बलूचिस्तान में न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय : हिमंत बिस्वा सरमा

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान में वर्षों से हो रही न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय बनी हुई हैं। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं, जिन्हें आमतौर पर 'मारो और फेंको नीति' के रूप में जाना जाता है, पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है। वर्षों से, बलूचों ने जबरन गायब किए जाने के क्रूर अभियान को झेला है, जहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियां अपहरण कर लेती हैं, उन्हें यातना दी जाती है और बाद में वे दूरदराज के खड्डों में मृत पाए जाते हैं या उन्हें सुनसान सड़कों पर फेंक दिया जाता है।" मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन करते हैं और उन्होंने याद दिलाया कि भारत उनके लिए खड़ा रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की आवाज ने दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान के संकट की ओर खींचा, जिसे पाकिस्तान ने लंबे समय तक दबाए रखा था। सीएम सरमा ने पोस्ट में उल्लेख किया, "यह अमानवीय प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है, जहां परिवारों को उम्मीद की जगह अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं। इसी गंभीर पृष्ठभूमि में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, वैश्विक समुदाय के लंबे समय से धारण मौन को तोड़ा। बलूचिस्तान से बहने वाली 'लाल नदियों' का जिक्र करते हुए, उन्होंने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज़ दी, यह इस बात की पुष्टि थी कि भारत उत्पीड़ित और चुप कराए गए लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वजन भी था, जिससे एक ऐसे संकट की तरफ ध्यान गया जिससे पाकिस्तान ने लंबे समय तक छुपाने की कोशिश की।" सीएम सरमा ने आगे कहा, "वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि 20,000 से अधिक बलूच व्यक्ति गायब हो गए हैं, सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं। कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं। यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है – यह एक मानवीय आपातकाल है।" recent visitors 56

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- कांग्रेस, सपा और राजद मचा रहे जाति जनगणना का श्रेय लेने का झूठमूठ का हल्ला

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य ने जाति जनगणना का झूठा श्रेय लेने के लिए कांग्रेस, सपा और राजद की आलोचना की। केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए लिखा, "परिवादी तिकड़ी में जकड़ी कांग्रेस, सपा और राजद तीनों जाति जनगणना का श्रेय लेने का झूठमूठ का हल्ला मचा रहे हैं। दस साल पहले यूपीए शासनकाल में राजद नेता लालू प्रसाद यादव और सपा नेता मुलायम सिंह यादव यानी दो यादव परिवार कांग्रेस के शाही परिवार की मजबूत बैसाखी बनकर केंद्र की सत्ता में अपना हिसाब-किताब साफ कर रहे थे। कांग्रेस दोनों को जांच एजेंसियों का ख़ौफ़ दिखा रही थी। आय से अधिक संपत्ति के संगीन मामले थे। अमेरिका से परमाणु समझौता कराने में भी सपा की कथित भूमिका थी। जाति जनगणना की पैरोकारी तब केवल छलावा भर थी। अब जाति जनगणना का झूठा श्रेय लेकर ख़ुशी में पटाखा फोड़कर अपनी जग हंसाई करा रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा कि इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की कमान संभालने के बाद दबी-कुचली जातियों को एक नई चेतना मिली है। जाति जनगणना से उनको सबको हर स्तर पर अपना हक मिलेगा और देश भी मजबूत बनेगा। पिछले कुछ सालों से जाति जनगणना भारतीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में एक रही है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लोकसभा के चुनाव में भी प्रमुख मुद्दे की तरह पेश किया था। अब केंद्र सरकार ने भी जातिगत जनगणना कराने की घोषणा कर दी है। बुधवार को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने इस बारे में घोषणा दी है। इसके साथ ही यह पहली बार होगा जब आजाद भारत में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इससे पहले जाति सर्वेक्षण कराए गए हैं। बिहार समेत कुछ राज्यों ने भी जाति सर्वेक्षण कराए हैं। केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना कराने के फैसले के लिए भारतीय राजनीति में यह मामला एक बार फिर सतह पर आ गया है और कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों इसका श्रेय लेने में जुट गए हैं। recent visitors 58

रचनात्मक सृजनशीलता और कला-कौशल गतिविधियों में भाग ले रहे हैं विद्यार्थी

भोपाल मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी इन दिनों कला एवं अभिव्यक्ति, नाट्य अभिनय, फोटोग्राफी, प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, पारंपरिक नृत्य, क्षेत्रीय संगीत, हस्तकला एवं लोक कलाएँ, पारंपरिक खेलों, वित्तीय साक्षरता, व्यवसाय, मॉडल, डिज़ाइन, थिंकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी के साथ ही कविता और कहानियों की रचना जैसी अपनी अभिरूचियों के विकास में व्यस्त हैं। दरअसल प्रदेश के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए समर कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक श्री राजीव तोमर ने बताया कि एक मई से प्रारंभ हुए ये समर कैम्प 20 मई 2025 तक संचालित होंगे। शासकीय विद्यालयों में अकादमिक गतिविधियों के साथ विद्यार्थियों में रचनात्मक-सृजनशीलता, कला-कौशल के विकास के लिए इन समर कैम्प्स का आयोजन प्रदेश के समस्त सांदीपनी विद्यालयों, पीएमश्री विद्यालयों, उत्कृष्ट विद्यालयों और मॉडल विद्यालयों के साथ 500 से अधिक नामांकन वाले एकीकृत हायर सेकेंडरी विद्यालयों में किया जा रहा है। समर कैम्प का उद्देश्य विद्यार्थियों में 21वीं सदी के विभिन्न कौशलों जैसे आपसी सहयोग, टीमवर्क, समस्या समाधान, आपसी सामंजस्य, तार्किकता और नेतृत्व जैसे जीवन कौशल विकसित करने के लिए अवसर प्रदान करने के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक जागरूकता, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा बोलने की क्षमता का विकास आदि हैं। समर कैम्प के आयोजन की अवधि सांदीपनी विद्यालयों में समर कैम्प का आयोजन सामान्यतः एक मई से 20 मई 2025 की अवधि में प्रातः 8 से 11 बजे तक किया जा रहा है। वहीं पीएमश्री उत्कृष्ट एवं मॉडल विद्यालयों में विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा बोलने की क्षमता विकसित करने के लिये कक्षा-3 से 8 और कक्षा-9 से 12 के विद्यार्थियों के लिये समर कैम्प आयोजित किये जा रहे हैं। कैम्प के संबंध में विस्तृत जानकारी संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों को भेजी गयी है। प्रदेश में 20 मई से अधिक अवधि तक समर कैम्प संचालन के संबंध में विद्यालय अपने स्तर पर निर्णय ले सकेंगे।   recent visitors 54

रामबन में अचानक हुए भूस्खलन के चलते एनएच-44 पर दोनों ओर से यातायात बाधित

ऊधमपुर रामबन जिले के सेरी चंबा क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही हुई है। अचानक हुए भूस्खलन के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर दोनों ओर से यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया। मूसलधार वर्षा के बाद हुए इस भूस्खलन से राजमार्ग पर भारी मलबा आ गया, जिससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। सैकड़ों की संख्या में वाहन हाईवे पर दोनों तरफ फंसे हैं। टीसीयू रामबन के अनुसार, शुक्रवार दोपहर को अचानक हुई तेज वर्षा के कारण सेरी चंबा में भारी भूस्खलन होने से काफी मलबा और कीचड़ हाईवे पर आ गया। जिस वजह से दोनों ओर का यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। हाईवे बंद होने के कुछ ही देर के बाद एनएचएआई के लिए काम करने वाली सीपीपीएल कंस्ट्रक्शन कंपनी की आधा दर्जन मशीनें मौके पर पहुंच कर मलबा हटाने में जुट गई। नहीं हुआ रास्ता साफ, हाईवे अभी भी बंद दोपहर बाद से ही मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। समाचार लिखे जाने तक रास्ता साफ नहीं हो पाया था और हाईवे पूरी तरह बंद था। पीसीआर रामबन के अनुसार अभी हाईवे खुलने में दो से तीन घंटों या इसके भी कुछ अधिक समय लग सकता है। वहीं यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे राजमार्ग पर यात्रा न करें और जब तक मार्ग पूरी तरह साफ न होने तक हाईवे पर सफर से बचने को कहा है। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वह सफर शुरू करने से पूर्व ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक से अपडेट या टीसीयू से संपर्क कर हाईवे की स्थिति की जानकारी प्राप्त जरूर करें। recent visitors 51

भारतीय हमलो का पीओके में 1000 से अधिक मदरसों पर दिखा खौफ, किया बंद

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 1000 से अधिक मदरसे कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने शुक्रवार को यह घोषणा की। विश्वसनीय सूत्रों ने मीडिया को बताया कि भारत की तरफ से हमले के डर की वजह से पीओके में स्थित मदरसों को बंद कर दिया गया। भारत यह दावा करता रहा है कि इन संस्थानों का इस्तेमाल आतंकवादियों के छिपने के ठिकाने के रूप में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि भारत पाकिस्तान के साथ पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू नहीं करेगा, लेकिन नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ पीओके क्षेत्रों में कुछ हमले जरूर करेगा। 29 सितंबर 2016 को, भारतीय सेना के कमांडो की टीमों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों में छिपे बैठे आतंकवादियों को खत्म किया था। यह कार्रवाई 18 सितंबर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी में एक भारतीय सेना की चौकी पर हमला करने के दस दिन बाद हुई थी। हमले में 19 सैनिकों की मौत हो गई थी। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "सरकार के निर्देशानुसार 1000 से अधिक मदरसे बंद कर दिए गए हैं। उन्हें कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों के लिए छुट्टियों की घोषणा कर दी गई है।" इससे पहले पाकिस्तान ने बुधवार को गिलगित और स्कार्दू के लिए सभी घरेलू उड़ानें रद्द करने की घोषणा की। विदेशी उड़ानों की भी कड़ी निगरानी शुरू की गई। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएए) को सभी आने वाले विदेशी विमानों की जांच करने का निर्देश दिया गया। इस बीच पाकिस्तान ने भारत से लौटने वाले अपने नागरिकों के लिए वाघा सीमा को खुला रखने की घोषणा की। पहलगामा आतंकी हमले के बाद नई दिल्ली ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे। पाकिस्तान विदेश कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, "हालांकि भारत से पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी की अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी, लेकिन यदि भारतीय अधिकारी उन्हें अपनी ओर से सीमा पार करने की अनुमति देते हैं तो लाहौर में वाघा बॉर्डर हमारे नागरिकों के लिए खुला रहेगा।" बयान में कहा गया, "वाघा सीमा भविष्य में भी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए खुली रहेगी।" बता दें आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल – पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में लोगों (ज्यादातर पर्यटक) पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह 'लश्कर-ए-तैयबा' से जुड़े 'टीआरएफ' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। नई दिल्ली ने इस्लामबाद के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं। इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने, अटारी इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद करने, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, शामिल हैं। भारत के इन फैसलों के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित करने और भारतीय उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने, भारतीय नागरिकों के वीजा रद्दे करने जैसे कदम उठाए। recent visitors 52

याचिकाकर्ता का दावा है कि वे भारतीय हैं, सुप्रीम कोर्ट ने छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने पर रोक लगा दी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छह कथित पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वे भारतीय हैं। उनके पास भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करने वाले कई दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड शामिल है। याचिकाकर्ता के वकील नंदकिशोर इस प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि यह बहुत ही हैरान करने वाली बात है। एक व्यक्ति मूल रूप से हिंदुस्तानी है, उसके पास खुद को हिंदुस्तानी साबित करने के लिए अनेकों दस्तावेज हैं। इसके बावजूद, उसे पाकिस्तान जाने के लिए कह दिया जाता है। नोटिस भेज दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से बताया कि हमारे परिवार में कुल छह सदस्य हैं। इनमें से दो बेटे बेंगलुरु में काम करते हैं। इसके अलावा, परिवार में माता, पिता, भाई और बहन हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि जब हमें पाकिस्तान के लिए नोटिस आया, तो हम हतप्रभ हो गए। यही नहीं, हमें गाड़ी में बैठाकर अटारी बॉर्डर तक ले जाया गया और कहा गया कि हम देश छोड़ दें, जबकि हम हिंदुस्तानी हैं। वकील और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सरकारी अधिकारियों को भारतीय नागरिकता की वैधता के बारे में दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा है कि जब तक सरकारी अधिकारी उचित निर्णय नहीं लेते, तब तक परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही याचिकाकर्ता को न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक सरकारी अधिकारी उचित निर्णय नहीं करते, तब तक परिवार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। इसमें सिंधु जल समझौते को निलंबित करना, पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश देना और राजनयिक संबंधों में कटौती करना शामिल है। recent visitors 41

मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय संघर्ष भड़क उठे थे, इसे देखते हुए फिर बढ़ा दी गई सुरक्षा, बड़े पैमाने पर तैनाती

इंफाल मणिपुर में जातीय संघर्ष की दूसरी बरसी से पहले एहतियात के तौर पर पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय संघर्ष भड़क उठे थे। पुलिस ने असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए इंफाल, चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिला मुख्यालयों में प्रमुख स्थानों पर तलाशी और वाहनों की जांच तेज कर दी है। इंफाल के खुमान लांपक और उसके आसपास भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जहां ‘मणिपुर पीपुल्स कन्वेंशन’ होने वाला है। अधिकारियों ने बताया कि कंगला गेट के सामने केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया, ‘राज्य में असामाजिक तत्वों की किसी भी अवांछित गतिविधि को रोकने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है, खासकर शनिवार को।’ मेइती समुदाय के संगठन ‘मणिपुर अखंडता समन्वय समिति’ (सीओसीओएमआई) ने जनता से तीन मई को सभी गतिविधियां स्थगित कर सम्मेलन में भाग लेने का आह्वान किया है। स्वयंसेवकों ने सार्वजनिक संबोधन प्रणालियों का उपयोग कर नागरिकों को पिछले दो वर्षों में हुई हिंसा की याद दिलाई तथा राज्य की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता के प्रति कथित खतरे को उजागर किया। कुकी छात्र संगठन (केएसओ) और ज़ोमी छात्र संघ (जेडएसएफ) ने भी तीन मई को सभी कुकी बहुल क्षेत्रों में बंद का आह्वान किया है। एक संयुक्त बयान में छात्र संगठनों ने कहा, ‘तीन मई को जातीय हिंसा शुरू होने के दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दिन सभी शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद रखा जाए।’ उन्होंने लोगों से शोक स्वरूप अपने घरों पर काले झंडे फहराने का भी आह्वान किया। मई 2023 से मेइती और आसपास के पहाड़ों पर रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। एक अलग घटनाक्रम में पुलिस अभियान में प्रतिबंधित संगठन ‘यूएनएलएफ’ (कोइरेंग गुट) के दो सक्रिय सदस्यों को इंफाल पश्चिम जिले के उत्तरी एओसी से गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान हुइड्रोम पिशाक (35) और हंगलेम थोइबा मेइती के रूप में की गई है। उनके पास से दो कारतूसों से भरी 9 एमएम की पिस्तौल बरामद की गई है। recent visitors 40