wedding parties: में खाना बनाने और बनवाने वाले हो जाएं सावधान,शासन ने जारी की गई नई एडवाइजरी

Those who prepare or prepare food for wedding parties should be careful, government has issued a new advisory. शिवपुरी: बीते दिनों शिवपुरी के एक शादी समारोह में खाना खाने से 100 से ज्यादा लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी. इसी मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन हरकत में आ गया है. जिला कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी ने शादी समारोह समेत विभिन्न आयोजनों में खाना बनाने को लेकर एक खास एडवाइजरी जारी की है. इस एडवाइजरी में मैरिज गार्डन संचालक, होटल संचालक, रेस्टोरेंट और डेयरी मालिकों की भी जिम्मेदारी तय कर दी गई है. खाने की क्वालिटी को लेकर जिम्मेदारी तय कलेक्टर द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि होटल और मैरिज गार्डन संचालक अथवा कार्यक्रम आयोजक ऐसे लोगों को खाना बनाने का ठेका देंगे जो खाद्य सुरक्षा और मानव प्राधिकरण के पोर्टल पर रजिस्टर्ड सामान का इस्तेमाल करते हैं. आयोजक खाना बनाने वालों या केटरर के साथ एग्रीमेंट करेंगे कि क्या-क्या चीजें खाने में बनाई जाएंगी. भोजन को गुणवत्ता पूर्ण रखने की जिम्मेदारी खाना बनाने वाले और कार्यक्रम संचालक दोनों की होगी. साथ ही आदेश में कहा गया है कि खाना बनाने वाले (केटरर) और कार्यक्रम संचालक दोनों को खाना बनाने में प्रयोग होने वाली सामग्री में से 2 किलो 7 दिनों तक बचाकर रखना होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर इन नमूनों की जांच की जा सके. पैक सामग्री को लेकर भी नियम इसी के साथ पैक सामग्री के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है. पैक सामग्री का इस्तेमाल करने के बाद एक्सपायरी डेट, लॉट नंबर और बैच नंबर को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 7 दिनों बाद तक सुरक्षित रखा जाएगा. वहीं, दूध, दही, पनीर, मावा इत्यादि को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर फ्रिजर में रखने को कहा गया है. खाना बनकर तैयार होने के बाद 4 घंटे के कंज्यूम करना होगा. बासा खाना किसी को खाने के लिए नहीं दिया जाएगा और ना ही बांटा जाएगा. अगर 500 सौ से अधिक लोगों का खाना एक साथ बनाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाए कि खाना बनाने वाला व्यक्ति या उस कार्य में शामिल किसी व्यक्ति को कोई संक्रामक रोग न हो. recent visitors 165

छिंदवाड़ा, शहडोल और सिंगरौली के एसपी बदले: 10 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर

SP of Chhindwara, Shahdol and Singrauli changed: 10 IPS officers transferred भोपाल ! मध्यप्रदेश शासन ने सोमवार को 10 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की। साथ ही राज्य पुलिस सेवा के भी दो अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं। देखिए लिस्ट recent visitors 117

बम जैसा फटा गैस सिलेंडर, 50 लोग झूलसे, गंभीर हालात में भर्ती

Gas cylinder exploded like a bomb, 50 people burnt, admitted in critical condition छतरपुर । बीच बाजार गैस सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया। हादसे में 38 लोग झुलस गए। इनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। 34 घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। वहीं, 4 मामूली घायलों का बिजावर के निजी क्लिनिक पर ही इलाज किया गया। घटना रविवार दोपहर ढाई बजे बिजावर के बस स्टैंड पर हुई। घायलों में शामिल एक स्थानीय दुकानदार नीलू बघेल ने बताया कि पेटीज के ठेले पर सिलेंडर से पहले गैस लीक हुई और फिर ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट के बाद मची भगदड़ घायलों ने बताया कि पेटीज की दुकान में तीन सिलेंडर रखे हुए थे। इनमें से एक फट गया। रविवार को बाजार लगता है इसलिए वहां बहुत भीड़ थी। धमाके के बाद भगदड़ जैसे हालात बन गए। आसपास के 100 मीटर तक के दायरे में लपटें उठीं। कई लोगों ने भागने की कोशिश की, फिर भी जल गए। recent visitors 204

Happy Birthday : कमलनाथ का व्यक्तित्व व कृतित्व जनसेवा के लिए समर्पित

18 November Happy Birthday: Kamal Nath’s personality and work are dedicated to public service भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और नौ बार सांसद रहे कमलनाथ के लिए जन सेवा ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य है। स्वर्गीय इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे माने जाने वाले कमलनाथ के जन्मदिवस पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर निगाहें डालें तो पिछले 45 वर्ष से छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय कमलनाथ मितभाषी और मृदुभाषी नेताओं में से एक हैं। भारतीय राजनीति के शीर्ष चार नेताओं में शामिल होने के बाद भी उदारता और सहजता उनका स्वभाव है। उनके चाहने वाले तो आज भी उन्हें वर्तमान युग का दानवीर कर्ण ही मानते हैं। कमलनाथ के सार्वजनिक जीवन पर दृष्टि डालें तो उनका बुनियादी लक्ष्य हमेशा से यही रहा है कि समाज के सबसे कमजोर लोग, सबसे कमजोर इलाके और सबसे कमजोर वर्ग को किस तरह से अधिक से अधिक फायदा पहुंचाया जा सके। वह भी इस तरह कि लाल फीताशाही की भूमिका न्यूनतम हो जाए। इसी लक्ष्य को निगाह में रखकर उन्होंने जन कल्याण का जो मॉडल अपनाया उसी को आज देश और दुनिया छिंदवाड़ा मॉडल के नाम से जानती है। केंद्र की राजनीति में अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली पदों पर रहते हुए कमलनाथ ने अपनी भूमिका सिर्फ यहां तक सीमित नहीं की कि वे छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाएं पहुंचा दें, उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि वह परियोजनाएं बहुत तेजी से लोगों के पास पहुंचे और उनका स्वरूप इस तरह का हो कि वे भविष्य में भी रोजगार और विकास का सृजन करती रहे। जैसे, जब उन्होंने छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का जाल बिछाया तो उनकी निगाह में यह बात रही कि सड़क लोगों को आवागमन में तेजी तो उपलब्ध कराएंगी ही, साथ ही इनके निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा और सबसे बढ़कर छोटे-छोटे गांव से लेकर कस्बों तक और बड़े शहरों तक आर्थिक गतिविधि में तेज आएगी, जो पूरे इलाके की आर्थिक समृद्धि में और खुशहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई की। इसी तरह 1980 के दशक में ही उन्होंने इस बात की कल्पना कर ली थी कि आने वाले समय में समाज और देश के आर्थिक विकास में निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान होगा। इसीलिए उन्होंने बड़ी-बड़ी निजी कंपनियों की उत्पादन इकाइयों को छिंदवाड़ा और आसपास के इलाकों में स्थापित कराया जिससे रोजगार का स्थाई साधन छिंदवाड़ा की जनता के लिए उपलब्ध हुआ। यह दोनों काम करते हुए भी उन्होंने यहां की परंपरागत कोयला खदान को पहले से ज्यादा मजबूत किया और जब तक उनकी औद्योगिक उपयोगिता रही तब तक इन कोयला खदानों ने नए छिंदवाड़ा को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छिंदवाड़ा से नेशनल हाईवे और रेल मार्ग जोड़ना भी कमलनाथ की इसी विकास दृष्टि का परिचायक है। इन्हीं सब पहलुओं को मिलाकर छिंदवाड़ा मॉडल का विकास हुआ है। कमलनाथ जब दिसंबर 2018 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो अपनी इसी जनकल्याणकारी दृष्टि को उन्होंने मध्य प्रदेश के समग्र विकास पर केंद्रित किया। उन्होंने सबसे पहले फैसला यह किया कि मध्य प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ किया जाए। जब किसान कर्ज के बोझ से मुक्त हो जाएंगे तो उनकी आमदनी बढ़ेगी और उनके पास जो सर प्लस पैसा आएगा उससे वे खरीदारी करेंगे। जीवन स्तर को सुधारेंगे। इस तरह से पूरे मध्य प्रदेश की आर्थिक गतिविधि को नई ऊंचाई मिलेगी। जब बैंकों ने किसानों का कर्ज माफ करने में ना-नुकुर की तो कमलनाथ जी ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर ऐसी चाणक्य नीति का परिचय दिया कि बैंक बड़ी आसानी से कर्ज माफ करने के लिए तैयार हो गए और सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ा। सरकार बनने के तुरंत बाद उन्होंने 27 लाख किसानों का कर्ज माफ कर दिया और अगर सरकार नहीं गिराई जाती तो मध्य प्रदेश के करीब 3 करोड़ किसानों का कर्ज़ वर्ष 2021 तक माफ हो चुका होता। किसानों के साथ ही कमलनाथ ने शहरी नागरिकों के लिए बिजली के बिल सस्ते कर दिए और ₹100 में 100 यूनिट बिजली उपलब्ध कराकर एक किस्म का चमत्कार कर दिया। उनकी दृष्टि समाज के वंचित वर्गों पर पड़ी और वृद्ध, विधवा, विकलांग तथा अन्य तरह की पेंशन को उन्होंने तुरंत दोगुना कर दिया। हनुमान जी के भक्त कमलनाथ के लिए धर्मार्थ कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसीलिए उन्होंने अपने कार्यकाल में राम वन गमन पथ, महाकाल कॉरिडोर, ओरछा के राम राजा मंदिर के लिए विशेष प्रावधान किया तथा गौ माता की रक्षा के लिए 1000 गौशालाओं के निर्माण के आदेश दिए। बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए कमलनाथ बेरोजगारी भत्ता देना चाहते थे और उसके साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर सिंगल विंडो सिस्टम के आधार पर प्रदेश में ऐसी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का खाका तैयार कर लिया था जो बड़े पैमाने पर मध्य प्रदेश के नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार दे। सामाजिक न्याय उनके लिए हमेशा से शीर्ष प्राथमिकता रहा है इसलिए कमलनाथ जी की सरकार ने एक तरफ तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए प्रदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया और दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था की। कमलनाथ के जन हितैषी कार्यों से जनता में हर्ष की लहर दौड़ गई और मध्य प्रदेश विकास के राजमार्ग पर सरपट दौड़ने लगा। इससे विरोधी दलों में खलबली मच गई और फिर कुछ गद्दारों के सहयोग से विपक्षी दलों ने कमलनाथ सरकार गिरा दी। लेकिन इससे कमलनाथ जी के जन कल्याण के इरादे पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह एक विधायक और समाजसेवी के रूप में आज भी मध्य प्रदेश और छिंदवाड़ा की सेवा में संलग्न है। चाहे दिल्ली हो भोपाल हो या छिंदवाड़ा आज भी अगर कोई जरूरतमंद अपना कोई भी काम लेकर कमलनाथ के पास जाता है तो भी यथाशक्ति उसकी मदद करने की न सिर्फ कोशिश करते हैं बल्कि मदद प्रदान भी करते हैं। इसलिए उनका जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्ति का जन्मदिन नहीं है बल्कि ऐसी विचारधारा और संस्था का जन्मदिन है जिसे अपना संपूर्णए जीवन जन-जन की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। recent visitors 575

दृश्य देखिए और फिर सरकारी दावा, हमारी आस्था भी,,,,?

See the scene and then the government’s claim, our faith also,,,,? इंदौर । कार्तिक पूर्णिमा को,नदी में स्नान करना और दीपदान करना चाहिए ऐसा कहां भी जाता है माना भी जाता है। नर्मदा नदी,चंबल नदी, कालीसिंध नदी, श्रिपा नदी कुछेक और हमारे प्रदेश में है। यह दृश्य श्रिपा गांव का है और श्रिपा नदी का है तथा इंदौर देवास सड़क के पूल से मैंने ही लिया है। इस क्षैत्र के जनप्रतिनिधि मप्र शासन के जल एवं सिंचाई विभाग के केबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट है,,, तो इंदौर, उज्जैन के लिए श्रिपा नदी महत्वपूर्ण,,। इसके सामने के क्षेत्र में गांव के पास तट, मंदिर है वो थोड़ा साफ है। गंदगी होती,गंदे नाले का पानी आता तो मैं दृष्टिकोण अपना अलग रखता यह तो कज्जी है, मतलब पानी बहता हुआ नहीं है, एकत्रित पानी है,,,। और सरकारी ध्यान भी नहीं  धर्म आस्था और श्रद्धा का संगम आदिकाल से, कालांतर से चल रहा, पंरतु जागरुकता भी चलती रही, ईस्तेहार देकर करोड़ों रुपए खर्च करके इंवेट करने से नदी, जलाशय, तालाब स्वच्छ निर्मल नहीं हो सकते उसके खातिर सजगता और चाक चौबंद निगाहें भी चाहिए,,,कार में भले शीशे हो पर निगाह बान निगाहें चाहिए, सैकड़ों लोग रोज निकलते हैं पर आवाज भी निकलती, हम श्रिपा नदी की यह हालत देख रहे,, नर्मदा नदी की भी हालत भी बताऊंगा खूद जाकर देखकर,, क्या अधिकारियों को जनप्रतिनिधि गणों को नहीं दिखता, धार्मिक संगठन और सामाजिक संगठन चुप क्यों, सजगता की आवश्यकता है नदी पूजते हैं तो पूज्यनीय स्थल ऐसे होंगे, करोड़ों रुपए हर माह तनख्वाह बंटती है अधिकारियों की तनख्वाह में किस लिए,,, मैंने लिखा था मैं तह तक जाकर सही स्थिति हर नदी और तालाब की हर माह जाकर एक खुलासा करूंगा,,,। श्रिपा नर्मदा लिंक परियोजना के नाम पर खेल हुआ, जहां मां श्रिपा नदी का उद्गम हुआ वे वहां से 7किलो मीटर दूर तक विलुप्त है,,, उसके बाद आगे प्रगट होती है और श्रिपा नदी का यह रुप श्रिपा गांव में दिखता है,एक तट साफ है जहां मंदिर है। दुसरा तट ऐसा, जल्दी ही मैं आगे बढती इसी नदी का रुप दिखाऊंगा तथा फिर फैक्ट्री आदि मिलते फिर उज्जैन में रामघाट, मंगलनाथ मंदिर सामने का, फिर ड्रैनेज चैम्बरों के पानी के मिलते दृश्य, इंवेट और मैनेजमेंट को हकीकत का आईना दिखाइये,, मेरा यह अभिमत  “प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट” recent visitors 132

बुंदेलखंड की शान: डॉ. हरीसिंह गौर की जयंती पर बुंदेली परंपरा और युवा उत्सव का संगम, सोहर’ गाएंगी महिलाएं

Pride of Bundelkhand: On the birth anniversary of Dr. Harisingh Gaur, women will sing ‘Sohar’, a confluence of Bundeli tradition and youth festival. सागर ! बुंदेलखंड की शान डॉ. हरीसिंह गौर का जन्मदिन इस बार बुंदेली परंपरा से मनाया जाएगा. अपने जीवन भर की जमापूंजी दान कर बुंदेलखंड में आजादी के पहले यूनिवर्सटी की सौगात देने वाले महान कानूनविद और शिक्षाविद डॉ. हरीसिंह गौर की जयंती इस बार ‘गौर गौरव उत्सव’ के रूप में मनाई जाएगी. खास बात ये है कि 26 नवम्बर को उनके जन्मदिन के साथ ही सेंट्रल जोन की यूनिवर्सिटीज का यूथ फेस्टिवल सागर यूनिवर्सटी में शुरू होगा, जो गौर गौरव उत्सव का हिस्सा होगा. इस तरह करीब 100 यूनिवर्सटी के 1500 छात्र-छात्राएं अपनी कला का प्रदर्शन कर डॉ. सर हरीसिंह गौर की जयंती मनाएंगे. बुंदेली परंपरा के साथ जन्मदिन डॉ. हरीसिंह गौर जयंती को बुंदेली परम्परा के अनुसार मनाया जाएगा. दरअसल, बुंदेलखंड में किसी शिशु के जन्म लेने पर ननिहाल पक्ष जो उपहार लेकर पहुंचता है, उसे ‘पच’ कहते हैं. तो यहां के लोग 500 किताबें पच में लेकर पहुंचेंगे. वहीं बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं ‘सोहर’ गाएंगी और ग्रामीण इलाकों में शिशु के जन्म पर आयोजित होने वाले गनता (जन्मोत्सव) में बुंदेली राई नृत्य भी देखने मिलेगा. डॉ. हरी सिंह गौर की 155वीं जयंती सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड के लिए डॉ. सर हरीसिंह गौर की जयंती किसी उत्सव से कम नहीं होती है. सागर जहां उन्होंने अपने जीवन की जमापूंजी दान करके यूनिवर्सटी की स्थापना की वहां पर सार्वजनिक अवकाश के साथ सुबह से ही गौर जयंती पर एक से बढ़कर एक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. इसी कड़ी में इस बार सुखद संयोग बना है कि गौर जयंती के साथ ही सेंट्रल जोन के यूथ फेस्टिवल का आयोजन करने का मौका सागर यूनिवर्सटी को मिला है. ये यूथ फेस्टिवल भी 26 नवम्बर को गौर जयंती के साथ शुरू होगा. कार्निवाल के अंदाज में निकलेगी विशाल रैली डॉ. हरीसिंह गौर के जन्मदिन पर परम्परा है कि यूनिवर्सटी में उनकी जयंती मनाए जाने के पहले गौर मूर्ति पर माल्यार्पण कर प्रभात फेरी निकलती है. इसमें शहर के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विश्वविद्यालय परिवार और बड़ा संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते हैं. सभी यूनिवर्सिटी में डाॅ. गौर की समाधि तक पैदल जाते हैं, जहां श्रृद्धाजंलि अर्पित करने के बाद मुख्य कार्यक्रम आयोजित होता है. इस बार दोपहर में विशाल रैली निकलेगी, जिसमें यूथ फेस्टिवल में पहुंचने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए नाचते गाते जाएंगे. वहीं स्थानीय सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाएं भी शामिल होंगी और कार्निवाल की माहौल होगा. क्या है तैयारी? सागर यूनिवर्सटी के सांस्कृतिक संयोजक बताते हैं, ” हम लोगों के पितामह की 155वीं जयंती पर हम लोग गौर गौरव उत्सव करने जा रहे हैं. इसमें सेंट्रल जोन के 12 से 15 सौ छात्र कलाकार यूथ फेस्टिवल में शिरकत करेंगे. इस अवसर पर 26 नवम्बर को दोपहर दो बजे गौर मूर्ति से रैली निकलने वाली है, जिसमें सभी सहभागी छात्र पारम्परिक वेशभूषा में अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए चलेंगे. जहां तक बुंदेली परम्परा की बात करें, तो यहां के लोकनृत्य, लोकगीत देखने सुनने मिलेंगे. हमारी ग्रामीण अंचल की महिलाएं डॉ. गौर के जन्मदिन पर सोहर गाएंगी. उनके जन्मदिन पर ये नया प्रयोग है.” recent visitors 329

बुलडोजर संस्कृति पर उच्चतम न्यायालय प्रहार।

Supreme Court attacks bulldozer culture. जब आज से पांच महीने पहले मेने बुलडोजर संस्कृति पर लिखा,,गलत को गलत लिखा, बुलडोजर घर पर नहीं अपराधी पर चले, निरपराधी परिजनों पर कहर नहीं अपराधी को संरक्षण देने वाले पर कहर बरपे।बहुतेरे ने अपने सवाल जवाब किए, पर अब जब उच्चतम न्यायालय ने भी लगभग सुर वहीं छेड़ा तो मुझे लगा,निश्चल भाव मन व सोच का भाव सत्यता की लकीरें हमेशा जीत दिलाती है।अपराधी को सजा मिले कठोर से कठोर मिले, अपराधी के संरक्षकों को भी मिले पर निरपराधी परिजनों को नहीं।चिड़िया जिस तरह तिनका तिनका जोड़कर घोंसला बनाती है बच्चों को सुरक्षित रखने खातिर तो व्यक्ति भी यही करता है, अपराधी तो मेहनत नहीं करता, मेहनत करने वाले परिस्थिति जन्य अपराधी बनते हैं आदतन नहीं होते, परिस्थिति में दुर्भाग्य भी कारक होता है। पर आदतन तो अंधेरी गुफा में स्वयं जाता है। ।।अपराधी का अपराध पहला है, देशद्रोही अपराधी है, समाज या व्यवसाय, महिला शोषणकारी व्यवस्था का अंग है या शोषणकारी, समझने की आवश्यकता है फिर कठोर सजा मिले।बुलडोजर चला आज क्यों, अतिक्रमण दिखा आज क्यों,था तो पहले कौन-कौन दोषी,,, बुलडोजर आज ही क्यों, सुनवाई अवसर क्यों नहीं सबकुछ अधिकारियों को तय करना है।नहीं कानून हैं देश में हिटलरशाही नहीं चलेगी न्यायालय का चाबुक चलेगा न्याय अनुसार चलेगा,।साधुवाद उच्चतम न्यायालयप्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट recent visitors 136