पार्क स्ट्रीट इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया

 कोलकाता कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक (Bangladeshi national) को फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था. यहां फर्जी पहचान पत्र बनवाकर रहने की कोशिश कर रहा था. फिलहाल पुलिस फर्जी दस्तावेजों को बनाने वालों की भी तलाश में जुटी है. एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार शख्स बांग्लादेश के नारैल जिले का रहने वाला है. गुरुवार को इस मामले में सूचना के आधार पर उसे कोलिन्स लेन से पकड़ा गया. जांच में पता चला कि वह साल 2023 से कोलकाता के खिद्दरपुर इलाके में एक किराए के मकान में रह रहा था. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने एक फर्जी आधार कार्ड बनवाया था, जिसमें उत्तर 24 परगना का पता दिया गया था. इसके अलावा आरोपी ने अपने नाम पर एक पैन कार्ड भी बनवाया था. पुलिस ने बताया कि हाल ही में पार्क स्ट्रीट के पास के मार्क्विस स्ट्रीट इलाके से एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक को भी फर्जी दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था. अब जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की तलाश कर रही हैं. वहीं गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ जारी है. इससे पहले असम पुलिस ने एक प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन के आठ मिलिटेंट्स को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से पकड़े गए थे. यह मामला भारत में विदेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ और उनकी गतिविधियों को लेकर चिंताओं को बढ़ा रहा है. पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी के बाद अवैध रूप से रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान करने और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिलेगी.   recent visitors 53

दोनों प्रदेशों के निर्माण विभाग के अधिकारियों ने नवीन तकनीकों पर विस्तार से की चर्चा

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में गुजरात अध्ययन यात्रा पर गए दल ने दूसरे दिन गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) एवं अहमदाबाद साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का दौरा किया। अध्ययन दल ने गुजरात सड़क एवं भवन विकास विभाग के अधिकारियों के साथ निर्माण क्षेत्र में उपयोग की जा रही नवीनतम तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। भास्कराचार्य संस्थान की सेवाओं की सराहना  मंत्री सिंह ने भास्कराचार्य संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही आईटी सेवाओं की सराहना करते हुए इन्हें अनुकरणीय बताया। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग में इन्हें लागू करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने भास्कराचार्य संस्थान की तकनीकी क्षमताओं और सेवाओं को बेहतरीन बताया। मंत्री सिंह ने मुख्य अभियंता एवं अधिकारियों को एक दिन और रुककर संस्थान में प्रशिक्षण लेने और इन तकनीकों को बेहतर तरीके से समझने के निर्देश दिए। भू-सूचना विज्ञान संस्थान संस्थान के प्रमुख टीपी सिंह ने प्रतिनिधि मंडल को संस्थान की विभिन्न गतिविधियों और जी.आई.एस तकनीक पर आधारित पीएम गतिशक्ति परियोजना की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस दौरान BISAG-N संस्थान ने मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग को विभिन्न प्रकार के आईटी समाधानों और जीआईएस बेस्ड एप्लीकेशन की सेवाएं कम लागत पर प्रदान किए जाने की जानकारी दी। साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का दौरा  मंत्री सिंह ने अहमदाबाद स्थित साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का भी दौरा किया। उन्होंने 1200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को शहरी विकास, नदी संरक्षण, पर्यावरण सुधार और सौंदर्य के साथ नवीनतम निर्माण तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है।  भ्रमण के दौरान रिवर फ्रंट निर्माण के लिये गठित कंपनी के कार्यालय में दिये गये प्रेजेंटेशन में रिवर फ्रंट की शुरुआत, निर्माण में आने वाली चुनौतियां, चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया, और भविष्य की योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में साबरमती रिवर फ्रंट की कुल लंबाई 22 किलोमीटर से भी अधिक होगी और यह दुनिया का सबसे लंबा रिवर फ्रंट बनेगा।  मंत्री सिंह ने साबरमती नदी पर बने अटल ब्रिज की भी सराहना की। उन्होंने इसे निर्माण तकनीक का एक अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि 80 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज आधुनिक तकनीकी, अद्भुत सौंदर्य और कलाकृति का शानदार नमूना है। गुजरात सड़क एवं भवन विकास के अधिकारियों के साथ की मीटिंग  दूसरे दिन सत्र की शुरुआत मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रेजेंटेशन से हुई। लोक निर्माण विभाग ने अपने संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण में प्रदेश में अपनाई गयी नई तकनीकों, नवाचारों और आईटी परियोजनाओं की जानकारी दी। गुजरात सड़क एवं भवन विकास के अधिकारियों ने भी मध्यप्रदेश में नियोजित एवं क्रियान्वित नवाचारों को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। सड़क पुल एवं भवन निर्माण के दौरान आने वाली सामान्य समस्याओं पर दोनों राज्यों के अधिकारियों ने चर्चा कर अपने समाधान एक-दूसरे से साझा किये।  मंत्री सिंह ने गुजरात के दो दिवसीय अध्ययन के अनुभवों और तकनीकों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा इस तरह की अध्ययन यात्राओं और परिचर्चाओं को भविष्य में भी निरंतर जारी रखा जाएगा, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों में नई तकनीकों और सर्वोत्तम प्रेक्टिसेज़ का समावेश हो सके।   recent visitors 68

मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि को लेकर राजनीति शुरू, कांग्रेस की मांग डॉ. मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जाए

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार का स्थान निगमबोध घाट में तय कर दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार हो वहीं पर स्मारक भी बनना चाहिए। कांग्रेस के कहना है कि जिस तरह से राजघाट में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्कार हुआ और उनका स्मारक बनाया गया, उसी तरह डॉ. मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जाए। केंद्र का कहना है कि स्मारक के लिए ट्रस्ट बनाया जाएगा और फिर भूमि भी आवंटित की जाएगी। वहीं कांग्रेस के आरोपों के बाद लोग पार्टी के नरसिम्हा राव की याद दिला रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को याद करना चाहिए कि किस तरह से उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं करने दिया गया और फिर 10 साल की सरकार के दौरान उनका स्मारक भी नहीं बनवाया गया। पीवी नरसिम्हा राव और कांग्रेस में क्यों आ गई थी खटास पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब '1991 हाउ पीवी नरसिम्हा राव मेड हिस्ट्री' में लिखा कि नरसिम्हा राव ही देश के पहले एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर थे। उन्हे भी नहीं पता था कि वह प्रधानमंत्री बनने वाले थे। राजीव गांधी की हत्या के बाद वह अपना बैग पैक कर हैदराबाद जाने को तैयार थे। लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद ही कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते खराब होने लगे। हालात ऐसे हो गए कि 2004 में उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार भी दिल्ली में नहीं किया जा सका। इसके अलावा कांग्रेस के अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनके शव को कांग्रेस मुख्यालय में भी नहीं रखा गया। उनका शव अंतिम यात्रा के वाहन पर कांग्रेस मुख्यालय के बाहर ही आधा घंटा इंतजार करता रहा लेकिन मुख्यालय के गेट नहीं खुले। 23 दिसंबर 2004 को नरसिम्हा राव का निधन हुआ था। उस समय यूपीए की सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे। नरसिम्हा राव ही वह शख्स थे जिन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को डायरेक्ट एंट्री से वित्त मंत्री बना दिया था। उस समय के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने नरसिम्हा राव के बेटे प्रभाकरा से कहा कि उनका अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाए। हालांकि परिवार का कहना है किअन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही होना चाहिए क्योंकि उनकी कर्मभूमि दिल्ली ही रही है। नरसिम्हा राव के परिवार से कई बड़े नेताओं ने अपील की कि उनका अंतिम संस्कार हैदारबाद में ही करवाया जाए। जब परिवार नहीं तैयार हुआ तो सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस के दिग्गज प्रणव मुखर्जी 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुंचे। डॉ. मनमोहन सिंह ने उनके बेटे से पूछा कि उन्होंने अंत्येष्टि को लेकर क्या सोचा है। जब उन्होंने दिल्ली में अंत्येष्टि करने की इच्छा जताई तो डॉ. सिंह ने सोनिया गांधी से कुछ बात की। कांग्रेसी नेताओं ने आश्वासन दिया कि उनका स्मारक दिल्ली में बनवाया जाएगा। इसके बाद परिवार उनके शव को हैदराबाद ले जाने को तैयार हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए अलग से स्मारक बनाने की मांग पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कड़ी आलोचना की है। शर्मिष्ठा ने कहा कि जब उनके पिता (प्रणब मुखर्जी) का 2020 में निधन हुआ था, तब कांग्रेस नेतृत्व ने न तो कोई शोक सभा आयोजित की और न ही कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक बुलाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस मामले में उन्हें गुमराह किया था। आपको बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 92 वर्ष की आयु में 27 दिसंबर को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हुआ। खरगे ने प्रधानमंत्री से उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए एक स्मारक बनाने की अपील की थी। शर्मिष्ठा ने बताया कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने उन्हें यह बताया था कि भारत के राष्ट्रपति के लिए शोक सभा का आयोजन नहीं किया जाता है। उन्होंने इसे पूरी तरह बेतुका और निराधार करार दिया और कहा कि वह अपने पिता के डायरी में पढ़ चुकी हैं कि जब पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन का निधन हुआ था, तो कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई थी और शोक संदेश खुद प्रणब मुखर्जी ने तैयार किया था। इसके अलावा शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सीआर केसवन के एक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें यह बताया गया था कि कांग्रेस ने पार्टी के अन्य नेताओं को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया क्योंकि वे गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे। इस मुद्दे पर डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे डॉ. संजय बारू की किताब 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' पुस्तक का भी उल्लेख किया गया, जिसमें यह जिक्र किया गया था कि कांग्रेस नेतृत्व ने कभी पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के लिए दिल्ली में कोई स्मारक नहीं बनाया, जिनका 2004 में निधन हो गया था। पुस्तक में यह भी दावा किया गया था कि कांग्रेस ने नरसिम्हा राव के दाह संस्कार को दिल्ली में करने के बजाय हैदराबाद में करने की कोशिश की थी। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर इंतजार करता रहा शव पूर्व पीएम नरसिम्हा राव का शव वाहन सजाया गया। तिरंगे से लिपटी उनके पार्थिव शरीर को तोप गाड़ी में रखा गया और वाहन कांग्रेस मुख्यालय के बाहर रुक गया। आधा घंटा शव वाहन वहीं खड़ा रहा लेकिन कांग्रेस मुख्यालय के गेट नहीं खुले। सोनिया गांधी समेत अन्य नेताओं ने बाहर आकर उन्हें श्रद्धांजलि दे दी। इसके बाद उनका वाहन एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया। 'द हाफ लायन' में विनय सीतापति लिखते हैं कि कांग्रेस और गाँधी परिवार को यह नहीं पसंद था कि आर्थिक सुधारों का क्रेडिट उन्हें दिया जाए। इसके अलावा उनका मानना था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरने के पीछे भी नरसिम्हा राव की मिलीभगत थी। ऐसे में कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं थे। 2004 के बाद 2014 तक यूपीए की सरकार रही लेकिन नरसिम्हा राव का स्मारक दिल्ली में नहीं बनाया गया। बाद में मोदी … Read more

800 साइनेजेस महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को घाट और आश्रमों तक पहुचायेंगे, अब श्रद्धालुओं को भटकना नहीं पड़ेगा

प्रयागराज इस बार महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को घाट और आश्रमों तक पहुंचने में भटकना नहीं पड़ेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप महाकुंभ नगर के रास्तों की सटीक जानकारी श्रद्धालुओं को मिल सके, इसके लिए सिर्फ मेला क्षेत्र में 800 साइनेजेस लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। अब तक कुल मिलाकर 400 से अधिक साइनेजेस की स्थापना कर दी गई है, जबकि 31 दिसंबर तक सभी 800 साइनेजेस लगाने का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। पीडब्ल्यूडी इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है। प्रतिदिन 100 साइनेजेस की स्थापना का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। महाकुंभ में देश के अलग-अलग प्रांतों से करोड़ों लोग आएंगे। इसके अतिरिक्त दुनिया के कई अन्य देशों से भी श्रद्धालु यहां संगम में आस्था की डुबकी लगाने और पुण्य कमाने के लिए आएंगे। ऐसे में भाषायी समस्या न आने पाए, इसका विशेष ध्यान रखा गया है। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी ने सीएम योगी के निर्देश पर विभिन्न भाषाओं में साइनेजेस स्थापित किए हैं। इसमें हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के साथ अन्य राज्यों की भाषाओं को भी प्रमुखता दी गई है। उल्लेखनीय है कि सीएम योगी ने बड़ी संख्या में लोगों के प्रयागराज आने की संभावनाओं को देखते हुए भाषायी समस्याओं को दूर करने के लिए निर्देश दिए थे। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी की ओर से यह कदम उठाया गया है। इन साइनेजेस की मदद से किसी भी राज्य से आने वाले श्रद्धालुओं को घाट और आश्रमों तक पहुंचने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। पीडब्ल्यूडी प्रयागराज के मुख्य अभियंता एके द्विवेदी ने बताया कि विभागीय टीम युद्ध स्तर पर साइनेजेस लगाने के कार्य में जुटी है। केवल मेला क्षेत्र में 800 साइनेजेस लगाने का लक्ष्य है, इसमें से 400 साइनेजेस स्थापित कर दिए गए हैं। प्रतिदिन 100 साइनेजेस स्थापित करने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जा रहा है। हर हाल में पूरे मेला क्षेत्र में सभी 800 साइनेजेस लगाने का कार्य 31 दिसंबर से पहले पूर्ण कर लिया जाएगा। इसी तरह पांटून ब्रिजों को भी तेजी से क्रियाशील किया जा रहा है। गुरुवार शाम तक 28 पांटून ब्रिज पूर्ण कर लिए गए हैं। कुछ ब्रिज में थोड़ा बहुत काम बाकी है, लेकिन जल्द ही सभी को क्रियाशील कर दिया जाएगा। शेष 2 ब्रिज भी 31 द‍िसंबर से पहले पूर्ण कर लिए जाएंगे। recent visitors 67

2024 में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा

नई दिल्ली दुनिया में 2024 में जलवायु परिवर्तन की वजह से भीषण गर्मी के दिनों में औसतन 41 दिन की वृद्धि हुई है।  एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस के अनुसार, रिकॉर्ड के हिसाब से 2024 सबसे गर्म वर्ष बनने वाला है और यह पहला वर्ष है जिसमें वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा। जलवायु वैज्ञानिकों के दो समूहों – वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) और क्लाइमेट सेंट्रल – की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में 2024 में भीषण गर्मी के दिनों में औसतन 41 दिन की वृद्धि हुई। छोटे द्वीपीय विकासशील देश सबसे अधिक प्रभावित हुए, जहां के लोगों को 130 से अधिक अतिरिक्त गर्म दिन का अनुभव करना पड़ा। वैज्ञानिकों ने 2024 में 219 मौसम संबंधी घटनाओं की पहचान की और उनमें से 29 का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जलवायु परिवर्तन के कारण कम से कम 3,700 लोगों की मौत हुई और मौसम संबंधी 26 घटनाओं की वजह से लाखों लोग विस्थापित हुए। अध्ययन के अनुसार सूडान, नाइजीरिया, नाइजर, कैमरून और चाड में बाढ़ सबसे घातक घटना थी, जिसमें कम से कम 2,000 लोग मारे गए। अध्ययन में पता चला कि यदि ग्लोबल वार्मिंग दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है तो इन क्षेत्रों में हर साल इसी तरह की भारी वर्षा संबंधी घटनाएं हो सकती हैं। ग्लोबल वार्मिंग 2040 या 2050 के दशक की शुरुआत में दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है। डब्ल्यूडब्ल्यूए के प्रमुख और इंपीरियल कॉलेज, लंदन में जलवायु विज्ञान के वरिष्ठ व्याख्याता फ्राइडेरिक ओटो ने कहा, ‘जीवाश्म ईंधन के गर्म होने के प्रभाव 2024 की तुलना में कभी भी इतने स्पष्ट या अधिक विनाशकारी नहीं रहे हैं। हम एक नए खतरनाक युग में रह रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि चीजों को बदतर होने से रोकने के लिए हमें क्या करने की जरूरत है – जीवाश्म ईंधन जलाना बंद करें। 2025 के लिए शीर्ष संकल्प जीवाश्म ईंधन से दूर जाना होगा, जो दुनिया को एक सुरक्षित व अधिक स्थिर स्थान बनाएगा।”     recent visitors 85

रिलायंस की 27 कंपनियों के मार्केट कैप में $1 अरब से ज्यादा गिरावट दर्ज

मुंबई  रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई दिग्गज कंपनियों के निवेशकों के लिए यह साल निराशाजनक रहा। भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज 10 साल में पहली बार निगेटिव रिटर्न ओर बढ़ रही है। इस साल बीएसई 500 में शामिल कम से कम 27 कंपनियों के मार्केट कैप में एक अरब डॉलर यानी करीब 8,500 करोड़ रुपये से अधिक गिरावट आई है। इनमें रिलायंस के अलावा एशियन पेंट्स, एचयूएल, टाइटन, बजाज फाइनेंस, अडानी ग्रीन एनर्जी और डीमार्ट शामिल हैं। वैल्यू के हिसाब से एशियन पेंट्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। परसेंटेज के हिसाब से सबसे ज्यादा नुकसान में जी एंटरटेनमेंट रही। इसके शेयरों में इस साल 54% गिरावट आई है। इस कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा मार्केट कैप गिरावट एशियन पेंट्स में रही। देश की सबसे बड़ी डेकोरेटिव पेंट्स कंपनी के शेयरों में इस दौरान अब तक लगभग 33% की गिरावट आई है। उसका मार्केट कैप में 1.07 लाख करोड़ रुपये गिरा है। कंपनी कमजोर मांग और मार्जिन दबाव से जूझ रही है। साथ ही उसे JSW तथा बिड़ला ग्रुप से भी तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। रिलायंस का नुकसान भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज 10 साल में पहली बार निगेटिव रिटर्न की ओर बढ़ रही है। रिलायंस के शेयरों में इस साल 5 फीसदी से अधिक गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 93,000 करोड़ रुपये से अधिक घटकर लगभग 16.5 लाख करोड़ रुपये रह गया है। हालांकि मार्केट कैप के हिसाब से यह अब भी भारत की सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। अडानी ग्रीन एनर्जी (89,648 करोड़ रुपये), एचयूएल (76,843 करोड़ रुपये), इंडसइंड बैंक (51,475 करोड़ रुपये) और अडानी एंटरप्राइजेज (50,951 करोड़ रुपये) मार्केट कैप के लिहाज से सबसे बड़े नुकसान में शामिल हैं। इसके अलावा नेस्ले इंडिया, कोटक महिंद्रा बैंक, बर्जर पेंट्स, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एलटीआईमाइंडट्री, जी एंटरटेनमेंट, बंधन बैंक, टाटा एलेक्सी, टाटा कंज्यूमर और टाटा टेक्नोलॉजीज के मार्केट कैप में एक अरब डॉलर से ज्यादा गिरावट आई है। recent visitors 149

उज्जैन आईटीआई में स्थापित होने वाली मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब को सीमेंस फाइनेंशियल सर्विसेज के सीएसआर से बनाया जायेगा

भोपाल मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को नई दिशा देने के लिए कौशल विकास संचालनालय और सीमेंस लिमिटेड के बीच इन्डो-जर्मन इनिशिएटिव फॉर टेक्निकल एजुकेशन (IGnITE) प्रोग्राम के दूसरे चरण के तहत द्विपक्षीय समझौता (MoU) संपन्न हुआ। इस अवसर पर कौशल विकास संचालनालय के संचालक गिरीश शर्मा (आईएएस) और सीमेंस लिमिटेड के धर्मवीर सिंह ने इस समझौते का आदान-प्रदान किया। IGnITE प्रोग्राम, जो जर्मन ड्यूल वीईटी (दोहरे व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण) मॉडल पर आधारित है। इस प्रोग्राम के तहत प्रदेश के चार प्रमुख इंडस्ट्री क्लस्टर—ग्वालियर/शिवपुरी, जबलपुर/कटनी, सागर/दमोह और रीवा/सतना के अंतर्गत 40 शासकीय आईटीआई का चयन किया गया है। इन संस्थानों में 10 प्रमुख ट्रेड्स, जैसे इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक, फिटर, टर्नर, और वेल्डर के छात्रों को उद्योग आधारित "इन-प्लांट ट्रेनिंग" दी जाएगी। सीमेंस लिमिटेड के विशेषज्ञ न केवल इन ट्रेड्स के छात्रों को प्रशिक्षण देंगे, बल्कि आईटीआई के प्राचार्यों, प्रशिक्षण अधिकारियों और ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट ऑफिसर्स की क्षमता निर्माण पर भी काम करेंगे। यह प्रोग्राम उद्योगों की जरूरतों और छात्रों के कौशल के बीच पुल का काम करेगा, जिससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके अलावा, सीमेंस फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और कौशल विकास संचालनालय के बीच एक अन्य महत्वपूर्ण समझौता भी संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत उज्जैन स्थित शासकीय संभागीय आईटीआई में एक अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब स्थापित की जाएगी। यह लैब डिज़ाइन, सीएनसी प्रोग्रामिंग, 3डी प्रिंटिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजीज के माध्यम से कौशल विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। यह पहल प्रदेश के युवाओं को वैश्विक मानकों पर आधारित तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास है। उज्जैन स्थित शासकीय संभागीय आईटीआई में स्थापित होने वाली मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब को सीमेंस फाइनेंशियल सर्विसेज के सीएसआर से बनाया जायेगा। यह लैब औद्योगिक डिजिटलीकरण और उन्नत तकनीकों का केंद्र बनेगी। इसमें छात्रों को डिज़ाइन और मॉडलिंग कौशल विकसित करने के लिए सीएडी तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही, सी एन सी प्रोग्रामिंग और सिमुलेशन का व्यावहारिक अनुभव फिजिकल और वर्चुअल सिमुलेटर्स के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। लैब में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, 3D प्रिंटिंग की अत्याधुनिक तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो छात्रों को उत्पाद निर्माण की नई प्रक्रियाओं से परिचित कराएगा। इसके अलावा, डिजिटल कौशल और इंडस्ट्री 4.0 के अनुरूप आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर, छात्रों को भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के लिए तैयार किया जाएगा। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने इसे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि यह लैब न केवल प्रशिक्षण का केंद्र बनेगी, बल्कि नवाचार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगी। उज्जैन में आईटी पार्क के भूमि-पूजन के बाद आईटीआई उज्जैन में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब की स्थापना, उज्जैन और प्रदेश को तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेगी।   recent visitors 69