पति ने चरित्र पर उठाया सवाल तो पत्‍नी ने काट दिया प्राइवेट पार्ट

नई दिल्ली दिल्ली से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक पत्नी ने किसी झगड़े को लेकर अपने पति का प्राइवेट पार्ट काट दिया और फरार हो गई. पति ने इसकी जानकारी पुलिस को दी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल अवस्था में शख्स को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है. हालांकि अभी तक वारदात को अंजाम देने का कारण पता नहीं लग सका है. दरअसल, मामला नॉर्थ दिल्ली के रूप नगर इलाके का है. पुलिस के मुताबिक उन्हें 1 नवंबर को एक शख्स ने फोन कर सूचना दी कि उसकी पत्नी ने उसका प्राइवेट पार्ट काट दिया है. सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने घायल अवस्था में शख्स को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसका इलाज जारी है. जानकारी के मुताबिक उसकी हालत ठीक बताई जा रही है. पुलिस फिलहाल उसके ठीक होने और लिखित शिकायत मिलने का इंतजार कर रही है. पुलिस का कहना है फिलहाल उसकी पत्नी फरार है और युवक के बयान व लिखित शिकायत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. फरार महिला की तलाश की जा रही है. डाबड़ी में महिला ने अपने पति की कर दी थी हत्या बता दें कि कुछ महीने पहले दिल्ली के डाबड़ी इलाके में एक महिला ने अपने पति (husband) की हत्या करने के बाद शव को कमरे में ही छिपा दिया था और फरार हो गई थी. यह वारदात द्वारका जिले के डाबड़ी इलाके की है. यहां पत्नी ने अपने पति की हत्या कर दी और घर में बाहर से कुंडी लगाकर मौके से फरार हो गई. दिल्ली पुलिस को इस पूरी वारदात की जानकारी 20 अगस्त को तब लगी, जब पुलिस के कंट्रोल रूम में कॉल करके किसी ने बताया कि बंद घर से तेज बदबू आ रही है. इसके बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घर का दरवाजा खोला. घर के अंदर बुरी तरह सड़ चुकी हालत में एक शव पड़ा हुआ था. पुलिस ने जब उसकी शिनाख्त की तो पता लगा कि शव सचिन नाम के युवक का है. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू की.   recent visitors 106

भारत की बिजली खपत इस साल अक्टूबर में बढ़कर 140.47 बिलियन यूनिट हुई, 22 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

नई दिल्ली भारत की बिजली खपत इस साल अक्टूबर में बढ़कर 140.47 बिलियन यूनिट (बीयू) हो गई, जिसमें पिछले साल के मुकाबले एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत की बिजली खपत इस साल अक्टूबर में बढ़कर 140.47 बिलियन यूनिट हुई पिछले साल इसी महीने बिजली खपत में उससे पिछले साल के मुकाबले 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। अक्टूबर 2022 में बिजली खपत 113.94 बिलियन यूनिट थी, जो अक्टूबर 2023 में बढ़कर 139.44 बिलियन यूनिट हो गई थी। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों की मांग में वृद्धि के कारण बिजली की खपत में यह तेजी दर्ज हुई थी। गर्मी के कारण इस वर्ष मई में लगभग 250 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद अक्टूबर में अधिकतम बिजली की मांग घटकर 219.22 गीगावाट रह गई। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने पिछले महीने जारी अपने विश्व ऊर्जा परिदृश्य में कहा, “भारत में अगले दशक में किसी भी अन्य देश की तुलना में ऊर्जा की मांग में अधिक वृद्धि होने की संभावना है, जिसका मुख्य कारण इसका आकार और सभी क्षेत्रों से बढ़ती मांग है।” रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2023 में 7.8 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था था, 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। मौजूदा नीति योजनाओं पर आधारित स्टेटेड पॉलिसीस सिनेरियो (एसटीईपीएस) में, 2035 तक लोहा और इस्पात उत्पादन में 70 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। सीमेंट उत्पादन में लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एयर कंडीशनर के स्टॉक में 4.5 गुना से अधिक की वृद्धि होने का अनुमान है, जिसके परिणामस्वरूप 2035 में एयर कंडीशनर से बिजली की मांग मेक्सिको की उस वर्ष की कुल अपेक्षित खपत से अधिक होगी। परिणामस्वरूप, स्टेटेड पॉलिसीस सिनेरियो (एसटीईपीएस) में 2035 तक भारत में कुल ऊर्जा मांग में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि होगी और विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग तीन गुणा होकर 1400 गीगावाट हो जाएगी। आईईए ने कहा कि अगले दशकों में भारत में ऊर्जा मिश्रण में कोयले की मजबूत स्थिति बनी रहेगी। आईईए ने आगे कहा, “कोयले से बिजली उत्पादन में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। कोयले से उत्पादन सौर पीवी से 30 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है, जबकि एक दशक में सौर पीवी की क्षमता दोगुनी हुई है।” हालांकि, इसके साथ ही देश हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा दे रहा है। पिछले महीने शुरू की गई (ट्रांसमिशन) का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट और 2032 तक 600 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता पैदा करना है।   recent visitors 153

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: 49 सीटों पर उद्धव और एकनाथ शिंदे की सीधी टक्कर, क्या हैं मायने

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में इस बार महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच जबरदस्त मुकाबले की उम्मीद है। चुनाव प्रचार में दोनों ही गुटों के नेता एक दूसरे पर जमकर बरस रहे हैं। वहीं इस चुनाव में खास बात यह है कि शिवसेना और एनसीपी में दो धड़े होने के बाद राज्य की राजनीति में पहली बार आपसी मुकाबला हो रहा है। शिवसेना (UBT) और शिंदे की शिवसेना दोनों ही इस चुनाव में अपनी ताकत दिखाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते। शिवसेना के दोनों धड़े 49 सीटों पर आमने-सामने हैं। इनमे से 19 सीट मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में हैं। इनमें से भी 12 सीटें मुंबई शहर में हैं। इसके अलावा आठ सीट मराठवाड़ा और कोंकण क्षेत्र में आती हैं। 6 विदर्भ और चार सीटें उत्तर महाराष्ट्र में हैं। बाकी बची चार सीटें पश्चिमी महाराष्ट्र की हैं। जून 2022 में शिवसेना में फूट पड़ी थी। इसके बाद एकनाथ शिंदे अपने साथी नेताओं के साथ एनडीए में आ गए थे। वह मुख्यमंत्री बन गए। वहीं उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी का हिस्सा हैं। वह कांग्रेस और एनसीपी के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। उद्धव के लिए लिटमस टेस्ट हैं विधानसभा चुनाव जानकारों का कहना है कि उद्धव सेना के लिए यह चुनाव लिटमस टेस्ट की तरह है। पिता बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर दावा ना केवल उद्धव ठाकरे ठोक रहे हैं बल्कि एकनाथ शिंदे का भी कहना है कि उनकी वैचारिक विरासत वही संभाल रहे हैं। एकनाथ शिंदे का कहना है कि कांग्रेस के साथ जाकर उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा था कि वह कांग्रेस के साथ कभी नहीं जाएंगे। एकनाथ शिंदे के सामने क्या है चुनौती इस चुनाव में एकनाथ शिंदे के सामने बड़ी चुनौती है। चुनौती केवल महायुती की सरकार बनाने की नहीं बल्कि पार्टी के जनाधार बढ़ाने की भी है। उद्धव ठाकरे को 40 से ज्यादा सीटें हासिल करनी हैं क्योंकि एकनाथ शिंदे के साथ 40 विधायक उनसे अलग हो गए थे। वहीं बीजेपी ने एकनाथ शिंदे से वादा किया है कि गठबंधन की जीत के बाद वह मुख्यमंत्री बनेंगे। ऐसे में दोनों के सामने ही एक बड़ा टारगेट है। लोकसभा चुनाव में दोनों ही सेनाएं 13 लोकसभा सीटों पर आमने-सामने थीं। इसमें शिवेसेना (UBT) ने 7 सीटों पर जीत हासिल की थी। शिंदे सेना को 6 सीटों पर कामयाबी मिली थी। मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में आने वाली ज्यादातर सीटों पर कड़ी टक्कर की उम्मीद है। इसमें ठाणे की कोपरी पांचपखाड़ी सीट भी शामिल हैं जहां एकनाथ शिंदे का मुकाबला उनके राजनीतिक गुरु आनंद दिघे के भतीजे केदार से होने वाला है। उद्धव सेना ने केदार को यहां से टिकट दिया है। वहीं मुंबई के वर्ली में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे और राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा आमने-सामने हैं। recent visitors 82

राधाकृष्णा सुरभि गौशाला में धूमधाम से मनाई गई गोवर्धन पूजा ।

Govardhan Puja was celebrated with great pomp in Radhakrishna Surbhi Gaushala.गौवंश रक्षा वर्ष के अन्तर्गत गौशाला कोंढरखापा में गोवर्धन सम्पन्न हुआ कार्यक्रम । हरिप्रसाद गोहेआमला । शासन की मंशानुसार गौवंश रक्षा वर्ष अन्तर्गत 02 नवंबर 2024,शनिवार – दिपावली के पावन अवसर पर राधाकृष्णा सुरभि गौशाला कोंढरखापा जिला बैतूल रजि.नं.1947 में गोवर्धन पूजा कार्यक्रम आयोजित किया, इस मौके पर सर्व प्रथम गौवंश पुजन,गोवर्धन पूजन, गौशाला परिसर में साफ़ सफाई, वृक्षारोपण एवं गौग्रास के रूप में गुड़ रोटी, हरा चारा (नेपियर घास), पशु आहार खिलाया तथा उपस्थित जनमानस को व्यक्तिगत एवं सामुहिक गौरक्षा का संकल्प दिलाया एवं गौसेवा में कार्यरत गौ सेवकों को पशु पालन विभाग द्वारा प्रसस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं गौवंश को डिवार्मींग की दवाई दी,एवं ग्राम कोंढरखापा की 10 सदस्यीय भगत भुमकाओं द्वारा गौवंश सुरक्षा के लिए खोड़ंग बांधकर, लोकगीत, झुम्मड़ डांस ,गायकी नृत्य,भजन कीर्तन कर इस त्योहार को धुमधाम से मनाया । इस अवसर पर जनपद सदस्य एवं भाजपा मिडिया प्रभारी पवन सिंह कुशवाह,जनपद सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति के अध्यक्ष फुलचंद मोड़क,भाजपा कार्यकर्ता भरत मोड़क, सरपंच भजन धुर्वे,सचिव देवाजी भुमरकर, डाॅ.इन्द्रलाल चंदेलकर,गौसेवक कमलेश वागद्रे,धनाराम धुर्वे,श्रीमती दुलारी धाकड़, श्रीसंतोष झड़बड़े महेश बारपेटे,गौशाला प्रबंधक चेतन सिंह सिसोदिया सहित जनप्रतिनिधि, पशु सखी,महिलाएं, ग्रामीणजन उपस्थित रहे। recent visitors 662

विधानसभा चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के खर्च पर चुनाव आयोग की पैनी नजर रहेगी। चुनाव खर्च पर्यवेक्षक उम्मीदवारों के खर्चों का तीन बार ऑडिट करेंगे। पहला निरीक्षण 8-9 नवंबर को होगा, जो उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 4 नवंबर के बाद होगा। इसके बाद 18 नवंबर तक दो और बार जांच की जाएगी। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 12 लाख रुपये बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी है। पहले यह सीमा 28 लाख रुपये थी। उम्मीदवार लंबे समय से खर्च सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। चुनाव खर्च में बड़ा बदलाव कब? चुनाव आयोग ने 2022 में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की खर्च सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 90 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव के लिए 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी थी। चुनाव खर्च सीमा में आखिरी बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था, जिसे 2020 में 10 प्रतिशत और बढ़ा दिया गया था। 2022 में ही चुनाव आयोग ने लागत फैक्टर और अन्य संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने और उचित सिफारिशें करने के लिए एक समिति का गठन किया था। 2014 में किस आधार पर हुआ था बदलाव? समिति ने राजनीतिक दलों, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव पर्यवेक्षकों से सुझाव आमंत्रित किए थे। समिति ने पाया कि मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है और 2014 के बाद से लागत मुद्रास्फीति सूचकांक में भी वृद्धि हुई है। इसने प्रचार के बदलते तरीकों पर भी विचार किया, जो धीरे-धीरे वर्चुअल प्रचार की ओर बढ़ रहे हैं। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों को खर्च के रजिस्टर में बदलाव करते समय विवरण जमा करना होगा और अगर कोई उम्मीदवार सीमा से अधिक खर्च करता है, तो नोटिस जारी किए जाएंगे। कैसे तय किया जाता है चुनाव खर्च खर्च प्रकोष्ठ को सौंपे गए खर्चों में गड़बड़ी के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ नोटिस जारी किए जा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए गए थे। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर नोटिस का जवाब देने का समय दिया जाता है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर तय समय सीमा के भीतर खर्च का विवरण जमा नहीं किया जाता है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा चुनाव से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी उन वस्तुओं की दरें तय करते हैं जिनका उपयोग उम्मीदवार करेंगे, और वही दर चुनावी खर्च के तहत दिखानी होगी। दरें तय करने से पहले विचार-विमर्श किया जाता है। 10 रुपये की चायआने-जाने के लिए रिक्शा, टेंपो, एसयूवी किराए पर लेने की दरें चुनाव व्यय प्रकोष्ठ की ओर से निर्धारित मूल्य सूची में लिखी गईं हैं। इन दरों के आधार पर चुनावी खर्चों की जांच की जाती है। इसमें चाय की कीमत 10 रुपये और कॉफी की कीमत 15 रुपये तय करने से लेकर स्टॉल लगाने के लिए फर्नीचर और प्रचार सामग्री के उपयोग तक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार इन्हीं दरों के आधार पर खर्च दिखा सकते हैं। सभी हितधारकों से चर्चा के बाद दरें तय की जाती हैं। यह चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि पैसे वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ न मिले। recent visitors 111

पूर्व गृहमंत्री कैप्टन जयपाल सिंह जूदेव ने 80 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली.

भोपाल मध्य प्रदेश के गृहमंत्री रहे कांग्रेस के सीनियर नेता कैप्टन जयपाल सिंह जूदेव का निधन हो गया है. जयपाल सिंह की उम्र 80 वर्ष थी. शनिवार (2 नंवबर) की सुबह करीब 7.00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. जयपाल सिंह जूदेव के निधन की खबर के बाद राजनीतिक जगत में शोक की लहर है. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने उन्हें सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की. recent visitors 104

किस पार्टी की सदस्य है निर्मला सप्रे? सस्पेंस ख़त्म करने कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष से बात करेगी

भोपाल सागर जिले के बीना विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर निर्णय करने के लिए कांग्रेस विधायक दल विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से बात करेगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए प्रमाण सहित आवेदन दिया है लेकिन उस पर अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है। उधर, सप्रे लगातार भाजपा की बैठकों में भाग ने रही हैं। वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर निर्मला सप्रे बीना विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं। लोकसभा चुनाव के समय वे भाजपा के संपर्क में आईं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंच भी साझा किया। उन्होंने क्षेत्र के विकास का हवाला देते हुए पार्टी प्रत्याशी के स्थान पर भाजपा के लिए काम किया। भाजपा में शामिल होने की बात भी कही। इसे लेकर कांग्रेस ने उनसे दूरी बना ली। उमंग सिंघार ने किया था आवेदन विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाया और सदन में अपने साथ नहीं बैठाने का निर्णय लेकर विधानसभा सचिवालय को सूचित भी कर दिया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी और रामनिवास रावत के विरुद्ध दलबदल कानून के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया। दलबदल नहीं किया है इस पर कार्रवाई से पूर्व रावत ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया, परंतु सप्रे ने ऐसा नहीं किया। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें नोटिस जारी कर दलीय स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। इस पर पहले तो उन्होंने जवाब देने का समय मांग लिया और फिर दूसरे नोटिस के जवाब में आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने दलबदल नहीं किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेना है, जो अभी तक नहीं हुआ है। भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में नजर आईं थी सप्रे उधर, सप्रे पिछले सप्ताह प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में भाग लेने पहुंचीं। मीडिया ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा, पर वे टाल गईं। अब कांग्रेस विधायक दल सप्रे की पार्टी विरोधी गतिविधियों के प्रमाण सबके सामने होने को आधार बनाकर दलबदल संबंधी आवेदन पर शीघ्र निर्णय करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से मिलेगा। अब कोई संशय की स्थिति नहीं है विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि अब कहीं कोई संशय की स्थिति नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा की देशभर में प्रतिष्ठा है, पर ऐसे प्रकरणों से साख प्रभावित होती है। इसलिए अध्यक्ष को शीघ्र निर्णय लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। recent visitors 79