कलेक्‍टर ने जिले में खाद वितरण एवं मूंग उपार्जन भुगतान की समीक्षा,अधिकारियों को दिये आवश्‍यक दिशा निर्देश।

कलेक्‍टर ने जिले में खाद वितरण एवं मूंग उपार्जन भुगतान की समीक्षा,अधिकारियों को दिये आवश्‍यक दिशा निर्देश।

Narmadapuram Collector reviewed fertilizer distribution and moong procurement payment in the district, gave necessary guidelines to the officers. नर्मदापुरम ! सोमवार को कलेक्टर सोनिया मीना ने जिले में खाद वितरण एवं किसानों को उपार्जित मूंग के शेष भुगतान की स्थिती के संबंध में समीक्षा की। जिले में किसानों को खाद के सुचारू वितरण के संबंध में सूचना का प्रवाह इस तरह सुनिश्चित करें कि आधार स्तर तक प्रत्येक किसान को वितरण की सटीक सूचना मिले, जिससे किसी भी प्रकार की भ्रमित करने जेसी स्थिति न बने और किसान बिना किसी परेशानी के खाद का उठाव समिति अथवा गोदाम से कर सके।कलेक्टर ने कहा कि आने वाले सप्ताह में जिले को खाद की रैक प्राप्‍त होने वाली है। जिससे जिले में डबल लॉक गोदाम एवं समितियां में खाद का भंडारण करवाया जाएगा। इसके लिए मार्कफेड, कृषि विभाग एवं समितियां किसानों को त्वरित गति से वितरण करवाए जाने की समस्त व्यवस्थाएं पूर्व नियोजित कर लें। कलेक्टर ने सहकारिता विभाग एवं डीआरसीएस को निर्देशित किया की समितियां के माध्यम से किसानों को किए जाने वाले खाद वितरण की जानकारी स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रूप से प्रसारित की जाए।कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए की अधिकारी कालाबाजारी पर गंभीरता से अंकुश लगाए। उन्होंने निर्देश दिए की कालाबाजारी करने वालों के ऊपर ठोस कार्यवाही की जाए। कलेक्टर ने कहा कि सभी एसडीएम अपने क्षेत्र अंतर्गत निजी खाद विक्रेताओं के पास खाद की शेष उपलब्धता की निरंतर मॉनिटरिंग करें तथा उपलब्धता के अनुसार वितरण भी सुनिश्चित करवाए।बैठक के दौरान कलेक्टर ने समस्त एसडीएम को निर्देश दिए की किसान संगठनों के साथ बैठक आयोजित कर एवं अपने-अपने क्षेत्र के किसानों को सूचित कर कि खाद के अग्रिम भंडारण के लिए किसी भी प्रकार की हड़बड़ाहट ना करें। एवं निरंतर खाद की आपूर्ति की जा रही है। आगामी दिवसों में भी जल्द ही खाद की रैक निरंतर लगने वाली है जिससे 50 प्रतिशत समितियां एवं 50 प्रतिशत गोदाम के माध्यम से किसानों को खाद का वितरण किया जाएगा। कलेक्टर ने यह निर्देश भी दिए कि किसानों को खाद वितरण के लिए बांटे जाने वाले टोकन में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था अथवा गड़बड़ी न हो यह सुनिश्चित किया जाए। टोकन प्राप्त करने में यदि बिचौलिए सक्रिय हो तो उन पर भी सख्ती से नियंत्रण किया जाए।मूंग उपार्जन भुगतना की समीक्षामूंग उपार्जन के किसानों को भुगतान की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने शेष भुगतान के लिए किया जा रही आवश्यक कार्यवाहियों में विलंब के लिए नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए की वेयरहाउस स्तर से स्वीकृति पत्रक एवं डब्ल्यूएचआर जारी किए जाने की शेष कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी विभाग द्वारा लापरवाही ना बरती जाए अन्यथा संबधित अधिकारी पर कठोर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए की मूंग भुगतान से संबंधित समस्त कार्यवाही इसी सप्ताह पूरी कर ली जाए।बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि मूंग भुगतान के अनुमानित 1790 करोड़ में से 1470 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है तथा 100 करोड़ रुपए का भुगतान बैंको को भेजा गया है। शेष भुगतान में से लगभग 200 करोड़ के ईपीओ बनकर तैयार हो चुके हैं एवं बाकी की भुगतान राशि भी स्वीकृति पत्रक तैयार होने के पश्चात किसानों के बैंक खातों में पहुंचाने की कार्यवाही कर दी जाएगी। बैठक के दौरान अपर कलेक्टर राजीव रंजन पांडे, संयुक्त कलेक्टर विजय राय, जिला विपणन अधिकारी देवेंद्र यादव, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।वही सभी एसडीएम एवं तहसीलदार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में ऑनलाइन जुड़े रहे। recent visitors 99

नर्मदा विकास प्राधिकरण के अधिकारी एचआर चौहान की फर्जी नियुक्ति

Fake appointment of Narmada Development Authority officer HR Chauhan भोपाल। नर्मदा विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी एचआर चौहान (सदस्य अभियांत्रिकी वित्त) की फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। चौहान पर आरोप है कि उन्होंने शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी की है। इस मामले की शिकायत लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, मुख्य सचिव, राज्यपाल एवं एसीएस डब्ल्यूआरडी तक पहुंच चुकी है। इस पर संज्ञान लेते हुए ईओडब्ल्यू ने प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए शासन को जांच करने के लिए निर्देशित किया है। न्यायालय भी इस मामले में सरकार को जांच करने कह चुका है, लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ रही है। भोपाल। समता समाधान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पवार ने यह मामला शासन तक पहुंचाया है। शिकायत में बताया गया कि एचआर चौहान की नियुक्ति फर्जी तरीके से हुई थी। यानि उनकी पदस्थापना न्यायालीन प्रकरणों की अनदेखी की गई है। इसमें ना तो गोपनीय प्रतिवेदन बुलाया गया और ना ही मेरिट प्रक्रिया अपनाई गई। चौहान की नियुक्ति मुख्य अभियंता नहर सनावद, सदस्य, अभियांत्रिकीय और सदस्य वित्त पर बोगस (फर्जी) तरीके से की गई है। ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दिए ठेकेचौहान द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़ी-बड़ी निविदाएं निकाली गई, जिनकी दर प्रचलन दर से अधिक थी। जिस कारण शासन को करोड़ों का नुकसान हुआ। साथ ही इन्होंने निविदा की आड़ में करोड़ों का भ्रष्टाचार भी किया है। एक ही ग्रुप के 5-7 ठेकेदारों को उपकृत किया गया। विशेष रूप से ब्लैक लिस्टेड कंपनी मेंटोना को निविदा दी गईं। बिना किसी निविदा के कार्यों का एरिया भी बढ़ाया गया। जिसमें करोड़ की हेरा-फेरी की गई है। नर्मदा घाटी विकास इंदौर में भी हुआ भ्रष्टाचारमुख्य अभियंता नर्मदा घाटी विकास इंदौर के प्रभारी श्याम सुंदर राउत द्वारा भी भारी भ्रष्टाचार किया गया है। कार्यपालन यंत्री के रूप में न्यायालय द्वारा जांच स्थापित करने के बावजूद भी न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखाया गया। यह जिम्मेदारी सदस्य, अभियांत्रिकी एचआर चौहान की है। इसलिए श्याम सुंदर राउत और एचआर चौहान न्यायालय के आदेश की अव्हेलना करने के आरोपी हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रही हैं। भ्रष्टाचार को भीतर से संरक्षण मिल रहा है। पवार की मांग है कि शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले दोषियों पर प्रकरण दर्ज किया जाए। recent visitors 85

मध्यप्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को अब निश्चित तारीख पर मिलेगा वेतन

मध्यप्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को अब निश्चित तारीख पर मिलेगा वेतन

Outsourced workers of Madhya Pradesh will now get salary on a fixed date भोपाल। मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को महीने की 7 और 10 तारीख तक वेतन मिल जाएगा। उक्त अवधि में भुगतान नहीं करने वाली आउटसोर्स एजेंसियों के खिलाफ श्रम विभाग कार्रवाई करेगा। सरकार ने पहली बार यह डेडलाइन तय की है, इसका फायदा सरकारी विभागों, निगम मंडलों, बिजली कंपनियों व उपक्रमों में काम करने वाले 3 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा।श्रम विभाग ने ये निर्देश इसलिए जारी करने पड़े, क्योंकि अब तक आउटसोर्स कर्मियों को कई एजेंसियां तय समय पर भुगतान नहीं करती थी, जिसकी वजह से ये परिवार का पालन-पोषण ठीक से नहीं कर पाते थे। कुछ एजेंसियां बिना कारण बताएं ही सेवा से हटा देती थीं। इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने बीते दिनों श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल से फीडबैक लेकर गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए थे। जिन एजेंसियों के पास 1000 आउटसोर्स कर्मी होंगे, उन्हें महीने की 7 तारीख तक वेतन भुगतान करना होगा।ऐसी आउटसोर्स एजेंसियां, जिनके पास 1000 से अधिक आउटसोर्स कर्मी है,उन्हें महीने की 10 तारीख तक भुगतान करना होगा।गड़बड़ी पर यहां शिकायतः यदि कोई एजेंसी गड़बड़ी करती है या श्रम विभाग की गाइडलाइन का पालन नहीं करती है तो आउटसोर्स कर्मी 0755-2555582 वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज करा सकते है। यह नंबर शासन द्वारा अधिकृत है। recent visitors 89

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

Modi’s strong attack on the opposition said – I am a Shiv Bhakt, I swallow poison: The public is my God, if not here, then where will the voice of the soul come out पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के दरांग में कहा- जब भारत सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया था, उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था- मोदी, नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, सारा जहर निगल लेता हूं, मुझे कितनी भी गालियां दें। लेकिन बेशर्मी के साथ जब किसी और का अपमान होता है, तो मुझसे रहा नहीं जाता है। पीएम बोले- मेरे लिए तो मेरी जनता ही भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज वहां नहीं निकलेगी तो कहां निकलेगी, यही मेरे मालिक हैं, पूजनीय हैं, 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के असम दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बीएससी नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन और शिलान्यास किया। जिसकी लागत 6300 करोड़ है। शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम ने खानापारा में पशु चिकित्सा मैदान में महान गायक भूपेन हजारिका की विशेष श्रद्धांजलि सभा में भी मौजूद रहे। recent visitors 127

जो कल गलत था, आज सही कैसे? जीएसटी विवाद पर मोदी सरकार जनता से क्या छिपाना चाहती है?

जो कल गलत था, आज सही कैसे? जीएसटी विवाद पर मोदी सरकार जनता से क्या छिपाना चाहती है?

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? Read more: प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; … Read more

शिवपुरी में दलित सरपंच परिवार पर फायरिंग, महिला को लगी गोली

शिवपुरी में दलित सरपंच परिवार पर फायरिंग, महिला को लगी गोली

Firing on Dalit Sarpanch family in Shivpuri, woman shot शिवपुरी। जिले के करेरा थाना क्षेत्र में आने वाले लालपुर गांव में सरपंच परिवार पर हमला हुआ है. आरोपियों ने एक महिला पर दिन दहाड़े देसी कट्टे से फायर कर गंभीर रूप से घायल कर दिया और मौके से फरार हो गए. घायल महिला को अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि हमले की यह घटना किसी पुरानी रंजिश के चलते अंजाम दी गई है. जिसकी अब पुलिस पड़ताल कर रही है. 3 महीने पहले भी इस इन्हीं लोगों ने इसी दलित सरपंच परिवार पर हमला बोलते हुए उनके घर के बाहर अंधाधुंध फायरिंग की थी. उस समय मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जहां से लौट के बाद एक बार फिर इन्होंने यह गंभीर घटना अंजाम दिया है. रामहेत परिहार अपने परिजन महाराज सिंह परिहार और रामसिंह परिहार के साथ घर के बाहर चबूतरे पर बैठे थे. इसी दौरान गांव का गुड्डू उर्फ नाहर सिंह गौतम अपने एक साथी के साथ वहां आया और गाली-गलौज करने लगा इस दौरान दोनों में बहस बाजी होने लगी. विवाद बढ़ने पर आरोपी ने कट्टे से फायर कर दिया. गोलियां चलने की आवाज का शोर सुनकर रामहेत की मां पुष्पा परिहार बाहर आईं और बीच बचाव करने की कोशिश करने लगी इसी दौरान आरोपी गुड्डू ने कट्टे से फायर कर दिया और गोली पुष्पा परिहार के पेट में जा लगी उन्हें तुरंत करैरा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। recent visitors 86

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

Teachers stuck on lucrative posts for years by taking deputation भोपाल। मध्यप्रदेश समग्र शिक्षक संघ ने राज्य में प्रतिनियुक्ति की अवधि को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे एवं प्रदेश संरक्षक मुरारी लाल सोनी ने इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन को पत्र प्रेषित किया है। संघ पदाधिकारियों ने पत्र में उल्लेख किया है कि शासन के नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि सामान्यत: 4 वर्ष तय है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि दोनों विभागों की सहमति से केवल 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान में नीति के विपरीत अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षक ऐसे हैं, जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं। जो स्पष्ट रूप से प्रतिनियुक्ति नियमों के विपरीत है। संघ ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति की लंबी अवधि से मूल विभाग के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिनियुक्ति का उद्देश्य केवल विशेष प्रशासनिक आवश्यकता की पूर्ति होती है, न कि व्यक्तिगत सुविधा से इसे स्थायी पदस्थापना का रूप देना है। प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार विभागों में जमेसंघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दुबे का कहना है कि विभिन्न संगठनों से जुड़े कई शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिजन मलाईदार विभागों में नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर 10 से 15 वर्षों से जमे हुए हैं। ऐसे सभी कर्मचारी, अधिकारियों और शिक्षकों को मूल विभाग में तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए। प्रतिनियुक्ति पर जमे लोकसेवकों की संपत्ति की जांच होसंघ के प्रदेश संरक्षक मुरारीलाल सोनी का का आरोप है कि अनेक लोकसेवक कई वर्षों से नियमविरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं। वे शासन को आर्थिक रूप से खोखला कर रहे हैं। ऐसे लोकसेवकों की प्रति नियुक्ति समाप्त कर उनके कार्यकाल और संपत्ति की जांच कराई जाए। recent visitors 94