भगवान के दर्शन करने हजारों श्रद्धालु पहुंचे, आज भक्तों को देंगे दर्शन, खुलेंगे भगवान बद्रीनाथ के पट

नई दिल्ली भगवान बद्रीनाथ के पट आज खुलेंगे। भगवान के दर्शन करने हजारों श्रद्धालु एक दिन पहले ही वहां पहुंच गए हैं। कहते हैं कि 6 माह के बाद भी पट खुलने के बाद भी एक ज्योति जलती रहती है। बता दें कि बद्रीनाथ जहां भगवान विष्णु विराजमान हैं, जहां दर्शन भर से व्यक्ति के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। ब्रदीनाथ ही वह स्थान है जहां दर्शन करने से व्यक्ति जन्म मरण के चक्र से मुक्ति पा सकता है। बद्रीनाथ चार प्रमुख धाम में से एक है। बद्रीनाथ को लेकर कहावत भी है कि "जो जाए बद्री, वो न आए ओदरी", इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है। भगवान विष्णु योग ध्यान मुद्रा में लीन थे भगवान विष्णु के नहीं बल्कि मां लक्ष्मी के नाम पर पड़ा है। मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, एक बाद भगवान विष्णु योग ध्यान मुद्रा में लीन थे अधिक बर्फबारी होने के कारण वह बर्फ से पूरी तरह ढक चुके थे। उनकी यह दशा देखकर मां लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा वह बहुत परेशान हो गई। फिर माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के पास जाकर एक बेर वृक्ष का रूप ले लिया( जिसका नाम बदरी था) और सारी बर्फ उस वृक्ष के ऊपर गिरे लगी। बदरीनाथ की मूर्ति की लंबाई 1 मीटर है भगवान विष्णु की प्रतिमा मंदिर से गायब हो गई थी। बदरीनाथ की मूर्ति की लंबाई 1 मीटर यानी 3।3 फीट है। जब हिंदू और बौद्ध धर्म में संघर्ष चल रहा था इस समय मूर्ति की रक्षा के लिए इसे मंदिर के समीप स्थित नारद कुंड में छिपा दिया गया था। इसके बाद 8वीं सदी में शंकराचार्य को नारद कुंड से मूर्ति प्राप्त हुई थी। उन्होंने इसे एक गुफा में स्थापित कर दिया लेकिन, कहा जाता है कि वहां से फिर मूर्ति अचानक गायब हो गई थी। कलियुग में बद्रीनाथ की महिमा पुराण की मानें तो जल प्रलय और सूखा पड़ने के बाद गंगा लुप्त हो जाएगी। इसके बाद बद्रीनाथ के दर्शन नहीं हो पाएंगे। कहते तो ये भी हैं कि इस दिन नर नारायण पर्वत भी आपस में मिल जाएंगे तब बद्रीनाथ जाने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाएगा। यह भी कहते हैं कि सिर्फ बद्रीनाथ ही नहीं केदारनाथ मंदिर भी पूरी तरह से लुप्त हो जाएगा। इसके बाद कई वर्षों बाद भविष्य बद्री नाम का नया तीर्थस्थल स्थापित होगा। जहां भक्त जन पूजा कर पाएंगे। recent visitors 45

NIA को मिला अहम सुराग हमले के समय पहलगाम में प्रतिबंधित हुवावे सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल हुआ था

श्रीनगर  जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच अब NIA कर रही है। इस हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक सहित 26 लोगों की जान चली गई थी। जांच एजेंसियों को एक अहम सुराग मिला है। हमले के समय पहलगाम इलाके में एक प्रतिबंधित हुवावे (Huawei) सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल हुआ था। हुवावे एक चीनी कंपनी है। इस पर भारत में रोक है। शक है कि यह फोन पाकिस्तान या किसी दूसरे देश से तस्करी करके लाया गया था। चीनी टेलीकॉम कंपनी पर है रोक दरअसल भारत में चीनी टेलीकॉम कंपनियां हुवावे और ZTE (झोंगक्सिंग टेलीकम्युनिकेशन इक्विपमेंट) को 5G नेटवर्क के लिए उपकरण बेचने की अनुमति नहीं है। हालांकि इन पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है। लेकिन भारतीय टेलीकॉम कंपनियों ने हुवावे और ZTE को 5G रोलआउट से बाहर कर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कंपनियां भारत सरकार की ओर से तय किए गए 'विश्वसनीय स्रोत' की शर्त को पूरा नहीं करती हैं। सुरक्षा कारणों से भारतीय टेलीकॉम कंपनियां यूरोपीय उपकरण इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा पैसे देने को भी तैयार हैं। अमेरिका और यूरोप में चीनी हुवावे पर प्रतिबंध अमेरिका और यूरोप में चीनी हुवावे पर प्रतिबंध लगा है। जुलाई 2022 में अमेरिका और ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। FBI और MI5 के प्रमुखों ने आरोप लगाया था कि चीन आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। चीन ने इन आरोपों को निराधार बताया था। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड, जो कनाडा के साथ फाइव आइज़ इंटेलिजेंस-शेयरिंग गठबंधन के सदस्य हैं, उन्होंने भी हुवावे को अपने 5G नेटवर्क से प्रतिबंधित कर दिया है। पहलगाम अटैक की एनआईए कर रही हर एंगल से जांच पहलगाम हमला हाल के समय में कश्मीर में हुए सबसे घातक हमलों में से एक है। इसमें बेकसूर पर्यटकों को निशाना बनाया गया था। एनआईए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और टेक्निकल इंटेलिजेंस की मदद से कई पहलुओं पर जांच कर रही है। इसमें सैटेलाइट फोन को ट्रैक करना भी शामिल है। इसके लिए पश्चिमी एजेंसियों से मदद ली जा रही है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। टीआरएफ ने क्या दी है चेतावनी? TRF ने कहा है कि 85,000 से ज्यादा डोमिसाइल गैर-स्थानीय लोगों को जारी किए गए हैं। इससे भारतीय कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (IOJK) में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का रास्ता खुल गया है। ये गैर-स्थानीय लोग पर्यटक बनकर आते हैं। डोमिसाइल प्राप्त करते हैं और फिर ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे वे जमीन के मालिक हों। नतीजतन हिंसा उन लोगों के खिलाफ निर्देशित की जाएगी जो अवैध रूप से बसने की कोशिश कर रहे हैं। TRF का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोगों को बसाया जा रहा है, इसलिए वे हिंसा करेंगे। तीन संदिग्धों के स्केच जारी चश्मदीदों ने बताया है कि हमले में पांच से ज्यादा हमलावर शामिल थे। NIA इन बयानों की जांच कर रही है ताकि घटनाओं का क्रम पता चल सके। NIA की टीमें एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर सुराग ढूंढ रही हैं। जम्मू-कश्मीर में ओवरग्राउंड वर्कर्स भी जांच के दायरे में हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले तीन संदिग्धों के स्केच जारी किए थे और प्रत्येक पर 20 लाख रुपये का इनाम रखा था। NIA ने कहा है कि वह आतंकी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। फॉरेंसिक टीमें हमले की जगह पर सबूत ढूंढ रही हैं। दोषियों को न्याय के कटघरे में लाएगी एनआईए NIA ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद एनआईए ने औपचारिक रूप से पहलगाम आतंकी हमले के मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने कहा कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। एनआईए इस मामले की तह तक जाएगी और दोषियों को सजा दिलाएगी। recent visitors 64

मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे

Transfer policy issued in Madhya Pradesh 4 days after approval: Order after midnight; Those with poor performance will be replaced first 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। भोपाल। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। मंगलवार 29 अप्रैल को मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश जारी नहीं किए थे। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें… पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर जिलों में पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं… जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। काॅलेज से अतिशेष शिक्षकों को हटाएंगे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, उच्च शिक्षा विभाग के जिन संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों में विषयवार तय संख्या से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं, वहां से अतिशेष शिक्षकों को दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा। ऐसा करने से जूनियर टीचर को अतिशेष कर्मचारी होने की स्थिति में सबसे पहले स्थानांतरित किया जाएगा। मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग शिक्षकों और जिनका रिटायरमेंट एक साल के कम है, उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। स्कूल शिक्षा में 6 से 16 मई तक लेंगे आवेदन उधर, स्कूल शिक्षा विभाग की तबादलों के लिए जारी गाइडलाइन में कहा है कि स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 6 मई से 16 मई तक किए जा सकेंगे। इस पर आदेश जनरेट करने का काम 20 मई तक होगा। ऐसे अतिशेष शिक्षक जिन्होंने स्वैच्छिक स्थानांतरण का विकल्प नहीं चुना है या जिन्हें विकल्प नहीं मिल सका है उनके तबादले प्रशासकीय आधार पर 30 मई तक होंगे। एक जून तक तबादला वाले शिक्षकों को जॉइन करना होगा। recent visitors 125

साबरकांठा में भीषण सड़क हादसा, जीप, बस और बाइक की जबरदस्त टक्कर, 6 लोगों की मौत

साबरकांठा गुजरात के साबरकांठा में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। इस हादसे में एक बच्ची समेत छह लोगों की मौत हो गई। वहीं, दुर्घटना में 9 लोग घायल हो गए। दरअसल, राज्य परिवहन बस, जीप और एक मोटरसाइकिल की जोरदार टक्कर हो गई। दुर्घटना हिंगटिया गांव के पास गटी। पुलिस ने जानकारी दी कि मोटरसाइकिल पर तीन लोग सवार थे। मारे जाने वाले ज्यादातर लोग जीप में सवार थे। टक्कर के बाद जीप के परखच्चे उड़ गए। घायलों का जिला मुख्यालय हिम्मतनगर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने आगे बताया कि मृतकों में से अधिकांश साबरकांठा जिले के पुरुष थे। recent visitors 62

विधायक अर्चना चिटनिस पंचायत भवन में गंदगी देख भड़कीं, उन्होंने खुद पूरे भवन में झाड़ू और पोंछा लगाया

बुरहानपुर शनिवार को बोरसल पंचायत में बैठक लेने पहुंचीं भाजपा विधायक अर्चना चिटनिस भवन में पसरी गंदगी देखकर भड़क गईं। उन्होंने खुद पूरे भवन में झाड़ू और पोंछा लगाया। इसके बाद बैठक ली। उन्होंने पंचायत सचिव व अन्य कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई। लापरवाही करने वालों को चेतावनी दी है, दोबारा पंचायत भवन साफ सुथरा मिलना चाहिए। पंचायत कार्यालय में गंदगी के ढेर देखकर चिटनिस ने सवाल किया कि सफाई कब से नहीं की गई है।     दरअसल विधायक अर्चना चिटनिस शनिवार को जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों व संरचनाओं के संरक्षण, जीर्णोद्धार और जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्याें का निरीक्षण करने पहुंची थीं।     इस दौरान उनका अधिकारियों के साथ ग्राम बोरसल प्रवास हुआ था। विधायक को झाड़ू पोंछा करते देख कुछ देर के लिए अधिकारी, कर्मचारी भी हतप्रभ रह गए थे।     बाद में उन्होंने शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि वीरेन्द्र तिवारी, जनपद सदस्य देवानंद पाटिल, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दुर्गेश भूमरकर, उप सरपंच विनोद शिंदे, नगीन जायसवाल, मोहन पाटिल आदि की उपस्थिति में जल संरक्षण की समीक्षा बैठक ली।   recent visitors 65

भारत के CRPF जवान को पाकिस्तानी महिला से शादी करना पड़ा भारी, नौकरी से बर्खास्त

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान में जारी तनाव के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने जवान मुनीर अहमद को पाकिस्तानी महिला से अपनी शादी की बात छिपाने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। मुनीर अहमद का यह काम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक पाया गया। जवान की आखिरी तैनाती देश के प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल सीआरपीएफ की 41वीं बटालियन में थी। आधिकारिक सूत्रों ने 'पीटीआई' को बताया कि उसे उन नियमों के तहत सेवा से बर्खास्त किया गया है, जिसके तहत जांच की जरूरत नहीं होती। सीआरपीएफ के प्रवक्ता उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एम दिनाकरन ने कहा, "मुनीर अहमद को पाकिस्तानी नागरिक से अपनी शादी को छिपाने और जानबूझकर उसके वीजा की वैधता से परे उसे शरण देने के कारण तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।'' पहलगाम आतंकवादी हमले के मद्देनजर उठाए गए कूटनीतिक उपायों के तहत भारत द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने के लिए कहने के बाद अहमद की मीनल खान के साथ शादी का पता चला था। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। दोनों ने पिछले साल 24 मई को एक वीडियो कॉल के जरिए शादी की थी। सीआरपीएफ की जांच में पाया गया कि जवान ने संबंधित अधिकारियों को अपनी शादी और उसके भारत में रहने की सूचना नहीं दी थी। आतंकी हमले के बाद भारत ने पाक के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने अल्पकालिक वीजा वाले पाकिस्तानी नागरिकों के साथ-साथ भारत में इस्लामाबाद के शीर्ष सैन्य अधिकारियों को देश छोड़ने का निर्देश दिया था। अन्य ऐक्शन में सैन्य राजनयिकों को अवांछित व्यक्ति घोषित करना, अटारी-वाघा सीमा को बंद करना, सिंधु जल संधि को रोकना, पाकिस्तानी जहाजों को भारत में प्रवेश करने से रोकना और सभी पाकिस्तानी आयातों पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। recent visitors 83

आईटी मंत्री कर्नल राठौड़ ने बैठक में साइबर सिक्योरिटी के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया

जयपुर प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की अध्यक्षता में योजना भवन में शनिवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में साइबर सिक्योरिटी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में तकनीकी उन्नति, मानव संसाधन और प्रक्रियाओं के विकास पर चर्चा की गई। पीपल, प्रोसेस, टेक्नोलॉजी का त्रि-आयामी दृष्टिकोण आईटी मंत्री कर्नल राठौड़ ने बैठक में साइबर सिक्योरिटी के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी केवल सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए तीन प्रमुख तत्वों—पीपल (लोग), प्रोसेस (प्रक्रियाएं) और टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी) का समन्वय जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल तकनीक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना होगा ताकि विदेशी निर्भरता कम हो। प्रशिक्षित कार्मिक: साइबर सिक्योरिटी की रीढ़ कर्नल राठौड़ ने बैठक में मानव संसाधन के विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने के लिए संरचित और असंरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हर दिन प्रशिक्षण, जागरूकता का विस्तार और ग्रूमिंग होनी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त बजट प्रावधान भी किए जाएंगे, जिससे सर्टिफाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के माध्यम से कर्मचारियों की क्षमता को और निखारा जा सके। इससे न केवल कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, बल्कि उनकी पेशेवर मूल्यवृद्धि भी होगी। साथ ही कार्य संस्कृति में सुधार होगा, जो दीर्घकालिक रूप से विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा। राजस्थान का विजन: देश में सर्वश्रेष्ठ होगा आईटी विभाग आईटी मंत्री कर्नल राठौड़ ने राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को देश का सर्वश्रेष्ठ बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत, मजबूत भारत है। हम नई सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि राजस्थान का आईटी विभाग राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल बने। इस दिशा में विभाग ने एक निश्चित समयावधि में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजना बनाई है। कर्नल राठौड़ ने भामाशाह डेटा सेंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह वर्तमान में देश के अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और उन्नत है। यह डेटा सेंटर न केवल तकनीकी रूप से सक्षम है, बल्कि साइबर खतरों से डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बैठक में प्रतिष्ठित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल निधीश भटनागर ने साइबर सिक्योरिटी के संबंध में प्रजेंटेशन के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी हर दिन चालाक बनते जा रहे हैं। ऐसे में आईटी प्रोफेशन से जुड़े हर व्यक्ति को भी हर दिन अपडेट और सतर्क रहने की आवश्यकता है। बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ ही, ऊर्जा, जयपुर विकास प्राधिकरण, सहकारिता, भूजल संसाधन, परिवहन, आबकारी विभागों के अलावा आरजीएचएस और आईएफएमएस परियोजना आदि से जुड़े विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित थे। recent visitors 78