राहुल ने लॉन्च किया ‘सत्याग्रह’, अब डिजिटल मंच से लोगों के मुद्दों की लड़ाई सड़क से संसद तक

Rahul launches ‘Satyagraha’; the fight for people’s issues moves from the streets to Parliament via a digital platform. नई दिल्ली। गांधी जयंती के अवसर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नया डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘सत्याग्रह’ लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म देशभर के उन नागरिकों को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा जो शांतिपूर्ण प्रतिरोध, सत्य और अहिंसा के जरिए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं और सत्ता के सामने सच बोलना चाहते हैं। यहां दर्ज होने वाले मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष राहुल की ओर से आवश्यकता अनुसार कदम उठाए जाएंगे। राहुल ने लोगों की आवाज को सड़क से संसद तक सुनाने का वादा किया है। ‘सत्य को दबाया जा रहा, अब नए सत्याग्रह का समय’राहुल गांधी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सच को दबाया जा रहा है और लोग अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के रूप में जनता की लड़ाई उनकी अपनी लड़ाई है। उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि अब नए सत्याग्रह का समय आ गया है और नागरिक अपने संघर्षों को इस प्लेटफॉर्म के जरिए साझा करें। राहुल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर यह उनकी जिम्मेदारी है कि जहां सच को कुचला जा रहा है, वहां लोगों को उसका विरोध करने में मदद करूं। सच महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी ज़रूरी है कि हम देश के हर कोने में उसके लिए लड़े। इन प्रमुख मुद्दों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच:जन-अधिकारों की रक्षा: जमीन के हक, महिलाओं के अधिकार, दलितों, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई।छात्र व युवा: शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं पर संघर्षरत युवाओं की आवाज।सत्याग्रह मैप: देश के कोने-कोने में चल रहे जन-आंदोलनों और स्थानीय लड़ाइयों को एक नक्शे पर संगठित कर राष्ट्रीय पहचान दी जाएगी।कैसे काम करेगा यह प्लेटफॉर्म?समस्या दर्ज करें: नागरिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध फॉर्म के जरिए अपनी समस्याएं और स्थानीय मुद्दे साझा कर सकेंगे। नक्शे पर दिखेगा ‘पिन’: साझा किया गया हर मुद्दा ‘सत्याग्रह मैप’ पर एक डिजिटल पिन के रूप में प्रदर्शित होगा। सड़क से संसद तक पहल: मुद्दे की गंभीरता और प्राथमिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि जन-समस्याओं को संसद तक पहुंचाया जा सके। recent visitors 13

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

Modi’s strong attack on the opposition said – I am a Shiv Bhakt, I swallow poison: The public is my God, if not here, then where will the voice of the soul come out पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के दरांग में कहा- जब भारत सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया था, उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था- मोदी, नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, सारा जहर निगल लेता हूं, मुझे कितनी भी गालियां दें। लेकिन बेशर्मी के साथ जब किसी और का अपमान होता है, तो मुझसे रहा नहीं जाता है। पीएम बोले- मेरे लिए तो मेरी जनता ही भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज वहां नहीं निकलेगी तो कहां निकलेगी, यही मेरे मालिक हैं, पूजनीय हैं, 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के असम दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बीएससी नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन और शिलान्यास किया। जिसकी लागत 6300 करोड़ है। शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम ने खानापारा में पशु चिकित्सा मैदान में महान गायक भूपेन हजारिका की विशेष श्रद्धांजलि सभा में भी मौजूद रहे। recent visitors 144

जो कल गलत था, आज सही कैसे? जीएसटी विवाद पर मोदी सरकार जनता से क्या छिपाना चाहती है?

जो कल गलत था, आज सही कैसे? जीएसटी विवाद पर मोदी सरकार जनता से क्या छिपाना चाहती है?

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? Read more: प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; … Read more

डिग्री मिलती है, नौकरी नहीं मोदी सरकार क्या सिर्फ सपना बेचती है?

डिग्री मिलती है, नौकरी नहीं मोदी सरकार क्या सिर्फ सपना बेचती है?

You get a degree, but not a job. Does the Modi government only sell dreams? नई दिल्ली। Modi government only sell dreams? देश के लाखों युवाओं के लिए इंजीनियरिंग एक समय में भविष्य की गारंटी थी। आज यही पढ़ाई एक बेरोजगारी का टिकट बनकर रह गई है। सवाल उठता है क्या मोदी सरकार को इसका अंदाज़ा है, या जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है? पिछले दस वर्षों में IT सेक्टर की शुरुआती सैलरी में कोई ठोस वृद्धि नहीं हुई, जबकि महंगाई, फीस और रहन-सहन का खर्चा लगातार आसमान छूता रहा। एक इंजीनियर बनने के लिए छात्र 4 साल और लाखों रुपये खर्च करता है, और बदले में उसे मिलता है। 15-25 हज़ार की नौकरी, वो भी किस्मत से। मोदी सरकार, जिसने “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “मेक इन इंडिया” जैसे नारों से युवाओं को सपने दिखाए थे, अब उन्हीं युवाओं को बिना दिशा, बिना नीति और बिना सहारे के छोड़ चुकी है। न नई नौकरियों का ठोस रोडमैप, न तकनीकी शिक्षा को लेकर कोई नीति सुधार। जिस सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को बीजेपी ने कभी अपनी राजनीतिक ताकत का आधार बनाया था, आज उसे उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। मोदी सरकार के शासन में: IT सेक्टर में स्थिरता गायब हो गई है Modi government only sell dreams?निजी संस्थानों को बिना रेगुलेशन के लूट की छूट हैशिक्षा से लेकर रोजगार तक, हर जगह नीतिगत ठहराव और दिशाहीनता हैऔर सरकार केवल GDP के खोखले आंकड़ों से संतोष जता रही है किसका भला हो रहा है GDP से? Modi government only sell dreams?जब लाखों इंजीनियर बेरोजगार हैं, जब टेक्निकल डिग्रियां बेअसर हो चुकी हैं, जब कंपनियां सैलरी बढ़ाने को तैयार नहीं, तब यह ग्रोथ किसके लिए है? सरकार अगर युवाओं के भविष्य के प्रति गंभीर है तो उसे यह साफ़ करना होगाक्या इंजीनियरिंग अब भी भविष्य है, या ये सिर्फ़ बेरोजगारी की ट्रेनिंग है? अगर जवाब नहीं है, तो यह देश के करोड़ों परिवारों को साफ़-साफ़ बताया जाए।अगर जवाब हाँ है, तो उसकी नीति और गारंटी कहां है? आज देश का युवा पूछ रहा हैमोदी सरकार, जवाब दो। recent visitors 147

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पीएम पर कसा तंज कहा कि- मोदी निवेश और रोजगार के आंकड़े जनता को बताएं

Former CM Digvijay Singh took a dig at PM and said- Modi should tell the investment and employment figures to the public भोपाल ! पूर्व मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की दिल्ली फ्लाइट में एयर इंडिया के प्लेन में सामने आई टूटी कुर्सी को लेकर, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उनका समर्थन करने के साथ ही कटाक्ष भी किया। सोमवार को इंदौर दौरे पर आए सिंह ने हंसते हुए कहा कि वह भी उसी विमान में सवार थे, परंतु उनकी कुर्सी में कोई खामी नहीं थी। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के संदर्भ में, सिंह ने आरोप लगाया कि कमलनाथ के कार्यकाल के बाद, पीएम मोदी को अपने भाषण में अन्य सभी ग्लोबल समिट्स का पूरा विवरण देना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि सीएम शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल के दौरान कितनी मीटिंग्स हुईं, कितने निवेश समझौते किए गए और कितने लोगों को रोजगार के अवसर मिले इन सभी आंकड़ों का हिसाब क्यों नहीं रखा गया। टूटी कुर्सी की शिकायत करने का कोई मतलब नहींदिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री को विमान में फर्स्ट रो की सीट आवंटित की जाती है, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह एयर इंडिया की त्रुटि है तथा उन्हें उचित सीट प्रदान की जानी चाहिए थी। जहां तक टूटी कुर्सी का सवाल है, उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं कभी-कभार हो ही जाती हैं और शिकायत करने का कोई मतलब नहीं बनता, खासकर एक-डेढ़ घंटे की उड़ान के संदर्भ में। महाकुंभ में पानी को साफ नहीं किया गयाप्रयागराज के महाकुंभ में पानी की गुणवत्ता को लेकर सिंह ने बताया कि यह मामला अब एनजीटी के पास भेजा जा चुका है। हालांकि, विभिन्न लैब रिपोर्ट्स में पानी में मल-मूत्र के अंशों का पता चला है। मुद्दे का मूल यह है कि जब साढ़े सात हजार करोड़ सफाई के लिए खर्च हुए, तो केमिकल डालकर पानी को सुधारने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। ट्रंप भारत का अपमान कर रहेसिंह ने आगे आरोप लगाया कि एक ओर पीएम मोदी ट्रंप को अपना मित्र बताते हैं और प्रशंसा भरी बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे निरंतर भारत का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत जैसा टैरिफ लगाता है और अमेरिका भी समान कदम उठाने लगे, तो इससे हमारे दुग्ध उत्पादक, किसान और अमूल को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पीएम मोदी के अमेरिका में रहते समय, जहाँ अवैध निवास करने वालों को मिलिट्री एयरक्राफ्ट में बेड़ियां बांधकर भेजा गया था, वहीं कई छोटे देशों ने तो अपना विमान भेजने की व्यवस्था भी की थी। ऐसी स्थिति में पीएम मोदी को कड़ी आपत्ति जतानी चाहिए थी। ईवीएम में गड़बड़ी की बात उठाईसिंह ने कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी है, जैसा कि मस्क और ट्रंप समेत कई इस बात पर जोर दे रहे हैं, पर पीएम मोदी अपने मित्र की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका मानना है कि चुनाव आयोग अब निरंकुश बन चुका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए आवश्यक नियंत्रण लागू किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में चुनाव से पहले चार वर्षों में 38 लाख मतदाता जोड़े गए, जबकि चुनाव से पूर्व केवल छह महीनों में 42 लाख मतदाताओं की संख्या में वृद्धि देखी गई। यह स्थिति कैसे संभव हुई, यह सवाल उठता है। कांग्रेस के मतदाताओं को निशाना बनाकर वोटरों की संख्या में कटौती की जा रही है, और इसमें कांग्रेस की भी अपनी कमियाँ हैं क्योंकि अब तक बूथ स्तर पर एजेंट नियुक्त नहीं किए गए। बागेश्वर धाम पर बोले धर्म का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग न होबागेश्वर धाम में अस्पताल के भूमिपूजन के अवसर पर, सिंह ने पीएम मोदी तथा बागेश्वर बाबा की सराहना करते हुए कहा कि नर ही नारायण हैं – यही सम्पूर्ण सनातन धर्म का सार भी है। उनका कहना था कि धर्म का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में गरीबों की सहायता करते हुए संस्थागत सुधार किए जाएं, तो इसका प्रभाव कहीं अधिक सकारात्मक होगा। recent visitors 123

मध्यप्रदेश शासन मोदी और अमित शाह के हवाले, सीएम मोहन बने कठपूतली, सभी नेताओं को किया दरकिनार

मध्य प्रदेश में जिला अध्यक्षों के नामों पर रायशुमारी लगभग पूरी होने को है। वहीं दिल्ली में भी संगठन पर्व को लेकर आज रविवार से दो दिवसीय बैठकों का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हो रही इन बैठकों में राज्यवार संगठन चुनावों की प्रगति और स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक ही नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक में जिला अध्यक्षों को लेकर नई गाइडलाइन तय की जा सकती है। वहीं इस बार जिला अध्यक्षों के रूप में कई महिला चेहरे भी कमान संभाल सकते हैं। बता दें कि दिल्ली बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद, प्रदेश चुनाव प्रभारी समेत प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल हुए हैं। दरअसल, संगठन में एक बड़ा तबका ऐसा है जो मांग कर रहा है कि जो 5 साल तक जिला अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, उन जिला अध्यक्षों को रिपीट नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नए चेहरों को जिला अध्यक्ष होने का अवसर मिलना चाहिए। इधर कुछ जिलाध्यक्ष चाहते हैं कि कुछ व्यक्तियों को जिला अध्यक्ष के रूप में दोबारा मौका दिया जाना चाहिए। इस तबके का तर्क है कि ये वे चेहरे हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बड़ी सफलता मिली है, उनका कार्यकाल निर्विवाद और उपलब्धियों भरा रहा है तो उन्हें दोबारा मौका मिलना चाहिए। जिला अध्यक्ष चुनाव को लेकर भाजपा दो तबकों में बंट गई है। वहीं मध्य प्रदेश के भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मसले पर फिलहाल कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं। उनका कहना है कि ये मसला अब राष्ट्रीय स्तर की बैठक में ही स्पष्ट होगा। नई नीति बनी तो नए चेहरे सामने आ सकते हैं या चुनावों में भाजपा की भारी सफलता का श्रेय लेने वालों को ही दोबारा मौका मिल सकता है। बता दें कि शनिवार तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिलाध्यक्ष के लिए रायशुमारी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वहीं कई जिलों में रायशुमारी की गई, इसलिए दिनभर प्रदेश कार्यालय से लेकर भाजपा के जिला कार्यालयों में गहमागहमी का दौर बना रहा। जानकारी के मुताबिक 1 जनवरी से 3 जनवरी के बीच जिला अध्यक्षों के 3 नामों का अंतिम पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद अंतिम नामों की फाइनल सूची लिफाफे में बंद कर केंद्रीय संगठन को भेज दी जाएगी। वहीं केंद्रीय संगठन 5 जनवरी के बाद इसे कभी भी जारी कर देगा। भाजपा की नई रणनीति के मुताबिक अब तक जो तय हुआ है उसके हिसाब से कोई भी जिलाध्यक्ष 60 साल से ज्यादा उम्र का नहीं होगा। वहीं लगभग 25 फीसदी जिलाध्यक्ष के पदों पर महिलाएं नजर आ सकती हैं। यानी कुल 60 जिलाध्यक्षों में से 15 जिलाध्यक्ष के रूप में महिलाओं को मौका मिल सकता है। recent visitors 392

कमलनाथ ने मोदी सरकार को लिया आड़े-हाथ, आयुष्मान योजना को बताया सफेद हाथी

भोपाल। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना गरीबों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। केंद्र के दावों के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित करोड़ों गरीब अपना मुफ्त इलाज करवा रहे हैं। लेकिन इस दावे पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आयुष्मान योजना को ‘सफेद हाथी’ बताया और कहा कि 150 से ज्यादा बीमारियों को निजी अस्पताल में इलाज से बाहर कर दिया गया है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आयुष्मान योजना धीरे-धीरे सफेद हाथी बनती जा रही है। मध्य प्रदेश में 196 बीमारियों को निजी अस्पतालों में इलाज से बाहर कर दिया गया है। दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में उपचार की समुचित व्यवस्था नहीं है। मलेरिया, मोतियाबिंद का ऑपरेशन, छोटे बच्चों की बीमारी, बुजुर्गों की कई बीमारियां निजी अस्पतालों में इलाज से बाहर कर दी गई हैं।” कमलनाथ ने आरोप लगाया कि “बड़ी संख्या में बीमारियों को निजी अस्पतालों में उपचार से बाहर करने से आयुष्मान कार्ड धारक उपचार कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। मध्य प्रदेश पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में निचले पायदान पर है और उस पर आयुष्मान कार्ड का अप्रभावी हो जाना लोक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत चिंता का विषय है।” उन्होंने आगे कहा, “स्वास्थ्य की रक्षा करना और अच्छा उपचार कराना हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि इस विषय में गंभीरता से विचार करें और एक कमेटी बनाकर बहुत सारी बीमारियों को दोबारा निजी अस्पतालों में उपचार के लिए खोला जाए।” कमलनाथ ने आगे लिखा कि जो अस्पताल आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं, उन पर निश्चित तौर पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं कि मध्य प्रदेश के जरूरतमंद नागरिक उपचार से वंचित कर दिए जाएं। recent visitors 145