अब वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीनों पर कोई डकैती नहीं डाल सकता है. लूट-खसोट नहीं हो सकती है: सीएम योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को संसद से वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने की सराहना करते हुए कहा कि अब कोई भी वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीन नहीं लूट सकेगा और सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या गरीबों के लिए आवास बनाने के लिए होगा. उन्होंने कहा, 'पिछली सरकारों के पास अपने परिवार का पेट भरने के अलावा किसी चीज के लिए फुर्सत ही नहीं थी. जमीन लुटवाने से फुर्सत मिलती तब तो विकास करते. देश की संसद ने वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम पारित किया है. अब वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीनों पर कोई डकैती नहीं डाल सकता है. लूट-खसोट नहीं हो सकती है.' योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'अब चौराहे की जमीनों पर कोई कब्जा नहीं कर सकता है. अब जो भी सार्वजनिक जमीन होगी, राजस्व की जमीन होगी, उसका उपयोग विद्यालय बनाने में, चिकित्सालय बनाने में, महाविद्यालय बनाने में गरीबों के लिए आवास बनाने में होगा. केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड के नाम पर होने वाली लूट-खसोट पर हमेशा के लिए लगाम लगाने का काम किया है.' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मैं वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. क्योंकि उत्तर प्रदेश में भी वक्फ बोर्ड के नाम पर लाखों एकड़ लैंड पर नाजायज कब्जा करने का काम किया गया था. इसमें किसी गरीब का कल्याण नहीं हो रहा था बल्कि चंद लोगों के लिए लूट का एक माध्यम बन गया था. इस लूट पर अब सख्ती से लगाम लगेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महराजगंज जिले के रतनपुर में 654 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने उपरोक्त टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन गया है. दो वर्ष के अंदर तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. हर घर बिजली के बाद अब हर घर नल-जल योजना को मूर्त रूप दिया जा रहा है. यूपी के सीएम ने कहा कि महराजगंज अब पिछड़ा जिला नहीं है. विकास व विरासत का समन्वय कैसे होना चाहिए काशी व अयोध्या इसके उदाहरण हैं. महाकुंभ का आयोजन देखकर तो पूरी दुनिया भौचक्की रह गई. सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी में कोई भूखा नहीं मरता है. नौजवाओं के लिए शिक्षा, बेटी की सुरक्षा, व्यापारियों का सम्मान व अन्नदाता की खुशहली के लिए सरकार कार्य कर रही है. रोहिन बैराज इसका उदाहरण है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा. केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, नौतनवा विधायक ऋषि त्रिपाठी, पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया, सिसवां विधायक प्रेम सागर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष रविकांत पटेल व भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय सहित बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी और लोग इस कार्यक्रम में उपस्थित थे.   recent visitors 58

महेंद्र सिंह धोनी के माता-पिता मैदान पर आए नजर, मैच में कुछ ऐसे संकेत मिले जो संन्यास के हो सकते है, फैंस में हलचल

नई दिल्ली भारतीय टीम के स्टार कप्तान और देश को तीन आईसीसी ट्रॉफी जिताने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब सिर्फ आईपीएल खेलते हैं। हर आईपीएल में धोनी के संन्यास को लेकर खबरें उठती हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। हालांकि, शनिवार को दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिससे लगने लगा है कि ये धोनी की आखिरी मैच हो सकता है। दिल्ली और चेन्नई के बीच आईपीएल-2025 का मैच चेपॉक स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच के दौरान 12वें ओवर की शुरुआत से पहले धोनी के माता-पिता को दिखाया गया। पहले कभी ऐसा देखने को नहीं मिला है। उनके माता-पिता को कभी भी मैच में नहीं देखा गया है। इसी कारण ये सवाल उठ रहे हैं क्या आज धोनी आखिरी आईपीएल मैच खेल रहे हैं। धोनी ने कही थे ये बात धोनी ने एक बार कहा था कि वह अपना आखिरी आईपीएल मैच चेन्नई के घरेलू मैदान पर खेलेंगे क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो फ्रेंचाइजी के फैंस के लिए ये अच्छा नहीं होगा जो उन्हें बहुत प्यार करते हैं। आज का मैच चेन्नई के चेपॉक में ही है। धोनी हमेशा से जो करते हैं उसके बारे में किसी को भनक भी नहीं लगने देते। 2020 में जब उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा था तब भी किसी को उम्मीद नहीं थी, लेकिन उन्होंने ये फैसला किया था। टीम इंडिया के लिए टेस्ट से संन्यास भी धोनी ने साल 2014 में अचानक ही लिया था। टीम इंडिया की सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ने का फैसला भी धोनी ने एकदम से लिया था। पुराने रंग में नहीं हैं धोनी धोनी विकेट के पीछे से अभी भी उसी फुर्ती से विकेटकीपिंग कर रहे हैं जिस तरह से पहले करते थे। हालांकि, उनकी बैटिंग में वो पैनापन नहीं दिखा है जिसके लिए वो जाने जाते थे। इसी कारण वह इस बार नौवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भी दिखे हैं और अपने से पहले उन्होंने रविचंद्रन अश्विन को भेजा था। उनके इस फैसले की आलोचना भी हुई थी। recent visitors 43

स्कूल संचालक अखिलेश मेबन को पुलिस ने केरल से गिरफ्तार किया, भगवान श्रीराम पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

जबलपुर.  भगवान श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले अखिलेश मेबिन को पुलिस ने केरल से गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी अखिलेश मेबन विजय नगर स्थित जॉय स्कूल का संचालक है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मेबिन काफी वक्त से फरार चल रहा था. लगातार उसकी गिरफ्तारी को लेकर मांग की जा रही थी. अब केरल में गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे जबलपुर लेकर आएगी. फिर आगे की पूछताछ की जाएगी. मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर मेबिन की गिरफ्तारी हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी अखिलेश मेबन अपने एक दोस्त से संपर्क करने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान उसका लोकेशन ट्रेस हो गया. बताया जा रहा है कि जबलपुर पुलिस आरोपी अखिलेश मेबन को केरल से जबलपुर लेकर रवाना हो गई है. लगातार उठ रही थी गिरफ्तारी की मांग इससे पहले जबलपुर पुलिस को मेबन के बांधवगढ़ में होने की सूचना मिली थी. इतना ही नहीं उसके नागपुर भागने का भी इनपुट मिल रहा था. इसके बाद पुलिस की एक दर्जन टीमें अलग-अलग जगहों पर गिरफ्तारी के लिए रवाना हुी थी. बताया जाता है कि अपने रसूख के दम पर फरारी काटने में आरोपी मेबन माहिर है. आरोपी मेबन ने कुछ दिन पहले अपने WhatsApp स्टेटस पर हिंदुओं और प्रभु श्री राम को लेकर अपशब्द थे. जॉय स्कूल के मालिक के व्हाट्सएप पर लगाए गए स्टेटस को लेकर जमकर आक्रोश भड़का था. मेबन की गिरफ्तारी को लेकर संत समाज, हिन्दू संगठन, कांग्रेस से लेकर कई संगठनों ने सड़कों पर उतरकर पुलिस को ज्ञापन देते हुए गिरफ्तारी की मांग की थी.   recent visitors 40

बैतूल में कलेक्टर आकस्मिक निरीक्षण से कर्मचारियों में हड़कंप, काम छोड़ ताश खेलते मिला कर्मचारी

बैतूल  सरकारी दफ्तर अपने आराम से काम करने वाले वर्क कल्चर के फेमस तो हैं ही इसी बीच में कई कर्मचारी जनता का काम करने की जगह ताश भी खेलने लगते हैं। ऐसा करते हुए बैतूल में कुछ कर्मचारी कलेक्टर के हाथ चढ़ गए। फिर क्या नाप दिए गए। कलेक्टर के अचानक निरीक्षण में एक कर्मचारी ताश खेलते पकड़ा गया। उसे सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, तीन अन्य कर्मचारियों का वेतन भी काटा गया है। बैतूल के कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को हड़कंप मच गया। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी अचानक कार्यालयों का निरीक्षण करने निकल गए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ट्राइबल ऑफिस में एक कर्मचारी को कंप्यूटर पर ताश खेलते हुए पाया। ऑफिस के समय में ताश खेलते देखकर कलेक्टर ने उन पर कार्रवाई की। इसके बाद उन्होंने तुरंत कर्मचारी को सस्पेंड करने का आदेश दे दिया। तीन कर्मचारियों के वेतन कटे कलेक्टर के अचानक पहुंचने से कर्मचारी चौंक गए। लापरवाही मिलने पर तीन कर्मचारियों का वेतन काटने का भी आदेश दिया गया। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी दोपहर में सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस के काम का निरीक्षण करने पहुंचे थे। वे कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित अलग-अलग कार्यालयों में गए। ताश खेलते मिला कर्मचारी निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर आदिम जाति कार्य विभाग के कार्यालय में पहुंचे। वहां उन्होंने कर्मचारी जगदीश कुबड़े को कंप्यूटर पर ताश खेलते हुए पाया। यह देखकर कलेक्टर ने सीधा एक्शन लिया और तुरंत कर्मचारी को सस्पेंड करने का आदेश दे दिया। कलेक्टर ने ऑफिस टाइम में काम की जगह ताश खेलने पर कर्मचारी की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि ऑफिस टाइम में काम करना चाहिए, ताश नहीं। recent visitors 53

UPSRTC में महिला कंडक्टरों को उनके अपने जिले में ही कंडक्टर की नौकरी दी जाएगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार राज्य की रोडवेज बसों में अब 5000 महिलाएं कंडक्टर की भर्ती करने का फैसला लिया है. यह भर्ती उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के तहत संविदा के आधार पर होगी. इस फैसले से न सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मिसाल बनेगा. महिलाओं को मिलेगी गृह जनपद में नियुक्ति महिलाओं की सुविधा के लिए सरकार ने खास इंतजाम किया है. इन महिला कंडक्टरों को उनके अपने जिले में ही नौकरी दी जाएगी. इससे उन्हें घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा और वे अपने परिवार के साथ रहकर काम कर सकेंगी. यह कदम महिलाओं को सुरक्षित माहौल में नौकरी करने का मौका देगा और उनके लिए काम व घर के बीच तालमेल बनाना आसान होगा. यूपी परिवहन निगम के नियमों के हिसाब से मिलेगा वेतन इन कंडक्टरों को यूपी परिवहन निगम के नियमों के हिसाब से वेतन मिलेगा. साथ ही, उन्हें काम करने के लिए जरूरी सारी सुविधाएं भी दी जाएंगी. सरकार का मकसद है कि महिलाएं सम्मान और सुरक्षा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें. 8 अप्रैल से शुरू होंगे रोजगार मेले भर्ती प्रक्रिया को तेजी और पारदर्शिता से पूरा करने के उद्देश्य से, राज्य के विभिन्न जिलों में रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है. परिवहन मंत्री ने बताया कि ये मेले निम्नलिखित तिथियों और स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे: 08 अप्रैल 2025: गाजियाबाद, अलीगढ़, बरेली, अयोध्या, वाराणसी 11 अप्रैल 2025: मेरठ, इटावा, हरदोई, देवीपाटन, आजमगढ़ 15 अप्रैल 2025: सहारनपुर, झांसी, कानपुर, चित्रकूटधाम, बांदा, प्रयागराज 17 अप्रैल 2025: नोएडा, आगरा, मुरादाबाद, लखनऊ, गोरखपुर वहां मौके पर ही शुरुआती प्रक्रिया पूरी होगी. इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन का भी ऑप्शन है. महिलाएं यूपीएसआरटीसी की वेबसाइट www.upsrtc.com पर जाकर फॉर्म भर सकती हैं. सरकार उठाएगी ट्रेनिंग का पूरा खर्च चयन के बाद महिलाओं को काम सीखने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी. यह ट्रेनिंग यूपी कौशल विकास मिशन के तहत होगी. अगर कोई खास ट्रेनिंग चाहिए होगी, तो परिवहन निगम उसका इंतजाम करेगा. ट्रेनिंग से संबंधित सभी खर्चे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा उठाए जाएंगे. यह कदम महिलाओं को नौकरी के लिए तैयार करेगा और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा. recent visitors 44

वक्फ विधेयक पर इंडिया ब्लॉक में शामिल दलों के बीच ही एक राय नहीं बन पा रही,शिवसेना-यूबीटी नहीं जाएगी SC

मुंबई वक्फ (संशोधन) विधेयक पर इंडिया ब्लॉक में शामिल दलों के बीच ही एक राय नहीं बन पा रही कि उन्हें इसका विरोध करना है या समर्थन. जहां एक ओर कांग्रेस और डीएमके ने संसद से पारित इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, वहीं इंडिया ब्लॉक में शामिल उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना-यूबीटी ने विधेयक के खिलाफ सर्वोच्च अदालत नहीं जाने की बात कही है. हालांकि, उद्धव सेना ने इस बिल का लोकसभा और राज्यसभा में पुरजोर विरोध किया था. लेकिन अब पार्टी का कहना है कि उसके लिए यह फाइल अब बंद हो चुकी है. बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. वह इस बिल को लेकर बनीं जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के सदस्य भी थे. इस बारे में पूछे जाने पर शिवसेना-यूबीटी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे. हमने हमारा काम कर दिया है. जो कहना था, जो बोलना था वो सब संसद के दोनों सदनों में हो गया. हमारे लिए ये फाइल अब बंद हो गई है.' वक्फ बिल उद्योगपतियों के फायदे के लिए: राउत शिवसेना-यूबीटी नेता संजय राउत ने वक्त बिल को लेकर भाजपा की आलोचना की थी और इसे उद्योगपतियों के फायदे के लिए बनाया गया एजेंडा बताया था. अपना पक्ष रखते हुए संजय राउत ने कहा था, 'वक्फ बिल का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है. यह एक सामान्य बिल है. अगर कोई इसे हिंदुत्व से जोड़ रहा है तो वह मूर्ख है. अगर इस बिल से कोई संबंध है तो इसका साफ मकसद है कि भविष्य में कुछ उद्योगपतियों के लिए वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा करना आसान हो जाए.' बता दें कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है और इसे राष्ट्रपति के पास उनके अनुमोदन के लिए भेजा गया है. राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा और केंद्र सरकार द्वारा गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह पूरे देश में लागू हो जाएगा. लोकसभा में वक्फ बिल के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 वोट. वहीं, राज्यसभा में इस बिल के समर्थन में 128 वोट पड़े, जबकि विरोध में 95 वोट. राज्यसभा में वक्फ बिल के विरोध में बोलने को लेकर एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत पर कटाक्ष भी किया था. प्रफुल्ल पटेल ने किया था संजय राउत पर कटाक्ष प्रफुल्ल पटेल जब वक्फ बिल पर राज्यसभा में भाषण दे रहे थे, उस वक्त संजय राउत सदन में नहीं थे. एनसीपी सांसद की बात पर शिवसेना-यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कुछ कहना चाहा तो उन्होंने कहा-यूबीटी आप मत बोलिए, क्योंकि आप दूसरी पार्टी में थीं. तब तक संजय राउत सदन में आ गए. उनके आते ही प्रफुल्ल पटेल ने बाबरी मस्जिद विध्वंस और बंबई धमाकों का जिक्र करके उन पर तंज कसा. प्रफुल्ल पटेल ने संजय राउत की ओर इशारा करते हुए कहा, '…आ गए, हमारे दोस्त आ गए. बाला साहेब ठाकरे  कहते थे कि उन्हें अभिमान है कि शिव सैनिकों ने बाबरी मस्जिद गिराई….और 92-93 के मुंबई दंगों में मेरे शिव सैनिकों ने हिंदुओं की रक्षा की. हमारे संजय भैया पहले टक…टक…टक…टक बोलते थे, लेकिन आज उन्हें समझ नहीं आ रहा है क्या बोलूं क्या नहीं.' उनके इस बयान पर संजय राउत ने संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में पलटवार किया. राउत ने कहा कि प्रफुल्ल पटेल को बाबा साहेब की याद आनी नहीं चाहिए. अपने पिता समान शरद पवार को खंजर घोंप कर भाग गए और अब निष्ठा की बात करते हैं. उन्होंने कहा, 'प्रफुल्ल पटेल के किसके साथ संबंध थे, इकबाल मिर्ची और दाउद से…? ये आरोप मैं नहीं लगा रहा हूं, नरेंद्र मोदी ने ये आरोप लगाए थे और आप नहीं मानते तो ईडी की चार्जशीट पढ़ लें. ये चाटुकारिता करके वहां चले गए और बच गए, पर हम लोग डरने वाले नहीं हैं. इस तरह के लोगों को मैं वॉर्न करना चाहता हूं कि फिर से हमारे साथ कुछ करेंगे तो हमारे पास भी आपका पूरा कच्चा चिट्ठा है. ये लोग हमको क्लीन चिट दे रहे हैं. आप बीजेपी में जाइए और क्लीन चिट खरीद लीजिए.' उनके इस बयान के बाद प्रफुल्ल पटेल ने संजय राउत को एक्स पर टैग करते हुए लिखा, 'अंगूर खट्टे हैं…'. उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, 'बेहतर होता कि मेरे चरित्र और इतिहास के बारे में बात करने से पहले पवार साहब से जानकारी ले लेते.'   recent visitors 63

विवेकानंद नीडम रेलवे ओवर ब्रिज आम जनता के लिए नहीं खुला, हाई कोर्ट में याचिका दायर

ग्वालियर जनता के वोट से चुनकर “माननीय” बनने वाले जनप्रतिनिधि जनता के कितने फिक्रमंद हैं इसकी चर्चा इन दिनों ग्वालियर में जोरों पर है, बड़ी बात ये है कि ये चर्चा भाजपा की अंदरूनी सियासत को बाहर ला रही है, मामला सिर्फ एक रेलवे ओवर ब्रिज को जनता के लिए खोलने का है यानि उसके लोकार्पण का है, अब कौन माननीय इसका उद्घाटन करेगा ये अभी तय नहीं है लेकिन जनता का सब्र टूट गया है क्योंकि पुल तैयार है, जनता अब और परेशान होना नहीं चाहती इसलिए उसने 12 अप्रैल तक का समय दे दिया है वर्ना 13 को जनता खुद उदघाटन कर देगी इस मामले में हाई कोर्ट में भी एक जनहित याचिका दाखिल कर दी गई है। ग्वालियर शहर में बनकर तैयार एक रेलवे ओवर ब्रिज पिछले लंबे समय से उद्घाटन की बाट जोह रहा है, भाजपा की अंदरूनी सियासत के चलते ये तय नहीं हो पा रहा कि पुल का फीता काटने का श्रेय किसके खाते में जाए, दर असल ये ROB यानि विवेकानंद नीड़म रेलवे ओवर ब्रिज का कम 2017 में शुरू हुआ था इसे दो साल में बन जाना था लेकिन कभी रेलवे की आपत्ति कभी चुनाव कभी कोई और कारण के चलते ये आठ साल बाद तैयार हो पाया लेकिन कई महीनों से तैयार ब्रिज अभी भी जनता के लिए नहीं खोला जा रहा। जनता ने निकलना शुरू किया, प्रशासन ने बंद कराया पिछले दिनों शहर के लोगों ने इसपर से निकलना शुरू कर दिया था, जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन को लगी तत्काल इसपर बैरिकेड लगाकर आवागमन बंद कर दिया गया, आदेश जारी किया गया कि पुल पर स्ट्रीट लाईट का काम जारी है इसलिए अभी इसपर यातायात संभव नहीं है इसका उपयोग न किया जाए। शहर की जनता ने खोला मोर्चा अब जिन करीब 15 कॉलोनियों और कई गांवों के हजारों लोगों को इस पुल का लाभ मिलने वाला था और उनका करीब 4 किलोमीटर का चक्कर बचने वाला था वो आक्रोशित हो गए, उनको साथ मिला सामाजिक संस्थाओं का , शहर के प्रबुद्ध लोगों का और भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राज चड्ढा का , इन सभी ने मिलकर विरोध में मोर्चा खोल दिया। BJP नेता ने जनता के साथ मिलकर दिया अल्टीमेटम राज चड्ढा ने अपने फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट लिखी जिसमें शहर के सभी बड़े भाजपा नेताओं के नाम लिखे जिसमें सांसद, मंत्री , वरिष्ठ नेता शामिल हैं और उन्हें अल्टीमेटम दिया कों 12 अप्रैल तक जिसे श्रेय लेना है ले ले वर्ना किसी बुजुर्ग से 13 अप्रैल को नारियल फुडवा कर पुल क उद्घाटन करवा दिया जायेगा। हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर इतना ही नहीं आज शुक्रवार को इस मामले में एडवोकेट अवधेश तोमर ने ग्वालियर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दी और अर्जेंट हियरिंग की मांग कर दी , याचिका में कहा गया है कि जब ROB बनकर तैयार है तो सिर्फ नेता जी से उदघाटन का समय नहीं मिल पाने के कारण जनता परेशानी क्यों झेले? BJP के पूर्व जिला अध्यक्ष ने दिखाया आइना   बहरहाल भाजपा के एक पूर्व  जिला अध्यक्ष ने जनता का पक्ष रखते हुए अपनी ही पार्टी के नेताओं को आइना दिखा दिया है और ये बताने की कोशिश की है कि उन्हें जनता के वोटों ने ही माननीय बनाया है इसलिए उन्हें जनता की परेशानी पहले समझने की जरुरत है ना कि श्रेय लेने की सियासत करने की। अब देखना होगा कि 13 अप्रैल को इस ROB पर क्या होता है ? recent visitors 25