मई में 11 दिन बैंकों में रहेगा अवकाश, देख लीजिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली आज  गुरुवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई 2025 को बैंक देश के ज्यादतर राज्यों में बंद रहेंगे। यानी ग्राहक गुरुवार को बैंक जाकर अपना काम नहीं निपटा सकते।  यहां जानें RBI ने कल गुरुवार 1 मई 2025 की छुट्टी क्यों दी है और किन राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई को क्यों बंद रहेंगे बैंक? गुरुवार 1 मई को बैंक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, कोलकाता, गोवा, आंधप्रदेश जैसे तमाम राज्यों में बंद रहेंगे। महाराष्ट्र में बैंक महाराष्ट दिवस के कारण बैंक बंद हैं। वहीं, बाकि सभी राज्यों में बैंक लेबर डे के कारण नहीं खुलेंगे। यहां बैंक लेबर डे के कारण बंद हैं। 1 मई को बंद रहेंगे बैंक 1 मई (गुरुवार) – मजदूर दिवस / महाराष्ट्र दिवस: बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। मई में छुट्टियों की पूरी लिस्ट 4 मई (रविवार) – रविवार 9 मई (शुक्रवार) – रवींद्रनाथ टैगोर जयंती: कोलकाता में बैंक बंद रहेंगे। 10 मई (शनिवार) – मई महीने का दूसरा शनिवार 11 मई (रविवार) – रविवार 12 मई (सोमवार) – बुद्ध पूर्णिमा: अगरतला, आइज़ोल, बेलापुर, भोपाल, देहरादून, ईटानगर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर, रांची, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 16 मई (शुक्रवार) – राज्य दिवस: गंगटोक में बैंक अवकाश रहेगा। 18 मई (रविवार) – रविवार 24 मई (शनिवार) – चौथा शनिवार 25 मई (रविवार) -रविवार 26 मई (सोमवार) – काजी नजरुल इस्लाम की जयंती: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 29 मई (गुरुवार) – महाराणा प्रताप जयंती: शिमला में बैंक बंद रहेंगे। क्या ऑनलाइन बैंकिंग सर्विस मिलेंगी? हालांकि बैंक शाखाएं इन छुट्टियों पर बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे UPI, IMPS, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप्स सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। ग्राहक फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट और अन्य ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बैंक शाखा से जुड़े काम समय से पहले निपटा लें, ताकि छुट्टियों के दौरान कोई असुविधा न हो। 46 दिन तक स्कूलों में छूट्टी मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों(School Holiday) में गर्मी की छु‌ट्टी की घोषणा कर दी है। इस बीच छात्रों को गर्मी से राहत मिलेगी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन छुट्टियों की घोषणा हुई है। 1 मई से लेकर 15 जून तक स्टूडेंट्स को 46 दिन की छुट्टी मिलने वाली है। जबकि शिक्षकों को एक महीने की छुट्टी मिलेगी recent visitors 58

मजदूर दिवस 2025: श्रमिकों के संघर्ष और योगदान को समर्पित एक वैश्विक दिवस

Labor Day 2025: A global day dedicated to the struggle and contribution of workers 1 मई को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है — एक ऐसा दिन जो मेहनतकश श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और संघर्षों को सलाम करता है। भोपाल। 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Workers’ Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दुनियाभर में कामगारों, मजदूरों और श्रमिक वर्ग के लोगों के संघर्षों और सामाजिक-आर्थिक योगदान को मान्यता देने के लिए समर्पित है। यह एक ऐसा अवसर है जब श्रमिकों के अधिकारों, वेतन, काम की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा की जाती है। मजदूर दिवस की शुरुआत 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर से मानी जाती है, जब हज़ारों श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर आंदोलन किया था। यह आंदोलन बाद में “हेमार्केट हत्याकांड” में बदल गया और इसी के बाद 1 मई को वैश्विक मजदूर दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत में मजदूर दिवस को पहली बार 1923 में मद्रास (अब चेन्नई) में मनाया गया था, जब भारतीय मजदूर किसान पार्टी ने इसे औपचारिक रूप से मनाना शुरू किया। आज के दिन विश्व के अनेक देशों में सरकारी छुट्टियाँ, रैली,सम्मेलन, संस्कृतिक कार्यक्रम और श्रमिक कल्याण योजनाओं की घोषणाएँ होती हैं। यह दिवस मजदूरों के अधिकारों और गरिमा के समर्थन में एकजुटता दिखाने का प्रतीक बन चुका है। मजदूरों के लिए आज भी कई चुनौतियाँ विशेष संदेश   मजदूर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि दुनिया के सबसे ऊंचे निर्माण भी उन्हीं हाथों से खड़े होते हैं जो मेहनत की नींव रखते हैं। श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सम्मान देना एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है। 1 मई – नमन उन हाथों को जो दुनिया को गढ़ते हैं!   अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस 2025 पर आइए श्रमिकों के अधिकारों और योगदान को करें सम्मानित।       recent visitors 302

छतरपुर : फर्जी डॉक्टरों पर गिरी गाज: बिना डिग्री चला रहे क्लीनिक सील, मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत FIR दर्ज

Chhatarpur: Action taken against fake doctors: Clinics running without degrees sealed, FIR lodged under Medical Council Act छतरपुर : जिले में फर्जी और अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर गौरीहार में बिना डिग्री चल रहे पाल क्लीनिक को एसडीएम ने सील कर दिया। वहीं, जिलेभर में 10 अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई की गई है। गौरीहार में पाल क्लीनिक का संचालन बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के किया जा रहा था। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर क्लीनिक को सील कर दिया। यह कार्रवाई स्वास्थ्य, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई। क्लीनिक संचालक के खिलाफ मेडिकल काउंसिल एक्ट 1987 की धारा 24 के तहत FIR दर्ज की गई है। सीएमएचओ डॉ. आर.पी. गुप्ता ने बताया कि जिलेभर में लगातार फर्जी डॉक्टरों और अवैध चिकित्सा सेवाओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। अब तक इन स्थानों पर हुई कार्रवाई- छतरपुर शहर: सिंह क्लीनिक और सकील क्लीनिक सील राजनगर: भपका का पटेल क्लीनिक और बसारी का शिवशक्ति क्लीनिक बंद नौगांव (हरपालपुर): लाइफ हेल्थ केयर क्लीनिक सील लवकुशनगर: बसंतपुर चौराहे का एक अवैध क्लीनिक बंद बकस्वाहा: चांदसी और खान क्लीनिक पर भी कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। recent visitors 150

योग गुरु बाबा रामदेव ने सीएम डॉ मोहन यादव से की मुलाकात, योग गुरु ने सिंहस्थ 2028 के लिए दिया आशीर्वाद

उज्जैन  योग गुरु बाबा रामदेव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के संबंध में उत्साहवर्धन किया और सफलता की कामना की। इस पर राज्य के मुखिया सीएम डॉ मोहन यादव ने बाबा रामदेव का आभार व्यक्त किया। योग गुरु बाबा रामदेव आज यानी के बुधवार को उज्जैन पहुंचे। जहां बाबा ने महाकाल मंदिर पहुंचकर भस्म आरती में शामिल हुए। बता दें कि, इस दौरान रामदेव ने नंदी हॉल से भस्म आरती का दर्शन किया और पूरे समय ‘जय श्री महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए भक्ति में लीन नजर आए। वहीं आरती के बाद योग गुरु ने मंदिर परिसर में पूजन-अर्चन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। बाबा रामदेव ने सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की इसके बाद योग गुरु बाबा रामदेव ने राज्य के सीएम डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। वहीं मुख्यमंत्री ने बाबा रामदेवा का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। साथ ही शाल, श्री फल और भगवान महाकाल की तस्वीर भी भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन के स्थानीय विधायक अनिल जैन भी मौजूद रहे। वहीं योग गुरु बाबा रामदेव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के संबंध में उत्साहवर्धन किया और सफलता की कामना की। इस पर राज्य के मुखिया सीएम डॉ मोहन यादव ने बाबा रामदेव का आभार व्यक्त किया। recent visitors 74

MP के नाम हुई बड़ी उपलब्धि, UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय लिस्ट में शामिल हुईं ये तीन विरासत

भोपाल मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को सफलता प्राप्त हुई है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल पर यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी ने मध्य प्रदेश की तीन विरासतों को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में सम्मिलित किया है। इन विरासतों में भगोरिया आदिवासी नृत्य, गोंड आदिवासी चित्रकला और नर्मदा परिक्रमा हैं। प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि आगामी वर्षों में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अंतर्राष्ट्रीय सूची में इन्हें सम्मिलित किया जा सकता है। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में हम मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासतों को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप यह उपलब्धि हासिल हुई है। यह प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। सूची में नामांकित होने से यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेंगे। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वे परंपराएं, प्रथाएं, ज्ञान और कौशल शामिल हैं, जो हमारे पूर्वजों से विरासत में मिले हैं और भविष्य की पीढ़ियों को दिए गए हैं। मूर्त विरासतों में स्मारक या भौतिक कलाकृतियां शामिल होती हैं, वहीं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों को संदर्भित करती है। इसमें मौखिक परंपराएं, कलाएंं, सामाजिक अनुष्ठान, उत्सव के कार्यक्रम, प्रकृति के बारे में ज्ञान और पारंपरिक शिल्प शामिल होते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने किया था आवेदन भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता के लिए आवेदन यूनेस्को की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी को प्रस्तुत किए जाते हैं। यह एजेंसी राष्ट्रीय सूची को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के भगोरिया आदिवासी नृत्य, नर्मदा परिक्रमा और गोंड आदिवासी चित्रकला इंटेजिबल कल्चरल हेरीटेज (आईसीएच) को नामांकित करने के लिए आवेदन विगत वर्ष 2024 में किया था। पाटनगढ़ की गोंड आदिवसी चित्रकला, कला का ऐसा रूप से जो स्थानीय गोंड जनजाति द्वारा 1400 वर्षों से अधिक समय से सहेजी गई है। यह कला प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है। दीवार के भित्त चित्र हों या जीवन शैली के उत्पाद, इन सभी को जीवंत रंगों, जटिल रचनाओं और मनमोहक अभिव्यक्ति के माध्यम से तैयार किया जाता है। चूंकि यह समुदाय प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनसे प्रेरणा लेकर वे इसे चित्रकला में प्रदर्शित भी करते हैं। परंपरागत रूप से यह कला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती हैं। इन चित्रकलाओं में जहां पेड़–पौधों को कैनवास पर उकेरा जाता है वहीं पशुओं के साथ–साथ आकाश, सूर्य, चंद्रमा आदि का भी सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। आकार और प्रयोग में लाई गई जटिलताओं के आधार पर इन्हें बनाने में 2 दिन से लेकर 2 महीने तक का समय लगता है। कई बार बड़ी कलाकृतियों को समूहों में तैयार किया जाता है। नर्मदा परिक्रमा यह एक पवित्र आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसमें देवी के रूप में पूजनीय मां नर्मदा नदी के चारों ओर 3500 किलोमीटर नंगे पैर परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक घाटों, मंदिरों और पवित्र शहरों से होकर गुजरती है। नर्मदा परिक्रमा की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसका वर्णन महाकाव्यों और प्राचीन पवित्र ग्रंथों में मिलता है। यह परिक्रमा छह से आठ महीनों की अवधि में की जाती है। नर्मदा का तट ध्यान और तपस्या की भूमि भी रहा है, जिसे सांस्कृतिक रूप से कई महान ऋषियों और संतों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। श्रद्धालु चलते समय लगातार मां नर्मदा की स्तुति करते हुए “नर्मदे हर!” का जाप करते हैं। यात्रा अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम से शुरू होकर पुन: उस बिंदु पर वापस आने के बाद पूरी मानी जाती है। तीर्थयात्रा पूरी होने के बाद, भक्तों को ओंकारेश्वर मंदिर जाना होता है जो भगवान शिव को समर्पित है और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भगोरिया आदिवासी नृत्य और महोत्सव भील जनजाति के बीच खुशी, एकता और परंपरा का एक जीवंत उत्सव है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भील समुदाय के भगोरिया त्यौहार का एक अभिन्न अंग है, जो होली के त्यौहार से सात दिन पहले मनाया जाता है। यह त्यौहार पूरे समुदाय व रिश्तेदारों से मिलने के साथ–साथ आनंद से सराबोर होने का अवसर होता है। यह त्यौहार फसल कटाई के मौसम का भी प्रतीक है। भील समुदाय के साथ-साथ भीलाला और पटेलिया जैसे स्थानीय आदिवासी समुदाय भी यह त्यौहार मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह त्यौहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने की परंपरा के रूप में शुरू हुआ था। गांव भगोर में भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित एक मंदिर भी मौजूद है (ऐसा माना जाता है कि यह नाम शिव और पार्वती के लिए एक और नाम भाव-गौरी से लिया गया है)। इस दौरान सभी गांवों के निवासी अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पैदल आते हैं। पुरुष धोती और सिर पर साफा पहनते हैं। वे अपने पारंपरिक हथियार और कमर में घंटी की बेल्ट भी पहनते हैं। महिलाएं दुपट्टे के साथ घाघरा और पोल्की पहनती हैं। जनजातीय पुरुष और महिलाएं चांदी के पारंपरिक आभूषण पहनते हैं। समूह पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों जैसे मांदर, कुंडी, पीतल की थाली और बांसुरी का वादन करते हुए समूह नृत्य करते हैं। recent visitors 54

मध्य प्रदेश में कहीं भीषण गर्मी का कहर जारी, 40 जिलों में 2 और 3 मई को बारिश हो सकती

भोपाल मध्यप्रदेश के लगभग 40 जिलों में 2 और 3 मई को बारिश हो सकती है। जिन जिलों में मौसम का बदलाव देखने को मिलेगा, उनमें भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर भी शामिल हैं। इसका कारण वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का एक्टिव होना है। हालांकि, इससे पहले 30 अप्रैल और 1 मई को प्रदेश में तेज गर्मी का असर रहेगा। खासकर उज्जैन संभाग में लू चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को रतलाम, नीमच और मंदसौर में लू का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जैसे क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अन्य जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा। इधर, नर्मदापुरम जिले के डोलरिया में मंगलवार शाम को आई तेज आंधी से राजपूत समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए लगाया गया टेंट गिर गया। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को रतलाम, नीमच-मंदसौर में लू का अलर्ट है। वहीं, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत बाकी के जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ की वजह से पिछले दो-तीन दिन से बारिश हो रही है। पूर्वी हिस्से में मंगलवार को भी बारिश हुई। बुधवार से कुछ जिलों में ही असर देखने को मिलेगा। वहीं, राजस्थान और गुजरात से जुड़े जिलों में हीट वेव यानी, लू चल सकती है। 2 मई को वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है। जिसका असर अगले 3 दिन तक रह सकता है। पिछले 24 घंटे कैसा रहा मौसम? पिछले 24 घंटों के दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर और शहडोल संभाग के कुछ जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई, वहीं बाकी हिस्सों में मौसम साफ और गर्म रहा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 3 दिनों में भी तापमान में खास बदलाव की उम्मीद नहीं है, हालांकि पारा 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है। धूप ने तोड़े 5 साल के रिकॉर्ड, गर्मी से सड़कों पर पसरा सन्नाटा  इंदौर में मंगलवार को अप्रैल महीने की अब तक की सबसे भीषण गर्मी दर्ज की गई। दिन का तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री अधिक है। तेज धूप और तपन के चलते दोपहर में सड़कों पर आवाजाही कम हो गई थी। लोग घरों में दुबके रहे क्योंकि धूप में एक मिनट भी खड़ा रह पाना मुश्किल हो रहा था। यह दिन न केवल अप्रैल का, बल्कि पिछले पांच सालों का भी सबसे गर्म दिन बन गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक ऐसी ही भीषण गर्मी बने रहने की संभावना जताई है। बुधवार को भी सुबह से ही तेज धूप है। गर्म हवाओं के थपेड़े चल रहे हैं और 11 बजे बाद सड़कें सूनी हो गई हैं। पिछले दस वर्षों में केवल चार बार पार हुआ 42 डिग्री का आंकड़ा   पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 29 अप्रैल 2019 को इंदौर में अब तक का सबसे अधिक तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। बीते दशक में केवल चार बार तापमान 42 डिग्री के पार गया है। पिछले पांच वर्षों में भी इस बार का तापमान सबसे ज्यादा रहा। 18 अप्रैल 2024 को अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री था, जबकि मंगलवार को यह रिकॉर्ड टूट गया। मंगलवार की रात का तापमान भी सामान्य से 3 डिग्री अधिक, यानी 26.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिली। मौसम वैज्ञानिकों का पूर्वानुमान: लू का खतरा बरकरार मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि बीते कुछ दिनों से प्रदेश के कुछ इलाकों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ के कारण बारिश हो रही है। हालांकि इंदौर संभाग पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। यहां गर्मी का दौर जारी है और अगले दो दिन भी हालात ऐसे ही बने रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेताया है कि राजस्थान और गुजरात से सटे जिलों में हीट वेव यानी लू चलने के आसार हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। कई जिलों में मौसम बदला, बारिश भी हुई इससे पहले मंगलवार को प्रदेश में मौसम बदला रहा। सिवनी, दमोह, सिंगरौली, अनूपपुर और पन्ना तेज आंधी चली। वहीं, रीवा, कटनी, शहडोल, नरसिंहपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सतना, सीधी, मंडला, रायसेन, भोपाल, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, मैहर, उमरिया, जबलपुर, डिंडौरी, पांढुर्णा और सागर में भी मौसम बदला रहा। मंडला में ओले भी गिरे। दूसरी ओर, 8 शहर ऐसे हैं, जहां तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ की वजह से ऐसा मौसम है। भोपाल में सुबह से ही बादल छाए रहे। हालांकि, गर्मी का असर बरकरार रहा। यहां मंगलवार को अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री, इंदौर में 42.6 डिग्री, ग्वालियर में 38.8 डिग्री, उज्जैन में 43 डिग्री और जबलपुर में 40 डिग्री दर्ज किया गया। कहीं लू तो कहीं बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार, 30 अप्रैल को मध्य प्रदेश के रीवा, मऊगंज, सिंगरौली, शहडोल, सीधी और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है. वहीं रतलाम, नीमच और मंदसौर में लू का अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत बाकी के जिलों में गर्मी का असर रहेगा. मंगलवार को दमोह, सिवनी, सिंगरौली, अनूपपुर और पन्ना तेज आंधी चली, जबकि मंडला में ओले गिरे. वहीं भोपाल, सीहोर, रीवा, सतना, शहडोल, कटनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सीधी, बैतूल, मैहर, उमरिया, जबलपुर, डिंडौरी, पांढुर्णा और सागर में मौसम का मिजाज बदला रहा. मौसम विभाग के अनुसार,  2 और 3 मई को मध्य प्रदेश के 40 जिलों में बारिश होने के आसार हैं. बीते दिन  शाजापुर में तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. गुना में 43.5 डिग्री सेल्सियस, खजुराहो में  तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में पारा 43.2 डिग्री सेल्सियस, धार-रायसेन-नरसिंहपुर में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा सागर और टीकमगढ़ में 42.8 डिग्री सेल्सियस, खंडवा और दमोह में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस, खरगोन में पारा 42.4 डिग्री सेल्सियस रहा. इसके अलावा भोपाल में तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 42.6 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर में पारा 38.8 डिग्री सेल्सियस, उज्जैन में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर में 40 … Read more

भारत को Sweden से मिला Anti-armour हथियार, पाकिस्तान के लिए बनेगा काल

नई दिल्ली/ स्टॉकहोम  पहलगाम आतंकी हमले के बीच आशंका है कि भारत और पाकिस्तान युद्ध में फंस सकते हैं। इन सबके बीच स्वीडिश कंपनी SAAB ने भारतीय सशस्त्र बलों को AT4 Anti-Armor वीपन सिस्टम की डिलीवरी की घोषणा की है। साब इंडिया ने कहा है कि उसने कामयाबी के साथ भारतीय सुरक्षा बलों को AT4 Anti-Armor सिस्टम सौंप दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में SAAB इंडिया ने कहा है कि "हमें भारतीय सशस्त्र बलों को हमारे AT4 Anti-Armor हथियार प्रणाली की सफल डिलीवरी की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। AT4 कम दूरी की लड़ाई के लिए एक भरोसेमंद सिंगल-शॉट समाधान के रूप में भारत के शस्त्रागार में शामिल हो गया है। भारत ने AT4CS AST वैरिएंट खरीदा है, जिसमें इमारतों, दुश्मनों के बंकरों और शहरी लड़ाई में इस्तेमाल किया जाता है।" भारतीय सेना AT4 Anti-Armor से शहरी युद्ध के अलावा पहाड़ी इलाकों में बंकर बनाकर छिपे दुश्मनों पर सिंगल शॉट हमला कर सकती है। इसके अलावा इसे काफी कम स्थान से दागा जा सकता है। कई बार जवानों के पास हथियार चलाने के लिए काफी कम स्थान होता है या फिर इमारतों में छिपकर भी इसे फायर किया जा सकता है। भारत ने खास तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के लिए इसे स्वीडिश कंपनी साब से खरीदा है और इस वक्त, जब पाकिस्तान के साथ तनाव बना हुआ है, AT4 Anti-Armor भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाएगा। AT4 Anti-Armor सिस्टम की खासियत AT4 Anti-Armor को जवान कंधे पर रखकर फायर कर सकते हैं। ये एक मानव-पोर्टेबल हथियार है, जिसका वजन सिर्फ 7.5 किलो होता है। ये एक ही शॉट के बाद डिस्पोजेबल हो जाते होते हैं। ये एक रिकॉइललेस हथियार है, जिसे एक ही सैनिक ऑपरेट कर सकते हैं। इसकी लंबाई सिर्फ एक मीटर होती है और इससे 300 मीटर की दूरी से दुश्मन पर सटीक हमला किया जा सकता है। एक बार दागने के बाद इसे फेंक दिया जाता है। इसमें प्री लोडेड हीट वारहेड होता है, जो टैंक, बख्तरबंद वाहन, बंकर या दीवार को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे पैदल सेना के लिए डिजाइन किया गया है। यानि एक सैनिक छिपकर आराम से किसी टैंक को उड़ा सकता है। इसका इस्तेमाल काफी आसान होता है और फायर करने के लिए इसे कुछ ही सेकंड्स में तैयार किया जा सकता है। बख्तरबंद गाड़ियों, फोर्टिफाइड पोजिशन्स, और लो-फ्लाईंग हेलीकॉप्टरों के खिलाफ ये काफी असरदार है। भारत के अलावा इसका इस्तेमाल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, जर्मनी और फ्रांसीसी सैनिक करते हैं। यूक्रेनी सैनिकों ने इससे रूसी टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को काफी नुकसान पहुंचाया है। रूसी टैंकों को उड़ाने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल किया गया है। हालांकि भारत इसका नया ग्राहक है, लेकिन भारतीय सेना लंबे समय से साब द्वारा डिजाइन किए गए कार्ल-गुस्ताफ शोल्डर-फायर हथियार सिस्टम का इस्तेमाल करती आ रही है। इसका उत्पादन भारत में भारत डायनेमिक्स करती है। AT4 में कार्ल-गुस्ताफ वाली सारी खूबियां हैं। AT4-CS एक हल्का, पोर्टेबल, पूरी तरह से डिस्पोजेबल एंटी-टैंक हथियार है जिसे भारतीय सेना और वायुसेना ने 2022 में प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के तहत चुना था। पता चला है कि करीब 2,000 यूनिट का ऑर्डर दिया गया था। इसका वजन करीब 9 किलोग्राम है और इसकी प्रभावी रेंज 200 मीटर है। कार्ल गुस्ताफ़ का इस्तेमाल भारतीय सेना द्वारा 1976 से किया जा रहा है और यह कंधे से दागा जाने वाला मुख्य हथियार रहा है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय सेना कार्ल गुस्ताफ़ के लगभग सात अलग-अलग प्रकारों का इस्तेमाल कर रही है। कार्ल गुस्ताफ़ के गोला-बारूद की रेंज अलग-अलग है, जिसकी अधिकतम रेंज 1,500 मीटर तक है। एंटी-टैंक गोला-बारूद की रेंज 500 मीटर है। कार्ल गुस्ताफ़ के पुराने संस्करण और पुराने गोला-बारूद का निर्माण भारत में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड और अब नए बने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा किया जाता है। recent visitors 48