मुख्यमंत्री ने प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा कर सभी निर्माणाधीन परियोजनाएं समय पर पूरा करने के दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सड़क विकास के काम में हम किसी से भी पीछे न रहें। प्रदेश में सड़कों विशेषकर अधिक यातायात वाले राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्गों के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र सरकार से उच्च कोटि का समन्वय करें। आपसी संवाद में कोई कमी न रखें, ताकि राजमार्गों की मंजूरी और निर्माण के कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में प्रदेश में प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में लोक निर्माण एवं एनएचएआई के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को पूरी गुणवत्ता (परफार्मेंस गारंटी) के साथ तय समय-सीमा में ही पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़े भू-अधिग्रहण के लंबित मामलों को आपसी वार्ता के जरिए शीघ्र सुलझाया जाए। बैठक में बताया गया कि गत वित्त वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग मंजूर कराने के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर रहा है। यह मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार द्वारा दी गई बड़ी सौगातों में से एक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति एवं प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा कर जानकारी ली। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में बाबा महाकाल मंदिर के पास से एक एलिवेटेड रोड बनाया जा सकता है, जो रेलवे स्टेशन को सीधा कनेक्ट करे। इससे महाकाल दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का बेहतर तरीके से यातायात प्रबंधन किया जा सकेगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी 10 अप्रैल को बदनावर आएंगे बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एनएचएआई के अधिकारियों ने अवगत कराया गया कि आगामी 10 अप्रैल को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी धार जिले के बदनावर आएंगे। यहां वे एक गांव में एनएचएआई द्वारा निर्मित की गईं 218 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकर्पण करेंगे। इनकी कुल लागत 3502 करोड़ रुपए है। इसी प्रकार एनएचएआई द्वारा निर्मित की जाने वाली 110 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का भूमिपूजन भी इसी अवसर पर केंद्रीय मंत्री द्वारा किया जाएगा। इन सभी निर्माण कार्यों की लागत 2330 करोड़ रुपए है। मुख्यमंत्री प्रदेश की 7 प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी से करेंगे आग्रह बैठक में एनएचएआई के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में नवीन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की 7 परियोजनाएं पाइप लाइन में हैं। इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलना शेष है। यह जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन अत्यधिक आवश्यकता वाले मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में विकसित करने के लिए वे स्वयं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी से आग्रह करेंगे। बताया गया कि बदनावर-पेटलावद-थांदला 4 लेन मार्ग निर्माण (लंबाई 80 किमी, लागत 1500 करोड़ रु.), पूर्वी इंदौर बायपास मार्ग निर्माण (लंबाई 77 किमी, लागत 3500 करोड़ रु.) एवं उज्जैन-झालावाड़ 4 लेन मार्ग का निर्माण कार्य (लंबाई 134 किमी, लागत 2200 करोड़ रु.) अत्यंत जरूरी है। यह तीनों राजमार्ग विकास कार्य 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। इसी प्रकार मिसरौद से औबेदुल्लागंज खण्ड रा.रा.- 46 का 6 लेन में उन्नयन एवं निर्माण (लंबाई 19.32 किमी, लागत 280 करोड़ रु.), ग्वालियर-भिण्ड से म.प्र/उ.प्र. की सीमा तक रा.रा.- 719 का 4 लेन मय पेव्हड शोल्डर में उन्नयन एवं निर्माण (लंबाई 96 किमी, लागत 3125 करोड़ रु.) तथा सतना-चित्रकूट खण्ड रा.रा.- 135 बीजी का 4 लेन में उन्नयन एवं निर्माण (लंबाई 80 किमी, लागत 1500 करोड़ रु.) प्रस्तावित है। इसी तरह लखनादौन से रायपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (लंबाई 200 किमी, लागत लगभग 5985 करोड़ रु.) के निर्माण के लिए बालाघाट और लांजी तहसील के जनजातीय क्षेत्र से गुजरने वाले एकरेखण(अलाइमेंट) के विकल्प को प्राथमिकता दी जानी है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। यह परियोजनाएं सिर्फ़ भू-अधिग्रहण एवं वन अनुमतियां न मिलने की वजह से अबतक मंजूर होने से शेष हैं। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल 9664 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध हैं। इसमें से 5428 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई के अधीन हैं। शेष 4236 किमी लंबाई युक्त राष्ट्रीय राजमार्गों का संधारण लोक निर्माण विभाग (3990 किमी) एवं म.प्र. सड़क विकास निगम (846 किमी) द्वारा किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय सरकार द्वारा प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए 3935 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। गत वित्त वर्ष की कार्य योजना अंतर्गत 8 नवीन कार्यो के लिए 3412 करोड़ रुपए के प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में स्वीकृति के लिए प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोड नेटवर्क बढ़ाने के लिए हम केंद्र सरकार से लगातार सम्पर्क में हैं और बहुत जल्द ही प्रदेश को नए राष्ट्रीय राजमार्ग मंजूर होने वाले हैं। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव लोक निर्माण नीरज मंडलोई, म.प्र. सड़क विकास निगम के एमडी भरत यादव, एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 35

RCB ने 10 साल बाद किया मुंबई का किला ‘फतह’, क्रुणाल पांड्या बने जीत के हीरो

मुंबई आईपीएल 2025 के 20वें मैच में रोमांचक मुकाबले में मुंबई इंडियंस को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने हरा दिया. पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी ने 20 ओवर में 221 रनों का विशाल स्कोर बनाया. जवाब में मुंबई इंडियंस की टीम 12 रनों से मैच हार गई. एक समय ऐसा लग रहा था कि मुंबई इंडियंस की टीम ये मैच जीत सकती है लेकिन आरसीबी के गेंदबाजों ने अंतिम लम्हों में कमाल प्रदर्शन कर अपनी टीम को जीत दिला दी. आरसीबी के लिए ये जीत बेहद खास है क्योंकि इस टीम ने पूरे 10 साल के बाद वानखेड़े में मुंबई इंडियंस को हराया है. आरसीबी की तीसरी जीत आरसीबी की ये इस टूर्नामेंट में तीसरी जीत है. वो अंक तालिका में नंबर तीन पर है. वहीं मुंबई इंडियंस की टीम चौथा मैच हारी है और वो 8वें स्थान पर है. आरसीबी के लिए विराट कोहली ने 42 गेंदों में 67 रन बनाए. कप्तान रजत पाटीदार ने भी 32 गेंदों में 64 रनों की पारी खेली. गेंदबाजी में क्रुणाल पंड्या ने सबसे ज्यादा 4 विकेट चटकाए. हेजलवुड और यश दयाल को 2-2 विकेट मिले. हार्दिक-तिलक की मेहनत बेकार मुंबई इंडियंस एक वक्त मैच में आ गई थी और इसकी वजह हार्दिक पंड्या और तिलक वर्मा की तूफानी पारी थी. हार्दिक पंड्या ने 15 गेंदों में 4 छक्के और 3 चौके की मदद से 42 रन बनाए. तिलक ने 29 गेंदों में 56 रनों की पारी खेली. लेकिन ये पारियां भी मुंबई को जीत नहीं दिला सकी.तिलक वर्मा के बाद हार्दिक पंड्या के आउट होते ही मुंबई इंडियंस की हार तय हो गई. मुंबई ने 19वें ओवर में हार्दिक पंड्या का विकेट खोया और फिर आखिरी ओवर में क्रुणाल पंड्या ने तीन विकेट लेकर आरसीबी को मैच जिता दी. ऐसी रही आरसीबी की पारी पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर फिल साल्ट को ट्रेंट बोल्ट ने अपना शिकार बनाया. लेकिन इसके बाद विराट कोहली ने आतिशी पारी खेली. देवदत्त पड्डीकल भी लय में दिखे. हालांकि, पड्डीकल 9वें ओवर में 37 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद विराट कोहली ने शानदार बल्लेबाजी की. लेकिन 15वें ओवर में हार्दिक पंड्या ने कोहली और लियाम लिविंगस्टन दोनों को आउट किया. विराट कोहली ने 42 गेंद में 67 रन बनाए. लेकिन इसके बाद रजत पाटीदार ने कमाल की बल्लेबाजी की. पाटीदार ने 32 गेंद में 64 रन बनाए, जिसके दम पर आरसीबी ने 5 विकेट खोकर मुंबई के सामने 222 रनों का लक्ष्य खड़ा किया. ऐसी रही मुंबई की पारी 222 रनों के जवाब में उतरी मुंबई की शुरुआत अच्छी नहीं रही. रोहित शर्मा ने कुछ अच्छे शॉट जरूर लगाए लेकिन रोहित शर्मा 17 रन बनाकर दूसरे ही ओवर में आउट हो गए. इसके बाद चौथे ओवर में रकल्टन भी आउट हो गए. उनके बल्ले से केवल 17 रन निकले. इसके बाद सूर्यकुमार य़ादव ने पारी को संभालने की कोशिश की. लेकिन 12वें ओवर में वो भी आउट हो गए. सूर्या के बल्ले से 28 रन  निकले. इसके बाद हार्दिक पंड्या और तिलक वर्मा का तूफान आया. दोनों ने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी की. हार्दिक ने 15 गेंद में 42 रन बनाए तो तिलक ने 29 गेंद में 56 रनों की पारी खेली. एक समय ऐसा लग रहा था कि मुंबई आसानी से ये मैच जीत जाएगी. लेकिन भुवी ने मैच पलट दिया. आखिरकार मुंबई की टीम 209 रन ही बना सकी. पहले एक नजर हार्दिक-तिलक के कमाल पर 222 रनों के लक्ष्य के जवाब में जब मुंबई की टीम मैदान में उतरी तो उसकी शुरुआत अच्छी नहीं रही. जब सूर्यकुमार यादव के रूप में मुंबई को चौथा झटका लगा था तब मुंबई 12 ओवर में केवल 99 रन ही बना सकी थी. लेकिन इसके बाद हार्दिक पंड्या बल्लेबाजी के लिए पहुंचे. दूसरी ओर तिलक वर्मा थे. दोनों ने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी की. तिलक-हार्दिक ने 34 गेंद में 89 रन जोड़े. एक समय ऐसा लग रहा था कि मुंबई ये मैच जीत जाएगी. फिर ऐसे पलटा मैच 18वां ओवर लेकर भुवनेश्वर कुमार आए. उस वक्त मुंबई को जीत के लिए 34 रन ही चाहिए थे. लेकिन भुवी ने तिलक वर्मा को आउट कर दिया और सधी हुई गेंदबाजी की. उस ओवर में भुवी ने केवल 14 रन दिए. इसके बाद अगले ही ओवर की पहली गेंद पर हेजलवुड ने हार्दिक को भी आउट कर दिया. यहीं से मैच एक बार फिर आरसीबी के पाले में आ गया. आईपीएल 2025 के मैच नंबर-20 में आरसीबी ने मुंबई इंडियंस को 12 रनों से हराया. यह मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया. 10 साल बाद ऐसा हुआ है जब आरसीबी ने मुंबई को उसके घर यानी की वानखेड़े के मैदान में शिकस्त दी हो. इस मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था. आरसीबी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट खोकर 221 रन बनाए थे. कोहली और रजत पाटीदार ने फिफ्टी जड़ी थी. मुंबई को जीत के लिए 222 रन बनाने थे. लेकिन मुंबई 209 रन ही बना सकी. हार्दिक पंड्या और तिलक वर्मा ने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी की. लेकिन अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके. recent visitors 56

युवाओं को सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, कांस्टेबल और SI के पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया, भरे जाने हैं 8000 पद

भोपाल मध्य प्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई शुरू होने वाली है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस माह के अंत में करीब आठ हजार पदों पर पुलिस भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसमें इसमें 7,500 कांस्टेबल और 500 उप निरीक्षक (एसआई) के पद शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय ने कर्मचारी चयन मंडल से जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने का अनुरोध किया है। भर्ती की अधिसूचना इस माह के अंत तक जारी की जा सकती है और शारीरिक दक्षता परीक्षा जून-जुलाई के आसपास हो सकती है। बता दें कि राज्य में एसआई के पदों पर भर्ती परीक्षा छह साल बाद हो रही है। इससे पहले 2018 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक भर्ती नहीं हो सकी। इसका एक कारण कोविड-19 और पिछले कुछ सालों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना है। युवा लंबे समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे। भर्ती के इंतजार में कई युवाओं की तो अब उम्र भी बीत चुकी है, लेकिन राहत की बात यह है कि अब सरकार ने इस भर्ती को जल्द से जल्द शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में युवाओं को अभी से ही इस भर्ती के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।  छह साल बाद हो रही एसआई की भर्ती परीक्षा एसआई के पदों पर भर्ती परीक्षा छह साल बाद हो रही है। इससे पहले 2018 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक भर्ती नहीं हो सकी। इसका एक कारण कोविड-19 और पिछले कुछ सालों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना है। लंबे समय से एसआई भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी अब उम्र सीमा पार भी कर चुके हैं। पांच साल में होगी ढाई लाख पदों पर भर्ती सरकार ने विधानसभा में सरकारी विभागों के रिक्त पदों को भरने का एलान किया है। सरकार ने कहा कि आगामी पांच साल में सरकार ढाई लाख पदों पर भर्ती करेगी। सभी विभागों के खालों पदों को भरा जाएगा। सरकार ने हर वर्ग को एससी,एसटी और ओबीसी को उनके लिए आरक्षित आरक्षण के अनुसार लाभ देने का भी वादा किया है। वहीं, कांग्रेस भी सरकार पर रोजगार को लेकर हमलावर है। कई अवसरों पर कांग्रेस सरकार को उनके वादे पूरे नहीं करने को लेकर घेर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि कई विभागों में पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार कोई पद नहीं भर रही। सिर्फ वादे कर रही है। MP Police भर्ती अधिसूचना जल्द, परीक्षा जून-जुलाई में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा इस माह के अंत तक भर्ती अधिसूचना जारी की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय ने बोर्ड से भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) जून-जुलाई में आयोजित की जा सकती है। MP Police में 6 साल बाद फिर से SI भर्ती 2018 के बाद से अब तक MP में कोई SI भर्ती नहीं हुई थी। कोविड-19 और प्रशासनिक देरी की वजह से प्रक्रिया अटकी रही। इस देरी से कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं, जिससे सरकार पर पहले से ही दबाव बना हुआ था। सरकार का बड़ा वादा: 5 साल में 2.5 लाख नौकरियां सरकार ने विधानसभा में घोषणा की है कि अगले 5 वर्षों में 2.5 लाख पदों पर भर्ती की जाएगी। सभी विभागों में खाली पदों को भरने की तैयारी की जा रही है। SC/ST/OBC वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। राजनीतिक हलचल भी तेज कांग्रेस सरकार पर रोजगार के वादे पूरे न करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही है, जबकि विभागों में हज़ारों पद खाली पड़े हैं। recent visitors 35

मध्यप्रदेश में शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर बहुत गंभीर है इसलिए शासन ने 750 करोड़ रुपये का प्रावधान कर मुख्यमंत्री नगरीय विकास योजना बनाई है इस पंचवर्षीय योजना में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के प्रयास किये जायेंगे साथ ही प्रदेश के पांच शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में हरित स्थान विकास और सौन्दर्यपरक पर्यावरण के लिये मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया है। पांच वर्ष की इस योजना में वर्ष 2028-29 तक के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना राज्य सरकार द्वारा अपने वित्तीय संसाधनों से संचालित करेगी। प्रदेश में विकसित होंगे नगर वन योजना के मुताबिक विभाग द्वारा प्रत्येक नगर वन के विकास के लिये अधिकतम 2 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। योजना में न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति एकड़ 10 लाख रुपये नगर वन के सृजन के लिये नगरीय निकायों को अनुदान स्वरूप दिये जाएंगे। योजना के संबंध में नगरीय निकायों को निर्धारित प्रावधान के अनुसार प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिये गये है। मुख्यमंत्री जन सहभागिता निर्माण योजना का मिलेगा लाभ नगरीय क्षेत्रों में जन-भागीदारी से नागरिकों की सुविधा के लिये अद्योसंरचना विकास के लिये “मुख्यमंत्री जन-सहभागिता निर्माण’’ योजना चलाने का भी निर्णय लिया है। योजना में 150 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से 5 वर्षों के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना में प्रतिवर्ष नगरपालिक निगमों के लिये 5 करोड़ रुपये, नगरपालिकाओं को एक करोड़ रुपये और नगर परिषदों को 25 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जन-भागीदारी एवं राज्य शासन की आर्थिक सहायता का अनुपात समान रूप से 50-50 प्रतिशत रहेगा। योजना में नगरीय क्षेत्र के मोहल्लों में सीमेंट- कांक्रिट निर्माण, सीवरेज की उचित व्यवस्था के साथ कचरे के निपटान की उचित व्यवस्था को वरीयता दी जाएगी। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2028-29 तक किया जाएगा। सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक वाहन में बदलेंगे प्रदेश के पर्यावरण को शुद्ध रखने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक प्रोत्साहन देने की योजना शासन ने बनाई है योजना के तहत नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया है। इसी क्रम में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। हर 20 किलोमीटर पर होगा चार्जिंग स्टेशन योजना के तहत प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन के लिये हर 20 कि.मी. पर चार्जिंग स्टेशन और हाई-वे पर 100 कि.मी. पर फास्ट चार्जिंग सुविधा स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश की ईवी नीति में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन खोलने पर सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। प्रदेश में चलेंगी 552 शहरी बस इसके अलावा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजनांतर्गत 6 शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 552 शहरी बसों के संचालन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। केन्द्र सरकार के शहरी कार्य मंत्रालय ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर के बस डिपो, अद्योसंरचना के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है।   recent visitors 34

भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा

नई दिल्ली देश के विकास की दिशा को ध्यान में रखते हुए, जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बिना किसी संकोच के कहा: 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए , भारत को 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था में बदलना होगा। यह सिर्फ़ एक छलांग नहीं है – यह एक पीढ़ीगत धुरी है, और उन्होंने तर्क दिया कि फिनटेक क्षेत्र को इसे आगे बढ़ाने वाले इंजनों में से एक होना चाहिए। कांत ने कहा, "भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग नौ गुना वृद्धि होनी चाहिए, इसकी प्रति व्यक्ति आय में लगभग आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए, और इसके विनिर्माण में लगभग 16 गुना वृद्धि होनी चाहिए।" उन्होंने व्यापक आर्थिक लक्ष्यों और क्षेत्र-विशिष्ट उत्प्रेरकों के बीच सीधी रेखा खींची। उनके लिए, फिनटेक केवल एक और उच्च-विकास वाला वर्टिकल नहीं है; यह समावेशी, व्यापक-आधारित विकास को प्राप्त करने का आधार है। "यह बहुत महत्वपूर्ण है कि फिनटेक क्षेत्र बढ़ता रहे और विस्तार करता रहे ताकि हम समाज में सभी स्तरों पर ऋण प्रदान करने में सक्षम हों।" आंकड़े उनके आत्मविश्वास को पुष्ट करते हैं। भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक हब है, न केवल मात्रा के मामले में बल्कि मूल्य के मामले में भी। इस क्षेत्र ने 2023 में 25 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया – जो कि साल-दर-साल (YoY) 56 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। 2030 के लिए अनुमान और भी चौंकाने वाले हैं: 150 फिनटेक यूनिकॉर्न जिनका संयुक्त मूल्यांकन 500 बिलियन डॉलर है और वार्षिक राजस्व 190 बिलियन डॉलर तक पहुँच रहा है। कांत इस विस्फोट का श्रेय तकनीक-प्रेमी युवा जनसांख्यिकी, पूंजी तक बेहतर पहुंच, सरकारी नीतियों को सक्षम बनाने और मोबाइल और इंटरनेट बुनियादी ढांचे में व्यापक प्रगति के शक्तिशाली मिश्रण को देते हैं। लेकिन उन्होंने एक चेतावनी भी जारी की- इस वृद्धि को जिम्मेदारी में बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "नवाचार फिनटेक की जीवनरेखा है, और जब हम नवाचार करते हैं, तो हमें जिम्मेदारी से ऐसा करना चाहिए।" इसका मतलब है कि ऐसे उत्पाद डिजाइन करना जो कमजोर आबादी की सेवा करें, न कि उन्हें किनारे करें। इसका मतलब है साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहना और यह सुनिश्चित करना कि UPI, डिजिटल वॉलेट, ब्लॉकचेन के माध्यम से मुख्यधारा का अपनाना, केवल नवीनता पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित हो। स्व-नियमन केंद्रीय विषय था। राज्य द्वारा हर कदम तय करने की प्रतीक्षा करने के बजाय, कांत भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम करने वाले स्व-नियामक संगठनों (एसआरओ) में फिनटेक शासन का भविष्य देखते हैं। "ये संस्थाएँ आरबीआई की निगरानी में काम करती हैं। वे उद्योग मानकों को निर्धारित करने, अनुपालन लागू करने और नियामकों और फिनटेक कंपनियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।" वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने की राह की चुनौतियाँ:     गरीबी और असमानता:         वर्ष 1947 में स्वतंत्रता से लेकर वर्ष 1991 तक गरीबी कम करने के उद्देश्य से समाजवादी नीतियों के क्रियान्वयन के बावजूद भारत की गरीबी दर 50% के आसपास बनी रही।         हालाँकि, उदारीकरण के बाद  (1991-2011) गरीबी लगभग 20% तक कम हो गई, जहाँ 350 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए।     मध्यम-आय जाल:         विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार, मध्यम-आय जाल (Middle-Income Trap) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक मध्यम-आय देश बढ़ती लागत और घटती प्रतिस्पर्द्धा के कारण उच्च-आय अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने में विफल रहता है।         भारत के लिये भी मध्यम-आय जाल में फँसने का खतरा है, जहाँ देश मध्यम-आय से उच्च-आय की स्थिति में पहुँचने में विफल हो जाते हैं।         वर्ष 1960 में 101 मध्यम-आय अर्थव्यवस्थाओं में से केवल 23 ही वर्ष 2018 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था बन सके।         ऐसी आशंकाएँ व्यक्त की जाती हैं कि विकसित अर्थव्यवस्था की राह पर आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था मध्यम-आय जाल में फँस सकती है। माना जाता है कि 5,000-6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुँचने के बाद यह अधिक तेज़ी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।     वृद्ध होती आबादी:         भारत की आबादी, जो वर्तमान में लगभग 1.4 बिलियन है, वर्ष 2048 तक 1.64 बिलियन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचने के बाद बाद वर्ष 2100 तक घटकर 1.45 बिलियन रह जाएगी।         इसके परिणामस्वरूप, भारत को वृद्ध होती आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते खर्च, बढ़ती पेंशन देनदारियाँ और संभावित श्रम की कमी शामिल हैं।     गतिहीन कृषि:         कृषि क्षेत्र भारत की लगभग 46% आबादी को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 16.5% है।         हालाँकि, अप्रभावी भूमि सुधारों, अवैज्ञानिक अभ्यासों, संस्थागत ऋण प्रवाह की कमी और जलवायु अनिश्चितताओं के कारण यह गतिहीन एवं निम्न उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है।     विनिर्माण क्षेत्र का पिछड़ापन:         आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र भारत के केवल 11.4% कार्यबल को रोज़गार प्रदान करता है।         इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र को उच्च इनपुट लागत और अस्थिर मांग के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।     अकुशल लॉजिस्टिक्स:         आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 से पता चलता है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के 14-18% के बीच है, जो वैश्विक बेंचमार्क 8% से अधिक है। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (LPI) 2023 में भारत 38वें स्थान पर है।     रोज़गारहीनता और प्रच्छन्न बेरोज़गारी:         आईटी सेवाओं में उछाल से प्रेरित भारत के उच्च विकास वर्षों (2000-10) के बावजूद 46% श्रम शक्ति अभी भी कृषि में संलग्न है, जो सकल घरेलू उत्पाद में केवल 18% का योगदान देती है। इसकी उत्पादकता कम है और यह अल्प-रोज़गार (underemployment) की समस्या से भी ग्रस्त है।         इसके अलावा, CMIE के अनुसार भारत में बेरोज़गारी दर मई 2024 में 7% से तेज़ी से बढ़कर जून 2024 में 9.2% हो गई।     श्रम बल गतिशीलता:         महिला श्रम बल भागीदारी मात्र 37% है, हालाँकि वर्ष 2019 में 26% की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। फिर भी, यह स्तर अन्य तेज़ी से विकास करते देशों की तुलना में कम है।     वैश्विक आर्थिक मंदी:         वैश्विक आर्थिक मंदी, वस्तुओं की अस्थिर कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और कठिन होती … Read more

खुलासा : मध्य प्रदेश में9,000 फिजियोथेरेपिस्ट में से केवल 40 क्लीनिक सरकार के स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में 9,000 से ज़्यादा फिजियोथेरेपिस्ट काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी हेल्थ पोर्टल पर सिर्फ 40 फिजियोथेरेपी क्लीनिक ही रजिस्टर्ड हैं। यह जानकारी 26 मार्च तक की है। इतने कम क्लीनिकों के रजिस्ट्रेशन से अवैध और बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों पर शक गहरा गया है। इसलिए इनकी जांच शुरू हो गई है। सरकार अब ऐसे क्लीनिकों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। राज्य के हेल्थ कमिश्नर तरुण राठी ने सभी जिलों के CMHO को एक आदेश दिया है और कहा है कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को पहचाना जाए और उन्हें बंद किया जाए। साथ ही उन्होंने CMHO को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जो क्लीनिक सही हैं, वे सरकार के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। यह कार्रवाई विधानसभा सत्र में उठे सवालों के बाद की जा रही है। सवालों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई थी। यह राज्य के नर्सिंग होम एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। इस एक्ट के अनुसार, सभी मेडिकल सर्विस देने वालों का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और आसान बनाए सरकार MP फिजियोथेरेपिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील पांडे ने कहा कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन सरकार को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट को MP एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल में तुरंत रजिस्टर करना चाहिए। वादे पूरे नहीं करने का भी आरोप पहले फिजियोथेरेपिस्ट पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराते थे। एक साल पहले तक इस काउंसिल में 3,028 फिजियोथेरेपिस्ट रजिस्टर्ड थे। जांच में यह भी पता चला है कि फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं। पहले घोषणा की गई थी कि सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। साथ ही सरकारी अस्पतालों में फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति भी बढ़ाई जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सरकार की कार्रवाई से जागी उम्मीद इस पूरे मामले से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सरकार अवैध क्लीनिकों पर लगाम लगाने में सफल होगी? क्या फिजियोथेरेपिस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान हो पाएगी? और क्या फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे होंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएंगे, लेकिन फिलहाल, सरकार की कार्रवाई से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद जगी है। recent visitors 38

विदिशा रेलवे स्टेशन जल्द ही यात्रियों को नए भवन की चमचमाती सुविधाओं का लाभ मिलेगा, शुरू होंगी VIP सुविधाएं

 विदिशा मध्य प्रदेश के विदिशा रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत चल रहे नवीनीकरण कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। अब स्टेशन का चेहरा बदलने ही वाला है। जल्द ही यात्रियों को नए भवन की चमचमाती सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इस बहुप्रतीक्षित आधुनिक स्टेशन का लोकार्पण जल्द ही तय होगा। उससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री और विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान खुद निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण अगले सप्ताह संभावित माना जा रहा है। कयास यह भी लगाए जा रहे है कि इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते है। प्लेटफॉर्म एक से चार तक नया अनुभव स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से चार तक यात्रियों की सुविधाओं में जबरदस्त इजाफा किया गया है। वर्षों पुरानी व्यवस्थाओं को पूरी तरह से बदला गया है। कुल 18.6 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे स्टेशन को नया रूप दिया गया है। अधिकतम एक से डेढ़ महीने में प्लेटफॉर्म नंबर एक की तरफ बने मुख्य द्वार को यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही तीन स्तर के शानदार वीआइपी वेटिंग हॉल भी उपयोग के लिए उपलब्ध होंगे। स्टेशन होगा फाइव स्टार जैसा नए स्टेशन भवन में टिकट बुकिंग ऑफिस, वीआइपी लाउंज, इमरजेंसी गेट, टीटीई लॉबी और पार्सल रूम जैसी सुविधाएं यात्रियों को हाई-क्लास अनुभव देंगी। वहीं, स्टेशन पर आने वाले वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की भी व्यवस्था की जा रही है। यह सभी निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में हैं और जल्द ही यात्रियों को इनका सीधा लाभ मिलेगा। शिवराज सिंह से निरीक्षण की मांग रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य कमलेश सेन ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर निर्माण कार्यों का अवलोकन करने और लोकार्पण की तिथि तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यात्रियों को जल्द से जल्द सुविधाएं मिलने लगेंगी। विदिशा स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 12 हजार यात्री पहुंचते हैं और यहां करीब 100 ट्रेनों का स्टॉपेज होता है। इन सभी यात्रियों को नए निर्माण कार्यों से सीधा लाभ मिलेगा। अधूरे कार्य ने बढ़ाया इंतजार जहां एक ओर स्टेशन का नवीनीकरण लगभग पूरा हो चुका है, वहीं दूसरी ओर फुट ओवरब्रिज का कार्य अभी अधूरा है। प्लेटफॉर्म नंबर एक के बाहरी हिस्से से लेकर प्लेटफॉर्म चार के छोर तक प्रस्तावित ओवरब्रिज का 50 फीसदी से ज्यादा काम अब भी बाकी है। यही नहीं, तीन स्वचालित सीढ़ियों (एस्केलेटर) का कार्य तो अब तक शुरू भी नहीं हो पाया है। यात्रियों को इन सुविधाओं के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। प्रधानमंत्री कर सकते हैं उद्घाटन रेलवे स्टेशन के नए भवन के लोकार्पण को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निरीक्षण के बाद उद्घाटन की तिथि तय की जाएगी। पूरी संभावना है कि इस भव्य और आधुनिक स्टेशन भवन का लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। इससे न सिर्फ विदिशा को गौरव मिलेगा, बल्कि यात्रियों को भी उच्चस्तरीय सुविधाओं का तोहफा मिलेगा। recent visitors 40