मुख्यमंत्री यादव की उपस्थिति में वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय और एमपीसीएसटी के बीच अकादमिक और वैज्ञानिक सहयोग हेतु MoU पर हस्ताक्षर

सीहोर  वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय, सीहोर और मध्य प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (MPCST), भोपाल के बीच शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025 के अवसर पर आयोजित किया गया था और इसमें मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर, माननीय मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा में उत्कृष्टता केंद्र (Centre for Excellence in STEM Education) का उद्घाटन किया, जो राज्य में वैज्ञानिक शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक अग्रणी पहल है। इसके साथ ही, उन्होंने छात्रों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जहां उन्होंने युवा नवाचारकर्ताओं से बातचीत की और उनकी नवीन अनुसंधान और तकनीकी उपलब्धियों की सराहना की। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के प्रो वाइस-चांसलर डॉ. टी. बी. श्रीधरन और एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी द्वारा हस्ताक्षरित इस समझौता ज्ञापन (MoU) से शोध, छात्र प्रशिक्षण और बहु-विषयक वैज्ञानिक प्रयासों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस समझौते के तहत, दोनों संस्थान निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग करेंगे: •    नई वैज्ञानिक परियोजनाओं पर संयुक्त शोध। •    छात्रों और संकाय के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच। •    ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाओं, सेमिनारों और सम्मेलनों का आयोजन। •    राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध अनुदानों के लिए संयुक्त प्रस्तावों का प्रस्तुतिकरण। •    शैक्षणिक संसाधनों, वैज्ञानिक प्रकाशनों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आदान-प्रदान। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका को आत्मनिर्भर और प्रगतिशील मध्य प्रदेश के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने वीआईटी भोपाल और MPCST द्वारा अनुसंधान को बढ़ावा देने और छात्रों के बीच नवाचार को प्रेरित करने के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि STEM शिक्षा में उत्कृष्टता केंद्र और यह समझौता राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम में डॉ. पुष्पिंदर सिंह पथेजा, डीन, स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस एंड इंजीनियरिंग (SCOPE), डॉ. पोन हर्षवर्धनन, डीन, स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस, इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (SCAI), वीआईटी भोपाल, अन्य विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद ,साथ ही प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, छात्रों और सरकारी अधिकारियों की भागीदारी रही, जिससे यह मध्य प्रदेश में शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अवसर बन गया। यह समझौता प्रारंभ में तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से पाँच वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है। दोनों संस्थानों ने इस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने और छात्रों, शोधकर्ताओं तथा व्यापक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। recent visitors 29

मध्यप्रदेश अपने समृद्ध टैक्सटाइल और परिधान उद्योग के कारण एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपने समृद्ध टैक्सटाइल और परिधान उद्योग के कारण एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश की कृषि समृद्धि, पारंपरिक बुनकर समुदायों की उत्कृष्ट कला, आधुनिक औद्योगिक आधार और निवेशक-अनुकूल नीतियाँ राज्य में टैक्सटाइल सेक्टर को सशक्त बना रही हैं। जीआईएस-जीआईएस-भोपाल का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को देश की 'कॉटन कैपिटल' घोषित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की प्रसिद्ध चंदेरी और माहेश्वरी साड़ियों, बाघ प्रिंट, छीपा हैंड-ब्लॉक प्रिंट और बटिक प्रिंट की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी बताया कि देश के सात बड़े टैक्सटाइल पार्कों में से एक मध्यप्रदेश में स्थापित किया जा रहा है। भोपाल में राज्य सरकार के प्रयासों से देश-विदेश के निवेशकों ने रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की है कि मध्यप्रदेश भारत के टैक्सटाइल और एपैरल हब के रूप में स्थापित हो रहा है। जीआईएस भोपाल में टैक्सटाइल निवेश को बढ़ावा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में टैक्सटाइल उद्योग में निवेश को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला। प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 21 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव में अधिकांश टैक्सटाइल उद्योग को प्राप्त है। इससे युवाओं के लिये 1.3 लाख से अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग और निवेश संवर्धन विभाग के अंतर्गत 8,616 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित हुआ है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 60 से अधिक बड़ी टैक्सटाइल मिलें संचालित हैं। साथ ही इंदौर के रेडीमेड गारमेंट और अपैरल क्लस्टर में 1,200 से अधिक इकाइयां उत्पादन कर रही हैं। पीएम मित्र पार्क: रोजगार और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मध्यप्रदेश के धार जिले में बन रहा पीएम मित्र पार्क देश का सबसे बड़ा टैक्सटाइल पार्क है। इसमें एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पीएम-मित्र पार्क प्रदेश को टैक्सटाइल उद्योग में नये सिरे से स्थापित करेगा। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल क्षेत्र: महत्वपूर्ण तथ्य मध्यप्रदेश में भारत के 43% जैविक कपास का उत्पादन होता है। विश्व में प्रदेश के कपास उत्पादन का योगदान 24% है। प्रदेश में कपास का उत्पादन 31 हजार 700 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। इसलिए इसे कॉटन कैपिटल कहा गया है। मलबरी सिल्क को मिलाकर 200 मीट्रिक टन सिल्क का उत्पादन होता है। नवीन टैक्सटाइल नीति-2025 से उद्योगों को मिल रहा प्रोत्साहन मध्यप्रदेश सरकार ने टैक्सटाइल उद्योग के लिए नई नीति लागू की है, जिसमें निवेशकों को कई वित्तीय और गैर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। नीतिगत प्रावधानों में प्लांट और मशीनरी में किए गए निवेश पर 10 से 40% तक की राशि निवेश संवर्द्धन सहायता के रूप में उद्यमियों को दी जाएगी। इस पर 5 से 7% तक ब्याज अनुदान भी 5 वर्ष तक दिया जाएगा। इकाइयों में बिजली, पानी और सड़क अधोसंरचना निर्माण के के लिए 1 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। साथ ही इकाइयों के परिसर में कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए 1 करोड़ रुपये तक की ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन सब्सिडी भी दी जाएगी। एपैरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलने पर 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। पहली बार 5 लाख रुपये तक के पेटेंट शुल्क की 100% वापसी, पेटेंट मिल जाने पर दी जाएगी, साथ ही पेटेंट प्रक्रिया में भी सरकार आवश्यक सहायता करेगी। प्रधानमंत्री मोदी के 5एफ-विजन को मध्यप्रदेश ने दिया मूर्त रूप प्रधानमंत्री मोदी ने जीआईएस-भोपाल में टैक्सटाइल एवं गारमेंट सेक्टर के विकास के लिए "5-एफ विजन'' फार्म, फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और फॉरेन का मंत्र देते हुए कहा कि देश और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में उत्पाद मूल्य श्रृंखला के सभी तत्व मौजूद हैं। इनमें फार्म के अंतर्गत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए कपास और रेशम किसानों से कच्चे माल के उत्पादकों को जोड़ना। ‘फाइबर’ में फाइबर निर्माण और प्र-संस्करण इकाइयों का प्रदर्शन सुधारना, जो उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जबकि, ‘फैक्ट्री’ के तहत प्रदेश के वस्त्र निर्माण और औद्योगिक उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को उजागर करना शामिल है। ‘फैशन’ में परिधान डिजाइन, ब्रांडिंग और वस्त्र उद्योग के रचनात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना और ‘फॉरेन’ में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत कर निर्यात अवसरों को बढ़ावा देना आता है। मध्यप्रदेश ने विजन को साकार करते हुए कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। टैक्सटाइल सेक्टर में पूर्व में प्राप्त हो चुका है 3,513 करोड़ रुपए का निवेश प्रदेश सरकार की नई टैक्सटाइल नीति से प्रदेश को पीएलआई योजना के अंतर्गत 3,513 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हो चुका है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त राज्य में स्थापित मेगा टैक्सटाइल पार्कों के माध्यम से ब्यावरा और नीमच में बड़े निवेश आ रहे हैं। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल उद्योग के क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक समृद्धि को बनाए रखते हुए आधुनिक औद्योगिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के अनुकूल नीतियों, टैक्सटाइल पार्कों, और विशेष आर्थिक पैकेजों के माध्यम से राज्य न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। बड़ी कंपनियां कर रही हैं मध्यप्रदेश में निवेश ओबीटी प्रायवेट लिमिटेड के सीईओ इंगो सोयलर ने बताया कि उनकी कंपनी टेक्निकल नॉन वूवन फेब्रिक मैन्यूफैक्चरिंग में लीडिंग है। उन्होंने बताया कि ओबीटी कम्पनी 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर भोपाल में उद्योग स्थापित कर रही है। इसी तरह अरविंद ग्रुप के हेड कॉर्पोरेट अफेयर्स डॉ. परम शाह ने बताया कि उनकी कम्पनी मध्यप्रदेश में 800 करोड़ से अधिक का निवेश करने जा रही है। recent visitors 43

मोहन यादव ने कहा कि बालाघाट से मेरा अलग लगाव, नक्सलियों को भी दिया खुला चैलेंज

बालाघाट  मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव बालाघाट के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने बालाघाट को कई सौगातें दी हैं। सीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में बालाघाट जिले की सूरत ही बदल जाएगी। किसान सम्मेलन के दौरान सीएम ने 326 करोड़ 60 लाख रुपए के विकासकार्यों का भूमिपूजन और 264 करोड़ रुपए के विकासकार्यों का लोकार्पण किया। इस राशि से जिले में स्कूल, अस्पताल और पुलों का निर्माण होगा। इसके साथ ही मोहन यादव ने नक्सलियों को भी चुनौती दी है। नक्सलवाद के लिए कोई जगह नहीं सीएम मोहन यादव ने नक्सलवाद को खुली चुनौती देते हुए कहा कि नक्सलवाद के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है। अगर बाहर से कोई नक्सली आएगा तो जिंदा वापस नहीं जाएगा। दरअसल, बालाघाट में लगातार हॉक फोर्स नक्सलियों को ढेर कर रही है। बालाघाट से अलग लगाव किसान सम्मेलन में सीएम मोहन यादव ने कहा कि मेरा बालाघाट से अलग ही तरह का लगाव है। हमारे प्रदेश के 54 जिले एक तरफ और बालाघाट एक तरफ। बालाघाट खनिज का बड़ा केंद्र है। परमात्मा ने इस जिले पर प्रेम लुटाया है। यहां के चिन्नौर का चावल अलग ही महकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रेदश विकास के नई कीर्तिमान बना रहा है। बालाघाट में नए उद्योग लग रहे हैं। आजादी के बाद से मध्यप्रदेश की विकास दर माइनस में थी। लेकिन, अब हमारे राज्य की ग्रोथ 13 फीसदी है। जिले में विकास कार्यों की सौगात गौरतबल है कि सीएम डॉ. यादव की घोषणा के बाद बालाघाट जिले में कुल 326 करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से 117 अलग-अलग काम होंगे। इसमें 62 करोड़ रुपए की लागत से 39 कार्यों का भूमि पूजन शामिल है। 24 करोड़ रुपए की लागत से बारासिवनी में विकास काम होंगे। 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। 9 करोड़ रुपए की लागत से लामदा में नवगठित तहसील कार्यालय भी बनाया जाएगा। 8 करोड़ रुपए की लागत से खरपड़िया-सिवनहेटी-कटंगी मार्ग बनाया जाएगा। 3 करोड़ रुपए की लागत से स्कूल-शिक्षा के काम होंगे। 2 करोड़ रुपए की लागत से कटंगीझरी-लोमता-डोरिया-बेलगांव में प्राथमिक स्कूल का निर्माण होगा। सीएम राइज स्कूल-हॉस्टल-पुल का भी निर्माण मोहन यादव ने कहा कि 264 करोड़ रुपए के 68 कामों का लोकार्पण भी किया। इसमें 145 करोड़ रुपए की लागत से बालाघाट-बिरसा-बारासिवनी-मलाजखंड-लालबर्रा में बना सीएम राइज स्कूल, 55 करोड़ रुपए की लागत से बालाघाट के बेहर-पसरवाड़ा-खेरलांजी में स्कूलों का उन्नयन-छात्रावासों का निर्माण, 10 करोड़ रुपए की लागत से पुल-पुलियाओं का निर्माण, 9 करोड़ रुपए की लागत से बारासिवनी-खंडवा पुल का निर्माण, 7 करोड़ 26 लाख रुपए की लागत से शहीद चंद्रशेखर आजाद एक्सट्रोटर्फ का लोकार्पण शामिल हैं। युवाओं-किसानों को लाभ इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार 5 साल में 2 लाख पद भरेगी। साल 2028 तक हम युवाओं को भरपूर रोजगार देंगे। recent visitors 31

मध्य प्रदेश में निवेशकों के लिए 19 नीतियां बदली, निवेश की दृष्टि से अनंत संभावनाओं वाला प्रदेश: CM यादव

इंदौर मध्य प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की अपेक्षा से बेहतर उपलब्धि ने मध्य प्रदेश की आंखों में नया सपना बसा दिया है, औद्योगिक निवेश में देश का नंबर एक प्रदेश बनने का सपना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहते हैं कि हर दृष्टि से अनुकूल वातावरण पाकर उद्योग जगत मध्य प्रदेश पर मोहित है। आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश अपनी निवेश संबंधी नीतियों और उपलब्धियों से बाकी प्रदेशों को रोशनी देगा। अब मध्य प्रदेश कई अन्य सेक्टरों की तरह औद्योगिक निवेश में भी देश का नंबर एक प्रदेश बनकर ही चैन लेगा। 26 लाख करोड़ रुपसे से ज्यादा का निवेश प्रस्ताव उल्लेखनीय है कि 24 और 25 फरवरी को भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश-विदेश के निवेशकों ने मध्य प्रदेश सरकार की नीतियों पर भरोसा जताते हुए 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश के प्रस्ताव रखे हैं। इससे पहले आयोजित कई क्षेत्रीय औद्योगिक सम्मेलनों के प्रस्ताव जोड़कर यह आंकड़ा 30 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है। औद्योगिक निवेश का अच्छा माहौल बनाया मुख्यमंत्री स्वाभाविक रूप से इस उपलब्धि पर उल्लसित हैं यद्यपि इसके लिए उन्होंने अथक प्रयास किए। डॉ.मोहन यादव बताते हैं कि मुख्यमंत्री की भूमिका में अपने अब तक करीब 14 महीने के कार्यकाल में करीब तीन महीने की अवधि उन्होंने औद्योगिक निवेश का अच्छा माहौल बनाने में समर्पित की। राज्य सरकार ने निवेशकों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए अपने संबंधित विभागों की 19 नीतियां बदल दीं। खुद मुख्यमंत्री अपनी टीम के साथ विदेश, देश और मध्य प्रदेश के निवेशकों से मिले और उन्हें अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दूसरे राज्यों में कम निवेश प्रस्ताव आए डॉ. यादव गर्व के साथ कहते हैं कि पिछले दिनों गैर भाजपा शासित राज्यों बंगाल और कर्नाटक में भी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की गईं, यद्यपि इन राज्यों में मध्य प्रदेश के क्षेत्रीय औद्योगिक सम्मेलनों से भी कम निवेश प्रस्ताव आए। मुख्यमंत्री इस आशंका को आधारहीन ठहराते हैं कि पिछले कई अनुभवों की तरह निवेशक अपनी प्रतिबद्धता से मुकर जाएंगे। वह दावा करते हैं कि प्रदेश सरकार निवेशकों से कुछ भी नहीं छिपा रही। सरकार की कार्यशैली पूरी तरह पारदर्शी है। इस वजह से उद्योग जगत की नजर में सरकार की विश्वसनीयता बढ़ी है। सरकार निवेश को लेकर गंभीर निवेशक सभी पहलुओं पर सोच-समझकर प्रस्ताव दे रहे हैं, इसलिए उनके पीछे हटने का सवाल नहीं पैदा होता। उनका कहना है कि राज्य सरकार निवेश को लेकर बेहद गंभीर है और अपनी जवाबदेही समझती है। सरकार निवेशकों को लाभदायी और उत्साहवर्धक माहौल उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री इस अभियान के भविष्य को लेकर अत्यधिक आशावान हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते हैं कि मध्य प्रदेश निवेश की दृष्टि से अनंत संभावनाओं वाला प्रदेश है। अब तक सिर्फ गिने-चुने सेक्टरों में ही निवेश प्रस्ताव आए हैं जबकि इस दृष्टि से तमाम संभावनापूर्ण सेक्टर अब तक अछूते हैं। प्रदेश सरकार की टीम ऐसे सेक्टरों की स्थिति पर रिसर्च कर रही है। सरकार भविष्य में उद्योग जगत के सामने सभी संभावनाओं का विवरण रखेगी। वह बताते हैं कि निवेशकों के साथ संवाद अब लगातार जारी रहेगा। इस क्रम में अगले महीने इंदौर में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की तैयारी चल रही है। recent visitors 29

सागर-दमोह रोड को फोर लाइन बनाया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बुंदेलखंड वीरों की धरती, वीरों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता: मुख्यमंत्री 2600 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी पर गेहूं उपार्जित करेगी सरकार:मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री गढ़ाकोटा में सांस्कृतिक “रहस’’ मेले और किसान सम्मेलन में हुए शामिल सागर-दमोह रोड को फोर लाइन बनाया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर के गढ़ाकोटा में तीन दिवसीय सांस्कृतिक “रहस’’ मेले में आयोजित किसान महा सम्मेलन में कहा कि बुन्देलखण्ड वीरों की धरती है। वीरों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने किसानों के लिए बड़ी सौगात देते हुए कहा कि सरकार अब किसान भाईयों से 2600 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदेगी। उन्होंने कहा कि सागर-दमोह रोड को फोरलेन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से 5 हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के हितलाभ भी वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा सीमा पर जवान और खेत पर किसान को सम्मान देने का कार्य किया जा रहा है। किसान की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में बुंदेलखंड की लाखों हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन बचाकर रखें, उन्हें उनकी जमीन का पूरा लाभ मिलेगा और उनकी कृषि समृद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के किये कार्यों का प्रभाव है कि काम के बल पर ही आज वो लगातार 9 बार से अपराजेय राजनेता बने हुए हैं। सरकार प्रदेश में बहनों को सरकारी नौकरी में 35 प्रतिशत आरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ सरकार बहनों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है, वहीं पूर्व मंत्री भार्गव के द्वारा 21 हजार से अधिक बेटियों की शादी कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभी तक मैंने 9 रस ही देखे थे आज मैंने 10वां रस भी देख लिया। इस रहस मेला के आनंद में जो 10वां रस मिला है वह अद्भुत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इस वर्ष किसान भाइयों का गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल खरीदेगी और अगले वर्ष यह बढा़कर 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का मैं वादा करता हूं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार चावल पर 2000 रुपए प्रति हैक्टेयर बोनस दिया जाएगा। इसी प्रकार दूध का उत्पादन करने वालों को भी बोनस दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान के सपने को प्रधानमंत्री मोदी पूरा कर रहे हैं। इसमें केन-बेतबा लिंक परियोजना के माध्यम से बुंदेलखंड को लाभान्वित करने का कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार महाराष्ट्र सरकार से मिलकर भी नदी जोड़ो अभियान प्रारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने फूड इंडस्ट्रीज लगाने वालों को सरकार 40 प्रतिशत सब्सिडी देगी। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक युवाओं की आबादी वाला देश है। मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा संचालित लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी सभी योजनाएं जारी रहेंगी। उन्होंने सागर के संपूर्ण विकास के लिये संकल्प लेते हुए कहा कि इसके लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के हित के लिए लगातार कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। किसान खुशहाल होगा तो देश और प्रदेश खुशहाल होगा। किसानों को योजनाओं का लाभ देने के लिए किसान मेला एवं कार्य-शालाओं का लगातार आयोजन किया जा रहा है। दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सरकार मध्यप्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लिए लगातार नवाचार कर रही है। देश एवं विदेश के उद्योगपतियों को भोपाल-जीआईएस में आमंत्रित कर उद्योगों की नगरी बनाने के लिए बुंदेलखंड, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर में रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर क्षेत्र को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। विधायक एवं पूर्व मंत्री भार्गव ने कहा “रहस मेला’’ 220 वर्ष पुराना मेला है। वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा ने कहा था इस मेले को और आगे बढ़ाएं। हमने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. पटवा को मेले का पूरा इतिहास बताया, तत्कालीन मुख्यमंत्री पटवा ने मेले को और समृद्ध बनाने के लिए निर्देशित किया था। विधायक एवं पूर्व मंत्री भार्गव ने कहा कि विलुप्त हो रहे मेलों को आगे बढ़ाने का कार्य सरकार कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने “रहस मेले’’ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए लगातार कार्य किया है। विधायक भार्गव ने कहा कि “मैं रहूँ या न रहूँ’’ यह रहस मेला हमेशा चलता रहेगा। इस अवसर पर मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, सांसद श्रीमती लता वानखेडे, विधायक भूपेन्द्र सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि शामिल थे। मेला अध्यक्ष अभिषेक दीपू भार्गव ने स्वागत भाषण में मेले की विस्तार से जानकारी दी।   recent visitors 34

1 लाख करोड़ रूपये के ऐतिहासिक एमओयू से प्रगति का मार्ग होगा प्रशस्त: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य के प्रत्येक कोने को आपस में जोड़ने और आर्थिक विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए आधुनिक सड़क अवसंरचना तैयार है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट भोपाल के पहले ही दिन, हमारी सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ 1 लाख करोड़ रूपये के ऐतिहासिक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये एमओयू राज्य में 4010 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं के निर्माण और विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इससे मध्यप्रदेश भविष्य में न केवल देश का, बल्कि दक्षिण एशिया का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये समझौते केवल सड़कें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और बेहतर जीवनशैली के लिए आधार स्तंभ साबित होंगे। उन्होंने कहा कि जब कोई राज्य मजबूत सड़क नेटवर्क से जुड़ता है, तो वहां व्यापार, निवेश और उद्योगों की वृद्धि भी स्वाभाविक रूप से होती है। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को भारत का सबसे विकसित और आधुनिक राज्य बनाना है, और यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक सड़क परियोजनाएं जो मध्यप्रदेश के भविष्य को आकार देंगी जीआईएस-भोपाल में हुए इन ऐतिहासिक एमओयू से कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का विकास होगा। जीआईएस-भोपाल में सड़क अवसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिये एमओयू पर हस्ताक्षर हुए है। इनमें इंदौर-भोपाल ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर, भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर, प्रयागराज-जबलपुर-नागपुर कॉरिडोर, लखनादौन-रायपुर एक्सप्रेसवे, आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग, उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग, इंदौर रिंग रोड (पश्चिमी और पूर्वी बायपास), जबलपुर-दमोह राष्ट्रीय राजमार्ग, सतना-चित्रकूट राष्ट्रीय राजमार्ग, रीवा-सिद्धी राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्वालियर शहर के पश्चिमी छोर पर 4-लेन बायपास शामिल है। नवीन सड़क परियोजनाएं न केवल मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों से जोड़ेंगी, बल्कि राज्य के प्रमुख शहरों को भी आपस में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इससे यात्रा का समय घटेगा, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन की लागत कम होगी, तथा कृषि, उद्योग, पर्यटन और व्यापार क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे। राज्य के आर्थिक विकास में योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोई भी राज्य तभी प्रगति करता है जब वहाँ सशक्त बुनियादी ढांचा, कुशल परिवहन प्रणाली और मजबूत आर्थिक मॉडल उपलब्ध होते हैं। इन समझौतों से मध्यप्रदेश को एक नए औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब सड़कें बेहतर होंगी, तो उद्योगों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी। इससे मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित होंगे और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। किसान अपने उत्पादों को तेजी से मंडियों और शहरों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। राज्य की पर्यटन स्थलों तक पहुँचने में सुगमता आएगी। इससे पर्यटन उद्योग को भी नया जीवन मिलेगा। इस परियोजना के तहत हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। सड़क निर्माण के दौरान इंजीनियर, श्रमिक, तकनीकी विशेषज्ञ और स्थानीय उद्यमी इससे लाभान्वित होंगे। नई सड़क परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स, होटल, रेस्तरां और अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। टाइम बाउंड प्रोजेक्ट: समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार तेज़ी से परियोजनाओं को लागू करने और समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सभी परियोजनाओं को विश्व स्तरीय तकनीक, टिकाऊ निर्माण प्रक्रियाओं और उच्च गुणवत्ता वाले मानकों के साथ विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित विभागों को हर आवश्यक सहायता प्रदान कर ये परियोजनाएँ तय समय सीमा के भीतर पूरी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत भी कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री मोदी के “विकसित भारत” मिशन का म.प्र प्रमुख केन्द्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज़ी से वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश इस योजना का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का सपना भारत को एक $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का है। जीआईएस-भोपाल में हुए एमओयू उसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहल है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, मध्यप्रदेश देश की सबसे आधुनिक और कुशल परिवहन प्रणाली वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा। भविष्य की दृष्टि: आत्म-निर्भर और विकसित मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश में इन ऐतिहासिक समझौते (एमओयू) के साथ एक नए युग की शुरुआत हो रही है। ये परियोजनाएँ राज्य के प्रत्येक नागरिक को एक उज्जवल भविष्य देने का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कितेज़, सुरक्षित और विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क, बेहतर लॉजिस्टिक्स और व्यापार के अवसर, उद्योगों के लिए आसान परिवहन और निर्यात के नए मार्ग, सड़क निर्माण से लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर और हर नागरिक के लिए सुगम और सुविधाजनक यात्रा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह परियोजनाएँ केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव हर गाँव, हर शहर और हर नागरिक तक पहुँचे।   recent visitors 30

मुख्यमंत्री ने बड़तूमा सागर में निर्माणाधीन संत रविदास मंदिर के निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़तूमा सागर में निर्माणाधीन संत रविदास मंदिर के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सागर में संत रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने मंदिर निर्माण कार्य में लगे शिल्पियों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत रविदास मंदिर के मॉडल का अवलोकन कर विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत रविदास मंदिर निर्माण पर आधारित चलचित्र (वीडियो प्रदर्शनी) को देखा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को परिष्कृत करने, सहेजने और सामाजिक समरसता में संतों की भूमिका से लोगों को परिचित कराने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता से आज संत रविदास मंदिर विशाल आकार में मूर्तरूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि यह भव्य मंदिर और संग्रहालय आस्था के साथ-साथ देश-दुनिया के लोगों को भारत की महान संत परम्परा की विचारधारा और संत‍शिरोमणि रविदास जी के जीवन से परिचित कराने वाला अद्भुत केंद्र बनेगा। मध्यप्रदेश के प्राचीन महत्वपूर्ण शहर सागर में संत रविदास के जीवन मूल्य व विरासत को मंदिर संग्रहालय के माध्यम से देश-दुनिया में उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है। संत रविदास के ईश्वर के प्रति समर्पण भाव से लोगों को परिचित कराना मंदिर संग्रहालय का केंद्रबिंदु बनेगा। बगैर आयरन के तैयार किये जा रहे 66 फ़ीट ऊंचे संत रविदास मंदिर का लाल पत्थर से नागर शैली में निर्माण किया जा रहा है। मंदिर के गर्भगृह, अंतराल मंडप और अर्धमंडप का रोड से 5 फ़ीट ऊँचा फाउंडेशन बनने के बाद नक्कासीदार पत्थरों के 72 पिलर लगाए गये हैं। इन पिलरों पर मंदिर का ऊपरी ढांचा खड़ा किया जायेगा। मंदिर के आसपास चार गैलरियों का निर्माण किया जा रहा है जहाँ संत रविदास के जीवन को विस्तृत और आधुनिक संसाधनों की मदद से प्रस्तुत किया जायेगा। पुस्तकालय में संत रविदास की आध्यात्मिक व धार्मिक पुस्तकों को संग्रहित किया जायेगा। बड़तूमा सागर में 101 करोड़ रूपए की लागत से कुल 11 एकड़ क्षेत्रफल में निर्माणाधीन संत रविदास मंदिर प्रांगण में 9 हजार वर्गफ़ीट में मंदिर निर्माण, 15 हजार वर्गफ़ीट में म्यूजियम, 11 हजार वर्गफ़ीट एरिया में 100 बिस्तरों वाली डॉर्मेटरी, 12 हजार वर्गफ़ीट एरिया में 12 कमरों वाला भक्त निवास, लगभग 10 हजार वर्गफ़ीट एरिया में लाइब्रेरी और संगत हॉल, 2152 वर्ग फ़ीट एरिया में कैफेटेरिया, 2905 वर्गफ़ीट में हॉली जल कुंड, 538 वर्गफ़ीट एरिया में ग़जीवो निर्माण सहित संत रविदास मंदिर परिसर का निर्माण प्रगतिरत है। मंदिर परिसर के अंदर उक्त सभी संरचनाओं का ढांचा तैयार किया जा रहा है।   recent visitors 23