देर रात बीजेपी का सिंधिया पर पलटवार दिया जवाब, सिंधिया ने कहा था कि-मुझे विजयपुर में प्रचार करने को नहीं कहा

Late night BJP retaliated against Scindia, Scindia had said that- I was not asked to campaign in Vijaypur भोपाल । मध्यप्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में हार को लेकर बीजेपी में मंथन चल रहा है। चुनाव प्रचार में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की गैर मौजूदगी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सिंधिया ने इस पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि उन्हें विजयपुर में प्रचार के लिए बुलाया ही नहीं गया। शुक्रवार को जब सिंधिया ग्वालियर पहुंचे तो उन्होंने विजयपुर उपचुनाव में वन मंत्री रामनिवास रावत की हार पर कहा- हमें चिंतन करना होगा। यह हार चिंता की बात है। यदि मुझसे वहां प्रचार का कहा होता, तो मैं जरूर जाता। मैं जनता का सेवक हूं। सिंधिया के इस बयान के बाद शनिवार देर रात बीजेपी संगठन का जवाब आया। पार्टी के प्रदेश महामंत्री और विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा- विजयपुर के स्टार प्रचारकों की सूची में सिंधिया का नाम था। सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री ने उन्हें विजयपुर में आने के लिए आग्रह किया था। सिंधिया ने अपनी व्यस्तता के चलते नहीं आ पाने की बात कही थी। ऐसा नहीं है कि उनको नहीं बुलाया गया था। उनको आमंत्रित किया गया था। कांग्रेस का तंज- आ भी जाते तो फर्क नहीं पड़ता मामले को लेकर कांग्रेस ने सिंधिया पर तंज कसा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कोई शादी होती तो पीले चावल दिए जाते। सिंधिया को पार्टी ने केंद्रीय मंत्री बनाया है, उन्हें प्रचार के लिए जाना चाहिए था। वैसे विजयपुर कांग्रेस की परंपरागत सीट है, किसी के जाने या नहीं जाने से फर्क नहीं पड़ता। सिंधिया चले भी जाते तो नतीजे नहीं बदलते। recent visitors 287

मध्यप्रदेश में अब पुलिस सिर्फ राज्यपाल को ही देगी सलामी, सीएम-मंत्रियों को नहीं

भोपाल मध्यप्रदेश में अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही परंपरा को खत्म करते हुए बड़ा फैसला लिया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पुलिस विभाग के जरिए दी जाने वाली सलामी परेड को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है। पुलिस विभाग(MP Police) द्वारा जारी आदेश में लिखा गया है की, ‘सलामी अंग्रेजों की याद दिलाती है।’ बता दें कि पुलिस विभाग द्वारा जारी इस आदेश का कड़ाई से पालन करवाने के लिए भी फरमान जारी कर दिया गया है। खत्म हुई पुरानी परंपरा मध्य प्रदेश(MP Police) में लंबे समय से पुलिस प्रदेश के सीएम और मंत्रियों के लिए सलामी परेड(MP Police will not Salute CM) करती आ रही थी। अब इस व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। विशेष पुलिस महानिदेशक शैलेश सिंह की ओर से कहा गया है कि सलामी खत्म करने को लेकर जारी हुए इस आदेश का पूरी कड़ाई के साथ पालन कराया जाएगा। क्योंकि इसके तहत पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी पर खास प्रभाग पड़ता है। उन्होंने कहा कि, सलामी प्रथा से अंग्रेजों की याद आती है। इस तरह सलामी लेना असंवैधानिक है, जो उपनिवेशवाद को दर्शाता है। पुलिस विभाग एक अनुशासित विभाग है। इस विभाग में आदेश का उल्लंघन करना गलत प्रभाव डालता है। सिर्फ राज्यपाल को दी जाएगी सलामी बता दें कि जारी आदेश में सलामी परेड की व्यवस्था को सिर्फ सीएम और मंत्रियों के लिए खत्म कर किया गया है। वहीँ प्रदेश के राज्यपाल के लिए यह परंपरा पहले की तरह ही चलती रहेगी। recent visitors 61

इंदौर में एयरपोर्ट पर जनवरी से शुरू होगा मेट्रो ट्रैक का अंडरग्राउंड काम, 7 मेट्रो स्टेशन और टनल भी बनेगी

इंदौर  एमजी रोड पर मॉल के पास से देवी अहिल्या एयरपोर्ट तक अंडरग्राउंड मेट्रो ट्रैक रूट बनाने के लिए टेंडर जारी हुआ, जिस पर दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक फैसला होगा और फिर आधुनिक मशीनों से फरवरी 2025 तक काम भी शुरू करा दिया जाएगा।  साढ़े चार साल में काम पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन सिंहस्थ 2028 के पहले एयरपोर्ट पर पहले अंडरग्राउंड स्टेशन का काम पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।इसके पहले मेट्रो एलिवेटेड कॉरिडोर शुरू हो जाएगा और एयरपोर्ट पर अंडरग्राउंड स्टेशन बनने से बाहरी यात्रियों को यहीं से उज्जैन की यात्रा करने की सुविधा मिल जाएगी। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जो टेंडर जारी किया है उसमें छह कंपनियों ने रुचि दिखाई है। अंडरग्राउंड ट्रैक के जीएम अजय कुमार की देखरेख में टेक्निकल बिड खोलने के बाद कमेटी टेंडर की जांच कर रही है। एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने दिसंबर तक तीसरे सप्ताह तक ठेका तय करने का टारगेट दिया है, जिसके आधार पर काम चल रहा है।2550 करोड़ की लागत से साढ़े चार साल में 8.6 किलोमीटर का अंडरग्राउंड ट्रैक पूरा करने का लक्ष्य है। जनप्रतिनिधियों ने अंडरग्राउंड ट्रेक के रूट को लेकर आपत्तियां ली थीं, अभी रूट बदलने का फैसला नहीं हुआ, इसलिए पुराने रूट के आधार पर ही टेंडर जारी हुआ है। जनवरी 2025 में कमर्शियल रन की तैयारी अफसरों के मुताबिक, फरवरी 2025 तक काम शुरू करा दिया जाएगा। सिंहस्थ 28 तक पूरा ट्रैक नहीं बन पाएगा, लेकिन एयरपोर्ट का अंडरग्राउंड स्टेशन पूरा कर दिया जाएगा। अभी यहां एलिवेटेड कॉरिडोर का काम अंतिम दौर में है। गांधीनगर से 5.8 किलोमीटर तक के हिस्से में जनवरी 2025 में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है। जून 2025 तक रेडिसन चौराहे तक मेट्रो शुरू हो जाएगी। इधर, मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 के पहले इंदौर से उज्जैन तक मेट्रो चलाने की घोषणा की है। इंदौर से उज्जैन मेट्रो: 11 हजार करोड़ लागत करीब 11 हजार करोड़ में इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो की डीपीआर अगले महीने बन जाएगी। अफसरों का मानना है कि अन्य ट्रैक सिंहस्थ 2028 तक बन जाएंगे, लेकिन अंडरग्राउंड ट्रैक का काम जारी रहेगा। टेंडर तय होते हैं तो एयरपोर्ट से अंडरग्राउंड ट्रैक का काम शुरू करेंगे ताकि, यहां सिंहस्थ के पहले काम खत्म हो जाए। सुपर कॉरिडोर-एमआर-10 का ट्रैक पहले से ही तैयार रहेगा। सिक्स लेन सड़क निर्माण में मेट्रो रूट का ध्यान इंदौर से उज्जैन के बीच डीपीआर अगले महीने बन जाएगी, करीब 11 हजार करोड़ का खर्च वर्तमान समय के हिसाब से अनुमानित है। अभी रोड एमपी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने इंदौर-उज्जैन रोड सिएस लेन का काम शुरू कर दिया है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एमपीआरडीसी के साथ बैठक कर प्रस्तावित मेट्रो रूट बता दिया है। दोनों एजेंसी मेट्रो रूट को ध्यान में रखकर सड़क का काम कर रही है ताकि आगे कोई दिक्कत न आए। 6 किलोमीटर हिस्से में जनवरी से कमर्शियल रन का दावा मेट्रो का पहला चरण साढ़े 32 किलोमीटर का है। गांधी नगर, सुपर कॉरिडोर, एमआर-10 होते हुए विजय नगर, रेडिसन से रोबोट चौराहा, बंगाली चौराहा, पलासिया, एमजी रोड होते हुए एयरपोर्ट तक बनना है। इसमें से 17.5 किमी के हिस्से पर मेट्रो का एलिवेटेड कॉरिडोर का काम चल रहा है। रोबोट चौराहा से आगे पलासिया तक एलिवेटेड और अंडरग्राउंड को लेकर पेंच है। इसीलिए मेट्रो कॉरपोरेशन एयरपोर्ट से पलासिया तक काम जल्द शुरू करने जा रहा है। अभी गांधी नगर से रोबोट चौराहा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का काम तेज गति से चल रहा है। जनवरी 2025 में सुपर कॉरिडोर पर गांधी नगर से टीसीएस चौराहा तक 6 किलोमीटर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होगा। मेट्रो कोच का सेफ्टी ट्रायल भी हो चुका है। 6 कंपनियां आगे आईं, इनमें तुर्की की कंपनी भी शामिल एयरपोर्ट से पलासिया तक अंडरग्राउंड ट्रैक के लिए 6 कंपनियां आगे आई हैं। इनमें तुर्की की कंस्ट्रक्शन कंपनी भी शामिल है। एफकन इन्फ्रा लिमिटेड, जे कुमार इंद्र प्रोजेक्ट लिमिटेड, एचसीसी लिमिटेड, गुलेरमॉक, वे ताहट एएस, एलएंडटी और आईटीडी ने काम करने में रुचि दिखाई है।     recent visitors 99

एक बार मुस्कान ने फिर रचा इतिहास, अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

अशोकनगर मध्यप्रदेश की बेटियां अक्सर देश-दुनिया में राज्य का नाम रोशन करती हैं। इनमें एक नाम मुस्कान रघुवंशी का भी है। अशोकनगर की मुस्कान रघुवंशी ने इस बार अपने नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज किया है। अपने साहस और संकल्प के दम पर इतिहास रचने वाली मुस्कान ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारों पर तिरंगा फहरा दिया है। एमपी और देश भर को गौरवान्वित करने वाली मुस्कान को बधाई देने वालों का तांता लग गया। खेलों के साथ- साथ युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और विकास के लिए हमेशा बढ़- चढ़कर कार्य करने वाले केन्द्रीय मंत्री और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की मदद से एक और प्रतिभा इन दिनों देश और दुनिया में मध्यप्रदेश का नाम रोशन कर रही है। अशोकनगर की बेटी मुस्कान रघुवंशी ने इस बार अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर तिरंगा लहराकर पूरी दुनिया में देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। मुस्कान इस दोहरी सफलता का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाली मध्यप्रदेश की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही बना चुकी हैं। इस अभियान को सफल बनाने में ‘मिशन पॉसिबल’ संस्था के नेतृत्वकर्ता नरेन्द्र यादव ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिनके मार्गदर्शन की बदौलत मुस्कान ने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी मुस्कान को उसकी सफलता के लिए बधाई दी है। इस संदर्भ की एक पोस्ट उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की है। इस पोस्ट पर मंत्री ने लिखा है कि ‘अशोकनगर की बेटी मुस्कान रघुवंशी ने अपनी साहस और संकल्प से एक और इतिहास रच दिया है। ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी कोज़िअस्को को फतह करने के बाद, अब अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर तिरंगा फहराकर उन्होंने प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है।’     अशोकनगर की बेटी मुस्कान रघुवंशी ने अपनी साहस और संकल्प से एक और इतिहास रच दिया है। ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी कोज़िअस्को को फतह करने के बाद, अब अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो पर तिरंगा फहराकर उन्होंने प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। मुस्कान ने अपनी दोहरी सफलता से प्रदेश की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही बनने का गौरव प्राप्त किया है। आपकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। हम आपके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर प्रगति की कामना करते हैं।’ एमपी की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही बता दें कि मुस्कान ने ये चुनौतीपूर्ण अभियान 23 नवंबर को शुरू किया था, जो 10 दिन में पूरा हो गया। इससे पहले मुस्कान ने ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट कोसियुस्को पर भी फतेह हासिल कर तिरंगा फहराया था। बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुस्कान रघुवंशी के सपनों को पंख दिए हैं और वही उनकी इस यात्रा में मददगार भी रहे। मुस्कान रघुवंशी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के महाना गांव की रहने वाली हैं। केवल 22 साल की मुस्कान एक साइकिलिस्ट और पर्वतारोही भी हैं। उन्होंने कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते हैं। सबसे कम उम्र की पर्वतारोही मुस्कान का दुनिया के सातों महाद्वीपों की यात्रा करने के सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करना चाहती हैं। recent visitors 151

महाकाल मंदिर के गेट नंबर 1 पर लगेगी लड्डू ATM मशीन, 24 घंटे भगवान महाकाल का प्रसाद खरीद सकेंगे भक्त

 उज्जैन सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में देश-विदेश से भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले भक्त 24 घंटे भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद खरीद सकेंगे। मंदिर समिति एक नंबर गेट के समीप लड्डू मशीन स्थापित कर रही है।दर्शनार्थी एटीएम की तरह बारकोड स्कैन कर मशीन से लड्डू प्रसाद खरीद सकते हैं। फिलहाल यह व्यवस्था प्रायोगिक तौर पर लगी हुई जा रही है और दर्शनार्थी सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक लड्डू प्रसाद खरीद सकेंगे। शुद्ध देसी घी से बने बेसन के लड्डुओं का प्रसाद     महाकाल मंदिर समिति द्वारा मंदिर के प्रसाद काउंटरों से महाकाल भोग प्रसाद के नाम से शुद्ध देसी घी से निर्मित बेसन के लड्डुओं का विक्रय किया जाता है। समिति 100, 200, 500 ग्राम व एक किलो के पैक में प्रसाद विक्रय करती है।     400 रुपये किलो में बिकने वाला प्रसाद अब एटीएम की तरह कार्य करने वाली मशीन के माध्यम से बेचे जाने की योजना है। मंदिर प्रशासन ने एक दानदाता के सहयोग से कोयंबटूर की कंपनी से इस मशीन का निर्माण कराया है।     करीब 5 दिन पहले निर्माण कंपनी ने मशीन को मंदिर कार्यालय पहुंचाया था। अब कंपनी के टेक्नीशियन मशीन को मंदिर के एक नंबर गेट के समीप स्थापित कर रहे हैं।     मंदिर प्रशासन के अनुसार एक-दो दिन में मशीन से लड्डू प्रसाद के विक्रय की शुरुआत हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रसाद की गुणवत्ता पर पहले से ध्यान दिया जा रहा है। नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पर महाप्रसादी महोत्सव इस बीच, उज्जैन से सटे खाचरौद में नगर के प्राचीन नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में दीपावली महापर्व के 28 दिन पश्चात शुक्रवार को मास शिवरात्रि के पावन अवसर पर महाप्रसादी महोत्सव संपन्न हुआ। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को विद्युत रोशनी एवं पुष्पमाला से सजाया गया था। दिनभर मंदिर परिसर में कई धार्मिक आयोजन एवं रात्रि में भजन संध्या हुई। मंदिर पुजारी नागेंद्र गिरी एवं धर्मेंद्र गिरी गोस्वामी ने बताया कि नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पर भगवान का महाप्रसादी महोत्सव संपन्न हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान का दर्शन पूजन कर भगवान को शीश नवाया। महोत्सव के दौरान भगवान का महादेव के रूप में आकर्षक शृंगार कर भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए। तत्पश्चात शाम 5 बजे भगवान की महाआरती की गई। इस अवसर पर महोत्सव पर बड़ी संख्या में भगवान की महाप्रसादी भक्तों ने ग्रहण की। recent visitors 49

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द दौड़ेगी पटरी पर, 110 किमी की स्पीड… 8 कोच… बैठ सकेंगे 2638 पैसेंजर…

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन लॉन्च करने की तैयारी के साथ एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह अत्याधुनिक ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशनों के बीच जल्द ही ट्रायल रन के लिए दौड़ेगी। इस हाइड्रोजन ट्रेन का डिजाइन रेलवे की शोध, डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा विकसित किया गया है। डिजाइन को दिसंबर 2021 में अंतिम रूप दिया गया था। इसके निर्माण पर काम तब से लगातार चल रहा है। इस ट्रेन का अंतिम ट्रायल अगले साल की पहली तिमाही में होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरडीएसओ के महानिदेशक उदय बोरवंकर ने कहा, ''आरडीएसओ लगातार नए और अभिनव प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करता है। हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग सड़क परिवहन में सफल रहा है। रेलवे में अभी तक इसका व्यापक उपयोग नहीं हो सका है। भारत का यह प्रयास टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि होगी।'' 8 डिब्बे और 2,638 यात्रियों की क्षमता इस ट्रेन में 8 यात्री डिब्बे होंगे, जिनमें एक बार में 2,638 यात्री यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन की अधिकतम गति 110 किमी/घंटा होगी। इसमें तीन डिब्बे हाइड्रोजन सिलेंडरों, ईंधन सेल कन्वर्टर्स, बैटरियों और एयर रिज़र्व के लिए होंगे। यह ट्रेन विशेष रूप से कम दूरी के सफर के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। वर्तमान में चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में ट्रेन का इंटीग्रेशन कार्य प्रगति पर है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के ईंधन सेल से उत्पन्न बिजली का उपयोग मोटर चलाने के लिए करती हैं। जर्मनी और चीन जैसे देशों ने रेल परिवहन में हाइड्रोजन ईंधन पर काम किया है, लेकिन अब तक केवल जर्मनी में एक सफल हाइड्रोजन ट्रेन परिचालित हो रही है। वहां ट्रेन में सिर्फ दो कोच हैं। पर्यावरण के लिए फिट है यह ट्रेन भारत की यह हाइड्रोजन ट्रेन न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसका लक्ष्य ग्रीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देना है। क्या होगा ट्रेन का नाम ट्रेन का नाम अभी तय नहीं हुआ है। हाल ही में आयोजित इंटरनेशनल इनोवेटिव रेल एक्सपो में इस ट्रेन के मॉडल को "नमो ग्रीन रेल" नाम के साथ प्रदर्शित किया गया था। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक नाम लॉन्च के समय तय किया जाएगा। ट्रेन की खूबियों को बताया लखनऊ में आरडीएसओ के अंतरराष्ट्रीय इनोवेटिव रेल एक्सपो में इस हाइड्रोजन ट्रेन के डिजाइन को प्रदर्शित किया गया है. इसके साथ ही इसकी खूबियों को भी बताया गया.पहली हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में आरडीएसओ के डायरेक्टर जेनरल उदय बोरवनकर ने बताया कि आरडीएसओ हमेशा नए और अभिनव काम पर ध्यान देती है. अब तक दुनिया भर में रोड ट्रांसपोर्ट में तो हाइड्रोजन फ्यूल प्रयोग हो रहा है पर रेलवे ट्रांसपोर्ट में कहीं बहुत सफल प्रयोग नहीं हो सका है.अब भारत इसको करेगा जो निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि होगी. यह सस्टेनेबल एनर्जी पर आधारित है. इंटीग्रेशन का चल रहा काम नमो ग्रीन रेल नाम इस मॉडल पर लिखा है लेकिन अधिकारियों के अनुसार लॉन्च होते समय इस ट्रेन का नाम रखा जाएगा. अभी हाइड्रोजन ट्रेन का कोई नाम नहीं रखा गया है. आरडीएसओ की ओर से तैयार इस हाइड्रोजन ट्रेन में 8 पैसेंजर कोच होंगे. 2638 यात्री एक बार में उसमें यात्रा कर पाएंगे. इसकी स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. इसके अलावा तीन कोच हाइड्रोजन सिलिंडर के लिए भी होंगे. इसी में इंटीग्रेटेड फ्यूल सेल कनवर्टर, बैट्री, एयर रिजरवॉयर्स (Air Reservoirs) भी होगा. इसे कम दूरी तक की यात्रा के लिए उपयुक्त माना जा सकता है. फिलहाल चेन्नई के इंटेग्रल कोच फैक्ट्री (ICF Chennai) में इसके इंटीग्रेशन का काम चल रहा है. सिर्फ जर्मनी में ही चल रही हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन पॉवर्ड ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन सेल्स से मिलने से बिजली बनती है, जिससे ट्रेन का मोटर चलता है. अब तक हाइड्रोजन फ्यूल पर जर्मनी, चीन जैसे देश काम कर चुके हैं लेकिन बड़े पैमाने पर कहीं भी ये प्रयोग सफल नहीं रहा है. सिर्फ जर्मनी में ही हाइड्रोजन ट्रेन दो बोगियों के साथ चल रही है. आरडीएसओ के डायरेक्टर जनरल उदय बोरवनकर कहते हैं कि ग्रीन एनर्जी पर अब बहुत ज़्यादा हमारा ध्यान है. ऐसे में इसपर काम होगा. आपको मालूम हो कि हाइड्रोजन ट्रेन, डीजल और अन्य जीवाश्म ईंधन से चलने वाली ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण को कम करने में सक्षम है. recent visitors 51

प्रयागराज महाकुंभ के लिए रेलवे ने कसी कमर, 40 करोड़ तीर्थयात्री आने का अनुमान, रेलवे ने बनाया फुलप्रूफ प्लान

 प्रयागराज भारतीय रेलवे ने अगले साल प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां शुरू कर दी हैं। रेलवे का अनुमान है कि इस मेगा इवेंट में करीब 40 करोड़ तीर्थयात्री हिस्सा लेंगे। यह आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। रेलवे इस दौरान 140 नियमित ट्रेनों के साथ 1,225 विशेष ट्रेनें भी चलाएगा। जिनमें से अधिकतर स्नान के मुख्य दिनों के लिए होंगी। तीर्थयात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था रेलवे ने अयोध्या और वाराणसी जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए प्रयागराज, प्रयाग, अयोध्या, वाराणसी, और रामबाग जैसे प्रमुख स्टेशनों को जोड़ने के लिए फास्ट रिंग मेमू सेवा शुरू करने की योजना बनाई है। चित्रकूट जाने वालों के लिए एक अलग रिंग रेल सेवा चलाई जाएगी, जो झांसी, बांदा, चित्रकूट, मानिकपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, गोविंदपुरी और उरई को कवर करेगी। ट्रेनों की संख्या 1,225 विशेष ट्रेनों में से 825 ट्रेनें छोटी दूरी की यात्रा के लिए और 400 लंबी दूरी के लिए होंगी। यह 2019 के अर्धकुंभ के मुकाबले 177% ज्यादा है, जब 533 छोटी दूरी की और 161 लंबी दूरी की ट्रेनें चलाई गई थीं। तीर्थयात्रियों की मदद के लिए रेलवे ने 1800-4199-139 टोल-फ्री नंबर जारी किया है। इसके अलावा, "कुंभ 2025" नाम का मोबाइल ऐप तैयार किया जा रहा है, जो 24×7 कॉल सेंटर से जुड़ा होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश रेलवे इस आयोजन के लिए 933.62 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसमें 494.90 करोड़ रुपये यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने और 438.72 करोड़ रुपये सड़क ओवरब्रिज और अंडरब्रिज के निर्माण के लिए रखे गए हैं। प्रयागराज जंक्शन पर 4,000 लोगों की क्षमता वाला एक अतिरिक्त यात्री शेड तैयार किया जा रहा है। टिकटिंग और सुरक्षा रेलवे मेला क्षेत्र सहित सभी स्टेशनों पर 542 टिकट काउंटर लगाएगा, जो रोजाना करीब 9.76 लाख टिकट जारी कर सकेंगे। सुरक्षा के लिए 651 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनमें से 100 कैमरे एआई-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम से लैस होंगे। 900 करोड़ से ज्यादा खर्च कर रहा रेलवे प्रवक्ता ने कहा कि रेलवे 933.62 करोड़ रुपए की बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है, जिसमें यात्री सुविधाओं में वृद्धि के लिए 494.90 करोड़ रुपए और सड़क ओवरब्रिज और अंडरब्रिज के निर्माण के लिए 438.72 करोड़ शामिल हैं. नए स्टेशन भवन और सीसीटीवी व्यवस्था सहित 79 यात्री सुविधाओं पर काम चल रहा है. एक अतिरिक्त यात्री घेरा, जो 4,000 यात्रियों को समायोजित कर सकता है, प्रयागराज जंक्शन पर स्थापित किया जाएगा. ऐसे चार बाड़े पहले से ही स्टेशन पर उपलब्ध हैं. 542 टिकटिंग प्वाइंट उपलब्ध सभी स्टेशनों के साथ-साथ मेला क्षेत्र में कुल 542 टिकटिंग प्वाइंट उपलब्ध कराए गए हैं. प्रवक्ता ने कहा कि ये काउंटर प्रतिदिन 9.76 लाख टिकट वितरित कर सकते हैं. रेलवे सुरक्षा बल 651 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगा रहा है. इनमें से लगभग 100 कैमरों में उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए एआई-बेस्ड फेस रिक्ग्निशन सिस्टम होगा.   recent visitors 60