EOW की टीम ने कि बड़ी कार्यवाही: सहायक राजस्व अधिकारी और प्रभारी बिल कलेक्टर को 40 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाए

EOW की टीम ने कि बड़ी कार्यवाही: सहायक राजस्व अधिकारी और प्रभारी बिल कलेक्टर को 40 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाए

EOW team major action: Assistant Revenue Officer and In-charge Bill Collector caught accepting bribe of 40 thousand rupees इंदौर ! मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं EOW और लोकायुक्त रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर जिले का है जहां सहायक राजस्व अधिकारी को 40 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। इस मामले में प्रभारी बिल कलेक्टर को भी आरोपी बनाया गया है। सील गोदाम को दोबारा खोलने के बदले मांगी रिश्वतशिकायतकर्ता संतोष सिलावट निवासी गीता नगर इंदौर ने 01 अक्टूबर को ईओडब्लयू कार्यालय इंदौर में शिकायत की थी कि उसके गोदाम को निगम के राजस्व अधिकारी द्वारा नोटिस चस्पा कर सील कर दिया गया है और अब सील गोदाम को खोलने हेतु पुनीत अग्रवाल सहायक राजस्व अधिकारी नगर पालिका निगम झोन-19 एवं रोहित साबले, प्रभारी बिल कलेक्टर, राजस्व विभाग, नगर पालिका निगम, झोन क्रमांक 19 उससे 40 हजार रूपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं EOW ने रिश्वत लेते पकड़ाफरियादी संतोष पटेल की शिकायत की जांच के बाद EOW ने रिश्वतखोर अधिकारियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। 3 अक्टूबर को फरियादी संतोष सिलावट को रिश्वत के 40 हजार रूपये देने के लिए सहायक राजस्व निरीक्षक पुनीत अग्रवाल के पास भेजा गया। सहायक राजस्व अधिकारी पुनीत अग्रवाल ने नगर पालिका निगम जोन-19 के दफ्तर में रिश्वत देने के लिए फरियादी को बुलाया और जैसे ही वहां उसने व प्रभारी बिल कलेक्टर रोहित साबले ने रिश्वत की रकम की तो EOW की टीम ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया। recent visitors 106

प्रदेश में लोकायुक्त टीम कि बड़ी कार्यवाही थाने में 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाया रक्षा समिति सदस्य

 Lokayukta team takes major action in the state; Defence Committee member caught red-handed taking a bribe of Rs 30,000 at the police station.  पन्ना । मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कोई न कोई रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारी घूस लेते लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू के हत्थे चढ़ जाता है। ऐसा ही मामला पन्ना जिले के सामने आया है। यहां पर लोकायुक्त ने अमानगंज क्षेत्र के ग्राम रक्षा समिति के सदस्य को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है दरअसल, लोकायुक्त ने मंगलवार रात 10:30 बजे छापा मारा। कार्रवाई में ग्राम रक्षा समिति के सदस्य राममोल नामदेव को 30,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। वहीं भनक लगते ही मुख्य आरोपी प्रधान आरक्षक मुकेश सोनी और आरक्षक सतीष श्रीवास सहित अन्य संदिग्ध मौके से फरार हो गए। लोकायुक्त की टीम देर रात्रि 4 बजे तक फरार आरोपियों की तलाश करती रही लेकिन कामयाबी नही मिली जिसके बाद रक्षा समिति के सदस्य पर कार्रवाई कर प्रकरण अन्य चारों पर भी दर्ज कर लिया गया। पूरे मामले की शुरुआत 27 मई 2025 से शुरु हुई। अमानगंज क्षेत्र के श्यामसुंदर आदिवासी निवासी कोनी के भाई का बाल विवाह होने जा रहा था। जिसकी सूचना पर जिला बाल विवाह नियंत्रण टीम ने मौके पर पहुंचकर विवाह रुकवा दिया। मामले की जानकारी थाना अमानगंज में पदस्थ प्रधान आरक्षक मुकेश सोनी को लग गई। जिसके बाद प्रधान आरक्षक मुकेश सोनी के द्वारा श्यामसुंदर पर दबाव बनाना शुरू किया। थाने बुलाकर कार्रवाई की धमकी दी गई। मामले को दबाने के लिए 50,000 रुपए की रिश्वत मांगी की गई। बाद में समझौते के तहत 45,000 रुपए देने पर सहमति बनी। पहली किस्त के रूप में 15,000 रुपए फरियादी ने पहले ही दे दिए, लेकिन प्रधान आरक्षक बार बार बाकी के 30 हजार रुपए मांग रहा था। जिससे परेसान होकर पीड़ित सागर लोकायुक्त में शिकायत कर दी। फरियादी श्यामसुंदर की शिकायत पर सागर लोकायुक्त टीम के डीएसपी संजय जैन ने कार्रवाई करते हुए मंगलवार की रात अमानगंज थाना क्षेत्र में छापा मारा ।जहां टीम के पहुंचते अफरा-तफरी मच गई। प्रधान आरक्षक मुकेश सोनी और आरक्षक सतीश श्रीवास,रामलाल सोनी सहित बाकी साथ भाग निकले। ग्राम रक्षा समिति का सदस्य राममोल नामदेव रिश्वत की रकम लेते रंगे हाथ पकड़ गया। लोकायुक्त टीम ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी राममोल नामदेव से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार आरोपियों की तलाश जारी है। recent visitors 260

36 हजार की रिश्वत लेते छिंदवाड़ा बीईओ को लोकयुक्त की टीम ने किया गिरफ्तार

छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा जिले में भ्रष्टाचार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। विकास खंड शिक्षा अधिकारी, बिछुआ रजनी अगामे को 36 हजार की रिश्वत लेते हुए लोकयुक्त की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा है। आवेदक रमेश पराड़कर (54), अधीक्षक, शासकीय बालक छात्रावास, धनेगांव, विकास खंड बिछुआ की शिकायत पर ये कारवाई हुई है। आवेदक के अनुसार उसके और विकासखंड बिछुआ के 12 छात्रावास अधीक्षकों से 50 सीटर के कमीशन की राशि 3000 रुपये प्रतिमाह और 100 सीटर के कमीशन की राशि 6000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से सितंबर व अक्टूबर माह की कमीशन की कुल राशि 96000 रिश्वत की मांग की जा रही थी। जानकारी के अनुसार, धनेगांव छात्रावास अधीक्षक रमेश पराडकर ने लोकायुक्त में शिकायत की थी आदिवासी विभाग की विकासखंड शिक्षा अधिकारी रजनी आगामें विकासखंड बिछुआ के 12 छात्रावास अधीक्षकों से 50 सीटर के कमीशन की राशि 3000 रुपए प्रतिमाह और 100 सीटर के कमीशन की राशि 6000 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से सितंबर और अक्टूबर माह की कमीशन की कुल राशि 96000 रिश्वत की मांग कर रही है। जिसकी शिकायत उसके बाद लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत की डिमांड संबंधी रिकॉर्डिंग सुनी और रणनीति बनाकर मंगलवार को उसे ट्रेप कर लिया। दरअसल, रजनी अगामे रिश्वत की पहली किश्त 31000 रुपए लेने को तैयार हो गई थी, जिसे रिश्वत लेते हुए बिछुआ में रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7, के अंतर्गत कार्रवाई की गई है। जबलपुर लोकायुक्त पुलिस को की शिकायत जिसकी शिकायत आवेदक द्वारा पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त जबलपुर को की गई। शिकायत के सत्यापन के लिए रिकॉर्डिंग कराई गई। इसमें रजनी अगामे रिश्वत की प्रथम किश्त 31000 रुपए लेने को तैयार हो गई थी। मंगलवार को आरोपित रजनी अगामे, विकास खंड शिक्षा अधिकारी, बिछुआ के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7, के अंतर्गत कार्रवाई की गई। कार्रवाई करने पहुंची टीम में इंस्पेक्टर रेखा प्रजापति, इंस्पेक्टर मंजू किरण तिर्की, इंस्पेक्टर कमल सिंह उईके और लोकायुक्त जबलपुर का दल शामिल रहा था। विवादित रहा है कार्यकाल रजनी अगामे का कार्यकाल विवादित रहा है। वो पहले भी मंडल संयोजक के पद पर रहते हुए दो बार निलंबित हो चुकी हैं।   recent visitors 69

छतरपुर: लोकायुक्त का छापा, सहकारी कर्मचारी की 213% आय से अधिक संपत्ति बरामद

Lokayukta raid: Action against co-operative society employee for finding assets 213% disproportionate to income छतरपुर ! भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की मुहिम तेज़ी से जारी है। हाल ही में छतरपुर जिले के खजुराहो क्षेत्र में दीपावली से कुछ दिन पहले लोकायुक्त की टीम ने सहकारी समिति के एक कर्मचारी अरूण कुमार गुप्ता के घर पर छापा मारकर उसकी अवैध संपत्ति का खुलासा किया। प्रारंभिक जांच में गुप्ता की कुल आय से 213 प्रतिशत अधिक संपत्ति के प्रमाण सामने आए हैं। कार्रवाई का पूरा विवरणरविवार की सुबह 6 बजे सागर लोकायुक्त की टीम ने छतरपुर की तहसील राजनगर के सहकारी समिति धवाड़ में कार्यरत कर्मचारी अरूण कुमार गुप्ता के घर पर छापा मारा। लोकायुक्त को गुप्ता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की पुष्टि के बाद लोकायुक्त ने यह छापेमारी की। इस दौरान अरूण कुमार के घर से भारी मात्रा में मूल्यवान वस्तुएं, कई लोगों के हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक, और विभिन्न संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए, जो उनकी आय से कहीं अधिक हैं। संपत्ति में अवैध निवेश के प्रमाणलोकायुक्त टीम की जांच में यह पाया गया कि महज 12 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले अरूण कुमार गुप्ता ने अपनी संपत्ति में बेहिसाब तरीके से निवेश किया है। जांच के दौरान अरूण कुमार के पास 10 से अधिक प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, 20 से अधिक चेकबुक, पासबुक, और लगभग 89 लाख 53 हजार रुपये की संपत्ति का दस्तावेजी प्रमाण मिला है। इसके अलावा, गुप्ता के पास ब्याज पर रकम देने के भी प्रमाण मिले हैं। बैंक और वित्तीय जांच बाकीचूंकि रविवार को बैंक बंद थे, इसलिए अरूण कुमार के बैंक खातों की जांच फिलहाल नहीं हो सकी है। बैंक खुलने पर और अधिक वित्तीय जानकारी मिलने की संभावना है। लोकायुक्त ने इस मामले में आगे की जांच के लिए सभी दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। लोकायुक्त का सख्त रुखमध्य प्रदेश में लोकायुक्त लगातार भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, और इस छापेमारी से यह स्पष्ट हो गया है कि आय से अधिक संपत्ति रखने वाले कर्मचारी लोकायुक्त की रडार पर हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकेगी और अन्य कर्मचारियों में भी ईमानदारी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। recent visitors 134