देश में तेजी से बंद कर रहे हैं ATM? अब UPI बन गई ऑलटाइम टेलर मशीन

मुंबई देश में पिछलेबैंकरों ने कहा कि पेमेंट टूल के रूप में यूपीआई और कार्ड के उभरने से नकदी का यूज कम हो गया है। इस कारण एटीएम अव्यावहारिक हो गए हैं। पांच साल में पहली बार एटीएम की संख्या में गिरावट आई है। बैंकों में नकदी निकालने के लिए लगने वाली लंबी कतार से मुक्ति दिलाने वाली ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) अब कम होती जा रही है। 2020 में बैंकों के विलय होने से जहां एटीएम की संख्या घट गई। वहीं, 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद लोगों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) को हाथों-हाथ लिया।  इसकी बढ़ती लोकप्रियता से भी एटीएम तक लोगों की पहुंच घटने लगी। आलम यह है कि महज 9 साल में प्रदेश में 274 एटीएम कम हो गए। सब्जी, फल, किराना, बिजली व गैस बिल समेत बड़े-छोटे शोरूम में भी यूपीआइ से पेमेंट करने की सुविधा मिली तो लोग ने एटीएम से दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे एटीएम पर ट्रांजेक्शन घटे तो बैंकों का मुनाफा कम हुआ और मशीन के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया। बैंकों ने बंद करना शुरू किए ATM नतीजा, बैंकों ने एटीएम बंद करना शुरू कर दिया। यूपीआइ के बढ़ते चलन से जहां नकदी की सुरक्षा संबंधी चिंता बैंकों की कम हो गई, वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नकदी लेन-देन के दौरान करेंसी के खराब होने पर दोबारा छापने का खर्च भी कम हो गया। हालांकि कोरोनाकाल में एटीएम की संख्या जरूर बढ़ी, लेकिन 2019 से इसके कम होने का दौर जारी है। बैंकों का कहना है, एटीएम बंद नहीं कर रहे, नई तकनीक आने पर इसकी शिफ्टिंग कर रहे हैं। हर एटीएम पर इतना खर्च एक एटीएम लगाने में करीब 6-9 लाख रुपए का खर्च आता है। एक मशीन की कीमत 4-8 लाख रुपए और कुछ आंतरिक सज्जा पर खर्च होते हैं। साथ ही हर एटीएम के मेंटेनेंस पर हर माह बैंक को 50 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसमें साफ-सफाई, बिजली, एसी और सुरक्षा गार्ड का खर्च शामिल है। बताते हैं, एक लेनदेन पर करीब 18 से 20 रुपए खर्च होता है। इसलिए घटे एटीएम बैंकों के विलय होने के कारण उनके एटीएम एक हो गए। कम्प्यूटरीकृत सिस्टम में किसी भी बैंक के एटीएम से रुपए निकालने की सुविधा। जिन मशीनों से ट्रांजेक्शन घटे, उन्हें बंद या शिफ्ट कर दिया। यूपीआइ के इस्तेमाल से लोगों की पहुंच एटीएम तक कम हो गई। देश में इस तरह बढ़ रहे यूपीआइ ट्रांजेक्शन 2022-23 में 83,453.79 मिलियन ट्रांजेक्शन 2023-24 में 130831.45 मिलियन ट्रांजेक्शन 2024-25 में 117507.31 मिलियन ट्रांजेक्शन (नवंबर तक) यूपीआई का जलवा चौधरी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में भारत ने फाइनेंशियल इनक्लूजन और डिजिटल भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। जन धन योजना, यूपीआई के प्रसार और मोबाइल इंटरनेट को व्यापक रूप से अपनाने से ऐसा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 535 करोड़ था जो वित्त वर्ष 2023-24 में 13,113 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 (सितंबर तक) में 122 लाख करोड़ रुपये के 8,566 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन रजिस्टर्ड किए गए हैं। इतिहास के झरोखे से पहले रुपए निकालने वालों की बैंकों में लंबी कतार लगती थी। इससे छुटकारा दिलाने के लिए एचएसबीसी बैंक ने 1987 में पहली बार मुंबई में एटीएम लगाई तो बैंकिंग में बड़ी क्रांति आई। महज 10 साल में देश में 1500 एटीएम हो गए। अभी देश में 2.50 लाख एटीएम हैं। राजधानी का दायरा बढ़ा, बढ़े एटीएम मध्यप्रदेश में इकलौते भोपाल जिले में एटीएम की संख्या बढ़ी है। राजधानी का दायरा बढऩे से ग्रामीण क्षेत्र जुड़े और एटीएम की संख्या बढ़ गई। अभी भोपाल जिले में 1079 एटीएम हैं। इनमें 42 ग्रामीण, 15 कस्बों और 1022 एटीएम शहरों में हैं। प्रदेश में एटीएम साल – संख्या 2016 – 9266 2017 – 9263 2018- 9579 2019 – 9345 2020 – 9201 2021 – 9322 2022 – 8812 2023 – 9328 2024 – 8992 (सितंबर तक) recent visitors 65

राज्य सरकार प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों की माली हालत सुधारने बड़ा कदम उठाने जा रही, देंगी अंशपूंजी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भारत सरकार द्वारा जारी रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत बिजली कंपनियों को राज्यांश 40 प्रतिशत राशि लगभग 6 हजार करोड़ रुपये ऋण के स्थान पर अंशपूंजी/अनुदान के रूप में देने की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों को वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, वितरण हानियों में कमी तथा वितरण प्रणाली सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण/विकास कार्यों के लिए राज्यांश की राशि ऋण के स्थान पर राज्य शासन द्वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जाएगी। योजनांतर्गत बिजली कंपनियों को अद्यतन ऋण के रूप में दिए गए राज्यांश को भी अंश पूंजी में परिवर्तित किया जाएगा। योजनांतर्गत केंद्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि भी राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे प्रदेश में स्थापित होने वाले स्मार्ट मीटर के कार्य में तेजी आएगी। यह राशि 6 हजार करोड़ से अधिक होती है। योजना में 60% राशि केंद्र सरकार देती है। इस फैसले से बिजली कंपनियों को कर्ज और उसके ब्याज का बोझ कम होगा। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार शाम को मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।  धान की मिलिंग करने वाले धान मिल मालिकों को राहत देते हुए वर्ष 2023-24 खरीफ में की बकाया प्रोत्साहन राशि और अपग्रेडेशन राशि के भुगतान को मंजूरी दे दी। प्रोत्साहन राशि 300 करोड़ और अपग्रेडेशन राशि 238 करोड़ है। यह भुगतान पिछले एक साल से अटका था। फायदा 1050 धान मिलर्स को मिलेगा। फैसले के मुताबिक, धान मिलर्स को मिलिंग राशि 10 रु./प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 50 रु. की दर से दी जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद डिपटी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि सेंट्रल पूल में एफसीआई को 20 फीसदी धान की आपूर्ति पर 40 रुपए और सेंट्रल पूल में 40 फीसदी धान देने पर 120 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अपग्रेडेशन राशि राज्य सरकार मिलर्स को देगी। सरकार के इस फैसले से किसानों से खरीदी जा रही धान की मिलिंग में तेजी आएगी साथ ही पीडीसी के तहत गरीबों को बांटे जाने वाले चावल की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। गौरतलब है कि पीडीसी के तहत मप्र अपनी जरूरत का चावल राज्य पूल में रख लेगा, इसके अतिरिक्त जितना अतिरिक्त चावल होगा, उसे केंद्र सरकार के फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) को भेज देगा। पीएम ऊषा और रूसा के लिए दी सैद्धांतिक मंजूरी केबिनेट ने केन्द्र सरकार की दो योजनाओं पीएम ऊषा (उच्चतर शिक्षा अभियान) और रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के प्रदेश में स‌ंचालन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को अपग्रेडेशन, रिसर्च, जेंडर इक्वेलिटी और सभी को समान अवसर देने वाले काम करने के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय मदद मिल सकेगी। जन विश्वास विधेयक और सप्लीमेंट्री बजट प्रस्ताव को भी मंजूरी केबिनेट ने मंगलवार को विधानसभा के शीत सत्र में पेश किए जाने वाले राज्य सरकार के सप्लीमेंट्री (अनुपूरक) बजट को भी मंजूरी दे दी है। यह लगभग 15 हजार करोड़ के आसपास हो सकता है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग के तहत जन विश्वास विधेयक, नगर पालिक व नगर पालिका संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दे दी गई। अब नगर निगमों में अध्यक्ष और नगर पालिका व नगर परिषदों में अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की जाएगी। इसके साथ ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए तीन चौथाई बहुमत की जरूरत होगी।   recent visitors 45

टोक्यो में बर्थ रेट यानी में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू,अब लोगों को सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना होगा

टोक्यो जापान की राजधानी टोक्यो में बर्थ रेट यानी प्रजनन दर में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है. अगले साल से ऑफिस में यहां 4-वर्किंग डेज के नियम लागू किए जाएंगे. मसलन, अब लोगों को सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना है. टोक्यो गवर्नर युरिको कोइके ने ऐलान किया कि अगले साल अप्रैल महीने से कर्मचारियों के पास ऑप्शन होगा कि वे सप्ताह में तीन दिन ऑफ ले सकेंगे. मसलन, पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि लोग अपने बच्चों के पालन-पोषण के चलते बीच में ही अपना करियर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. लोगों के बच्चे पैदा न करने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण माना जाता है. बीते कुछ सालों की नीतियों की वजह से देश का प्रजनन दर बेहद खराब हुआ है. इसमें सुधार लाने की लिए स्थानीय प्रशासन कई नए तरीके अपनाते रहा है. ताकि किसी को अपना करियर न छोड़ना पड़े गवर्नर कोइके ने कहा, "इस दौरान हम काम के तरीके, फ्लेग्सिबिलिटी लाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी को बच्चे को जन्म देने या फिर बच्चे की केयर करने की वजह से अपना करियर न छोड़ना पड़े. यह पहल जापानी जोड़ों के बीच बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए है. टोक्यो प्रशासन के मुताबिक, यह योजना उन माता-पिता के लिए भी सहायक होगी जिनके बच्चे प्राथमिक विद्यालय में हैं, उन्हें कम काम करने का विकल्प मिलेगा जिससे उनकी तनख्वाह में भी संतुलित कटौती होगी. जापान का जन्म दर पिछले साल, जापान में मात्र 727,277 जन्म दर्ज किए गए. बताया जाता है कि यह कमी देश की ओवरटाइम वर्क कल्चर का नतीजा है, जो महिलाओं को करियर और परिवार के बीच चुनने के लिए मजबूर करती है. वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक, जापान में लिंग रोजगार विषमता अन्य सम्पन्न राष्ट्रों से अधिक है, जहां महिलाओं की भागीदारी 55% और पुरुषों की 72% है. चार दिन के वर्कवीक की रूपरेखा को 2022 में 4 डे-वीक ग्लोबल द्वारा वैश्विक स्तर पर आजमाया गया था. इसमें शामिल कर्मचारियों के 90% से अधिक ने इस शेड्यूल को बनाये रखने की इच्छा जाहिर की. अन्य एशियाई राष्ट्र, जैसे सिंगापुर ने भी लचीले काम के घंटे देने पर जोर दिया है.   recent visitors 41

25 दिसंबर से 2 जनवरी तक महाकालेश्वर मंदिर में व्यवस्थाओं में परिवर्तन किया

उज्जैन भगवान महाकाल के दरबार में साल के अंतिम दिनों और नव वर्ष के पहले व दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है. इसके अलावा भस्म आरती को भी चलायमान किया जाएगा,  ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद ले सके. 25 दिसंबर से 2 जनवरी तक महाकालेश्वर मंदिर में व्यवस्थाओं में परिवर्तन किया गया है. उज्जैन कलेक्टर और महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह के मुताबिक श्रद्धालुओं को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है. महाकालेश्वर मंदिर में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था की गई है. हालांकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसके लिए मंदिर समिति द्वारा कुछ नियम बदले गए हैं. भस्म आरती में होंगे चलायमान दर्शन महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती विश्व भर के शिव भक्तों का आकर्षण का केंद्र रहती है. महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रवेश लेना चाहते हैं मगर सीमित संख्या में ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा सकता है. इसी के चलते-चलायमान भस्म आरती व्यवस्था भी लागू रहेगी. 25 दिसंबर से नए साल के पहले सप्ताह तक बिना अनुमति दर्शन करने आने वाले भक्तों को भस्म आरती में भी चलायमान दर्शन होंगे. चार धाम मंदिर से रहेगी दर्शन व्यवस्था महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बताया कि दर्शन आरती चार धाम मंदिर से कतारबद्ध होते हुए महाकाल लोक, मानसरोवर, फैसिलिटी सेंटर से टनल परिसर में पहुंचकर कार्तिक और गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे. इसी प्रकार वीआईपी पुरानी व्यवस्था के तहत नीलकंठ द्वारा से प्रवेश कर शंख द्वार के जरिए अंदर प्रवेश करेंगे. recent visitors 53

केंद्रीय मंत्री ने बताया मिशन मून का पूरा प्लान- ‘2035 तक भारत के पास होगा अपना स्पेस स्टेशन’

नई दिल्ली अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लगातार नए अध्याय लिख रहा है। भारत को कई अंतरिक्ष के मिशन में सफलता हाथ लगी है। आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्धारित की गई हैं। इसको लेकर अपना देश आगे बढ़ रहा है। इस बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह ने बड़ा एलान किया है। केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर लेगा। वहीं, 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि ये विकास वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित करते हैं। भारत के पास होगा अपना स्पेस स्टेशन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह ने कहा," हम 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने जा रहे हैं। इसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा, 2040 तक हम एक भारतीय को चंद्रमा पर उतार सकते हैं।" केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष यान मिशन, गगनयान के लिए भी कमर कस रहा है, जो एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजेगा। पहले अंतरिक्ष यात्री के 2024 के अंत या 2026 की शुरुआत में अंतरिक्ष की यात्रा करने की उम्मीद है। भारत का यह मिशन यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों की श्रेणी में शामिल कर देगा। समुद्र से जुड़े मिशन पर भी काम कर रहा भारत गौरतलब है कि अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों के साथ-साथ भारत महासागर की गहराई का अन्वेषण करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। सरकार के Deep Sea मिशन का उद्देश्य 6,000 मीटर की गहराई पर समुद्र तल का अन्वेषण करने के लिए एक मानव को भेजना है, ये एक ऐसा काम है जो भारत ने पहले कभी नहीं किया है। इसकी जानकारी भी केंद्रीय मंत्री ने दी है। यह मिशन भारत के समुद्री संसाधनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और अन्वेषण में इसकी क्षमताएँ और मजबूत होंगी। recent visitors 63

अधोसंरचना विकास के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधोसंरचना के विस्तार और अत्याधुनिक उपकरणों की खरीदी के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जाये कि सेवाएं समय पर आम नागरिकों तक पहुँचे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों और कैंसर अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि अधोसंरचना विकास के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रक्रिया की सतत मॉनीटरिंग कर समयसीमा के भीतर उपकरण खरीदी का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने सीटी स्कैन, एमआरआई, कैथ लैब, पेट-स्कैन, लाईनैक, और ब्रेकी-थेरेपी जैसे उन्नत उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्रदेश के चिकित्सकीय संस्थानों में औषधि एवं कंज्यूमेबल की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उक्त सामग्री आवश्यकतानुसार संस्थानों में उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने ट्रांसफर पोर्टल की तैयारी की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विभागीय स्तर पर पोर्टल को और अधिक दुरुस्त करने के निर्देश दिये ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री तरुण राठी, एमडी एमपीपीएचएससीएल श्री मयंक अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 57

अब मध्य क्षेत्र विदयुत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को ऑनलाइन नो ड्यूज प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना शुरू

भोपाल ग्राम पंचायत, जिला पंचायत या फिर नगर पालिका, नगर निगम के चुनाव हों या विभिन्‍न सहकारी संस्‍थाओं की सोसायटी के चुनाव हों, प्रत्‍याशियों को बिजली कंपनी से "नो ड्यूज" लेना आवश्‍यक है। लेकिन इसके लिए अब उन्‍हें बिजली कंपनी के दफ्तर में जाने की आवश्‍यकता नहीं है। अब मध्य क्षेत्र विदयुत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को ऑनलाइन "नो ड्यूज" प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना शुरू कर दिया गया है। इसके लिए उपभोक्‍ताओं को अपनी बिजली कनेक्‍शन की संपूर्ण बकाया राशि जमा करके ई-केवायसी की प्रक्रिया को कंपलीट करना होगा। गौरतलब है कि कंपनी उपभोक्ताओं को नित नवीन सेवाएं देने के लिये प्रयासरत है। इसी कड़ी में उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये ऑनलाइन नो ड्यूज प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन की सुविधा प्रारंभ की गई है। इसके लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर Consumer login सेक्शन में मोबाइल नंबर एवं ओटीपी के माध्यम से लॉगिन कर उपभोक्ता "नो ड्यूज" प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिये आवेदन कर सकते हैं। उपभोक्ता द्वारा उसके मोबाइल नंबर से लिंक समस्त कनेक्शनों का ई-केवायसी पूर्ण होने एवं मीटर की कार्य प्रणाली सही पाए जाने पर एवं किसी भी प्रकार का कोई बकाया नहीं होने पर प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ता के मोबाइल नंबर से लिंक अवांक्षित कनेक्शन को हटाया जा सकता है तथा संबंधित कनेक्शन को जोड़ा जा सकता है। कंपनी ने कहा है कि नो ड्यूज प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए पोर्टल पर उपलब्ध विकल्प का चयन कर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके पश्चात कंपनी अधिकारियों द्वारा कार्यवाही पूर्ण होने पर प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकेगा। उपभोक्ता द्वारा दी गई जानकारी का सत्यापन करने पश्चात आवेदन निरस्त या अग्रेषित किया जाएगा। अग्रेषित लंबित आवेदन पर संबंधित उप महाप्रबंधक (शहर / संचा. संधा.) संभाग द्वारा जानकारी का सत्यापन करने पश्चात प्राप्त ओटीपी के माध्यम से आवेदन निरस्त या स्वीकृत किया जा सकता है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद सिस्टम पर प्रमाण-पत्र अपलोड होने के पश्चात उपभोक्ता को एक एसएमएस के माध्यम से प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की जानकारी दी जाएगी।   recent visitors 71