पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा में 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षा होगी निरस्त

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पांचवीं-आठवीं की बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से आयोजित हो रही है। इस बार हर जनशिक्षा केंद्र के तहत पांच केंद्र बनाए जाएंगे। परीक्षा केंद्र स्कूल से तीन किमी के अंदर ही होंगे और एक केंद्र पर 250 से अधिक विद्यार्थी शामिल नहीं होंगे। विशेष परिस्थितियों में राज्य शिक्षा केंद्र को सूचित करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अनुमति से परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। इस बार परीक्षा के लिए राज्य व जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष भी बनाया जाएगा। परीक्षा से संबंधित कोई भी शिकायत यहां दर्ज कराई जा सकती है। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें निर्देशित किया गया है कि इस बार डिटेंशन पॉलिसी भी लागू होगी। बता दें कि इस बार परीक्षा में सरकारी व निजी स्कूलों के करीब 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। डिटेंशन पॉलिसी लागू होगी कक्षा 5वीं व 8वीं की परीक्षा में निर्धारित अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने वाले विद्यार्थियों को पुन: परीक्षा का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए दो माह बाद पुन: परीक्षा आयोजित होगी। पुन: परीक्षा में भी अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को उसी कक्षा में रोके जाने (डिटेंशन पालिसी) का प्रविधान होगा। प्रत्येक विषय में लिखित परीक्षा 60 अंक का होगा, जिसमें 33 प्रतिशत यानी 20 अंक लाने होंगे। उससे कम अंक लाने वाले बच्चों को पुन: परीक्षा देनी होगी। इसके बाद भी कोई फेल हो जाता है तो उसे उसी कक्षा में रोक लिया जाएगा। नियमितता व कर्तव्यनिष्ठा पर भी मिलेगी ग्रेड स्कूलों में आयोजित गतिविधियों में विद्यार्थी की उपलब्धि पर स्कूल से ग्रेड दी जाएगी। यह कक्षा शिक्षक देंगे। इसमें नियमितता, समयबद्धता, सहयोग की भावना, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी का आकलन भी होगा। इसके अलावा साहित्यिक, सांस्कृतिक, विज्ञान, सृजनात्मक, खेलकूद पर भी ग्रेडिंग की जाएगी। स्कूलों को ग्रेड व अंक 15 फरवरी तक आनलाइन भरकर राज्य शिक्षा केंद्र को भेजने होंगे। वहीं पांचवीं के परीक्षार्थियों के लिए अतिरिक्त भाषा वैकल्पिक है। इस कारण अतिरिक्त भाषा के प्राप्तांकों को वार्षिक परिणाम में नहीं जोड़ा जाएगा। नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षा होगी निरस्त अगर कोई विद्यार्थी नकल करते या अनुचित साधनों का प्रयोग करते पकड़ा जाएगा तो उसकी परीक्षा निरस्त कर दी जाएगी। उसकी उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। एक घंटे के अंदर उत्तरपुस्तिकाओं को जमा करना होगा यह भी निर्देशित किया गया है कि परीक्षा के दिन जनशिक्षा केंद्र से 45 मिनट पहले केंद्रों पर केंद्राध्यक्ष की उपस्थिति में प्रश्नपत्रों का बंडल वितरित किया जाएगा। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी केंद्रों से एक घंटे के अंदर उत्तरपुस्तिकाओं को जनशिक्षा केंद्र पर जमा कराना होगा। recent visitors 67

ग्वालियर में 60 करोड़ की जमीन के लिए परिवार में खूनी संघर्ष, पंचायत में गोलीबारी, 1 की मौत, 3 घायल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में परिवार के सदस्यों के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला। सदस्यों के बीच हुए भीषण खून-खराबे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि अन्य तीन लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि लड़ाई की वजह 60 करोड़ रुपए की कीमत (Price of Rs 60 crores) वाली बेशकीमती जमीन (Precious land) है, जिसके बारे में पंचायत चलते समय विवाद बढ़ा और फिर खूनी रूख अख्तियार कर लिया। दरअसल ग्वालियर के एक यादव परिवार और उनके नजदीकी रिश्तेदारों की मौजूदगी में पंचायत की बैठक हो रही थी। तभी दो भाइयों हुकुम सिंह और रामू यादव के बीच में विवाद बढ़ गया। इस बीच हुकुम सिंह ने परिवार की कुछ महिलाओं सहित रामू और दिनेश पर षडयंत्र करके हमला करने का आरोप लगाया। और फिर विवाद बढ़ता ही चला गया और गोलियां चलने तक की नौबत आ गई। जब हम मृतक पुरुषोत्तम यादव के घर पहुंचे, तो वहां काफी संख्या में लोग जमा थे, क्योंकि कुछ ही देर में गोली लगने से मरने वाले युवक की बॉडी आने वाली थी। जिसके रिश्तेदार और गांव वाले अंतिम संस्कार की तैयारी में लगे थे। पूरे घर में गमगीन माहौल था। यहां महिलाएं रो-बिलख रही थीं। पुरुषोत्तम यादव के घर के पास दो घर छोड़कर आरोपियों का घर है, जहां सन्नाटा पसरा हुआ था और घर के बाहर ताला लगा था। वहां के पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी घर छोड़कर भाग चुके हैं। वहीं, आरोपियों के घर के बाहर और पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। 60 करोड़ की जमीन बनी खूनी संघर्ष की वजह करीब साढ़े 17 बीघा जमीन, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 60 करोड़ रुपए आंकी जा रही है, इसी के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ। पंचायत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। ऐसे समझिए पूरा मामला ग्वालियर के गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित गोकुलपुरा में हुकुम सिंह यादव और उनके भाई पंचम सिंह यादव के बीच पुश्तैनी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। यह जमीन 1989 में हुकुम सिंह के पिता मजबूत सिंह ने खरीदी थी। चूंकि हुकुम सिंह के छोटे भाई बालमुकुंद और बड़े भाई शिवचरण उस समय नाबालिग थे, इसलिए जमीन बड़े भाई पंचम सिंह यादव के नाम कर दी गई थी। बाद में, हुकुम सिंह, बालमुकुंद और शिवचरण ने 2000 में कानूनी कार्रवाई कर जमीन अपने नाम करा ली। हालांकि, 2018 में पंचायत बैठी, जिसमें जमीन का एक हिस्सा पंचम सिंह, शिवचरण और बालमुकुंद को दिया गया, जबकि दूसरा हिस्सा पंचम सिंह की पत्नी कमला यादव और उनके बेटे रामू व रामबरन यादव के नाम हुआ। लेकिन 2021 में कमला और उनके बेटों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरी जमीन अपने नाम करा ली। इसके बाद विवाद कोर्ट तक पहुंच गया, जहां 2021 में कोर्ट ने हुकुम सिंह के पक्ष में फैसला सुना दिया। बावजूद इसके, दूसरा पक्ष मानने को तैयार नहीं था। प्रशासनिक अधिकारी कई बार सुलह का प्रयास कर चुके थे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल पाया। पंचायत में हथियारों के साथ पहुंचने पर दूसरे पक्ष ने की फायरिंग बुधवार को कुछ रिश्तेदारों ने दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए पंचायत बुलाकर बातचीत कराने की पहल की थी। इस दौरान मजबूत सिंह के बड़े बेटे, पंचम सिंह की पत्नी कमला और उसका बेटा रामू यादव हथियारों के साथ वहां पहुंच गए। इसके बाद कमला के बेटे रामबरन, रामू, रणवीर और दिनेश ने पिस्टल, माउजर और बंदूक से अपने चाचा हुकुम सिंह, शिवचरण, बालमुकुंद और चचेरे भाई पुरुषोत्तम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। बचाव में हुकुम सिंह, शिवचरण, बालमुकुंद और पुरुषोत्तम ने भी जवाबी फायरिंग की। इस गोलीबारी में हुकुम सिंह के पक्ष से उनके भाई बालमुकुंद सिंह यादव, पूर्व सरपंच शिवचरण सिंह यादव, भतीजा पुरुषोत्तम सिंह यादव और धीरज यादव गोली लगने से घायल हो गए। वहीं, कमला का बेटा रामबरन सिंह उर्फ रामू और दिनेश यादव भी घायल हुए। चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची थी घटना की सूचना मिलते ही चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। सभी घायलों को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने गोली लगने से घायल 25 वर्षीय पुरुषोत्तम सिंह यादव को मृत घोषित कर दिया। पुरुषोत्तम पूर्व सरपंच शिवचरण सिंह यादव का बेटा था। पंचायत के जरिए मामले को सुलझाने का वादा किया था दिसंबर में पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए बाउंड ओवर की कार्रवाई की थी। इसमें दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत और पंचायत के जरिए मामले को सुलझाने का वादा किया था। इसके बावजूद, पुलिस और प्रशासन ने एक बार फिर पंचायत कराने की कोशिश की। पुलिस और रिश्तेदारों ने 2 और 3 जनवरी को पंचायत आयोजित की थी, लेकिन उस समय दोनों परिवारों के बीच सहमति नहीं बन पाई। खून के छींटे अब भी जमीन पर मौजूद जब भास्कर की टीम घटनास्थल की पड़ताल करने पहुंची, तो गिरवाई थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके की जांच कर रहे थे। घटना के बाद मृतक के खून के छींटे अब भी जमीन पर मौजूद थे, जिन्हें पुलिसकर्मी सबूत के तौर पर इकट्ठा कर रहे थे। जिस स्थान पर यह खूनी संघर्ष हुआ, वह जमीन पूर्व सरपंच शिवचरण यादव की बताई जा रही है। शिवचरण ने इस जमीन को क्रेशर संचालक को किराये पर दिया हुआ है। सुरक्षा के लिए गांव में 30 पुलिसकर्मी तैनात गिरवाई थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि घटना ठीक उसी स्थान पर हुई है, जहां दोनों पक्ष बातचीत कर रहे थे। पुलिस टीम घटनास्थल की दोबारा जांच करने पहुंची है। उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ में पता चला कि तीन से चार राउंड फायर किए गए थे। पुलिस को घटनास्थल से खाली कारतूस भी मिले हैं। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 25 से 30 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।   recent visitors 39

हार्दिक पटेल को सुप्रीम राहत, पटेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज किए गए राजद्रोह का केस वापस

अहमदाबाद गुजरात बीजेपी के विधायक हार्दिक पटेल (31) काे बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने हार्दिक पटेल और अन्य के खिलाफ दर्ज राजद्रोह में मामले को वापस ले लिया है। पाटीदार अनामत आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल और उनके साथियों के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था। आंदोलन के बाद हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2022 गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले हार्दिक पटेल बीजेपी में शामिल हो गए थे। हार्दिक पटेल वर्तमान में अहमदाबाद जिले की वीरमगाम से विधायक हैं। गुजरात में पाटीदार अनामत आंदोलन साल 2015 में हुआ था। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। 2017 में विधानसभा चुनावों में बीजेपी इसी आंदोलन की वजह से सिर्फ 99 सीटें जीत पाई थी। फैसले पर बोले हार्दिक पटेल राज्य सरकार के फैसले पर हार्दिक पटेल ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि गुजरात में हुए पाटीदार आंदोलन के दौरान मेरे समेत समाज के अनेक युवाओं पर लगे गंभीर राजद्रोह समेत के मुकदमें आज भूपेंद्र भाई पटेल की सरकार ने वापिस लिए है। मैं समाज की ओर से गुजरात की भाजपा सरकार का विशेष आभार व्यक्त करता हूं। पाटीदार आंदोलन से गुजरात में बिन आरक्षित वर्गों के लिए आयोग-निगम बना, 1000 करोड़ की युवा स्वावलंबन योजना लागू हुई और देश में आर्थिक आधार पर स्वर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिला हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित भाई शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल पुनः दिल की गहराई से आभार व्यक्त करता हूं। जीएमडीसी मैदान में की थी सभा 20 जुलाई 1993 को जन्में हार्दिक पटेल बी कॉम की डिग्री ली है। वह अक्टूबर 2012 में सरदार पटेल ग्रुप से जुड़ गए थे। इसके बा वह एसपीजी की वीरमगाम यूनिट के अध्यक्ष बन गए थे। 2015 में हार्दिक पटेल को मतभेदों के बाद एसपीजी प्रमुख ने निकाल दिया था। हार्दिक पटेल ने गुजरात पाटीदार अनामत आंदोलन को लीड किया था। इसके बाद वह पूरे देश में बड़ा चेहरा बन गए थे। उन्होंने जीएमडीसी मैदान में बड़ी सभा करके उस वक्त की सरकार को हिला दिया था। उनके आंदोलन को पास (PAAS) यानी पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने संचालित किया था। गुजराती में अनामत का मतलब आरक्षण से है। recent visitors 55

ईरान में महिला ने नग्न होकर पुलिस के सामने हंगामा किया, हिजाब बैन के विरोध में

तेहरान इस्लामिक देश ईरान ने वैसे तो पिछले साल दिसंबर में ही सख्त हिजाब कानून को लागू करने पर रोक लगी दी है लेकिन अभी भी वहां हिजाब बैन के खिलाफ महिलाएं हल्ला बोल रही हैं। इसी तरह के एक वाकए में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में एक महिला ने सार्वजनिक तौर पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए पहले अपने सभी कपड़े उतार दिए फिर नग्न होकर पुलिस वाहन के बोनट पर खड़ी होकर हंगामा करने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में महिला सशस्त्र बलों के अधिकारियों पर चिल्लाती हुई दिखाई दे रही है। ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने महिला की इस करतूत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि हंगामा करने वाली महिला पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर विंडशील्ड की ओर बढ़ते हुए और अपने दोनों पैरों को फैलाकर बैठ रही है। महिला की हालत देखकर वहां मौजूद एक सशस्त्र पुरुष अधिकारी मामले में दखल देने में हिचकिचाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो के अंत में महिला ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए और विरोध में चिल्लाने लगीं। महिला इस्लामी गणराज्य में महिलाओं के लिए सख्त प्रावधानों का विरोध कर रही थी। वह शरीर को पूरी तरह से ढकने से इनकार भी करती दिखी। हालांकि, हंगामा बढ़ने पर उस महिला के पति ने कहा कि फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत ठीक नहीं है। बता दें कि दिसंबर में, ईरानी सांसद ने विवादास्पद 'पवित्रता और हिजाब' कानून पारित किया था, जिसमें उन महिलाओं और लड़कियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया था जो अपने बाल, हाथ या पैर का प्रदर्शन करती हैं। हालांकि, महिलाओं के व्यापक विरोध के बाद ईरानी सरकार झुक गई थी और इस कानून को लागू करने पर रोक लगा दी थी। तब ईरानी सरकार ने कहा था कि इसमें सुधार की जरूरत है। एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई वैश्विक संगठनों ने ईरान के इस कानून की निंदा की थी और इसे दमनकारी और दमघोंटू व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कहा था। प्रस्तावित कानून में भारी जुर्माना और बार-बार अपराध करने वालों के लिए 15 साल तक की कैद का भी प्रावधान किया गया था। recent visitors 79

योगी सरकार ने की गजब व्यवस्था,1296 रुपये में हेलीकॉप्टर से देख सकेंगे महाकुंभ, यहां से बुक करें टिकट

 प्रयागराज महाकुंभ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गुड न्यूज है. अब वे हेलीकॉप्टर के माध्यम से प्रयागराज एयरपोर्ट से सीधे त्रिवेणी संगम पहुंच सकते हैं. दरअसल, महाकुंभ में उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड और फ्लाई ओला की तरफ से हेलीकाप्टर सेवा शुरू की गई है. हेलीकॉप्टर सेवा लेने के बाद अब आपको संगम तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल नहीं चलना पड़ेगा. ये हेलीकॉप्टर प्रयागराज एयरपोर्ट से उड़ान भरेगा और सीधे त्रिवेणी संगम के करीब बोट क्लब पर बने हेलीपैड पर आपको उतारेगा. इस दौरान आप आसमान से महाकुंभ की भव्यता और दिव्यता को देख भी पाएंगे. हेलीपैड से उतरने के बाद आपको बोट क्लब से बोट उपलब्ध करवाई जाएगी, जो आपको सीधे संगम तक ले जाएगी. संगम में डुबकी लगाने के बाद आपको वही बोट हेलीपैड पर वापस ले जाएगी और हेलीकॉप्टर से वापस प्रयागराज एयरपोर्ट छोड़ देगी. कितना होगा खर्च? जानकारी के मुताबिक, इस पूरे पैकेज की लगता 35 हजार रुपये प्रति व्यक्ति है. इसके माध्यम से श्रद्धालु बिना चले संगम स्नान कर सकते हैं. खासकर, वृद्ध, दिव्यांगों के लिए संगम पहुंचने का ये अच्छा और सुलभ तरीका है. फिलहाल, अच्छी संख्या में लोग हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं और संगम तक पहुंचकर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. इस बाबत Fly Ola ग्रुप के सीईओ आर.एस सहगल ने बताया- राइड्स लगातार जारी हैं. बिना होटल बुकिंग करे आप 4-5 घंटे में स्नान कर वापस अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच सकते हैं. 35 हजार रुपये में पूरी जिम्मेदार हमारी है. आपको बता दें कि महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू हुआ था. प्रयागराज कुंभ मेले में छह शाही स्नान होंगे. महाकुंभ मेला का पहला शाही स्नान 13 जनवरी हुआ. दूसरा शाही स्नान 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति पर हुआ, तीसरा स्नान 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या पर हुआ, चौथा शाही स्नान 2 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी पर हुआ, अब पांचवां शाही स्नान 12 फरवरी 2025 को माघ पूर्णिमा पर होगा और आखिरी शाही स्नान 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि पर होगा.   recent visitors 83

ट्रंप को PM नेतन्याहू ने क्यों गिफ्ट किया गोल्डन पेजर? जानें क्या है बड़ा कारण

न्यूयॉर्क  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने ट्रंप को एक बेहद खास गिफ्ट दिया. व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें ‘गोल्डन पेजर’ गिफ्ट किया है. इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से भी इस बात की पुष्टि की गई कि नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को गोल्डन पेजर गिफ्ट के रूप में दिया है. दरअसल, यह तोहफा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के ऑपरेशन का प्रतीक है, जिसमें पेजर ब्लास्ट के जरिए हिजबुल्लाह के कई आतंकवादियों को मार गिराया गया था. लेबनान में कैसे हुए थे पेजर ब्लास्ट? लेबनान और सीरिया के सीमावर्ती इलाकों में पिछले साल सितंबर में कई पेजरों में ब्लास्ट हुए थे. लेबनान की राजधानी बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में खासकर पूर्वी बेका घाटी में पेजर में एक के बाद एक सीरियल ब्लास्ट हुए थे. इसके बाद लेबनान में वॉकी-टॉकी के अलावा सोलर पैनल और हैंड हेल्ड रेडियो में भी ब्लास्ट हुए थे. इतना ही नहीं लेबनान के बेरूत समेत कई प्रमुख शहरों में घरों के सोलर सिस्टम और सोलर पैनलों में भी कई धमाके हुए थे. हिजबुल्लाह की ओर से संवाद करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पेजरों में हुए हमलों के कारण करीब  3000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और लगभग 40 आतंकवादियों की मौत हुई थी. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बात की पुष्टि की थी कि उन्होंने ही सितंबर में लेबनान स्थित आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह के खुफिया ठिकानों पर पेजर हमले को मंजूरी दी थी. पेजर का ही इस्तेमाल क्यों करते थे हिजबुल्लाह के लड़ाके दरअसल, हमास के ऊपर इजरायल के हमले के बाद हिजबुल्लाह के टॉप कमांडरों ने अपने लड़ाकों को एक-दूसरे से बात करने के लिए मोबाइल या इंटरनेट की जगह पेजर का इस्तेमाल करने का आदेश दिए थे.  पेजर की लोकेशन ट्रैक नहीं हो सकती है. कैसे काम करता है पेजर? पेजर रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है। जब किसी को मैसेज भेजना होता है तो पेजर नेटवर्क उस मैसेज को सेंड करता है, जिसे पेजर डिवाइस रिसीव करता है। जब कोई संदेश आता है तो यह बीप या बाइब्रेट करता है। इसीलिए इसे बीपर और ब्लीपर भी कहा जाता है। इसमें किसी भी तरह के इंटरनेट और कॉलिंग की भी जरूरत नहीं पड़ती है। यह पहाड़ी इलाकों या दूर दराज के क्षेत्रों में ज्यादा फायदेमंद होते हैं। तीन तरीके के होते हैं पेजर मोबाइल फोन के नेटवर्क वीक होने वाली जगहों पर भी पेजर काफी भरोसेमंद डिवाइस था। पेजर भी कोई एक तरह का नहीं होता है बल्कि यह भी तीन तरह का होता है। इसमें पहले आता है वन वे पेजर। वनवे पेजर में केवल मैसेज को रिसीव किया जा सकता है। दूसरे नंबर पर टू वे पेजर आता है। इसमें मैसेज रिसीव करने के साथ-साथ सेंड भी कर सकते हैं। फिर आखिरी वॉयस पेजर का नाम शामिल है। इसमें वॉयस मैसेज को रिकॉर्ड किए जाते हैं। recent visitors 68

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय में, जब संपूर्ण विश्व आपसी भौतिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय में, जब संपूर्ण विश्व आपसी भौतिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है, ऐसे में भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। मानवता के उत्थान और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए बुद्ध के दिखाए रास्ते का अनुसरण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी बुद्ध के संदेशों का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है, जिसके कारण यहाँ सभी धर्मों के लोग आपसी सौहार्द, भाईचारे और समरसता के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय आज डोंगरगढ़ के प्रसिद्ध प्रज्ञागिरी तीर्थ स्थल में आयोजित 32वें अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस आयोजन में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षु, विद्वान एवं अनुयायी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ धार्मिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रदेश के प्राचीन बौद्ध स्थलों में सिरपुर का विशेष महत्व है, जहाँ बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक विरासत आज भी संरक्षित है। इसी प्रकार, उत्तरी छत्तीसगढ़ के मैनपाट क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, और यह क्षेत्र अब एक प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें पर्यटन भी एक महत्वपूर्ण घटक है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता इसे पर्यटन के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती है। प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सतत प्रयासरत है। इस दिशा में, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना के तहत भी इस क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिससे यहाँ पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री साय ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में देश-विदेश से पधारे बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों एवं अनुयायियों का हृदय से स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राजनांदगांव लोकसभा सांसद संतोष पाण्डेय एवं प्रज्ञागिरी ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष विनोद खाण्डेकर ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रज्ञागिरी ट्रस्ट समिति के सचिव शैलेन्द्र डोंगरे, कोषाध्यक्ष सुरेश कुमार सहारे एवं बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म के अनुयायी उपस्थित रहे। recent visitors 53