दिग्विजय सिंह ने स्वीकार ही किया कि बाबरी मस्जिद कांड के बाद दंगा फसाद उन्हीं ने कराया:मंत्री सारंग

भोपाल खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें दिग्विजय सिंह बाबरी मस्जिद के गिरने के बाद हुए दंगे के बारे में बात कर रहे थे। 1 मिनट 12 सेकेंड के वीडियो में पूर्व सीएम कह रहे हैं ऐसे अनेक मेरे पास उदाहरण हैं, जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी उस समय मैं प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष था, भोपाल शहर में 1947 में भी दंगा नहीं हुआ लेकिन बाबरी मस्जिद गिरने पर दंगा हुआ। लगभग दो हफ्ते तक मैंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में रात बिताई। मैं घर नहीं जाता था। लेकिन हमने दंगा फसाद होने में पूरी कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री ने बाबरी मस्जिद के संदर्भ में आगे कहा कि भोपाल में एक काजी कैम्प है, जहां सलामत सिद्दीकी नामक पार्षद ने उन्हें बताया था कि पुलिस की वर्दी में लोग रात के समय उनके घर आए थे। गोलीबारी होती है, और गरीब के बच्चे मारे जाते हैं बुधवार को शाजापुर में नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने शाजापुर शहर के चोबदारवाड़ी में मुस्लिम समुदाय के सद्भावना सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा, "कई बार शिकायत करने के बाद भी पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती है, वहीं दूसरी तरफ झूठी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। जब लोगों पर अत्याचार बढ़ जाता है, तो गुस्से के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है।" दिग्विजय ने आगे कहा, "दंगे में गरीबों के बच्चे शामिल होते हैं, बड़े नेताओं के बच्चे नहीं। पुलिस के डंडे चलते हैं, गोलीबारी होती है, और गरीब के बच्चे मारे जाते हैं।" कांग्रेस ने इस देश में दंगा फसाद कराने का काम किया इस वीडियो को शेयर करते हुए खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, "दिग्विजय सिंह ने स्वीकार ही किया कि बाबरी मस्जिद कांड के बाद दंगा फसाद उन्हीं ने कराया। वह स्वयं कह रहे हैं कि बाबरी मस्जिद शहीद हुई और उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए दंगा फसाद कराया।" सारंग ने आगे कहा, "यह बयान साफ करता है कि कांग्रेस ने इस देश में दंगा फसाद कराने का काम किया है। दिग्विजय सिंह ने खुद कबूल किया है कि दंगे उन्होंने कराए थे।" दिग्विजय बोले- बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और बीजेपी इसे गलत तरीके से प्रचारित कर रही है। उन्होंने कहा, "मैंने कहा था कि जब प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव था, तब मैंने 15 दिन कांग्रेस के पीसीसी दफ्तर में रहकर हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच समन्वय की कोशिश की थी ताकि दंगा-फसाद न हो।" साथ ही दिग्विजय ने बाबरी मस्जिद के गिरने को लेकर कहा, "अगर आप जबरन किसी धार्मिक स्थल को गिराएंगे, तो लोग क्या कहेंगे? जो सच है, वही बोला।" recent visitors 49

सरला मिश्रा केस की फाइल 28 साल बाद फिर खुलेगी, पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, दिग्विजय सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? जानें मामला

भोपाल मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला 28 साल बाद फिर से खुलने जा रहा है. 1997 में भोपाल स्थित सरकारी आवास में जलने से उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में सरला मिश्रा के भाई ने एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भोपाल कोर्ट के आदेश के बाद सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर से खुलने जा रहा है.  अनुराग ने कहा, सियासी अदावत में बहन की हत्या हुई। सरला की मौत की जांच पर शुरू से अंगुलियां उठती रही हैं। आरोप लगे कि भोपाल की टीटी नगर पुलिस की हत्या को आत्महत्या बताया। पीएम करने वाले डॉक्टर पर आरोप लगे। अब अनुराग ने कहा, उम्मीद है, अब न्याय मिलेगा। जांच के नाम पर कागजी घोड़े : पुलिस ने 7 मार्च 1997 को बयान लिया। एक अन्य बयान 15 फरवरी 2010 को लिया। जांच के आदेश के कोर्ट ने लिखा- पुलिस ने जांच न कर कागजी घोड़े दौड़ाए। सरला जल रही थी, दरवाजे खुले थे: जांच में कहा गया था, जब साक्षी राजीव दुबे घटनास्थल पर पहुंचे तो सरला जल रही है। मकान के दरवाजे खुले थे। कोर्ट ने लिखा है, यह असंभव है। सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए इस मामले में सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल का बहुचर्चित कांड सरला मिश्रा सुर्खियों में रहा है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा का कहना है कि उनकी बहन सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को संदिग्ध अवस्था में जली हुई पाई गई थीं। इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था पुलिस ने उस समय इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, जबकि वो मामला हत्या का था। इसी मामले में दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का नाम भी सामने आया था। ऐसे आरोप थे कि सरला की हत्या राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी। जब सरला मिश्रा का 1997 को निधन हुआ था, तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में भोपाल के टीटी नगर थाने की ओर से पेश खात्मा रिपोर्ट को न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा की आपत्तियों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पलक राय ने टीटी नगर पुलिस को मामले की पुन: जांच कर आरोप-पत्र संबंधित न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। मामला करीब 28 वर्ष पुराना है। 14 फरवरी 1997 को सरला मिश्रा भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में जल गई थीं। उन्हें इलाज के लिए पहले हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ले जाया गया था, जहां 19 फरवरी 1997 को उनकी मौत हो गई। कोर्ट ने कहा- पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां भोपाल कोर्ट की न्यायाधीश पलक राय ने अपने आदेश में कहा कि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान की मेडिकल पुष्टि नहीं की गई। बयान के समर्थन में जो कागज के टुकड़े मिले, उनकी भी स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट भी नहीं लिया गया। परिवार ने इसे हत्या बताया था और कुछ नेताओं पर आरोप भी लगाए थे। साल 2000 में पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी थी। खात्मा रिपोर्ट अगले 19 वर्ष तक कोर्ट में पेश नहीं की गई। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि पहले खात्मा रिपोर्ट में बयान दर्ज हों और फिर कार्रवाई की जाए। इसके बाद भोपाल कोर्ट में सुनवाई चली और अनुराग के बयान दर्ज हुए। भाई ने कहा- हत्या हुई, पुलिस ने माना सुसाइड अनुराग मिश्रा ने बताया- सरला दीदी मेरी सगी बड़ी बहन थी। हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि उनकी हत्या हुई है। पुलिस ने संदिग्ध स्थिति में जला मानकर 309 में केस दर्ज कर लिया और कहा था कि इन्होंने आत्महत्या की है। हम उसी समय के जांच अधिकारी से कहते रहे कि इसमें हत्या हुई है। हमनें लिखकर दिया फिर भी उसकी जांच नहीं हुई। घटना स्थल पर सबसे पहले मेरे माता-पिता पहुंचे थे। उन्हें घटना वाले मकान से बाहर करके ताला लगा दिया था। पुलिस ने माता-पिता और मेरी एक और सगी बड़ी बहन के बयान नहीं लिए। जलते हुए कोई कैसे फोन कर सकता है? अनुराग कहते हैं दीदी के पड़ोसी राजीव दुबे का बयान था कि सरला का मेरे घर फोन आया था कि मैं जल रही हूं। आप आकर मुझे बचाओ। उसी समय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निवास से राजीव दुबे और योगीराज शर्मा को फोन पहुंचता है कि सरला मिश्रा का इलाज कराओ। ये दोनों दो घंटे तक उनको लेकर बैठे रहे। अस्पताल लेकर क्यों नहीं गए? डॉ. योगीराज शर्मा का पुलिस रिकॉर्ड में बयान है कि जब मैं घटना वाले घर पहुंचा तो मकान धुला और पोछा हुआ था। उसकी पुलिस ने जांच क्यों नहीं की। लैंडलाइन फोन की जांच और जब्ती क्यों नहीं की अनुराग मिश्रा ने कहा- बहन के लैंडलाइन की कॉल डिटेल, वह फोन जब्त क्यों नहीं किया? डॉ. सत्पथी ने सारी बातें लिख दीं लेकिन, टेलीफोन का जिक्र ही नहीं किया। पुलिस डायरी में जैसा लिखा कि तत्कालीन एसपी के मौखिक आदेश पर डॉ. सत्पथी घटना की फोरेंसिक जांच के लिए पहुंच गए थे। ये क्यों नहीं बताया कि मौखिक आदेश में क्या कहा गया था। क्या रिपोर्ट बनाना है? बेड पर मिले कागज की जांच क्यों नहीं की भाई का आरोप है कि घटना के बाद हर्ष शर्मा पहुंचे थे उन्होंने अभिमत दिया था कि सरला मिश्रा के बेड पर एक कागज मिला था। उसकी राइटिंग की जांच इसलिए नहीं की क्योंकि मृत्यु पूर्व बयानों में हस्ताक्षर अलग हो जाते। इसलिए पुलिस ने उनके अभिमत को भी नहीं माना। उस समय विधानसभा सत्र में भाजपा के विधायकों ने इस मामले को उठाया था और सीबीआई जांच की मांग की। उसके बाद हम हाईकोर्ट भी गए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में एक रिट याचिका … Read more

दिग्विजय सिंह के आपत्तिजनक टिप्पणी वाले पोस्टर पर हंगामा, लगे आपत्तिजनक पोस्ट

भोपाल/इंदौर वक्फ कानून में बदलाव का विरोध करने को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल व इंदौर में पोस्टर लगाए गए हैं। जिनमें उन्हें वतन का, धर्म का और पूर्वजों का गद्दार बताया गया है। अब इन पोस्टरों को लेकर विवाद छिड़ गया है और कांग्रेस पार्टी ने इन पोस्टरों को लेकर अपनी आपत्ति भी जताई है। शुक्रवार को इस बारे में पुलिस से शिकायत करते हुए कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि वह इन पोस्टरों को लगाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। दरअसल दिग्विजय सिंह के खिलाफ जो पोस्टर लगाए हैं, उनमें छपा है – ‘वक्फ बिल का विरोध करने वाले दिग्विजय सिंह’। पोस्टर में दिग्विजय सिंह की तस्वीर पर एक सील से ठप्पा भी लगाया गया है जिस पर छपा है- ‘वतन के, धर्म के, पूर्वजों के गद्दार।’ इंदौर में लगे इन पोस्टर के नीचे छपवाने वाले के रूप में ‘भारतीय जनता युवा मोर्चा, इंदौर महानगर’ का नाम छपा है। जबकि भोपाल में छापने वाले के बारे में नहीं लिखा गया है। इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा ने इस मामले को लेकर बताया कि महू नाका चौराहा पर लगाए गए इस पोस्टर के खिलाफ उन्होंने छत्रीपुरा पुलिस थाने में शिकायत की है। उन्होंने कहा, ‘पुलिस को दिग्विजय सिंह के खिलाफ ऐसे आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।’ भारतीय जनता युवा मोर्चा की शहर इकाई के अध्यक्ष सौगात मिश्रा ने कहा,‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025, देश का ऐतिहासिक कानून है। इस विषय में दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के दूसरे नेताओं के रुख को लेकर आम लोगों और हमारे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है क्योंकि ये नेता राष्ट्रहित की कभी बात नहीं करते हैं।’ recent visitors 74

मुझे निर्देश दिए गए थे कि मैं आरएसएस के खिलाफ न बोलूं, क्योंकि इससे हिंदू नाराज हो सकते हैं:दिग्विजय सिंह

भोपाल कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पर्दे के पीछे से भाजपा का समर्थन करने वाले कांग्रेस नेताओं पर राहुल गांधी द्वारा एक दिन पहले की गई सख्त टिप्पणी की सराहना की है। उन्होंने कहा कि गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें हिंदुओं के नाराज होने के डर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कुछ नहीं बोलने को कहा गया था। अहमदाबाद में  कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा था कि पार्टी का पहला काम कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के दो समूहों को अलग करना है – पहला जो पार्टी की विचारधारा को अपने दिल में रखते हैं और जनता के साथ खड़े हैं और दूसरे वो जो जनता से कटे हुए हैं, ‘जिनमें से आधे भाजपा के साथ हैं।’ उन्होंने ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की छंटनी करने की आवश्यकता पर बल दिया था तथा सख्त कार्रवाई यहां तक ​​कि निष्कासन की भी चेतावनी दी थी। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने गांधी को उनके बयान के लिए बधाई दी और कहा, "मुझे याद है कि जब मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव प्रचार करने गुजरात गया था, तब मुझे निर्देश दिए गए थे कि मैं आरएसएस के खिलाफ न बोलूं, क्योंकि इससे हिंदू नाराज हो सकते हैं।" दिग्विजय सिंह ने कहा कि आरएसएस के नेतृत्व वाला संघ परिवार हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा कि वह केवल धर्म के नाम पर समुदाय को गुमराह करता है और उनका शोषण करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा, "हिंदू धर्म गुरु शंकराचार्य जी की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और यह आज भी चलन में है। उनमें से कौन सा शंकराचार्य आज भाजपा, आरएसएस का समर्थक है? भाजपा शोषक तत्वों का एक समूह है जिसका एकमात्र उद्देश्य धर्म के नाम पर लोगों को लूटना और सत्ता हासिल करना है।" recent visitors 78

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पीएम पर कसा तंज कहा कि- मोदी निवेश और रोजगार के आंकड़े जनता को बताएं

Former CM Digvijay Singh took a dig at PM and said- Modi should tell the investment and employment figures to the public भोपाल ! पूर्व मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की दिल्ली फ्लाइट में एयर इंडिया के प्लेन में सामने आई टूटी कुर्सी को लेकर, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उनका समर्थन करने के साथ ही कटाक्ष भी किया। सोमवार को इंदौर दौरे पर आए सिंह ने हंसते हुए कहा कि वह भी उसी विमान में सवार थे, परंतु उनकी कुर्सी में कोई खामी नहीं थी। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के संदर्भ में, सिंह ने आरोप लगाया कि कमलनाथ के कार्यकाल के बाद, पीएम मोदी को अपने भाषण में अन्य सभी ग्लोबल समिट्स का पूरा विवरण देना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि सीएम शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल के दौरान कितनी मीटिंग्स हुईं, कितने निवेश समझौते किए गए और कितने लोगों को रोजगार के अवसर मिले इन सभी आंकड़ों का हिसाब क्यों नहीं रखा गया। टूटी कुर्सी की शिकायत करने का कोई मतलब नहींदिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री को विमान में फर्स्ट रो की सीट आवंटित की जाती है, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह एयर इंडिया की त्रुटि है तथा उन्हें उचित सीट प्रदान की जानी चाहिए थी। जहां तक टूटी कुर्सी का सवाल है, उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं कभी-कभार हो ही जाती हैं और शिकायत करने का कोई मतलब नहीं बनता, खासकर एक-डेढ़ घंटे की उड़ान के संदर्भ में। महाकुंभ में पानी को साफ नहीं किया गयाप्रयागराज के महाकुंभ में पानी की गुणवत्ता को लेकर सिंह ने बताया कि यह मामला अब एनजीटी के पास भेजा जा चुका है। हालांकि, विभिन्न लैब रिपोर्ट्स में पानी में मल-मूत्र के अंशों का पता चला है। मुद्दे का मूल यह है कि जब साढ़े सात हजार करोड़ सफाई के लिए खर्च हुए, तो केमिकल डालकर पानी को सुधारने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। ट्रंप भारत का अपमान कर रहेसिंह ने आगे आरोप लगाया कि एक ओर पीएम मोदी ट्रंप को अपना मित्र बताते हैं और प्रशंसा भरी बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे निरंतर भारत का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत जैसा टैरिफ लगाता है और अमेरिका भी समान कदम उठाने लगे, तो इससे हमारे दुग्ध उत्पादक, किसान और अमूल को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पीएम मोदी के अमेरिका में रहते समय, जहाँ अवैध निवास करने वालों को मिलिट्री एयरक्राफ्ट में बेड़ियां बांधकर भेजा गया था, वहीं कई छोटे देशों ने तो अपना विमान भेजने की व्यवस्था भी की थी। ऐसी स्थिति में पीएम मोदी को कड़ी आपत्ति जतानी चाहिए थी। ईवीएम में गड़बड़ी की बात उठाईसिंह ने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी है, जैसा कि मस्क और ट्रंप समेत कई इस बात पर जोर दे रहे हैं, पर पीएम मोदी अपने मित्र की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका मानना है कि चुनाव आयोग अब निरंकुश बन चुका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए आवश्यक नियंत्रण लागू किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में चुनाव से पहले चार वर्षों में 38 लाख मतदाता जोड़े गए, जबकि चुनाव से पूर्व केवल छह महीनों में 42 लाख मतदाताओं की संख्या में वृद्धि देखी गई। यह स्थिति कैसे संभव हुई, यह सवाल उठता है। कांग्रेस के मतदाताओं को निशाना बनाकर वोटरों की संख्या में कटौती की जा रही है, और इसमें कांग्रेस की भी अपनी कमियाँ हैं क्योंकि अब तक बूथ स्तर पर एजेंट नियुक्त नहीं किए गए। बागेश्वर धाम पर बोले धर्म का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग न होबागेश्वर धाम में अस्पताल के भूमिपूजन के अवसर पर, सिंह ने पीएम मोदी तथा बागेश्वर बाबा की सराहना करते हुए कहा कि नर ही नारायण हैं – यही सम्पूर्ण सनातन धर्म का सार भी है। उनका कहना था कि धर्म का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में गरीबों की सहायता करते हुए संस्थागत सुधार किए जाएं, तो इसका प्रभाव कहीं अधिक सकारात्मक होगा। recent visitors 122

प्रयागराज महाकुंभ में स्नान को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बार फिर दिग्विजय सिंह और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आमने-सामने

इंदौर  प्रयागराज महाकुंभ में स्नान को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक बार फिर दिग्विजय सिंह और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आमने-सामने हैं. दरअसल दिग्विजय सिंह द्वारा महाकुंभ को आस्था का इवेंट बनाने संबंधी बयान पर कैलाश विजयवर्गीय ने पलटवार किया है. बुधवार को इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ''दिग्विजय सिंह प्रयागराज में स्नान करने गए यह बड़ी और खुशी की बात है. लेकिन गंगा नदी से निकलते ही उन्होंने फिर वैसा ही बयान दिया. ऐसे बयान देने वाले लोगों के बारे में कहा गया है कि ऐसे लोगों पर कितनी ही गंगा नदी डाल दो उन पर कोई असर नहीं होने वाला. कम से कम गंगा से निकलकर तो कुछ अच्छा बोलना चाहिए.'' इतनी भीड़ आएगी अंदाजा नहीं था विजयवर्गीय ने प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर कहा कि, ''वहां व्यवस्थाएं जबरदस्त हैं. लेकिन इतनी जनता आ जाएगी इसका अंदाजा किसी को नहीं था.'' उन्होंने कहा, ''अनुमान के मुताबिक, 20 से 25 करोड़ लोग आने का अनुमान सबको था. लेकिन अब तक वहां 50 करोड़ से ज्यादा लोग स्नान कर चुके हैं. यह विश्व का सबसे बड़ा सनातन समागम है. इसकी खूबियां भी लोगों को दिखाई देना चाहिए. क्योंकि विश्व में इतना बड़ा मानव समूह कहीं भी दिखाई नहीं देता.''         आज प्रयागराज में मेरे पिता दिग्विजय सिंह जी के साथ महाकुंभ माघ पूर्णिमा के पावन दिन पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। माँ गंगा यमुना सरस्वती, सूर्यदेव भगवान, हमारे पितरों व देवी देवताओं का आशीर्वाद और असीम कृपा सदैव बनी रहे। सज्जन सिंह पर बोले कैलाश विजयवर्गीय गौरतलब है कि, दिग्विजय सिंह माघ पूर्णिमा के दिन अपने पुत्र जयवर्धन सिंह के साथ प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने पहुंचे थे. जहां उन्होंने कहा था कि, ''भाजपा को महाकुंभ जैसे आस्था के विषय को इवेंट नहीं बनना चाहिए.'' इधर कैलाश विजयवर्गीय ने सिख दंगों के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस नेता सज्जन सिंह मामले में कहा सिखों के खिलाफ हिंसा के कारण ही उस दौरान सिख समाज को हिंदू धर्म से अलग करने का प्रयास किया गया. लिहाजा ऐसे मामले के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना चाहिए.'' recent visitors 85

मनरेगा योजना में राज्य में गड़बड़ी और तय नियमों का उल्लंघन किए जाने का दिग्विजय सिंह ने लगाया आरोप

भोपाल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मजदूरों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने वाली मनरेगा योजना में राज्य में गड़बड़ी और तय नियमों का उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में मनरेगा योजना में हो रही व्यापक अनियमितता से अवगत कराया। साथ ही इसमें हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यालय द्वारा शनिवार को दी गई जानकारी में बताया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि मध्यप्रदेश में मनरेगा योजना के तहत कार्यों में अनियमितता की गई है, जो कि भारत सरकार के राजपत्रित अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि व्यवस्था के अनुसार मनरेगा योजनान्तर्गत कराये जाने वाले कार्यों में व्यय की दृष्टि से श्रम सामग्री का अनुपात 60-40 जनपद स्तर पर रखे जाने का प्रावधान है। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि अधिनियम में 60 प्रतिशत मजदूरी का प्रावधान इसलिए किया गया था कि गांव में रहते हुए मजदूरों को अधिकतम कार्य मिल सके और पलायन रुक सके, मध्यप्रदेश में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात का जिक्र करते तो उन्होने कहा वर्ष 2022-23 में 21 जिलों में, 2023-24 में 16 जिलों में एवं इसके अतिरिक्त 2024-25 में प्रदेश के 25 जिलों में इस प्रावधान का खुला उल्लंघन हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए लिखा कि इस वजह से ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है और सामग्री के फर्जी बिल वाउचर पर भुगतान हो रहा है। इस तरह की अनियमितता से मजदूरों के अधिकार पर कुठाराघात हो रहा है। यह एक अत्यंत गंभीर प्रकरण है जो कि अधिनियम में दिए गए प्रावधानों के विरुद्ध है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करके दोषी अधिकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करें, जिससे मजदूरों के हितों की रक्षा हो सके।   recent visitors 88