जंगली हाथियों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए प्रोजेक्ट एलीफेंट की मांग, बांधवगढ़ में हाथियों की संख्या अब 80 के करीब पहुंची

उमरिया  जंगल में जिस तरह से पर्यटक बाघ देखने के लिए उत्सुक होते हैं, उसी तरह से जंगली हाथियों को भी खुले जंगल में देखना पर्यटकों के लिए रोमांचकारी होता है। यह रोमांच पर्यटकों को देश के दक्षिण भारत में ही मिल पाता है, लेकिन अब इसकी संभावना मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी नजर आने लगी है। वर्ष 2018 में यहां आए जंगली हाथी, अब सहज होने लगे हैं। अब इन्हें जंगल में जिप्सियों को देखकर कोई भय नहीं होता और वे सामान्य ढंग से अपनी गतिविधियों में जुटे रहते हैं। जबकि पहले यह जंगली हाथी पर्यटकों के वाहन को देखकर उन्हें दौड़ाने की कोशिश करते थे। सभी हिस्सों में दिखाई देने लगे हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लगभग सभी हिस्सों में जंगली हाथी दिखाई देने लगे हैं। दरअसल, हाथियों के छोटे-छोटे झुंड बन गए हैं और यह झुंड जंगल के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देते हैं। कई जगह तो अकेला हाथी भी दिखाई देता है। बांधवगढ़ के खितौली, मगधी, ताला में हाथियों के छोटे झुंड और अकेला हाथी नजर आता है, जबकि पनपथा और पतौर में ज्यादा संख्या में जंगली हाथी नजर आते हैं। पिछले एक सप्ताह के अंदर खितौली और ताला में पर्यटकों ने जंगली हाथी को देखा और रोमांचित हुए। अब 80 के करीब पहुंच गई हाथियों की संख्या यहां खास बात यह है कि कहीं भी जंगली हाथियों ने पर्यटकों को देखकर उन पर हमले का प्रयास नहीं किया। पार्क प्रबंधन के अनुसार बांधवगढ़ में जंगली हाथियों की संख्या करीब 80 है। बता दें कि वर्ष 2018 में जब जंगली हाथियों ने बांधवगढ़ में प्रवेश किया तो वे पर्यटकों के लिए खतरा बन गए थे। वर्ष 2019 से लेकर 2022 तक खितौली में कई महीने तक पर्यटन रोकना पड़ गया था। इसी तरह से ताला में भी पर्यटन पर रोक लगा दी गई थी। इसकी वजह यह थी कि जंगली हाथियों ने अलग-अलग घटनाओं में पर्यटकों के वाहनों को काफी दूर तक दौड़ाया था। इस तरह की घटनाओं के चलते पार्क प्रबंधन ने सुरक्षा के लिहाज से पर्यटन रोक दिया था। सुरक्षा पर पूरा ध्यान जंगल में जंगली हाथियों की मौजूदगी की वजह से पर्यटकों की सुरक्षा के लिए शुरू से ही जिप्सी चालक और गाइड को अलर्ट किया जा रहा है। इस बारे में जानकारी देते हुए बांधवगढ़ के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि जिप्सी चालकों और गाइड को लगातार इस बात की हिदायत दी जाती है कि वह जंगली हाथी दिखने पर उनसे एक निश्चित दूरी बनाकर रखें, ताकि पर्यटक खतरे में ना आएं। प्रोजेक्ट एलीफेंट है जरूरी टाइगर रिजर्व में जिस तरह से प्रोजेक्ट टाइगर चलाया जाता है और उनकी सुरक्षा और संवर्धन के लिए काम होता है, उसी तरह से जंगली हाथियों के लिए भी प्रोजेक्ट एलीफेंट की मांग लंबे समय से मध्य प्रदेश में हो रही है। प्रोजेक्ट एलीफेंट आ जाने से जंगली हाथियों की तरफ पर्यटकों को भी आकर्षित कराया जा सकेगा। recent visitors 49

अब खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस के नए आवेदन, नवीनीकरण या संशोधन के लिए पेनकार्ड को जरूरी कर दिया गया

ग्वालियर अभी तक खाद्य कारोबारी (Food merchants) अपना टर्नओवर (Tornover) कम बताकर रजिस्ट्रेशन की जद से बच जाया करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इस पर रोक लगाने के लिए नियमों में परिवर्तन लाते हुए पेनकार्ड को लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। लाइसेंस के लिए करने होंगे नये आवेदन नए नियमों में अब खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस के नए आवेदन, नवीनीकरण या संशोधन के लिए पेनकार्ड को जरूरी कर दिया गया है। खाद्य कारोबारियों को इसे सब्मिट करना पड़ेगा। पेनकार्ड से लिंक के नए नियम को एफएसएसएआई ने 13 नवंबर 2024 को आदेश निकालकर जारी किया था, अब इसे लागू कर दिया गया है। ग्वालियर शहर में फिलहाल करीब 16 हजार रजिस्टर्ड खाद्य कारोबारी काम कर रहे हैं। खाद्य कारोबारियों को अब ये करना है  एफएसएसएआई लाइसेंस के नए आवेदन, नवीनीकरण या संशोधन के लिए अब पेन अनिवार्य है। मोडिफिकेशन टैब के अंतर्गत नॉन-फॉर्म सी लाइसेंस मोडिफिकेशन (बिना शुल्क के) के माध्यम से अपने पेन की जानकारी अपडेट करें। एफएसएसएआई से नियमित अपडेट और अलर्ट प्राप्त करने के लिए यूजर प्रोफाइल अनुभाग के अंतर्गत अपने संपर्क विवरण को जारी रखें। परेशानी आने पर कारोबारी हेल्पलाइन नंबर 1800112100 पर भी संपर्क कर सकते हैं। पेनकार्ड को ऐसे कर सकेंगे लिंक इसके लिए खाद्य कारोबारियों को एफएसएसएआई के फोसकॉस.एफएसएसएआई.जीओवी.इन पोर्टल पर जाना होगा। होम पेज पर रजिस्ट्रेशन में जाकर केओबी लिस्ट पर क्लिक करना होगा। इसके बाद एलिजेबल केओबी पर क्लिक करना पड़ेगा। इसके बाद चेकबॉक्स में पेनकार्ड की जानकारी सब्मिट करना पड़ेगी। तत्पश्चात मोबाइल नंबर और आधार की जानकारी को भी भरना पड़ेगा। recent visitors 46

प्रदेश में अब सफर होगा महंगा: 5 से 25 रुपए तक टोल बढ़ाया गया, जानिए कहां कितना टैक्स देना पड़ेगा

Travelling in the state will now be expensive: Toll has been increased from 5 to 25 rupees, know where and how much tax will have to be paid पानीपत। हरियाणा में हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर महंगा होगा। 1 अप्रैल से टोल टैक्स में 5 से 25 रुपए तक बढ़ोतरी हो जाएगी। हिसार, पानीपत, गुरुग्राम और रोहतक समेत अन्य जगहों पर 1 अप्रैल से ज्यादा टोल देना पड़ेगा। टोल अधिकारियों का कहना है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की तरफ से हर साल रेटों में इजाफा किया जाता है। वाहन चालकों को नए रेटों की जानकारी को लेकर कोई असमंजस न हो, इसे लेकर नई रेट सूची को टोल बूथों पर लगा दिया गया है। अब जानिए किस टोल पर कितना टैक्स लगेगा… गदपुरी टोल प्लाजा पर 5 रुपए से 20 तक बढ़ोतरी फरीदाबाद-पलवल के बीच में पढ़ने वाले गदपुरी टोल प्लाजा पर टोल रेट में 5 से 20 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। स्थानीय वाहनों के मंथली पास में भी 10 रुपए बढ़ाए गए हैं। अभी कार से एक तरफ का टोल 120 रुपए वसूला जाता है। 1 अप्रैल से उसमें 5 रुपए बढ़ाकर 125 रुपए कर दिया है। वहीं, दोनों तरफ से अभी 180 रुपए लिए जाते हैं, अगले महीने से 185 रुपए लिए जाएंगे। इसी तरह कॉमर्शियल वाहन से एक तरफ से 190 के बजाय 195 रुपए और दोनों तरफ से 280 के बजाय 290 रुपए लिए जाएंगे। भारी वाहनों से एक तरफ से 385 की जगह 400 और दोनों तरफ से 580 की जगह 600 रुपए निर्धारित किए गए हैं। मंथली पास में 10 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। टोल के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्थानीय लोगों के लिए मंथली पास की सेवा उपलब्ध है। पहले पास के लिए 340 रुपए देने पड़ते थे, लेकिन 1 अप्रैल से 350 रुपए देने होंगे। गुरुग्राम जिले के खेड़की दौला टोल प्लाजा पर टैक्स में 5 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इस टोल से रोज 60 से 70 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। अधिकतर वाहन मानेसर से दिल्ली या गुरुग्राम के बीच यात्रा करते हैं। यहां निजी कार, जीप और वैन के 85 रुपए, लाइट मोटर व्हीकल व मिनी बस के 125 रुपए और बस व ट्रक (2XL) के 255 रुपए लगेंगे। इसके साथ निजी कार, जीप और वैन का 950 रुपए का मंथली पास बनेगा। वहीं, कॉमर्शियल कार, जीप, वैन का 1255 रुपए, लाइट मोटर व्हीकल व मिनी बस का 1850 रुपए और बस व ट्रक (2XL) का 3770 रुपए का मंथली पास बनेगा। महेंद्रगढ़ में हाईवे नंबर-148B पर सिरोही बहाली नांगल चौधरी में बने टोल और हाईवे नंबर-152D पर नारनौल के जाट गुवाना में टोल पर दरों में 5% बढ़ोतरी होगी। नेशनल हाईवे नंबर-148B पर अभी कार का एक साइड का टोल 135 रुपए है, जो अब 140 रुपए हो जाएगा। इसी प्रकार अपडाउन के ये 205 रुपए होंगे। वहीं मिनी बस का टोल 215 है, जो 225 रुपए हो जाएगा। अपडाउन के 335 रुपए होंगे। 2XL ट्रक और बस का सिंगल साइड का 450 से बढ़कर 470 और अपडाउन के 700 रुपए, 3XL कॉमर्शियल व्हीकल के सिंगल साइड के 495 से बढ़कर 510 और अपडाउन के 765 रुपए लगेंगे। 4-6XL का रेट 710 रुपए से बढ़कर 735 रुपए और अपडाउन का 1100 रुपए किया गया है। नारनौल के जाट गुवाना टोल से अंबाला के पवनावा तक कार, जीप के अभी एक साइड के 360 रुपए लगते हैं, जो 1 अप्रैल से 375 रुपए हो जाएंगे। वहीं, अपडाउन के 540 रुपए से बढ़कर 560 होंगे। छोटी बस के एक साइड के 585 से बढ़कर 605, दोनों साइड के 875 रुपए से बढ़कर 905 रुपए और बस एवं ट्रक के 1220 से बढ़कर 1265 रुपए हो जाएंगे। अपडाउन के 1830 की जगह 1895 रुपए देने होंगे। इसी प्रकार 3XL का किराया 1330 से बढ़कर 1380 व अपडाउन का 2000 से बढ़कर 2070 और हैवी व्हीकल का किराया एक साइड का 1915 से बढ़कर 1980 रुपए व अपडाउन का 2870 से बढ़कर 2975 रुपए हो जाएगा। दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे पर जींद में खटकड़ टोल प्लाजा पर 5 से 25 रुपए तक बढ़ाए गए हैं। खटकड़ टोल पर अब तक कार, जीप, वैन का एक तरफ का टोल 120 रुपए और दोनों तरफ का 180 रुपए है। 1 अप्रैल से कार, जीप, वैन के एक तरफ के 125 और दोनों तरफ के 185 रुपए लगेंगे। हल्के कॉमर्शियल वाहन का अभी टोल दोनों तरफ का 290 लग रहा है। 1 अप्रैल से पूरे 300 रुपए देने होंगे। बस व ट्रक का अभी एक तरफ का टोल 405 रुपए है। 1 अप्रैल से 420 रुपए देने होंगे। 3XL कॉमर्शियल वाहनों का एक तरफ का टोल 440 रुपए है। 1 अप्रैल से यह बढ़कर 460 रुपए हो जाएंगे। इसी तरह हैवी कंस्ट्रक्शन मशीन का वर्तमान में टोल 635 रुपए लिया जा रहा है, लेकिन 1 अप्रैल से यह 660 रुपए हो जाएगा। लुदाना और बद्दोवाल टोल प्लाजा पर भी 5 से 20 रुपए तक रेट बढ़ाए गए हैं। recent visitors 124

समृद्धि कृषि यंत्र एमएस इंटरप्राइजेज के प्रयास से कृषि करना हुआ और आसान

Samriddhi Krishi Yantra Agriculture made easier with the efforts of MS Enterprises भोपाल (ब्यूरो चीफ)। राजधानी भोपाल के बायपास रोड मीणा चौराहा साहू मार्केट के सामने एमएस एंटरप्राइजेज किसानों के लिए बड़ा तोहफा लाया है। एमएस इंटरप्राइजेज के समृद्धि किसान यंत्र से अब कृषि करना और आसान हो गया है। एमएस एंटरप्राइजेज किसान भाइयों के लिए ऐसे कृषि यंत्र बना रही है, जो क्वालिटी में दमदार और मजबूत हैं। जो कृषि के लिए बड़े फायदेमंद साबित हो रहे हैं। एमएस एंटरप्राइजेज का खुद का कारखाना हेै, जिसको आईएसओ ने मान्यता दी है। जहां प्रशिक्षित कारीगर आधुनिक तकनीकि आधारित अंतराष्ट्रीय स्तर के ब्रांड अपोलो और सेल आयरन से कृषि तैयार करते हैं। कंपनी के संचालक शिवम विश्वकर्मा ने बताया कि जब से कंपनी ने कृषि यंत्र बनाने की दिशा में कदम रखा, तब से अभी तक कोई शिकायत नहीं आई। सभी किसान कृषि यंत्र से अपनी कृषि को समृद्ध कर अपने आपको आत्मनिर्भर और सशक्त बना रहे हैं। सभी इंप्लीमेंट किसानों की जरूरत के मुताबिक बनाए जाते हैं। शिवम विश्वकर्मा ने बताया कि एमएस एंटरप्राइजेज किसानों के लिए मुख्य रूप से कल्टीवेटर, बलराम कल्टीवेटर, रोटो कल्टीवेटर, ट्रिजर, ट्रॉली्र डोजर, बंड फारमर आदि यह सभी इंप्लीमेंट एमपी और पंजाप पैटर्न पर बनाए जाते हैं। अभी एमएस एंटरप्राइजेज कृषि के लिए जमीन तैयार करने यानि मिट्टी की खोक वैज्ञानिक रूप से तैयार करते हैं। जब कृषि समृद्ध होगी तो किसान भी आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा। कंपनी ने किसानों से वादा किया है कि हम ऐसे कृषि यंत्र बनाएंगे कि खेती को लाभ का धंधा बनाने से कोई रोक नहीं सकता है। आगे भी एमएस एंटरप्राइजेज अपने स्वयं के बनाए सीड्रिल की टेस्टिंग कर रहा है, जो जल्द ही किसानों को उपलब्ध हो जाएगा। कंपनी ने अभी तक जितने भी यंत्र बनाए हैं, उन सभी की कम से कम 3 सीजन टेस्टिंग हैं, उसके बाद भी किसानों को विक्रय के लिए देते हैं। किसानों का जबरदस्त हमारे कृषि यंत्रों की ओर दिखाई दे रहा है। शिवम विश्वकर्मा ने किसान भाइयों से आग्रह है कि आप थोड़े से पैसे बचाकर कच्चे लोहे के यंत्र मत घर ले जाइए। आप एमएस एंटरप्राइजेज से समृद्धि किसान यंत्र खरीदिए, आपको 90 दिनों की फुल गारंटी मिलेगी। हमारा उद्देश्य धंधा करना नहीं, बल्कि किसान को समृद्धि कृषि यंत्र से समृद्ध बनाना है। जब किसान समृद्ध होगा, तो हम खुशहाल होंगे और हमारा देश भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा। recent visitors 147

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बड़ी सफलता, आतंकियों से चल रही मुठभेड़ में ढेर किए 5 आतंकी, 4 पुलिसकर्मी भी शहीद

कठुआ जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में कम से कम पांच आतंकवादी ढेर हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। वहीं चार पुलिसकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हो चुकी है। जिले के सुदूर वन क्षेत्र में पहले हुई मुठभेड़ वाली जगह के पास शुक्रवार को, ड्रोन के जरिए एक और पुलिसकर्मी का शव देखा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में यह चौथा पुलिसकर्मी शहीद हुआ है। सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया है। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन भी भारी गोलीबारी और विस्फोटों की तेज आवाजें सुनाई देती रहीं। पुलिस, सेना और सीआरपीएफ ने आज सुबह विभिन्न दिशाओं से क्षेत्र में प्रवेश किया। अधिकारियों ने बताया कि सुबह होते ही अभियान फिर से शुरू कर दिया। सुरक्षा बलों का मुख्य उद्देश्य मारे गए आतंकवादियों और पुलिसकर्मियों के शवों को निकालना, एक लापता पुलिसकर्मी को ढूंढना तथा इलाके में किसी भी संभावित खतरे को खत्म करना था। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बल सावधानीपूर्वक बढ़ रहे हैं क्योंकि माना जा रहा है कि दो और आतंकवादी वहां छिपे हुए हैं। पहले उन्हें मृत मान लिया गया था, लेकिन ड्रोन द्वारा उनके शव नहीं देखे जा सके। अधिकारियों ने बताया कि राजबाग के घाटी जूथाना में जखोले गांव के निकट आतंकवादियों के खिलाफ अभियान गुरुवार सुबह करीब आठ बजे शुरू हुआ। जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के नेतृत्व में सेना और सीआरपीएफ की मदद से की गई जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकवादी मारे गए। एक उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) सहित पांच पुलिसकर्मी कथित तौर पर गोलीबारी के स्थान के पास फंस गए, जो घने पेड़ों से घिरे एक नाले के पास था। इससे तनाव और बढ़ गया। सडीपीओ (​​एक डीएसपी रैंक के अधिकारी) को बृहस्पतिवार देर शाम घायल अवस्था में घटनास्थल से निकाला गया, जबकि उनके तीन निजी सुरक्षा अधिकारी मृत पाए गए। आज सुबह एक पुलिसकर्मी का शव देखा गया। एसडीपीओ के अलावा तीन और पुलिसकर्मियों को कठुआ अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अभियान में सेना के दो जवान घायल हुए हैं। बचे हुए आतंकियों का सफाया करने के लिए सेना ने स्निफर डॉग्स और ड्रोन तैनात किए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यहां 9 से 10 आतंकवादी छिपे हो सकते हैं। recent visitors 55

यूपी में महंगी होगी बिजली, मल्टी ईयर टैरिफ डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन-2025 को अंततः जारी किया

लखनऊ प्रदेश में अब बिजली महंगी होने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पांच वर्षों तक बिजली की दरों को तय करने संबंधी मल्टी ईयर टैरिफ डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन-2025 को अंततः जारी कर दिया है। नए रेगुलेशन के तहत अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आयोग बिजली की दरों को तय करने की अब प्रक्रिया शुरू करेगा। माना जा रहा है कि पावर कारपोरेशन की बिजली कंपनियों द्वारा चार माह पहले दाखिल किए गए 1.16 लाख करोड़ रुपये के एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) संबंधी प्रस्ताव को आयोग जल्द ही स्वीकार कर जनसुनवाई करेगा। नियमानुसार प्रस्ताव स्वीकारने के अधिकतम 120 दिनों में आयोग को नई बिजली की दरें घोषित करनी होती है। मौजूदा बिजली की दरों से एआरआर में 13 हजार करोड़ रुपये के दिखाए गए घाटे को देखते हुए साढ़े पांच वर्ष बाद 15 से 20 प्रतिशत तक बिजली की दरों में इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। सभी उपभोक्ताओं के यहां अभी स्मार्ट मीटर न लग पाने के कारण दिन-रात बिजली की दरें फिलहाल एक समान ही रहेंगी।   आयोग द्वारा जनसुनवाई के बाद तैयार किया गया मल्टी ईयर टैरिफ डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन-2025, अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली अप्रैल से अगले पांच वर्ष यानी 2029 तक लागू रहेगा। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जल्द ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।   बिजली कंपनियों के एआरआर को ध्यान में रखते हुए बिजली की दरों का निर्धारण नियामक आयोग रेगुलेशन के तहत ही करता है। आयोग द्वारा नए रेगुलेशन के मसौदे में भविष्य के निजीकरण का प्रविधान था लेकिन जनसुनवाई के दौरान विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा इस पर उठाई गई आपत्तियों का नतीजा रहा कि लागू किए गए नए रेगुलेशन में भविष्य के निजीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में 42 जिलों की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने संबंधी राह फिलहाल कठिन हो गई है। नए रेगुलेशन में कहा गया है कि पावर कारपोरेशन के प्रस्ताव पर ही आयोग रात-दिन के लिए बिजली की अलग-अलग दरें तय करेगा। अप्रैल से देश में रात-दिन का टैरिफ लागू उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने पहली अप्रैल से देश में रात-दिन का टैरिफ लागू करने को कह रखा है लेकिन पावर कारपोरेशन प्रबंधन पहले ही आयोग से कह चुका है कि वर्ष 2027-28 तक इसे प्रदेश में लागू करना मुश्किल है। कारण है कि सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने में अभी दो वर्ष लगने की उम्मीद है। बिना स्मार्ट मीटर के रात-दिन के लिए अलग-अलग दरों को व्यवस्था को नहीं लागू किया जा सकता। उद्योगों की तरह घरेलू सहित अन्य उपभोक्ताओं की बिजली के मामले में टीओडी (टाइम आफ डे) टैरिफ की व्यवस्था लागू होने पर 24 घंटे बिजली की दर एक समान न होकर अलग-अलग समय में कम-ज्यादा होती है। यह मौजूदा दर से 10 से 20 प्रतिशत तक महंगी या सस्ती हो सकती है। चूंकि आयोग ने नए रेगुलेशन में केंद्र सरकार व केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सभी नियम-कानून को शामिल किया है इसलिए आरडीएसएस (संशोधित वितरण क्षेत्र योजना) के तहत तय ज्यादा लाइन हानियों का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। बिजली चोरी के चलते लाइन हानियां के एवज में दरें बढ़ने पर कंपनियों को फायदा होगा। हालांकि, नए रेगुलेशन में कंपनियां के वास्तविक खर्चे को ही आयोग मंजूरी देगा। उतनी ही बिजली खरीदी जा सकेगी जितनी आयोग ने अनुमन्य की होगी। बिजली कंपनियों के मनमाने खर्चे पर अंकुश लगने से उनकी वित्तीय स्थिति में अब सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है। बिजली दरों में बढ़ोतरी से लेकर निजीकरण का करेंगे विरोध वर्मा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि नियामक आयोग ने नए रेगुलेशन से बिजली महंगी होने का रास्ता खोल दिया है लेकिन दरों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए उपभोक्ता परिषद संघर्ष करेगा। वर्मा ने कहा नए रेगुलेशन से बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकलने वाले 33,122 करोड़ रुपये के सरप्लस में कमी आएगी क्योंकि अब बिजली चोरी का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। परिषद अध्यक्ष के अनुसार बिजली कंपनियों के मौजूदा वार्षिक राजस्व आवश्यकता के आकलन से उपभोक्ताओं पर बिजली कंपनियों का तीन से चार हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकलने का अनुमान है। विदित हो कि पूर्व में आयोग ने बिजली चोरी से कारपोरेशन को होने वाले नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से करने पर रोक लगा दी थी। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि रात-दिन के लिए अलग बिजली दर को अभी दो-तीन वर्ष पावर कारपोरेशन ही लागू करने की स्थिति में नहीं है। जब कारपोरेशन इस संबंध में आयोग में प्रस्ताव दाखिल करेगा तब विरोध करेंगे क्योंकि इससे गरीब उपभोक्ताओं को ज्यादा नुकसान होगा।   recent visitors 56

जस्टिस वर्मा के इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर का नोटिफिकेशन जारी, नहीं काम आया विरोध

नई दिल्ली कैशकांड विवाद के बीच केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा का ट्रांसफर करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया है। जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर किए जाने का इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील विरोध कर रहे हैं। होली वाले दिन जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित घर में आग लग गई थी, जिसके बाद वहां से बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी। मामला सामने आने के बाद जांच की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में इन हाउस जांच करवा रहा है। साथ ही, कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर भी कर दिया था, जिसको लेकर आज सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी। जस्टिस वर्मा से इलाहाबाद हाई कोर्ट जाकर कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के राष्ट्रीय राजधानी में स्थित सरकारी आवास पर 14-15 मार्च की रात आगजनी की घटना के दौरान कथित रूप से बेहिसाब धन मिलने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस को निर्देश देने की गुहार वाली याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि इन-हाउस जांच पूरी हो जाने बाद सभी रास्ते खुले हैं। पीठ ने कहा कि चूंकि इन-हाउस जांच चल रही है, इसलिए इस स्तर पर इस रिट याचिका पर विचार करना उचित नहीं होगा। अगर जरूरत पड़ी तो देश के मुख्य न्यायाधीश प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 22 मार्च को इस मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की एक समिति गठित की थी, जो अपना काम कर रही है। पीठ ने याचिकाकर्ता मैथ्यूज जे नेदुम्परा से पूछा, ''हमने अर्जी देखी है कि हमें इस स्तर पर इस पर क्यों विचार करना चाहिए।'' याचिकाकर्ता ने कहा कि जांच देश का काम नहीं है और आम जनता पूछता रहता है कि 14 मार्च को कोई प्राथमिकता क्यों दर्ज नहीं की गई। आग के दौरान कथित तौर पर मिले रुपये क्यों जब्त नहीं किए गए और दिल्ली फायर चीफ ने क्यों कहा कि कोई रुपया बरामद नहीं हुआ। हालांकि, अदालत तमाम दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फिलहाल विचार करने से इनकार कर दिया। recent visitors 59