरण बिना मूल्यांकन के कर लिया गया, जबकि मौके पर कोई निर्माण नहीं पाया गया। नौराज में कौशल्या के घर से केवलारी परिवार के घर तक स्वीकृत पांच लाख 87 हज़ार की सी.सी. रोड के लिए दो लाख 78 हजार 167 रुपए बिना कार्य और बिना मूल्यांकन के निकाल लिए गए। सात लाख रुपए की लागत से स्वीकृत स्टॉप डेम के नाम पर दो लाख 79 हजार 845 रुपए की राशि आहरित कर ली गई, जबकि स्थल पर स्टॉप डेम का कोई वजूद ही नहीं मिला। ग्राम पंचायत सचिव डाल सिंह लोधी के बयानों और दस्तावेजों की पड़ताल से फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। पूर्व में जारी नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कलेक्टर के निर्देशानुसार अंतिम अवसर देते हुए 21 सितंबर तक साक्ष्यों के साथ व्यक्तिगत उपस्थिति का नोटिस थमाया गया है। म.प्र. पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच को पद से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तय समय में जवाब न मिलने पर एक पक्षीय बर्खास्तगी की कारर्वाई की जाएगी। recent visitors 4

फर्जी IAS तृप्ति का वीडियो आया सामने; रौब दिखाने बुलवाती थी पुलिस बल, करती थी सरकारी दफ्तरों की जांच

Video of fake IAS officer Tripti surfaced; she used to summon police forces to show off and conduct inspections of government offices. फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह खुद को अधिकारी बताकर सरकारी कार्यालयों में पहुंचती थी और सुरक्षा के नाम पर पुलिस बल भी बुलवाती थी। भोपाल। होटल-रिसॉर्ट लीज पर दिलाने और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाली फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह ने अपनी फर्जी पहचान का इस्तेमाल सरकारी दफ्तरों तक में किया। वह खुद को आईएएस अधिकारी बताकर सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करने पहुंचती थी। इतना ही नहीं, निरीक्षण के दौरान सुरक्षा के नाम पर पुलिस बल भी बुलवाती थी। एक सरकारी दफ्तर में उसके निरीक्षण का वीडियो नवदुनिया के हाथ लगा है। इसमें उसके साथ पुलिसकर्मी भी नजर आ रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि तृप्ति ने खुद को अधिकारी बताकर निरीक्षण के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराया था। अब पुलिस उससे इस निरीक्षण और संबंधित सरकारी कार्यालयों के संबंध में पूछताछ करेगी। यूपीएससी अभ्यर्थी को फंसाया करीब डेढ़ साल पहले तृप्ति अपने ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी की शिकायत लेकर पुलिस थाने पहुंची थी। यहां उसने खुद को आईएएस अधिकारी बताया। इसी दौरान उसकी पहचान एक पुलिस अधिकारी के परिचित युवक से हुई, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। तृप्ति ने उसे सिविल सर्विस की तैयारी में मार्गदर्शन और मेंटरशिप देने का भरोसा दिया। इसके बाद संपर्क बढ़ाकर उसने युवक से करीब 39 लाख रुपये की ठगी कर ली। उसके दोस्त को भी करीब 48 लाख रुपये का शिकार बनाने का आरोप है। सिविल सर्विस की सूची में भी छेड़छाड़ जांच में यह भी सामने आया है कि तृप्ति ने 2025 की सिविल सर्विस की अंतिम चयन सूची में कथित तौर पर छेड़छाड़ की। दूसरे अभ्यर्थी नमन गोयल के नाम की जगह अपना नाम दर्शाकर सूची को एडिट किया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर वह खुद को गोविंदपुरा एसडीएम बताने की कोशिश करती थी। शादी के बाद शुरू हुआ खेल बागमुगलिया निवासी तृप्ति की करीब पांच साल पहले बिल्डर अचल सिंह से दोस्ती हुई थी। आरोप है कि उसने खुद को आईएएस बताकर अचल से शादी की। ससुराल वालों पर प्रभाव जमाने के लिए वह ‘भारत सरकार’ लिखी कार का इस्तेमाल करती थी। बाद में इसी पहचान के जरिए नौकरी और कारोबार दिलाने का झांसा देकर लोगों से रकम लेने लगी। तृप्ति के खिलाफ अलग-अलग थानों में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। उसके भाई सुधांशु, प्रखर और ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी भी मामलों में आरोपित हैं और चारों जेल में बंद हैं। recent visitors 5