जिन सरपंचों ने 20 फीसदी कमीशन जमा किया, उन्हें भी नहीं मिल रहा काम : दिग्विजय सिंह

जिन सरपंचों ने 20 फीसदी कमीशन जमा किया, उन्हें भी नहीं मिल रहा काम : दिग्विजय सिंह

Even those sarpanches who deposited 20% commission are not getting work: Digvijay Singh भोपाल। प्रदेश स्तरीय पंचायत कार्यशाला को लेकर राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि भाजपा को 22 साल बाद पंचायत प्रतिनिधियों की याद आई है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल को खुली बहस की चुनौती दी है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा को 22 साल बाद पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार देने की याद आई है। हमने सोचा था कि वे पंचायत प्रतिनिधियों को ऐसें अधिकार देंगे, जिससे अधिकारी उनके नियंत्रण में आ सकें। लेकिन केवल एक ही घोषणा हुई है कि जिला पंचायतों और जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष जो शिक्षा समिति का अध्यक्ष होता है, उनको विद्यालयों के निरीक्षण का अधिकार दिया है। उन्हें सिर्फ जांच करने का अधिकार देने की बात तो कही गई है, लेकिन निरीक्षण पर कार्रवाई का अधिकार अधिकारी-कर्मचारी के पास ही रहेगा। मंत्री पटेल के कार्यकाल में चल रहा कमीशन का खेल सिंह ने कहा कि मुझे सीएम डॉ मोहन यादव के मुकाबले पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल से ज्यादा उम्मीद थी। क्योंकि वे ग्रामीण परिवेश के हैं। पंचायत का जितना अनुभव प्रह्लाद पटेल को होगा, उतना सीएम डॉ मोहन यादव को नहीं होगा। लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि उनके कार्यकाल में भी खुलेआम प्रदेश स्तर पर कमीशनखोरी हो रही है।जो पैसा सीधा पंचायत के पास जाना चाहिए वो नहीं जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले पंचायत मंत्री थे महेंद्र सिसोदिया। उन्होंने सिस्टम बना रखा था कि “20 फीसदी दो और मंजूरी लो” वो आज भी कायम है। मेरे चुनाव क्षेत्र राजगढ़ के कई सरपंचों ने बताया कि उन्होंने एडवांस बुकिंग भी कर दी 20 फीसदी कमीशन जमा भी कर दिया, लेकिन पैसा उन्हें नहीं मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मंत्री प्रह्लाद पटेल से कहा कि कम से कम जिसने कमीशन दे दिया है, उनका तो काम कर दीजिए। इन अधिकारों की मांग दिग्विजय सिंह ने कहा कि इससे ज्यादा इस सरकार से उम्मीद भी नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री dr यादव और मंत्री पटेल से पूछा है कि कि क्या वे पंचायत प्रतिनिधियों को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार देंगे? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति का अधिकार देंगे? सीएम इतना ही करें कि तृतीय श्रेणी में जो पंचायत विभाग में काम करते हैं या ग्रामीण विकास में काम करते हैं उनकी नियुक्ति का अधिकार देंगे? उन्होंने पूछा कि जिस धारा 40 का धौंस दिखाकर सरपंचों को पृथक करते हैं क्या उसे वापस लेंगे? बेकार की बात करते हैं सीएम यादव पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोहन यादव बेकार की बात करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रह्लाद पटेल को बहस करने की खुली चुनौती दी है। साथ ही कहा कि भले वे भाजपा के ही पंचायत प्रतिनिधियों को साथ लेकर आएं। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिला परिषद अध्यक्ष को गाड़ी और राज्यमंत्री का दर्जा है, लेकिन राजगढ़ में जिला परिषद अध्यक्ष को एक कॉन्स्टेबल मंच पर चढ़ने से रोक देता है। ये आपका पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान है? recent visitors 86

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

8 trains including Rajya Rani will soon run from Rani Kamlapati station instead of Bhopal. भोपाल। रेलवे प्रशासन कुछ ट्रेनों का संचालन भोपाल स्टेशन की जगह अब रानी कमलापति स्टेशन (RKMP) से शुरू करने की तैयारी में है। इसका सबसे ज्यादा फायदा नए भोपाल की कुछ कॉलोनियो की बजाय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के ठेकेदार को होगा। जिन ट्रेनों के शिफ्ट होने की जानकारी सामने आ रही है। उसके मुताबिक, भोपाल-दमोह राज्यरानी एक्सप्रेस, ग्वालियर इंटरसिटी, विंध्याचल एक्सप्रेस सहित कुल 8 प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इनके चलने के समय में परिवर्तन होगा या नहीं, रेलवे ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है। रेलवे इस प्रस्ताव पर फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। अगर अध्ययन में यात्रियों की डिमांड अधिक पाई गई और आरकेएमपी स्टेशन पर नया पिट लाइन बनने के बाद संचालन में दिक्कत नहीं हुई, तो ट्रेनों की शिफ्टिंग कर दी जाएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार, इन आठ ट्रेनों से प्रतिदिन करीब 12,000 यात्री एक तरफ से यात्रा करते हैं।हालांकि इस नई व्यवस्था से आंशिक तौर पर नर्मदापुरम रोड, अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, गुलमोहर, बावड़िया कला में रहने वाले करीब 2.5 लाख यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। भोपाल स्टेशन से ये 8 ट्रेनें होंगी शिफ्ट recent visitors 100

छठ महोत्सव में लोक आस्था और संस्कृति का संगम: आनंद नगर में छठ मैया जागरण ने बाँधा समां

Chhath Festival is a confluence of folk faith and culture: Chhath Maiya Jagran enthralled the audience in Anand Nagar. डॉ. राजेंद्र प्रसाद भोजपुरी एकता मंच द्वारा आयोजित छठ पूजा महोत्सव के अंतर्गत आनंद नगर पुलिस चौकी के सामने एक भव्य छठ मैया जागरण का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि भोजपुरी लोक संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत की। बिहार से आमंत्रित प्रसिद्ध लोक गायकों ने छठी मैया के पारंपरिक गीतों से ऐसा समां बाँधा कि पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया। “उग हे सूरज देव” और “केलवा के पात पर” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हर गीत में प्रकृति, मातृत्व और आस्था की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महिलाएं पारंपरिक साज-सज्जा में, सूप और दउरा लिए, गीतों पर झूमती रहीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग ने इस जागरण को एक आध्यात्मिक उत्सव की तरह आत्मसात किया।मंच के अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम सिंह ने कहा, “छठ केवल एक पर्व नहीं, यह हमारी लोक चेतना, मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए, ताकि हमारी जड़ें और मजबूत हों।” recent visitors 114

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

Death on the roads: One fatal accident every hour in Madhya Pradesh, 150+ accidents daily, and over 38 deaths. भोपाल। Death on the roads मध्य प्रदेश 2023 में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में देश के सबसे खतरनाक राज्यों में से एक रहा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 14,098 लोगों की मौत हुई, जो भारत की कुल आकस्मिक मौतों का 9.8 प्रतिशत है। 2022 की तुलना में दुर्घटनाओं में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट बताती है कि 2023 में मध्य प्रदेश में 54,763 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 54,699 लोग घायल भी हुए। राज्य में आकस्मिक मृत्यु दर 49.8 रही, जो देश में छठी सबसे अधिक दर है। मध्य प्रदेश के हाईवे खतरनाक Death on the roadsयात्रियों के लिए राजमार्ग सबसे खतरनाक साबित हुए। भारत की कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 7 प्रतिशत केवल मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज किया गया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच का समय विशेष रूप से जोखिम भरा रहा, इस दौरान 10,613 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा, देश में हुई घातक बस दुर्घटनाओं में से 10.2 प्रतिशत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मिलाकर हुईं। छोटे वाहनों से ज्यादा हुए एक्सीडेंट Death on the roadsखराब बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय कारक भी इन मौतों में योगदान करते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारी और यात्री वाहनों के कारण बड़ी संख्या में मौतें हुईं। राज्य की सड़कों पर स्ङ्क/जीप और कारों से होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या ट्रक/लॉरी/मिनी-ट्रक से होने वाली मौतों से अधिक थी। राजधानी भोपाल में भी बढ़ोतरी Death on the roadsराष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 2022 की तुलना में हुई है। कुल 2,906 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 196 लोगों की जान गई और 2,196 लोग घायल हुए। रात 9 बजे से आधी रात तक का समय सबसे खतरनाक रहा। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे ज़्यादा असुरक्षित पाए गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी भोपाल को ओवर-स्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में चौथे स्थान पर रखा था। recent visitors 108

कितना बदलेगा भोपाल निगम, जल्द सच आ जाएगा सामने

How much will change in Bhopal Corporation, the truth will come out soon भोपाल। भोपाल नगर निगम में नई अधिकारी की जल्द आमद होने वाली है। जो आईएएस अधिकारी संस्कृति जैन भोपाल आने वाली हैं, अभी तक सिवनी जिले की कलेक्टर थीं। उनकी विदाई के दौरान उन्हें वहां की जनता ने खूब सम्मान दिया है, जिसकी चर्चा प्रदेशभर में हो रही है। वैसे भोपाल नगर निगम महिला अधिकारियों के लिए मुफीद नहीं बन सका है। बात करें महपौर आलोक शर्मा के कार्यकाल की, तो आईएएस छवि भारद्वाज आयुक्त थीं। आलोक पूर्व सीएम शिवराज के नजदीकीर रहे थे। उन्होंने छवि को प्रेसर पॉलिटिक्स के चलते काम नहीं करने दिया। वे सोमवार को भानपुर खंती का दौरा करने वाली थीं। यह खबर जैसे ही आलोक को लगी, तो उन्होंने उसके पहले ही रविवार रात को उनका तबादला करवा दिया। इसके बाद प्रियंका दास आईं। उन्होंने निगम की माली हालात को सुधारने के लिए खूब मेहनत की। डीजल चोरी रोकना उनके लिए भारी पड़ गया। इनसे आलोक की पटरी नहीं खाई। आनन-फानन में अलोक ने उनको भी विदा कर दिया।  आमने-सामने होंगी दोनों महिला  नेता और अफसर अब महिला महापौर मालती राय हैं। जो राजधानी के एक मंत्री की खास हैं। हरेंद्र नारायण निगम के लचर ढर्रे को सुधारने में लगे रहे। वे ज्यादा सिफारिश पसंद नहीं करते थे। इसी दौरान उपयुक्त निधि सिंह की निगम में आमद हुई। उनका सख्त रवैया महापौर समेत उनके समर्थक पार्षदों को पसंद नहीं आया। उनका महापौर लॉबी ने विरोध करते हुए निंदा प्रस्ताव पास कर दिया और सख्त अंदाज वाली महिला अधिकारी को भागने मजबूर कर दिया था। इस लिहाज से देखें तो भोपाल निगम महिला अधिकारी के लिए ग्रहणकारी रहा है। हरेंद्र नारायण से भी उनकी सही बैठक नहीं चल पाई। हालांकि उन्हें सरकार ने छिंदवाड़ा कलेक्टर बना दिया है। अब सिवनी कलेक्टर आईएएस संस्कृति जैन पदभार सभालने वाली हैं। इस बार ऐसा होगा कि महापौर और आयुक्त दोनों ही महिला आमने-सामने राजधानी की नगर सरकार चलाएंगी। इससे सवाल उठता है कि क्या नगर की सूरत बदलेगी या फिर धक्कापलेट गाड़ी ही चल पायेगी, लेकिन यह कितने दूर चलेगी कह पाना मुश्किल है।वैसे राजधानी भोपाल में  प्रशासनिक कार्यों के दबाव के साथ-साथ राजनीतिक दबाव भारी रहता है।  निगम को घुन की तरह लगा है भ्रष्टाचार  भोपाल नगर निगम में भ्रष्टाचार की बेल बहुत बड़ी है। क्योंकि इसी की दम पर ही निगम चल रहा है। नगर निगम के कारनामो से अखबार के पन्ने डेली भरे रहते हैं। इस पर लगाम लगाना किसी के बस की बात नहीं है। वे इसको रोकने में कितनी कामयाब होंगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। भोपाल की जनता उनकी ईमानदारी की छवि देखने के लिए तैयार है। देखना यह है कि निगम में पूर्व में जिस तरह महिला अफसरों के साथ हुआ है, उसको रोकने में वे कितनी सफल होंगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा।  माना जा रहा है नई कमिश्नर जिनकी छवि एक ईमानदार अधिकारी की बनी हुई है। वे सिवनी से ट्रांसफर होकर भोपाल आ रही है। सिवनी से उन्हें गाजे- बाजे के साथ विदाई मिल गई है. संभवतः वे सोमवार को पद ग्रहण कर लेंगी। recent visitors 320

भोपाल वन विहार घूमने वाले को बूरी ख़बर: आज से ‘नो-व्हीकल जोन: न कार अंदर जा सकेगी, न बाइक बस; 40 गोल्फ कार्ट से घूम सकेंगे टूरिस्ट

भोपाल वन विहार घूमने वाले को बूरी ख़बर: आज से ‘नो-व्हीकल जोन: न कार अंदर जा सकेगी, न बाइक बस; 40 गोल्फ कार्ट से घूम सकेंगे टूरिस्ट

Bad news for visitors to Bhopal’s Van Vihar: From today, it’s a ‘no-vehicle zone’: no cars, bikes, or buses will be allowed inside; tourists can explore using 40 golf carts. भोपाल । वन विहार नेशनल पार्क आज (1 अक्टूबर) से ‘नो व्हीकल’ जोन हो जाएगा। न कार अंदर जा सकेंगी और न बाइक या बसें । टूरिस्ट 40 गोल्फ कार्ट के जरिए वन विहार घूम सकेंगे। वन विहार में घूमने आने वाले टूरिस्ट कई बार अपनी गाड़ियों के हॉर्न तेज आवाज में बजाते हैं। इससे अन्य पर्यटकों के साथ जानवर भी परेशान होते हैं। इसलिए वन विहार प्रबंधन यह कदम उठाने जा रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वन विहार में ही राज्य स्तरीय वन्य प्राणी सप्ताह की शुरुआत भी करेंगे। हर 10 मिनट में मिलेंगे गोल्फ कार्ट वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रूही हक ने बताया कि वन विहार में भ्रमण के लिए 40 गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इन गोल्फ कार्ट में से 32 गोल्फ कार्ट हॉप ऑन हॉप ऑफ पद्धति संचालन के लिए रहेंगे। वहीं, 8 गोल्फ कार्ट (6 सीटर) पूर्ण रूप से 3 घंटे के लिए बुकिंग पर पर्यटकों को उपलब्ध रहेंगे।गोल्फ कार्ट का संचालन दोनों गेट से 10 मिनट पर लगातार होगा। सभी व्यू पाइंट पर 30 सेकेंड से 1 मिनट के लिए रुकेंगे। इससे पर्यटकों को अपनी स्वेच्छानुसार व्यू पाइंट पर वन्यप्राणियों को देखने का पर्याप्त समय मिलेगा। साइकिल से भी घूम सकेंगे गोल्फ कार्ट के अलावा पैदल भ्रमण, साइकिल, शाकाहारी सफारी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इस बदलाव से वन विहार में पर्यटकों को सशुल्क 150 नई साइकिलें भी उपलब्ध कराएगा। जिससे वन विहार भ्रमण और सुगम बनेगा। अलग-अलग रंग के बैंड भी मिलेंगे विभिन्न प्रकार के माध्यम से भ्रमण करने हेतु पर्यटकों को विभिन्न रंग के बाइओडिग्रेडबल बैंड भी दिए जाएंगे। जिससे किसी भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। पार्किंग के लिए रुपए चुकाने होंगे वन विहार को जहां नो व्हीकल जोन बनाया जा रहा है तो पार्किंग के रूप में पर्यटकों को रुपए भी चुकाने होंगे। चार पहिया वाहनों की पार्किंग के लिए केवल प्रवेश द्वार नंबर-2 पर पार्किंग स्थल बनाया गया है। टूव्हीलर्स के लिए गेट नंबर-1 और 2 दोनों पर ही व्यवस्था रहेगी। recent visitors 115

मनुवादी ताकतों को परास्त किए बिना, भारत में समानता स्थापित नहीं हो सकती: प्रो. रतनलाल

Equality cannot be established in India without defeating Manuwadi forces: Prof. Ratanlal भोपाल। लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा (DRF), मध्यप्रदेश के नेतृत्व में एक दिवसीय ऐतिहासिक ‘मनुवादी संघी फासीवाद विरोधी जन सम्मेलन’ संपन्न हुआ। भोपाल के नार्मदीय भवन में जुटे किसानों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों सहित लगभग 300 प्रगतिशील, जनवादी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से ‘संविधान की रक्षा और फासीवाद को परास्त’ करने का निर्णायक संघर्ष संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन विजय कुमार और आभार सैयद जावेद अख्तर ने किया। सम्मेलन के दौरान क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच (RCF) के साथियों ने क्रन्तिकारी जनगीतों की प्रस्तुति दी। सम्मेलन में मुख्य वक्ताओं ने कहा कि देश इस समय भाजपा/आरएसएस-कॉर्पोरेट फासीवाद की मजबूत गिरफ्त में है, जिसने सामाजिक विभाजन, कॉर्पोरेट लूट और संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण को चरम पर पहुंचा दिया है। आज मनुवादी संघी फासीवाद से लड़ना वक्त की पुकार है। इतिहासकार डॉ. रतनलाल (संस्थापक, अंबेडकरनामा) ने ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत करते हुए कहा कि, “आज की लड़ाई 1927 के महाड़ सत्याग्रह की वैचारिक निरंतरता है। मनुवादी ताकतों को परास्त किए बिना, भारत में समानता स्थापित नहीं हो सकती।” राष्ट्र निर्माण में आदिवासी पुस्तक के लेखक और इतिहासकार डॉ. जितेंद्र मीणा ने आदिवासी अधिकारों पर बात करते हुए कहा, “आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन को लूटा जा रहा है। गोंडवाना और भील प्रदेश की मांग अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि संवैधानिक न्याय की मांग बन चुकी है।” वरिष्ठ नेता बुद्धसेन पटेल ने सभी बहुजन ताकतों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि, “पिछड़े वर्गों को उनकी संख्या के अनुपात में 52% आरक्षण देना संवैधानिक अनिवार्यता है, जिसे सरकार टाल नहीं सकती।” मानवाधिकार कार्यकर्ता और वरिष्ठ एडवोकेट सैयद साज़िद अली ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निंदा की और कहा कि, “ईवीएम हटाओ, मतपत्रों से चुनाव कराओ” की मांग लोकतंत्र को बचाने की पहली शर्त है। सम्मेलन ने अपनी सभी प्रमुख मांगों और प्रस्तावों को शामिल करते हुए भारत की माननीय राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) भी सौंपा, जिसमें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनके तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा के संयोजक मोनू यादव ने घोषणा की कि यह सम्मेलन संघर्ष की रणभेरी है। ‘आरएसएस फासीवाद के खिलाफ व्यापक, एकजुट और मज़बूत जन प्रतिरोध’ खड़ा करने की निर्णायक शुरुआत आज से हो गई है। उन्होंने संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सभी जनवादी ताकतों से ‘जनपथ से न्यायपथ’ तक एकताबद्ध होकर संघर्ष तेज़ करने की पुरजोर अपील की है।  लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा, मध्य प्रदेश के आंनद श्याम ने बताया कि सम्मेलन ने छह सूत्रीय ‘न्याय संकल्प’ पारित किया, जिसमें मौजूदा भाजपा/ आरएसएस की सरकार को चुनौती देने वाली प्रमुख मांगें शामिल हैं। recent visitors 101