एम्स भोपाल में शुरू हुई ‘स्कैन एंड पे’ सुविधा: मरीजों के लिए कैशलेस भुगतान आसान

‘Scan and Pay’ facility started in AIIMS Bhopal: Cashless payment easy for patients एम्स भोपाल ने अपने मरीजों के लिए एक नई कैशलेस भुगतान सुविधा शुरू की है, जो अस्पताल में इलाज करवाने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत का काम करेगी। अब मरीज ‘आभा’ ऐप के माध्यम से डॉक्टर द्वारा सुझाए गए टेस्ट और अन्य बिलों का भुगतान आसानी से कर सकेंगे। यह सुविधा मरीजों को लंबी कतारों से बचाएगी और उन्हें कैश लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। ‘स्कैन एंड पे’ सुविधा की शुरुआतशनिवार से अस्पताल में ‘स्कैन एंड पे’ सेवा की शुरुआत की गई है। मरीजों को अपने मोबाइल पर आभा ऐप डाउनलोड करना होगा। इस ऐप के जरिए वे अपने टेस्ट और सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मरीज को केवल ऐप में दिखाई देने वाले क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा, जिसके बाद वे आसानी से भुगतान कर सकेंगे। डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूपएम्स के निदेशक, प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह ने कहा कि यह सुविधा मध्य भारत में पहली बार शुरू की जा रही है। उनका मानना है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया दृष्टिकोण के अनुरूप है। अस्पताल में हर दिन लगभग 5000 से ज्यादा मरीजों को इस नई सुविधा का लाभ मिलेगा, जिससे न केवल उनका समय बचेगा, बल्कि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। भुगतान प्रक्रिया में सरलताइस सुविधा का उपयोग करना बेहद सरल है। मान लीजिए, डॉक्टर ने आपको कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा है। आप अपने आभा ऐप को खोलकर टेस्ट की जानकारी पर क्लिक करेंगे, फिर क्यूआर कोड को स्कैन करके अपना भुगतान करेंगे। इस तरह, मरीज अन्य अस्पताल के बिलों का भुगतान भी कर सकेंगे। मरीजों के लिए लाभकारी पहलएम्स के निदेशक ने इस पहल के लाभों को बताते हुए कहा कि इससे मरीजों को काफी सहूलियत होगी। लंबी लाइनों में लगने की बजाय, वे आसानी से और जल्दी से अपना पेमेंट कर सकेंगे। यह सुविधा समय की बचत करेगी और अस्पताल में भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाएगी, जिससे मरीजों का अनुभव बेहतर होगा। इस तरह की डिजिटल सुविधाएं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत देती हैं, और उम्मीद है कि इससे मरीजों के अनुभव में सुधार होगा। recent visitors 178

दीपावली के बाद भोपाल में 300 क्षेत्रों में बढ़ सकती है प्रॉपर्टी की कीमतें

After Diwali, property prices may increase in 300 areas in Bhopal. भोपाल। भोपाल शहर में बीते छह महीने में एक हजार 294 स्थानों पर जमकर प्रॉपर्टी की खरीद -फरोख्त की गई है। इनमें से 300 स्थान ऐसे हैं, जहां वर्तमान दरों से अधिक दरों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। ऐसे में अब जिला प्रशासन और पंजीयन विभाग ने इन स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरें बढ़ाने का निर्णय लिया है। संभवत : दीपावली के बाद यहां प्रॉपर्टी महंगी हो सकती है और इसके लिए किसी भी तरह की कोई दावे-आपत्ति भी नहीं लिए जाएंगे। इस संबंध में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने गुरुवार को वरिष्ठ जिला पंजीयक मुकेश श्रीवास्तव, स्वप्नेश शर्मा सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक ली और उन्हें नई कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल सहित प्रमुख जिलों में प्रॉपर्टी की जमकर खरीद-फरोख्त के चलते पिछले दिनों तीन-तीन महीने में प्रॉपर्टी की दरें तय करने के निर्देश दिए थे। एआई से किया जाएगा सर्वे अधिकारियों ने बताया कि शहर के किन स्थानों पर अधिक दामों में प्रॉपर्टी की ज्यादा खरीद-फरोख्त की जा रही है, इसका पता लगाने के लिए एआई की मदद ली जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि किन क्षेत्रों में अधिक दामों पर जमकर प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की जा रही है। इन्हीं स्थानों को प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा।उप जिला मूल्याकंन और जिला मूल्यांकन में सहमति के बाद नई दरें एक जनवरी से लागू कर दी जाएंगी। जिले में प्रॉपर्टी की बढ़ती खरीद-फरोख्त के चलते हर तीन महीने यानि अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी में दरें दोबारा से बढ़ाई जाएंगी। ऐसे में एक स्थान पर तीन-तीन महीनों की खरीद-फरोख्त का असर प्रॉपर्टी के दामों पर पड़ेगा।यहां बढ़ सकते हैं प्रॉपर्टी के दाम एआई की मदद से पंजीयन के पोर्टल के बीते छह महीने के डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। क्षेत्रीय स्थान, मेट्रो रूट, प्रमुख सरकारी परियोजनाएं और बस स्टैंड के आसपास की प्रॉपर्टी का मूल्यांकन एआई मॉडल से किया गया है। कोलार सिक्सलेन की वजह से गोल जोड़, थुआखेड़ा से लेकर कजलीखेड़ा तक बदलाव होगा। चूनाभट्टी से नेहरू नगर, कोटरा, वैशाली नगर में भी दरें बदलेंगी।सलैया से बगली के बीच, बैरागढ़ रेलवे लाइन के आसपास, सनखेड़ी, हिनोतिया आलम, बरखेड़ा नाथू, कलखेड़ा, सेवनियां गोंड से लेकर इंद्रपुरी से अयोध्या बायपास और यहां से आशाराम तिराहा तक प्रस्तावित बायपास से 100 मीटर तक की दरों में बदलाव प्रस्तावित किया जाएगा। हुई थी 25 से 95 प्रतिशत वृद्धिअप्रैल 2024 में नई गाइडलाइन लागू की थी, जिसमें कोलार, सलैया, अयोध्या बाइपास और मिसरोद में 25 से लेकर 94 प्रतिशत तक दाम बढ़ाए गए थे। सबसे ज्यादा मिसरोद के कोरल वुड्स के मुख्य मार्ग पर प्रति वर्ग मीटर 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। यहां रहवासी प्लाट की कीमत 44 हजार रुपये वर्ग मीटर से बढ़ाकर 70 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर किया गया। recent visitors 128

मोहन सरकार सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में, राजनीतिक माहौल गर्म

mohan government preparing to bring no-confidence motion against sarpanches, political atmosphere heated मध्य प्रदेश सरकार पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान करने जा रही तीन चौथाई पंचों के हस्ताक्षर के साथ यह प्रस्ताव सरपंच की तीन साल की कार्यावधि पूरी होने पर लाया जा सकेगा।Ordinance against Sarpanch : मध्य प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। यह कदम पंचायत राज अधिनियम में संशोधन से संभव होगा। अब सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों (पंचायत सदस्यों) के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी और यह प्रस्ताव सरपंच का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही लाया जा सकेगा। सरकार इस नए प्रावधान को लागू करने के लिए एक अध्यादेश का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है। जिसे अगले महीने कैबिनेट में पेश किया जाएगा। ऐसी होगी अविश्वास प्रस्ताव की नई व्यवस्था वर्तमान में, नगरीय निकायों के अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान है। इसी तरह का प्रावधान अब पंचायतों में भी लागू किया जाएगा। इस संशोधन में नगरीय निकायों की तरह सरपंचों के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन चौथाई पंचों का समर्थन आवश्यक होगा। साथ ही, यह प्रस्ताव केवल तब लाया जा सकेगा जब सरपंच की कार्यावधि को तीन साल पूरे हो चुके हों। चूंकि अभी विधानसभा का सत्र प्रस्तावित नहीं है, इसलिए सरकार अध्यादेश के माध्यम से यह संशोधन करेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संशोधन का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे वरिष्ठ सचिव समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद, विधि एवं विधायी विभाग से परिमार्जन कटाने के बाद अंतिम रूप से इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लंबे समय से हो रही मांग पंचायत और ग्रामीण संगठनों की लंबे समय से यह मांग थी कि सरपंचों के खिलाफ भी नगरीय निकायों की तरह अविश्वास प्रस्ताव लाने की व्यवस्था होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel) ने संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और सहमति व्यक्त क। जिसके बाद इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की नई व्यवस्था क्या है? मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत राज अधिनियम में संशोधन किया है। जिसके तहत सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। यह प्रस्ताव केवल तब लाया जा सकेगा जब सरपंच का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका हो। कब तक यह नया प्रावधान लागू होगा? सरकार इस नए प्रावधान को लागू करने के लिए एक अध्यादेश का मसौदा तैयार कर रही है, जिसे अगले महीने केबिनेट में पेश किया जाएगा। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कितने पंचों का समर्थन आवश्यक है? अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों (पंचायत सदस्यों) का समर्थन आवश्यक होगा। यह व्यवस्था कब से मांग की जा रही थी? यह व्यवस्था पंचायत और ग्रामीण संगठनों द्वारा लवे समय से मांगी जा रही थी, ताकि सरपंचों के खिलाफ भी नगटीय निकायों के समान अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार हो। क्या यह संशोधन विधानसभा में पेश होगा? 2 वर्तमान में विधानसभा का सत्र प्रस्तावित नहीं है, इसलिए यह संशोधन अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। विधि एवं विधायी विभाग के परिमार्जन के बाद इसे कैविनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। recent visitors 198

मप्र सरकार का मलेरिया उन्मूलन अभियान: कागजों में सफलता, जमीन पर असफलता

Madhya Pradesh government’s malaria eradication campaign: Success on paper, failure on ground भोपाल। मप्र में सभी शहरों नगरों, कस्बे तथा गांवों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया के मरीज अस्पतालों में भरे पड़े हैं, अस्पतालों,नीजि क्लीनिक,से लेकर झोलाछाप डॉक्टरों के यहां मरीजों की भीड़ है, तो गंदे पानी से उल्टी दस्त तथा त्वचा रोग के मरीज भी बहुतायत में हैं, सरकारी बोरिंग, आदि के पानी भी दुषित है तो सवाल मप्र सरकार क्या इवेंट में व्यस्त हैं, अधिकारियों को मैदानी कार्यवाही करते हुए मच्छरों से छुटकारा दिलाने खातिर दवाईयों का छिड़काव,जल जमाव की रोकथाम तथा शुद्ध पानी पीने का मिले यह मुहिम चलानी चाहिए पर सरकार कागजों पर या जी हूजुरी आयोजन में व्यस्त हैं। मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एड्वोकेट प्रमोद कुमार व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि मौसमी बिमारियों के लिए सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता परन्तु मच्छरों और गंदगी तथा गंदे पानी पीने से फैल रही बिमारियों की जिम्मेदारी तो मप्र सरकार की है। मलेरिया उन्मूलन अभियान कागजों पर चल रहा है करोड़ों रुपए का बजट रहता है परंतु विभाग मृतप्राय सा हो चला है। व्दिवेदी ने सवाल उठाया क्या कोरोना महामारी की तरह डेंगू, मलेरिया चिकनगुनिया बिमारी फैलती है कि मच्छरों से,, तो मच्छरों का उन्मूलन अभियान कागजों पर ही क्यों चल रहा,,,। ना तो विभाग की गाड़ियां नजर आ रही ना दवाईयों का छिड़काव हो रहा,,,। मप्र सरकार क्या इवेंट मैनेजमेंट से इसे विपक्षी दलों का खाली आरोप बतायेगी। recent visitors 170

मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए तेज क्रियान्वयन का वक्त: उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल

Time for faster implementation for the health needs of Madhya Pradesh: Deputy Chief Minister Rajendra Shukla भोपाल ! उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सहज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सशक्त-आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश को मूर्त रूप देने, स्वस्थ मध्यप्रदेश के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और अधोसंरचनाओं को निरंतर सुदृढ़ करने के प्रयास किये जा रहे हैं। इन कार्यों के तेज गति से क्रियान्वयन के लिए विभागीय समन्वय आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में मुख्य सचिव अनुराग जैन से विभिन्न अंतर्विभागीय समन्वय विषयों पर गहन चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के प्रमुख विषयों पर तेजी से कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक कार्यवाही हेतु संबंधित विभाग प्रमुखों को निर्देशित करें, ताकि कार्यों में तेजी लाई जा सके। प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी और प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव उपस्थित थे। मेडिकल कॉलेजों में वेतन संरक्षण (पे-प्रोटेक्शन) के प्रस्ताव पर किया विमर्श उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने 454 चिकित्सकीय संस्थानों में पदों की स्वीकृति के साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में वेतन संरक्षण (पे-प्रोटेक्शन) के प्रस्ताव को प्राथमिकता देने के लिए कार्यवाही और समन्वय करने के निर्देश दिये। पैरामेडिकल कौंसिल से संबंधित अधिनियम को पुनः पूर्ववत् करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया। सामुदायिक केंद्रों और सिविल अस्पतालों के संचालन को आउटसोर्स आधार पर अनुमति देने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई, ताकि इसे शीघ्र ही अमल में लाया जाकर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त किया जा सके। सहायक प्राध्यापक (मेडिकल कॉलेज) के पदों पर भर्ती की आयु सीमा को 40 वर्ष से 50 वर्ष किये जाने पर दिया ज़ोर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सहायक प्राध्यापक (मेडिकल कॉलेज) के पदों पर भर्ती की आयु सीमा को 40 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष करने की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताते हुए आवश्यक प्रस्ताव पर विमर्श किया। साथ ही नवीन जिलों में जिला अस्पतालों में पदों की स्वीकृति के मुद्दे पर विभागीय समन्वय के विषय पर चर्चा की गई। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग भर्ती में विशेष छूट देने का प्रस्ताव बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रहा। रीवा मेडिकल कॉलेज, सतना मेडिकल कॉलेज अस्पताल और इंदौर के एम वाय अस्पताल के उन्नयन और निर्माण हेतु परियोजना परीक्षण समिति से अनुमोदन प्राप्त करने के लिए संबंधित कार्यवाही तेज करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये। स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन, स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं के विकास के लिए बजट प्रावधान पर चर्चा उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट प्रावधान पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन, स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं के विकास के लिये स्वीकृति हेतु प्रस्ताव लंबित हैं, जिसके समाधान के लिए विभागीय सूचकांक को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही रीवा जिले के ग्राम हिनौती में गौ-अभ्यारण्य की स्वीकृति के लिए पशुपालन विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव पर स्क्रीनिंग कमेटी आवश्यक कार्यवाही के लिए उप मुख्यमंत्री ने कहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा के अनुक्रम में सांदीपनी संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन के रीवा परिसर में आधारभूत संरचना विकास (भवन/पुल निर्माण) तथा आवश्यक भूमि अधिग्रहण के लिए उच्च शिक्षा विभाग से राशि प्रावधान करने की अनुशंसा की गई है। इस परियोजना को शीघ्र आमजन तक पहुँचाया जा सके इसके लिये आवश्यक कार्यवाही करने के संबंध में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने चर्चा की। recent visitors 122

भोपाल: हमीदिया रोड पर ध्वनि प्रदूषण की बाढ़: पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की नई रिपोर्ट

Bhopal: Flood of noise pollution on Hamidia Road: New report of Pollution Control Board भोपाल: मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में राजधानी भोपाल के हमीदिया रोड को सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। बीते 6 महीनों (1 अप्रैल से 30 सितंबर) के आंकड़ों के अनुसार, हमीदिया रोड पर 68 डेसिबल तक का नॉइस पॉल्यूशन दर्ज किया गया है, जो शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। इस रिपोर्ट में गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण 50 डेसिबल से कम दर्ज हुआ है, जबकि हमीदिया रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया से भी ज्यादा शोर है। ट्रैफिक और डीजे-बैंड हैं ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण विशेषज्ञों का मानना है कि हमीदिया रोड पर भारी ट्रैफिक और डीजे-बैंड जैसी गतिविधियों के कारण नॉइस पॉल्यूशन की समस्या अधिक गंभीर है। इस सड़क पर प्रतिदिन प्रति घंटा 8 से 10 हजार वाहनों का आवागमन होता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना रहता है। इसके अलावा, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान डीजे और बैंड की आवाजें इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, हमीदिया रोड पर अप्रैल से सितंबर तक का औसत ध्वनि स्तर निम्न प्रकार रहा: इसके मुकाबले, गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम पाया गया। गोविंदापुरा में अगस्त में 49 डेसिबल और बैरागढ़ में अगस्त और सितंबर में 49 से 52 डेसिबल तक का ध्वनि स्तर दर्ज किया गया। साइलेंट जोन में भी प्रदूषण रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के पर्यावरण परिसर, जो साइलेंट जोन के रूप में जाना जाता है, में भी ध्वनि प्रदूषण चिंता का विषय है। यहां भी अप्रैल से सितंबर के बीच ध्वनि स्तर 53 से 58 डेसिबल के बीच रहा, जो साइलेंट जोन के लिए निर्धारित मानकों से अधिक है। तेज शोर ने ली बच्चे की जान तेज ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव हाल ही में तब सामने आए जब 14 अक्टूबर को 13 वर्षीय समर बिल्लौरे की मौत हो गई। समर डीजे की तेज आवाज में मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान डांस कर रहा था, जब उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि डीजे की अत्यधिक आवाज उसकी मौत का कारण बनी। ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की आवश्यकता हमीदिया रोड और अन्य क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के मद्देनजर, शहर के नागरिकों और पर्यावरणविदों ने प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह आवश्यक है कि प्रशासन नॉइस पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके और नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम किया जा सके। recent visitors 166

सिंगरौली : सरकारी स्कूल में शराबी हेडमास्टर की हरकत, कार्रवाई की तैयारी

Drunk headmaster's actions in government school, preparation for action The villagers made a video of this

Drunk headmaster’s actions in government school, preparation for action सिंगरौली ! Drunk headmaster’s actions in government के नशे में पहुंचा. इसका वीडियो ग्रामीणों ने बना लिया. अब इस मामले में शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है. मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल से शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है. सिंगरौली जिले के ग्रामीण क्षेत्र बिंदुल संकुल केंद्र, पुरा गांव के प्राथमिक स्कूल में एक टीचर शराब के नशे में धुत नजर आया. शराब पीकर स्कूल आने की वजह भी शिक्षक ने बताई. उसने कहा कि मेरा मोबाइल गुम हो गया, दिमाग डिस्टर्ब है, इसलिए थोड़ी बहुत शराब पीकर आया हूं. स्कूल में सिर्फ एक टीचरपुरा गांव में सरकारी स्कूल में तैनात इस टीचर का नाम अर्जुन सिंह है. इसी प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर भी है, जो लंबे समय से इसी स्कूल में है और अक्सर स्कूल में शराब के नशे में ही आता है. इस प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ यही एक शिक्षक है. ग्रामीणों ने बनाया वीडियोरोजाना की तरह बुधवार (16 अक्टूबर) को जब शराबी हेडमास्टर स्कूल पहुंचा तो ग्रामीणों ने उसका वीडियो बनाया और पूछा कि आप शराब पीकर क्यों आये हो? तो जवाब भी ऐसा दिया जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. शराबी हेडमास्टर ने कहा कि मेरा मोबाइल गुम गया है, इसलिए शराब पीकर स्कूल आया हूं. शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?ग्रामीणों ने नशे में धुत्त शराबी हेडमास्टर का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी एसबी सिंह ने जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही. Read More : https://mysecretnews.com/chhatarpur-and-khajuraho-opposition-targeted/ recent visitors 218