17 अक्तूबर को चंद्रमा पृथ्वी से मात्र 3 लाख 57 हजार 3 सौ 64 किमी की दूरी पर रहेगा जोकि इस साल के लिये सबसे कम दूरी है

नई दिल्ली नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इसकी जानकारी देते हुये बताया कि चमकता चंद्रमा पृथ्वी से मात्र 3 लाख 57 हजार 3 सौ 64 किमी की दूरी पर रहेगा जोकि इस साल के लिये सबसे कम दूरी है। नजदीकियों के कारण यह अपेक्षाकृत बड़ा और चमकदार दिखेगा। पश्चिमी देशों में इसे हंटर्स मून के नाम दिया गया है। भारत के समयानुसार दोपहर बाद 4 बजकर 56 मिनट पर यह सबसे निकट बिंदु पर आयेगा और इसके लगभग 1 घंटे बाद ही यह पूर्व दिशा में शरदसुपरमून के रूप में उदित होकर रात भर आकाश में अपनी चांदनी बिखेरेगा। भले ही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आप बुधवार रात्रि ही खीर खाकर उत्सव मना रहे हों, लेकिन चमक के मामले में तो वैज्ञानिक रूप से गुरुवार को ही चंद्रमा की चमक अधिकतम होगी अगर बादल या धुंध बाधा न बने तो। क्या होता है सुपरमून सारिका ने बताया कि पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता चंद्रमा गोलाकार पथ में नहीं घूमता, बल्कि अंडाकार पथ में चक्कर लगाता है। इस कारण इसकी पृथ्वी से दूरी बढ़कर कभी 406,700 किमी हो जाती है तो कभी यह 356,500 किमी तक पास भी आ जाता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के पास आया हो और उस समय पूर्णिमा आती है तो चंद्रमा लगभग 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत अधिक चमकदार दिखाई देता है। इसे ही सुपरमून कहा जाता है। गुरूवार को साल का सबसे नजदीकी सुपरमून है।  recent visitors 152

निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सरकारी सब्सिडी या समर्थन से पूरी नहीं आएगी : मंत्री गोयल

नई दिल्ली  वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से कहा कि वह वैश्विक बाजारों का दोहन करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सरकारी सब्सिडी या समर्थन से पूरी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के विनिर्माण के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रही है, क्योंकि उद्योग जगत को यह स्वीकार कराना एक ‘‘कठिन’’ काम है कि उन्हें गुणवत्ता वाला सामान बनाना चाहिए। सरकार को शुरुआत में गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों पर उद्योग से भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सब्सिडी या सरकारी समर्थन से नहीं आने वाली है। यह दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए हमारे दरवाजे बंद करने से नहीं आने वाली है। अगर हम आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो यह तभी हो सकता है जब भारत आत्मविश्वासी होगा और यह आत्मविश्वास तभी आएगा जब हम सभी यह तय करेंगे कि गुणवत्ता हमारा काम नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है।’’ उन्होंने कहा कि यदि भारतीय उद्योग किसी ऐसे उत्पाद में प्रतिस्पर्धी नहीं है, जिसे आयात किया जा सकता है, तो उद्योग को प्रतिस्पर्धा की दिशा में काम करना होगा जहां उसे अन्य देशों के साथ तुलनात्मक लाभ हो। सरकार देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) जैसे कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि 2014 तक 106 उत्पादों को ‘कवर’ करने वाले केवल 14 क्यूसीओ जारी किए गए थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों में सरकार ने 732 उत्पादों को ‘कवर’ करते हुए 174 ऐसे आदेश जारी किए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिक से अधिक लोग बेहतर गुणवत्ता मानकों के साथ जुड़ सकें। ये आदेश घटिया उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाने, अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने तथा उपभोक्ताओं के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। आदेश के अनुसार, किसी वस्तु का उत्पादन, बिक्री, व्यापार, आयात व भंडारण तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि उस पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का चिह्न न लगा हो। बीआईएस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पहली बार में दो साल तक की कैद या कम से कम दो लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार और उसके बाद के अपराधों के मामले में जुर्माना न्यूनतम पांच लाख रुपये तक बढ़ जाएगा और माल या वस्तुओं के मूल्य का 10 गुना तक हो सकता है। क्यूसीओ, व्यापार में तकनीकी बाधाओं पर विश्व व्यापार संगठन समझौते के अनुसार जारी किए जाते हैं। मंत्री ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले सामान के विनिर्माण से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। रोजगार सृजन होता है और निर्यात बढ़ता है। गोयल ने कहा, ‘‘भारत को उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुओं व सेवाओं का विनिर्माता बनने की आकांक्षा रखनी होगी और इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलनी चाहिए।’’ औषधि उद्योग का उदाहरण देते हुए मंत्री ने बड़े उद्योगपतियों से इस क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों का सहयोग करने को कहा। मंत्री ने उद्योग से बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) समितियों में हिस्सा लेने का भी आग्रह किया।   recent visitors 69

साउथ इंडियन बैंक का वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़कर 325 करोड़ रुपये हो गया

नई दिल्ली  साउथ इंडियन बैंक का चालू वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़कर 325 करोड़ रुपये हो गया। निजी क्षेत्र के बैंक का गत वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुनाफा 275 करोड़ रुपये रहा था। साउथ इंडियन बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया, समीक्षाधीन तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 2,804 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2,485 करोड़ रुपये थी। दूसरी तिमाही में बैंक ने 2,355 करोड़ रुपये की ब्याज आय अर्जित की, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में यह 2,129 करोड़ रुपये थी। बैंक सितंबर 2024 के अंत तक सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को सकल ऋण के 4.40 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम रहा, जो सितंबर 2023 के अंत में 4.96 प्रतिशत था। इसी तरह, शुद्ध एनपीए या डूबा कर्ज पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत में 1.70 प्रतिशत से घटकर 1.31 प्रतिशत हो गया।   recent visitors 51

कार्यालय स्थल की पट्टा मांग के इस कैलेंडर वर्ष में आठ करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावना

नई दिल्ली  देश के शीर्ष आठ शहरों में कार्यालय स्थल की पट्टा मांग के इस कैलेंडर वर्ष में आठ करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावना है, जो 2023 में रिकॉर्ड 7.45 करोड़ वर्ग फुट को पार कर गई थी। रियल एस्टेट परामर्शदाता कुशमैन एंड वेकफील्ड ने  इस कैलेंडर वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए कार्यालय बाजार पर अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में शीर्ष आठ शहरों में कार्यालय स्थान की पट्टा मांग 66 प्रतिशत बढ़कर 2.48 करोड़ वर्ग फुट हो गई, जो इस क्षेत्र की किसी भी तिमाही में अभी तक की दूसरी सबसे अधिक मांग है। जनवरी-सितंबर में सकल पट्टा मांग 6.67 करोड़ वर्ग फुट रही। कुशमैन एंड वेकफील्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण पूर्व एशिया तथा एपीएसी किरायेदार प्रतिनिधित्व) अंशुल जैन ने कहा, ‘‘मजबूत बाजार बुनियादी ढांचे ने भारतीय कार्यालय बाजार में असाधारण पट्टे की गति को बनाए रखा है, जैसा कि शीर्ष आठ बाजारों की स्थिति से स्पष्ट है..’’ कुशमैन एंड वेकफील्ड के प्रबंध निदेशक (किरायेदार प्रतिनिधित्व) वीरा बाबू ने कहा, ‘‘सकल पट्टा मांग पहले ही 6.6 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो चुकी है, हम 2023 में दर्ज कुल मांग के करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।’’ रिपोर्ट के लिए जिन आठ शीर्ष शहरों के बाजारों पर गौर किया गया, वह दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद हैं।     recent visitors 77

BCCI हरमनप्रीत कौर को हटाने की तैयारी में ? टीम इंडिया की हार समेत सामने आई 5 बड़ी वजह

मुंबई महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 में टीम इंडिया का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. इस टूर्नामेंट को जीतने का प्रबल दावेदार मानी जा रही थी. लेकिन भारतीय टीम नॉक स्टेज तक भी नहीं पहुंच पाई और ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई. अब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई जल्द ही हेड कोच अमोल मजूमदार के साथ मीटिंग करके हरमनप्रीत को कप्तानी से हटा सकती है. इसके अलावा टीम इंडिया की पूर्व कप्तान मिताली राज ने भी आलोचना करते हुए कहा है कि पिछले 2 से 3 साल में टीम में कोई ग्रोथ देखने नहीं मिला है. उन्होंने भी नए कप्तान की मांग की है. न्यूजीलैंड सीरीज से पहले तय होगी किस्मत भारतीय महिला टीम को 24 अक्टूबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले बीसीसीआई टीम इंडिया के हेड कोच अमोल मजूमदार के साथ मीटिंग कर सकती है. इस दौरान हरमनप्रीत के भविष्य का फैसला किया जाएगा. 2025 के वनडे वर्ल्ड कप से पहले बीसीसीआई अब उन्हें हटाकर नया कप्तान लाना चाहती है. बता दें भारतीय महिला टीम 2016 में टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी थी. इसके बाद हरमनप्रीत कौर को टी20 टीम की कप्तानी सौंपी गई थी. उनकी कप्तानी में टीम इंडिया नॉक आउट स्टेज तक जाती रही. 2020 के एडिशन में तो फाइनल में पहुंच गई थी. हालांकि, कभी भी टूर्नामेंट को जीतने में कामयाब नहीं हो सकी. हरमनप्रीत को क्यों हटाना चाहती है BCCI? हरमनप्रीत कौर को कप्तानी से हटाने के पीछे कुछ वजहें सामने निकलकर आई है. सबसे बड़ी वजह तो यही है कि इस बार भारतीय टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकी, जबकि स्क्वॉड काफी मजबूत था. वहीं टीम को टी20 वर्ल्ड कप जीतने प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था. लेकिन पहले न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया से हारकर सेमीफाइनल का सपना चकनाचूर हो गया. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम इंडिया का फिटनेस और फील्डिंग भी बहुत बड़ी समस्या रही है. टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 कैच ड्रॉप किए थे. वहीं कुछ मौके ऐसे थे जिन्हें कैच में बदला जा सकता था. टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने भी टीम के फिटनेस को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि 11 में से सिर्फ 2 फिट खिलाड़ियों के दम पर बड़े टूर्नामेंट्स नहीं जीते सकते हैं. उनके मुताबिक जेमिमा रोड्रिग्स और राधा यादव के अलावा दूसरी खिलाड़ी फील्ड पर तेज नहीं हैं. हरमनप्रीत के रहते हुए नए खिलाड़ियों को मौका नहीं देने पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मिताली के मुताबिक पिछले कुछ सालों से टीम में कोई ग्रोथ नहीं हुआ है. लगातार पुराने खिलाड़ी ही खेलते आ रहे हैं. मिताली ने मेंस टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि हर बड़े टूर्नामेंट के बाद नए खिलाड़ियों मौका देने की वजह से वह ज्यादा सफल हैं. जबकि हरमनप्रीत की कप्तानी में नए खिलाड़ी नहीं तैयार हो सके हैं. वहीं बड़े टूर्नामेंट्स से पहले टीम मैनेजमेंट की प्लानिंग भी ठीक नहीं रही है. यूएई में जारी टी20 वर्ल्ड कप के लिए एशिया कप तैयारी एक बड़ा मौका था. लेकिन भारतीय टीम सिर्फ उसी टूर्नामेंट को जीतने के लिहाज से खेलती रही. जब यूएई में टूर्नामेंट शुरू हो तो नंबर 3 और नंबर 4 के पोजिशन पर बल्लेबाजी को लेकर कन्फ्यूजन देखने को मिला.   recent visitors 108

समाज सेवा, सुरक्षा, वीरता एवं साहसिक कार्यों के लिये पुरस्कार के आवेदन आमंत्रित

भोपाल महिला, बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों के क्षेत्र में समाज सेवा, सुरक्षा, वीरता एवं साहसिक कार्यों के लिये व्यक्तिगत/संस्थागत श्रेणी में 6 राज्य एवं जिला स्तरीय पुरस्कार दिये जाते हैं। वर्ष 2024 के लिये आवेदन आमंत्रित किये गये हैं। आवेदन का प्रारूप विभागीय वेबसाइट https://mpwcdmis.gov.in/ पर उपलब्ध है। आवेदन जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास कार्यालय में निर्धारित अंतिम तिथि के पहले जमा किया जा सकता है। रानी अवंतीबाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार महिला और बच्चों को उत्पीड़न से बचाने, उनके पुनर्वास में योगदान, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरितियों को रोकने का साहसिक कार्य करने वाली मध्यप्रदेश की महिला/बालिका को रानी अवंतीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। इस पुरस्कार के लिये आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 नवम्बर 2024 निर्धारित है। इन पुरस्कारों के नाम की घोषणा फरवरी माह में की जाएगी, 8 मार्च महिला दिवस पर इन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार महिलाओं से संबंधित समाज सुधार (स्वास्थ्य, शिक्षा, साक्षरता, पर्यावरण स्थिति में सुधार, आर्थिक गतिविधियों के संचालन, अधिकारों के प्रति जागृति, सामाजिक उत्थान) के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रमाणित कार्य करने वाली मध्यप्रदेश की महिलाओं को राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। विष्णु कुमार समाज सेवा पुरस्कार महिलाओं से संबंधित समाज सुधार (स्वास्थ्य, शिक्षा, साक्षरता, पर्यावरण स्थिति में सुधार, आर्थिक गतिविधियों के संचालन, अधिकारों के प्रति जागृति, सामाजिक उत्थान) के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं प्रमाणित कार्य किया हो, ऐसे व्यक्ति/संस्था को विष्णु कुमार समाज सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार ऐसी घटना जिसमें किसी महिला द्वारा आपराधिक या असामाजिक तत्वों के विरूद्ध साहस का प्रदर्शन कर स्वयं का अथवा अन्य किसी महिला की सुरक्षा एवं बचाव के लिये अवर्णनीय साहसिक कार्य किया हो, को मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। आवेदक द्वारा यह साहसिक कार्य एक जनवरी से 31 दिसम्बर 2024 के बीच किया गया हो। राज्य स्तर पर चयनित किन्ही 2 महिला व 2 पुरूषों को एक लाख रूपये से सम्मानित किया जायेगा। जिला स्तर पर 50 हजार रूपये की राशि, प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाता है। अरूणा शानबाग साहस पुरस्कार यह पुरूस्कार उस घटना के लिये जिसमें किसी महिला द्वारा किसी भी हिंसा में स्वयं या किसी अन्य के बचाव के लिये वीरतापूर्वक कार्य किया गया हो, को अरूणा शानबाग साहस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। आवेदक द्वारा यह कार्यएक जनवरी से 31 दिसम्बर 2024 के बीच किया गया हो। यह पुरस्कार राज्य स्तर पर चयनित किसी एक महिला को दिया जायेगा, जिसमें एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जायेगा। राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार आपराधिक और असामाजिक तत्वों के विरूद्ध साहस का प्रदर्शन करते हुए स्वयं या किसी अन्य महिला का बचाव करने वाली महिला अथवा महिलाओं का बचाव करने वाले पुरूषों को भी सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार में एक लाख रूपये की राशि, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।   recent visitors 114

उत्तर प्रदेश में नये अध्यादेश में खाने पीने की चीजों में थूक मिलाना गैर-जमानती अपराध माना जाएगा

लखनऊ सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल है, जिसके बारे में सुन पाना भी मुश्किल हो रहा है. सड़क किनारे की दुकानों पर खाने की चीजों में थूक लगाने की खबरें तो अक्सर आती रही हैं, लेकिन इस बार घर में काम करने वाली एक मेड की करतूत सामने आई है. मेड आटा गूंथने के लिए पानी की जगह पेशाब का इस्तेमाल कर रही थी. और उसकी करतूत तब मालूम हो सकी जब घरवालों ने खाना बनाने के वक्त चुपके उसका वीडियो बना लिया. गाजियाबाद के इस मामले में आरोपी मेड को गिरफ्तार कर लिया गया है. बताते हैं कि वो मेड परिवार में पिछले 8 साल से काम कर रही थी. उन लोगों को शक तब हुआ जब परिवार के लोग कुछ महीनों से गंभीर रूप से बीमार होने लगे. परिवार के लोग पेट और लीवर की बीमारियों से जूझ रहे थे. पहले तो सामान्य इन्फेक्शन समझकर इलाज चला, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो शक गहराने लगा – और पीछे लगने पर पूरी कहानी सामने आई. जुलाई, 2024 की ही बात है, कांवड़ यात्रा के रास्ते में आने वाली दुकानों के बाहर स्थानीय पुलिस ने मालिकों को नाम लिखने को कहा तो बवाल मच गया. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, और उस पर रोक लगा दी गई – अब खबर आई है कि यूपी सरकार ऐसे मामलों को रोकने के लिए नया अध्यादेश लाने जा रही है. खाने पीने की चीजों में थूक मिलाना गैर-जमानती अपराध होगा खाने-पीने की चीजों में थूक मिलाने की घटना को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी काफी गंभीरता से लिया है – और ऐसे मामलों में डीजीपी को सख्ती से पेश आने का आदेश दिया है. पुष्कर सिंह धामी ने कहते हैं, 'इस तरह के किसी दुष्कृत्य के लिए उत्तराखंड में कोई स्थान नहीं है… ऐसी घटनाओं से न सिर्फ खाद्य पदार्थ दूषित होते हैं, भावनाएं भी आहत होती हैं… इस तरह की घटनाओं पर हम कठोर कार्रवाई करेंगे.' उत्तराखंड सरकार की तरफ से सभी जिलों में पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि होटल, ढाबा और बाकी संस्थानों में काम करने वालों का शत-प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित किया जाये, और सीसीटीवी लगाने के साथ ही खुफिया जानकारी इकट्ठा की जाये. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो थूक या कोई भी ह्यूमन वेस्ट मिलाये जाने को लेकर अध्यादेश लाने की तैयारी कर रहे हैं. इस सिलसिले में दो अध्यादेश – 'छद्म एवं सौहार्द विरोधी क्रियाकलाप निवारण एवं थूक प्रतिषेध अध्यादेश 2024' और 'यूपी प्रिवेंशन ऑफ कॉन्टेमिनेशन इन फूड (कंज्यूमर राइट टू नो) अध्यादेश 2024' लाये जाने हैं. अध्यादेशों के जरिये थूककर खाना खिलाना गैर-जमानती अपराध तो होगा ही, अपराध के लिए सजा के कड़े प्रावधान भी किये जाएंगे. साथ ही, अध्यादेश आ जाने के बाद सभी को अपने खाने के बारे में पूरी जानकारी लेने का अधिकार होगा. दोनो अध्यादेश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. खाना कहां बन रहा है? कौन बना रहा है? और खाना कैसा है? अध्यादेश में उपभोक्ता को खाद्य पदार्थों के बारे में ,सब कुछ जानने का करीब करीब वैसे ही अधिकार मिलेगा, जैसे RTI में सूचना को लेकर मिला हुआ है. खाने में थूक-पेशाब मिलाने वाले सायकोपैथ नहीं तो क्या हैं? जरा सोचिये, वो मेड उस परिवार में 8 साल से काम कर रही थी. पहले और भी घरों में काम कर चुकी होगी. मालूम नहीं पेशाब मिलाकर खाना बनाने का काम उसी परिवार में कर रही थी, जहां पकड़ी गई या बाकी जगह भी कर चुकी है, ये सब तो पुलिस की जांच-पड़ताल से ही सामने आएगा – और ये भी मालूम हो सकेगा कि ये काम वो कुछ ही दिनों से कर रही थी, या शुरू से ही ऐसा करती आ रही थी? आखिर कैसे होते हैं ये लोग. कैसी होती है इनके दिमाग की बनावट. ऐसे ख्याल इनके मन में आते क्यों हैं? कई मामलों में अपराधियों को सायकोपैथ माना जाता है, जो मजे लेने के लिए अपराध को अंजाम देते हैं. अपनी करतूत में उनको मजा आता है – खाने को लेकर ऐसी करतूत तो इसमें शामिल लोगों के भी सायकोपैथ होने की तरफ ही इशारा कर रही है. ये कितनी गंभीर बात है कि जहां लोग लहसुन प्याज के इस्तेमाल से परहेज करते हों, वहां खाने में थूक और पेशाब मिलाये जाने से रोकने के लिए सरकार को कानून बनाना पड़े – भला इससे बड़े शर्म की बात क्या होगी.   recent visitors 75