मोहन सरकार ने उज्जैन, अशोक नगर, हरदा और विदिशा के कलेक्टरों का तबादला किया, 9 तेजर्रार आईएएस अफसरों का एक झटके में ट्रांसफर हुआ.

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन समेत चार जिलों के कलेक्टरों को बदल दिया. राज्य सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार नौ आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है. इसमें कहा गया है कि उज्जैन, अशोक नगर, हरदा और विदिशा के जिला कलेक्टरों का तबादला किया गया है. उज्जैन कलेक्टर को हटाया उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक के पद पर स्थानांतरित किया गया है और उनकी जगह विदिशा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह को नियुक्त किया गया है. हरदा कलेक्टर आदित्य सिंह, सुभाष कुमार द्विवेदी की जगह अशोक नगर के नए कलेक्टर होंगे, जिन्हें जीएडी का अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. सिद्धार्थ जैन हरदा के नए कलेक्टर होंगे, जबकि अंशुल गुप्ता विदिशा जिले के नए कलेक्टर होंगे. बसंत कुर्रे को श्रम विभाग भेजा संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बसंत कुर्रे को श्रम विभाग में अपर सचिव बनाया गया है. अशोकनगर के कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी को उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में भेजा गया है. वहीं इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को उज्जैन सिंहस्थ मेले का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. देवास के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु प्रजापति को कार्यकारी संचालक मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम इंदौर बनाया गया है. शिवांगी जोशी को भोपाल में बड़ी जिम्मेदारी इसके अलावा राजेश कुमार गुप्ता को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन नीति विश्लेषण संस्थान के संचालक पद से हटाकर मध्यप्रदेश शासन में उप सचिव विभाग संस्कृति विभाग बनाया गया है. 2019 बैच की शिवांगी जोशी को जबलपुर संयुक्त कलेक्टर से हटकर मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम भोपाल में महाप्रबंधक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वर्तमान में इंदौर की अपर कलेक्टर और 2018 बैच की अधिकारी सुश्री ज्योति शर्मा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी देवास बनाया गया है. उज्जैन कलेक्टर का पारिवारिक विवाद आया था सामने बीते दिनों उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह का पारिवारिक विवाद सामने आया था। इस घटनाक्रम की चर्चा सीएम हाउस तक पहुंची थी। हालांकि मामले में किसी पक्ष ने कोई शिकायत नहीं की थी। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को भोपाल भेजा गया है। लगातार दूसरे जनसंपर्क संचालक विदिशा के कलेक्टर शिवराज सिंह चौहान के संसदीय मुख्यालय विदिशा में जनसंपर्क विभाग के संचालक रौशन कुमार सिंह को 8 महीने पहले विदिशा कलेक्टर बनाकर भेजा गया था। रौशन को सीएम मोहन यादव का करीबी माना जाता है। रौशन कुमार सिंह के बाद अब जनसंपर्क विभाग के संचालक अंशुल गुप्ता को विदिशा का कलेक्टर बनाकर भेजा गया है। अंशुल विदिशा के दूसरे ऐसे कलेक्टर होंगे जो जनसंपर्क संचालक के बाद विदिशा के कलेक्टर की कमान संभालेंगे। इन अफसरों के पास ये अतिरिक्त प्रभार     जनजातीय कार्य विभाग के पीएस गुलशन बामरा को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को सिंहस्थ मेला उज्जैन के मेला अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।     राज्य योजना आयोग के सदस्य सचिव ऋषि गर्ग को अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। राज्य प्रशासनिक सेवा के दो अफसरों के तबादले     अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल के संचालक राजेश गुप्ता को संस्कृति विभाग में उप सचिव बनाया गया है।     जबलपुर की संयुक्त कलेक्टर को मप्र राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम का महाप्रबंधक बनाया है।     शिवांगी के पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अवर सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार रहेगा। recent visitors 48

MP में जल्द एक और बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 32 अफसरों को मिलेगी नई जिम्मेदारी, कलेक्टर भी बदलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले कुछ महीनों में एक बार फिर बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होना तय है। इसमें करीब 32 आइएएस को सरकार नई जिम्मेदारी देने की तैयारी में है तो प्रभार में टिके मंत्रालय के कई विभागों को स्वतंत्र अफसर भी मिलेंगे। सरकार ने इस फेरबदल में बीते एक साल के दौरान एसीएस, पीएस, सचिव, संभागायुक्त व कलेक्टरों के कामों को आधार बनाने की योजना रखी है।  इसमें ऐसे अफसर जिनके काम के नतीजे अच्छे रहे हैं और सरकार को केंद्र स्तर पर, 16वें वित्त आयोग की प्रजेंटेशन बैठक में व अन्य स्तरों पर सराहना मिली, उनको बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। वहीं किरकिरी कराने वालों की कुर्सी खिसकना तय है। 12 बड़े विभागों का काम प्रभार सूत्रों की मानें तो सरकार प्रदेश को जल्द ही स्वतंत्र कृषि उत्पादन आयुक्त और कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष देने की तैयारी में है। वर्तमान में कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल व कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त जिमा सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे के पास है तो पीडब्ल्यूडी जैसे 12 बड़े विभागों का काम भी प्रभार पर चल रहा है। जिले और संभागों में भी बदलाव संभव प्रदेश के कुछ जिलों के कलेक्टर व संभागों के संभागायुक्त भी बदले जाने हैं। इस बदलाव के कई आधार होंगे। जिनमें जिलों में घटित होने वाली बड़ी घटनाओं को नहीं संभाल पाना, प्रशासनिक चूक के कारण घटना होना, नेताओं की वास्तविक नाराजगी का बार-बार सामने आना, खनिज माफिया व अपराधियों की करतूतें उजागर होना, अलग-अलग स्तर पर कमियों के कारण विपक्ष को मुद्दा मिलना, जैसे बिंदू अहम हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने ऐसे कुछ बिंदुओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द इन बड़े पदों व विभागों में पदस्थापना को लेकर काम के आधार पर ग्रेडिंग सिस्टम अपनाएगी। recent visitors 47

प्रदेश में IAS अफसरों की पोस्टिंग, पंचायत मंत्री के दामाद श्यामवीर सिंह को BDA की कमान; देखें सूची

भोपाल मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले किए हैं। 7 मार्च को जारी आदेश में भोपाल विकास प्राधिकरण के CEO प्रदीप जैन को हटाकर श्यामवीर सिंह को बीडीए की कमान सौंपी गई है। श्यामवीर सिंह पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के दामाद हैं। वहीं आईएएस महेंद्र सिंह कवचे को उज्जैन से दतिया अपर कलेक्टर बनाए गए हैं। मप्र सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी तबादला आदेश के अनुसार, बीडीए के सीईओ रहे प्रदीप जैन को मंत्रालय में उप सचिव नियक्त किया गया है। जबकि, 2018 बैच के IAS अधिकारी श्यामवीर सिंह को भोपाल विकास प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया है। 2018 बैच की आईएएस रूही खान को उद्योग विभाग में उपसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   भोपाल विकास प्राधिकरण में करीब एक साल पहले प्रदीप जैन को सीईओ बनाया गया था। शुक्रवार को जारी आदेश में जैन को बीडीए सीईओ के पद से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ कर दिया गया है। जैन की पोस्टिंग अभी मंत्रालय में किसी विभाग में नहीं की गई है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में पदस्थ अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह कवचे को स्थानांतरित कर अपर कलेक्टर दतिया बनाया गया है। ये दोनों ही अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के हैं। महिला दिवस के पहले रूही को मिला काम केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटीं आईएएस अधिकारी रूही खान को शासन ने उप सचिव एमएसएमई के पद पर पदस्थ किया है। साथ ही उन्हें उप सचिव औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्हें 31 जनवरी को भोपाल में उपस्थिति देने के एक माह से अधिक समय बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पहले सरकार ने जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही पदस्थापना के लिए प्रतीक्षारत आईएएस अफसर श्याम वीर को भोपाल विकास प्राधिकरण का नया मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। दूसरी ओर 5 दिसम्बर 2024 से पदस्थापना के लिए प्रतीक्षारत आशीष भार्गव को अभी काम मिलना बाकी है। श्यामवीर सिंह नरवरिया का परिचय श्यामवीर सिंह नरवरिया भिंड जिले के गोरमी क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव के निवासी हैं। UPSC परीक्षा में 284वीं रैंक हासिल करने के बाद उन्हें लोधी समाज का गौरव माना गया था। श्यामवीर का विवाह मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की बेटी फलित सिंह पटेल से हुआ है।   recent visitors 67

एप अटेंडेंस सिस्टम: एमपी के IAS अधिकारी हाजिरी लगाने तैयार नहीं: सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ऑफिस में रुकना होगा

App Attendance System: IAS officers of MP are not ready to mark attendance भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ भवन में एप से अटेंडेंस का प्रयोग IAS अधिकारियों की बेरुखी के कारण अटक गया है। मंत्रालय में फेस अटेंडेंस सिस्टम को 1 जनवरी से लागू किया जाना था लेकिन ये 1 फरवरी से भी लागू नहीं हो पाया है। अधिकारियों के रजिस्ट्रेशन नहीं होने के चलते इसे फरवरी में भी लागू नहीं किया जा सका है। हालात ये हैं कि जिन प्रशासनिक अधिकारियों पर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है, वह ही नई व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं। वल्लभ भवन में पदस्थ 50 से ज्यादा IAS में से सिर्फ 6 ही आधार बेस्ड फेस अटेंडेंस एप से हाजिरी लगा रहे हैं। आईएएस को भी करनी होगी 8 घंटे नौकरी प्रदेश में इनकम शो करने के बाद अब आईएएस अधिकारियों को काम पर आने-जाने का हिसाब भी देना होगा। आईएएस अधिकारियों को कर्मचारियों की तरह आठ घंटे की ड्यूटी पूरी करनी होगी और इसके लिए जियो टैगिंग बेस्ड एप पर हाजिरी लगानी होगी। मंत्रालय से शुरू किए जा रहे फेस अटेंडेंस एप के माध्यम से हाजिरी लगाने की प्रक्रिया में कर्मचारियों के साथ सभी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। व्यवस्था को लागू करने वाले सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे बताते हैं कि हम केवल कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं कर रहे हैं, बल्कि प्रदेश में पहली बार आईएएस अधिकारियों को भी एप से हाजिरी लगानी होगी। देश में पहली बार ऐसा सबसे बड़ा प्रयोग प्रमुख सचिव दुबे बताते हैं कि इस तरह की अटेंडेंस प्रक्रिया देश का अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रयोग है। अभी तक किसी राज्य ने आधार बेस्ड फेस रिकॉग्नाइजेशन से अटेंडेंस लगानी शुरू नहीं की है। यह बहुत सरल एप है, जो आधार से जुड़ा है। इसे लागू करने वालों से लेकर अटेंडेंस लगाने वालों तक को न तो कोई इक्यूपमेंट खरीदना है, न ही डाटा ही अलग से इकट्‌ठा किया जाना है। बिना बड़े बजट के खर्च किए मंत्रालय के सभी अधिकारियों–कर्मचारियों की उपस्थिति एप के माध्यम से दर्ज हो रही है। प्रदेश भर में लागू होगा एप बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम प्रदेश के मंत्रालय में इस तरह एप से अटेंडेंस लगाने का प्रयोग नए मुख्य सचिव अनुराग जैन के आने के बाद शुरू हुआ है। यह कहा जाता है कि प्रशासनिक मुखिया का विचार है कि सबसे पहले मंत्रालय में सभी अधिकारी-कर्मचारी एक व्यवस्था के तहत नियम से अपने ड्यूटी आवर्स पूरे करें, इसके बाद इस प्रयोग को पूरे प्रदेश में लागू किए जाने की योजना है। इसकी पुष्टि करते हुए सामान्य प्रशासन के प्रमुख सचिव संजय दुबे कहते हैं कि जब मंत्रालय में एप से अटेंडेंस हो सकती है तो बाकी कार्यालयों में क्यों नहीं? हम इसे सफलतापूर्वक यहां लागू करेंगे। इसके बाद कलेक्टर कार्यालयों में और प्रदेश के अन्य कार्यालयों में ले जाया जाएगा। इससे सरकारी कर्मचारियों की यह छवि सुधरेगी कि वे देर से दफ्तर आते हैं और जल्दी चले जाते हैं। जनता में छवि बेहतर होगी तो कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ेगी और प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी। अधिकारी ही बन रहे व्यवस्था में रोड़ा प्रशासनिक मुखिया भले ही बेहतर सोच के साथ नई व्यवस्था को लागू कर रहे हों, लेकिन इसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा प्रशासनिक अधिकारी ही बन रहे हैं। फरवरी के पहले सप्ताह तक 1266 कर्मचारी ऐसे थे, जो अटेंडेंस पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। वहीं, कुल रजिस्टर्ड डिवाइस 755 हैं यानी जिन्होंने अपने एंड्रॉयड डिवाइस में एप डाउनलोड कर लिया है। इनमें से आधे यानी करीब 350 प्रतिदिन इस एप से हाजिरी लगा रहे हैं, लेकिन मात्र 10 प्रतिशत अधिकारी ही इसका पालन कर रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि मंत्रालय में करीब 50 आईएएस पदस्थ हैं। इनमें से छह ही एप की मदद से हाजिरी लगा रहे हैं। हाजिरी लगाने वालों में व्यवस्था को लागू करने वाले विभाग सामान्य प्रशासन के उप सचिव अजय कटेसरिया, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी सहित उनके विभाग के आईएएस तन्वी सुंद्रियाल, राजीव मीणा, रोहित सिंह और लोकेश जाटव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पूरे मंत्रालय से इक्का-दुक्का आईएएस ही इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। 1 से 3.30 तक लंच पर चले जाते हैं आईएएस नायक बताते हैं कि कर्मचारियों के बारे में कहा जाता है कि वह शाम को जल्दी घर चले जाते हैं, लेकिन आईएएस बैठे रहते हैं। हकीकत कौन नहीं जानता, सभी आईएएस एक बजे लंच पर घर चले जाते हैं। साढ़े तीन बजे ही आते हैं। कोई मंत्रालय में लंच टाइम में आईएएस से मिलकर दिखा दे। उनके पास घोड़ा है, गाड़ी है, ड्राइवर है। कर्मचारी दो-तीन बसें बदलकर आता है। recent visitors 204

वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर आईएएस अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जेएन कांसोटिया (1989) को गृह विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार जेएन कांसोटिया (1989) महानिदेशक, आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, मध्यप्रदेश भोपाल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग में भेजा गया है। वहीं अनिरूद्ध मुकर्जी (1993), आवासीय आयुक्त, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) की नवीन पदस्थापना अध्यक्ष राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश ग्वालियर तथा अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) के पद पर की गई है। सचिन सिन्हा (1995), प्रशासकीय सदस्य, राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश, ग्वालियर तथा अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, मध्यप्रदेश, ग्वालियर (अतिरिक्त प्रभार) की नवीन पदस्थापना वि.क.अ. सह-महानिदेशक, आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, मध्यप्रदेश भोपाल में की गई है। इसके अलावा श्रीमती रश्मि अरूण शमी (1994) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग तथा विशेष आयुक्त (समन्वय), मध्यप्रदश भवन, नई दिल्ली तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग (अतिरिक्त प्रभार) को अपने वर्तमान कर्त्तव्यों के साथ-साथ अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक आवासीय आयुक्त, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है।   recent visitors 48

IAS अधिकारी आकाश त्रिपाठी अपनी प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने के पहले राज्य सरकार के आग्रह पर एमपी लौटेंगे

भोपाल   केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ एमपी कैडर के दो आईएएस अधिकारी इसी माह मध्यप्रदेश लौटने वाले हैं। आईएएस अधिकारी आकाश त्रिपाठी अपनी प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने के पहले राज्य सरकार के आग्रह पर एमपी लौटने वाले हैं वहीं दिल्ली में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ रूही खान अपने व्यक्तिगत कारणों एमपी लौटेंगी। प्रमुख सचिव स्तर के 1998 बैच के आईएएस अधिकारी आकाश त्रिपाठी एमपी में इंदौर कलेक्टर रहने के साथ विभिन्न विभागों में उपसचिव और सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। त्रिपाठी अक्टूबर 2022 से भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन मंत्रालय में माय जीओवी के सीईओ के तौर पर काम कर रहे हैं। मोहन यादव सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आकाश त्रिपाठी को एमपी वापस भेजने का आग्रह किया है जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है और माना जा रहा है कि आकाश त्रिपाठी इसी माह एमपी वापस लौट सकते हैं। उनकी वापसी के बाद मोहन सरकार उन्हें किसी महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपने वाली है। दूसरी ओर राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस पद पर प्रमोट होने वाली 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रूही खान अपने व्यक्तिगत कारणों की वजह से केंद्र में प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने के पहले एमपी लौटने वाली हैं। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय ने इसे मंजूरी देते हुए उन्हें पैरेंटल कैडर मध्यप्रदेश लौटने की सहमति दे दी है। रूही खान भी जल्दी ही भोपाल में मंत्रालय में अपनी आमद देने वाली हैं। खान अभी दिल्ली में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में उपसचिव के पद पर पदस्थ हैं।   recent visitors 219

मानव अधिकार आयोग ने IAS अनुपम राजन और निशांत बरवड़े के खिलाफ किया वारंट जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में पदस्थ भारतीय प्रशासनिक सेवा यानि आईएएस के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है। इनमें से एक अधिकारी अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अनुपम राजन और दूसरे आयुक्त (कमिश्नर) निशांत वरवड़े हैं। यह दोनों अधिकारी राज्य के उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं। इनके खिलाफ मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने 5-5 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों अनुपम राजन और निशांत वरवड़े को 22 जनवरी 2025 को आयोग के सामने पेश होने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा एक महिला स्पोर्ट्स ऑफिसर के मामले में कमिश्नर निशांत वरवड़े पर एक अन्य वारंट भी जारी किया गया है। आयोग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य इंजीनियर के खिलाफ भी वारंट जारी किया है। कॉलेज प्रोफेसर ने की थी शिकायत यह मामला एक प्रोफेसर से जुड़ा हुआ है। मोतीलाल विज्ञान कॉलेज (एमवीएम) भोपाल के प्रोफेसर कैलाश त्यागी ने अर्जित अवकाश (एलटीसी) की राशि रोके जाने पर मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग में की थी। त्यागी ने कॉलेज प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने और अपनी राशि ब्याज सहित दिलाने की मांग की थी। इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने अनुपम राजन और निशांत वरवड़े से रिपोर्ट मांगी थी। महिला स्पोर्ट्स अफसर के मामले में भी वारंट बार—बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी दोनों आईएएस अफसरों ने आयोग को कोई जवाब नहीं दिया। इसके कारण आयोग ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। वहीं कमिश्नर निशांत वरवड़े पर एक अन्य वारंट भी जारी किया गया है। एक महिला स्पोर्ट्स अफसर के मामले में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत न करने पर यह वारंट जारी किया गया है। एक इंजीनियर को भी वारंट बताया जा रहा है कि एक महिला स्पोर्ट्स ऑफिसर ने अपने कॉलेज के प्राचार्य पर जातिसूचक टिप्पणी का आरोप लगाया था। इस मामले में भी निशांत वरवड़े ने कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी। एक अन्य मामले में बावड़िया कलां ओवरब्रिज की सड़क में खराबी के मामले में पीडब्ल्यूडी के मुख्य इंजीनियर संजय मस्के ने रिपोर्ट नहीं सौंपी। उनके खिलाफ भी जमानती वारंट जारी किया गया है। recent visitors 133