रायपुर में भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारियां तेज की, जातीय संतुलन पर दिया जोर

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने अपनी पूरी ताकत अब निकाय और पंचायत चुनावों में झोंकने की तैयारी कर ली है। प्रदेश भाजपा संगठन में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिसके तहत पहले चरण में बूथ कमेटियों का गठन किया जाएगा। इसके बाद मंडल और जिला अध्यक्षों का चुनाव होगा, जिसमें जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी। 405 मंडलों में होंगे चुनाव, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कवायद एक से 15 दिसंबर के बीच प्रदेश के 405 मंडलों में मंडल अध्यक्षों का चुनाव होगा, जबकि 15 से 30 दिसंबर के बीच जिला अध्यक्षों का चयन किया जाएगा। संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि इस प्रक्रिया में न केवल अध्यक्ष बल्कि प्रतिनिधियों का भी चुनाव किया जाएगा। खासतौर पर नाराज कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ने और उनकी समस्याओं का समाधान करने पर जोर दिया जाएगा। जातीय समीकरणों पर फोकस रहेगा ताकि विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन कायम किया जा सके और निकाय चुनावों में किसी भी प्रकार की असंतोष की स्थिति से बचा जा सके। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है: निकाय और पंचायत चुनावों में भी जीत का परचम लहराना है। सदस्यता अभियान में रिकॉर्ड वृद्धि भाजपा ने अपने हालिया सदस्यता अभियान में 53 लाख नए सदस्य जोड़ने का दावा किया है। अब 30 नवंबर तक बूथ कमेटियों का चुनाव पूरा करने की तैयारी है। पार्टी नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें तेज कर दी हैं, ताकि चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके। कांग्रेस भी बदलाव की तैयारी में रायपुर दक्षिण उपचुनाव में हार के बाद कांग्रेस में भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी अब समीक्षा से आगे बढ़कर बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। दिल्ली से आने वाली सूची का इंतजार है, जिसमें संगठनात्मक फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। उपचुनाव में हार ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया है कि वह जमीनी स्तर पर रणनीति को नए सिरे से तैयार करे। भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला निकाय और पंचायत चुनावों में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां भाजपा जीत के लिए जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी हार से सबक लेकर रणनीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। आने वाले चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि जनता का भरोसा किस दल पर कायम रहता है। recent visitors 66

ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत, सुप्रीम कोर्ट में करेगी अपील

जालंधर पंजाब के कपूरथला जिले के बुधो पुंदेर गांव की वक्फ बोर्ड जमीन मामले में ग्राम पंचायत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत है। अब ग्राम पंचायत इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के दावे को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि यह भूमि मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया (मुसलमानों के सामान्य उपयोग के लिए भूमि) के लिए दान की गई थी, और बाद में 1971 में वक्फ बोर्ड को सौंप दी गई थी। न्यायालय ने इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया और ग्राम पंचायत की दलीलों को खारिज कर दिया। ग्राम पंचायत के सदस्य रेशम सिंह ने कहा कि इस भूमि पर पिछले 40-50 सालों से गांव के लोग खेती कर रहे हैं और उन्होंने इस भूमि पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि इसे जमींदारों ने वक्फ बोर्ड से छुड़वाया था। रेशम सिंह ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति और मस्जिद मुसलमानों की है, लेकिन भूमि पर जो कब्जा है, वह जमींदारों ने जानबूझकर किया हुआ है। इस पर उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। ग्राम पंचायत के सरपंच कुलवंत सिंह ने भी इस फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गांव में स्थित मस्जिद और गुरुद्वारा दोनों ही खुले हैं, लेकिन मस्जिद में आज तक कोई व्यक्ति नहीं आया है। वहीं, गुरुद्वारे में संगत दर्शन के लिए आती है। सरपंच ने बताया कि यह भूमि करीब 16 से 17 एकड़ में फैली हुई है, और इस पर पिछले 15-20 सालों से मुकदमा चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जमीन नगर पंचायत की है और उसी की रहेगी। सरपंच ने बताया कि मस्जिद 1947 से पहले बनी हुई थी, जबकि गुरुद्वारा मस्जिद की जगह पर नहीं, बल्कि उससे अलग एक एकड़ में बनाया गया है। इस मामले में न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। ग्राम पंचायत ने वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत गठित न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें वक्फ बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। पंचायत ने तर्क दिया था कि पंजाब अधिनियम, 1953 के तहत इस संपत्ति पर उनका अधिकार बनता है, जो वक्फ अधिनियम, 1995 से प्राथमिकता रखता है। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और माना कि यह मामला भूमि के वर्गीकरण का है, न कि विभिन्न कानूनों की प्राथमिकता का। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक अभिलेखों में इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और इसे मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया के रूप में पहचान दी गई है। खंडपीठ ने वक्फ अधिनियम के तहत इस भूमि के स्वामित्व का निर्धारण किया और कहा कि यह भूमि धार्मिक उद्देश्यों के लिए है, न कि निजी इस्तेमाल के लिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि पंजाब अधिनियम, 1953 की संवैधानिक सुरक्षा, वक्फ अधिनियम के प्रावधानों पर प्रभाव नहीं डालती है।   recent visitors 117

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जर्मनी के दौरे का दूसरा दिन

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान, प्रदेश में निवेश और उद्योगों के लिए संभावनाओं की तलाश करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री 29 नवंबर की शाम म्यूनिख से सड़क मार्ग द्वारा स्टटगार्ट के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री यहां लैप ग्रुप फैसिलिटी के आंद्रियास लैप, मैथियास लैप, हुबर्टस ब्रेयर के साथ लैप स्टटगार्ट फैक्ट्री का दौरा करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर राउंड टेबल बैठक में चुनिंदा उद्योग समूहों के सीईओ से चर्चा करेंगे। दोपहर के भोजन के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्टटगार्ट के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय का दौरा करेंगे। उल्लेखनीय है कि स्टटगार्ट का प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय जर्मनी के सबसे बड़े प्राकृतिक इतिहास संग्रहालयों में से एक है, जिसमें जीवाश्म, विशेष रूप से डायनासोर और क्षेत्र में पाए गए प्राचीन जीवों के अवशेष संरक्षित हैं। संग्रहलाय के अवलोकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव फ्रैंकफर्ट के लिए प्रस्थान करेंगे। डॉ. यादव एयर इंडिया की फ्लाइट से फ्रैंकफर्ट से नई दिल्ली के लिए रवाना होगे।   recent visitors 63

स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया, फायर एनओसी नहीं, सिलेंडर के भरोसे चल रहा अस्पताल

इटावा उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक दर्जन नवजात बच्चों की मौत के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। सभी जिलों में फायर डिपार्टमेंट को स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सरकारी और गैर सरकारी संस्थान में निरीक्षण व जांच करने के भी निर्देश मिले हैं। इटावा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में अग्निशमन के नाम पर महज फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) के सहारे सारी व्यवस्था चल रही है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और दमकल विभाग ने जिला अस्पताल का निरीक्षण भी किया था। जिला अस्पताल में फायर संबंधित उपकरण लगाने के लिए पहले ही शासन से तीन करोड़ के बजट की स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें करीब सवा करोड़ की राशि स्वीकृत भी हो गई है। लेकिन कार्यदायी संस्था इसका काम कब शुरू करेगी, इसको लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। करीब 29 वर्षों से संचालित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय के पास फायर एनओसी नहीं हैं, जबकि यहां प्रतिदिन तीन से पांच हजार मरीजों का आना जाना रहता है। झांसी में हुए अस्पताल में हादसे के बावजूद जिला अस्पताल में मानक के तहत अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। आग से सुरक्षित रहने के लिए जिला चिकित्सालय सिर्फ फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) पर ही निर्भर है। जिला अस्पताल में मानक के तहत अग्निशमन यंत्र लगाने और फायर एनओसी लेने के लिए शासन से करीब तीन करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। इसमें से 124 लाख रुपये कार्यदायी संस्था को स्थानांतरित भी कर दिए गए हैं। लेकिन कार्यदायी साथ यूपीसीएल ने अब तक कोई कार्य शुरू नहीं किया है। जिला अस्पताल में वाटर टैंक, हाइड्रेंट प्वाइंट, ऑटोमेटिक मशीन, अलार्म सिस्टम, स्मोक सिस्टम आदि मशीन लगवाई जानी है। संयुक्त जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि अस्पताल में फायर सिस्टम के लिए शासन ने यूपीसीएल को कार्य दिया है। इस कार्य के लिए करीब तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। सीएमएस ने बताया कि झांसी की घटना से एक सप्ताह पहले ही शासन ने कार्यदायी संस्था को 124 लाख का बजट स्थानांतरित कर दिया है। अग्निशमन यंत्र लगाए जाने के लिए कार्यदाई संस्था को पत्र भी लिखा जा चुका हैं। फिलहाल हमारे अस्पताल में जितने फायर एक्सटिंगविशर (सिलेंडर) होना चाहिए, उससे अधिक मात्रा में लगे हुए है। उन्होंने बताया एसएनसीयू वार्ड के अलावा जिला अस्पताल में संवेदनशील वार्ड और जरूरत वाले स्थानों पर 15 नए अग्निशामन यंत्रों को लगाया गया है। आने वाले समय में इन अग्निशामक यंत्रों को और लगवाया जाएगा।   recent visitors 60

रिकी पोंटिंग का मानना है कि भारतीय टीम विदेशी विकेटों और परिस्थितियों में घरेलू मैदान से बेहतर खेलती है

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग का मानना है कि भारतीय टीम विदेशी विकेटों और परिस्थितियों में घरेलू मैदान से बेहतर खेलती है। यह टिप्पणी भारत द्वारा पर्थ में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 295 रनों से हराने के बाद आई है। पहली पारी में पहले बल्लेबाजी करने के अपने फैसले का फायदा उठाने में विफल रहने के बाद, जसप्रीत बुमराह की अगुवाई वाली टीम ने दूसरी पारी में शीर्ष तीन बल्लेबाजों – यशस्वी जसवाल (161), केएल राहुल (77) और विराट कोहली (नाबाद 100) के दमदार बल्लेबाजी प्रदर्शन के साथ वापसी की। मेहमान टीम ने मैच जीतने के लिए ऑस्ट्रेलिया के सामने 534 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा, जिसे वे हासिल करने में विफल रहे और भारतीय तेज गेंदबाजों के सामने ढेर हो गए। बुमराह ने मैच में आठ विकेट लिए, जबकि मोहम्मद सिराज और हर्षित राणा ने क्रमशः पांच और चार विकेट लिए। “ऑस्ट्रेलिया किस अंतर से हारा? लगभग 300 रन से। इसलिए, वे बहुत निराश होंगे। जब भारत ने टॉस जीता तो पहले दिन सभी ने मुझसे बल्लेबाजी करने के बारे में पूछा, और मैंने कहा, नहीं, बिल्कुल, आपको वहां पहले बल्लेबाजी करनी होगी। वहां चार टेस्ट मैच खेले गए हैं। पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने चारों बार जीत हासिल की है। आप आंकड़ों के विपरीत नहीं जाना चाहते। हालाँकि वे 150 रन पर आउट हो गए, फिर भी उन्हें उस विकेट पर गेंदबाजी करने का मौका मिला, जिस पर गेंदबाजी करना शायद सबसे अच्छा था। और उन परिस्थितियों में बुमराह, और सिराज, और वास्तव में वे तीनों। और नीतिश रेड्डी। वे सभी बहुत अच्छे हैं। इसलिए, आपको उन्हें श्रेय देना होगा। स्टार स्पोर्ट्स पर पोंटिंग ने कहा, “मुझे स्वीकार करना चाहिए, मुझे नहीं लगता था कि वे पहला टेस्ट जीत सकते हैं, भारत, पर्थ में जाकर ऐसी परिस्थितियों में जो उनके लिए बहुत विदेशी हैं। लेकिन मैंने टेस्ट मैच में जाने से पहले एक बात भी कही कि मुझे वास्तव में लगता है कि भारत अब घर से बाहर एक बेहतर टीम है, जितना कि वे अपने घर पर खेलते हैं। मुझे लगता है कि वे विदेशी विकेटों और परिस्थितियों में बेहतर खेलते हैं, जितना कि वे अपने घर पर खेलते हैं। और मुझे लगता है कि पिछले हफ़्ते पर्थ में यह साबित हो गया है।” ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज़ मिशेल स्टार्क ने ऑस्ट्रेलिया के अपने पहले रेड-बॉल मैच में दूसरी पारी में मैराथन पारी के लिए भारतीय बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल की प्रशंसा की। स्टार्क ने कहा, “वह अपना पहला मैच नहीं खेल रहा है, इसलिए जाहिर तौर पर उसके बारे में थोड़ी हाइप रही है, और वह निश्चित रूप से बहुत कुशल है। मुझे लगता है कि हमने इस हफ़्ते दूसरी पारी में यह देखा। वह भारत में एक बहुत बड़ी प्रतिभा है, और वह उनके लिए बहुत क्रिकेट खेलने जा रहा है। पहली पारी में उसे सस्ते में आउट करना अच्छा था, लेकिन उसने निश्चित रूप से दूसरी पारी में अपनी भरपाई की।” भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टेस्ट एडिलेड में गुलाबी गेंद से खेला जाएगा, जो 6 दिसंबर से शुरू होगा।   recent visitors 78

देश में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की जीत से तेजी से बढ़ेंगे आर्थिक सुधार!

मुंबई हाल के विधानसभा चुनावों में जीत से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। इससे स्थिरता के साथ देश में आर्थिक सुधारों में तेजी आएगी। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। पीएल कैपिटल – प्रभुदास लीलाधर की रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में हाल के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ एनडीए की स्थिति को मजबूत किया है। इससे देश में सभी क्षेत्रों में प्रमुख सुधारों की दिशा में नीतिगत निरंतरता में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की भारी जीत के साथ 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचने की राज्य की महत्वाकांक्षा को एक बड़ा बल मिला है। इस साल अगस्त में 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार करने वाला महाराष्ट्र का पहला राज्य था, जो दिखाता है कि राज्य तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि भारत में आने वाले समय में खाद्य महंगाई दर में गिरावट आएगी। इसके साथ ही अच्छे मानसून, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने और इनपुट की पर्याप्त आपूर्ति का फायदा कृषि क्षेत्र को मिल सकता है। मांग की परिस्थितियां मिश्रित बनी हुई हैं। हालांकि, कम बेस और अच्छे मानसून के कारण ग्रामीण मांग में उछाल देखने को मिल रहा है। अब सारी उम्मीदें त्योहारी और शादियों के सीजन में होने वाली मांग में बढ़ोतरी पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वैश्विक स्तर पर युद्धों में कमी आने की उम्मीद है। कच्चे तेल की कीमत स्थिर रहेंगी और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत हैं। आगे कहा गया कि सरकार का पूंजीगत खर्च आने वाले समय में बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि दूसरी तिमाही में पूंजीगत खर्च सकारात्मक रहा था। recent visitors 84

मालवा की गंगा शिप्रा में दूषित पानी मिलने से बचाने अब 919 करोड़ रुपये की दूसरी योजना पर काम

उज्जैन  प्रदूषित कान्ह नदी का पानी उज्जैन आकर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में मिल रहा है। फिलहाल ये मिलन रोकने को कोई प्रबंध नहीं है। वर्ष 2016 में 95 करोड़ रुपये खर्च कर एक प्रबंध किया था मगर वो सफल न हो सका। नतीजतन, अब 919 करोड़ रुपये की दूसरी योजना पर काम चल रहा है जो 2027 में पूरी होगी। यानी तब तक शिप्रा में गंदा पानी मिलता रहेगा। मालूम हो कि देश के सबसे स्वच्छ पड़ोसी शहर इंदौर का सीवेज युक्त पानी कान्ह नदी के रूप में उज्जैन आकर शिप्रा नदी में मिलता है। 95 करोड़ रुपये हुए थे खर्च इससे शिप्रा का स्वच्छ जल भी प्रदूषित होता है। ये मिलन रोकने को प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 में 95 करोड़ रुपये खर्च कर कान्ह का रास्ता पाइपलाइन के माध्यम से बदलने का काम किया था। योजना स्वरूप नहान क्षेत्र (त्रिवेणी घाट से कालियादेह महल तक) को स्वच्छ रखने के लिए पिपल्याराघौ से कालियादेह महल के आगे तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाई थी। योजना को बनाते समय दूरदर्शी दृष्टिकोण न अपनाया और नतीजा ये निकला कि परियोजना पूरी होने के बाद भी शिप्रा के नहान क्षेत्र में भी प्रदूषित पानी नहीं मिलता रहा और अब भी मिल रहा है। इधर, उज्जैन शहर में 438 करोड़ रुपये की भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन परियोजना का काम भी समय-सीमा गुजरने के पांच साल बाद भी अधूरा है। जन भावनाओं और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर इन सब स्थितियों का असर जन भावना और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बहरहाल, अब 919 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का काम शुरू कराया है। योजना अंतर्गत त्रिवेणी घाट के समीप जमालपुरा गांव में स्टापडैम बनाकर कान्ह का पानी रोका जाएगा। यहां से कान्ह का पानी 30.15 किलोमीटर दूर गंभीर नदी पर बने बांध के डाउन स्ट्रीम क्षेत्र के सिंगवाड़ा गांव में प्रवाहित गंभीर नदी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए 12 किलोमीटर हिस्से में 5.30 मीटर व्यास की टनल बनाई जाएगी। योजना पूरी होने पर गंभीर में मिलेगा कान्ह का पानी 18.5 मीटर लंबी डी आकर की आरसीसी बाक्सनुमा पाइपलाइन बिछाई जाएगी। प्रारंभिक और अंतिम छोर पर 140-140 मीटर की ओपन चैनल बनाई जाएगी। योजना के पूरा होने पर कान्ह का पानी गंभीर नदी में आकर मिलेगा। यह पानी सिंगवाड़ा से असलोदा, तुम्बावड़ा, सुर्जखेड़ी, गुधा, रूपाखेड़ी, कनार्वद, सर्वाना उन्हेल होकर बरखेड़ा मदन गांव में मेलेश्वर महादेव मंदिर के समीप शिप्रा नदी में जाकर मिलेगा। परियोजना, का निर्माण वर्ष 2052 के समय की इंदौर, सांवेर की आबादी और 40 क्यूमेक जल उद्वदित क्षमता को ध्यान में रखकर किया है। ये महाकुंभ सिंहस्थ 2028 और उसके बाद के सिंहस्थ में बहुत उपयोगी साबित होगी। शिप्रा नदी शुद्ध नहीं हो सकी शिप्रा नदी को स्वच्छ एवं प्रवाहमान बनाने के लिए बीते एक दशक में प्रदेश सरकार एक हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, बावजूद शिप्रा नदी शुद्ध न हो सकी है। अगले तीन वर्ष में दो हजार करोड़ रुपये और खर्च करने की तैयारी है। दावा है कि ये काम होने पर शिप्रा में सीधे नालों का पानी मिलना बंद हो जाएगा और शिप्रा में वर्षभर शिप्रा का ही जल भरा रहा। recent visitors 98