दहेज में भारी रकम की डिमांड से लड़की का परिवार सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि एम्स के यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर ने शादी के लिए 50 करोड़ रुपए का दहेज मांगा है। पोस्ट के मुताबिक दहेज मांगने वाले डॉक्टर की होने वाली पत्नी भी डॉक्टर हैं और हैदराबाद में लिवर ट्रांसप्लांट एनेस्थिसिया विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। इस भारी-भरकम दहेज की मांग से लड़की और उसका परिवार टूट गया है और वे इसे जुटाने के लिए अपनी रिटायरमेंट की बचत तक दांव पर लगाने को तैयार हो है। पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों तेलुगु परिवारों से हैं, जहां दहेज को एक परंपरा के रूप में देखा जाता है। सोशल मीडिया एक्स पर यह पोस्ट डॉक्टर फीनिक्स नामक यूजर ने की है और इसे अब तक एक मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं। सोशल मीडिया पर डॉक्टर की इस मांग की कड़ी आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी पढ़ाई और प्रतिष्ठित पद पर होने के बावजूद डॉक्टर ने दहेज जैसी प्रथा को क्यों बढ़ावा दिया। कई यूजर्स ने इसे लालच और शर्मनाक बताया और लड़की के परिवार को सलाह दी है कि वे इस मांग के आगे न झुकें। कई लोगों ने लिखा कि इस तरह की घटनाएं समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि लड़की, जो खुद एक स्वतंत्र और पेशेवर डॉक्टर है, उसे अपने आत्म-सम्मान को बनाए रखते हुए इस रिश्ते से पीछे हटने का फैसला लेना चाहिए। इस घटना ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जिसमें लोग पढ़े-लिखे और सम्मानित पदों पर आसीन लोगों द्वारा दहेज मांगने पर सवाल उठा रहे हैं।   recent visitors 75

ओरछा में आज से दीपावली उत्सव की शुरुआत: देवउठनी ग्यारस तक गूंजेगा बुंदेली नृत्य और संगीत

Diwali festival begins in Orchha from today: Bundeli dance and music will resonate till Devuthani Gyaras (कमलेश  ),भोपाल। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी ओरछा में आज से परंपरागत दीपावली उत्सव की भव्य शुरुआत हो रही है। श्री रामराजा सरकार की नगरी माने जाने वाले ओरछा में हर साल दीपावली के मौके पर बुंदेलखंड के करीब 150 गांवों की टोलियां नृत्य और गायन के साथ भगवान के दर्शन करने पहुंचती हैं। इस अनोखे उत्सव के आकर्षण में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि यहां आए पर्यटक भी रंग जाते हैं और बुंदेली रंग में रंगने को मजबूर हो जाते हैं। नृत्य और गायन का विशेष प्रदर्शन दीपावली से शुरू होकर देवउठनी ग्यारस तक चलने वाले इस 11-दिवसीय उत्सव में, बुंदेली टोलियां अपने अनूठे वेशभूषा और नृत्य-संगीत के साथ गांव-गांव में घूमती हैं। इन टोलियों में कलाकार छोटे-छोटे कांच के टुकड़ों से सजाए मोटे ऊनी कपड़ों में सजे रहते हैं, जो पारंपरिक कला और संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं। इनकी नृत्य शैली और साज-बाज की ध्वनियां, जो नगड़िया और बुंदेली गायन से सजी होती हैं, भगवान राम के प्रति उनकी असीम श्रद्धा को उजागर करती हैं।  एक अनूठी सांस्कृतिक परंपरा बुंदेलखंड का दीपावली नृत्य अपनी अनोखी वेशभूषा, लोकगीतों, और सजीव संगीत के कारण विश्वभर में पहचान बना चुका है। जैसे मथुरा-बरसाने की होली और मैसूर का दशहरा प्रसिद्ध हैं, वैसे ही ओरछा की यह अनूठी परंपरा बुंदेली दीपावली नृत्य के लिए जानी जाती है। लोग भगवान के प्रति अपनी आस्था को प्रकट करने के लिए सालभर इस खास नृत्य का इंतजार करते हैं।  घर-घर से विदाई और देवउठनी ग्यारस पर वापसी हर गांव से दीपावली की टोलियां उत्साह और श्रद्धा के साथ ओरछा के लिए रवाना होती हैं। इनका स्वागत लोग अपने घरों के द्वारों पर करते हैं और नृत्य की धुनों पर झूमते हैं।  लोगों का कहना हैं कि रामराजा सरकार के दरबार में गायन के बाद देवउठनी ग्यारस पर ही यह टोलियां अपने गांव लौटती हैं। 11 दिनों तक यह समूह ओरछा में नृत्य और संगीत के माध्यम से इस पावन परंपरा को जीवंत रखते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का यह अनूठा उत्सव ओरछा का यह दीपावली उत्सव न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक विशेष आकर्षण है। भगवान रामराजा सरकार के प्रति असीम श्रद्धा से भरा यह आयोजन बुंदेलखंड की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर और उसकी विरासत को दुनिया के सामने लाता है।  हर साल की तरह इस बार भी हजारों लोग इस पावन धरोहर का हिस्सा बनने ओरछा में इकट्ठा होंगे, जहां दीपों की जगमगाहट और नृत्य के रसमय प्रदर्शन से आस्था की यह रात और भी खास बन जाएगी। recent visitors 291

भारत-चीन सीमा पर दिवाली की मिठास: सैनिकों का एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर दोस्ती का इजहार

Sweetness of Diwali on India-China border: Soldiers express friendship by feeding sweets to each other नई दिल्ली। दिवाली के शुभ अवसर पर भारत और चीन के सैनिकों ने सीमा पर एक अनूठा उत्सव मनाते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। देपसांग और डेमचोक में कई महीनों से जारी तनाव के बीच, दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है। यह कदम सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया और भविष्य की बातचीत बुधवार को दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आज दिवाली के मौके पर मिठाई बांटने का यह समारोह दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट और विश्वास को बढ़ाने का प्रतीक माना जा रहा है। सीमा पर स्थिति को नियंत्रित करने और आगे की पेट्रोलिंग को लेकर जल्द ही ग्राउंड कमांडर स्तर पर बातचीत भी होनी है, जिसमें ब्रिगेडियर और उससे निचले स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।  विदेश मंत्री का बयान और तनाव कम करने की प्रक्रिया भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सैनिकों की वापसी पहला कदम है और इसके बाद का कदम तनाव कम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच तनाव तब कम हो सकता है, जब भारत को पूरा विश्वास हो कि चीन भी इस दिशा में समान प्रतिबद्धता रखता है। तनाव कम करने के बाद, सीमा प्रबंधन को लेकर गहन चर्चा की जाएगी ताकि सीमा पर स्थिरता बनी रहे। सीमावर्ती क्षेत्र में शांति की दिशा में एक नई पहल इस दिवाली पर मिठाई बाँटने की परंपरा न केवल सैनिकों के बीच सौहार्द और सद्भावना बढ़ाने का संकेत है, बल्कि यह भविष्य में सीमा पर तनाव को कम करने के प्रयासों का भी हिस्सा है। भारत और चीन के बीच विश्वास को बढ़ावा देने वाले ऐसे छोटे कदम सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। दिवाली के इस उल्लास भरे माहौल में सीमा पर मिठाई का आदान-प्रदान दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मकता का संकेत है। यह कदम सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने के साथ दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हो सकता है। recent visitors 156

यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि, जिससे परिवहन साधनों पर बढ़ा दबाव

जयपुर  दीपोत्सव के तहत अधिकतर विभागों और संस्थानों में दिवाली की छुट्टियां हो गई है। निजी कार्यालयों और फैक्ट्रियों में भी दीपावली के मौके पर कर्मचारियों को छुट्टियां दी गई है। दूर दराज के शहरों और राज्यों में काम करने वाले लोग इस मौके पर अपने घरों को लौटते हैं। दिवाली और होली ही दो ऐसे त्योहार है जब हर कोई अपने घर जाना चाहता है और अपने परिवार के साथ त्योहार मनाना चाहते हैं। ऐसे में दिवाली के दो दिन पहले से लेकर दो दिन बाद तक यातायात का भारी दबाव रहता है। बसें, ट्रेनें और फ्लाइट सब फुल हो जाते हैं। रोडवेज की बसों और सामान्य ट्रेनों में किराया पूर्व निर्धारित ही रहता है लेकिन निजी ट्रेवल्स वाले मौका भुनाने से नहीं चुकते। मनमर्जी का किराया वसूलने की शिकायतें हर साल देखने और सुनने को मिलती है। रोडवेज और निजी बसों में भारी भीड़, ट्रेनें भी फुल देश प्रदेश के हजारों लाखों लोग अपने गांव जाने की तैयारी में है। मंगलवार 29 अक्टूबर से ही लोगों की रवानगी शुरू हो गई है जो अभी तक जारी है। राजस्थान रोडवेज की बसें खचाखच भरी हुई चल रही है। यात्री भार को देखते हुए रोडवेज प्रशासन ने अतिरिक्त बसें चलाई है लेकिन लाखों यात्रियों की भीड़ के आगे सरकारी साधन पर्याप्त नहीं है। निजी बसों के जरिए लोग अपने घरों की ओर जा रहे हैं। निजी बसें भी फुल है। यात्री भार को देखते हुए कई ट्रेवल्स ने किराया मनमर्जी का कर दिया है। सामान्य दिनों से दोगुना किराया वसूल रहे हैं। दोगुना किराया नहीं देने वालों और बहस करने वालों से बात तक नहीं की जा रही है। ट्रेनें भी फुल हो गई है। ऐसे में ट्रेनों में अतिरिक्त डिब्बे लगाए गए हैं।। रेलवे ने 50 से ज्यादा अतिरिक्त ट्रेनें भी चलाई है फ्लाइट भी फुल, किराया तीन गुना बढ़ाया बसों और ट्रेनों के साथ फ्लाइट में सफर करने वालों की संख्या भी गई गुना बढ गई है। लोग फ्लाइट का ऑनलाइन टिकट बुक करा रहे हैं लेकिन अधिकतर फ्लाइट में सीट अवेलेबल नहीं दिखा रहे हैं। फ्लाइट का किराया भी तीन गुना तक बढ़ा दिया गया है। इसके बावजूद अधिकतर फ्लाइट्स में सीटें फुल हो गई है। जयपुर से मुंबई का किराया 90606 रुपए से 17344 तक वसूले जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि फ्लाइट की संख्या कम है। फ्लाइट्स सर्विस कई शहरों के बीच है लेकिन किराया सामान्य दिनों की तुलना में बढा दिया गया है। आइये जानते हैं जयपुर से अन्य शहरों के बीच का हवाई किराया     – मुंबई से जयपुर आने के लिए 10 फ्लाइट्स हैं। इनमें 9606 से लेकर 17344 रुपए तक का किराया है।     – बेंगलुरु से जयपुर आने के लिए कुल 7 फ्लाइट्स हैं। इनमें 8800 से लेकर 20109 रुपए तक का किराया है।     – पुणे से जयपुर के लिए 3 फ्लाइट्स है। इनमें 10925 से लेकर 13551 रुपए तक का किराया है।     – अहमदाबाद से जयपुर के लिए 4 फ्लाइट्स हैं। इनमें 1 फुल और 3 फ्लाइट में ही सीट उपलब्ध दिखा रहे हैं। किराया 9147 से लेकर 11125 रुपए तक है।     – चंडीगढ़ से जयपुर के लिए तीन फ्लाइट है। एक फुल है और दो फ्लाइट में ही सीट उपलब्ध बता रहे हैं। किराया 8536 से लेकर 11153 रुपए तक है।     – दिल्ली से जयपुर के लिए कुल 5 फ्लाइट्स हैं। इनमें 3729 से लेकर 5316 रुपए तक का किराया है।     – हैदराबाद से जयपुर के लिए 6 फ्लाइट है जिनमें किराया 8314 से लेकर 10481 रुपए तक है। recent visitors 54

भाजपा ने कांग्रेस को अहंकार में डूबी पार्टी बताया, विवेकहीन युवराज की परिक्रमा में जुटी है पार्टी

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार को लेकर कांग्रेस पार्टी के आरोपों को चुनाव आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया। भारतीय जानता पार्टी ने इस पर कांग्रेस पर तीखा निशाना साधते हुए कांग्रेस को अहंकार में डूबी पार्टी बताया है। बुधवार को पार्टी मुख्यालय में इसपर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरूण चुघ ने कहा कि जब कांग्रेस हारती है तो वे ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देते हैं, लेकिन जब वे कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल जैसे राज्यों में जीतते हैं, तो ईवीएम कोई मुद्दा नहीं है। पार्टी के विवेकहीन युवराज की परिक्रमा में पूरी कांग्रेस पार्टी डूबी हुई है। दो दर्जन चुनाव हारने के बाद विवेकहीन 'युवराज' अब कांग्रेस पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं। वहीं, आयुष्मान भारत योजना को लेकर सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया पर वार करते हुए तरूण चुघ ने कहा कि आयुष्मान भारत के लाभ से दिल्ली और बंगाल के लोगों को वंचित किया गया है। पार्टियां और नेता जो गरीबों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके बयान मानसिक दिवालियापन की स्थिति को दर्शाते हैं।   recent visitors 92

डब्ल्यूएचओ ने दावा किया, दुनिया के 26 फीसदी टीबी मरीज भारत में है, वैश्विक टीबी के बोझ में देश की हिस्सेदारी सबसे अधिक

नई दिल्ली विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया है कि दुनिया के 26 फीसदी टीबी मरीज भारत में है। मंगलवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट तस्दीक करती है कि वैश्विक टीबी के बोझ में देश की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वो भी तब जब भारत ने ग्लोबल टार्गेट से पांच साल पहले ही वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। ग्लोबल ट्यूबरक्लोसिस रिपोर्ट (वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट) 2024 से पता चला है कि 30 देशों की लिस्ट में भारत का स्थान सबसे ऊपर है। इसके मुताबिक इंडोनेशिया (10 प्रतिशत), चीन (6.8 प्रतिशत), फिलीपींस (6.8 प्रतिशत) और पाकिस्तान (6.3 प्रतिशत) जैसे देशों की कुल भागीदारी 56 प्रतिशत है। ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर, टीबी 2023 में कोविड-19 को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर प्रमुख संक्रामक रोग के रूप में उभरी है। इसके मुताबिक 2023 में लगभग 8.2 मिलियन लोगों में टीबी डायग्नोस की गई। ये जताता है कि 1995 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक टीबी निगरानी शुरू करने के बाद से दर्ज की गई सबसे अधिक संख्या है। यह 2022 में रिपोर्ट किए गए 7.5 मिलियन से उल्लेखनीय वृद्धि को भी दर्शाता है। शीर्ष संक्रामक रोग पुरुषों (55 प्रतिशत) में सबसे आम पाया गया। महिलाओं में 30 प्रतिशत से अधिक, जबकि 12 प्रतिशत बच्चे और किशोर इसके शिकार बताए गए। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने रिपोर्ट में कहा, “यह तथ्य कि टीबी अभी भी इतने सारे लोगों को मारता है और बीमार करता है, एक बड़ा झटका देता है वो भी तब जब हमारे पास इसे रोकने, इसका पता लगाने और इसका इलाज करने के साधन उपलब्ध हैं।” उन्होंने देशों से “उन टूल्स के उपयोग का विस्तार करने और टीबी को समाप्त करने के लिए की गई ठोस प्रतिबद्धताओं को पूरा करने” का आह्वान किया। महत्वपूर्ण रूप से, रिपोर्ट में पांच प्रमुख जोखिम कारकों पर प्रकाश डाला गया है जो नए टीबी मामलों को बढ़ावा दे रहे हैं। इनमें कुपोषण, एचआईवी संक्रमण, शराब के सेवन संबंधी विकार, धूम्रपान (विशेष रूप से पुरुषों में) और मधुमेह शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “गरीबी और प्रति व्यक्ति जीडीपी जैसे महत्वपूर्ण निर्धारकों के साथ-साथ इन मुद्दों से निपटने के लिए समन्वित बहुक्षेत्रीय प्रयासों की आवश्यकता है,” रिपोर्ट में टीबी अनुसंधान के लिए अधिक धन मुहैया कराने की भी अपील की गई है। इस बीच, रिपोर्ट में नए टीबी मामलों की अनुमानित संख्या और रिपोर्ट किए गए मामलों के बीच अंतर में कमी देखी गई है। यह 2020 और 2021 में कोविड महामारी के लगभग 4 मिलियन के स्तर से घटकर लगभग 2.7 मिलियन हो गया है। जबकि एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए टीबी निवारक उपचार का कवरेज जारी है, मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट टीबी एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बना हुआ है। रिपोर्ट से पता चला है कि मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट या रिफैम्पिसिन-रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर/आरआर-टीबी) से उपचार की सफलता दर अब 68 प्रतिशत तक पहुंच गई है। लेकिन, रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में एमडीआर/आरआर-टीबी विकसित होने वाले अनुमानित 400 000 लोगों में से केवल 44 प्रतिशत का ही निदान और उपचार किया गया था।   recent visitors 148

दीपावली के अवसर पर भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे रक्षा मंत्री, जवानों संग मनाएंगे दीपावली

नई दिल्ली दीपावली के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अरुणाचल प्रदेश में रहेंगे। वह अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र तवांग में आर्मी के जवानों के साथ दीपावली मनाएंगे। यहां वह भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी उनके साथ रहेंगे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी इस यात्रा के संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह अरुणाचल प्रदेश की दो दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली से तवांग जा रहे हैं। रक्षा मंत्री यहां सशस्त्र बलों के कर्मियों के साथ विशेष बातचीत करेंगे और भारतीय सेना मेजर रालेंगनाओ बॉब खाथिंग को समर्पित एक संग्रहालय के उद्घाटन में शामिल होंगे। चीन की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश में रक्षा मंत्री बुधवार को इंडियन एयर फोर्स एससीसी की वायु वीर विजेता कार रैली को हरी झंडी भी दिखाएंगे। यह रैली अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है, इसका आयोजन भारतीय वायु सेना की 92वीं वर्षगांठ और 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत के 25 साल पूरे होने के अवसर पर किया गया था। रैली का उद्देश्य युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हुए युद्धों और बचाव कार्यों में भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास और वीरता के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। ‘वायु वीर विजेता’ कार रैली 8 अक्टूबर को लद्दाख के थोईस से रवाना हुई थी। थोईस, समुद्र तल से 3,068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा वायु सेना स्टेशन है। इस रैली के अंतर्गत वायु योद्धाओं, सेना के जवानों, पूर्व वायुसैनिकों और उत्तराखंड युद्ध स्मारक (यूडब्ल्यूएम) के सदस्यों का एक दल अब तवांग पहुंचा है। केंद्रीय राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने थोईस से इसे रवाना किया था। भारतीय वायु सेना- उत्तराखंड युद्ध स्मारक (आईएएफ-यूडब्ल्यूएम) के इस दल ने 7,000 किलोमीटर की दूरी तय की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से थोईस के लिए इस कार रैली को गर्मजोशी से विदाई दी थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस कार रैली ने अपनी 7000 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान, विभिन्न स्थानों पर देश के युवाओं से संपर्क किया। इस दौरान युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। युवाओं को भारत के विभिन्न युद्धों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि इन युद्धों में वायु सेना की क्या भूमिका रही। भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास व युद्धों के साथ साथ बचाव अभियानों में वायु योद्धाओं की वीरता के बारे में भी युवाओं को अवगत कराया गया। कार रैली के दौरान युवाओं को मातृभूमि की सेवा के लिए आकर्षित करने का प्रयास भी किया गया। रैली में विभिन्न चरणों में कई पूर्व वायुसेना प्रमुख भी हिस्सा लिया। भारतीय वायुसेना द्वारा उत्तराखंड युद्ध स्मारक के बुजुर्ग सैनिकों के साथ समन्वय में आयोजित इस रैली का उद्देश्य भारतीय वायु सेना के प्रति लोगों को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराना था। इस मेगा कार रैली में महिलाओं सहित 52 वायु योद्धा शामिल रहे। रास्ते में, वायु योद्धा 16 पड़ावों पर रुके, जहां उन्होंने विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ बातचीत कर उन्हें सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।   recent visitors 80