CISF के जवानों के आत्महत्या के मामलों में भारी गिरावट, देखिए आंकड़े, योग-खेलकूद से कम हुआ तनाव…

नई दिल्ली सीआईएसएफ में कार्यरत जवानों द्वारा विभिन्न मामलों को लेकर किए जाने वाले आत्महत्या के मामलों में 40 फीसदी से भी अधिक की कमी आई है। 2024 में बल में पांच सालों में सबसे कम 15 जवानों ने सुसाइड किया। सीआईएसएफ का दावा है कि यह कमी उनके द्वारा जवानों को खुश रखने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए किए जा कई तरह के प्रयासों से आ पाई है। जिसका परिणाम यह सामने आ रहा है कि पिछले साल सीआईएसएफ में पांच सालों में सबसे कम सुसाइड के मामले सामने आए। जो की एनसीआरबी के 2022 में जारी नेशनल सुसाइड रेट 12.4 प्रति लाख से कम होकर 9.87 प्रति लाख रह गई है। क्या कहते हैं आंकड़े? सीआईएसएफ से मिले आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पांच सालों में बल में सबसे अधिक 2022 में 26 सुसाइड सामने आए थे। जो की बल के हिसाब से 18.12 प्रति लाख रहा था। जो अब घटकर 9.87 प्रति लाख रह गया है। बल में जवानों द्वारा की गई आत्महत्या के मामलों की एम्स से स्टडी कराई गई थी। उसमें जवानों द्वारा आत्महत्या करने के मुख्य कारणों में लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हुए अकेलापन, न्यूक्लियर फैमिली की वजह से परिवार का सपोर्ट ना मिलना, दुखी करने वाली खबरों का स्मार्ट फोन पर जल्दी से ट्रांसमिशन होना, आर्थिक स्थिति खराब होना, अपनी भावनाओं को व्यक्त ना कर पाना, एचआईवी, कैंसर और स्किन जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने जैसे बड़े कारण रहे। कई बार बल में तैनाती और कार्य से संबंधित दबाव की वजह से भी ऐसे मामले सामने आए।   'पांच सालों में 730 जवानों ने आत्महत्या की' सीआईएसएफ के डीआईजी दीपक वर्मा ने बताया कि वैसे, एनएसजी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में पिछले पांच सालों में 730 जवानों ने आत्महत्या की। इनमें सीआईएसएफ ने अपने बल के जवानों द्वारा किसी भी सूरत में आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसमें सभी यूनिट के कमांडिंग अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वह अपने जवानों को जानें और अपने जवानों की सुनें योजना के तहत अपने जवानों से सीधे जुड़कर उनकी समस्याओं को सुने और उनका समाधान करें।   कैसे कम हुए सुसाइड केस? तनाव कम करने के लिए योग में ट्रेंड किए गए 650 ट्रेनरों द्वारा हर यूनिट में योग क्लास शुरू करना। खेलकूद की प्रतियोगिताएं कराना, अगर किसी जवान को छुट्टी और काम के दबाव से संबंधित कुछ समस्या है तो उसका समाधान करने समेत उनकी पोस्टिंग से जुड़ी तमाम समस्याओं का हर संभव निपटारा करना। छुट्टियों और कार्य के दबाव प्रोजेक्ट मन के तहत जवानों से 24 घंटे सातों दिन टेली परामर्श देना। जिसमें सितंबर 2024 तक 4200 जवानों ने इसका लाभ उठाया। पोस्टिंग को लेकर जवानों को उनकी पसंद की पोस्टिंग देने वाली योजना शुरू करना। सीआईएसएफ में आत्महत्या के मामले   साल आत्महत्या 2020 18 2021 21 2022 26 2023 25 2024 15   recent visitors 105

SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क को जोरदार झटका, हाईकोर्ट ने ठुकराई एफआईआर रद्द करने की मांग

संभल  यूपी के संभल हिंसा मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को हाई कोर्ट से झटका लगा है। शुक्रवार को अदालत ने बर्क की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सांसद बर्क को पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा। हाई कोर्ट ने फिलहाल बर्क की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। संभल पुलिस ने हिंसा मामले में सांसद बर्क को भी आरोपी बनाया है। संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इसके चलते पांच लोगों की मौत हुई और 20 पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे। इस मामले में संभल पुलिस ने बर्क को मुख्य आरोपी बनाया है। हालांकि, उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। सांसद का तर्क है कि उनकी गिरफ्तारी से उन्हें अपूरणीय क्षति होगी और वह घटना के दौरान संभल में मौजूद नहीं थे। बर्क के अनुसार, संभल में हिंसा के दौरान वह उस समय बेंगलुरु में थे और एफआईआर के बारे में जानने के बाद उन्होंने मामले को बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली में ही रहने का फैसला किया। सांसद का कहना है कि उन्होंने समुदाय के सदस्यों से संपर्क किया और उनसे शांति बनाए रखने का आग्रह किया। बर्क पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप संभल पुलिस ने बर्क पर हिंसा से कुछ दिन पहले मस्जिद में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि उनके बयान के बाद ही अशांति भड़की थे। इसके अलावा एफआईआर में स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल का भी नाम है, जो इस घटना में कथित तौर पर शामिल है। बर्क ने अपनी याचिका में आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरोप उन्हें और उनकी पार्टी को निशाना बनाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा हैं। शाही जामा मस्जिद को मंदिर के ऊपर बनाए जाने के दावों के बाद बढ़े तनाव के बीच हिंसा भड़की। पत्थरबाजी और आगजनी के साथ स्थिति और बिगड़ गई, जिसमें कई पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। recent visitors 78

मध्य प्रदेश में यूनियन कार्बाइड के जहर का कहर, पीथमपुर में लोग कर रहे आत्मदाह

धार ! पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने के विरोध में शुक्रवार को व्यापक बंद का ऐलान किया गया था. बंद के दौरान विरोध कर रहे दो प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह की कोशिश की, जिसमें दोनों के सिर पर आग लग गई. इस दौरान आग से कई लोग झुलस गए और भगदड़ मच गई. इस घटना में दो प्रदर्शनकारी राजकुमार और राज पटेल की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस घटना से जुड़ा एक खौफनाक वीडियो भी सामने आया है. दरअसल विगत कई दिनों से पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है. गुरुवार को शहर के महाराणा प्रताप चौराहे पर रैली और धरने का आयोजन था. तो वहीं आज नगरवासियों ने बंद का आह्वान किया था. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर महाराणा प्रताप चौराहे पर पहुंचे जहां यूनियन कार्बाइड के विरोध में जमकर नारेबाजी हुई. इस दौरान जब मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने लोगों को रोकने की कोशिश तो इसी बीच प्रदर्शन स्थल पर बोतल में पेट्रोल लेकर पहुंचे राजकुमार और राज पटेल ने खुद के ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डाल लिया. इस दौरान अचानक आग भड़क गई. कुछ ही सेकंड में दो प्रदर्शनकारियों के सिर और ऊपरी हिस्सों में आग लग गई. ये देखते ही भगदड़ मच गई. हालांकि वहां मौजूद पुलिस ने दोनों की आग बुझाने की कोशिश की लेकिन तब तक दोनों करीब 60 फीसदी से ज्यादा जल चुके थे. आनन-फानन में दोनों को चोइथराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. इस घटना के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल है और क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है. वहीं स्थिति और ना बिगड़े इसे लेकर इंदौर से अतिरिक्त पुलिस फोर्स भेजा गया है. प्रत्यक्षदर्शी वीर सिंह ने बताया, ” घटना में दो लोग जल गए हैं. राजकुमार रघुवंशी और राज पटेल दोनों को आग लेग देखा मैंने. दोनों के चेहरे जले हैं. राज पटेल की जलती शर्ट मैंने खींचकर उतारी इसमें मेरा हाथ भी जला है.” दरअसल, 3 दिसंबर 1984 को हुए भोपाल गैस कांड में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव होने से हजारों लोग काल के गाल में समा गए थे. इस गैस कांड के बाद से भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में ये जहरीला कचरा सालों से बंद पड़ा था, जिसे पीथमपुर प्लांट में जलाया जा रहा है. इसी के विरोध में पीथमपुर में बंद का आह्वान किया गया था, जिसमें हिंसा भड़क गई. recent visitors 261

गर्भवती नाबालिग रेप पीड़िता का होगा अबॉर्शन: छत्तीसगढ़ ​​​​​​हाईकोर्ट

बिलसपुर  बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न की शिकार एक नाबालिग को गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है. दरअसल, हाईकोर्ट ने जबरन यौन संबंध से गर्भवती हुई नाबालिग की गर्भपात की अनुमति मांगने वाले याचिका को स्वीकार किया है. कोर्ट ने कहा बलात्कार पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है. यह उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चोट है. क्योंकि उसे बलात्कारी के बच्चे को जन्म देने बाध्य नहीं किया जा सकता है. जबरन यौन संबंध में हुई गर्भवती सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला निवासी नाबालिग जबरन यौन संबंध बनाए जाने से गर्भवती हो गई. उसने अपने अभिभावक के माध्यम से गर्भ को समाप्त करने अनुमति दिए जाने के लिए हाईकोर्ट में 30 दिसंबर को याचिका पेश की. उसकी याचिका पर विशेष कोर्ट लगाकर सुनवाई की गई. जस्टिस विभु दत्त गुरू ने रायगढ़ कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच की गई. बलात्कार पीड़िता को मिलनी चाहिए आजादी जांच रिपोर्ट में पीड़िता के 24 सप्ताह 6 दिन का गर्भ होने एवं भ्रूण के स्वस्थ होने की रिपोर्ट दी गई. इसके साथ गर्भ समाप्त करने अनुमति दी गई. रिपोर्ट आने के बाद जस्टिस गुरू ने पीड़िता को आज सरकारी अस्पताल में भर्ती होने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों द्बारा आईसीयू भर्ती कर गर्भपात करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इस मामले पर सनुवाई करते हुए आगे कहा कि बलात्कार की पीड़िता को इतनी आजादी और अधिकार मिलना ही चाहिए. यह तय करता है कि उसे गर्भावस्था जारी रखनी चाहिए या नहीं. इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ब होने के कारण गर्भपात के बाद भ्रूण को डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. जरूरी है कोर्ट की अनुमति आपको बता दें कि कानून के मुताबिक, 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने के लिए कोर्ट की अनुमति आवश्यक है. बिना कोर्ट से अनुमति लिए गर्भपात नहीं किया जा सकता.  recent visitors 65

भाजपा की बड़ी मुश्किल ,सिंधिया और तोमर में तूफानी घमासान

ग्वालियर ! भारतीय जनता पार्टी में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अब गले की फांस बनती जा रही है. क्योंकि अध्यक्ष पद के लिए अब नेता समर्थकों में खींचतान मची हुई है. वहीं मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में हुए फेरबदल के बाद अब सबकी निगाहें जिलाध्यक्ष के पद पर टिकी हुई हैं. ग्वालियर में मुकाबला सीधे तौर पर सिंधिया समर्थकों और नरेंद्र सिंह तोमर गुट के बीच देखा जा रहा है. बड़े स्तर पर नेता भले ही कुछ ना कह रहे हों पर अंदरूनी तौर पर खींचतान जारी है. मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है. सभी जिलों के ऑब्जर्वर जिला अध्यक्ष के दावेदारों के नाम कुछ बंद लिफाफों में लेकर भोपाल पहुंच चुके हैं. वहीं प्रदेश स्तरीय बैठक में मंथन किया जा रहा है. इस बीच मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला अध्यक्ष के तौर पर घमासान मचा हुआ है. वजह है, सिंधिया गुट और नरेंद्र सिंह तोमर गुट के समर्थकों का आमने-सामने होना. BJP के पास बंद लिफाफों में नाम पहुंच चुके हैं, जिन्हें अब भोपाल में फाइनल किया जाएगा. इन नामों को आगे बढ़ाने का काम पार्टी के बड़े नेता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया, मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नारायण सिंह कुशवाहा और सांसद भारत सिंह कुशवाहा की सहमति से किया जाएगा. बीजेपी में जिला अध्यक्ष के पद के लिए मचे घमासान में बीजेपी-कांग्रेस अपनी-अपनी राय दे रही है. पूर्व सांसद विवेक शेजवलकर ने कहा, “सभी कार्यक्रम केंद्रीय नेतृत्व द्वारा निर्धारित टाइम लाइन के हिसाब से चल रहे हैं. कहीं भी खींचतान जैसी कोई स्थिति नहीं है. मैं खुद चुनावी प्रक्रिया की बॉडी मैं हूं और मुझे अब तक ऐसी कहीं भी स्थिति दिखाई नहीं दी है.” इधर कांग्रेस भी बीजेपी के हालातों पर तंज कसने में पीछे नहीं है. प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग उपाध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा, ” भारतीय जनता पार्टी में पहले से ही श्रेय लेने के लिए प्रतिस्पर्धा और होड़ जैसी स्थिति हम सभी ने देखी है. वहीं दूसरी ओर जब से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय जनता पार्टी में एंट्री की है तभी से वर्तमान की भाजपा और पूर्व से स्थापित भाजपा में संघर्ष देखने को मिल रहा है. ऐसे में जो भारतीय जनता पार्टी खुद को सुचिता और अनुशासन का प्रतीक बताती है वहां ऐसी स्थिति आने के बातें दिल्ली तक पहुंच रही हैं. ये भारतीय जनता पार्टी में चिंगारी लग चुकी है और इसी तरह की स्थितियां बीजेपी और संगठन को समाप्त करने का काम करेगी.” जिला अध्यक्ष पद के लिए भारतीय जनता पार्टी में कितना भी घमासान मचा हो लेकिन अंतिम मुहर दिल्ली हाई कमान से ही लगेगी, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि जिला अध्यक्ष पद पर होने वाली नियुक्ति पर नाम किसका होगा. इसमें तोमर गुट को तवज्जो मिलेगी या सिंधिया समर्थक भारी पड़ेंगे, ये तो वक्त ही बताएगा. recent visitors 307

यूका का 337 मीट्रिक टन कचरा पीथमपुर पहुंचा…अब नष्ट करने पर खर्च होंगे 126 करोड़ रुपये

इंदौर भोपाल से लाया गया यूनियन कार्बाइड का 337 टन कचरा गुरुवार सुबह 4.15 बजे पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में 12 कंटेनर में पहुंचा। सभी कंटेनरों को सेक्टर दो स्थित रि-सस्टेनेब्लिटी कंपनी (पूर्व में रामकी कंपनी) के परिसर में रखा गया है। कंटेनर से वेस्ट को निकालकर परिसर में बने शेड में सुरक्षित रखा जाएगा, इस प्रक्रिया में तीन से चार दिन लगेंगे। इसके पश्चात 10 दिन तक कंपनी के इंसीनरेटर प्लांट में अलग-अलग मात्रा में वेस्ट को रखकर ट्रायल रन किया जाएगा और उसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 2015 में भी यहां नष्ट किया गया था कचरा गौरतलब है कि वर्ष 2015 में जब इस इंसीनरेटर प्लांट में यूका का कचरे को नष्ट किया गया था, तब 90 किलो कचरा प्रति घंटे संयत्र में डालकर नष्ट किया गया। कंपनी के विशेषज्ञ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की निगरानी में इंसीनरेटर प्लांट में अलग-अलग मात्रा में इस कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया को शुरू की जाएगी। प्राप्त आंकड़ों का आकलन करने के बाद तय होगा कि इंसीनरेटर प्लांट में कितनी मात्रा में कचरा प्रति घंटे डालकर नष्ट किया जाए। शासन द्वारा यूनियन कार्बाइड के कचरे को नष्ट करने पर 126 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उधर, भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यूनियन कार्बाइड गैस लीक को 40 साल बीत चुके, अब कचरे में कोई हानिकारक तत्व नहीं। पीथमपुर में विज्ञानियों की देखरेख में कचरे का निष्पादन किया जाएगा। इन मात्राओं में होगी तीन-तीन दिन जांच     135 किलोग्राम प्रतिघंटा की दर से     180 किलोग्राम प्रतिघंटा की दर से     270 किलोग्राम प्रतिघंटा की दर से आज पीथमपुर बंद का आह्वान पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने के विरोध में गुरुवार को विभिन्न संगठनों के बैनर तले स्थानीय लोगों ने रैली निकाली। बड़ी संख्या में लोग महाराणा प्रताप बस स्टैंड पर एकत्रित हुए। एक समूह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को पीथमपुर बंद का भी आह्वान किया गया है। वैज्ञानिक तरीके से कचरा जलाने पर खतरा नहीं : डॉ. शाह मध्य प्रदेश के गैस त्रासदी राहत, पुनर्वास विभाग तथा जन जातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह का कहना है कि 40 साल से यूनियन कार्बाइड का कचरा खत्म होने का इंतजार कर रहा था। एक साल में हमने बजट की व्यवस्था की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वैज्ञानिक तरीके से दिल्ली, भोपाल के एक्सपर्ट की देखरेख में जहरीला कचरा खत्म किया जा रहा है। वैज्ञानिक तरीके से कचरा जलने से कोई खतरा नहीं है। वर्ष 2014-15 में भी कचरा जलाकर देखा गया है। उसकी रिपोर्ट और केंद्र सरकार के मापदंड अनुरूप यह काम हो रहा है। मेरे मन में भी कई भ्रांतियां थीं, समाधान हो गया : कैलाश विजयवर्गीय मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे के निस्तारण को लेकर मेरे मन में भी कई भ्रांतियां थीं। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा अधिकारियों ने मेरी शंकाओं का समाधान कर दिया है। अगर जनता के मन में भी किसी तरह की शंका है तो उसका समाधान होना चाहिए। इस मामले में हाई कोर्ट में चल रही याचिका में जनता का पक्ष रखेंगे। कचरे का निपटारण पीथमपुर में हो ऐसा कोर्ट ने नहीं कहा : जीतू वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि हाई कोर्ट ने कहा है कि कचरे का निपटान किया जाए। यह नहीं कहा है कि पीथमपुर में ही हो। ऐसे में शहर व प्रदेश हित में इस संबंध में निर्णय लिया जाए। recent visitors 61

चिमनी से निकलने वाले धुएं में मौजूद गैसों की होगी सतत मॉनीटरिंग, परिसर के सामने डिस्प्ले होगी एयर क्वालिटी की जानकारी

इंदौर यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के कचरे को नष्ट करते समय पीथमपुर के कचरा भस्मक संयत्र के आसपास वायु गुणवत्ता यंत्रों से हवा की निगरानी की जाएगी। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा रि-सस्टेनेब्लिटी कंपनी के परिसर के चारों और चार यंत्र लगाए गए हैं। इसके माध्यम से वायु में धूल कण के साथ, गैस व अन्य तत्वों की जांच की जाएगी। इसके अलावा कंपनी द्वारा परिसर में पहले ही एक वायु गुणवत्ता मापने के लिए कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन परिसर में लगा है। इसके आंकड़े 24 घंटे कंपनी मुख्य गेट पर डिस्पले होते हैं। धुएं से निकलने वाली गैसों की मॉनीटरिंग इंसीनरेटर के चिमनी से निकलने वाले धुएं से निकलने वाले गैसों की भी सतत मॉनीटरिंग होगी। ऐसे में कंपनी के परिसर के सामने रोड से गुजरने वालों को भी वायु गुणवत्ता की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। भोपाल में भी लगाए थे तीन यदि परिणाम निर्धारित मानक सीमा में नहीं आते हैं तो प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। गौरतलब है कि भोपाल में जब यूनियन कार्बाइड का कचरे को एकत्र कर लोड करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी तो वहां के परिसर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन एयर क्वालिटी मीटर इंस्ट्रूमेंट लगाए थे। यूनियन कार्बाइड के कचरे को इंसीनरेटर में डालने से पहले उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों पर नियंत्रण के लिए अन्य रसायन मिलाए जाएंगे।     कचरे में मौजूद हेवी मेटल पर नियंत्रण के लिए मिलाएंगे : सोडियम सल्फाइड     वोलाटाइल आर्गेनिक कम्पाउंड (वीओसी) नियंत्रण के लिए: एक्टीवेटेड कार्बन     पीएच नियंत्रण के लिए : लाइम विशेष लैंडफिल में रखा जाएगी कचरे की राख पीथमपुर में रि-सस्टेनेब्लिटी कंपनी परिसर के जिस परिसर में यूका का कचरे को नष्ट किया जाएगा, जलाने के बाद बचने वाली राख को उसी परिसर में बनी लैंडफिल में डाला जाएगा। परिसर में यूका के कचरे के लिए एक विशेष लैंडफिल बनाई गई है। इस सेल में डबल लेयर हाई डेंसिटी पालीथीन में रखा जाएगा। इस तरह वर्षों तक यह अवशेष सुरक्षित तरीके से लैंडफील में रहेगा। चार सुरक्षित लैंडफिल सेल गौरतलब है कि कंपनी के संयत्र में औद्योगिक व अन्य तरह के कचरों को नष्ट करने के बाद बचने वाली राख (अवशेष) को जमीन में रखने के लिए चार सुरक्षित लैंडफिल सेल बनाकर रखी है। परिसर में पठारी हिस्से के ऊपर हिस्से पर यह लैंडफिल बनाई गई है। कंपनी के संयत्र में मप्र के अन्य शहरों के अलावा छत्तीसगढ़ राज्य से कचरा नष्ट करने के लिए आता है।       कुल मात्रा : 337 टन     अवशेष मिट्टी के साथ : 162 टन     रिएक्टर अवशेष : 29 टन     अर्ध प्रक्रिया अवशेष : 54 टन     नेपथलान : 92 टन   recent visitors 64