मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के शिवपुरी, इंदौर, धार, हरदा, छिंदवाड़ा और पन्ना जिलों में हुए कार्यक्रम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 6 जिलों के सामूहिक विवाह सम्मेलनों को वर्चुअली किया संबोधित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत हुए कार्यक्रम में परिणय सूत्र में बंधे 2205 जोड़े मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के शिवपुरी, इंदौर, धार, हरदा, छिंदवाड़ा और पन्ना जिलों में हुए कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मनुष्य जन्म वर्षों के पुण्य का फल है और सनातन संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति को जीवनकाल में 16 संस्कारों से होकर गुजरना होता है। इसमें विवाह संस्कार सबसे बड़ा संस्कार है। अग्नि को साक्षी मानकर 7 फेरों के माध्यम से 7 जन्मों का संकल्प लिया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अक्षय तृतीया पर 6 जिलों में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलनों में शामिल नव दंपतियों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से शामिल होकर आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अक्षय तृतीया है और इस दिन जो मिलता है वो हमेशा बढ़ता ही जाता है। जिसका कभी क्षय नहीं हो, वो अक्षय है। उन्होंने छिंदवाड़ा में 929, पन्ना में 915, आनंदधाम शिवपुरी में 80, इंदौर में 121, पंधानिया जिला धार में 80 एवं ग्राम नया गांव जिला हरदा में 80 नव दंपतियों के उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विवाह बंधन में बंध रहे सभी जोड़ों के उज्जवल, सुखद-स्वस्थ जीवन और उनके दीर्घायु होने की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष बजट में बेटी-बहनों के कल्याण के लिए 27 हजार 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश के महिला सशक्तिकरण के मॉडल का कई राज्य अनुसरण कर रहे हैं। राज्य सरकार औद्योगिक विकास और महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से नारी सशक्तिकरण और कृषकों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की हैं। राज्य सरकार भी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत ग्राम परिच्छा पौहरी, जिला शिवपुरी, ग्राम झलारिया, तह. सांवेर, जिला इन्दौर, ग्राम पंधानिया, धरमपुरी, जिला धार, ग्राम नयागांव तह. टिमरनी, जिला हरदा, इनर ग्राउंड (डी.डी.सी कॉलेज) नयापुर रोड, छिंदवाड़ा और ग्राम पंचायत बनौली, कुआंताल धाम, पवई, जिला पन्ना में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलनो में उज्जैन से वर्चुअली शामिल हुऐ। एनआईसी कक्ष उज्जैन में विधायक श्री अनिल जैन कालुहेड़ा मौजूद थे।   recent visitors 29

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव के निवेशकों को MP में प्लॉट लेना महंगा हो गया

भोपाल  मध्यप्रदेश में मई में निवेशक और उद्योगपति औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट के लिए आवेदन कर सकेंगे। अब नई कलेक्टर गाइडलाइन के रेट लागू होने के बाद प्लॉट 30 से 50% तक महंगे हो गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव में आए निवेशकों को भी प्लॉट लेना महंगा हो गया है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने अपने औद्योगिक पार्कों में 319 प्लॉट निकाले हैं। एमएसएमई पोर्टल के जरिए प्लॉट आवंटन प्रक्रिया एक मई से शुरू होने जा रही है। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्ययम उद्यमों के लिए लगभग 1100 प्लॉट उपलब्ध होंगे। एमएसएमई में प्रक्रिया में बदलाव के चलते पिछले करीब सात माह से प्लॉट(Property Rate) आवंटन बंद था। इस संबंध में उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि भूमि आवंटन के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसी पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। ऑनलाइन ही प्रस्ताव मंगाकर ई-ऑक्शन के माध्यम से प्लॉट आवंटन किया जाएगा। अब पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्लॉट आवंटन बंद कर दिया गया है। प्लॉट्स की नई दरें जारी कर दी गई हैं। इसी के अनुसार आवंटन होगा। पीथमपुर में जमीन सबसे ज्यादा महंगी नई कलेक्टर गाइडलाइन में प्रदेश में जमीन के औसतन रेट 30% तक बढ़े हैं। कुछ स्थानों पर 50% तक। एमपीआइडीसी के इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, ग्वालियर के औद्योगिक क्षेत्रों में रेट ज्यादा बढ़े हैं। पीथमपुर में 50% तक रेट बढ़े हैं। जीआइएस, रीजनल कॉन्क्लेव में इन्हीं क्षेत्रों में निवेश के प्रस्ताव ज्यादा आए हैं। निवेशक यदि अब जमीन आवंटन कराएंगे तो 50% ज्यादा रेट देना होगा। एमएसएमई के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मक्सी, उज्जैन, ग्वालियर, सुभाषनगर सागर, भोपाल के गोविंदपुरा आदि क्षेत्रों मेंरेट ज्यादा बढ़े हैं। एमपीआइडीसी के प्लॉट 15 जिलों में एमपीआइडीसी ने धार, झाबुआ, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, रतलाम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, राजगढ़, विदिशा, कटनी, मंडला और जबलपुर जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में कुल 319 प्लॉट निकाले हैं। एमपीआइडीसी से प्लॉट आवंटन के लिए 9 मई को ऑनलाइन ऑक्शन होगा। recent visitors 36

मई में 11 दिन बैंकों में रहेगा अवकाश, देख लीजिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली आज  गुरुवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई 2025 को बैंक देश के ज्यादतर राज्यों में बंद रहेंगे। यानी ग्राहक गुरुवार को बैंक जाकर अपना काम नहीं निपटा सकते।  यहां जानें RBI ने कल गुरुवार 1 मई 2025 की छुट्टी क्यों दी है और किन राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई को क्यों बंद रहेंगे बैंक? गुरुवार 1 मई को बैंक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, कोलकाता, गोवा, आंधप्रदेश जैसे तमाम राज्यों में बंद रहेंगे। महाराष्ट्र में बैंक महाराष्ट दिवस के कारण बैंक बंद हैं। वहीं, बाकि सभी राज्यों में बैंक लेबर डे के कारण नहीं खुलेंगे। यहां बैंक लेबर डे के कारण बंद हैं। 1 मई को बंद रहेंगे बैंक 1 मई (गुरुवार) – मजदूर दिवस / महाराष्ट्र दिवस: बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। मई में छुट्टियों की पूरी लिस्ट 4 मई (रविवार) – रविवार 9 मई (शुक्रवार) – रवींद्रनाथ टैगोर जयंती: कोलकाता में बैंक बंद रहेंगे। 10 मई (शनिवार) – मई महीने का दूसरा शनिवार 11 मई (रविवार) – रविवार 12 मई (सोमवार) – बुद्ध पूर्णिमा: अगरतला, आइज़ोल, बेलापुर, भोपाल, देहरादून, ईटानगर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर, रांची, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 16 मई (शुक्रवार) – राज्य दिवस: गंगटोक में बैंक अवकाश रहेगा। 18 मई (रविवार) – रविवार 24 मई (शनिवार) – चौथा शनिवार 25 मई (रविवार) -रविवार 26 मई (सोमवार) – काजी नजरुल इस्लाम की जयंती: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 29 मई (गुरुवार) – महाराणा प्रताप जयंती: शिमला में बैंक बंद रहेंगे। क्या ऑनलाइन बैंकिंग सर्विस मिलेंगी? हालांकि बैंक शाखाएं इन छुट्टियों पर बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे UPI, IMPS, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप्स सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। ग्राहक फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट और अन्य ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बैंक शाखा से जुड़े काम समय से पहले निपटा लें, ताकि छुट्टियों के दौरान कोई असुविधा न हो। 46 दिन तक स्कूलों में छूट्टी मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों(School Holiday) में गर्मी की छु‌ट्टी की घोषणा कर दी है। इस बीच छात्रों को गर्मी से राहत मिलेगी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन छुट्टियों की घोषणा हुई है। 1 मई से लेकर 15 जून तक स्टूडेंट्स को 46 दिन की छुट्टी मिलने वाली है। जबकि शिक्षकों को एक महीने की छुट्टी मिलेगी recent visitors 53

मजदूर दिवस 2025: श्रमिकों के संघर्ष और योगदान को समर्पित एक वैश्विक दिवस

Labor Day 2025: A global day dedicated to the struggle and contribution of workers 1 मई को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है — एक ऐसा दिन जो मेहनतकश श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और संघर्षों को सलाम करता है। भोपाल। 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Workers’ Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दुनियाभर में कामगारों, मजदूरों और श्रमिक वर्ग के लोगों के संघर्षों और सामाजिक-आर्थिक योगदान को मान्यता देने के लिए समर्पित है। यह एक ऐसा अवसर है जब श्रमिकों के अधिकारों, वेतन, काम की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा की जाती है। मजदूर दिवस की शुरुआत 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर से मानी जाती है, जब हज़ारों श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर आंदोलन किया था। यह आंदोलन बाद में “हेमार्केट हत्याकांड” में बदल गया और इसी के बाद 1 मई को वैश्विक मजदूर दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत में मजदूर दिवस को पहली बार 1923 में मद्रास (अब चेन्नई) में मनाया गया था, जब भारतीय मजदूर किसान पार्टी ने इसे औपचारिक रूप से मनाना शुरू किया। आज के दिन विश्व के अनेक देशों में सरकारी छुट्टियाँ, रैली,सम्मेलन, संस्कृतिक कार्यक्रम और श्रमिक कल्याण योजनाओं की घोषणाएँ होती हैं। यह दिवस मजदूरों के अधिकारों और गरिमा के समर्थन में एकजुटता दिखाने का प्रतीक बन चुका है। मजदूरों के लिए आज भी कई चुनौतियाँ विशेष संदेश   मजदूर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि दुनिया के सबसे ऊंचे निर्माण भी उन्हीं हाथों से खड़े होते हैं जो मेहनत की नींव रखते हैं। श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सम्मान देना एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है। 1 मई – नमन उन हाथों को जो दुनिया को गढ़ते हैं!   अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस 2025 पर आइए श्रमिकों के अधिकारों और योगदान को करें सम्मानित।       recent visitors 300

छतरपुर : फर्जी डॉक्टरों पर गिरी गाज: बिना डिग्री चला रहे क्लीनिक सील, मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत FIR दर्ज

Chhatarpur: Action taken against fake doctors: Clinics running without degrees sealed, FIR lodged under Medical Council Act छतरपुर : जिले में फर्जी और अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर गौरीहार में बिना डिग्री चल रहे पाल क्लीनिक को एसडीएम ने सील कर दिया। वहीं, जिलेभर में 10 अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई की गई है। गौरीहार में पाल क्लीनिक का संचालन बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के किया जा रहा था। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर क्लीनिक को सील कर दिया। यह कार्रवाई स्वास्थ्य, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई। क्लीनिक संचालक के खिलाफ मेडिकल काउंसिल एक्ट 1987 की धारा 24 के तहत FIR दर्ज की गई है। सीएमएचओ डॉ. आर.पी. गुप्ता ने बताया कि जिलेभर में लगातार फर्जी डॉक्टरों और अवैध चिकित्सा सेवाओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। अब तक इन स्थानों पर हुई कार्रवाई- छतरपुर शहर: सिंह क्लीनिक और सकील क्लीनिक सील राजनगर: भपका का पटेल क्लीनिक और बसारी का शिवशक्ति क्लीनिक बंद नौगांव (हरपालपुर): लाइफ हेल्थ केयर क्लीनिक सील लवकुशनगर: बसंतपुर चौराहे का एक अवैध क्लीनिक बंद बकस्वाहा: चांदसी और खान क्लीनिक पर भी कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। recent visitors 145

योग गुरु बाबा रामदेव ने सीएम डॉ मोहन यादव से की मुलाकात, योग गुरु ने सिंहस्थ 2028 के लिए दिया आशीर्वाद

उज्जैन  योग गुरु बाबा रामदेव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के संबंध में उत्साहवर्धन किया और सफलता की कामना की। इस पर राज्य के मुखिया सीएम डॉ मोहन यादव ने बाबा रामदेव का आभार व्यक्त किया। योग गुरु बाबा रामदेव आज यानी के बुधवार को उज्जैन पहुंचे। जहां बाबा ने महाकाल मंदिर पहुंचकर भस्म आरती में शामिल हुए। बता दें कि, इस दौरान रामदेव ने नंदी हॉल से भस्म आरती का दर्शन किया और पूरे समय ‘जय श्री महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए भक्ति में लीन नजर आए। वहीं आरती के बाद योग गुरु ने मंदिर परिसर में पूजन-अर्चन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। बाबा रामदेव ने सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की इसके बाद योग गुरु बाबा रामदेव ने राज्य के सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। वहीं मुख्यमंत्री ने बाबा रामदेवा का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। साथ ही शाल, श्री फल और भगवान महाकाल की तस्वीर भी भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन के स्थानीय विधायक अनिल जैन भी मौजूद रहे। वहीं योग गुरु बाबा रामदेव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के संबंध में उत्साहवर्धन किया और सफलता की कामना की। इस पर राज्य के मुखिया सीएम डॉ मोहन यादव ने बाबा रामदेव का आभार व्यक्त किया। recent visitors 70

MP के नाम हुई बड़ी उपलब्धि, UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय लिस्ट में शामिल हुईं ये तीन विरासत

भोपाल मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को सफलता प्राप्त हुई है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल पर यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी ने मध्य प्रदेश की तीन विरासतों को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में सम्मिलित किया है। इन विरासतों में भगोरिया आदिवासी नृत्य, गोंड आदिवासी चित्रकला और नर्मदा परिक्रमा हैं। प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि आगामी वर्षों में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अंतर्राष्ट्रीय सूची में इन्हें सम्मिलित किया जा सकता है। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में हम मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासतों को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप यह उपलब्धि हासिल हुई है। यह प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। सूची में नामांकित होने से यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेंगे। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वे परंपराएं, प्रथाएं, ज्ञान और कौशल शामिल हैं, जो हमारे पूर्वजों से विरासत में मिले हैं और भविष्य की पीढ़ियों को दिए गए हैं। मूर्त विरासतों में स्मारक या भौतिक कलाकृतियां शामिल होती हैं, वहीं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों को संदर्भित करती है। इसमें मौखिक परंपराएं, कलाएंं, सामाजिक अनुष्ठान, उत्सव के कार्यक्रम, प्रकृति के बारे में ज्ञान और पारंपरिक शिल्प शामिल होते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने किया था आवेदन भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता के लिए आवेदन यूनेस्को की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी को प्रस्तुत किए जाते हैं। यह एजेंसी राष्ट्रीय सूची को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के भगोरिया आदिवासी नृत्य, नर्मदा परिक्रमा और गोंड आदिवासी चित्रकला इंटेजिबल कल्चरल हेरीटेज (आईसीएच) को नामांकित करने के लिए आवेदन विगत वर्ष 2024 में किया था। पाटनगढ़ की गोंड आदिवसी चित्रकला, कला का ऐसा रूप से जो स्थानीय गोंड जनजाति द्वारा 1400 वर्षों से अधिक समय से सहेजी गई है। यह कला प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है। दीवार के भित्त चित्र हों या जीवन शैली के उत्पाद, इन सभी को जीवंत रंगों, जटिल रचनाओं और मनमोहक अभिव्यक्ति के माध्यम से तैयार किया जाता है। चूंकि यह समुदाय प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनसे प्रेरणा लेकर वे इसे चित्रकला में प्रदर्शित भी करते हैं। परंपरागत रूप से यह कला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती हैं। इन चित्रकलाओं में जहां पेड़–पौधों को कैनवास पर उकेरा जाता है वहीं पशुओं के साथ–साथ आकाश, सूर्य, चंद्रमा आदि का भी सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। आकार और प्रयोग में लाई गई जटिलताओं के आधार पर इन्हें बनाने में 2 दिन से लेकर 2 महीने तक का समय लगता है। कई बार बड़ी कलाकृतियों को समूहों में तैयार किया जाता है। नर्मदा परिक्रमा यह एक पवित्र आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसमें देवी के रूप में पूजनीय मां नर्मदा नदी के चारों ओर 3500 किलोमीटर नंगे पैर परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक घाटों, मंदिरों और पवित्र शहरों से होकर गुजरती है। नर्मदा परिक्रमा की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसका वर्णन महाकाव्यों और प्राचीन पवित्र ग्रंथों में मिलता है। यह परिक्रमा छह से आठ महीनों की अवधि में की जाती है। नर्मदा का तट ध्यान और तपस्या की भूमि भी रहा है, जिसे सांस्कृतिक रूप से कई महान ऋषियों और संतों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। श्रद्धालु चलते समय लगातार मां नर्मदा की स्तुति करते हुए “नर्मदे हर!” का जाप करते हैं। यात्रा अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम से शुरू होकर पुन: उस बिंदु पर वापस आने के बाद पूरी मानी जाती है। तीर्थयात्रा पूरी होने के बाद, भक्तों को ओंकारेश्वर मंदिर जाना होता है जो भगवान शिव को समर्पित है और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भगोरिया आदिवासी नृत्य और महोत्सव भील जनजाति के बीच खुशी, एकता और परंपरा का एक जीवंत उत्सव है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भील समुदाय के भगोरिया त्यौहार का एक अभिन्न अंग है, जो होली के त्यौहार से सात दिन पहले मनाया जाता है। यह त्यौहार पूरे समुदाय व रिश्तेदारों से मिलने के साथ–साथ आनंद से सराबोर होने का अवसर होता है। यह त्यौहार फसल कटाई के मौसम का भी प्रतीक है। भील समुदाय के साथ-साथ भीलाला और पटेलिया जैसे स्थानीय आदिवासी समुदाय भी यह त्यौहार मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह त्यौहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने की परंपरा के रूप में शुरू हुआ था। गांव भगोर में भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित एक मंदिर भी मौजूद है (ऐसा माना जाता है कि यह नाम शिव और पार्वती के लिए एक और नाम भाव-गौरी से लिया गया है)। इस दौरान सभी गांवों के निवासी अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पैदल आते हैं। पुरुष धोती और सिर पर साफा पहनते हैं। वे अपने पारंपरिक हथियार और कमर में घंटी की बेल्ट भी पहनते हैं। महिलाएं दुपट्टे के साथ घाघरा और पोल्की पहनती हैं। जनजातीय पुरुष और महिलाएं चांदी के पारंपरिक आभूषण पहनते हैं। समूह पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों जैसे मांदर, कुंडी, पीतल की थाली और बांसुरी का वादन करते हुए समूह नृत्य करते हैं। recent visitors 49