Tuesday, July 7, 2026 12:48 am

गीता जयंती विशेष: भगवद गीता का क्या महत्व है?

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर गीता शास्त्रों का सार है, इसलिए इसे उपनिषद भी कहा गया है। उपनिषद का अर्थ है वह जो पास बैठकर सुनाया जाए। जब तक कहने वाला और सुनने वाला दिल से पास नहीं आते, तब तक उनके बीच बहुत दूरी रहती है। कहने वाला कुछ कहता है, और सुनने वाला उसमें से अपने ही मतलब की बात निकाल लेता है। पहले पास आकर बैठें – अर्जुन बनें। अर्जुन का मतलब है – जिसमें ज्ञान की पिपासा हो, जो कुछ सीखना चाहता हो, जानना चाहता हो और मुक्त होना चाहता हो। जब आप अर्जुन बनेंगे, तभी कृष्ण मिलेंगे।   हम सभी का जीवन प्रश्न से शुरू होता है। तीन साल की आयु से बच्चे प्रश्न पूछना शुरू कर देते हैं। कहते हैं कि बिना पूछे जाने पर कुछ बोलना बुद्धिमत्ता का लक्षण नहीं है। इसी तरह, महाभारत की अभिन्न अंग भगवद गीता भी प्रश्न से शुरू होती है। युद्धभूमि में जब अर्जुन पूरी तरह से विषादग्रस्त हो चुका था और चारों ओर से अंधकार में घिरा हुआ था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसे गीता का ज्ञान दिया। इसीलिए आज के समय में, जब चारों ओर दुःख, पीड़ा और संघर्ष है, तब भगवद गीता और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। एक बार महाभारत के युद्ध के बाद अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा, "हे कृष्ण! युद्ध के समय बहुत शोर-गुल था, मैं दुखी था और उस युद्ध के माहौल में आपने गीता सुनाई, लेकिन उस समय मुझे नहीं पता था कि मैं कितना समझ पाया। अब सब कुछ शांत है, सब लोग प्रसन्न हैं, और मुझे गीता सुनने का मन है। तो हे कृष्ण! आप अभी गीता सुनाइये।" भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया, "महाभारत के समय मुझसे गीता का जन्म हुआ था। उस समय मैंने जो भी कहा, मैं अब उसकी पुनरुक्ति नहीं कर सकता।" गीता को इतना महत्व दिया गया है; जैसे किसी संत का जन्म होता है, वैसे ही गीता का भी जन्म हुआ। यही कारण है कि गीता जयंती मनाई जाती है। गीता परमात्मा की वाणी है, पूर्णब्रह्म की वाणी है। गीता को योग की विद्या भी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद गीता में योग के तीनों मार्गों – भक्ति, कर्म और ज्ञान – को मुक्ति का साधन बताया है। आजकल हम योग को केवल शारीरिक व्यायाम समझते हैं, लेकिन योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है। इसी तरह, प्राणायाम भी केवल सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है। व्यायाम और प्राणायाम दोनों जीवन के परम उद्देश्य की ओर जाने के मार्ग हैं। ये मानसिक तनाव को दूर करने और एकाग्रता बढ़ाने के साधन हैं। भगवान की वाणी – गीता – पाँच हजार साल से हमारे देश में है। यदि आप अमेरिका या अन्य देशों में जाएं और बाइबिल के बारे में पूछें, तो लोग कहेंगे कि वे उसे पढ़ चुके हैं। लेकिन हमारे देश में जब हम लोगों से पूछते हैं, "क्या आपने गीता पढ़ी है?" तो बहुत से लोग चुप हो जाते हैं। जीवन से दुःख को मिटाने के लिए ज्ञान से बढ़कर कुछ भी नहीं। इसलिए गीता पढ़ें और इसे सिर्फ एक बार पढ़ना काफी नहीं है, बार-बार इसका अध्ययन करें। recent visitors 36

अग्निवीर भर्ती में अभ्यर्थी दौड़ के बाद मैदान में गिरकर हुआ बेहोश, तत्काल मुहैय्या कराया गया समुचित उपचार, लेकिन इलाज के दौरान हुई मृत्यु

डॉक्टरों और परिजनों ने बताया अभ्यर्थी सिकल सेल से था ग्रसित पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के साथ शव भेजा गया गृहग्राम, जिला प्रशासन के अधिकारी भी गए हैं साथ अंतिम संस्कार के लिए दी गई सहायता राशि, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से प्रदान किया जाएगा 10 लाख रायगढ़, बोईरदादर स्टेडियम में जारी अग्निवीर भर्ती रैली के संबंध में, सेना के आयोजको के माध्यम से प्राप्त प्राथमिक जानकारी अनुसार, 09 दिसंबर 2024 सोमवार को मनोज कुमार साहू, पिता श्री अनिल कुमार साहू, उम्र 20 वर्ष, पता-ग्राम-खोरपा, ब्लॉक / तहसील – अभनपुर, जिला-रायपुर (छ.ग.) द्वारा, आर्मी भर्ती केन्द्र स्टेडियम रायगढ़ में प्रथम स्टेज 1600 मी. की दौड़ सफलता पूर्वक पूर्ण किया। प्रथम चरण पूर्ण करने के तत्काल पश्चात् अगले चरण में बायोमेट्रिक लगाने से पहले अचानक, मैदान में गिर गया।      अभ्यर्थी को तत्काल स्टेडियम में मौजूद जिला स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल टीम के द्वारा मौके पर ही जांच किया गया। जिसमें मौके पर मौजुद चिकित्सको द्वारा प्रारंभिक जांच पश्चात् पाया गया कि अभ्यर्थी को सांस लेने में काफी दिक्क्त हो रही थी। अभ्यर्थी का SPO2 ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल लगातार कम हो रहा था, जिसके कारण अभ्यर्थी सचेत परंतु डिसओरीयेंटेड पाया गया। उसे तत्काल मेडिकल ऑक्सीजन प्रदाय के साथ प्राथमिक चिकित्सा प्रदाय करते हुए एम्बुलेंस के माध्यम से जिला चिकित्सालय, रायगढ़ रिफर किया गया। जहां अभ्यर्थी बेहोश अवस्था में लाया गया जिसे इन्ट्यूबेट एवं स्टेबल करते हुए हायर सेंटर मेडिकल कॉलेज, रायगढ़ भेजा गया। जहाँ रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के विशषज्ञो की टीम के द्वारा समुचित ईलाज किया गया। परंतु अभ्यर्थी की स्थिति अति गंभीर होने के कारण दिनांक 09 दिसंबर 2024 को रात्रि 11:35 बजे मृत्यु हो गई। परिजनो के कथनानुसार एवं चिकित्सको के जांच अनुसार यह पाया गया कि, अभ्यर्थी मनोज कुमाार साहू पूर्व से सिकलसेल बीमारी से ग्रसित था।      दिनांक 10 दिसंबर 2024 को प्रातःकाल में परिजनो की उपस्थिति में मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सको की टीम द्वारा पोस्टमार्टम किया गया, जिसके पश्चात् परिजन को शव सुपुर्द करके तहसीलदार एवं सीईओ जनपद के साथ गृह ग्राम खोरपा, तह-अभनपुर जिला रायपुर भेजा गया। जिला प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। एवं मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से भी 10 लाख रूपयें के आर्थिक सहयोग प्रदान किया जायेगा। recent visitors 26

गीता जयंती विशेष: सनातन संस्कृति की ध्वजा विश्व में फहरा रही गीता प्रेस

विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन है गीता प्रेस हितानंद  शर्मा धर्म स्थापना के लिए मानव इतिहास में हुए सबसे भीषण महायुद्ध के बीच भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान आज भी अमृत रूप में प्रवाहित हो रहा है। श्रीमद्भगवत गीता केवल अर्जुन के लिए नहीं, सनातन समाज के लिए नहीं बल्कि विश्व मानवता के शुभ के लिए ईश्वरीय संदेश है। गीता के माध्यम से व्‍यक्‍त‍ि स्‍वयं को जान सकता है और ईश्वरीय सत्ता का अनुभव भी कर सकता है। गीता जयंती मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह वही दिन है जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। गीता के ईश्वरीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य ‘गीता प्रेस गोरखपुर’ द्वारा पिछले 102 वर्षो से बिना रुके पूरे श्रद्धाभाव से किया जा रहा है। भारत के घर-घर में श्रीमद्भगवत गीता और रामायण की प्रति पहुंचाने का श्रेय गीता प्रेस को ही जाता है। गीता प्रेस अब तक श्रीमद्भगवत गीता की 16 करोड़ 21 लाख प्रतियां प्रकाशित कर श्रद्धालु पाठकों तक पहुंचा चुका है। अब तक  41 करोड़ 71 लाख पुस्तकें छापकर विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन संस्थान होने के बाद भी आश्चर्य की बात यह है कि गीता प्रेस न तो किसी से चंदा लेता है और न ही अपने प्रकाशनों में विज्ञापन ही स्वीकार करता है। जब वर्ष 2021 में गीता प्रेस को उसके उल्लेखनीय कार्यों के लिए भारत सरकार का गरिमामय ‘महात्मा गांधी शांति पुरस्कार’ प्रदान किया गया तो संस्थान ने पुरस्कार को पूरे सम्मान के साथ ग्रहण किया, पर इसके साथ प्रदान की जाने वाली एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि सरकार को वापस लौटा दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी इस संस्थान के दर्शन के लिए आए थे। लागत मूल्य से 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर बहुमूल्य  पुस्तकें पाठकों तक पहुंचाने वाला गीता प्रेस वास्तव में सामाजिक-धार्मिक जागरण का एक आंदोलन ही है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की पावन धरा उत्तरप्रदेश का प्रवास तो पूर्व में भी होता ही रहा है किन्तु इसी वर्ष संयोग से संगठन के कार्य से मुझे गोरक्ष प्रांत यानी गोरखपुर सहित आसपास के क्षेत्रों का प्रभार सौंपा गया। ऐसे में गोरखपुर में गोरक्ष पीठ सहित एक महत्वतपूर्ण तीर्थ गीता प्रेस के दर्शन का सौभाग्य भी मिला। प्रकाशन का केंद्रीय कार्यालय गोरखपुर में ही है। हिन्दू  धर्म, अध्यात्म, दर्शन सहित मानव कल्याण के अनेक विषयों पर पुस्तकें प्रकाशित कर चुका गीता प्रेस आधुनिक समय का तीर्थ ही है। राजा भागीरथ के महान तप से पुण्य प्रवाहिनी मां गंगा का धरती पर अवतरण संभव हो सका था। इक्ष्वाकु वंश के राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने का प्रण पूर्ण किया था। इसी प्रकार गीता प्रेस के संस्थापक, ब्रह्मलीन श्री जयदयालजी गोयंदका के ऐसे ही महान तप का सुफल यह प्रकाशन है। वैसे तप तुलना का विषय नहीं है किन्तु  धर्म, संस्कृति, अध्यात्म, भक्ति एवं मानवता के उद्धार के लिए गोयंदका जी द्वारा स्थापित गीता प्रेस आज भी पुण्य प्रवाहमयी ज्ञान सरिता है। गीता प्रेस के आदि संपादक श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार ‘भाईजी’ के उल्लेख के बिना गीता प्रेस की चर्चा पूर्ण नहीं होगी।  भाईजी वीर सावरकर के निकट के क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। अपने मौसेरे भाई जयदयालजी के अगाध गीता प्रेम एवं ज्ञान को देखते हुए भाईजी ने श्रीमद्भगवत गीता को लागत मूल्य से भी कम में जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस संकल्प की पूर्ति के लिए अपने एक प्रकाशन की आवश्यकता थी जो गोरखपुर में प्रारंभ हुआ। प्रचार-प्रसार से दूर एक अकिंचन सेवक और निष्काम कर्मयोगी की तरह भाईजी ने सनातन संस्कृति की मान्यताओं को घर-घर तक पहुँचाने में जो अतुलनीय योगदान दिया है, इतिहास में इसका उदाहरण मिलना कठिन है।   गीता  प्रेस  का मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म के सिद्धांतों को गीता, रामायण, उपनिषद, पुराणों, प्रख्यात संतों के प्रवचन एवं चरित्र-निर्माण की अन्य पुस्तकें-पत्रिकाएं प्रकाशित कर इन्हें लागत मूल्य से भी कम कीमत में समाज में पहुंचाना है। गीता प्रेस मानव जीवन के उत्थायन और सभी की भलाई के लिए प्रयासरत है। इसका उद्देश्य शांति, आनंद और  मानव जाति के अंतिम उत्थान के लिए गीता में प्रतिपादित जीवन जीने की कला को बढ़ावा देना है। संस्थान का संचालन कोलकाता के गोविंद भवन द्वारा किया जाता है। इसका प्रबंधन एक गवर्निंग काउंसिल (ट्रस्ट बोर्ड) करती है। गीता प्रेस में दिन की शुरुआत सुबह की प्रार्थना से होती है। एक व्यक्ति दिनभर घूम-घूम कर प्रत्येक कार्यकर्ता को कई बार भगवान का नाम स्‍मरण कराता है। गीता प्रेस के अभिलेखागार में भगवद् गीता की 100 से अधिक व्याख्याओं सहित 3,500 से अधिक पांडुलिपियां रखी हैं। गीता प्रेस के मासिक पत्रिका ग्रंथ ‘कल्याण’ के नए संस्करण के साथ 3000 से अधिक ऑनलाइन संग्रह उपलब्ध हैं। 4 मई 1923 को गीता प्रेस की स्थापना की गई थी तब पुस्तकें छापने का काम बोस्टन कंपनी की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू किया गया था। पैरों से चलाई जाने वाली यह मशीन 500 रुपए में अमेरिका से मंगवाई गई थी। अब संस्थान आधुनिक संसाधनों का सदुपयोग करता है इसीलिए मैनुअल और मशीन दोनों माध्यमो से प्रकाशन का काम होता है। गीता प्रेस इन अर्थों में भी विश्व का अनूठा प्रकाशन है क्योंकि यह अपनी पुस्तकों में मात्रात्मक, व्याकरणिक, शाब्दिक अथवा तथ्यात्मक त्रुटि बताने वाले को पुरस्कृत करता है हालाँकि पुस्तकों में ऐसी त्रुटियां मिलती नहीं हैं। बीते वर्षों में मीडिया में इस प्रकार के समाचार आए थे कि गीता प्रेस आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बंद होने की कगार पर है किन्तु संस्थान के भ्रमण में यह भी जानने मिला कि स्थिति ऐसी नहीं है। समाज के सहयोग से गीता प्रेस 300 करोड़ रुपए वार्षिक टर्न ओवर वाला समृद्ध संस्थान है और प्रति वर्ष 17 भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित कर रहा है। संस्थान ने अपनी पुस्तकें इंटरनेट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध कराई हैं जहां से कोई भी इन्हें  डाउनलोड कर सकता है और यह पूरी तरह निशुल्क है। संस्थान का कार्यालय भी दर्शनीय है। इसके भव्य प्रवेश द्वार के स्तंभ एलोरा के प्राचीन गुफा-मंदिर के स्तंभों की शैली में निर्मित हैं। वहीं अर्जुन के रथ के सारथी बन श्रीकृष्ण गीता का उपदेश … Read more

प्रयागराज महाकुंभ में बिलासपुर जोन से यात्री सुविधा के लिए बिलासपुर रायपुर तथा दुर्गा प्रमुख स्टेशनों से स्पेशल ट्रेन चलाएगा

महाकुंभ में भक्तों को ट्रेन बिलासपुर से मिले,पूर्व विधायक ने रेल महाप्रबंधक से मिलकर रखी माँग बिलासपुर रेलवे जोन के मुख्य स्टेशनों से महाकुंभ के लिए जल्द ही स्पेशल ट्रेन चलेगी प्रयागराज महाकुंभ में बिलासपुर जोन से यात्री सुविधा के लिए बिलासपुर रायपुर तथा दुर्गा प्रमुख स्टेशनों से स्पेशल ट्रेन चलाएगा रेल महाप्रबंधक ने शीघ्र करेंगे दिया आश्वासन कुलियों की समस्याओं को लेकर पूर्व विधायक ने रेल महाप्रबंधक से की चर्चा,कुलियों की स्वास्थ्य सेवा,रोजी और बच्चों की पढ़ाई और यूनिफार्म की समस्या प्रमुख थी बिलासपुर बिलासपुर रेलवे जोन के मुख्य स्टेशनों से महाकुंभ के लिए जल्द ही स्पेशल ट्रेन चलेगी । आज पूर्व विधायक शैलेश पांडे की मांग पर रेलवे जोन महाप्रबंधक नीनु इटियेरा ने कहां है कि प्रयागराज में जो महाकुंभ होने वाला है उसमें बिलासपुर रेलवे जोन से यात्री सुविधा के लिए बिलासपुर रायपुर तथा दुर्गा प्रमुख स्टेशनों से स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, इसके लिए जल्द ही रेलवे बोर्ड से नोटिफिकेशन जारी होने वाला है। जनवरी माह से प्रयागराज में महाकुंभ शुरू होने जा रहा है उसके पहले ही छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए महाकुंभ में स्नान करने तथा यात्री सुविधा को लेकर पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने आज दक्षिण पूर्वी मध्य रेलवे जोन महा प्रबंधक नीनु इटियेरा से मुलाकात की और महाकुंभ के लिए स्पेशल ट्रेन की मांग रखी । अब बिलासपुर जून के अंतर्गत बिलासपुर मुख्य स्टेशन,  सहित रायपुर, दुर्ग ,छत्तीसगढ़ के लगभग सभी प्रमुख स्टेशनों से महाकुंभ स्पेशल ट्रेन की सुविधा लोगों कोमिलेगी। इससे कटनी मार्ग में गौरेला पेंड्रा मरवाही के भी श्रद्धालुओं को महाकुंभ जाने के लिए सीधे यात्री सुविधा मिलेगी।  पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने जोन महाप्रबंधक के प्रति आभार जताया और कहा है कि  प्रयागराज में महाकुंभ जो जनवरी माह में शुरू होने जा रहा है यहां के लोगों की आस्था है और यात्री सुविधा का लाभ यहां के लोगों को मिले इसके लिए ज़ोन महाप्रबंधक के द्वारा रेलवे बोर्ड के माध्यम से प्रयागराज के लिए स्पेशल ट्रेन चलाकर अच्छी पहल की जा रही है। पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने यह भी कहा है कि उनके कार्यकाल में बिलासपुर जोन में यात्री सुविधा का विस्तार हो रहा है और आने वाले समय में यात्री सुविधा का लाभ बिलासपुर के लोगों को मिलेगा ।पूर्व विधायक ने भरोसा दिलाया है कि नए साल में बिलासपुर के लोग जो महाकुंभ में स्नान करने जाएंगे स्पेशल ट्रेन चलने से उन्हें लाभ मिलेगा। वे खुद महाकुंभ में जाने की तैयारी कर रहे हैं। आज जोन महाप्रबंधक से पूर्व विधायक ने यात्री सुविधा विस्तार को लेकर,कई मुद्दों पर चर्चा की। पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने आज कुलियों की समस्याओं को लेकर ज़ोन महाप्रबंधक नीनु इटियेरा से मुलाकात की। शैलेश पांडे ने महाप्रबंधक को बताया कि बिलासपुर रेलवे स्टेशन तथा उसलापुर रेलवे स्टेशन में काम करने वाली कुलियों को रेलवे अस्पताल में चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। रेलवे स्कूल में उनके बच्चों को  प्रवेश नहीं मिल रहा है ‌ । यहां के लगभग 200  कुलियों को वर्दी भी प्राप्त नहीं हो रही है। कुलियो के लिए कॉमन रूम भी उपलब्ध कराया जाए। बिलासपुर रेलवे स्टेशन तथा उसलापुर में 200 कुली  काम कर रहे हैं यह सभी गरीब परिवार से हैं।  रेलवे महाप्रबंधक मीनू इटियारा ने पूर्व विधायक शैलेश पांडे के द्वारा कुलियों के संदर्भ में लाई गई समस्याओं को गंभीरता से लिया है। और जल्द ही कुलियों की समस्याओं का समाधान जो महाप्रबंधक के द्वारा किया जाएगा। । पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने जोन महाप्रबंधक को बताया किबिलासपुर रेलवे जोन मुख्यालय के स्टेशन का सौंदरीकरण किया जा रहा है जिसमें कुलियों के लिए एक रूम की सुविधा दी जाये। कुलियों को साल में तीन बार वर्दी उपलब्ध कराई जाए। उनके परिवार को रेलवे अस्पताल में चिकित्सा सुविधा तथा रेलवे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई का प्रबंध रेलवे के द्वारा किए जाने की मांग पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने महाप्रबंधक के समक्ष रखी है। जोन महाप्रबंधक नीनु इटियेरा ने पूर्व विधायक शैलेश पांडे से कहा है कि   कुलियों की समस्याओं को लेकर जल्द में वे निर्णयक लेगी ‌ कुलियों को समय पर वर्दी मिलनी चाहिए और कुलियों के बच्चों के लिए रेलवे स्कूल तथा स्वामी आत्मानंद स्कूल में प्रवेश के लिए हुए पहल करेंगे।  साथ ही कुलियों के परिवार को रेलवे अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पहल करेंगे। रेलवे कुली कल्याण समिति के सदस्यों से जल्द ही बातचीत होगी। महाप्रबंधक नहीं अभी कहां है कि कुली हमारे रेलवे परिवार के सदस्यहैं। उनके बच्चों को चिकित्सा सुविधा एवं शिक्षा का लाभ मिलना चाहिए।  दक्षिण पूर्वी मध्य रेलवे कुली कल्याण समिति के  अध्यक्ष सुभाष कुमार यादव ,अनिल कश्यप, अनुपा यादव,  जितेंद्र भारद्वाज, राजकुमार मनहर, नवरंगी जयकुमार, मुकेश कुमार बंजारे,विक्रम ध्रुव,रामचरण वस्त्रकर,  रामा राव, पूर्व विधायक शैलेश पांडे से मिलकर समस्या रखी थी और आज पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे महाप्रबंधक नीनु इटियेरा से मुलाकात कर बिलासपुर रेलवे स्टेशन तथा उसलापुर के 200 से अधिक कार्यरतकुलियों की समस्या रखी। recent visitors 43

मेला देखकर लौटते समय हादसे, छत्तीसगढ़-बालोद में नेशनल हाइवे पर दो एक्सीडेंट में तीन की मौत और कई घायल

बालोद. बालोद जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-30 पर दो अलग-अलग भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। पहला हादसा मरकाटोला घाट के पास हुआ, जहां दो लोगों की मौत हो गई। वहीं, दूसरा हादसा बालोद गहन के समीप हुआ, जहां एक व्यक्ति की मौत हो गई और दूसरा हादसा ऑटो सवार लोगों के साथ हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर थाने की टीम पहुंची हुई है और वनांचल क्षेत्र होने के कारण पुलिस से संपर्क नहीं हो पा रहा है। पहले हादसे में मृत दोनों युवकों कांकेर जिले के बताए जा रहे हैं, जिसमें एक गोल कुम्हड़ा और दूसरा दुधवा का रहने वाला है। दोनों बालोद वीर मेला देख लौट रहे थे, जहां रास्ते में यह घटना हुई बोलोरो में सवार लोगों को भी चोटें आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-30 पर ग्राम कर्रेझर के मैदान में तीन दिवसीय विराट वीर मेले का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि पुलिस द्वारा रूट डायवर्ट किया गया है। बावजूद इसके यहां पर हादसों में कमी नहीं आ रही है। यहां पर नेटवर्क की भी काफी समस्या है। इस आयोजन के दूसरे दिन यानी आज एक घंटे के भीतर दो हादसे की बात सामने आ रही है। दोनों अलग-अलग हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे में मृतकों की पहचान देवराज कोड़ोपी (23) पुत्र छेदीलाल निवासी ग्राम धनोरा, दुधावा और टिकेश्वर मंडावी (24) पिता खिलेश मंडावी के रूप में हुई है। दूसरा हादसा, एक की मौत नेशनल हाइवे 30 पर एक और घटना हुई है। इस हादसे में एक की मौत हो गया है। जानकरी के मुताबिक, नेशनल हाइवे में पुरुर थाना क्षेत्र के साहू ढाबा के आगे मोटरसाइकिल और पिकअप वाहन की टक्कर के बाद में टक्कर के बाद ऑटो की भी मोटरसाइकिल से टकरा गया। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए। सभी लोग राजा राव पठार मेला देखकर लौट रहे थे। recent visitors 79

छत्तीसगढ़ में एम परिवहन एप का नया वर्जन लागू, सड़क पर फर्राटे भरने वाले वाहन चालकों की अब खैर नहीं

रायपुर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर सड़क पर फर्राटे भरने वाले वाहन चालकों की अब खैर नहीं। आम नागरिक अब ऐसे चालकों का फोटो या वीडियो बनाकर ट्रैफिक पुलिस के एम परिवहन एप पर अपलोड कर पुलिस की मदद कर सकेंगे। पुलिस इसके आधार पर लापरवाह चालकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। दरअसल, पुलिस का एम परिवहन एप का नया वर्जन लागू हो चुका है। सोमवार को ‘ट्रैफिक प्रहरी’पोस्टर का एसएसपी संतोष सिंह ने विमोचन कर इस एप का शुभारंभ किया। एनआईसी द्वारा तैयार एम परिवहन एप का नया वर्जन केरल और ओडिशा के बाद अब छत्तीसगढ़ में लागू किया गया है। इस एप के सिटिजन सेंटिनल (ट्रैफिक पहरी) पर अब कोई भी आम नागरिक बिना हेलमेट दो पहिया वाहन चलाने वाले, तीन सवारी, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने वालों, आम सड़क, नो पार्किंग जोन में पार्क वाहन, वाहन में गलत तरीके से नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने वालो का फोटो-वीडियो बनाकर रिपोर्ट कर सकता है। ट्रैफिक पुलिस तत्काल ऐसे वाहन चालक का ई-चालान बनाकर मोबाइल नंबर या वाहन चालक के पते पर भेज कर वैधानिक कार्रवाई करेगी। एसएसपी संतोष सिंह ने बताया कि ट्रैफिक प्रहरी बनकर कोई भी आम नागरिक यातायात नियमों का पालन न करने वाले वाहन चालको का फोटो, वीडियो एप के जरिए उपलब्ध कराकर पुलिस की मदद कर सकता है। फोटो, वीडियों भेजने वाले का नाम, पता गुप्त रखा जाएगा। यातायात पुलिस ने रायपुर के आम नागरिकों के अपील की है कि वे सभी ट्रैफिक नियमों का पालन करें। साथ ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की फोटो खींचकर या वीडियो बनाकर इस एप पर शेयर करें, ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अधिक से अधिक लोग ऐप करें इस्तेमाल ट्रैफिक पुलिस ने अधिक से अधिक लोगों को इस ऐप का प्रयोग करने और दूसरे वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करें। पोस्टर विमोचन और एप के शुभारंभ मौके पर एएसपी ग्रामीण कीर्तन राठौर, एएसपी ट्रैफिक डॉ. अनुराग झा, डीएसपी ट्रैफिक सतीश सिंह ठाकुर, गुरजीत सिंह और सुशांतो बनर्जी, प्रधान आरक्षक कमलेश वर्मा, शहदेव वर्मा आदि मौजूद थे। recent visitors 23

स्कूल शिक्षा विभाग की नई कवायद 2025-26 सत्र : स्टूडेंट को पढ़ाया जाएगा यातायात के नियमों का पाठ, शिक्षा मंत्री

भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ रहे हैं सड़क दुर्घटना के मामलों के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नई कवायद शुरू की है। जिसमें अब स्कूली छात्रों को यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा। इस कवायद को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बड़े होने पर कोई चीज़ सीखने से अच्छा है, बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से बच्चों को सीख दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब स्कूली विद्यार्थियों को यातायात का पाठ पढ़ाएगी। इसकी शुरुआत आगामी शिक्षा सत्र 2025-26 से होगी। स्कूल शिक्षा विभाग की इस कवायद से बच्चों को यातायात के नियमों के बारे में सही से जानकारी मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि, बड़े होने पर कोई चीज सीखने से अच्छा है बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से बच्चों को सीख दी जाए। बाल मन के समय से ही अगर कोई बात सिखाई जाए तो बेहतर रूप से वह समझ आती है। उन्होंने कब कि, यातायात के नियमों का पालन कैसे होता है और कैसे नियमों का उल्लंघन होता है,इन सभी बातों को बच्चों को सिखाना एक अच्छी बात है। नई शिक्षा नीति भी यही कहती है कि संस्कृति बाल मन में ही बच्चों को कुछ सिखाया जाए, तो वह बिना किसी दबाव के इन सब चीजों को सीख जाते हैं। recent visitors 264