बैंक एफडी घोटाले में राजेंद्र भारती पर फैसला थोड़ी देर में, तय होगा दतिया उपचुनाव का भविष्य

Verdict on Rajendra Bharti in the bank FD scam expected shortly; the future of the Datia by-election will be determined. Datia By Election High Court: विधानसभा उपचुनाव के बीच दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला शुक्रवार को आने की उम्मीद है। बैंक एफडी घोटाले में गुरुवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। यह निर्णय भारती के राजनीतिक भविष्य व दतिया उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस की रणनीति को लेकर अहम माना जा रहा है। बता दें, दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने भारती को 3 वर्ष की सजा सुनाई जिसके बाद विधानसभा से उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई थी। पी. चिदंबरम ने रखा पक्षवरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने भारती का पक्ष रखा। कहा, मामला आपराधिक नहीं, सिविल प्रकृति का है। बैंक स्वयं पहले इसको सिविल मानते हुए सुप्रीम कोर्ट गया था, जहां दोनों पक्षों में समझौता भी हुआ था। कहा, समझौते की राशि अब तक नहीं मिली और संबंधित एफडी अब भी बैंक में सुरक्षित है। recent visitors 20

अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को अनुमति देने वाले तत्कालीन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत की जाए:हाईकोर्ट

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस ए.के. पालीवाल की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अपात्र नर्सिंग कॉलेजों को अनुमति देने वाले तत्कालीन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत की जाए, ताकि उन पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सके। अदालत ने यह आदेश लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के संचालन को चुनौती दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एमपीएनआरसी कार्यालय से 13 से 19 दिसंबर के बीच की सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो गई थी। इसके मद्देनजर, अदालत ने पुलिस आयुक्त भोपाल और साइबर सेल प्रभारी को डिलीटेड सीसीटीवी फुटेज की रिकवरी के प्रयास करने और तत्कालीन रजिस्ट्रार की फोन लोकेशन की जांच करने का आदेश दिया था, ताकि उनकी भौतिक उपस्थिति की पुष्टि हो सके। साथ ही, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच के निर्देश दिए गए थे। सोमवार को हुई सुनवाई में साइबर क्राइम भोपाल ने अदालत को सूचित किया कि डिलीटेड फुटेज को पुनः प्राप्त करने के लिए सामग्री केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, बरखेड़ा बोदर, भोपाल को दी गई है। हालांकि, प्रयोगशाला के निदेशक ने लिखित में सूचित किया कि जांच की समाप्ति की कोई निश्चित तिथि नहीं है। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि निदेशक का रवैया अत्यंत लापरवाहीपूर्ण है और उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके अलावा, सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा अयोग्य घोषित किए गए कॉलेजों को 2018 से मान्यता देने वाले अधिकारियों की सूची भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।   recent visitors 86

किस कानून में लिखा है कि सीएम के कार्यक्रम में निगमायुक्त डीजल भरवाए? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का सवाल

HIGHCOURT ON NO DIESEL PAYMENT जबलपुर ! मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री का सम्मान कार्यक्रम जबलपुर में रखा गया था, जिसमें बसों के डीजल का मामला कोर्ट पहुंच गया है. दरअसल, सीएम के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित की गई बसों में भरे गए डीजल का अबतक भुगतान नहीं किया गया है, जिसके बाद एक पेट्रोल पंप संचालक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. सीएम के कार्यक्रम के लिए 6 लाख का डीजल दरअसल, जबलपुर के आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप के संचालक सुगम चंद्र जैन ने ये याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया था कि 3 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन जबलपुर में किया गया था. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगम के खाद्य अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से आकर निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा था कि निगमायुक्त ने उक्त निर्देश दिए थे. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में लगभग 6 लाख रु का डीजल उनके पेट्रोल पंप से भरा गया था. बिल भुगतान कराने के लिए की कई बार की मांग अगस्त 2024 में याचिकाकर्ता ने बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया. इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान के संबंध में आदेश जारी किए गए थे, पर भुगतान नहीं हुआ. एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि अधिग्रहित बस में डीजल भरने के लिए प्रशासन की ओर से पीओएल जारी किया गया था या नहीं? याचिकाकर्ता ने इसपर जवाब दिया कि सिर्फ मौखिक आदेश जारी किए गए थे. बिना पीओल कैसे भर दिया बसों में डीजल? एकलपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि बिना किसी प्राधिकरण के याचिकाकर्ता ने बसों में कैसे डीजल भरा? इसके साथ ही कोर्ट ने संयुक्त कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से एसोसिएशन व उसके सदस्य को पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कलेक्टर से मांगा जवाब कोर्ट ने इसके अलावा कलेक्टर से जवाब मांगा है कि किस कानून में यह लिखा है कि निगमायुक्त का दायित्व है कि वह मुख्यमंत्री की रैली में लगी बसों में डीजल भरवाए? एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर गोलमाल का मामला प्रतीत हो रहा है. इस संबंध में एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को हलफनामे में जवाब पेश करने के आदेश जारी किए हैं. एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की,,, recent visitors 151

MP हाई कोर्ट ने एमडी एमएस के परिणाम पर रोक रखी बरकरार, खारिज हुई याचिका

जबलपुर एमडी-एमएस कोर्स में दाखिले के लिए नीट पीजी काउंसलिंग में प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट सूची तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने काउंसलिंग के रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी थी। रिजल्ट जारी करने पर लगी इस रोक को हटाने के लिए आवेदन दायर किया गया था, जिसे जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विवेक सराफ की युगलपीठ ने खारिज कर दिया और रोक को बरकरार रखा। रीवा के डॉ. अभिषेक शुक्ला व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि नीट की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाते हुए पीजी कोर्स में दाखिले के लिए मेरिट लिस्ट तैयार की गई थी। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की मेरिट लिस्ट तैयार करने में दूसरी बार नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसके कारण नीट की मेरिट लिस्ट में अच्छी रैंकिंग होने के बावजूद प्रदेश की मेरिट लिस्ट में उनका स्थान नीचे हो गया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पहले राउंड के लिए चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 24 नवंबर की रात 12 बजे तक चलेगी। इसका रिजल्ट 26 नवंबर को घोषित किया जाना है। उन्होंने कहा कि एडमिशन की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हो रहा है और पहले राउंड का रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगाई जाए। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदक को नोटिस जारी करते हुए रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दी। संचालक, मेडिकल एजुकेशन की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस, नई दिल्ली द्वारा मेरिट लिस्ट तैयार की गई है। इसके बाद मध्यप्रदेश में पूरी प्रक्रिया का विधिवत पालन किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन को अनावेदक बनाए जाने का आवेदन स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।  याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से रिजल्ट पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए आवेदन पेश किया गया। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की। recent visitors 78

27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार करने की मांग हाईकोर्ट में खारिज

जबलपुर मध्य प्रदेश में आरक्षण भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर दायर याचिका को जबलपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया था कि 2023 में आयोजित आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी उम्मीदवारों को 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर चयनित किया जाए। याचिका में अपीलकर्ता भूपेंद्र लोधी और 49 अन्य याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में लिखित और शारीरिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद, मेडिकल परीक्षण के लिए 1:7 के अनुपात में चयन किया जाना था। इसके अनुसार, ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था। हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था, जिसे लेकर हाईकोर्ट में मामला लंबित है। कोर्ट ने विभिन्न विभागों में 14 प्रतिशत आरक्षण देने के आदेश दिए थे, लेकिन 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक नहीं लगाई थी। याचिका में कहा गया था कि भर्ती के लिए तीन सूची तैयार की गई हैं: 87 प्रतिशत सामान्य वर्ग, और 13-13 प्रतिशत ओबीसी और अनारक्षित वर्ग के लिए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 14 प्रतिशत आरक्षण के कारण चयन में त्रुटि हुई है और उन्होंने 27 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार मेरिट लिस्ट तैयार करने की अपील की थी। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने अपील खारिज करते हुए कहा कि एकलपीठ का निर्णय सही था और उसमें कोई त्रुटि नहीं है।   recent visitors 68

लव मैरिज करने वाली युवती का परिवार ने किया अपहरण, हाईकोर्ट ने नवविवाहित जोड़े को पुलिस प्रोटेक्शन भी दे रखा

 बालोतरा राजस्थान के बालोतरा जिले में एक चौंका देने वाली घटना सामने आई है. यहां लव मैरिज करने वाली युवती का अपहरण कर लिया गया है. लड़की को आरोपियों ने ऑटो रिक्शा से खींचा और फिर सड़क पर घसीटते हुए ले गए. घटना के वक्त लड़के का परिवार चिल्लाता रहा. बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट ने लव मैरिज के बाद नवविवाहित जोड़े को पुलिस प्रोटेक्शन भी दे रखा था. पूरे घटनाक्रम को लेकर युवती के पति कुलदीप ने पुलिस सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं. कुलदीप का दावा है कि पुलिस ने उन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी, इसलिए युवती के घरवाले ही उसे इस तरह से उठाकर ले गए. दरअसल, बालोतरा जिले के रहने वाले कुलदीप ने पास ही के कस्बे की रहने वाली मंजू से कुछ दिन पहले 11 नवंबर को ही हनुमान मंदिर में शादी की थी, लेकिन इस शादी से लड़की के घरवाले नाखुश थे. पति का शादी के बाद हमने हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए एसपी से भी मुलाकात की थी. लेकिन पुलिस ने हमें किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी. शुक्रवार को हम टैक्सी में सवार होकर मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे. इसी दौरान पत्नी के परिवार के लोग उसे मारपीट कर जबरदस्ती उठाकर ले गए. 20 सेकेंड का वीडियो वायरल पिछले कुछ घंटे से सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो भी जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में स्कॉर्पियो से आए बदमाश एक टैक्सी को रुकवाते हैं और फिर टैक्सी में सवार युवती को जबरदस्ती नीचे उतारकर सड़क पर घसीटते हुए स्कॉर्पियो में डालते हैं. इस दरम्यान लड़की चिल्लाती रहती है. लड़के के परिवार के लोग विरोध करते हैं तो स्कॉर्पियो सवार बदमाश उनके साथ भी मारपीट करते हैं. आसपास के लोग यह देखकर दंग रह जाते हैं. जल्द करेंगे खुलासा इस पूरे मामले पर बालोतरा के एसपी कुंदन कंवरिया ने आजतक को बताया कि घटना के बाद SIT का गठन कर पुलिस ने पूरी रेंज में नाकाबंदी करवाई गई है. आज पुलिस इस पूरे मामले से पर्दा उठाएगी.   recent visitors 77