आज तड़के एक लड़की के उसके दोस्त गंभीर हालत में अस्पताल में एडमिट कराकर फरार हो गए

 इंदौर इंदौर शहर के महालक्ष्मी नगर में एक लड़की को आंख में गोली लगने की घटना सामने आई है। शुक्रवार तड़के दोस्त उसे गंभीर हालत में अस्पताल में एडमिट कराकर फरार हो गए। लड़की का नाम भावना है, जो मूलत: ग्वालियर की रहने वाली है। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। लड़की का इलाज चल रहा है। लसूडिया पुलिस ने उस कार को ट्रेस कर लिया है, जिससे भावना के दोस्त भागे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि पार्टी के दौरान गोली चली है, जो लड़की की आंख में लग गई। recent visitors 39

कर्नाटक में MLA-MLC की सैलरी बढ़ाने के लिए बिल पास

बेंगलुरु कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच अल्पसंख्यकों के लिए सरकारी ठेकों में 4 फीसदी का आरक्षण देने वाला बिल पास हो गया है. इसके साथ ही मंत्रियों और विधायकों के वेतन से जुड़ा बिल भी पारित हो गया है. सदन के अंदर भारी हंगामा होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही को 01:30 बजे तक स्थगित कर दिया गया है. कर्नाटक के सरकारी टेंडर में मुस्लिमों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हो गया है. टेंडर की अधिकतम सीमा 2 करोड़ की गई है.कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम कॉन्ट्रैक्टर्स को सरकारी टेंडर में 4 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. इसी के लिए आज विधानसभा में बिल पेश किया गया और पास हुआ. सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्ट, 1999 में संशोधन को मंजूरी दी. मंत्रियों और विधायकों की कितनी बढ़ेगी सैलरी? कर्नाटक विधानसभा में मंत्रियों और विधायकों की सैलरी से जुड़ा बिल भी पास हो चुका है. इसके बाद विधायकों की बल्ले-बल्ले हो सकती है. दरअसल, इस बिल में 100% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है. आजतक के पास कर्नाटक विधानमंडल वेतन, पेंशन और भत्तों (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा हाथ लगा है, जिसमें विधायकों और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों के वेतन और भत्तों में वृद्धि की योजना है. बिल पास होने जाने के बाद अब विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (MLA और MLC) का वेतन दोगुना हो जाएगा, जबकि मुख्यमंत्री का वेतन 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये प्रति माह कर दिया जाएगा. यह कदम विधायकों द्वारा वित्तीय कठिनाइयों और 2022 में निर्धारित वेतन बढ़ोतरी के स्थगित होने को लेकर किए गए दबाव के बाद उठाया गया है. मंत्रियों को होगा कितना फायदा मंत्री और मुख्यमंत्री के वेतन और भत्तों में भी वृद्धि प्रस्तावित है. मुख्यमंत्री का वेतन 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है, जबकि एक मंत्री का वेतन 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये और उनके भत्तों को 4.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाएगा. कर्नाटक के विधायकों, मंत्रियों और विधानसभा नेताओं के लिए वित्तीय लाभ में भारी वृद्धि होगी, जो उनके वेतन और भत्तों में महत्वपूर्ण संशोधन को दर्शाता है. मंत्रियों का वेतन भी दोगुना होगा विधायकों के वेतन के अलावा कर्नाटक मंत्री वेतन और भत्ता अधिनियम, 1956 में भी संशोधन का प्रस्ताव है। इसके जरिए मंत्री का वेतन 60 हजार रुपए से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपए किया जाएगा। वहीं, सप्लीमेंट्री अलाउंस 4.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है। अभी मंत्रियों को HRA के रूप में मिलने वाले 1.2 लाख रुपए बढ़कर 2 लाख रुपए हो सकते हैं। 6 साल में 10 पेशों में सिर्फ सांसदों-विधायकों का वेतन बढ़ा नीति आयोग के जुलाई, 2024 में पब्लिश वर्किंग पेपर से पता चलता है कि देश में साल 2018 से 2023 के बीच के 6 साल में सिर्फ सांसदों-विधायकों के वेतन और भत्ते ही बढ़े हैं। इसमें कहा गया है कि सांसदों-विधायकों को पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के 10 विभिन्न पेशों की पहली श्रेणी में रखा गया है, जिनमें लैजिस्लेटिव प्रोफेशनल्स के अलावा सीनियर ऑफिसर्स और मैनेजर्स शामिल हैं। इसमें EPFO और अन्य आंकड़ों के बेस पर 6 साल में वेतन और भत्ते में हुई वृद्धि को आंका गया है। जनप्रतिनिधियों के अलावा प्लांट-मशीन वर्कर्स की श्रेणी में वेतन-भत्ते भी बढ़े हैं।   recent visitors 47

चढ़ते पारे ने बढ़ायी मुसीबत, 2024 सबसे गर्म वर्ष, टूटा 175 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र (UN)के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) ने  अपनी एनुअल क्लाइमेट स्टेटस रिपोर्ट (Annual State of the Climate Report) जारी की। इसमें शुरुआती आंकड़ों की पुष्टि करते हुए संकेत दिया गया कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा। 2024 ने 2023 में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। WMO के अनुसार, 2024 में पहली बार वैश्विक तापमान 1850-1900 में निर्धारित आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने पिछले 175 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। 10 सालों में हीटवेव से हालात खराब जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में 2014 से 2023 का समय सबसे गर्म दशक के रूप में रिकॉर्ड किया गया था। इन 10 सालों में हीटवेव ने महासागरों को प्रभावित किया। साथ ही ग्लेशियरों (Glaciers) को रिकॉर्ड बर्फ का नुकसान हुआ। लाखों लोगों को छोड़ना पड़ा घर     2024 में चक्रवात, बाढ़, सूखा और अन्य आपदाओं ने 2008 के बाद से सबसे अधिक लोगों को विस्थापित किया,     ऐसे में 36 मिलियन लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा था।     सिचुआन भूकंप के बाद चीन में लगभग आधे 15 मिलियन विस्थापित हुए थे।     बाढ़ ने भारत में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया।     सऊदी अरब सहित दर्जनों अभूतपूर्व हीटवेव दर्ज किए गए जहां हज यात्रा के दौरान तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया । मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के फेनर स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी की प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने कहा कि दुनिया एक ऐसे प्वांइट पर पहुंच गई है जहां शुद्ध शून्य उत्सर्जन अब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें अपने अलार्म पर स्नूज बटन दबाना बंद करना होगा, जो कि अब नियमित रूप से होने वाले रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैश्विक तापमान हैं। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन हो रहा है, यह हमारी वजह से है, और बिना किसी गंभीर कार्रवाई के, यह और भी बदतर होता जाएगा? यह जितना लंबा चलेगा, चीजों को बेहतर बनाना उतना ही मुश्किल होगा।' recent visitors 38

रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी में

नई दिल्ली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस का डेब्यू हुए 6 साल बीत चुके हैं। 2019 से शुरू हुई रफ्तार की यह कहानी अब 136 सेवाओं तक पहुंच चुकी है। इनमें लगातार इजाफा भी जारी है। अब रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही यात्री लंबी दूरी का सफर आराम से तय कर सकेंगे। वंदे भारत ट्रेनें अब कई शताब्दी ट्रेन मार्गों पर उपलब्ध हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज ट्रेन है और 180 किमी/घंटा तक की गति तक पहुंचने में सक्षम है। अब तक, यह दिल्ली और वाराणसी जैसे छोटे और मध्यम दूरी के प्रमुख शहरों को जोड़ती है। कैसे हुई शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी। 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत इन ट्रेनों को पटरियों पर उतारा गया था। आम ट्रेनों के मुकाबले वंदे भारत एक्सप्रेस रफ्तार से लेकर सुरक्षा स्तर तक कई सुविधाओं से लैस है। क्या हैं विशेषताएं वंदे भारत एक्सप्रेस में एग्जीक्यूटिव क्लास में रिक्लाइनिंग एर्गोनोमिक सीटें, सभी कोच में सीसीटीवी और हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, ऑटोमैटिक दरवाजे, पेंट्री में हॉट केस, वॉटर कूलर, डीप फ्रीजर, हर कोच में आपातकालीन खिड़कियां, अलार्म पुश और टॉक बैक यूनिट्स हैं। ये ट्रेने 160 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस रेल मंत्रालय ने 3 जनवरी को बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने पिछले तीन दिनों में अपने कई परीक्षणों में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की है। जनवरी के अंत तक यह परीक्षण जारी रहेंगे। उसके बाद देश भर के रेल यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह विश्व-स्तरीय यात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका एक वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किया था। क्या होगा खास इन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को स्वचालित दरवाजे, बेहद आरामदायक बर्थ, ऑन बोर्ड वाई-फाई और विमान जैसी डिज़ाइन जैसी सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया है। देश में यात्री पहले से ही मध्यम और छोटी दूरी पर चलने वाली 136 वंदे भारत ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। recent visitors 48

बादल यादव ने कोर्ट से स्टे लेने के बाद भूमि पर कब्जा कर शुरू कर दी प्लॉटिंग, मेयर ने खड़े होकर हटवाया कब्जा

गाजियाबाद  गाजियाबाद में विजय नगर क्षेत्र के वार्ड-7 सुदामापुरी डूंडाहेड़ा में करीब 35 करोड़ रुपये की जमीन को निगम ने गुरुवार को कब्जामुक्त करवाया है। ऐसा बताया जा रहा है कि नगर निगम की भूमि पर बादल यादव नामक व्यक्ति ने कोर्ट में केस डालकर अपनी भूमि बताते हुए स्टे ले लिया था और अपना कब्जा कर प्लॉटिंग करनी शुरू कर दी थी। इसमें नगर निगम भी स्टे के खिलाफ कोर्ट गया। कोर्ट ने बुधवार को इस प्रकरण में निगम के पक्ष में फैसला सुनाया। इस क्रम में गुरुवार को मेयर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक की उपस्थित में यहां जमीन को कब्जा मुक्त करवाने के लिए बुलडोजर चलवाया गया। अवैध कब्जे का ध्वस्तिकरण की कार्यवाही करते हुए 5500 वर्गमीटर भूमि खाली कराई है। इसकी कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये है। निगम की टीम ने सुबह 9:30 बजे से 4 बजे तक कब्जा हटाने की कार्यवाही की गई है। इसमें 10 बुलडोजर 10 डंपर को लगाया गया। भूमि खाली कराने साथ के साथ तारों से फेंसिंग भी की गई है। बादल यादव के खिलाफ FIR की कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर इस दौरान अपर नगर आयुक्त अरुण यादव, सहायक नगर आयुक्त पल्लवी सिंह, सहायक नगर आयुक्त अंगद गुप्ता, मुख्य अभियंता एन के चौधरी, एसीपी कल्पना पांडेय, सिटी जोनल प्रभारी महेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता मिश्रा, कर्नल दीपक शरण, पार्षद पति थान सिंह समेत पुलिस के जवान उपस्थित रहे। खाली जगह पर बनेगा बालिका इंटर कॉलेज मेयर ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में नगर निगम की एक इंच भूमि भी नहीं कब्जाने दी जाएगी। बल्कि गाजियाबाद को भूमाफियाओं मुक्त कराने की कार्यवाही की जाएगी। आज सुदामापुरी में बुलडोजर गरजा है तो जल्द ही नंदग्राम में भी गरजेगा। इसके साथ ही सुदामापुरी की भूमि पर बालिकाओं के लिए 12वीं तक का विद्यालय भी बनाया जाएगा। इसके लिए कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। इसमें नगर आयुक्त ने भी सहमति से साथ अग्रिम कार्यवाही के निर्देश दिए। recent visitors 38

प्रतिभागियों ने बस्तर पंडुम में लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा, 22 एवं 23 मार्च को होगा दो दिवसीय जिला स्तरीय बस्तर पंडुम

रायपुर : बस्तर जिले के 5 विकासखण्डों में हुआ ब्लॉक स्तरीय बस्तर पंडुम का आयोजन बस्तर जिले के 5 विकासखण्डों में हुआ बस्तर पंडुम के माध्यम से पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और आदिवासी रीति-रिवाजों को मिला समुचित मंच प्रतिभागियों ने बस्तर पंडुम में लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा 22 एवं 23 मार्च को होगा दो दिवसीय जिला स्तरीय बस्तर पंडुम   रायपुर बस्तर जिले के जगदलपुर, बस्तर, तोकापाल, बास्तानार एवं दरभा विकासखण्ड में गुरुवार को ब्लॉक स्तरीय बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अवसर पर जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों ने कहा कि यह आयोजन बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। बस्तर पंडुम के माध्यम से पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और आदिवासी रीति-रिवाजों को मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे स्थानीय संस्कृति को नई पहचान मिल रही है। इस उत्सव में विभिन्न जनजातीय समूह अपनी कला और परंपराओं का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे न केवल सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जिले के इन सभी ब्लॉक में आयोजित उक्त कार्यक्रम में स्थानीय लोक कलाकारों, जनजातीय समुदायों और संस्कृति प्रेमियों का उत्साह देखते ही बना। बस्तर पंडुम न केवल संस्कृति को सहेजने का प्रयास है बल्कि सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। जिले के इन सभी विकासखंड में बस्तर पंडुम के तहत हजारों प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़ कर उत्साहपूर्वक भाग लिया। जिले में बस्तर पंडुम का जिला स्तरीय कार्यक्रम 22 एवं 23 मार्च को इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम जगदलपुर में आयोजित किया जाएगा, जिसमें ब्लॉक स्तर से चयनित प्रतिभागी शामिल होंगे।          उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2025 के अन्तर्गत अनेक विधाएं शामिल की गई जिसमें जनजातीय नृत्यों के तहत गेड़ी, गौर-माड़िया, ककसाड़, मांदरी,  हुलकीपाटा, परब सहित लोक गीत श्रृंखला के तहत जनजातीय गीत- चैतपरब, लेजा, जगारगीत, धनकुल,  हुलकी पाटा (रीति-रिवाज, तीज त्यौहार, विवाह पद्धति एवं नामकरण संस्कार आदि)  जनजातीय नाट्य श्रेणी में भतरा नाट्य जिन्हें लय एवं ताल, संगीत कला, वाद्य यंत्र, वेषभूषा, मौलिकता, लोकधुन, वाद्ययंत्र, पारंपरिकता, अभिनय, विषय-वस्तु, पटकथा, संवाद, कथानक के मानकों के आधार पर  मूल्यांकन किया गया। इसके अलावा जनजातीय वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन के तहत धनकुल, ढोल, चिटकुल, तोड़ी, अकुम, झाब, मांदर, मृदंग, बिरिया ढोल, सारंगी, गुदुम, मोहरी, सुलुङ, मुंडाबाजा, चिकारा  शामिल रहे। जिन्हें संयोजन, पारंगता, प्रकार, प्राचीनता के आधार पर अंक दिए गए। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण प्रदर्शन विधा में लुरकी, करधन, सुतिया, पैरी, बाहूंटा, बिछिया. ऐंठी, बन्धा, फुली, धमेल, नांगमोरी, खोचनी, मुंदरी, सुर्रा, सुता, पटा, पुतरी, नकबेसर जैसे आभूषण में एकरूपता, श्रृंगार, पौराणिकता को महत्व दिया गया। जनजातीय शिल्प एवं चित्रकला का प्रदर्शन विधा के अंतर्गत घड़वा, माटी कला, काष्ठ, ढोकरा, लौह प्रस्तर, गोदना, भित्तीचित्र, शीशल, कौड़ी शिल्प, बांस की कंघी, गीकी (चटाई), घास के दानों की माला प्रदर्शन प्रस्तुतियां हुई। साथ ही जनजातीय पेय पदार्थ एवं व्यंजन का प्रदर्शन- सल्फी, ताड़ी, छिंदरस, लांदा, पेज, कोसरा एवं मड़िया पेज, चापड़ा चटनी, सुक्सी पुड़गा,मछरी पुड़गा,मछरी झोर, आमट साग, तिखुर इत्यादि के बनाने की विधि, स्थानीय मसाले, स्वाद, प्रकार का प्रस्तुतिकरण बस्तर पंडुम 2025 के मुख्य आकर्षण रहे। इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार भी प्रदान किया गया। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। समाज प्रमुखों ने बस्तर पंडुम आयोजन को सराहा बस्तर  जिले में विकासखण्ड स्तर पर आयोजित बस्तर पंडुम में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले समाज प्रमुखों में बस्तर पंडुम के प्रति खासा उत्साह एवं अलग ही लगाव देखने को मिला। इस दौरान इन समाज प्रमुखों ने बस्तर पंडुम आयोजन को सराहनीय पहल निरूपित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट किया। इस मौके पर पूर्व विधायक एवं सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजाराम तोड़ेम ने बस्तर पंडुम को राज्य सरकार की जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक विविधता को देश-दुनिया में पहुंचाने की अनुपम प्रयास रेखांकित किया। वहीं सर्व आदिवासी समाज के बस्तर जिला अध्यक्ष दशरथ कश्यप ने बस्तर पंडुम को जनजातीय संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने की दिशा में उल्लेखनीय पहल निरूपित करते हुए इसे हर साल आयोजित करने का सुझाव दिया। सर्व आदिवासी समाज के महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष चमेली जिराम ने बस्तर पंडुम को जनजातीय समुदाय के भावी पीढ़ी के लिए समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सीखने-समझने का बेहतर मंच बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति,परम्परा, रीति-रिवाजों से दूर हो रही है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन में सक्रिय सहभागी बनकर भावी पीढ़ी अपना जुड़ाव महसूस करेगी। इस बस्तर पंडुम में जनजातीय पेय पदार्थों के विधा में अपना प्रदर्शन करने पहुंचे नगरनार की अन्नपूर्णा नाग एवं भेजापदर की बुधरी बघेल ने कहा बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की अलग छटा दिख रही है। जिसमें परम्परा, रीति-रिवाज, खान-पान सभी शामिल है। यह हमारी पहचान है और इसे संरक्षित करने के लिए सरकार का प्रयास प्रशंसनीय है। recent visitors 43

डीएमईओ, नीति आयोग और राज्य नीति आयोग के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन

रायपुर छत्तीसगढ़ में शासन की प्रभावशीलता और योजनाओं की दक्षता को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य नीति आयोग एवं नीति आयोग (भारत सरकार) के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (डीएमईओ) के सहयोग से "मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन" विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह दो दिवसीय कार्यशाला  20 और 21 मार्च को आयोजित की जा रही है, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आधुनिक निगरानी और मूल्यांकन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की पारदर्शी, प्रभावी और डेटा-आधारित निगरानी सुनिश्चित करना तथा नीति निर्माण को अधिक परिणामोन्मुखी बनाना है। कार्यशाला में प्रमुख रूप से नीति आयोग, भारत सरकार की महानिदेशक श्रीमती निधि छिब्बर, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम, योजना विभाग के सचिव अंकित आनंद, राज्य नीति आयोग की सदस्य सचिव डॉ. नीतू गोरडिया तथा डीएमईओ, नीति आयोग के निदेशक अबिनाश दास और देवी प्रसाद भुक्या उपस्थित रहे। इस कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए, जिनमें सुशासन एवं अभिसरण विभाग, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्कूल शिक्षा, खाद्य विभाग, नगरीय प्रशासन और योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने पर फोकस डीएमईओ की विशेषज्ञ टीम ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के आधुनिक तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान अधिकारियों को डेटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर प्रशिक्षित किया गया। डीएमईओ के प्रशिक्षकों ने डेटा गवर्नेंस, गुणवत्ता संकेतक (Quality Indicators), परिणाम-आधारित निगरानी (Output-Outcome Based Monitoring) और मूल्यांकन प्रणाली जैसे विषयों पर सत्र लिए। उन्होंने बताया कि कैसे वैज्ञानिक रूप से योजनाओं की निगरानी कर उनके वास्तविक प्रभाव को मापा जा सकता है, जिससे शासन प्रणाली अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बन सके। लॉजिकल फ्रेमवर्क और डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स पर चर्चा विशेषज्ञों द्वारा "आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क", "डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स" और "लॉजिकल फ्रेमवर्क" विषयों पर गहन परिचर्चा की गई।    राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से राज्य के अधिकारियों को आधुनिक निगरानी और मूल्यांकन तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है, जिससे वे अपनी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बना सकें। डीएमईओ, नीति आयोग की महानिदेशक श्रीमती निधि छिब्बर ने कहा कि  मॉनिटरिंग और इवैल्यूएशन (M&E) किसी भी प्रभावी शासन प्रणाली की आधारशिला है। भारत सरकार ने योजनाओं के प्रभावी मूल्यांकन और निगरानी के लिए डीएमईओ की स्थापना की है। राज्य में भी इसी तरह की संस्था बनाई जानी चाहिए। यह कार्यशाला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।" मुख्यमंत्री के सलाहकार  डॉ. धीरेंद्र तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नीति-निर्माण में डेटा-आधारित दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यशाला से राज्य के अधिकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को बेहतर तरीके से मापने और विश्लेषण करने में सक्षम होंगे।  योजना विभाग  के सचिव अंकित आनंद ने कहा कि इस प्रशिक्षण से सरकारी योजनाओं की दक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा, जिससे राज्य के विकास कार्यक्रमों को नई दिशा मिलेगी। राज्य नीति आयोग की सदस्य सचिव डॉ. नीतू गोरडिया ने कहा कि  निगरानी और मूल्यांकन सुशासन का प्रमुख आधार है। राज्य नीति आयोग पहले से ही सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिए विभिन्न संकेतकों की निगरानी कर रहा है। इस कार्यशाला से डेटा संग्रह और निगरानी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। राज्य नीति आयोग और डीएमईओ, नीति आयोग, भारत सरकार के संयुक्त सहयोग से आने वाले समय में इस तरह की और कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में डेटा-संचालित नीति निर्माण और प्रभावी निगरानी प्रणाली को मजबूत करना है।इस कार्यशाला से छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे प्रदेश में विकास और सुशासन को और अधिक गति मिलेगी। recent visitors 48