संवैधानिक संस्थाओं का अपमान और झूठ-फरेब की राजनीति कांग्रेस की पुरानी आदत : राजपाल सिंह सिसौदिया

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कांग्रेस नेत्री कुमारी शैलजा की पत्रकार-वार्ता पर दी प्रतिक्रिया कानून का सामना करने से क्यों घबरा रहा कांग्रेस का शाही परिवार:  राजपाल सिंह सिसौदिया संवैधानिक संस्थाओं का अपमान और झूठ-फरेब की राजनीति कांग्रेस की पुरानी आदत : राजपाल सिंह सिसौदिया -नेशनल हेराल्ड मामले में चोरी और सीनाजोरी कर रही कांग्रेस पार्टी – राजपाल सिंह सिसौदिया भोपाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कांग्रेस नेत्री कुमारी शैलजा की पत्रकार-वार्ता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा झूठ, छल-कपट की राजनीति करती रही है। नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर उसका विरोध चोरी और सीनाजोरी को दर्शाता है। इस मामले में कांग्रेस के लोग कभी ईडी और आयकर के दफ्तर पर प्रदर्शन करते हैं, तो कभी इन संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने के लिए इन पर सवाल उठाते हैं। सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की चार्जशीट में श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम आना पूरी तरह से तकनीकी और कानूनी मामला है। इसलिए सोनिया और राहुल गांधी को तकनीकी और कानूनी आधार पर अपना पक्ष अदालत में रखना चाहिए, लेकिन समझ में नहीं आता कि कांग्रेस का शाही परिवार इस मामले में कानून का सामना करने से घबरा क्यों रहा है? आरोप लगाने से पहले आत्मविश्लेषण करे कांग्रेस भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले की शुरुआत 2012 में हुई थी, उस समय देश में कांग्रेस की ही सरकार थी। एक जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 2013 में इस मामले में सुनवाई शुरू की और 2013 में ही केस दर्ज हुआ। उस समय देश में कांग्रेस की ही सरकार थी। ऐसे में ईडी की चार्जशीट में श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सैम पित्रोदा आदि के जो नाम आए हैं, तो इन नामों को कौन सामने लाया? मोदी सरकार पर आरोप लगाने की बजाय कांग्रेस पार्टी को यह आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि इन लोगों के खिलाफ किसने ये षडयंत्र रचा था? कार्पोरेट षडयंत्र की परिणति है नेशनल हेराल्ड मामला भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड अखबार 1937 में शुरू हुआ और 5000 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इसके शेयरहोल्डर थे। 2008 में नेशनल हेराल्ड बंद हो गया।  उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड रुपए का लोन इस अखबार को दिया। नेशनल हेराल्ड की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी, तो कार्पोरेट षडयंत्र करके यंग इंडिया नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें 38-38 प्रतिशत शेयर श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी के थे। बाकी मोतीलाल वोरा व अन्य लोगों के थे। कांग्रेस एक पॉलीटिकल पार्टी है और यह जानना जरूरी है कि एक पॉलीटिकल पार्टी किसी प्राइवेट बॉडी को फंड कैसे दे सकती है? इसके बाद नेशनल हेराल्ड के 90 करोड़ के शेयर यंग इंडिया कंपनी को ट्रांसफर कर दिए गए, जिसके शेयर होल्डर्स श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी है। इस तरह यह पूरी संपत्ति एक परिवार के हाथ में आ गई। यह बताया गया था कि यंग इंडिया एक चैरिटेबल संस्था है, लेकिन यह क्या चैरिटी करती है, इसका किसी को कुछ नहीं पता। इस तरह से जो अखबार आजादी के आंदोलन में लड़ने वाले लोगों की आवाज को ताकत देने के लिए स्थापित किया गया था, उसे नेहरू खानदान की जागीर बना दिया। स्वतंत्रता सेनानियों ने किया था विरोध भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड के स्वामित्व वाली कंपनी ऐसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की स्थापना देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने की थी। इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शेयर होल्डर्स ने कंपनी के अधिग्रहण का विरोध किया था, आपत्ति भी दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि शेयर धारकों से पूछे बिना कंपनी को किसी को भी कैसे दे दिया गया? उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता जी ने तो अधिकारिक रूप से कहा था कि नेशनल हेराल्ड के लिए मैंने मेहनत करके पार्टी कार्यकर्ताओं से पैसा जुटाया था और यह अखबार देश की आवाज उठाने के लिए स्थापित किया गया था। लेकिन इसे नेहरू खानदान की आवाज कैसे बना दिया गया? लेकिन कांग्रेस के एक परिवार के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विरोध तथा आपत्तियों की भी परवाह नहीं की गई। recent visitors 36

आम लोगों के लिए बड़ी खबर: गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने नए नियम किए लागू

नई दिल्ली LPG सिलेंडर आज के समय में सभी लोगों के लिए बड़ी जरूरत बन चुका है। गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार आए दिन राशन कार्ड व गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में बदलाव करती रहती है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि, केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर को लेकर नए नियम पूरे देश में लागू कर दिए हैं, जिनका असर सभी वर्गों पर पड़ेगा। अगर आप भी गैस सिलेंडर भरवाने जा रहे हैं तो पहले लागू किए नए नियम जान लें। ये नियम केंद्र सरकार की योजना राशन कार्ड और गैस सिलेंडर 2025 के लिए 21 अप्रैल 2025  से शुरू हो रहे हैं। आपको बता दें कि इस योजना की अवधि 21 अप्रैल से 31 दिसंबर 2028 तक है, जिसमें प्रति परिवार 6-8 गैस सिलेंडर हर वर्ष मिलेंगे।  गैस सिलेंडर बुकिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। जारी किए गए नियमों के तहत गैस सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी व सब्सिडी प्रक्रिया को डिजीटल कर दिया गया है। KYC अपडेट करवाना जरूरी अब गैस सिलेंडर की बुकिंग से पहले उपभोक्ता को अपनी KYC अपडेट करवानी होगी। इसके लिए उपभोक्ता को अपना आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर व अन्य जानकारी एजेंसी को अपडेट करवानी होगी। इसके लिए आपका आधार नंबर मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए। जिस उपभोक्ता का KYC अपडेट नहीं होगा उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। OTP वेरिफिकेशन जरूरी बुकिंग के बाद गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए नियम लागू हुआ है। दरअसल, गैस सिलेंडर की डिलीवरी की दौरान OTP वेरिफिकेशन जरूरी है। आपको बता दें कि ये OTP आपको गैस सिलेंडर बुकिंग के दौरान आया है, जिसे डिलीवरी ब्वॉय को देना होता है। अगर कोई उपभोक्ता अपना OTP नहीं देता हो उसे सिलेंडर नहीं मिलेगा। सब्सिडी अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के बाद तीसरा नियम लागू होता सब्सिडी पर। गैस सिलेंडर की सब्सिडी का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता का बैंक खाता, आधार व गैस कनेक्श लिंक होना चाहिए। बता दें कि सब्सिडी की रक्म में सरकार समय-समय पर बदलाव कर सकती है। इसकी कोई भी रकम तय नहीं है। ये भी बता दें कि जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर बुक करवाने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। नियमों के फायदे लागू किए कए नियमों के सबसे बड़ा फायदा ये है कि, सब कुछ डिजिटल होने से फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है। वहीं OTP से गलत डिलीवरी व चोरी का कोई डर नहीं रहेगा। इसके साथ ही सब्सिडी सीधा उपभोक्ता के खाते में आ है। जरूरी दस्तावेज मोबाइल नंबर आधार कर्ड सब्सिडी के लिए इंकम सर्टीफिकेट बैंक खाता गैस कनेक्शन बुक व e-KYC अपडेट।   recent visitors 36

प्रयागराज की बिटिया शक्ति दूबे बनीं UPSC टॉपर, IAS बनकर करेंगी देश की सेवा

 नईदिल्ली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज, 22 अप्रैल को बहुप्रतीक्षित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2024 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं. जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब अपना परिणाम UPSC की आधिकारिक वेबसाइट [upsc.gov.in] पर देख सकते हैं. इस बार सीएसई परीक्षा में पहला स्थान प्रयागराज की रहने वाली शक्ति दुबे ने हासिल किया है. वहीं, दूसरे स्थान पर हर्षिता गोयल रही हैं. तीसरे स्थान पर Donre Archit Parag, चौथे स्थान पर Shah Margi Chirag रहे हैं. पांचवें स्थान पर आकाश गर्ग, छठे स्थान पर कोमल पूनिया, सातवां स्थान आयूषी बंसल का है. आप नीचे देख सकते हैं कि इस बार कौन-कौन टॉपर्स रहे हैं… UPSC ने यह फाइनल रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया है, जिसमें उन उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में नियुक्ति के लिए चुना गया है. यह सूची आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है. कुल 1009 कैंडिडेट्स ने पास किया UPSC संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 में कुल 1,009 उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए चुना गया है. इन उम्मीदवारों की नियुक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और अन्य केंद्रीय सेवाओं (ग्रुप A और B) के पदों पर की जाएगी. चयनित उम्मीदवारों में विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थी शामिल हैं, जिनमें 335 सामान्य वर्ग, 109 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), 318 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 160 अनुसूचित जाति (SC) और 87 अनुसूचित जनजाति (ST) से हैं. दिव्यांग श्रेणी से 45 उम्मीदवारों का चयन इस बार दिव्यांग श्रेणी (PwBD) के तहत भी कुल 45 उम्मीदवारों का चयन हुआ है, जिनमें 12 PwBD-1 (दृष्टिबाधित), 8 PwBD-2 (श्रवण बाधित), 16 PwBD-3 (चलने-फिरने में असमर्थता) और 9 PwBD-5 (अन्य दिव्यांगता) के अंतर्गत आते हैं. UPSC की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक माना जाता है. हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में भाग लेते हैं, लेकिन चयन कुछ हजारों का ही होता है.   यह परीक्षा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS) और अन्य ग्रुप A और B सेवाओं में चयन के लिए आयोजित की जाती है.    प्रयागराज की बिटिया शक्ति दुबे की UPSC टॉपर बनने की कहानी प्रयागराज की रहने वालीं शक्ति दुबे ने ऑल इंडिया टॉप किया है। दूसरे नंबर पर हर्षिता गोयल हैं। तीसरा स्‍थान डोंगरे अर्चित पराग का है। यूपीएससी की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हर साल देश भर से लाखों अभ्‍यर्थी हिस्‍सा लेते हैं। मुख्‍य परीक्षा में सफल होने वाले लगभग 2845 उम्‍मीदवारों को इंटरव्‍यू के लिए बुलाया गया था। शक्ति दुबे ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बायोकैमेस्‍ट्री में एमएससी की है। 2018 में पोस्‍ट ग्रेजुएट होने के बाद शक्ति दुबे ने सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। सात सालों की 'तपस्‍या' के बाद उन्‍होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर ली है। उनकी सफलता पर घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं है। शक्ति दुबे ने अपनी सफलता का श्रेय घरवालों को दिया है। शक्ति दुबे ने वैकल्पिक विषय के रूप में राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध के साथ परीक्षा पास की है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में बीएससी किया है। recent visitors 49

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर बैन 1 से 30 मई तक हटा रहेगा, होंगे थोकबंद तबादले

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में हुई कैबिनेट बैठक में कई निर्णय लिए गए। बैठक में तबादला नीति पर बड़ा फैसला हुआ। तय हुआ है कि प्रदेश में 1 से 30 मई तक तबादले होंगे। मुख्यमंत्री ने नीति तैयार करने के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। अगली कैबिनेट बैठक में तबादला नीति 2025 प्रस्तुत की जाएगी। टाइगर बफर जोन में होंगे 145 करोड़ के विकास काम, दुर्घटनाओं में आएगी कमी  कैबिनेट में फैसला लिया गया कि टाइगर बफर जोन में मुठभेड़ के चलते दुर्घटनों को कम करने के लिए 145 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए जाएंगे। कैबिनेट को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने ट्रांसफर पॉलिसी अगले मंत्री परिषद में लाने के निर्देश दिए हैं। सीएम मोहन यादव ने कहा कि 1 मई से 31 मई तक ट्रांसफर प्रभावी रहेगी। ग्वालियर में पहला टेलीकॉम मेनिफेक्चरिंग जोन सीएम मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मेनिफेक्चरिंग जोन बन सके। इसके लिए राज्य शासन ने अपनी सहमति भारत सरकार को भेज दी है। भारत सरकार की स्वीकृति के बाद 12 हजार करोड़ के निवेश की संभावना है। इससे 5 हजार रोजगार के अवसर बनेंगे। गेहूं उपार्जन में 175 रुपए बोनस राशि जोड़ी सीएम मोहन यादन ने यह भी बताया कि गेंहू उपार्जन 50 लाख मैट्रिक टन हो चुका है। इसमें जो 2425 रुपए समर्थन मूल्य है, इसमें 175 रुपए बोनस का जोड़ा गया है। इस तरह प्रति क्विंटल 2600 रुपए में का भुगतान किया जाएगा। किसानों ने अपनी उपज को बढ़चढ़ खरीदी केंद्र में पहुंचाया है। इंदौर में 27 अप्रैल को एमपीटेक कॉन्क्लेव – 27 अप्रैल को इंदौर में एमपीटेक कॉन्क्लेव होगी। 500 से अधिक कंपनियां भाग लेगीं। – किसानों के खातों में 10 हजार 562 करोड़ रुपए की राशि भेजी जा चुकी है। – 5 मई तक किसानों से 60 लाख मैटिक टन गेहूं का उपार्जन हो जाएगा। – सीएम मोहन यादव ने ग्रीष्म काल में पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। – सीएम यादव ने सभी मंत्रियों को पेयजल की व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कैबिनेट के अन्य अहम फैसले     मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कन्यादान एवं निकाह योजना में संशोधन किया गया है। अब न्यूनतम 11 और अधिकतम 200 जोड़ों के ही विवाह होंगे।     सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में होने वाली व्यवस्था को देखते हुए योजना में संशोधन का फैसला लिया गया है। 49 हजार रुपये सहायता राशि सरकार देती है और 6000 रुपए आयोजन खर्च के रूप में संबंधित संस्था को दिए जाते हैं। मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन     मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर आसान बना दिया गया है। कल्याणी महिला (विधवा महिला) सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के विवाह पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती है।     प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण सशक्तिकरण ने बताया कि प्रदेश में निवासरत कल्याणी बहनों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2018 से मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना संचालित की जा रही है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में आवेदन कर खुद का उद्योग कर सकते हैं स्थापित प्रदेश के शिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिये मध्यप्रदेश शासन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना प्रारंभ की गई है। योजनान्तर्गत युवाओं को स्वयं का उद्योग सेवा/व्यवसाय उद्यम स्थापित करने हेतु बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दर पर कोलेटरल फ्री लोन उपलब्ध कराया जाएगा। योजनान्तर्गत उद्योग क्षेत्र की इकाइयों स्थापित किये जाने हेतु परियोजना लागत राशि 50 हजार से 50 लाख रुपये तक की परियोजना प्रस्तुत की जा सकती है। इसी प्रकार सेवा क्षेत्र/खुदरा व्यवसाय क्षेत्र की इकाइयों स्थापित किये जाने हेतु परियोजना लागत राशि 50 हजार से 25 लाख रुपये लाख तक की परियोजना प्रस्तुत की जा सकती है। मुख्य उद्देश्य     गरीब परिवार की बेटियों की शादी में मदद करना     शादी को गरिमा के साथ संपन्न कराना     दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों पर लगाम लगाना     महिलाओं को सशक्त बनाना और आर्थिक सुरक्षा देना     सामूहिक विवाह को बढ़ावा देकर खर्चों को कम करना मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के फायदे     सरकार द्वारा कुल 55,000 रुपये की सहायता     11,000 रुपये वधू के नाम अकाउंट पेयी चेक के रूप में     38,000 रुपये का घरेलू सामान     6,000 रुपये आयोजक को सामूहिक विवाह आयोजन के लिए कौन ले सकता है योजना का लाभ?     लड़की मध्य प्रदेश की निवासी होनी चाहिए     लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल या अधिक होनी चाहिए     तलाकशुदा या विधवा महिलाएं भी पात्र (प्रमाण पत्र जरूरी)     आय सीमा अब हटा दी गई है     शादी सामूहिक विवाह समारोह में ही करनी होगी इन महिलाओं को नहीं मिलेगा योजना का लाभ     गैर निवासी लड़कियाँ     18 साल से कम उम्र की लड़कियाँ     जो तय तारीख पर सामूहिक विवाह के बजाय अलग से शादी करें क्या-क्या सामान मिलता है योजना में? क्र.     सामग्री     मानक 1     एलपीजी कनेक्शन व चूल्हा     उज्ज्वला योजना के तहत 2     32 इंच कलर टीवी     ISI मार्क 3     रेडियो     ISI मार्क 4     स्टील अलमारी (5.5 फीट)     20 गेज 5     6 कुर्सियों का सेट टेबल के साथ     ISI मार्क 6     पलंग (4×6 फीट)     मजबूत निर्माण 7     रजाई, गद्दा, तकिया, चादर     रूई की मोटाई 3.5 इंच 8     चांदी के गहने (पायल, बिछिया, मंगलसूत्र आदि)     70% टंच चांदी 9     सिलाई मशीन     ISI मार्क 10     टेबल फैन     ISI मार्क 11     दीवार घड़ी     ISI मार्क 12     डाइनिंग टेबल (6 कुर्सियों सहित)     ISI मार्क 13     स्टील के 51 बर्तनों का सेट     20 गेज 14     प्रेशर कुकर     ISI मार्क 15     वधू के वस्त्र व मेकअप सामग्री     अच्छी गुणवत्ता जरूरी दस्तावेज     आधार कार्ड (वर-वधू व माता-पिता का)     जन्म प्रमाण पत्र (लड़के और लड़की का)     समग्र आईडी नंबर     जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)     लड़की के बैंक खाते की जानकारी     पासपोर्ट साइज फोटो     मोबाइल नंबर     मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि विधवा)     तलाक के कागज़ (यदि तलाकशुदा)     श्रमिक कार्ड (यदि पंजीकृत श्रमिक है) कैसे करें आवेदन? STEP-1     सामूहिक विवाह की तय तारीख से 15 दिन पहले आवेदन करें … Read more

सीवेज लाइन बिछाने के काम में कि सर्वेक्षण के दौरान GI टैगिंग तकनीक का उपयोग किया जाए: मंत्री विश्वास सारंग

भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने  नरेला विधानसभा क्षेत्र के समस्त 17 वार्डों के अंतर्गत ‘अमृत 2.0 योजना’ के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत नरेला क्षेत्र में लगभग 268 किलोमीटर लंबी सीवेज लाइन बिछाई जाएगी, जिससे 50 हजार से अधिक घरों को सीवेज सुविधा से जोड़ा जा सकेगा। खुदाई कार्यों के दौरान नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो मंत्री विश्वास सारंग ने निर्देश दिए कि कार्य प्रारंभ करने से पूर्व वार्डवार सर्वे कर, प्रत्येक घर, गली और नाली की सटीक मैपिंग की जाए ताकि कार्ययोजना वैज्ञानिक ढंग से तैयार की जा सके। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि खुदाई कार्यों के दौरान नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो, इसके लिए प्रत्येक कॉलोनी में एक बार में अधिकतम 200 मीटर क्षेत्र में ही खुदाई की जाए। आईटी तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित करें मंत्री विश्वास सारंग ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण के दौरान GI टैगिंग तकनीक का उपयोग किया जाए ताकि क्षेत्र का सटीक डिजिटल डेटा तैयार हो सके। साथ ही, उन्होंने एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने के निर्देश भी दिए, जिससे नागरिकों को कार्य की प्रगति की जानकारी सुलभ रूप से उपलब्ध हो सके और पारदर्शिता बनी रहे। निर्धारित समयावधि में पूर्ण हो कार्य बैठक में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि हर घर में चैंबर बनाया जाये साथ ही दो वार्डों के मध्य एक पंप स्टेशन बनाया जाये। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं और गुणवत्ता के मानकों से किसी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह योजना नरेला विधानसभा को स्वच्छ, स्वस्थ और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक परिवर्तन लेकर आएगी। recent visitors 37

ग्वालियर में करीब 350 एकड़ भूमि में बनेगा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन टेलीकॉम से जुड़े सभी उपकरण बनेंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

म.प्र. की देश में केन्द्रीय स्थिति का लाभ उठाएं निवेशक, हितों का ध्यान रखेगी सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव दूरसंचार असीम संभावनाओं वाला क्षेत्र, प्रदेश में टेलीकॉम सेक्टर के विकास में करेंगे पूरा सहयोग ग्वालियर में करीब 350 एकड़ भूमि में बनेगा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन टेलीकॉम से जुड़े सभी उपकरण बनेंगे टेलीकॉम सेक्टर की बड़ी कम्पनियां करेंगी निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना एवं क्रियान्वयन के संबंध में बैठक कर निवेशकों से की चर्चा  ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। दूरसंचार सुविधाओं का विकास एवं विस्तार आज की बड़ी जरूरत है। मध्यप्रदेश में टेलीकॉम सेक्टर के विकास के लिए यहां आने वाले हर उद्यमी, हर निवेशक का स्वागत है। टेलीकम्यूनिकेशन फेसिलिटीज को बेहतर बनाकर हम प्रदेश के हर क्षेत्र व केन्द्रीय दुर्गम इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाना चाहते हैं। मध्यप्रदेश देश का हृदय स्थल है। निवेशक राज्य की देश में केन्द्रीय स्थिति का भरपूर लाभ उठाएं। टेलीकॉम सेक्टर में इन्वेस्ट करने के लिए मध्यप्रदेश आने वाले हर निवेशक के हितों का सरकार पूरा ध्यान रखेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में प्रदेश में दूरसंचार उत्पादन क्षेत्र (टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन – टीएमजेड) की स्थापना एवं इसके क्रियान्वयन के संबंध में बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टेलीकॉम सेक्टर में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों से आत्मीय चर्चा कर सरकार की प्रतिबद्धताओं और भावी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ग्वालियर, जबलपुर जैसे क्षेत्रों में टेलीकॉम सेक्टर के विकास की असीम संभावनाएं हैं। हमारी सरकार टेलीकॉम सेक्टर के विकास के लिए निवेशकों को हर संभव सहयोग करेगी। आप बेझिझक निवेश कीजिए, आपके हितों की चिंता सरकार करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी 27 अप्रैल को इंदौर में आईटी कॉन्क्लेव होने जा रही है। इच्छुक निवेशक इसमें अपना प्रस्ताव दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के निर्माण के लिए बड़े लैण्ड बैंक की आवश्यकता होगी। निवेशकों से कहा कि कम जमीन में ज्यादा निर्माण इकाईयां स्थापित करने से लागत भी कम होगी और प्रबंधन में भी आसानी होगी। निवेशक इसी दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री के साथ बैठक में निवेशकों ने कहा कि वे विचार-विमर्श कर जल्द ही अपना निर्णय लेंगे और सरकार को अवगत कराएंगे। बैठक में बताया गया कि ग्वालियर जिले में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) बनाया जाना प्रस्तावित है। यह टीएमजेड करीब 350 एकड़ जमीन पर बनेगा। इस टीएमजेड में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी सभी एसेसरीज (सहायक उपकरण), सिस्टम्स, कम्पोनेंटस, वाइफाई, ऑप्टिकल्स, मोबाइल डिवाइसेस, सिमकार्ड, एंटीना, टेलीकॉम चिप्स सहित टेलीकॉम सेक्टर में नई 6जी टेक्नॉलाजी के लिए अनुसंधान एवं विकास के कार्य भी किए जाएंगे। टेलीकॉम सेक्टर की डिक्सॉन, वॉयकॉन, आईबीएम, निक्सन एवं एरिक्सन जैसे सभी बड़ी कम्पनियां यहां निवेश करने के लिए आएंगी। इससे प्रदेश में टेलीकॉम सेक्टर का विस्तार होगा और सेवाएं भी बेहतर होंगी। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग संजय दुबे, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह, एमपीआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला, केन्द्रीय दूरसंचार विभाग के डीडीजी अनिल भारद्वाज, डॉयरेक्टर गणेश चंद्रा, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ सुदाम खाड़े सहित टेलीकॉम सेक्टर में निवेश करने के इच्छुक कम्पनी डिक्सन के अध्यक्ष अतुल बी. लाल, टीईएमए के चेयरमेन प्रो. एन.के. गोयल, तेजस के सीईओ एण्ड एमडी आनंद अथरेया, वीवीडीएन के जितेंद्र सिंह, वीवीडीएन के राजीव जैन, एनआईसीडीसी के विनय मिश्रा, आईसीईए के डॉ. आशीष शुखिया, इरिक्सन के अश्विनी पत्कुर, एमपीआईडीसी के ग्वालियर रीजन के ईडी प्रतुल सिन्हा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों के साथ टेलीकॉम सेक्टर के उत्तरोत्तर विकास के लिए विस्तार से चर्चा की। बताया गया कि केन्द्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा मध्यप्रदेश में टेलीकॉम सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है। निवेशकों ने मध्यप्रदेश के ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की थी। म.प्र. औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (एमपीआईडीसी) द्वारा इस विषय में नेतृत्व करते हुए ग्वालियर में दूरसंचार उत्पादन क्षेत्र की स्थापना के लिए निवेशकों को ग्वालियर आईटी पार्क में उपलब्ध भूमि और ग्वालियर के ही साडा क्षेत्र में उपलब्ध भूमि का अवलोकन कराया गया। उपलब्ध भूमि के सम्पूर्ण क्षेत्र कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर और आसपास के ईको सिस्टम की उपयोगिता का प्रत्यक्ष मूल्यांकन निवेशकों के प्रतिनिधि मंडल द्वारा किया गया था। गत एक अप्रैल को ही ग्वालियर के साडा क्षेत्र के प्रस्तावित स्थल का दूरसंचार विभाग एवं एमपीआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुन: मूल्यांकन किया गया। प्रदेश की नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग में प्रोत्साहन करने के लिए योजनाबद्ध राजकोषीय और गैर राजकोषीय पेकेज पर भी इस दौरान चर्चा की गई। निवेशकों ने कहा कि हम जितना जल्द हो सके, इस टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में अपना काम प्रारंभ कर लेंगे। साडा ग्वालियर की 271 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग को दी जाएगी ग्वालियर आईटी पार्क में लगभग 70 एकड़ एवं साडा ग्वालियर क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि की मांग निवेशकों द्वारा की गई है। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार साडा ग्वालियर की 271 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है। साडा ग्वालियर क्षेत्र में औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण की कार्यवाही साथ-साथ होने से क्षेत्र का विकास तेजी से होने की संभावना है। साडा के समीपवर्ती क्षेत्र से ग्रीन कॉरिडोर एक्सप्रेस वे भी बनाया जाना संभावित है। इससे आगरा-दिल्ली की दूरी कम हो जाएगी और लगभग 50 मिनट की अवधि में ग्वालियर से आगरा की दूरी तय की जा सकेगी। इससे कम्पनियों को लॉजिस्टिक का व्यय कम से कम होगा। साडा क्षेत्र से ही ग्वालियर वेस्टर्न बायपास का निर्माण भी शीघ्र प्रारंभ हो रहा है। इससे आगरा-मुम्बई (एबी रोड) से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। साडा क्षेत्र से दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर भी निकल रहा है। इससे इस क्षेत्र में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाईयों को भरपूर लाभ होगा। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि जीआईएस के दौरान सरकार ने 18 नई औद्योगिक नीतियां लागू की गई हैं। यह सभी नीतियां मध्यप्रदेश में निवेशकों को आकर्षित … Read more

मुख्यमंत्री ने लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शासकीय परिसम्पत्तियों का विक्रय ही एकमात्र विकल्प नहीं है। परिसम्पत्तियों का शासन के हित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासकीय परिसम्पत्तियों का अभिलेखीकरण कर लें जिससे आवश्यकता अनुसार इनका उन्नयन कर विकसित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शासकीय परिसम्पत्तियों को बड़ी विकास परियोजनाओं के साथ भी जोड़ें ताकि शासन को ऐसे सम्पत्तियों का भी लाभ हो। बेहतर होगा कि ऐसे परिसम्पत्तियों को युक्तियुक्तकरण के जरिए समायोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि लोक परिसंम्पत्ति प्रबंधन विभाग अकेले ही परिसम्पत्तियों के निर्वतन या नीलामी पर निर्णय न ले। राजस्व, धर्मस्व, विधि-विधायी विभाग के साथ समन्वय कर परिसम्पत्तियों के मामलों का समुचित समाधान किया जाये। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह खण्डवा से वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव लोक परिसम्पत्ति विभाग अनिरूद्ध मुखर्जी, प्रमुख सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक परिसम्पत्तियों के प्रबंधन में नवाचार किए जाएं। राज्य के बाहर शासन के स्वामित्व वाली परिसम्पत्तियों का प्राथमिकता से प्रबंधन/निर्वतन किया जाए। उन्होंने कहा कि अच्छे लोकेशन में मौजूद शासकीय परिसम्पत्तियों का यथासंभव शासन के हित में ही नियोजन किया जाए। इसके लिए सूक्ष्म कार्य योजना बनाकर उस पर विधिवत अमल किया जाये। किसी मसले पर कानूनी राय की आवश्यकता है तो विधि एवं विधायी विभाग से अभिमत लेकर ही आगे की कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अच्छी लोकेशन में मौजूद सम्पत्ति पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को देने पर विचार किया जा सकता है। बैठक में बताया गया कि लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग के गठन से लेकर अब तक 655 लोक परिसम्पित्तयां विभागीय पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी हैं। इसमें जिलों द्वारा 471 एवं विभिन्न विभागों द्वारा 184 परिसम्पत्तियों को दर्ज किया गया है। कुल दर्ज की गई परिसम्पत्तियों में जिला/विभाग को 505 परिसम्पत्तियां वापस सौंपी गई है और 101 परिसम्पत्तियों का मुद्रीकरण, 48 परिसम्पत्तियों का प्रबंधन किया गया। एक परिसम्पत्ति के प्रबंधन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।   recent visitors 29