ट्रंंप 2.0 के साथ समझौतें ‘मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड’ की भावना के अनुरूप होगा

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच बड़े समझौतों की तैयारी है। 20 जनवरी, 2025 को डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दूसरी बार शपथ लेने के बाद, मोदी सरकार सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े सौदे कर सकती है। यह 'मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड' की भावना के अनुरूप होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में रोजगार पैदा होंगे, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और अमेरिकी व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। कोविड महामारी और अमेरिका-चीन संबंधों में खटास के बाद, कई अमेरिकी कंपनियों ने भारत में अपने कारखाने स्थापित किए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यहां निर्माण क्षेत्र में और अधिक संभावनाएं हैं। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के जानकार एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया कि ट्रंप 2.0 के शुरुआती दौर में ही भारत को कुछ बड़े सौदों को अंतिम रूप देने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छी केमिस्ट्री को देखते हुए यह सही समय होगा। कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसाइटी (CUTS) के महासचिव प्रदीप मेहता ने भारत-अमेरिका संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मेहता ने विनिर्माण क्षेत्र में अमेरिका की ताकत का लाभ उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका भारत में उत्कृष्टता केंद्र और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर खोल सकेगा। एक्सपर्ट ने क्या सुझाव? मेहता ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद यह संदेश देना चाहिए कि भारत कोई संरक्षणवादी देश नहीं है जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंची दरें लगाता है। 2020 में, ट्रंप ने आयातित मोटरसाइकिलों, खासकर हार्ले-डेविडसन पर ऊंची दरों को लेकर भारत पर हमला किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत में शायद दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ हैं और हार्ले-डेविडसन को भारत में भारी टैरिफ का भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने मार्च 2017 में अमेरिकी कांग्रेस को अपने संबोधन में पहली बार इस मुद्दे का उल्लेख किया था। 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से भारत को होगा नुकसान? ट्रंप के फिर से अमेरिका का राष्ट्रपति बनने से भारत के लिए मुश्किलें भी खड़ी हो रही हैं। भारत से जाने वाले सामानों पर ज्यादा टैक्स लग सकता है, खासकर गाड़ियों, कपड़ों और दवाइयों पर। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' नीति में यकीन रखते हैं। लेकिन, एक अच्छी खबर यह है कि ट्रंप समझौता भी कर लेते हैं। भारत, ट्रंप की टीम से बात कर रहा है ताकि उनकी आर्थिक नीतियों को समझा जा सके और कोई रास्ता निकाला जा सके। recent visitors 86

मध्य प्रदेश में अनूठी पहल: डॉग संरक्षण को लेकर प्रदेश में लगायें जा रहें डॉग मेला 

Unique initiative in Madhya Pradesh: Dog fairs are being organised in the state for the protection of dogs  भोपाल । जबलपुर में एक राष्ट्रीय स्तर का डॉग शो हो रहा है. इसमें देश भर से 350 डॉग्स और उनके पालक हिस्सा ले रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन में कुछ डॉग्स 1000 किलोमीटर दूर से भी सफर तय करके पहुंच रहे हैं. कुत्तों की अलग-अलग प्रजातियों को जज करने के लिए भारत के दो और ऑस्ट्रेलिया से एक जज भी आए हुए हैं. यह शो जबलपुर में 9 नवंबर और 10 नवंबर को आयोजित किया जाएगा. शो में 350 डॉग्स होंगे शामिल जबलपुर में एक केनाल शो आयोजन किया जा रहा है. इस केनाल शो में भारत में पाई जाने वाली लगभग 35 देसी और विदेशी प्रजातियों के साढे़ 300 डॉग्स आ रहे हैं. इस दौरान इन्हें पालने वाले भी जबलपुर पहुंच रहे हैं. यह आयोजन जबलपुर के स्पोर्ट क्लब में हो रहा है. इन डॉग्स को दो दिनों तक जबलपुर में रखा जाएगा. जबलपुर में एक कैनल सोसाइटी है, जो इस शो का आयोजन करती है. इस समिति के सेक्रेटरी डॉ. अंकुर चौधरी ने बताया, ”इस शो में पहली बार एक ऑस्ट्रेलियन शेफर्ड डॉग शामिल हो रहा है, जो जमशेदपुर से जबलपुर आ रहा है. प्रयागराज से रामपुर हट प्रजाति के डॉग्स आ रहे हैं. इसके साथ ही एक बार फिर दक्षिण भारत की राजापलायम ब्रीड के डॉग्स भी इसमें शामिल होंगे. डॉग शो में हर कुत्ते को किया जाएगा जज इस डॉग शो में हर डॉग को जज भी किया जाएगा. यह जजमेंट बहुत बारीक होता है और इसके विशेष जज होते हैं. भारत में पंजाब के योगेश टुटेजा डॉग्स के बड़े जानकार माने जाते हैं. उन्होंने देश-विदेश के कई डॉग शो में जजमेंट दिए हैं. योगेश टुटेजा का कहना है, ”कुत्ता पालना एक साधना की तरह है, जब हम किसी ब्रीड का सिलेक्शन करते हैं तो हमें यह जानकारी होनी चाहिए कि इसके डॉग्स किस काम में आते हैं. हम उन्हें घर के अंदर पालना चाहते हैं या घर के बाहर. इसके साथ ही डॉग उसकी प्रजाति में कितना प्योर है, इसका भी जजमेंट किया जाता है. विदेशों में बढ़ रही है भारतीय कुत्तों की मांग योगेश टुटेजा ने आगे बताया, ”इसके साथ ही कुत्ते की तंदुरुस्ती और उसके अनुशासन को भी परखा जाता है. इसी के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन सा डॉग स्पेशल है और कौन सा डॉग नॉर्मल है.” पहले हमारे समाज में कुत्ते जरूरत के लिए पाले जाते थे, लेकिन अब यह शौक बन गया है. ऐसे डॉग शो कुत्ते पालने के शौकीन लोगों के लिए सीखने का अच्छा मौका होते हैं. अच्छी बात यह है कि विदेशी नस्ल के साथ-साथ भारतीय नस्ल के कुत्तों को भी लोग शौक से पाल रहे हैं और केवल देश ही नहीं विदेशों में भी इन कुत्तों की मांग बढ़ी है. recent visitors 169

20 नवंबर को BSE और NSE में नहीं होगा कारोबार, शेयर मार्केट का कामकाज रहेगा रहेगा बंद

मुंबई भारतीय शेयर बाजारों में आने वाली 20 नवंबर 2024 को बुधवार के दिन छुट्टी रहेगी और स्टॉक मार्केट में बीएसई और एनएसई पर कोई कामकाज नहीं होगा. शेयर बाजार में अवकाश का ऐलान महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के उपलक्ष्य में किया गया है. शेयर बाजार ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दे दी है. करेंसी मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कारोबारी अवकाश स्टॉक मार्केट के दोनों एक्सचेंज यानी बीएसई और एनएसई पर शेयर बाजार में अवकाश रहेगा और इस दिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के चलते एक्सचेंज पर कामकाज नहीं होगा. करेंसी मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज पर भी कारोबार का अवकाश रहेगा. 20 नवंबर को मुंबई में राजनीतिक हलचल के चलते व्यस्त रहेंगे मुंबईकर इसी दिन झारखंड विधानसभा चुनाव भी होंगे और उत्तर प्रदेश के 9 विधानसभा उपचुनाव का ऐलान हो चुका है. वैसे शेयर बाजार में छुट्टी इसलिए दी गई है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जहां से स्टॉक एक्सचेंज संचालित होते हैं, वहां चुनावी दिन है. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में 20 नवंबर को राजनीतिक हलचल रहेगी और इसी कारण से वित्तीय कामकाज को थोड़ा विराम देने की कोशिश की गई है जिससे सभी मुंबईकर और महाराष्ट्र के वासी अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सकें. recent visitors 91

शहरों की सिमटती हरियाली और बढ़ता जलवायु संकट: 2040 तक दुनियाभर में 200 करोड़ लोग बढ़ती गर्मी से जूझेंगे

Shrinking greenery of cities and increasing climate crisis: By 2040, 2 billion people around the world will face increasing heat शहरों की हरियाली तेजी से सिमट रही है, और उनकी जगह कंक्रीट के जंगल पनप रहे हैं। इसकी वजह से भी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। दुनिया के शहरों में हरे भरे क्षेत्रों की हिस्सेदारी 1990 में औसतन 19.5 फीसदी थी जो 2020 तक घटकर सिर्फ 13.9 फीसदी रह गई है। कमलेश ✍️  भोपाल। भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण शहरों को गंभीर चुनौतियों से जूझना होगा। दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा शहर पैदा कर रहे हैं। बगैर योजनाबद्ध तरीके से तेजी से विकसित होते शहरों और उनका उचित प्रबंधन न किए जाने का खामियाजा हरे-भरे क्षेत्रों को भुगतना पड़ रहा है। शहरों की हरियाली तेजी से सिमट रही है, और उनकी जगह कंक्रीट के जंगल पनप रहे हैं। इसकी वजह से भी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। दुनिया के शहरों में हरे भरे क्षेत्रों की हिस्सेदारी 1990 में औसतन 19.5 फीसदी थी जो 2020 तक घटकर सिर्फ 13.9 फीसदी रह गई है। अनुमान के मुताबिक 2040 तक शहरों में रह रहे 200 करोड़ से ज्यादा लोगों को तापमान में कम से कम 0.5 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त वृद्धि का सामना करना पड़ेगा। यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र संगठन यूएन-हैबिटेट ने अपनी नई रिपोर्ट में दी है। वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2024 वर्ल्ड अर्बन फोरम के दौरान जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कई बड़े शहर लाखों लोगों को आवास प्रदान कर रहे हैं, लेकिन उन पर साल दर साल कई तरह के खतरे बढ़ते जा रहे हैं। जैसे जैसे शहर बढ़ते हैं वे जलवायु से जुड़ी आपदाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते जाते हैं। समस्याएं बढ़ रहीं, शहर उसके लिए तैयार नहीं जलवायु परिवर्तन से जो समस्याएं पैदा हुई हैं उसके अनुरूप शहर तैयार नहीं हैं। शहरों में बेघरों की संख्या और झुग्गी बस्तियों की तादाद बढ़ती जा रही है। झुग्गी बस्तियां आमतौर पर ऐसे इलाकों में होती हैं जो पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील होते हैं। इन क्षेत्रों में आपदाओं से बचाव के लिए बुनियादी ढांचा बेहद लचर है। ऐसे में अक्सर जलवायु सम्बन्धी आपदाओं या चरम घटनाओं का खामियाजा यहां रहें वाले आम लोगों को भुगतना पड़ता है। बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए बजट कम रिपोर्ट में शहरों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा समय में उपलब्ध राशि और वित्तीय आवश्यकतों के बीच की गहरी खाई को भी उजागर किया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि शहरों को सालाना साढ़े चार से 5.4 लाख करोड़ डॉलर की दरकार है, ताकि जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके। जबकि शहरों को अभी सिर्फ 83,100 करोड़ डॉलर मिल रहे हैं। कारगर योजनाओं से सुधर सकती है स्थिति संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है कि मजबूत निवेश और स्मार्ट योजना से शहरों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करके उन्हें जलवायु  परिवर्तन के अनुरूप ढाला जा सकता है। इसके लिए साहसिक निवेश, कारगर योजनाओं और डिजाइन की दरकार होगी।  इस संबंध में यूएन-हैबिटेट की कार्यकारी निदेशक एनाक्लॉडिया रॉसबाख का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को न केवल बढ़ते तापमान बल्कि बाढ़, लू, सूखा और जल संकट जैसी कई समस्याओं से जूझना होगा। recent visitors 184

उपभोक्ता अधिकार: पैकेट पर अंकित वजन कम होने पर करें शिक़ायत और पाये मुआवजा, जाने नियम 

Consumer rights: Complain and get compensation if the weight mentioned on the packet is less, know the rules  कमलेश ✍️ भोपाल। रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई तरह के उत्पाद खरीदते हैं। अगर वे खुले में बिकने वाले हैं, जैसे सब्जियां, फल या अनाज आदि तो हम तौलकर खरीदते हैं। हालांकि, पैकेज्ड उत्पादों के साथ यह होता है कि ज्यादातर लोग पैकेज पर लिखे वजन या वॉल्यूम पर भरोसा कर लेते हैं। आज जानते हैं कि पैकेज्ड उत्पाद को लेकर उपभोक्ता कानून क्या कहते हैं। क्या हैं उपभोक्ताओं के अधिकार? उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(9) में उपभोक्ता अधिकारों का वर्णन किया गया है। अन्य कई अधिकारों के अलावा उपभोक्ता को वस्तुओं या उत्पादों की मात्रा के बारे में जानने का अधिकार भी होता है, ताकि वह अनुचित व्यापार प्रैक्टिस से बच सके। इसके अलावा अगर उपरोक्त अधिकार का उल्लंघन होता है तो उपभोक्ता को संबंधित उपभोक्ता आयोग में जाने का भी अधिकार है। वजन को लेकर क्या है कानून? वजन और माप के मानकों को स्थापित करने के लिए संसद ने कानूनी माप विज्ञान अधिनियम, 2009 को अधिनियमित किया है। इसके तहत ही वजन, माप या संख्या के आधार पर वस्तुओं को बेचा या वितरित किया जाता है। इस कानून से पहले भारत में वजन और माप के लिए मानक अधिनियम, 1976 और वजन और माप के मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 लागू थे। इन सभी कानूनों के तहत उत्पादों की प्रकृति के आधार पर उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों के संबंध में नियम बनाए गए थे। कुछ उत्पादों के लेबल पर ‘पैक किए जाते समय’ (when packed) उत्पाद के वजन/मात्रा का उल्लेख करना आवश्यक होता है, क्योंकि कुछ स्टोरेज कंडिशन में वजन कम हो सकता है या बढ़ सकता है। वहीं कुछ उत्पादों पर केवल वजन का उल्लेख करना होता है और उतनी ही मात्रा उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य होता है। वजन कम पाए जाने पर वजन की मात्रा कम निकलने पर उपभोक्ता अदालतों और आयोगों ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है। इस संबंध में केरल में जॉर्ज थैटिल के चर्चित मामले को लिया जा सकता है। उन्होंने जनवरी 2020 में 40-40 रुपए में बिस्किट के दो पैकेट खरीदे। प्रत्येक पैकेज पर वजन 300 ग्राम लिखा हुआ था। लेकिन उसे मापने पर उन्होंने उक्त पैकेजों में से एक का वजन केवल 268 ग्राम और दूसरे का 249 ग्राम पाया। उन्होंने कानूनी माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत संबंधित अधिकारी से शिकायत की, जिन्होंने वजन में कमी की पुष्टि की। चूंकि उपभोक्ताओं को कानूनी माप विज्ञान अधिनियम के तहत मुआवजा नहीं मिल सकता है, इसलिए उन्होंने उस समय लागू उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता फोरम ने सबूतों पर विचार कर माना कि बिस्किट बनाने वाले निर्माता और बिस्किट के पैकेट बेचने वाले विक्रेता दोनों ने कानूनी माप विज्ञान अधिनियम की धारा 30 का उल्लंघन किया है और उपभोक्ता कानून के अनुसार यह सेवा में कमी का मामला बनता है। फोरम ने कहा, ‘गलती करने वाले निर्माता या व्यापारी की ओर से ऐसा भ्रामक कार्य उपभोक्ता की गरिमा के खिलाफ है और धोखे या किसी भी तरह के अनुचित व्यापार व्यवहार से उसके मुक्त जीवन जीने के उसके अधिकार को खतरे में डालने के समान है।’ उपभोक्ता को हुई वित्तीय हानि और पीड़ा के लिए 50 हजार रुपए और मुकदमे की लागत के लिए 10 हजार रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया गया। साथ ही निर्माता और विक्रेता को तत्काल प्रभाव से उन उत्पादों को वापस लेने के आदेश दिए गए, जिनमें वजन निर्धारित मात्रा से कम था। साबुन के मामले में विशिष्ट मामला  साल 1993 में एक उपभोक्ता यह कहते हुए आंध्र प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग के पास गया था कि साबुन का वजन पैकेजिंग पर उल्लिखित वजन से कुछ ग्राम कम पाया गया। इस पर आयोग ने कहा, “पैकेज में उल्लिखित वजन उस समय का वजन है, जब इसे पैक किया गया था। चूंकि पर्यावरण और अन्य स्थितियों के कारण नमी में कमी हो सकती है और इस कारण वजन भी कम हो सकता है। आयोग ने माना कि उपभोक्ताओं को शायद यह पता नहीं है कि समय बीतने के साथ साबुन का वजन कम हो जाता है और तदनुसार उसने अधिकारियों को इस संबंध में उपभोक्ताओं को शिक्षित करने का निर्देश दिया। recent visitors 290

राशिफल शनिवार 9 नवंबर 2024

मेष राशि- मन प्रसन्न रहेगा। संतान सुख में वृद्धि होगी। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें तथा बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। मिथुन राशि- मन प्रसन्न रहेगा। कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबारी कार्यों में परिश्रम अधिक रहेगा। लाभ में वृद्धि होगी। कर्क राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। भागदौड़ अधिक रहेगी। सिंह राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। वाणी में मधुरता रहेगी। फिर भी आत्मसंयत रहें। परिवार में शांति बनाए रखें। शैक्षिक कार्यों के लिए किसी दूसरे स्थान पर जाना पड़ सकता है। कन्या राशि- आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। लेखनादि बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। रहन-सहन अव्यवस्थित हो सकता है। तुला राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। माता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। परिवार का साथ मिलेगा। वृश्चिक राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। बातचीत में संयत रहें। सेहत का ध्यान रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। धनु राशि- मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। कला या संगीत में रुचि बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। पिता का सान्निध्य मिलेगा। खर्च बढ़ेंगे। मकर राशि- आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। नौकरी में बदलाव की संभावना बन रही है। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कुंभ राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। आय में वृद्धि होगी। मीन राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे, परंतु मन में नकारात्मक विचारों से बचें। धैर्यशीलता बनाए रखें। किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में तरक्की मिल सकती है। recent visitors 96

दिव्यांगों को लेपटॉप, मोटोराइज्ड ट्राईसिकल सहित अन्य सहायक उपकरण भी करेंगे वितरित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 नवम्बर को इंदौर के नेहरू स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना, गैस रीफिल एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 2 करोड़ 10 लाख हितग्राहियों के खातें में 1961 करोड़ रूपये अंतरित करेंगे। इसमें 1 करोड़ 29 लाख लाड़ली बहनों के खातों में 1573 करोड़ रूपये, 26 लाख बहनों के खातों में सिलेंडर रीफिल की राशि 55 करोड़ रूपये और 55 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हितग्राहियों के खातों में 333 करोड़ रूपये की राशि अंतरित की जायेगी। नेहरु स्टेडियम में  5  हजार से अधिक बालिकाओं के द्वारा तलवार चलाने के वर्ल्ड रेकार्ड बनाने का कार्यक्रम भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर के ढ़क्कन वाला कुँआ स्थित ग्रामीण हाट बाजार में आयोजित कार्यक्रम में इंदौर के 450 से अधिक दिव्यांगजनों को लेपटॉप, मोट्रेट ट्राईसिकल सहित अन्य सहायक उपकरण वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री आईटीसी के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। उनके द्वारा इंदौर जिले के  155  दिव्यांगजनों को मोटोराइज्ड ट्रॉयसाइकल, निःशक्त शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 81 छात्र/छात्राओं को लेपटॉप, 6 दम्पतियों को मुख्यमंत्री निःशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता, 130 दिव्यांग वृद्धजनों को डिजीटल श्रवण यंत्र, 99 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, सी.पी. चेयर, बैशाखी और  कैलीपर्स प्रदान की जायेगी। साथ ही कलेक्टर श्री आशीष सिंह की पहल पर तैयार किये गये दिव्यांगजनों को सशक्त पोर्टल के माध्यम से निजी क्षेत्र की कम्पनियों में चयनित 5 दिव्यांगजनों को नियुक्ति-पत्र भी सौंपेंगे। इस कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिला एवं संभागीय अधिकारी वर्चुअल शामिल होंगे। recent visitors 79