एमपी गजब: शराब पीकर क्लासरूम में सो गए मास्टर साहब, खतरे में बच्चों का भविष्य

Sidhi News MP: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के शिक्षा विभाग में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. वहां पर स्कूली शिक्षा के स्तर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीधी के एक सरकारी स्कूल के मास्टर साहब बच्चों को पढ़ाने के बदले शराब के नशे में टुल होकर क्लासरूम में ही सो गए. जबकि बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते नजर आए. सीधी जिले के सरकारी स्कूलों में यह मामला सामने आने के बाद से शिक्षा विभाग के कर्मचारी और स्थानीय लोग इस घटना पर चिंता जता रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोगों का कहना है कि छात्रों का भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है. अगर इसी तरह शिक्षक और शिक्षा विभाग के अफसर लापरवाह बने रहे तो बच्चों का क्या होगा? ऐसे में तो बच्चों को स्कूल भेजना भी सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है. शराब के नशे में टीचर द्वारा बच्चों को पढ़ाना गंभीर मामला है. यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब मौके पर स्कूल पहुंचे किसी अभिभावक ने अपने मोबाइल में शिक्षक के करतूत को कैद कर लिया. फिर उसके बाद इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कर की. उसके बाद से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है. बता दें की एमपी के स्कूलों में शराब पीकर शिक्षकों के क्लासरूम में सोने की यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले रीवा के एक प्राइमरी स्कूल में भी हेडमास्टर साहब भी शराब के नशे में टुल होकर सोते नजर आए थे. सीधी जिले के ही बमुरहा में ​15 सिंतबर 2024 को स्कूल में शिक्षक शराब के नशे में छात्रों के बैग को तकिया बनाकर सोते नजर आये थे. मामला सामने आने के बाद मास्टर साहब के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के आदेश दिए थे. [/more] recent visitors 247

मध्य प्रदेश को मिलने वाला है नया प्रदेशाध्यक्ष जल्द , इस दिन आएगी सूची

भाजपा जिला अध्यक्ष चुने जाने की मप्र भाजपा की अड़चनें शीर्ष नेतृत्व ने दूर कर दी है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही भाजपा को प्रदेश अध्यक्ष भी मिल जाएगा। इन बिंदुओं पर दिल्ली में शुरू हुई केंद्रीय भाजपा की बैठक में मंथन हुआ। इसमें मप्र भाजपा संगठन पदाधिकारियों का एक दल शामिल रहा। चुनाव को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत हुई। प्रदेश भाजपा ने किया था मंथन प्रदेश भाजपा खुद के स्तर पर मंथन कर रही थी, लेकिन जिला अध्यक्ष चुने जाने को लेकर एक राय नहीं बनी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व की लाइन पर पार्टी बढ़ेगी। प्रत्येक जिले से तीन-तीन नामों का पैनल मंगवाया जाएगा। इसी में से एक नाम संगठन के संज्ञान में लाकर फाइनल किया जाएगा। बता दें कि अध्यक्षों की सूची पांच जनवरी तक आ जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। बूथ व मंडल अध्यक्ष चुनने में अव्वल राष्ट्रीय बैठक में मप्र भाजपा द्वारा बूथ और मंडल अध्यक्ष चुने जाने को लेकर बरती गई पारदर्शिता व सक्रियता चर्चा का विषय रही। सूत्रों के मुताबिक अन्य राज्यों के संगठन को मप्र भाजपा के कामों से सीख लेने की सलाह दी गई। सक्रिय सदस्यता में भी अच्छा काम प्रदेश भाजपा ने सक्रिय सदस्य बनाने में भी अच्छा काम किया। मप्र भाजपा इसमें पहले स्थान पर रहा तो गुजरात को दूसरी व यूपी को तीसरी रैंक मिली। इस पर भी प्रदेश भाजपा संगठन को सरहाना मिली है। पूर्व संगठन मंत्री भी ठोक रहे ताल पार्टी के पूर्व संगठन मंत्री से लेकर पूर्व विधायक तक जिला अध्यक्ष के लिए ताल ठोक रहे हैं। क्षेत्रीय क्षत्रपों से समीकरण बैठाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक कई नेता पूर्व संगठन मंत्रियों के नाम की पुरजोर पैरवी भी कर रहे हैं। ऐसा होता है पार्टी में ही नई लकीर खींची जाएगी। भाजपा संगठन ने सितंबर 2021 में छह संभागीय संगठन मंत्रियों की छुट्टी कर दी थी। शैलेंद्र बरूआ, जितेंद्र लिटोरिया, आशुतोष तिवारी, श्याम महाजन, जयपाल सिंह चावड़ा और केशव सिंह भदौरिया को पद से मुक्त करते हुए पूरी जिम्मेदारी संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को दी गई थी। तीन फैक्टर हावी लंबे समय बाद जिला अध्यक्षों के चुनाव हो रहे हैं। 75 फीसदी जिलों में मौजूदा अध्यक्ष भारी पड़ रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और सक्रिय सदस्यता बनाने में देशभर में बाजी मारी।जमीनी पदाधिकारी दावा ठोक रहे हैं कि वे लंबे समय से बिना पद के काम किए जा रहे हैं। उन्हें निगम मंडलों में जगह नहीं दी गई। कम से कम अब संगठन चुनाव में ही मौका मिल जाए।कई सांसद व भाजपा विधायक भी जोड़-तोड़ में लगे हैं कि उनके गुट का अध्यक्ष हो तो चुनाव लड़ने को लेकर थोड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा भी अध्यक्षों को लेकर कई फैक्टर प्रभावी हैं। recent visitors 162

मनोज श्रीवास्तव बने नए एमपी राज्य निर्वाचन आयुक्त: सीएम सचिवालय में सबसे पावरफुल अफसर रहे; बीपी सिंह का कार्यकाल पूरा

Manoj Srivastava becomes new MP State Election Commissioner: He was the most powerful officer in CM Secretariat; BP Singh’s tenure ends भोपाल । रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश के नए राज्य निर्वाचन आयुक्त बन गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार शाम को आदेश जारी कर दिया है। इससे पहले आयोग के आयुक्त रहे बसंत प्रताप सिंह का 6 माह का अतिरिक्त कार्यकाल 31 दिसंबर पूरा हुआ है। इसके चलते राज्य शासन ने आज ही राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर नई नियुक्ति के आदेश जारी किए। श्रीवास्तव के पहले इस पद पर पूर्व मुख्य सचिव वीरा राणा और रिटायर्ड एसीएस मलय श्रीवास्तव की भी दावेदारी थी। वीरा राणा का आदेश ऐन मौके पर रुका थाइसके पहले 30 सितम्बर को पूर्व मुख्य सचिव वीरा राणा के रिटायरमेंट के दिन उन्हें नया राज्य निर्वाचन आयुक्त बनाए जाने के आदेश जारी होने वाले थे। राज्य निर्वाचन आयोग में इसकी तैयारी भी कर ली गई थी और बीपी सिंह ने स्टाफ को हाई-टी देकर खुद को कार्यमुक्त भी बता दिया था। हालांकि अनुराग जैन को मुख्य सचिव बनाने का आदेश जारी होने के बाद समीकरण बदल गए। इसके बाद वीरा राणा काे राज्य निर्वाचन आयुक्त बनने का फैसला टल गया। 30 जून को खत्म हो गया था सिंह का कार्यकालइससे पहले राज्य निर्वाचन आयुक्त रहे बीपी सिंह का कार्यकाल 30 जून 2024 को खत्म हो गया था। तब सरकार ने किसी नए आयुक्त को नियुक्ति नहीं देते हुए बीपी सिंह को ही पद पर बने रहने के आदेश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि राज्य निर्वाचन आयुक्त कार्यकाल पूरा होने के बाद 6 माह तक पद पर बने रह सकते हैं। recent visitors 186

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन पर कसा तंज: ‘कर्ज़ में डूबा प्रदेश, बढ़ रही मुख्यमंत्री की संपत्ति

मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश कर्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री की संपत्ति दिन-ब-दिन बढ़ रही है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मध्यप्रदेश पर प्रति व्यक्ति क़र्ज़ ₹52,000 है, और कुल मिलाकर प्रदेश पर लगभग ₹4 लाख करोड़ का कर्ज़ है। उन्होंने इसे प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति का परिचायक बताया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देश के पांचवें सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान, उनकी कुल चल संपत्ति ₹5.66 करोड़ थी, जबकि उनकी पत्नी सीमा यादव के पास ₹3.23 करोड़ की संपत्ति थी। इसके अतिरिक्त, उनकी अचल संपत्ति का मूल्य ₹13.36 करोड़ और उनकी पत्नी की ₹18.75 करोड़ था। रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ₹931 करोड़ की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सबसे कम ₹15 लाख की संपत्ति है। देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति ₹1630 करोड़ है। उमंग सिंघार ने कहा, “प्रदेश गर्त में जा रहा है और विकास हो रहा है तो केवल मुख्यमंत्री की तिजोरी का।” उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के साथ अन्याय और आर्थिक प्रबंधन में विफलता बताया। भारत की 2023-24 की प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय ₹85,854 थी, जबकि मुख्यमंत्रियों की औसत आय ₹13,64,310 है, जो औसत आय का लगभग 7.3 गुना है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में कर्ज़ बढ़ाने की नीतियां जनता के हित में नहीं हैं और इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों को मिल रहा है। उमंग सिंगार ने मुख्यमंत्री से उनकी संपत्ति में हुई वृद्धि का स्पष्टीकरण मांगा है। नेता प्रतिपक्ष के इन आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री या सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या जनता इन मुद्दों को आगामी चुनावों में गंभीरता से लेगी। recent visitors 368

वाटर फॉल, नर्मदा नदी और प्राचीन मंदिर…जबलपुर के भेड़ाघाट में मनाइए नए साल का जश्न

भेड़ाघाट ! जबलपुर के पास स्थित एक शांत और ऐतिहासिक स्थल है, जो संगमरमर की वादियों, धुआंधार जलप्रपात, और पवित्र नर्मदा नदी के लिए प्रसिद्ध है. यहां के प्राचीन मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करना हर पर्यटक के लिए अविस्मरणीय होता है. यह स्थल विशेष रूप से नए साल के जश्न या किसी भी खास अवसर पर शांति और सुकून का आनंद लेने के लिए सही है. https://youtu.be/V5wcMkX490o?si=TF8QyG53-KavifTw भारत में प्रकृति की अपार धरोहरें हर कोने में फैली हुई हैं, और मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर इन धरोहरों का प्रमुख केंद्र है. अगर आप नए साल का जश्न प्रकृति के करीब और शांत वातावरण में मनाना चाहते हैं, तो जबलपुर का भेड़ाघाट और इसके आसपास के स्थल आपके लिए आदर्श स्थान हो सकते हैं. जबलपुर को ‘संस्कारधानी’ के नाम से भी जाना जाता है, और यह शहर नर्मदा नदी के किनारे स्थित है. इस शहर के प्रमुख स्थल भेड़ाघाट, बरगी डेम, धुआंधार जलप्रपात, 64 योगिनी मंदिर, त्रिपुर सुंदरी मंदिर और अन्य ऐतिहासिक स्थल न केवल प्रकृति की मनमोहक सुंदरता का अनुभव कराते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और पौराणिक कथाओं के महत्व को भी जीवित रखते हैं. संगमरमर वादियों में नाव की सैर, रोपवे से धुआंधार का नज़ारा, और नर्मदा की लहरों का संगीत इस अनुभव को यादगार बना देंगे. इसके साथ बरगी डेम में क्रूज पर भी यात्रा कर सकते है. भेड़ाघाट का प्रमुख आकर्षण धुआंधार जलप्रपात है, जहां नर्मदा नदी लगभग 30 मीटर की ऊंचाई से गिरती है. गिरते हुए पानी से उठता झाग धुएं जैसा प्रतीत होता है, इसलिए इसे ‘धुआंधार’ नाम दिया गया. इसकी तुलना अक्सर नियाग्रा फॉल्स से की जाती है. रोपवे के जरिए इस जलप्रपात का दृश्य और भी रोमांचक बनता है. भेड़ाघाट में संगमरमर के पहाड़ नर्मदा नदी के साथ दो किलोमीटर तक फैले हुए हैं. इन संगमरमर की चट्टानों में सफेद, गुलाबी, हरी, और काली रंगों की छटा देखने को मिलती है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इन वादियों का दृश्य और भी मनोरम होता है. संगमरमर की इन चट्टानों के बीच ‘बंदर कूदनी’ नामक स्थान है, जहां चट्टानों की निकटता के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि एक बंदर कूदकर इसे पार कर सकता है. यह स्थल कई पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों से जुड़ा हुआ है. यह 9वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर भेड़ाघाट के पहाड़ पर स्थित है. यह मंदिर शक्ति.पासना का केंद्र था और इसे तांत्रिकों की विश्वविद्यालय माना जाता है. मंदिर में चौसठ योगिनियों की मूर्तियां हैं, जो हरियाली लिए पीले बलुआ पत्थरों से बनी हैं. इस मंदिर का निर्माण कल्चुरी राजाओं द्वारा किया गया था. भेड़ाघाट से कुछ दूरी पर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर कल्चुरी काल की उत्कृष्ट कृति है. यहां देवी के तीन रूप महाकाली, महालक्ष्मी, और महासरस्वती की पूजा होती है. यह स्थान तीन शहरों की सुंदर देवियों के वास का प्रतीक है. लम्हेटा घाट पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने यहां लक्ष्मण के साथ शिव की आराधना की थी. इंद्र गया वह स्थान है जहां इंद्रदेव ने अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन किया था. यह स्थान आज भी धार्मिक कर्मकांडों के लिए प्रसिद्ध है. यह स्थान नर्मदा किनारे डायनासोर के अंडों के अवशेषों के लिए जाना जाता है. यहां डायनासोर के जीवाश्म मिलने के प्रमाण भी मिले हैं, जो इसे वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं. भेड़ाघाट के संगमरमर वादियों में कई फिल्मों की शूटिंग हुई है. यह स्थान भारतीय फिल्म उद्योग के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है. भेड़ाघाट में नाव यात्रा पर्यटकों के लिए विशेष अनुभव है. नाविक की रोचक कमेंट्री, जिसमें ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का जिक्र होता है, सैर को और भी यादगार बनाती है. नए साल के जश्न या किसी भी अन्य अवसर पर भेड़ाघाट एक अद्भुत पर्यटन स्थल है. यहां के प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थान परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए उपयुक्त हैं. भेड़ाघाट न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए एक अनमोल धरोहर है. इसकी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और पौराणिक कहानियां इसे विशेष बनाती हैं. यह स्थान न केवल देखने और महसूस करने का है बल्कि आत्मा को शांति और सुकून देने वाला है. यहां की यात्रा हर किसी को जीवन में एक बार अवश्य करनी चाहिए. recent visitors 285

देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री में डॉ मोहन यादव ,,,,,, वें स्थान पर ,ताजा रिपोर्ट से मचा हड़कंप

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव(Dr Mohan Yadav) देश के पांचवें सबसे अमीर सीएम है। विधानसभा चुनाव 2023 के समय डॉ. मोहन यादव के पास 1.41 लाख व पत्नी सीमा के पास 3.38 लाख नकद थे। रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू 931 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (15 लाख रुपए) के पास सबसे कम संपत्ति है। वहीं देश के 31 मुख्यमंत्रियों(Richest Chief Ministers) की कुल संपत्ति 1630 करोड़ रुपए है। 2023-24 में भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय लगभग, 85, 854 थी, जबकि एक मुख्यमंत्री की औसत आमदनी 13, 64, 310 रुपए है, जो औसत प्रति व्यक्ति आय का लगभग 7.3 गुना है। चल संपत्ति: विस चुनाव 23 के समय डॉ. मोहन(CM Mohan Yadav) यादव के पास 1.41 लाख व पत्नी सीमा के पास 3.38 लाख नकद थे। डॉ. यादव के पास 5.66 करोड़, पत्नी के पास 3.23 करोड़, परिवार के पास 59.66 लाख और बेटा अभिमन्यु के पास 42.96 लाख की चल संपत्ति थी।अचल संपत्ति का विवरण: डॉ. मोहन यादव के पास चुनाव के पहले 13.36 करोड़ और पत्नी सीमा पास 18.75 करोड़ की अचल संपत्ति थीं।चुनाव के पहले मोहन यादव पर 5.75 करोड़, पत्नी सीमा पर 1.86 करोड़, परिवार पर 4 लाख रुपए की देनदारियां थीं। recent visitors 271

LPG सिलेंडर का दाम 1 जनवरी से बदल रहा! जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा भारी

LPG GAS CYLINDER PRICE 2025 नए साल के मौके पर आपकी रसोई के बजट को या तो झटका लग सकता है या फिर बड़ी राहत भी मिल सकती है. दरअसल, हर महीने की एक तारीख को गैस कंपनियां एलपीजी के दामों का रिव्यू कर उन्हें घटाने बढ़ाने का फैसला लेती हैं. लंबे समय से कंपनियों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में परिवर्तन नहीं किया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2025 को LPG गैस के दामों में बदलाव हो सकता है. 2025 में कितने बढ़ सकते हैं घरेलू LPG सिलेंडर के दाम? नए साल की पहली तारीख को घरेलू LPG सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे, ये फैसला तो 1 जनवरी 2025 को ही होगा, लेकिन अगर कीमतें बढ़ती हैं तो इसमें आमतौर पर 50 से 100 रु का अंतर किया जाता है. बात करें पिछले जनवरी 2023 औरक जनवरी 2024 की तो नव वर्ष की पहली तारीखों को घरेलू गैस सिलेंडर समेत सभी गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. ऐसे में माना जा रहा है कि इस वर्ष घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ाई जा सकती हैं. 2024 में कितनी बढ़ी-घटीं एलपीजी की कीमतें? मार्च 2024 में घरेलू गैस सिलेंडर में और जुलाई 2024 में कर्मशियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई थी. इसके बाद अगस्त, सितंबर और नवंबर 2024 में कर्मशियल एलपीजी की कीमतों को बढ़ाया गया. वहीं घरेलू गैस सिलेंडर के दाम मार्च 2024 से ही स्थिर बने हुए हैं. मध्यप्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में 31 दिसंबर 2024 को 14.2kg वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 808 रु 50 पैसे हैं. मध्यप्रदेश में सिलेंडर का ये रेट मार्च 2024 से ही स्थिर हैं. यानी लगभग 9 महीनों से घरेलू गैस सिलेंडर के दामों ये बदलाव नहीं हुआ है. इससे पहले इसमें बदलाव मार्च 2024 में हुआ था, जब घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 100 रु की कटौती की गई थी. मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में घरेलू व कमर्शियल सिलेंडर के दाम शहर कीमतें (घरेलू सिलेंडर) कीमतें (कमर्शियल सिलेंडर) भोपाल 808 रु 50 पैसे 1824 रु जबलपुर 809 रु.50 पैसे 2036 रु 50 पैसे इंदौर 831 रु 1926 रु ग्वालियर 886 रु 2047 रु 50 पैसे recent visitors 303