कर्मचारियों के विरोध पर एमवीएम की प्राचार्या को हटाया

MVM principal removed after staff protest उच्च शिक्षा विभाग ने कर्मचारियों के हित में लिया बड़ा फैसला  भोपाल। राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ के तीव्र विरोध के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने राजधानी के मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य गीता मोदी को हटा दिया है। इस फैसले को कर्मचारी अपने लगातार चले सघर्ष की जीत बता रहे हैं। कर्मचारी लंबे समय से प्राचार्या के खिलाफ लामबंद थे और इसको लेकर मुहिम चला रहे थे। आखिकार वही हुआ, जो कर्मचारी चाह रहे थे।  दरअसल, मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य गीता मोदी का व्यवहार कर्मचारियों के प्रति कठोर था। वे किसी के कहने पर हमेंशा कर्मचारी विरोधी गतिविधियां चला रहीं थी। जिसका कर्मचारी लगातार विरोध जता रहे थे और मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, आयुक्त तथा मंत्री तक ज्ञापन सौंप चुके थे। शिकायत और चेतावनी के बाद भी उनका कर्मचारियों के प्रति रवैया रुखा ही रहा। जिसके बाद शासन ने कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या गीता मोदी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया और उनके स्थान पर डॉ अलका प्रधान को प्रभारी प्राचार्या का दायित्व सौपा है। इसके बाद कर्मचारियों ने कुछ राहत की सांस ली है।  राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ प्रमुख शील प्रताप सिंह पुंढीर,  महासचिव व्यासमुनि चौबे, प्रदेश प्रवक्ता शोएब सिद्दीकी, सचिव कृष्णकांत मिश्रा, भोपाल जिलाशाखा प्रणव खरे, प्रांतीय उच्च शिक्षा विभागीय समिति अध्यक्ष लालाराम रैकवार,  रविशंकर त्रिपाठी, राहुल शर्मा, सूर्यकांत मिश्रा ने इस निर्णय को कर्मचारी हितैषी बताया। कर्मचारियों ने डॉ अलका प्रधान को नए प्रभार के लिए बधाई और मंत्री इंदरसिंह परमार का आभार माना।  कर्मचारियों ने नवागत प्राचार्या श्रीमती प्रधान से शासन हित में अल्पवेतन भोगी जनभागीदारी श्रमिकों, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता से किए जाने की मांग की है। recent visitors 108

कुपोषण फ्री के लिए फुल प्रूफ प्लान बनाएं, लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकें…. रिव्यू मीटिंग में सीएम के सख्त निर्देश

कुपोषण फ्री के लिए फुल प्रूफ प्लान बनाएं, लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकें…. रिव्यू मीटिंग में सीएम के सख्त निर्देश

Develop a foolproof plan to eliminate malnutrition, prevent dropouts of Ladli Laxmi girls… CM issues strict instructions in review meeting भोपाल : एमपी सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं। इससे पहले सीएम मोहन यादव विभागों की समीक्षा कर रहे हैं। बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम ने कई निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रकिया लागू करने में देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सीएम ने लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट पर विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। ड्रॉप आउट रोकने के निर्देशसीएम ने अधिकारियों को लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि इस पर सख्त निगरानी रखें। दरअसल, यह खबरें आ रही थीं कि लाडली लक्ष्मी बेटियां पढ़ाई छोड़ रही हैं। इसी के बाद सीएम ने चर्चा की है। ये रहीं विभाग की उपलब्धियांइसके साथ ही टेक होम राशन की एफआरएस प्रक्रिया में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ देकर एमपी ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। झाबुआ के ‘मोटी आई’ नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है। PM JANMAN भवनों की डिजाइन और मॉनिटरिंग मॉड्यूल की भारत सरकार द्वारा विशेष सराहना की गई। भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित किया गया। आंगनवाड़ी में गर्म भोजन की व्यवस्थावहीं, सीएम ने तीन वर्ष की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। 2026 से मध्य प्रदेश के शहरी आंगनवाड़ी केंद्रों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन उपलब्ध करवाने की तैयारी है। साथ ही अगले तीन वर्ष में 9000 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन बनाए जाएंगे। महिलाओं को मिली मददसाथ ही PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक की सहायता मिली है। लाडली बहना योजना के तहत जनवरी 2024–नवंबर 2025 में ₹36,778 करोड़ का अंतरण किया गया है। 1.72 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन से सहायता मिली है। इसके साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस, 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण दी गई। वहीं, सामग्री टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी होगी तो वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार होगें। सीएम ने तीन साल में कुपोषण को समाप्त करने के लिए फुल प्रूफ कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग के लिए जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं। recent visitors 63

काम का दबाव या बीमारी? 10 दिनों में छह बीएलओ की मौत, परिजन बोले- एसआईआर ने ली जान

काम का दबाव या बीमारी? 10 दिनों में छह बीएलओ की मौत, परिजन बोले- एसआईआर ने ली जान

madhya pradesh blo deaths special intensive revision work pressure health issues election digitization crisis प्रदेश में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) की लगातार मौतों और बीमार होने की घटनाओं ने प्रशासन से लेकर कर्मचारी संगठनों तक सभी को चिंता में डाल दिया है। पिछले 10 दिनों में प्रदेश में 6 बीएलओ की मौत दर्ज की गई है, जबकि कई कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हैं। परिजनों का आरोप है कि भारी काम के दबाव और तनाव के कारण मौतें हुई हैं, वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि मौतों का कारण बीमारियों की अनदेखी और हादसे हैं। दूसरी ओर कर्मचारी संगठन इसे “काम के बोझ का नतीजा” बता रहे हैं। 5.74 करोड़ मतदाताओं का डेटा, 65 हजार बीएलओ पर जिम्मेदारी प्रदेश में 4 नवंबर से मतदाता सूची के डिजिटलाइजेशन का बड़ा अभियान चल रहा है। इसमें लगभग 5.74 करोड़ मतदाताओं की जानकारी अपडेट करने का काम 65 हजार बीएलओ द्वारा किया जा रहा है। निर्धारित डेडलाइन नजदीक आने से कर्मचारियों पर लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। घटनाओं की चिंताजनक श्रृंखला सूत्रों के अनुसार, शहडोल के सोहागपुर में बीएलओ मनीराम नापित लोगों से फॉर्म ले रहे थे तभी एक अधिकारी का फोन आया। कॉल के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पिपरिया (नर्मदापुरम) में शिक्षक और बीएलओ सुजान सिंह रघुवंशी एसआईआर सर्वे से लौटते समय ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया। मंडीदीप में ऑनलाइन मीटिंग खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद बीएलओ रमाकांत पांडे अचानक बेहोश हुए और अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई। झाबुआ में बीएलओ भुवन सिंह को कुछ दिन पहले लापरवाही बताकर निलंबित किया गया था। परिजनों का कहना है कि निलंबन से वह गहरे मानसिक तनाव में थे और इसी सदमे में उन्हें हार्ट अटैक आया। इसी तरह दमोह और बालाघाट में भी दो बीएलओ की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। एक परिजन ने आरोप लगाया कि “लगातार काम का दबाव और भागदौड़ ने उनकी स्थिति खराब कर दी।” बीएलओ अस्पताल में भर्ती भोपाल, रीवा और भिंड में कई बीएलओ को हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामले सामने आए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि बीमारी के बावजूद अधिकारियों ने उनसे काम पूरा करने का दबाव बनाया। कर्मचारी संघ ने उठाई मुआवजे की मांग मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर मांग की है कि मृत बीएलओ के परिवारों को 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और बीमार कर्मचारियों का इलाज चुनाव ड्यूटी की तरह शासन खर्च पर कराया जाए। एसआईआर प्रगति रिपोर्ट: एमपी चौथे स्थान पर मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन को लेकर नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 नवंबर दोपहर 12 बजे तक मध्य प्रदेश ने 72.29% काम पूरा कर लिया है। इससे राज्य देशभर में चौथे स्थान पर पहुंचा है। हालांकि बीएलओ को सर्वर की समस्या, लगातार फील्ड विजिट और हजारों रिकॉर्ड के पुनः सत्यापन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं राजस्थान देश में पहले स्थान पर है, जहां 3,000 से अधिक बूथों पर 100% डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है। 4 दिसंबर तक चलेगा सर्वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 4 दिसंबर तक बीएलओ मतदाताओं के घरों तक फॉर्म पहुंचाने और भरे हुए फॉर्म वापस लेने का काम पूरा करेंगे। इसके बाद 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट में नहीं होंगे, वे जिला निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकेंगे। यदि वहां अपील खारिज होती है, तो राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के समक्ष भी अपील दायर की जा सकेगी। मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा में चार नवंबर से एसआईआर का काम चल रहा हैं। प्रदेश के कुल 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार वोटर्स के फार्म डिजिटलाइज होने हैं। इस काम में 65 हजार 14 बूथ लेवल ऑफियर ड्यूटी पर लगे है। recent visitors 86

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

Indore is at first place and Bhopal is at second place in the number of student suicides in Madhya Pradesh. भोपाल ! देशभर में स्वच्छता में पहले स्थान पर आने वाला इंदौर लोगों में बढ़ते तनाव को कम करने में काफी पीछे है। खासकर विद्यार्थियों में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं। इंदौर के कोचिंग संस्थानों (Coaching institutes) में पढ़ने वाले 20 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष तनाव में आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे अधिक तनाव नीट(NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में है। आत्महत्या की दर ने सरकार की चिंता बढ़ाईविद्यार्थियों में बढ़ रही आत्महत्या की दर ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में देशभर में 15 हजार से अधिक बच्चों ने आत्महत्या की है। 1668 मामलों के साथ मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर (महाराष्ट्र के बाद) पर है। वहीं प्रदेश में भी इंदौर पहले और भोपाल जिला दूसरे स्थान पर है। एक्शन में सरकार, एसटीएफ का गठनमानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एसटीएफ का गठन सरकार ने बच्चों को आत्मघात से बचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों-अफसरों को सौंपी है। उच्चशिक्षा विभाग ने अभिनव प्रयोग करते हुए स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। यह बल सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय करेगा। शैक्षणिक संस्थानों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। कॉलेजों में काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इंदौर में पांच हजार से अधिक कोचिंगइंदौर प्रदेश का कोचिंग हब है। यहां पांच हजार से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। इसमें से 200 से अधिक नीट, जेईई और आईआईटी (IIT) की तैयारी की कोचिंग है। भंवरकुआं, गीताभवन, पलासिया, विजय नगर आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं। यहीं सबसे अधिक विद्यार्थी रहते भी हैं। इंदौर में आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। पढ़ाई का दबाव बना जानलेवाकेस 1ः फरवरी 2025 में भंवरकुआं थाना क्षेत्र में नीट की परीक्षा में चयन न होने से परेशान छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। छात्रा का नाम गारगी सुमन (23) निवासी श्रीराम नगर पालदा था। गारगी कई वर्षों से नीट की तैयारी कर रही थी। दो बार कम अंक आने के कारण वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उसने बैंक की परीक्षा की तैयारी की, लेकिन इसमें भी वह सफल नहीं हो सकी। केस 2ः वर्ष 2024 में भंवरकुआं क्षेत्र में एक छात्र ने नोट लिखा कि मैं जीवन में सफल नहीं हो पाया और आत्महत्या कर ली। छात्र नीट की तैयारी कर रहा था। मूलरूप से शिवनी जिले का रहने वाला था। केस 3ः फरवरी 2024 में 20 वर्षीय आर्यन तिवारी ने फांसी लगा ली थी। वह मूलरूप से हुजूर (रीवा) का रहने वाला था। इंदौर रहकर वह नीट की तैयारी कर रहा था। केस 4ः मई 2025 में नर्सिंग की छात्रा आशा कानूनगो (25) ने आत्महत्या कर ली। वह मूलरूप से सिवनी की रहने वाली थी। उसकी दीवार पर कई नोट चिपके हुए थे। उनमें लिखा था कि वह सरकारी नर्स नहीं बन सकती और डिप्रेशन में है।केस 5ः मई 2025 में संयोगितागंज थाना क्षेत्र में नर्स यास्मित्रा ने आत्महत्या की। वह निजी मेडिकल कॉलेज में आगे की पढ़ाई कर रही थी। आशंका जताई गई थी कि पढ़ाई के दबाव के चलते यह कदम उठाया है। विशेषज्ञ ने बताया क्या करें माता-पितामनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर ने बताया कि अब बच्चों में तनाव सहने की क्षमता कम हो गई है। पढ़ाई का तनाव इतना अधिक ले लेते हैं कि आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वह बच्चों से उम्मीद रखने के बजाय उनके सहायक की भूमिका निभाएं। उनसे खुलकर बात करें। यदि बच्चा कई दिनों से चुपचाप है, अकेला रहने लगा है, रात में जल्दी नहीं सो रहा है, तो हमें इन लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। बच्चों को यह लगता है कि परीक्षा में फेल हो गया तो क्या होगा। उन्हें यह समझना होगा कि जो व्यक्ति परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं, वह भी आगे बढ़ते हैं। विद्यार्थियों में इन लक्षणों को पहचानें recent visitors 101

जिन सरपंचों ने 20 फीसदी कमीशन जमा किया, उन्हें भी नहीं मिल रहा काम : दिग्विजय सिंह

जिन सरपंचों ने 20 फीसदी कमीशन जमा किया, उन्हें भी नहीं मिल रहा काम : दिग्विजय सिंह

Even those sarpanches who deposited 20% commission are not getting work: Digvijay Singh भोपाल। प्रदेश स्तरीय पंचायत कार्यशाला को लेकर राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि भाजपा को 22 साल बाद पंचायत प्रतिनिधियों की याद आई है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल को खुली बहस की चुनौती दी है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा को 22 साल बाद पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार देने की याद आई है। हमने सोचा था कि वे पंचायत प्रतिनिधियों को ऐसें अधिकार देंगे, जिससे अधिकारी उनके नियंत्रण में आ सकें। लेकिन केवल एक ही घोषणा हुई है कि जिला पंचायतों और जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष जो शिक्षा समिति का अध्यक्ष होता है, उनको विद्यालयों के निरीक्षण का अधिकार दिया है। उन्हें सिर्फ जांच करने का अधिकार देने की बात तो कही गई है, लेकिन निरीक्षण पर कार्रवाई का अधिकार अधिकारी-कर्मचारी के पास ही रहेगा। मंत्री पटेल के कार्यकाल में चल रहा कमीशन का खेल सिंह ने कहा कि मुझे सीएम डॉ मोहन यादव के मुकाबले पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल से ज्यादा उम्मीद थी। क्योंकि वे ग्रामीण परिवेश के हैं। पंचायत का जितना अनुभव प्रह्लाद पटेल को होगा, उतना सीएम डॉ मोहन यादव को नहीं होगा। लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि उनके कार्यकाल में भी खुलेआम प्रदेश स्तर पर कमीशनखोरी हो रही है।जो पैसा सीधा पंचायत के पास जाना चाहिए वो नहीं जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले पंचायत मंत्री थे महेंद्र सिसोदिया। उन्होंने सिस्टम बना रखा था कि “20 फीसदी दो और मंजूरी लो” वो आज भी कायम है। मेरे चुनाव क्षेत्र राजगढ़ के कई सरपंचों ने बताया कि उन्होंने एडवांस बुकिंग भी कर दी 20 फीसदी कमीशन जमा भी कर दिया, लेकिन पैसा उन्हें नहीं मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मंत्री प्रह्लाद पटेल से कहा कि कम से कम जिसने कमीशन दे दिया है, उनका तो काम कर दीजिए। इन अधिकारों की मांग दिग्विजय सिंह ने कहा कि इससे ज्यादा इस सरकार से उम्मीद भी नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री dr यादव और मंत्री पटेल से पूछा है कि कि क्या वे पंचायत प्रतिनिधियों को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार देंगे? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति का अधिकार देंगे? सीएम इतना ही करें कि तृतीय श्रेणी में जो पंचायत विभाग में काम करते हैं या ग्रामीण विकास में काम करते हैं उनकी नियुक्ति का अधिकार देंगे? उन्होंने पूछा कि जिस धारा 40 का धौंस दिखाकर सरपंचों को पृथक करते हैं क्या उसे वापस लेंगे? बेकार की बात करते हैं सीएम यादव पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोहन यादव बेकार की बात करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रह्लाद पटेल को बहस करने की खुली चुनौती दी है। साथ ही कहा कि भले वे भाजपा के ही पंचायत प्रतिनिधियों को साथ लेकर आएं। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिला परिषद अध्यक्ष को गाड़ी और राज्यमंत्री का दर्जा है, लेकिन राजगढ़ में जिला परिषद अध्यक्ष को एक कॉन्स्टेबल मंच पर चढ़ने से रोक देता है। ये आपका पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान है? recent visitors 76

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

8 trains including Rajya Rani will soon run from Rani Kamlapati station instead of Bhopal. भोपाल। रेलवे प्रशासन कुछ ट्रेनों का संचालन भोपाल स्टेशन की जगह अब रानी कमलापति स्टेशन (RKMP) से शुरू करने की तैयारी में है। इसका सबसे ज्यादा फायदा नए भोपाल की कुछ कॉलोनियो की बजाय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के ठेकेदार को होगा। जिन ट्रेनों के शिफ्ट होने की जानकारी सामने आ रही है। उसके मुताबिक, भोपाल-दमोह राज्यरानी एक्सप्रेस, ग्वालियर इंटरसिटी, विंध्याचल एक्सप्रेस सहित कुल 8 प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इनके चलने के समय में परिवर्तन होगा या नहीं, रेलवे ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है। रेलवे इस प्रस्ताव पर फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। अगर अध्ययन में यात्रियों की डिमांड अधिक पाई गई और आरकेएमपी स्टेशन पर नया पिट लाइन बनने के बाद संचालन में दिक्कत नहीं हुई, तो ट्रेनों की शिफ्टिंग कर दी जाएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार, इन आठ ट्रेनों से प्रतिदिन करीब 12,000 यात्री एक तरफ से यात्रा करते हैं।हालांकि इस नई व्यवस्था से आंशिक तौर पर नर्मदापुरम रोड, अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, गुलमोहर, बावड़िया कला में रहने वाले करीब 2.5 लाख यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। भोपाल स्टेशन से ये 8 ट्रेनें होंगी शिफ्ट recent visitors 88

छठ महोत्सव में लोक आस्था और संस्कृति का संगम: आनंद नगर में छठ मैया जागरण ने बाँधा समां

Chhath Festival is a confluence of folk faith and culture: Chhath Maiya Jagran enthralled the audience in Anand Nagar. डॉ. राजेंद्र प्रसाद भोजपुरी एकता मंच द्वारा आयोजित छठ पूजा महोत्सव के अंतर्गत आनंद नगर पुलिस चौकी के सामने एक भव्य छठ मैया जागरण का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि भोजपुरी लोक संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत की। बिहार से आमंत्रित प्रसिद्ध लोक गायकों ने छठी मैया के पारंपरिक गीतों से ऐसा समां बाँधा कि पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया। “उग हे सूरज देव” और “केलवा के पात पर” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हर गीत में प्रकृति, मातृत्व और आस्था की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महिलाएं पारंपरिक साज-सज्जा में, सूप और दउरा लिए, गीतों पर झूमती रहीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग ने इस जागरण को एक आध्यात्मिक उत्सव की तरह आत्मसात किया।मंच के अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम सिंह ने कहा, “छठ केवल एक पर्व नहीं, यह हमारी लोक चेतना, मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए, ताकि हमारी जड़ें और मजबूत हों।” recent visitors 103